आलेख

सनातन परम्पराओं को कुरीतियाँ कह कर खारिज करने का षडयंत्र

5 नवंबर को एक दिन की विशेष पूजा के लिए सबरीमाला मंदिर के द्वार कडे पहरे में खुले। न्यायालय के आदेश के बावजूद किसी महिला ने मंदिर में प्रवेश की कोशिश नहीं की। लेकिन कुछ बुद्धिजीवियों द्वारा सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश देन..

संघ शाखा के विरुद्ध कांग्रेस का विधवा प्रलाप - प्रवीण गुगनानी

कांग्रेस ने अपने मप्र के चुनावी घोषणा पत्र में संघ की शाखाओं पर शासकीय कर्मचारियों के जाने पर प्रतिबंध की बात की है वहीं  अभी अभी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी संघ के मंच पर संघ के सरसंघचालक संग खड़े होकर संघ की प्रसंशा करते दिखाई दिए थे. संघ एक पूर्..

कैसा समाज बनाएंगे हम? - डॉ नीलम महेंद्र

क्या कानून की जवाबदेही केवल देश के संविधान के ही प्रति है?क्या सभ्यता और नैतिकता के प्रति कानून जवाबदेह नहीं है ? क्या ऐसा भी हो सकता है कि एक व्यक्ति का आचरण कानून के दायरे में तो आता हो लेकिन नैतिकता के नहीं?  दरअसल माननीय न्य..

महिलाओं के लिए ये कैसी लड़ाई जिसे महिलाओं का ही समर्थन नहीं - डॉ नीलम महेंद्र

मनुष्य की आस्था ही वो शक्ति होती है जो उसे विषम से विषम परिस्थितियों से लड़कर विजयश्री हासिल करने की शक्ति देती है। जब उस आस्था पर ही प्रहार करने के प्रयास किए जाते हैं, तो प्रयास्कर्ता स्वयं आग से खेल रहा होता है। क्योंकि वह यह भू..

अपने मौलिक नाम से पहचाने जाना गौरव का विषय है विवाद का नहीं – डॉ. नीलम महेंद्र

नाम का असर उसके व्यक्तित्व पर पढ़ता है । शायद इसलिए हम लोग अपने बच्चों के नाम रावण या सूपर्णखा नहीं राम और सीता रखना पसंद करते हैं । बरसों पहले अंग्रेजी के मशहूर लेखक शेक्सपियर ने कहा था,  व्हाट इस इन द नेम? यानी नाम में क्या रखा है? अगर गु..

शिक्षा संस्थानों में आतंकी घुसपैठ - सुरेश हिन्दुस्थानी

भारत में चुनाव से पूर्व वातावरण खराब करने के पर्याप्त संकेत मिल रहे हैं। इसमें पड़ौसी देश पाकिस्तान और पाकिस्तान परस्त व्यक्तियों के शामिल होने का भी अनुमान है। क्योंकि आतंकवाद के समर्थन में आने वाले छात्रों के पास पाकिस्तान निर्मित एके 47 और विस्फोटक सामग..

अन्न की अपव्ययता पर अंकुश आवश्यक (विश्व खाद्य दिवस पर विशेष) – रितेश दुबे

भारतीय संस्कृति में अन्न को ब्रम्हा कहा गया है। शायद इसीलिए भारत कृषि प्रधान देश है। किसी भी फसल को तैयार होने में छह से चार माह लगते है। लेकिन हम न किसान की मेहनत को समझते है और न ही अन्न की उपयोगिता को, आज शादियां, उत्सवों और त्यौहारों में हम न जाने कित..

केवल पुरुषों को दोष देने से काम नहीं चलेगा – डॉ. नीलम महेंद्र

पुरानी यादें हमेशा हसीन और खूबसूरत नहीं होती। मी टू कैम्पेन के जरिए आज जब देश में कुछ महिलाएं अपनी जिंदगी के पुराने अनुभव साझा कर रही हैं तो यह पल निश्चित ही कुछ पुरुषों के लिए उनकी नींदें उड़ाने वाले साबित हो रहे होंगे और कुछ अपनी सांसें थाम कर बैठे होंगे..

गुजरात: यह हिंदी भाषियों पर नहीं देश के संघीय ढांचे पर हमला है..!-कृष्णमोहन झा

गुजरात के साबरकाठा जिलें में स्थित एक कारखाने में कार्य करने वाले बिहारी मजदूर को एक 14 माह की अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इसके बाद राज्य के आठ जिलों में भड़की हिंसा ने यहां कार्यरत उत्तर भारतीयों, जिनमे विशेषकर बिहार एवं ..

कार्बन उत्संर्जन से भारत को होता आर्थिक नुकसान : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

दुनिया विकास के पीछे भाग रही है। प्रकृति का अंधाधुंध शोषण, जीवन को नुकसान पहुँचाने वाले तत्‍वों का पर्यावरण में अत्‍यधिक समावेश, मानों आज के मनुष्‍य की दिनचर्या का हिस्‍सा हो गया है। सुबह उठते ही प्‍लास्‍ट‍िक के ब्रश से टूथपेस्..

उच्च शिक्षा, प्रधानमंत्री की भावनाएं और जमीनी सच्चालई : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

ज्ञान और शिक्षा सिर्फ किताबें नहीं हो सकती हैं। शिक्षा का लक्ष्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होना चाहिए। इसके लिए नवोन्मेष जरूरी है। अगर यह रुक जाता है तो जिंदगी ठहर जाती है। नालंदा, विक्रमशिला और तक्षशिला जैसे हमारे प्राचीन विश्वविद्यालयों में ज्ञान और नव..

राफेल पर कांग्रेस के झूठ की पराकाष्ठा : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

राजनीति के बारे में कहा यही जाता है कि‍वह शब्‍दों से खेलती है, शब्‍दों के आडम्‍बर से एक काल्‍पनिक संसार बनाती है और उस काल्‍पनिक संसार को सच में बदलने के लिए फिर अपने कार्यकर्ताओं के माध्‍यम से जतन करती है। वस्‍तुत: यही परि..

