आलेख

प्रकृति ही देगी प्लास्टिक का हल

  "आदमी भी क्या अनोखा जीव है, उलझनें अपनी बनाकर आप ही फंसता है, फिर बेचैन हो जगता है और ना ही सोता है।"  आज जब पूरे विश्व में प्लास्टिक के प्रबंधन को लेकर मंथन चरम पर है तो रामधारी सिंह दिनकर जी की ये पंक्तियाँ बरबस ही याद आ जा..

राजनीति से ऊपर उठकर वीरों के सम्मान का खुलकर स्वागत करने की आवश्यकता

   इंद्रभूषण कुमार, युवा पत्रकार      महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए जारी घोषणापत्र में बीजेपी ने वीर सावरकर को भारत रत्न दिलाने का वादा किया है। इस घोषणा के बाद ही देश में सावरकर को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। एक पक्ष इसका स्वागत कर रहा है तो दूसरा पक्ष इसका विरोध कर रहा है। सावरकर को लेकर राजनीतिक दृष्टि से अपने - अपने अलग मत हो सकते हैं, अलग धारणाएं हो सकती हैं। लेकिन सिर्फ वैचारिक मतभेद या राजनीतिक लाभ - हानि के आधार पर सावरकर की देशभक्ति, समर्पण, त्याग और असाधारण ..

 देश में तेज़ी से बढ़ रहा है ऑनलाइन व्यापार

      - प्रह्लाद सबनानी    हाल ही में ऑनलाइन बिक्री के जो आँकड़े आए हैं उन्हें काफ़ी अहमियत दी जा रही है। हमारे देश में सामानयतः त्योहारी मौसम में बाज़ार में रौनक़ बढ़ जाती है। देश में दो मुख्य ई-कामर्स कम्पनियों ने नवरात्री ..

वारिसों की नाफरमानी के बाद भी जेपी की वैचारिकी खारिज नही हुई है

    (डॉ अजय खेमरिया)      देश ने अपनी  आजादी के स्वर्णिम आंदोलन के  बाद जिस महान नेता को लोकनायक के रूप में स्वीकार किया उस जयप्रकाश नारायण यानी जेपी के बिना आजाद भारत का कोई भी राजनीतिक विमर्श आज पूर्ण नही होता है।समकालीन राजनीति में नेतृत्व करने वाली पूरी पीढ़ी वस्तुतः जेपी की छतरी से निकलकर ही स्थापित हुई है ,जो आज पक्ष विपक्ष की भूमिकाओं में है।जेपी के महान व्यक्तित्व को लोग कैसे स्मरण में रखना चाहेंगे यह निर्धारित करने की जबाबदेही असल मे उनके राजनीतिक चेलों ..

जेपी और नानाजीः दूसरी आजादी के योद्धा-जयराम शुक्ल

अक्टूबर का महीना बड़े महत्व का है। पावन,मनभावन और आराधन का। भगवान मुहूर्त देखकर ही विभूतियों को धरती पर भेजता है। 2 अक्टूबर को गांधीजी, शास्त्रीजी की जयंती थी। 11अक्टूबर को जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख की जयंती है, अगले दिन ही डा.राममनोहर लोहिया का ज..

भारत का विश्व को संदेश

  दिनांक 27 सितम्बर 2019 को अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी के सम्बोधन पर आधारित।    - प्रह्लाद सबनानी     यह सत्र इसलिए भी विशेष है कि पूरा विश्व महात्मा गांध..

विदेशी निवेशकों के लिए बहुत कुछ है भारत में

    दिनांक 25 सितम्बर 2019 को न्यूयॉर्क में ब्लूम्बर्ग वैश्विक व्यापार फ़ोरम 2019 में भारत के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण पर आधारित।   - प्रह्लाद सबनानी     माननीय प्रधान मंत्री महोदय ने अपन..

संघ में छिपे हुए गांधी को समझे बिना मोदी से कैसे लड़ेगा विपक्ष?

    - डॉ अजय खेमरिया        हकीकत यह है कि  आलोचक कभी संघ और गांधी के अंतर्संबंधों को समझ ही नही पाए है महात्मा गांधी 150 वी जयंती पर आरएसएस के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने बकायदा लेख लिखकर गांधी के प्रति अपनी वैचारिक और कार्यशील प्रतिबद्धता को सार्वजनिक किया।इस बीच हैश टेग गोडसे भी जमकर  ट्रेंड हुआ।देश के बड़े बुद्धिजीवी वर्ग ने ट्विटर पर गोड्से के ट्रेंड को आरएसएस के साथ जोड़ने की कोशिशें की।कांग्रेस के बड़े नेता अक्सर गांधी की हत्या से संघ को जोड़ने का प्रयास ..

सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने विजयादशमी पर किया स्वयंसेवकों को संबोधित

  नागपुर। विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पथ सञ्चलन के पश्चात स्वयंसेवकों को संबोधित किया। स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि इस विजयादशमी के पहले बीता हुआ वर्ष भर का कालखंड श्री गुरु नानक ..

नवीकरण ऊर्जा के क्षेत्र में भारत बन सकता है एक मॉडल

  - प्रह्लाद सबनानी    दिनांक 25 सितम्बर 2019 को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में भारत के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा कि भारत की जीवन पद्धति दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण है। भारती..

राष्ट्रजीवन के आदर्श ‘मामाजी’- श्री माणिक चंद वाजपेयी

  विरले ही होते हैं जो अपने जीवनकाल में एक उदाहरण बन जाते हैं, एक किंवदन्ती बन जाते हैं। उनके जीवन का क्षण-क्षण अनुकरणीय होता है, प्रेरणादायी होता है। ऐसे ही हैं मामा जी। मामा जी यानी श्री माणिक चंद वाजपेयी। जिनका पूरा जीवन ही राष्ट्रीय विचार के ल..

'70' के जश्न में समस्याओं पर पर्दा डालते जिनपिंग

    हाल ही हमने टेलीविजन, अखबारों व सोशल मीडिया पर चीन में आयोजित भव्य समारोह को देखा। अपने देश मे कम्युनिस्ट शासन के 70 वर्ष पूर्ण होने का जश्न मनाते चीनियों ने दुनिया के सामने शक्ति प्रदर्शन किया। चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की सत्ता की शुरू..

