आलेख

संगठित समाज से हारता रहा है संकटकाल

हितेश शंकर अनुभवसिद्ध बात यह है कि जब भी हमारे सामने कोई संकटकाल या आपातकाल आया है, समाज ने एकजुट होकर उसका सामना किया है और उस पर विजय भी प्राप्त की है। ऐसा इसलिए होता है कि हम भारत को धरती का टुकड़ा नहीं, बल्कि मां मानते हैं कोई शब्द जैसे अचनाक हमा..

भारत के कम्युनिस्टों का गुरु – चीन - प्रशांत पोळ

आज गुरुपूर्णिमा के दिन, बड़ा विचित्र संयोग बन रहा हैं. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी इस वर्ष १७ अक्तूबर को अपने सौ वर्ष पूर्ण करने की खुशी मना रही हैं, तो वहां उनका गुरु, उनका प्रेरणास्त्रोत, उनका मेंटर, चीन, भारत की ओर देखकर आंखे तरेर रहा हैं, सीमा विवाद खड़..

इतिहास याद रखेगा! जब सैनिक सीमा पर लड़ रहे थे कांग्रेस उनकी टांग खींच रही थी.

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में अब राष्ट्रीय कुछ भी नहीं बचा ! इस वक्त सारी दुनिया कोरोना की महामारी से दो-दो हाथ कर रही है, लेकिन कोरोना के इस संकट काल में भारत को कोरोना, धूर्त पाकिस्तान और चालबाज चीन की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. ..

संघ, स्वयंसेवक और श्री गुरुदक्षिणा

अपने पांव पर मजबूती से खड़ा है विश्व का सबसे बड़ा संगठन -नरेन्द्र सहगल भारतवर्ष के सम्पूर्ण राष्ट्रजीवन के प्रतीक, भगवान भास्कर के उदय की प्रथम रणभेरी, भारतीय संस्कृति की पूर्ण पहचान और भारत के वैभवकाल से लेकर आजतक के कृमिक इतिहास के प्रत्यक्ष..

लेह दौरे पर 1971 की तस्वीर से क्या साबित करना चाहती है कांग्रेस...?

  डॉ अजय खेमरिया   चीन विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लेह दौरा नए भारत का अपने आप मे एक महत्वपूर्ण सन्देश है।गलवन घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद देश भर में चीन के प्रति गुस्से से भरी जनभावनाओं की अभिव्यक्ति के तौर पर इस सरप्राइज विजिट को लिए जाने की जरूरत है।यह दौरा दुनियां के साथ चीन को खुला सन्देश देता है कि मोदी के नेतृत्व में आज भारत को कोई डरा नही सकता है एक सुप्रीम कमांडर की तरह प्रधानमंत्री ने जो कुछ सीमा पर जाकर कहा है उसके कूटनीतिक निहितार्थ ..

स्वामी विवेकानंद की दृष्टि में “आत्मनिर्भर भारत”

निखिल यादव “भारत का भविष्य” नामक अपने व्याखयान में वे कहते हैं – “शिक्षा का मतलब यह नहीं है कि तुम्हारे दिमाग में ऐसी बहुत सी बातें इस तरह ठूस दी जाएं कि अंतर्द्वंद होने लगे और तुम्हारा दिमाग उन्हें जीवन भर पचा न सके. जिस शिक्..

नेपाली संसद मे हिंदी का विरोध और नेपाली जनमानस का रोष       

नेपाली संसद मे हिंदी भाषा को प्रतिबंधित करने की चर्चा बल पकड़ रही है। नेपाल मे भारत, भारतीयता व हिंदी का विरोध कम्यूनिज़्म की देन है। कम्यूनिज़्म क्या है? तो इस प्रश्न के उत्तर मे मैं गांधीवाद पर किसी विचारक की टिप्पणी का रूपांतरण रखता हूं &ndash..

चीन की आंतरिक चुनौती

   संतोष कुमार वर्मा इन दिनों चीन अपने अंदर की चुनौतियों से ही परेशान है। तमाम बंदिशों के बावजूद बहुत सारे लोग सरकार की नीतियों की आलोचना करने लगे हैं। सवाल यह भी है कि क्या इन सबसे ध्यान हटाने के लिए ही चीन अपने पड़ोसियों से बैर मोल ले रहा है ..

हमारी आस्तीन में हैं आयुर्वेद के दुश्मन!-जयराम शुक्ल

  नालंदा के बारे में प्रायः सभी ने पढ़ा/सुना होगा लेकिन बख्तियार खिलजी को वही जानते होंगे जो देश की महानता और उसके असली दुश्मनों के बारे में जानना चाहते हैं। नालंदा विश्वविद्यालय का अस्तित्व चौथी शताब्दी से बारहवीं-तेरहवीं शताब्दी तक था। चीनी ..