हिन्दुत्व अर्थात भारतीयता - राष्ट्र की सनातन पहचान से परहेज कैसा? - नरेन्द्र सहगल

हिन्दुस्थान में हिन्दुत्व का विरोध हो, तो हिन्दुस्थानियों के लिए इससे दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है? इसके लिए वर्तमान राजनीतिक वातावरण जिम्मेदार है और इस वातावरण को बनाया है उन लोगों ने जिन्हें राष्ट्र और समाज की भारतीय अवधारणा से कुछ भी लेन..

निष्काम कर्मयोगी राजनेता - पंडित दीनदयाल उपाध्याय - रितेश दुबे

पुण्य भूमि भारत में अनेक महापुरूषों ने जन्म लिया है ,उनमें से एक थे निष्काम कर्म योगी पंडित दीनदयाल उपाध्याय । पंडित जी कहा करते थे देश के लिये मरने वाला जितना महान होता है ,उतना ही महान देश और समाज के लिये जीने वाला होता है जीते जी समाज के लिए समर्पित हो..

संघ प्रमुख की बेबाक राय से बदलेगी आम जन में संघ के प्रति धारणा!- कृष्णमोहन झा

अभी तक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए समर्पित संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सारे महत्वपूर्ण कार्यक्रम उसके मुख्यालय नागपुर तक ही सीमित रहा करते थे, परंतु हाल ही में उसने अनूठी व्याख्यानमाला का आयोजन देश की राजधानी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में किया। इस व..

संघ ने दी वैचारिक चुनौती भाग खड़े हुए संघ विरोधी - नरेन्द्र सहगल

हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय संवाद-सम्मेलन में  आमंत्रित किए जाने के बावजूद भी संघ विरोधियों ने दूरी बनाए रखी। इतना ही नहीं, इन लोगों ने राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रनीति को सुनने और सहमत होने से भी इन्कार कर दि..

भविष्य का भारत : ‘परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्’ – लोकेन्द्र सिंह

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन दिवसीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम पर सबकी नजर है। देश में भी और देश के बाहर भी। सब जानना चाहते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संगठन आरएसएस ‘भविष्य का भारत’ को किस तरह देखता है? संघ का ‘भा..

सर्वसमावेशी संघ : समय के साथ आगे बढ़ता - आशीष अंशु

 भोपाल(विसंके). चन्द्रभान प्रसाद ने यह बात दलित समाज को लेकर कही थी। दलित चिन्तकों ने दलितों को जहां वे खड़े हैं, उससे बीस साल पीछे धकेल दिया है। दलित चिन्तक दलितों को लेकर इतने चिन्तित है कि उन्हें यकिन ही नहीं होता कि दलित आगे बढ़ रहा है। इस दुख मे..

भविष्य का भारत और संघ - डॉ. मयंक चतुर्वेदी

जब १९४७ में भारत आजाद हो गया उसके बाद हैदराबाद की जनता भी भारत में विलय चाहती थी. पर उनके आन्दोलन को निजाम ने अपनी निजी सेना रजाकार के द्वारा दबाना शुरू कर दिया. रजाकार एक निजी सेना (मिलिशिया) थी जो निजाम ओसमान अली खान के शासन को बनाए रखने तथा हैदराबाद को..

‘हिन्दीपन’ से मिलेगा हिंदी को सम्मान

भोपाल(विसंके). भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है। बल्कि, इससे इतर भी बहुत कुछ है। भाषा की अपनी पहचान है और उस पहचान से उसे बोलने वाले की पहचान भी जुड़ी होती है। यही नहीं, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक भाषा का अपना संस्कार होता है। प्रत्येक व्..

संघ का अंतिम लक्ष्य परम वैभवशाली भारत- नरेन्द्र सहगल

भोपाल(विसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कल्पना में ‘परमवैभवशाली भारत’ ही भविष्य का भारत है। यही कल्पना स्वामी विवेकानन्द, स्वामी दयानन्द, स्वामी रामतीर्थ, महर्षि अरविंद, डॉक्टर हेडगेवार, सुभाष चन्द्र बोस,&n..

भला ऐसा समाजवाद और कहाँ.. - जयराम शुक्ल

भोपाल(विसंके). जैसा कि पिछले साल "अगले बरस तू लौकर आ" का वायदा किया था, गणपत बप्पा घर-घर पधार गए। क्या महाराष्ट्र, क्या गुजरात, समूचा देश आज से गणपति मय है। बड़े गणेशजी, छोटे गणेशजी, मझले गणेशजी।  गणेशजी जैसा सरल और कठिन देवता और कौन? लालबाग के राजा ..

‘सवर्ण’ और ‘दलित’ हिन्दुओं को बांटने का षड्यंत्र है यह समाजघातक शब्दावली - नरेन्द्र सहगल

भोपाल(विसंक). मैं अपनी बात को एक प्रश्न के साथ शुरु करता हूं। जब अनेक सड़कों, शहरों, योजनाओं, संस्थाओं और अदारों के नाम बदले जा रहे हैं तो फिर समाज को तोड़ने वाली सवर्ण और दलित जैसी खतरनाक शब्दावली को क्यों नहीं बदला जा रहा? इन दिनों दलित बन..

देश विरोधी विचार रखने वालों के समर्थन में यह कौन लोग है? – डॉ. नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). भारत शुरू से ही एक उदार प्रकृति का देश रहा है, सहनशीलता इसकी पहचान रही है और आत्म चिंतन इसका स्वभाव। लेकिन जब किसी देश में उसकी उदार प्रकृति का ही सहारा लेकर उसमें विकृति उत्पन्न करने की कोशिशें की जाने लगें, और उसकी सहनशीलता का ही सहारा ले..

भारत के आर्थिक विकास पर बेवजह विवाद : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). विश्वभर में सभी देशों के बीच भारत तेजी के साथ आर्थिक विकास की दौड़ लगा रहा है।  तमाम आलोचनाओं और विरोधों के बीच निरंतर भारत का विकास दर में आगे होते जाना इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की सरकार आर..