प्‍लास्‍ट‍िक को ना लेकिन ठोस विकल्‍प भी दीजिए प्रधानमंत्री जी : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

   - डॉ मयंक चतुर्वेदी     हम क्‍यों प्‍लास्‍ट‍िक के इतने आदि हो गए, क्‍या हमारे पास तत्‍काल में कोई विकल्‍प है, इससे पूरी तरह से मुक्‍ति के, यदि तुरंत हम अपने जीवन से प्‍लास्‍ट‍िक को..

अन्तर्राष्ट्रीय मानकों में भारत लगातार बढ़ रहा है आगे

    - प्रह्लाद सबनानी    कई अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा समय समय पर  विश्व के समस्त देशों की रैंकिंग कई मानकों पर तय की जाती है। हाल ही के समय में कई अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों ने अपने नतीजों की घोषणा की है, उन लगभग सभी नती..

महात्मा गांधी की जीवनदृष्टि का अनुसरण करें

      - मोहन भागवत      भारत देश के आधुनिक इतिहास तथा स्वतंत्र भारत के उत्थान की गाथा में जिन विभूतियों के नाम सदा के लिये अंकित हो गये हैं, जो सनातन काल से चलती आयी भारत की इतिहास गाथा के एक पर्व बन जायेंगे, पूज्य महात..

गांधी की आत्मकथा के मायने (भाग एक)

  प्रो. उमेश कुमार सिंह     गांधी की मानसिक विकास यात्रा उनके पूर्वजों से होते हुए माता-पिता के माध्यम से उनके जीवन में आती है और सामाजिक अनुभव से पूर्ण होती है। मैंने एक मित्र की कुछ दिन पहले फेसबुक में जिज्ञासा पढ़ी कि ‘पता नह..

जलवायु परिवर्तन एक गम्भीर समस्या

  जलवायु परिवर्तन पर हुए पेरिस समझौते के अन्तर्गत, संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी सदस्य देश, इस बात पर राज़ी हुए थे कि इस सदी के दौरान वातावरण में तापमान में वृद्धि की दर को केवल 2 डिग्री सेल्सियस तक अथवा यदि सम्भव हो तो इससे भी कम अर्थात 1.5 डिग्री स..

गांधी और लिपि (भाग 2)

  - डॉ उमेश कुमार सिंह      ‘हिन्द स्वराज्य’ में (गांधी के शब्द), ‘‘सारे हिंदुस्तान के लिए जो भाषा चाहिए, वह तो हिन्दी ही होनी चाहिए। उसे उर्दू या नागरी लिपि में लिखने की छूट होनी चाहिए। हिंदू-मुसलमानों ..

क्‍या वाम में 'सत्‍य' को पहचानने व अपनाने की ताकत है?

  वाम पड़ताल भाग १ - वाम पूछ रहा है, क्‍या खुद की बेधड़क पड़ताल का वक्‍त आ गया है?   वाम पड़ताल भाग २ - याद रखें- बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी वाम पड़ताल भाग ३ - लोगों ने कामू के बजाय तुलसी को ज्‍यादा निकट प..

क्‍या विरासत के उन पन्‍नों को जला देने पर भी रजामंदी है?

वाम पड़ताल भाग १ - वाम पूछ रहा है, क्‍या खुद की बेधड़क पड़ताल का वक्‍त आ गया है?   वाम पड़ताल भाग २ - याद रखें- बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी वाम पड़ताल भाग ३ - लोगों ने कामू के बजाय तुलसी को ज्‍यादा निकट पाया ..

पंडित दीनदयाल उपाध्याय: एक युगदृष्टा

आत्मविश्वास,कर्मठता, दृढ़निश्चय, लगन , निष्ठा, त्याग, समाज कल्याण और राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता जैसे शब्द जहाँ बहुतायत श्रेष्ठ व्यक्तित्व के लोगों का मान बढ़ाते हैं, वहीं पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के जीवन से जुड़कर इन शब्दों की महत्ता और भी बढ़ जाती है। पंड..

केवल जन आन्दोलन से प्लास्टिक मुक्ति अधूरी कोशिश होगी

  वैसे तो विज्ञान के सहारे मनुष्य ने पाषाण युग से लेकर आज तक मानव जीवन सरल और सुगम करने के लिए एक बहुत लंबा सफर तय किया है। इस दौरान उसने एक से एक वो उपलब्धियाँ हासिल कीं जो अस्तित्व में आने से पहले केवल कल्पना लगती थीं फिर चाहे वो बिजली..

क्‍या वाम, सर्वहारा की मूल चेतना का परिष्‍कार कर सका?

  वाम पड़ताल भाग १ - वाम पूछ रहा है, क्‍या खुद की बेधड़क पड़ताल का वक्‍त आ गया है?   वाम पड़ताल भाग २ - याद रखें- बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी वाम पड़ताल भाग ३ - लोगों ने कामू के बजाय तुलसी को ज्‍यादा निकट प..

अर्थव्यवस्था को अब लगेंगे पंख

       - प्रह्लाद सबनानी    20 सितम्बर 2019 को केंद्र सरकार ने कोरपोरेट इंडिया को एक बहुत बड़ा तोहफ़ा दिया। माननीय वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन ने कारपोरेट करों में कटौती की घोषणा की, जो 1 एप्रिल 2019 से लागू..

इजराइल के निर्माण में भारतीय योद्धाओं के शौर्य को स्मरण करने का दिन

    हाइफा दिवस   पराजय  का इतिहास लिखने वाले इतिहासकारों ने बड़ी सफाई से भारतीय योद्धाओं की अकल्पनीय विजयों को इतिहास के पन्नों पर दर्ज नहीं होने दिया। शारीरिक तौर पर मरने के बाद जी उठने वाले देश इजरायल की आजादी के संघर्ष क..

भारतीय समाज की आवाज राष्ट्रकवि दिनकर

  कोई भी साहित्य या सिनेमा अपने समय के समाज का वक्ता होता है,जो आने वाली पीढ़ियों को अतीत से रूबरू कराता है.किसी भी मानव समाज के एक खास समय का गुणधर्म उस समय के साहित्य में दर्ज होता है. ऐसे में उन साहित्यकारों की भूमिका अहम हो जाती है,अतः उनके बार..