संघ, राष्ट्र और भगवा ध्वज- नरेन्द्र सहगल -

समस्त संसार में भारतवर्ष ही एकमात्र ऐसा सनातन राष्ट्र है जिसमें गुरु शिष्य की महान एवं अतुलनीय परम्परा को जन्म दिया है। शिक्षण संस्थाओं में छात्रों को पढ़ाने वाले अध्यापक, प्राध्यापक, शिक्षक, व्यापार जगत में ट्रेनिंग देने वाले उस्ताद, ..

चीनी एप्प बैन होने पर बुद्धिजीवियों के पेट में उठे दर्द की वजह क्या है?

भारत चीन के बीच हुए सीमा विवाद के बाद देश में चीन से बदला लाने की मांग तेज हो गयी. सैनिक मोर्चे पर तो हमारे सैनिकों ने चीन की गुस्ताखी का जवाब उसी रात दे दिया था और जवाब ऐसा दिया था कि चीन खुद अपने हताहत सैनिकों की संख्या तक नहीं बता पा रहा. सैनिकों के ..

हिंदू राष्ट्र की परिभाषा गोलवलकर से भागवत तक, उपनिषद के नेति-नेति से समझें

आर जगन्नाथ - हिंदू राष्ट्र को परिभाषित करना सरल नहीं है क्योंकि स्वयं हिंदू धर्म को परिभाषित करना कठिन है। हिंदू धर्म के विरोधाभासों और विसंगतियों के कटु आलोचक बाबा साहेब अंबेडकर रिडल्स ऑफ हिंदुइज़्म में कहते हैं कि हिंदू धर्म “पंथों और..

सत्ता के साथ भाषा की मर्यादा और समझ गँवा बैठी मध्यप्रदेश कांग्रेस

अंकित शर्मा  मध्य प्रदेश में भाजपा कार्यकाल के 100 दिन पूरे होने पर प्रदेश कांग्रेस राज्य में काला दिवस मनाया, इस दौरान सोशल मीडिया पर भी मध्यप्रदेश कांग्रेस के द्वारा “लोकतंत्र पर कलंक बीजेपी” नाम से एक अभियान को चलाया गया. एक तरफ कांग्..

"हूल दिवस" विशेष | सिद्धू कान्हु के शौर्य और उनके सपनों की हत्या करते शांतिदूत !

रजनीश कुमार  उनके गले पर फांसी का फंदा जितना बढ़ता जाता था, इरादे उतने ही मजबूत होते जाते थे। न चेहरे पर मौत का खौफ ना कोई शिकन, उनकी आँखों में चमक थी और सीना गर्व से चौड़ा था, उन्हें ख़ुशी थी वे वीरों की भांति इस मातृभूमि के लिए बलिदान हो रहे थे। ' ह..

शशांक भार्गव और जीतू पटवारी के बहाने फिर सामने आया कांग्रेस का महिला विरोधी चरित्र

      - रजनीश कुमार       मध्यप्रदेश के कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने भारत सरकार को घेरने के लिए अपनी कुत्सित कलंकित सोच को जनता के सामने रख दिया है। पटवारी ने केंद्र में भाजपा की सरकार पर निशाना साधत..

आपातकाल 1975 - अंतिम भागसत्ता के नशे में लोकतंत्र की हत्या। नरेन्द्र सहगल

संविधान , संसद , न्यायालय, प्रेस, लोकमत और राजनीतिक शिष्टाचार इत्यादि की धज्जियां उड़ा कर देश में आपातकाल की घोषणा का सीधा अर्थ था निरंकुश सत्ता की स्थापना अर्थात ,वकील , दलील और अपील सब समाप्त और उधर इस सरकार..

आपातकाल 1975 - भाग 3 सत्ता के नशे में लोकतंत्र की हत्या-नरेन्द्र सहगल

प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गाँधी द्वारा 25 जून 1975 को समूचे देश में थोपा गया आपातकाल एक तरफा सरकारी अत्याचारों  का पर्याय बन गया। इस सत्ता प्रायोजित आतंकवाद को समाप्त करने के लिए संघ के द्वारा संचालित किया गया सफल भूमिगत आन्दो..

युद्ध क्षणिक नहीं- चीन पर नेहरू की अनदेखी के बाद अब हमें पैर जमाए रखना है

साकेत सूर्येश - युद्ध एक क्षणिक घटना नहीं है। महाभारत का युद्ध 18 दिवस का नहीं था। महाभारत के 18 दिवस के युद्ध के पीछे पांडवों का कई वर्षों का वनवास एवं  अज्ञातवास था, पीढ़ियों पहले पैतृक राज्य व्यवस्था के आगे प्रतिभापरक व्यवस्था को पराजित होने देन..

बी एल एम आंदोलन और भारत

– प्रशांत पोळ   बी एल एम अर्थात ‘ब्लैक लाइव मैटर’. अमेरिका में जॉर्ज फ़्लोयड की मृत्यु के पश्चात, सारे विश्व में प्रचलित हुआ नाम.आज से एक महीना पहले, अर्थात् २५ मई को, अमेरिका के मिनेसोटा प्रांत के, मिनियापोलिस शहर में, एक..