राष्ट्रद्रोह को असहमति के साथ मत फेंटिए जनाब!साँच कहै ता- जयराम शुक्ल

भोपाल(विसंके). डाक्टर राममनोहर लोहिया ने कहा था- जब हम किसी का जिंदाबाद बोलते हैं तो उसका मुर्दाबाद करने का अधिकार स्वमेव मिल जाता है। डाक्टर लोहिया नेहरू युग में असहमति के प्रखर स्वर रहे हैं। स्वस्थ लोकतंत्र में असहमति का दर्जा सबसे महत्वपूर्ण होता है क्..

अनुच्छेद 35 ए की संवैधानिकता सवालों के घेरे में - भरतचन्द्र नायक

भोपाल(विसंके).  जम्मू कश्मीर के नागरिकों के लिए विशेष अधिकार और सुविधाओं से जुड़ा अनुच्छेद 35 ए न्यायिक समीक्षा में है। सर्वोच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की खंडपीठ इस पर विचार करेगी। मामला चारू बाली खन्ना की याचिका के कारण सुनाई में आया ..

देश तोड़ने वालों का कैसा मानवाधिकार - डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). एक बड़ा प्रश्न है कि देश तोड़ने वालों का कैसा मानवाधिकार ? वस्तुतः जिन लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने की साजिश में पकड़ा गया है, उन पर नक्सलियों से साठगांठ रखने के आरोप पहले से लगते रहे हैं, किन्तु राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ..

लोक कलाएं हैं ज्ञान का भंडार

पतंजलि ने योग की जिन आठ परंपराओं को प्रस्तुत किया वह आज बाबा रामदेव के प्रयास से लोकप्रिय हुई है, लेकिन हमारे पूर्वजों ने योग एवं स्वास्थ्य के अभिन्न संबंध को समझकर हर लोक नृत्य में योग की प्रक्रिया का संगीतमय और लालित्यपूर्ण समावेशन किया। गोटी पुआ नृत्य ..

गांधी, लोहिया और उपाध्याय का अदभुत सम्मिश्रण स्वयंसेवक ‘अटल’ - नरेन्द्र सहगल

भोपाल(विसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निष्ठावान स्वयंसेवक अटलबिहारी वाजपेयी अपने बाल्यकाल से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक अपने स्वयंसेवकत्व पर अटल रहे। संघ का स्वयंसेवक अर्थात अपने संगठन, समाज और राष्ट्र के हित में स्वयं की प्रेरणा से निःस्वार्थ भा..

असम की 40 लाख आबादी को कौन देगा शरण ? - कृष्णमोहन झा

भोपाल(विसंके). असम में अवैध रूप से रह रहे विदेशी घुसपैठियों का पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन (एनआरसी) बनाने के निर्देश दिए थे तब कोर्ट की निगरानी में दो मसौदे तैयार किए गए। पहला मसौदा विगत वर्ष 31 दिसंबर को जारी किया गया था, जि..

इमरान खान ने पहना है कांटों भरा ताज - कृष्णमोहन झा

भोपाल(विसंके). पाकिस्तान की नेशनल असेम्बली के हॉल ही में संपन्न हुए चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें पाने वाली तहरीफ़- ए इंसाफ पार्टी के मुखिया इमरान खान जल्द ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री  के रूप में शपथ ले सकते है। इमरान की पार्टी को 272 सीटों पर हुए चुना..

नर्मदा घाटी संदर्भ: आदिवासी दिवस व बाबासाहेब – प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). जनजातीय समाज की प्रतिष्ठा, उसके रक्षण व विकास की भारत में प्राचीन परंपरा रही है. प्रकृति पूजन हमें वेदों से प्राप्त हुआ जिसके प्रति  नगरीय समाज की अपेक्षा जनजातीय समाज अधिक आग्रही रहा. जनजातीय समाज रक्षण का पात्र नहीं अपितु शेष समाज का..

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 8 - नरेन्द्र सहगल

विदेशी/विधर्मी परतंत्रता के कारणों पर गहरा मंथन भोपाल(विसंके). सन् 1922 में डॉक्टर हेडगेवार को मध्य प्रांत की कांग्रेस इकाई ने प्रांतीय सह मंत्री का पदभार सौंप दिया। डॉक्टर जी ने कांग्रेस के भीतर ही एक संगठित स्वयंसेवक दल बनाने का प्रयास किया थ..

वे पंद्रह दिन... 3 अगस्त, 1947 - प्रशांत पोळ

भोपाल(विसंके). आज के दिन गांधीजी की महाराजा हरिसिंह से भेंट होना तय थी. इस सन्दर्भ का एक औपचारिक पत्र कश्मीर रियासत के दीवान, रामचंद्र काक ने गांधीजी के श्रीनगर में आगमन वाले दिन ही दे दिया था. आज ३ अगस्त की सुबह भी गांधीजी के लिए हमेशा की तरह ही थी. अगस्..

देश देख रहा है - डॉ. नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). आज राजनीति केवल राज करने अथवा सत्ता हासिल करने मात्र की नीति बन कर रह गई है उसका राज्य या फिर उसके नागरिकों के उत्थान से कोई लेना देना नहीं है। यही कारण है कि आज राजनीति का एकमात्र उद्देश्य अपनी सत्ता और वोट बैंक की सुरक्षा सुनिश्चित करना र..

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 2 - नरेन्द्र सहगल (1 अगस्त से 14 अगस्त तक जारी)

भोपाल(विसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जन्मजात स्वतंत्रता सेनानी थे। ‘‘हिन्दवी स्वराज’’ के संस्थापक छत्रपति शिवाजी, खालसा पंथ का सृजन करने वाले दशमेशपिता श्रीगुरु गोविंदसिंह और आर्यसमाज के सं..

वे पन्द्रह दिन…/ 02 अगस्त 1947- प्रशांत पोल

17, यॉर्क रोड…. इस पते पर स्थित मकान, अब केवल दिल्ली के निवासियों के लिए ही नहीं, पूरे भारत देश के लिए महत्त्वपूर्ण बन चुका था. असल में यह बंगला पिछले कुछ वर्षों से पंडित जवाहरलाल नेहरू का निवास स्थान था. भारत के ‘मनोनीत’ प्रधानमंत्री क..