मौत की आँख में झांककर भी क्रांति के गीत गाने वाला वीर

  - सौरभ ममगाईं     यदि बात क्रांतिकारियों की आए तो भारत में अनेक क्रांतिवीरों की गाथाएं प्रचलित हैं, जो प्रेरणा के तौर पर हमेशा याद किए जाएंगे। एक ही परिवार में पिता-पुत्र शंकर शाह-रघुनाथ शाह की वीर और देशभक्त जोड़ी जिन्होंने अंग्र..

गाँधी और भाषा। (भाग एक )

    - डॉ उमेश कुमार सिंह     नवजागरण काल के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर किन्तु अंग्रेजी से प्रभावित राजा राम मोहनराय ने हिंदी की स्वीकार्यता सम्पर्क भाषा के रूप में तो मानी किन्तु उसे ज्ञान-विज्ञान की भाषा नहीं माना। जिसका फायदा उठाक..

देश की अर्थव्यवस्था समेकन की प्रक्रिया के दौर से गुज़र रही है

     प्रह्लाद सबनानी      पिछले पाँच वर्षों के दौरान केंद्र में श्री नरेंद्र मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के उद्देश्य से कई साहसिक क़दम उठाए हैं। जैसे, जीएसटी कर प्रणाली को लागू करना, औपचारिक अर्थव्यवस्था..

लोगों ने कामू के बजाय तुलसी को ज्‍यादा निकट पाया

      वाम पड़ताल-3     गिरीश उपाध्‍याय        दरअसल भारत में विचार की स्थिति नदी की तरह रही है। कभी वह सूख जाती है तो कभी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगती है। कभी आप उसके पानी का आचमन कर सकते हैं,..

आदमी को पहाड़ खाते देखा है -जयराम शुक्ल

भोपाल से इंदौर जाते हुए जब देवास बायपास से गुजरता हूँ तो कलेजा हाथ में आ जाता है। बायपास शुरू होते ही बाँए हाथ में हनुमानजी की विराट प्रतिमा है, उसके पीछे खड़े पहाड़ का जो दृश्य है,बेहद दर्दनाक है। उसे देखकर कई भाव उभरते हैं। कि जैसे चमगादड़ ने अमरूद का आधा ..

हठ छोड़ संविधान और गांधी की मंशा ‘राष्ट्रभाषा हिन्दी’ को आत्मसात करें

    - डॉ उमेश कुमार सिंह       केन्द्र की पहल पर नुक्ताचीनी करने वाले अपने को गाँधी के साथ दक्षिण के संतों के आयने में देखें तो उन्हें ध्यान में आ जायेगा कि भारत की भाषा के लिए पूर्वजों का क्या सपना था? आज देश 70 साल में ..

वाम पूछ रहा है, क्‍या खुद की बेधड़क पड़ताल का वक्‍त आ गया है?

    - गिरीश उपाध्‍याय      डिस्‍क्‍लेमर- आज का कॉलम एक मीडिया रिपोर्ट के कंटेट पर आधारित है। चूंकि मैं स्‍वयं उस कार्यक्रम में उपस्थित नहीं था, इसलिए इस कंटेट की प्रामाणिकता और तथ्‍यात्‍मकता की पुष्ट..

देश में पनप रहे मरुस्थलीकरण को रोकना ही होगा

  - प्रह्लाद सबनानी      संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि प्रतिवर्ष विश्व में 1.20 करोड़ हेक्टेयर कृषि उपजाऊ भूमि ग़ैर-उपजाऊ भूमि में परिवर्तित हो जाती है।  दुनियाँ में 400 करोड़ हेक्टेयर ज़मीन डिग्रेड हो चुकी है। एशिया एवं..

कश्मीर : अतीत से आज तक – भाग एक

धर्म – रक्षक आध्यात्मिक कश्मीर नरेन्द्र सहगल   पिछले अनेक वर्षों से मजहबी कट्टरपन, भारत विरोध और हिंसक जिहाद के संस्कारों में पल कर बड़ी हुई कश्मीर घाटी की युवा पीढ़ी को भारत की मुख्य राष्ट्रीय धारा में लाना वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती..

हिंदी के समाचार पत्रों में अंग्रेजी के शब्द क्यों?

  लोकेन्द्र सिंह    हिंदी के समाचार पत्रों में अंग्रेजी शब्दों का बढ़ता प्रयोग हिंदी प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। हिंदी समाचार पत्रों में अंग्रेजी शब्दों के प्रयोग की जिस गति से बढ़ रहा है, उसको देखकर भय लगता है कि यही..

इसरो, नासा और अंंतरिक्ष वैज्ञानिक : डॉ. बी. मयंक चतुर्वेदी

नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) भारत के चंद्रयान2 मिशन की जिस तरह से प्रशंसा कर रहा है, उसके मायने आज हर भारतीय को समझने की जरूरत है। वस्‍तुत: ज्ञान के धरातल पर यह जानना इसलिए भी आवश्‍यक हो जाता है कि आखिर हमने पिछले 50 सालों में ..

ग्राम्यभारत में संभावनाओं का उजास -जयराम शुक्ल

  किसी भी सरकार के लिए उपलब्धियों के सौ दिन का लेखा-जोखा पेश करना आसान काम नहीं, क्योंकि अमूमन इतने दिन तो योजनाओं को कागज से धरातल पर ही उतारने में लग जाते हैं।  लेकिन अब तो प्रायः हर देशवासी की जुबां से यही निकलता है- " मोदी है तो मुमकिन है।   सौ दिन में तीन तलाक जैसे रुढ़िवादी जाहिल कानून से मुस्लिम बहनों की मुक्ति और अनुच्छेद 370 व 35ए से मुक्त नए कश्मीर की बुनियाद ये दोनों ही सामाजिक सुरक्षा और राष्ट्रीय अखंडता की दृष्टि से युगांतरकारी कदम हैं और ये आइडिया आफ न्यू इंडिया के ..

‘युद्ध नहीं, सहायता’, ‘विनाश नहीं, सृजन’, ‘कलह नहीं, शांति’ और‘मतभेद नहीं, मिलन!’ - लखेश्वर चंद्रवंशी

अपने ओजस्वी वाणी से भारत की महिमा को विश्वपटल पर आलोकित करनेवाले स्वामी विवेकानन्द का सन्देश समूची मानवता की अनमोल धरोहर है। दुनियाभर के महान ज्ञानी,विज्ञानी, चिंतकों, कलाकारों और विशेषकर युवाओं के हृदय को स्वामीजी के शक्तिदायी ..

शिकागो संभाषण – भारत के विश्वगुरु बनने का मार्ग

        प्रवीण गुगनानी  विवेकानंद जी ने भारत को व भारतत्व को कितना आत्मसात कर लिया था, यह कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर के इस कथन से समझा जा सकता है – “यदि आप भारत को समझना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानंद को संपूर..

‘शिकागो’ के बाद स्वामी विवेकानंद मात्र 9 वर्ष जिए और 9 जन्मों से ज्यादा काम कर गए

आज के दिन 125 वर्ष पूर्व 11 सितंबर 1893 को अमरीका के शिकागो शहर में आयोजित विश्व धर्म संसद में अपना विश्व विजयी व्याख्यान के कारण 12 जनवरी, 1863 को जन्में स्वामी विवेकानंद प्रसिद्ध हुये तब वे 30 वर्ष के युवा थे और उसके बाद मात्र 9 वर्ष और जिए परंतु 9 जन..

कहीं आने वाली मंदी का कारण हम तो नहीं बनने वाले ?

इस समय भारत ही नहीं पूरे विश्व में आर्थिक मंदी की आहट की चर्चा है। भारत के विषय में अगर बात करें तो हाल ही में जारी कुछ आंकड़ों के हवाले से यह कहा जा रहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था बेहद बुरे दौर से गुज़र रही है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ..

शिव परिवार का अनूठा समाजवाद

      आस्था/जयराम शुक्ल   गणपत बप्पा घर-घर बिराज गए। क्या महाराष्ट्र, क्या गुजरात, समूचा देश गणपतिमय है। बडे़ गणेशजी, छोटे गणेशजी, मझले गणेशजी।  गणेशजी जैसा सरल और कठिन देवता और कौन? लालबाग के राजा के गल्ले में एक अरब का चढ..

विश्व यात्रा पर्यटन प्रतियोगी सूची में भारत ने लगाई लम्बी छलाँग

- प्रह्लाद सबनानी  दिनांक 4 सितम्बर 2019 को वर्ल्ड इकोनोमिक फ़ोरम द्वारा घोषित एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व यात्रा पर्यटन प्रतियोगी सूची में भारत की रैंकिंग वर्ष 2017 के 40वें स्थान से ऊपर उठकर वर्ष 2019 में 34वें स्थान पर आ गई। यह रैंकिंग वर्ल्ड इक..

बघुवार में मिलती है रामराज्य की झलक

गांव का मंदिर और आंबेडकर भवन     बघुवार यहां आए बिना इस गांव के बारे में जो सुना, वह सब अविश्वसनीय ही लगता था। दो हजार की आबादी वाला यह छोटा-सा गांव रामराज्य की झलक देता है। समरसता, आत्मीयता, सुन्दरता, समृद्धि, एकता, सुव्यवस्था, अनुशासन, शिक्षा... ये समस्त तत्व सब एक ही स्थान पर सिमट आए हैं। मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले का ग्राम बघुवार ऐसा ही एक रत्न है।   ‘सर्वसम्मति’ वह शब्द है जहां से बघुवार के बारे में चर्चा शुरू करनी पड़ेगी। यहां हर काम मिल-जुलकर तय होता ..

चुनौतियों से घिरा कश्मीर का भविष्य

नरेन्द्र सहगल    केंद्र सरकार ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद (370) और राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा जारी एक पुराने अध्यादेश 35ए का निपटारा करके पाकिस्तान समर्थित अलगाववाद/आतंकवाद पर एक प्रचण्ड प्रहार कर दिया है. भारत के संविधान, ..

भारतीय राजनीति के 'सुरखाब के पर' हैं आरिफ मोहम्मद खान साहब

  आरिफ साहब के बगल में हैं प्राख्यात पत्रकार कमरवहीद नकवी और फिर  लेखक जयराम  शुक्ल    टिप्पणी/जयराम शुक्ल आरिफ मोहम्मद खान साहब को राज्यपाल बनाया जाना परंपरा से परे भारतीय राजनीति में सुरखाब के पर लगाने जैसा है। खान साहब ..

देश में उत्पाद ख़रीदी का उचित समय

- प्रह्लाद सबनानी  वित्तीय वर्ष 2019-20 की प्रथम तिमाही में देश में आर्थिक विकास की दर नीचे गिरकर 5 प्रतिशत पर आ गई। यह पिछले 25 तिमाहीयों के दौरान दर्ज की गई विकास दर में सबसे कम है। इस कमी के लिए कई कारण गिनाए जा रहे हैं। यथा, उत्पादों की खपत की..

गणेश उत्सव के मूल स्वरूप की आवश्यकता

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चुतर्थी से लेकर दस दिनों तक प्रथम पूज्य भगवान गणेश पूजन के कई दिवस आते हैं  जिनमें ऋषि पंचमी, संतान सप्तमी  और अनंत चतुर्दषी शामिल है। शायद यही कारण हैं कि गणेश स्थापना की परिपाटी प्रारंभ हुई। महाराष्ट्र से प्रारंभ हुई गण..

बात जो सीधे दिल से निकली है- जयराम शुक्ल

मध्यप्रदेश के सतना जिले में एक गाँव है चूँद। इलाके में इसे शहीदों के गाँव के तौर पर जाना जाता है।    सोमवंशी राजपूतों के इस गाँव में हर तीसरे घर का कोई न कोई जवान सरहद में मोर्चा लेते हुए शहीद हुआ है। औसतन हर घर में एक फौजी है। एक दो घर ऐसे भी हैंं जहां दो तीन पीढ़ी एक के बाद एक शहीद हुई।    गाँव में द्वितीय विश्वयुद्ध से लेकर अब तक हुए सभी युद्धों में इस माटी में पैदा हुए जवानों ने देश के लिए मोर्चा सँभाला है। फौज को लेकर बच्चों में ऐसा जज्बा कि तरुण होते ही दौड़कूद करके खुद ..