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम - नरेन्द्र सहगल (1 अगस्त से 14 अगस्त तक जारी)

भोपाल(विसंके). एक प्रखर स्वतंत्रता सेनानी डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने जन्मकाल से आज तक नाम, पद, यश, गरिमा, आत्मप्रसंशा और प्रचार से कोसों दूर रहकर राष्ट्र हित में समाजसेवा, धर्मरक्षा और राष्ट्रभक्..

1 अगस्त, 1947 का वो पहला दिन - प्रशांत पोळ (वे पंद्रह दिन भाग – 1)

भोपाल(विसंके). शुक्रवार, १ अगस्त १९४७. यह दिन अचानक ही महत्त्वपूर्ण बन गया. इस दिन कश्मीर के सम्बन्ध में दो प्रमुख घटनाएं घटीं, जो आगे चलकर बहुत महत्त्वपूर्ण सिद्ध होने वाली थीं. इन दोनों घटनाओं का आपस में वैसे तो कोई सम्बन्ध नहीं था, परन्तु आगे होने वाले..

असम में जाति माटी भेटी की विजय - प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). प्लेटो के शिष्य व सिकंदर के गुरु अरस्तु ने कहा था – “राज्य से पृथक व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं होता” यही एनआरसी का सार है. राजनीति में ऐसा तब ही संभव हो पाता है जब एक शुद्ध राजनैतिक संगठन के पीछे एक विशुद्ध वैचारिक व सांस..

मुंशी प्रेमचंद की गाय आज के परिप्रेक्ष में - प्रमोद भार्गव

यह कहानी लेन-देन यानी ब्याज का धंधा करने वाले दाऊदयाल और एक गाय-बछड़े के मालिक व दाऊदयाल के ऋणी रहमान से जुड़ी है। दाऊ एक तरह से डंडा-बैंक चलाने वाले साहूकार हैं, क्योंकि वे 25-30 रुपए सैंकड़ा की दर से ब्याज पर कर्ज देते हैं और तय दिनांक को नहीं चुकाने पर ..

अपने पांव पर मजबूती से खड़ा है विश्व का सबसे बड़ा संगठन - नरेन्द्र सहगल

भोपाल(विसंके). भारतवर्ष के सम्पूर्ण राष्ट्रजीवन के प्रतीक, भगवान भास्कर के उदय की प्रथम रणभेरी, भारतीय संस्कृति की पूर्ण पहचान और भारत के वैभवकाल से लेकर आजतक के कृमिक इतिहास के प्रत्यक्षदर्शी परम पवित्र भगवा ध्वज को श्रीगुरु मानकर राष्ट्र के पुर्नउत्थान ..

क्यों है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गुरु 'भगवा ध्वज' ?

पर्वों, त्योहारों और संस्कारों की भारतभूमि पर गुरु का परम महत्व माना गया है। गुरु शिष्य की ऊर्जा को पहचानकर उसके संपूर्ण सामर्थ्य को विकसित करने में सहायक होता है। गुरु नश्वर सत्ता का नहीं, चैतन्य विचारों का प्रतिरूप होता है। रा. स्व. संघ के आरम्भ से ही भ..

शशि थरूर के हिंदुत्व पर दिये ब्यान के निहितार्थ - कृष्णमोहन झा

भोपाल(विसंके). कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर यूं तो अपने बयानों के लिए प्रायः सुर्खियों में रहते है परंतु कुछ दिनों पहले उन्होंने सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध मौत के मामले में अदालत से अग्रिम जमानत लेकर स्वयं को औऱ अधिक चर्चाओं में ला दिया था।अपनी तीसरी पत..

आधुनिक विचारों में हमारे कुछ मौलिक विचार कहीं खो गए – डॉ. नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). नारी, स्त्री, महिला वनिता, चाहे जिस नाम से पुकारो नारी तो एक ही है। ईश्वर की वो रचना जिसे उसने सृजन की शक्ति दी है, ईश्वर की वो कल्पना जिसमें प्रेम त्याग सहनशीलता सेवा और करुणा जैसे भावों  से भरा ह्रदय  है। जो  शरीर से भले ही..

पर्यावरणीय चिंता की आवश्यकता - रीतेश दुबे

भोपाल(विसंके). पिछले कई वर्षों से मानसून की भविष्यवाणियां सटीक नहीं बैठ पा रही जहां बारिश हो रही है वहां लगातार बाढ जैसे हालात बन रहे है और जहाँ पानी नहीं गिर रहा है वहां सूखे का अंदेशा है। कुछ बरस पहले तक जुलाई माह के पहले पखवाड़े में देश भर में मानसून छा..

झूठ के पांव नहीं होते, सोशल मीडिया ने अफवाहों को पंख दिये - भरतचन्द्र नायक

सोशल मीडिया हब बनाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव ने विपक्ष को विचलित कर दिया है। सर्वोच्च न्यायाल ने इसी तरह की एक यात्रिका विचार के लिए स्वीकृति करते हुए यह कहकर कि सरकार की मंशा निगरानी राज स्थापित करने की लगती है। इसे बहस का मुद्दा बना दिया है। लोकतंत्..

सजा का फैसला भीड़ के हाथों में मत जाने दीजिये – गिरीश उपाध्याय

भोपाल(विसंके). हमारे भोपाल में शनिवार को फिर वही हुआ जिसके बारे में मैंने 4 जुलाई को लिखा था। 12 दिन पुराने उस कॉलम में मैंने कहा था कि ‘’सोशल मीडिया पर लोकतंत्र को भीड़ तंत्र में बदला जा रहा है। अब वहां से फतवे जारी होते हैं और देखते ही देखते..

विवादित बयान इत्तेफाक या साज़िश -डॉ. नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). वैसे तो शशि थरूर और विवादों का नाता कोई नया नहीं है। अपने आचरण और बयानों से वे विवादों को लगातार आमन्त्रित करते आएँ हैं। चाहे जुलाई 2009 में भारत पाक के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और युसुफ रजा गिलानी के बीच हुई बातचीत के बाद जारी संय..

हिंदू धर्म और हिंदी में तलाक का कोई विकल्प नहीं

भोपाल(विसंके). हिन्दू धर्म में शादी के बाद पति-पत्नी के एक हो जाने के बाद उनके अलग होने का कोई प्रावधान नहीं है। हमारे यहां शादी को ईश्वरीय विधान माना जाता है और पति-पत्नी को विष्णु और लक्ष्मी का रूप। हिंदी में तलाक का कोई विकल्प ही नहीं है। तलाक व डाइवोर..

यह लड़ाई है अच्छाई और बुराई की - डॉ नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). उच्चतम न्यायालय ने 9 जुलाई 2018 के अपने ताजा फैसले में 16 दिसंबर 2012 के निर्भया कांड के दोषियों की फाँसी की सजा को बरकरार रखते हुए उसे उम्र कैद में बदलने की उनकी अपील ठुकरा दी है।  दिल्ली का निर्भया कांड देश का वो कांड था जिसने पूर..

हिंदुत्व को कांग्रेसी उपहार: “भगवा आतंकवाद” के बाद “हिंदू पाकिस्तान” – प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके).विश्व के सुप्रसिद्ध कूटनीतिज्ञ, राजनयिक, शासक व ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि“इतिहास  पढ़िए ,इतिहास  प..

फसाद की जड़ धारा 370 अलगाववादियों का यह ‘सुरक्षा कवच’ कब तक?- नरेन्द्र सहगल

भोपाल(विसंके). एक विशेष समुदाय के तुष्टीकरण के लिए भारत के संविधान में जबरदस्ती डाली गई धारा 370 भारत की राष्ट्रीयता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और संघीय ढांचे का मजाक उड़ा रही है। अब तो यह धारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ध्येय वाक्य ‘सब का साथ - सब..

आज दिशाओं के बारे में बताना चाहूंगी कि, कौन सी दिशा कितनी महत्वपूर्ण है - अंशुल उपाध्याय

भोपाल(विसंके). बातो ही बातों में एक दिन मैंने अपने पिता जी से पूछ लिया की सूर्य पूर्व से निकलता है। तो क्या पूर्व दिशा ही सबसे बड़ी है चारो दिशाओं में?? तब पिता जी ने जो कहा वह बताती हूँ। उन्होंने कहा नहीं पूर्व सबसे बड़ी नहीं है मैंने पूछा क्यों उन्होंने क..

वेगड़ जी का जाना - प्रशांत पोळ

भोपाल(विसंके). १९८३ का दिसंबर या जनवरी का महीना. मेरे जिगरी दोस्त के बड़े भाई का विवाह था, भोपाल में. बाराती बन के हम भी गए थे. सुबह थोड़ा समय था, सोचा भारत भवन घूम के आते हैं. हम दो-तीन दोस्त भारत भवन में गए. वहां सैयद हैदर रझा जी के चित्रों की प्रदर्शनी..

केवल फाँसी की सजा से नही सामाजिक भय से रुकेगी दुष्कर्म की घटना! - कृष्णमोहन झा

भोपाल(विसंके). मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में बेटी बचाओ अभियान शुरू कर समूचे प्रदेश की बेटियों को यह भरोसा दिलाया था कि उनके शासन में बेटियों के सम्मान,सुरक्षा एवं उन्हें समानता का अधिकार प्रदान करने में कोई कसर बाकी नही रखी जाएग..

किसी मुस्लिम गड़रिये ने नहीं खोजी अमरनाथ गुफा- प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). आजकल जबकि प्रतिवर्ष अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं पर मुस्लिम आतंकवादियों का ख़तरा मंडराता रहता है व यात्रियों पर घातक हमले भी होते रहते हैं तब ऐसे जहरीले वातावरण में एक झूठी मान्यता यह भी प्रायोजित कर दी गई है कि वर्ष 1850 में एक कश्मीर..

अमरनाथ यात्रा पर इस्लामी कहर का भय : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). हम लोकतांत्रिक देश में रहते हैं। हमारा संविधान प्रत्येक भारतवासी को कुछ मौलिक अधिकार देता है। यह अधिकार इस बात की घोषणा करते हैं कि सभी भारतीय एक समान हैं और उनके बीच कानून, धर्म, लिंग के आधार पर, लोक नियोजन के अवसरों में तथा अस्पृश्यता के ..

मैला प्रथा पर भारतीय संवेदनहीनता : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). जिस देश में छोटी-छोटी बातें भयंकर लड़ाई का स्वरूप ले लेती हों और अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल से जहां लोग एक-दूसरे को मारने से लेकर आत्महत्या तक करने के लिए प्रेरित हो उठते हों उस देश में यदि सिर पर मैला उठाने की प्रथा विद्यमान रहे और इसकी प..

कम्युनिस्टों को तानाशाह बताते थे डॉ. आंबेडकर

भोपाल(विसंके). यह कुछ वैसा ही है कि ‘ उल्टा चोर कोतवाल को डांटे ’ । पिछले कई दशकों से इस देश के कम्युनिस्ट संगठन व मार्क्सवादी बुद्धिजीवी स्वयं को बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का मानस-पुत्र दिखाने का प्रयास कर उन लाखों दलितों की आंखों में धूल झोंक..

आपातकाल : जब 'भारत माता की जय' कहना भी अपराध था - लोकेन्द्र सिंह

भोपाल(विसंके). आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय है। आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता का हनन ही नहीं किया गया, अपितु वैचारिक प्रतिद्वंदी एवं जनसामान्य पर अमानवीय अत्याचार भी किए गए। आपातकाल के विरुद्ध आवाज उठाने वाले लोगों को पकड़..

खूंटी सामूहिक बलात्कार के पीछे चर्च और नक्सलियों का खतरनाक गठजोड़ - लोकेन्द्र सिंह

भोपाल(विसंके). झारखंड के खूंटी जिले में पाँच महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं से सामूहिक बलात्कार और पुरुष कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट एवं उन्हें पेशाब पिलाने का अत्यंत घृणित कृत्य सामने आया है। यह बहुत दु:खद और डरावनी घटना है। पीडि़त महिलाएं एवं पुरुष अनुसूचित ..