​मध्यकालीन अंधकार की प्रकाश विभूति नानकदेव

  राजेंद्र चड्ढा एक राष्ट्र के रूप में भारत ने आज तक की अपनी निंरतर ऐतिहासिक यात्रा में अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। इतिहास बताता है कि देश के सांस्कृतिक-आध्यात्मिक आधार के कारण किसी एक आध्यात्मिक विभूति की उपस्थिति ने समाज को गिरावट से उबारा है। तत्..

क्योंकि ध्यानचंद हाँकी के भगवान नहीं बने

    पुण्यस्मरण/जयराम शुक्ल भारतीय इतिहास में दो महापुरुष ऐसे भी हैं जो भारतरत्नों से कई, कई, कई गुना ज्यादा सम्मानित और लोकमानस में आराध्य हैं। प्रथम हैं नेताजी सुभाषचंद्र बोस और दूसरे मेजर ध्यानचंद। सुभाष बाबू आजादी के आंदोलन के सबसे तेजस..

देश को प्लास्टिक कचरे से मुक्त कराना ही होगा

दिनांक 25 अगस्त 2019 को देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी ने अपने “मन की बात” कार्यक्रम में देश का आहवान किया है कि इस वर्ष दीपावली तक देश को प्लास्टिक कचरे से मुक्ति दिलायी जानी चाहिए। इसलिए, इस बार “स्वछ्त्ता ही सेवा&rdquo..

ड्रैगन साँप का पुरखा, अभी तक नहीं समझे! -जयराम शुक्ल

सांकेतिक चित्र - Source - Reuters    संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में चीन इस बार पाकिस्तान के हक में कश्मीर का मसला लेकर गया। यह अप्रत्याशित नहीं। 'पयंपानम् भुजंगानाम केवलम् विष वर्धनम्' लेकिन  वह तो साँप का भी बाप है। पलटकर डसने का इतिहास है उसका। साँपों में एक होता है डेड़हा, कन्नीकरतूत कुछ नहीं पर चनन-फनन इतना की उसकी कला से करैत-कोबरा जैसे विषधर लजा जाएं। पाकिस्तान ऐसा ही डेढहा है और चीन तो ड्रैगन है ही। इस नाते ड्रैगन डेढ़हे का चरित्रगत पुरखा हुआ।    पाँच ..

अर्थव्यवस्था को गति देने हेतु रियायतों की घोषणा

  पिछली कुछ तिमाहीयो से देश के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में कुछ कमी देखने में आ रही है। हालाँकि, यह कमी केवल भारत ही नहीं परंतु विश्व के अन्य प्रमुख लगभग सभी देशों में देखने में आई है और इसके मुख्य कारणों में अमेरिका और चीन के बीच लगातार जारी..

निर्दोष कानूनी प्रक्रिया से साबित होते हैं प्रेस कांफ्रेंस से नहीं

“गैरों में कहाँ दम था हमें तो अपनों ने लूटा, हमारी कशती वहाँ डूबी जहाँ पानी कम था। “  आज कांग्रेस के दिग्गज नेता और देश के पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम सीबीआई की हिरासत में कुछ ऐसा ही सोच रहे होंगे। क्योंकि 2007 के एक मामले..

राम, कृष्ण और स्वाधीनता के मायने

  पर्वसंस्कृति/जयराम शुक्ल सावन और भादौं तिथि त्योहारों के महीने हैं। यह सिलसिला डिहठोन तक चलता है। इन्हीं महीनों में एक महान राष्ट्रीय पर्व पंद्रह अगस्त पड़ता है उसके आगे पीछे या कभी-कभी साथ में ही कृष्णजन्माष्टमी आती है।  मुझे दोनों ही तिथ..

समग्र क्रांति के अग्रदूत – योगेश्वर श्रीकृष्ण

  अधर्मियों, आतंकवादियों, समाजघातकों, देशद्रोहियों और भ्रष्टाचारियों को समाप्त करने के उद्देश्य से धराधाम पर अवतरित हुए योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्म से लेकर अंत तक अपने निर्धारित उद्देश्य के लिए सक्रिय रहे. वे एक आदर्श क्रांतिकारी थे. कृष्ण क..

आरक्षण और संघ के विरुद्ध दुष्प्रचार - लोकेन्द्र सिंह

किसी भी अच्छे विचार पर अनावश्यक राजनीतिक विवाद कैसे खड़ा किया जाता है, इसका सटीक उदाहरण है- सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी विचार पर खड़ा किया गया नकारात्मक विमर्श। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति दुराग्रह रखने वाला वर्ग संघ के विचार को ..

वामपंथी दुष्प्रचार के शिकार सावरकर

पुराने वामपंथी स्वातंत्र्यवीर सावरकर का सम्मान किया करते थे , लेकिन आपातकाल के बाद नव वामपंथियों ने उनके बारे में दुष्प्रचार करना शुरू किया और गांधीजी को उनका घोर विरोधी बताया। पर गांधीजी ने अपनी कई रचनाओं में सावरकर की प्रशंसा की है। इति..

पाकिस्तानी सेना बेच रही बलूचों के अंग

    बलूचों पर अत्याचार के लिए कुख्यात पाकिस्तानी सेना अब उनके खून और शरीर के अंगों की तस्करी भी करने लगी है। सेना कफन में लिपटे शव परिजनों को सौंपने के बाद अपने सामने ही दफन कराती है ताकि राज फाश न हो। अब तो फौज के खूनी हाथ पश्तूनों और मुजाहिरों तक पहुंच गए हैं   पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के हाल के अमेरिकी दौरे की दो घटनाएं याद करें। पहला, इमरान जब अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तर्ज पर संबोधित कर रहे थे, तब पाकिस्तान के कब्जे वाले ..

सपनों का एक गांव – रविंद्रनगर (मियांपुर)

यह कहानी है प्रकृति की प्रतिकूलताओं के विरूद्ध मानव के संघर्ष की. वर्ष 1947 में विभाजन की पीड़ा सहकर अपना सबकुछ खोकर शरणार्थी बनकर आए बंगाली परिवारों के पुरूषार्थ की, जिन्होंने अपने परिश्रम से बालू की टीलों को लहलहाते खेतों में तब्दील कर दिया. गुरूदेव र..