जम्मू-कश्मीर, भाजपा और देश भक्ति

भोपाल(विसंके). बीजेपी के साथ गठबंधन सरकार बनाते वक्त जिस साझा विकास के एजेंडे पर चलकर राज्य को देश के अन्य राज्यों की तरह ही विकास की मुख्यधारा में लाने का वादा किया था, वह उससे इतर अपने ही साम्प्रदायिक और राष्ट्रद्रोही लक्ष्य पर चलती रही हैं, जिससे न केव..

प्रारंभिक शिक्षा का बाजारीकरण

भोपाल(विसंके). इन दिनों देश के ज्यादातर हिस्सों में स्कूलों में दाखिलों का दौर चल रहा है. हर तरह के अच्छे स्कूलों में प्रवेश को लेकर मारामारी है. इनमे प्री-स्कूल भी शामिल है. बीते कुछ समय से अभिभावकों को प्री स्कूलों में भी बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए ..

क्या राष्ट्रपति शासन से सुधर पायेगी कश्मीर समस्या ?- कृष्णमोहन झा

भोपाल(विसंके). जम्मू कश्मीर में 6 माह के लिए राज्यपाल का शासन लागू कर दिया गया है।राज्यपाल एन एन वोहरा चौथी बार ये जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार है। उनका जून माह में समाप्त हो रहा कार्यकाल तीन माह औऱ बढ़ा दिया गया है। एनएन वोहरा को राज्यपाल शासन के तहत प..

स्वतंत्रता संग्राम का एक अज्ञात सेनापति - नरेन्द्र सहगल

भोपाल(विसंके). चिर सनातन अखण्ड भारत की सर्वांग स्वतंत्रता के लिए कटिबद्ध राष्ट्रीय स्वयंसेवक के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार स्वतंत्रता संग्राम के एक ऐसे अज्ञात सेनापति थे जिन्होंने अपने तथा अपने संगठन के नाम से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में अपना तन मन सब कुछ भारत ..

कश्मीर की पंचामृत सरकार का विसर्जन - प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). सीजफायर केवल सेना व आतंवादियों में नहीं था, भाजपा व पीडीपी में भी था. संघर्ष विराम पिछले रमजान माह मात्र में नहीं था बल्कि साढ़े तीन वर्षों से चल रहा था. सीजफायर छः वर्षों के लिए किया गया था जिसे साढ़े तीन वर्षों में अब योजना बद्ध नीति से तोड़..

जीवन जीने की कला है योग -डॉ. नीलम महेन्द्र

भोपाल(विसंके). "योग स्वयं की स्वयं के माध्यम से स्वयं तक पहुँचने की यात्रा है,   गीता  " योग के विषय में कोई भी बात करने से पहले जान लेना आवश्यक है कि इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह  है कि आदि काल में इसकी रचना, और वर्तमान समय में इसका ज्ञा..

वीरे की वेडिंग में भारतीय माँ - बहनों की नई भूमिका - गीतिका वेदिका(फिल्म समीक्षा )

भोपाल(विसंके). फ़न्तासी की परिपक्व चार युवरानियाँ जो हर समय रिश्तों को लेकर उलझन में हैं, रिश्ते जोड़ने को लेकर उलझन में हैं, रिश्ते तोड़ने को लेकर उलझन में हैं। बनते रिश्ते बिगाड़ने पर उतारू हैं और तिस पर विरोधाभास कहिये या महाविडम्बना, फ़िल्म का शीर्षक है 'व..

अटल बिहारी वाजपेयी होने का मतलब - संजय द्विवेदी

भोपाल(विसंके). अटलबिहारी वाजपेयी यानि एक ऐसा नाम जिसने भारतीय राजनीति को अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से इस तरह प्रभावित किया जिसकी मिसाल नहीं मिलती। एक साधारण परिवार में जन्मे इस राजनेता ने अपनी भाषण कला, भुवनमोहिनी मुस्कान, लेखन और विचारधारा के ..

दाल में काला – विजय मनोहर तिवारी

भोपाल(विसंके). मैं रजनीकांत का फैन नहीं हूं मगर उनकी फिल्में देख लेता हूं। खासकर हिंदी में डब। उसमें रजनीकांत की आयातित आवाज रजनी के आक्रामक किरदार को और असरदार बनाती है-कूल SSSS। मगर काला नाम की फिल्म दाल में काला है। एक गहरी साजिश। आप इसे भीमा कोरेगांव..

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस्लाम के कई भ्रमित करने वाले कल्पित नैरेटिव

भोपाल(विसंके). अंतरराष्ट्रीय समुदाय में सबसे ज़्यादा महत्व इस बात का होता है कि आपने अपने पक्ष में क्या "नैरेटिव" बनाया है और इस्लाम को इसमें महारत हासिल है. दुनिया की यह एक चौथाई आबादी ख़ुद को "विक्टिम" साबित करने के खेल में हमेशा क़ामयाब रहती है. ..

किसान संकट में आंदोलन की नहीं समाधान की दरकार - भरतचन्द्र नायक

भोपाल(विसंके). भारतीय समजा में कुछ श्रेष्ठ परम्पराएं रही हंै। कहते हैं कि यज्ञोपवीत के तीन धागे देखकर देवराज इन्द्र ऐरावत हाथी से उतर कर विप्रदेव को प्रणाम करते थे। बदलते परिवेश में आज सामाजिक प्राथमिकताओं में विप्र देव कहां पर है यह कुछ दिनों से समाज को ..

प्रकृति संरक्षण का संदेश देती भारतीय परम्पराओं को फिर से अपनाना होगा - सत्यकीर्ति दीक्षित

भोपाल(विसंके). पंच प्रकृतियाँ, पंच महाभूतों (क्षितिज, जल, पावक, गगन और समीर) तत्व से मिलकर बनी है, इनमें. जल तत्व की अहम महत्ता है | पृथ्वी का 71 प्रतिशत भूभाग जल से आच्छादित है। भारतीय दर्शन की मान्यता के अनुसार जल से ही धरती की उत्पत्ति हुई है। मानव सभ्..

पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र और मानवता की हत्या - लोकेन्द्र सिंह

भोपाल(विसंके). पश्चिम बंगाल में खूनी राजनीति के शिकंजे में फंसे लोकतंत्र का दम घुंट रहा है और वह सिसकियां ले रहा है। पंचायत चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जिस प्रकार हिंसा का नंगा नाच किया था, उससे ही साफ जाहिर हो गया था कि बंगाल की र..

प्रणब मुखर्जी का संघ मुख्यालय जाना - प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). इन दिनों संघ के प्रति उत्सुकता जिज्ञासा को शत प्रतिशत बढ़ा दिया है पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ! हुआ कुछ यूं कि संघ के व्यवस्थापकों ने नागपुर में प्रति वर्ष अपने नागपुर मुख्यालय में होने वाले संघ के तृतीय वर्ष के समापन आयोजन में, जिसे ..

हिंदुत्व धर्म नहीं हमारी सांस्कृतिक पहचान है - जयराम शुक्ल

भोपाल(विसंके). आज स्वात्रत्य वीर सावरकर का जन्म दिवस है। सावरकरजी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे जीनियस क्रांतिकारी और विचारक थे।  ये वही महापुरुष थे जिन्होंने .द वार आफ इंडियन इंडिपेंस: १८५७ .. लिखकर यह बताया कि यह भारत का प्रथम स्वात्रंत्य समर ..

देश बदलना है तो देना होगा युवाओं को सम्मान - डॉ. नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). भारत एक युवा देश है। इतना ही नहीं , बल्कि युवाओं के मामले में हम विश्व में सबसे समृद्ध देश हैं। यानि दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा युवा हमारे देश में हैं। भारत सरकार की यूथ इन इंडिया,2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 1971 से 2011 के बीच य..

गांव बंद आन्‍दोलन से मध्‍यप्रदेश की अर्थव्‍यवस्‍था को तोड़ने का षड्यंत्र : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). पूर्ण कर्ज मुक्ति, सुनिश्चित आमदनी और स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करवाने के उद्देश्‍यों को लेकर एक से दस जून तक मध्‍यप्रदेश में किसान संगठन मिलकर गांव बंद आन्‍दोलन चलाने जा रहे हैं। जिसमें कि  किसान संगठन प्रत्&zw..

खबरें जिन पर झूठ चिपकाकर देश का माहौल बिगाड़ा गया -रमेश शर्मा

भोपाल(विसंके). भारत में जिस तरह साहित्य के पुरुस्कार लौटाकर दबाव बनाने वाले समूह है उसी प्रकार मीडिया में भी एक वर्ग है जो सरकार के बारे में यह बात फैला रहा है कि सरकार मीडिया की स्वतंत्रता से दबाने की कोशिश कर रही है। जबकि हकीकत कुछ और है।देश में पिछले क..

टीपू सुल्तानी सोच व हिंदू -लिंगायत विभाजन की पराजय - प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके).कर्नाटक विधानसभा चुनाव के संदर्भ में एक बात बड़ी ही स्पष्ट दिख रही थी; और वह यह थी कि कांग्रेस इस चुनाव को अपना अंतिम किला बचाने की लड़ाई के रूप में देख रही थी और भाजपा इस चुनाव में कर्नाटक को अपने दक्षिणी राज्यों में प्रवेश का स्वागत द्वार बन..

मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर पर एकल संवाद- विजय मनोहर तिवारी

भोपाल(विसंके).मिस्टर जिन्ना जब मुल्क को बांटकर दीवार खिंचवा दी तो दीवार के इस तरफ क्यों टंगे रहे? दीवार के उस तरफ ही तुम्हारी जगह होनी चाहिए थी। यहां जरूरत ही नहीं थी। हम ताे तस्वीरों और बुतों को मानने वाले लोग हैं। लेकिन तुम्हारी तस्वीर सिर्फ दीवार पर टं..

बुजुर्गों को लेकर मोदी चिंताएं : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). भारतीय संस्‍कृति में अपने माता-पिता और अन्‍य बुजुर्गों की चिंता करने की नसीयत ठीक उसी तरह दी गई है, जैसे कि हम अपने नवजात शिशु की देखभाल करते हैं। जिस देश में बचपन से ही बताया जाता रहा है कि मातृ देवो भवः ! पितृ देवो भवः ! आचार्य ..

नफरत की आग लगाना सरल है लेकिन .. - डॉ. किशन कछवाहा

भोपाल(विसंके). जहरीली सियासत की आंधी लगभग देश के अधिकांश हिस्सों में देखा जाना एक  अच्छा लक्षण नहीं माना जा सकता है. लोकतंत्र में बातों को और गंभीर समस्याओं को भी जनहित की दृष्टी से देखा जाता है, देखा जाना भी चाहिए. लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने अनुसुचि..

कर्नाटक में कांग्रेस का कुटिल दांव - हिंदू लिंगायत विभाजन

भोपाल(विसंके). भारत में हिंदू को अल्पसंख्यक बनाने के षड्यंत्र पूर्वक प्रयास पिछले कई दशकों से चल रहें हैं. प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष चलने वाले इन षड्यंत्रों को कई रूपों में अलग अलग प्रकार से चलाया जाता है. मुस्लिम व ईसाई जनसंख्या को वभिन्न माध्यमों से बढ़..

झूठ क्यों बोलते हैं राहुल गांधी? - लोकेन्द्र सिंह

भोपाल(विसंके). कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और उनके राजनीतिक सलाहकारों का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संबंध में अध्ययन ठीक नहीं है। इसलिए जब भी राहुल गांधी संघ के संबंध में कोई टिप्पणी करते हैं, वह बेबुनियाद और अतार्किक होती है। संघ के संबंध म..

पत्रकारिता के दार्शनिक आयाम का आधार है 'आदि पत्रकार नारद का संचार दर्शन'- लोकेन्द्र सिंह

भोपाल(विसंके). भारत में प्रत्येक विधा का कोई न कोई एक अधिष्ठाता है। प्रत्येक विधा का कल्याणकारी दर्शन है। पत्रकारिता या कहें संपूर्ण संचार विधा के संबंध में भी भारतीय दर्शन उपलब्ध है। देवर्षि नारद का संचार दर्शन हमारे आख्यानों में भरा पड़ा है। हाँ, य..