देश में आज का ग़रीब-वर्ग कल का मध्यम-वर्ग होगा

15 अगस्त 2019 को देश ने अपना 73वाँ स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। लाल क़िले की प्राचीर से देश के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नाम अपने सम्बोधन में इस बार कई महत्वपूर्ण मुद्दों को छुआ है। ट्रिपल तलाक़, धारा 370 एवं 35ए जैसे..

The Caravan, तुलसी गेबार्ड और संघ

दिल्ली से एक मासिक पत्रिका निकलती है – The Caravan. चंपक, सरिता, मुक्ता, गृहशोभा प्रकाशित करने वाली ‘दिल्ली प्रेस’ की यह पत्रिका सन 1988 में बंद हो गयी थी. लेकिन 2009 में इसे मजबूत फंडिंग के साथ फिर से नए अवतार में लाने का प्रयास हुआ औ..

ये कश्मीर के नवविहान का मंगलाचरण है!

स्वतंत्रता दिवस/जयराम शुक्ल आजादी के बाद कश्मीर का यह पहला पंद्रह अगस्त होगा जब वहां एक विधान और एक निशान की प्राणप्रतिष्ठा होगी। दो प्रधान की बात दशकों पहले से ही अप्रसांगिक है। यह वह सपना था जिसे डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने देखा था। डाक्टर मुखर्ज..

पुण्यतिथि विशेष : स्मृतियों में महारानी अहिल्यादेवी होलकर

  - रामाशीष यादव तत्कालीन मालवा राज्य की महारानी अहिल्यादेवी होलकर की आज पुण्यतिथि है। वह देशवासियों के बीच नहीं हैं। प्रजा के हित में काम करने वाली आदर्श शासक अहिल्यादेवी होलकर 13 अगस्त, 1795 को स्वास्थ्य बिगड़ने की वजह से संसार छोड़कर चली गई..

आजादी के आंदोलन में संघ का बड़ा योगदान था लेकिन संघ को श्रेय लेने की आदत नहीं

  - डॉ. मनमोहन वैद्य      कुछ समय पूर्व एक पत्रकार मिलने आए। बात-बात में उन्होंने पूछा कि स्वतंत्रता आन्दोलन में संघ का सहभाग क्या था? शायद वे भी संघ के खिलाफ चलने वाले असत्य प्रचार के शिकार थे। मैंने उनसे प्रतिप्रश्न किया कि आप ..

वनवासियों की मुश्किलें हमारे अंत की शुरूआत

  एक पत्रकार के नाते जल-जंगल-जमीन और जन पर लिखना-पढ़ना मुझे हमेशा से सुभीता रहा है। वनवासियों पर मेरी समझ किताबों के जरिए नहीं बन पाई, इस समाज को आंखों से जितना देखा और उनके बीच जाकर जो जाना बस उतना ही ज्ञान है, उससे ज्यादा कुछ नहीं। अलबत्ता अल्विन वारियर और वाल्टर जी ग्रिफिथ्स को पढ़ा है।   दोनों ने ही मध्यभारत की जनजातियों पर विषद् और वैज्ञानिक अध्ययन किया है। स्वाभाविक तौर पर इन महापुरूषों के अध्ययन का आधार वैदिक काल की वह अरण्य संस्कृति नहीं रही जिसमें यह समाज पला-बढ़ा और आज यहाँ ..

विश्व आदिवासी दिवस का मूल सत्य

जनजातीय व वनवासी समाज की प्रतिष्ठा, उसके रक्षण व विकास की भारत में प्राचीन परंपरा रही है. प्रकृति पूजन हमें वेदों से प्राप्त हुआ जिसके प्रति  नगरीय समाज की अपेक्षा जनजातीय समाज अधिक आग्रही रहा. जनजातीय समाज रक्षण का पात्र नहीं अपितु शेष समाज का रक्..

सेवा संगीत और समर्पण की प्रतिमूर्तियां सम्मानीत

भारत सरकार द्वारा देष का सर्वोच्च नागरिक सम्मान इस बार सेवा संगीत और समर्पण के  क्षेत्र में उच्च मापदंड स्थापित करने वाली विभूतियों को दिया गया है। समाज के लिए समर्पित नानाजी देषमुख, संगीत के लिए समर्पित भूपेन्द्र हजारिका और देश सेवा के लिए सर्वोच्..

अब जाकर भारत को मिली है पूरी आजादी - तारेक फ़तेह

भारतीय उपमहाद्वीप में सोमवार को एक बड़ी घटना तब हुई जब भारत सरकार ने अपने एकमात्र मुस्लिम बहुल राज्य - जम्मू और कश्मीर राज्य (J & K) को दिया गया विशेष दर्जा हटा दिया। ऐसा करने में, भारत ने मजबूत राजनितिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया, अरब, तुर्किक, फ..

रोज़गार सृजन के लिए बनानी पड़ेगी ५ लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था

देश के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी का सपना है कि देश को वर्ष 2024-25 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जाय। इसका ज़िक्र देश की संसद में श्रीमती निर्मला सीतारमन, वित्त मंत्री, भारत सरकार ने दिनांक 4 जुलाई को आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्त..

कश्मीर अभी इम्तिहान आगे और भी है।

कश्मीर में "कुछ बड़ा होने वाला है" के सस्पेंस से आखिर पर्दा उठ ही गया। राष्ट्रपति के एक हस्ताक्षर ने उस ऐतिहासिक भूल को सुधार दिया जिसके बहाने पाक सालों से वहां आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने में सफल होता रहा  लेकिन यह समझ से परे है कि कश्मी..

वे पन्द्रह दिन… / 07 अगस्त, 1947

गुरुवार, 07 अगस्त. देश भर के अनेक समाचार पत्रों में कल गांधी जी द्वारा भारत के राष्ट्रध्वज के बारे में लाहौर में दिए गए वक्तव्य को अच्छी खासी प्रसिद्धि मिली है. मुम्बई के ‘टाईम्स’ में इस बारे में विशेष समाचार है, जबकि दिल्ली के ‘हिन्दु..

चरितार्थ हुआ मोदी है तो संभव है : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के पहले कार्यकाल में जो कुछ भी हुआ उसका परिणाम यह था कि उन पर देश की जनता ने अपार भरोसा कर दूसरी बार सत्‍ता सौंपी । उस अखण्‍ड जय की कल्‍पना तो स्‍वयं नरेन्‍द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी से लेकर भाजपा के दिग्‍गज नेताओं ने भी नहीं की थी जोकि उनकी एवं उनकी पार्टी की झोली में देश की जनता ने सहसा ही डाल दी थी। किंतु इसके बाद भी यह कहने वालों की कोई कमी नहीं थी कि भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी से लेकर उनकी पूरी टीम देश की जनता को विभिन्न मुद्दों ..

कश्मीर: डर के आगे जीत है.!-जयराम शुक्ल

वाकई ये मोदी की अगस्त क्रांति है। 9 अगस्त को हम हर साल 'अँग्रेजों भारत छोड़ों' के आह्वान का स्मरण करते हैं। अगले साल के 5 अगस्त को 'कश्मीर दिवस' के रूप में मनाने लगेंगे। आजादी के बाद गोवा को लेकर मुक्ति संघर्ष हुआ। लाठी-गोली-शहादत के बाद गोवा पुर्तगालियो..

वे पंद्रह दिन… / 06 अगस्त, 1947

बुधवार… छः अगस्त. हमेशा की तरह गांधी जी तड़के ही उठ गए थे. बाहर अभी अंधेरा था. ‘वाह’ के शरणार्थी शिविर के निकट ही गांधीजी का पड़ाव भी था. वैसे तो ‘वाह’ कोई बड़ा शहर नहीं था, एक छोटा सा गांव ही था. परन्तु अंग्रेजों ने वहां पर ..

वे पन्द्रह दिन… / 01 अगस्त, 1947

शुक्रवार, 01 अगस्त 1947. यह दिन अचानक ही महत्त्वपूर्ण बन गया. इस दिन जम्मू कश्मीर के सम्बन्ध में दो प्रमुख घटनाएं घटीं, जो आगे चलकर बहुत महत्त्वपूर्ण सिद्ध होने वाली थीं. इन दोनों घटनाओं का आपस में वैसे तो कोई सम्बन्ध नहीं था, परन्तु आगे होने वाले रामाय..

अज्ञात स्वतंत्रता सेनानी : डॉक्टर हेडगेवार – 1

    नरेंद्र सहगल एक प्रखर स्वतंत्रता सेनानी डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने जन्मकाल से आज तक नाम, पद, यश, गरिमा, आत्म प्रशंसा और प्रचार से कोसों दूर रहकर राष्ट्र हित में समाजसेवा, धर्मर..

तीन तलाक को समाप्त करने का आधार बना मध्यप्रदेेश

बहुचर्चित तीन तलाक जैसी कुप्रथा पर सख्त कानून बन चुका है ,लेकिन इसके खिलाफ जंग की शुरूआत मध्यप्रदेष से ही हुई थी । मध्यप्रदेष के इंदौर नगर की शाहबानो को उसके पति ने अपनी दूसरी पत्नी के कारण सन् 1978 में तलाक दे दिया था, शाहबानो अपने गुजाराभत्ता के लिए द..

तीन तलाक और राष्ट्र चेतना

मनोविज्ञान के अनुसार समाज एक खास परिस्थिति में लोगों का एक ऐसा समूह है, जिस में एक निजी व्यक्ति का व्यक्तित्व विलीन हो जाता है, और उस के स्थान पर एक सामूहिक मन का निर्माण होता है, जो एक निर्दिष्ट दिशा की ओर संचालित होता है। समूह में व्यक्तियों के सचेतना..

ननूर नरसंहार – वामपंथियों द्वारा किया नरसंहार, जिसके बारे में कोई बात नहीं करता

यदि आपसे पूछा जाए कि दुनिया में तानाशाह कितने हुए तो आपका जवाब सबसे पहले हिटलर होगा, फिर शायद मुसोलिनी, फिर शायद कुछ कहेंगे लेनिन या स्टालिन. लेकिन जैसे ही आप लेनिन, स्टालिन, फिदेल कास्त्रो, माओ ज़ेडोंग जैसे नाम लेंगे कुछ लोगों की भौहें तन जाएंगीं. वे आ..

व्यक्तिगत खुन्नस में राष्ट्र की उपलब्धि का अपमान मानसिक विकलांगता है

  प्रधानमंत्री मोदी के “मैन वर्सेस वाइल्ड” के शो का प्रोमो आने के बाद ट्रोलर्स का गैंग फिर से सक्रिय हो गया है। आरोप वही पुराने हैं और वही पुराने आरोप जो गलत साबित हो चुके हैं दोबारा लगाए जा रहे हैं। क्या यह हिटलर कि वही नीति है जिसके ..

क्या ये सब खुद सहिष्णु हैं-विवेक कुमार पाठक

जैसे पूरे देश को सावन की रिमझिम का इंतजार था वैसे ही भारत को असहिष्णु राष्ट्र घोषित करने में जुटे कुछ लोगों को शब्द हमले का इंतजार था। ताजा सूचना मिली है कि सिने दुनिया के 40 हाईप्रोफाइल व कथित बुद्धिजीवी तबरेज के नाम पर सरकार पर तरबतर होकर हमलावर हो गए..

ट्रिपल तलाक आस्था नही, अधिकारों की लड़ाई है ।

ट्रिपल तलाक पर रोक लगाने का बिल लोकसभा से तीसरी बार पारित होने के बाद  एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में ही इसे असंवैधानिक करार दे दिया था लेकिन इसे एक कानून का रूप लेने के लिए अभी और कितना इंतज़ार क..

लिओनार्दो उनके राष्ट्रीय गौरव, हमारे…?

इस बार यूरोप प्रवास में इटली में अच्छा खासा घूमना हुआ. इटली तो इसके पहले भी तीन - चार बार गया था. लेकिन तब अपना काम कर के जल्द लौट आना, यही दिनचर्या होती थी. पर्यटक इस नाते इटली देखना रह गया था, जो इस बार संभव हो सका. लेकिन इस बार मिलान, वेनिस, रोम आदि..