हिंदू बौद्ध संयुक्त रूप में आज भी विश्वगुरु हैं हम- – प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). बुद्ध जयंती अर्थात बुद्ध पूर्णिमा या वेसाक या हनमतसूरी बौद्ध धर्मावलम्बियों के साथ साथ सम्पूर्ण भारत वर्ष के लिए एक महत्वपूर्ण, आस्था जन्य और उल्लासपूर्वक मनाया जानें वाला पर्व है. भगवान् बुद्ध के अवतरण का यह पर्व वैशाख पूर्णिमा के दिन पड़ता..

कर्नाटक : राजनेताओं के बीच जहां राम से अधिक होती है भक्तों की पूजा - डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). प्रभु श्रीराम के बारे में सदियों से भारत में चहूं ओर यही बात कही और सुनी जाती है कि राम से बड़ा राम का नाम है जो काम स्वयं श्रीराम नहीं कर पाते, वह काम उनके नाम का जाप करने मात्र से पूरा हो जाता है। निश्‍चित ही उत्‍तरभारत की ..

नक्सलवाद को हराती सरकारी नीतियाँ -डॉ. नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). 24 अप्रैल 2017 को जब "नक्सली हमले में देश के 25 जवानों की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे" यह वाक्य देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था, तो देशवासियों के जहन में सेना द्वारा 2016 में  की गई सर्जिकल स्ट्राइक की यादें ताजा हो ग..

धुंध और तनाव फैलाकर प्रगति रोकने की साजिश-रमेश शर्मा

भोपाल(विसंके). अदालत का एक और फैसला आया। मक्का मस्जिद ब्लास्ट में असीमानंद एवं सभी आरोपी निर्दोष छूटे। इससे पहले इसी प्रकार के दो और प्रकरणों में ऐसा हुआ। इसके अलावा कठुआ बलात्कार कांड के आरोपियों ने नारको टेस्ट की मांग की? उन्होंने यह टेस्ट दोनों का मांग..

कांग्रेस के गले में अटका महाभियोग प्रस्ताव - सुरेश हिन्दुस्थानी

भोपाल(विसंके). वर्तमान में देश में जिस प्रकार की विरोधात्मक राजनीति की जा रही है, वह केवल अविश्वसनीयता के दायरे को और बड़ा करती हुई दिखाई देती है। इसको विपक्षी राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों की नकारात्मक चिंतन की राजनीति कहा जाए तो ज्यादा ठीक होगा। विरो..

संविधान सार्थकता की कसौटी पर

भोपाल(विसंके). इस पृथ्वी पर जिसे पुण्यभूमि की संज्ञा दी जा सकती है, वह देश है भारतवर्ष. यहाँ क्षमा, धैर्य, दया, शुद्धता आदि सद्वृत्तियों का निरन्तर विकास हुआ है. ये मानव जाति का कल्याण करने वाली सद्वृत्तियां हैं, यहाँ आध्यात्म और आत्मा के बारे खोज की गयी ..

‘डॉ. बाबासाहब आंबेडकर और राष्ट्रीय धारा’ - प्रशांत पोळ

भोपाल(विसंके). डॉ. बाबासाहब आंबेडकर जी का भारत की राष्ट्रीय धारा का भरपूर अभ्यास था. उनके प्रबंध का विषय ही था, ‘भारत के राष्ट्रीय लाभांश का इतिहासात्मक और विश्लेषणात्मक अध्ययन’ (The National Divident of India – A Historical and Analytic..

डॉ. भीमराव अम्बेडकर, ब्राहम्ण और संस्कृत -रीतेश दुबे

भोपाल(विसंके). भारतीय वाड्ग्मय कहता है ‘‘जन्म जायते शूद्र‘‘ अर्थात् हर व्यक्ति जन्म से शूद्र होता है एवं कर्म ओैर गुण से ही ब्राहम्ण बनता अतः हमारी संस्कृति में मनुष्य का जन्म से नहीं कर्म व गुण से महान होना बतलाया गया है। ऐसी महान..

किसने कहा कि पुष्यमित्र शुंग के काल में ब्राह्मण और दलित जैसा विभाजन था -विवेक भटनागर

भोपाल(विसंके). यह विभाजन मुसलमानों और अंग्रेजों की देन है। वे अपने शासनकाल के दौरान हमारी वर्ण व्यवस्था को समझ ही नहीं सके। मुस्लमानों को शेख सैयद, मुगल व पठान जैसे विशेषणों वाली जाती व्यवस्था की आदत थी और अंग्रेजों में स्टूअर्ट, बार्बू, हेनरी और जैसी उच्..

सत्ता की तड़प और विरोधी दलों की राजनीति - सुरेश हिन्दुस्थानी

भारतीय राजनीति कब किस समय कौन सी करवट बैठेगी, यह कोई भी विशेषज्ञ अनुमान नहीं लगा सकता। अगर इसका अनुमान लगाएगा भी तो संभव है कि उसका यह अनुमान भी पूरी तरह से गलत प्रमाणित हो जाए। हमारे देश में लम्बे समय तक सत्ता पक्ष की राजनीति करने वालों राजनेताओं के लिए ..

कर्नाटक का एक मठ ऐसा भी जहाँ सत्ता के लिए राजनेता टेकते हैं माथा – डॉ. मयंक चतुर्वेदी

कर्नाटक राज्‍य में कहने को तो यहाँ मंदिर और मठों की संख्‍या उंगलियों में गिनने में आने से भी ज्‍यादा है, लेकिन इस विविध पंथ, धर्म एवं दर्शक के प्रदेश में 30 जिलों में 600 से ज्यादा बड़े मठ हैं। जिसमें कि अत्‍यधिक मान्‍य राज्य में लिंगा..

रामराज: आधुनिक भारत की सर्वोपरि आवश्यकता

राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट. ये वाक्य न जानें कहनें वाले ने किन अर्थों में किस आव्हान को करते हुए कहा था किन्तु वर्तमान भारत में यह आव्हान चरितार्थ और सुफलित होता दिखाई पड़ रहा है. तथ्य है कि भारत में जब यहाँ के एक सौ तीस करोड़ लोग बात करतें हैं तब औसत..