ज्ञान और विज्ञान का अनूठा मेल थे अब्दुल कलाम

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की चर्चा आते ही आंखें चमक उठती हैं. वे मात्र उत्कृष्ट वैज्ञानिक ही नहीं, अपितु एक उत्तम व्यक्तित्व भी थे जो सभी मत-पंथों को समान रूप से सम्मान देते थे. वे भारतीय संस्कृति और परंपरा में ढले ऋषि, मानवतावादी, प्रकृति, संगीत प्रेमी एवं..

सरल विवेकहीन अज्ञानी साधारण हिंदू

यदि कोई हमारे उपमहाद्वीप के प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास को तर्कसंगत तरीके से देखता है, तो उसे यह निष्कर्ष प्राप्त होगा कि विश्व का सबसे पुराना धर्म, हिंदू धर्म, क्षेत्र और अनुयायियों की क्षति के मामले में सबसे अधिक नुकसान उठाने वाला धर्म प्रतीत होता है।..

देशभक्त बटुकेश्वर दत्त: शहीद भगत सिंह के साथ आज़ादी की लड़ाई लड़ी, फिर भी इन्हें भुला दिया गया

8 अप्रैल 1929, तत्कालीन इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउन्सिल के निचले सदन, यानि सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली सदस्यों और दर्शकों से भरा हुआ था। उस दिन दो अहम बिल – पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट बिल पर चर्चा होनी थी। हालांकि, ये चर्चा तो महज औ..

ललितादित्य मुक्तपीड – जिन्होंने तुर्की और अरबी आक्रांताओं को उनके राज्य में घुसकर मारा!

भारत में इस्लाम का आगमन हुआ 712 AD में, जब अविभाजित भारतवर्ष के तत्कालीन मुल्तान पर मुहम्मद बिन क़ासिम ने आक्रमण किया था। इसके पश्चात हमें अवगत कराया गया है की कैसे 1020-1025 तक गज़नवी के सुल्तान महमूद के निरंतर आक्रमणों से भारत की अजेय छवि को गहरा आघात प..

मेरठ में मकान बेचने को मजबूर हो रहे हैं हिन्दू

  प्रह्लादनगर से हिन्दू पलायन पर जितनी खबरें सामने आई हैं उनमें इस बात को सही माना गया है कि इस कॉलोनी से पिछले कुछ साल में बड़ी संख्या में हिन्दू परिवार अपने मकान बेचकर कहीं और बस गए हैं। बगल की मुस्लिम बस्ती के असामाजिक तत्वों ने हिन्दुओं का ज..

बलूचों के प्रेरक हैं चंद्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह

कल एबटाबाद था। आज बालाकोट है। कल बहावलपुर होगा। न तो पाकिस्तान दहशतगर्द तंजीमों को मदद देने और उनके सियासी इस्तेमाल से बाज आएगा, न ही उनके खिलाफ कभी-कभार होने वाला एक्शन रुकेगा। इसकी पुख्ता वजह है। पाकिस्तान दहशतगर्दी को सियासी असलहे के तौर पर इस्तेमाल करता है। इनसानी हुकूक उसके लिए कोई चीज नहीं है। पाकिस्तान और उसके हुक्मरानों को बलूचों से बेहतर कौन समझ सकता है ? बलूच तो हमेशा सेकहते रहे हैं कि बलूचिस्तान में उनके साथ जो हो रहा है, उसे रोकना सिर्फ बलूचों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए जरूरी ..

माओवादी ताकतों का मकसद है संविधान और लोकतंत्र को जड़ से उखाड़ना

भीमा कोरेगांव की घटना के विरोध में 03 जनवरी 2018 को मुंबई में भी प्रदर्शन किया गया था, रैलियां निकाली गईं थीं, बंद का आह्वान किया गया था. इस घटना को एक वर्ष पूर्ण हो गया है. अब केंद्र तथा राज्य में एक मजबूत सरकार होने और माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे कड़..

आतंकवाद के गढ़ में हर-हर महादेव

  जिस तरह वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण और महाभारत इत्यादि संस्कृत ग्रंथ भारत के गौरवशाली अतीत को संजोये हुए हैं उसी तरह हमारे तीर्थ स्थल, मेले, पर्व, त्यौहार और धार्मिक यात्राएं हिमालय से कन्याकुमार तक फैले हमारे विशाल ..

नेहरू-गांधी परिवार की राजनैतिक व कूटनीतिक विफलताएं

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जीवन की दो बड़ी विफलताएं – भारत-पाकिस्तान युद्ध (1947) और भारत-चीन युद्ध (1962) हैं. दोनों बार प्रधानमंत्री नेहरू की कमजोर दूरदर्शिता और विफल कूटनीति की साफ झलक दिखाई देती है. इन युद्धों के बाद बनी परिस्थितियों ने भार..

करोड़ों हिन्दुओं का आस्था-स्थल : अमरनाथ धाम

भारत के प्राचीन ग्रंथों और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री अमरनाथ धाम की पवित्र गुफा सम्पूर्ण सृष्टि के आद्य और आराध्य देव भगवान शिव शंकर का निवास है। इस पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग के रूप में स्वयं भगवान शंकर विराजमान..

गुरु पूर्णिमा और संघ

अपने राष्ट्र और समाज जीवन में गुरुपूर्णिमा-आषाढ़ पूर्णिमा अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है. व्यास महर्षि आदिगुरु हैं. उन्होंने मानव जीवन को गुणों पर निर्धारित करते हुए उन महान आदर्शों को व्यवस्थित रूप में समाज के सामने रखा. विचार तथा आचार का समन्वय करते हुए, ..

‘हर घर गाय’ की योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी मोदी सरकार

भारत दुनिया की सबसे तेज गति से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भविष्य में विकास दर को और ज़्यादा बढ़ाने के लिए ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना अति-आवश्यक है। केंद्र सरकार भी इस दिशा में लगातार काम कर रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था ..

हिंदू-विरोधी बीबीसी मीडिया के लिए ‘जय श्री राम’ हिंसक घोषणा है

दुनिया के सबसे एजेंडावादी मीडिया संगठन बीबीसी ने एक बार फिर वही किया जिसके लिए वह जाना जाता है। उसने फिर एक बार भारत को बदनाम करने के लिए एक लंबा चौड़ा लेख लिखा जिसमें उसने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए भगवान राम के सहारे भारत को एक मुस्लिम विरोधी रा..