यादों में आपातकाल- समापन-चाटुकारों के झाँसे ने देश को  तानाशाही से उबार लिया-जयराम शुक्ल

  "इमरजेन्सी के कंलक के काले धब्बे इतने गहरे हैं कि भारत में जबतक लोकतंत्र जिंदा बचा रहेगा तबतक वे बिजुरके की भाँति टँगे दिखाई देते रहेंगे"     चाटुकारिता भी कभी-कभी इतिहास में सम्मान योग्य बन जाती है। आपातकाल  के उत्..

आपातकाल 1975 - भाग 2सत्ता के नशे में लोकतंत्र की हत्या।नरेन्द्र सहगल

इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सजा मिलने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने अपने राजनीतिक अस्तित्व और सत्ता को बचाने के उद्देश्य से जब 25 जून 1975 को रात के 12 बजे आपातकाल की घोषणा की तो देखते देखते पूरा देश पुलिस स्टेट में परिवर्तित हो गया। सरका..

ग़रीब कल्याण रोज़गार अभियान साबित हो सकता है गेम चेंजर जानिए कैसे

 प्रह्लाद सबनानी भारत में कोरोना महामारी की वजह से लाखों की संख्या में श्रमिक विभिन्न महानगरों से गृह राज्यों की तरफ़ रवाना हुए थे। इन श्रमिकों के गावों में पहुँचने के बाद उन्हें रोज़गार प्रदान कराये जाने के उद्देश्य से देश के प्रधान मंत्री मान..

आपातकाल 1975 - भाग 1सत्ता के नशे में लोकतंत्र की हत्या।

  भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 में उस समय एक काला अध्याय जुड़ गया, जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने सभी संवैधानिक व्यवस्थाओं, राजनीतिक शिष्टाचार तथा सामाजिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर ..

यादों में आपातकाल-2 जब छात्रों की हुंकार से सिंहासन हिल उठे -जयराम शुक्ल

  कांग्रेस के अध्यक्ष देवकांत बरुआ का नारा इंदिरा इज इंडिया गली कूँचों तक गूँजने लगा। इसी बीच मध्यप्रदेश में पीसी सेठी को हटाकर श्यामाचरण शुक्ल को मुख्यमंत्री बनाया गया। अखबारों की हालत यह कि पहले पन्ने से लेकर आखिरी तक इंदिरा गांधी, संजय गाँधी उनके चमचों की खबरों से पटे। हर हफ्ते कहीं न कहीं रैलियाँ, सभाएं। भीड़ जोड़ने का काम स्कूल के प्राचार्यों, हेडमास्टरों को दे दिया गया। शहर में कोई बड़ा नेता आता तो स्कूलों के सामने बसें लगवा दी जातीं और रैली सभाओं में हम बच्चे भीड़ बढ़ाने, नारे ..

इस दर्द की दवा क्या है!

  आशुचित्र  आज चीन भारत ही नहीं, अपने अन्य पड़ोसी देशों के लिए एक ‘दर्द’ बन गया है। इस दर्द का इलाज जल्दीहोना चाहिए, अन्यथा यह और अंगों को भी संक्रमित कर सकता है। विस्तारवादी चीन को कभी भीहल्के में नहीं लेना चाहिए  रूस में साम..

महिला सशक्तिकरण की मिसाल वीरांगना रानी दुर्गावती : बलिदान दिवस

  यत्र नार्यस्तु पूजयंते, रमंते तत्र देवता,‘‘ अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है वहाँ देवताओं का वास होता है। भारतीय संस्कृति में नारी को देवी का स्थान दिया गया है। देश में माँ दुर्गा को शक्ति की देवी, लक्ष्मी को धन की देवी, सरस्वती को..

यादों में आपातकाल- एक अनुशासन पर्व में नसबन्दी का आतंक...-जयराम शुक्ल

  पंद्रह अगस्त, छब्बीस जनवरी यदि सरकारी आयोजन न होते तो पब्लिक इन्हें कब का भुला चुकी होती। लेकिन कुछ ऐसी तिथियां हैं जिन्हें राजनीति तब तक भूलने नहीं देगी जब तक कि इस देश का अस्तित्व है। इन तारीखों में सबसे ऊपर है 25 जून 1975। इस दिन देश में आपात..

आपातकाल की बड़ी भारी हथकड़ी और कोमल कलाई  

प्रवीण गुगनानी  देश मे आपातकाल लगाए जाने वाले काले 25 जून पर प्रतिवर्ष कुछ न कुछ लिखना मेरा प्रिय शगल रहा है। किंतु, आज जो मैं आपातकाल लिख रहा हूं, वह संभवतः इमर्जेंसी के सर्वाधिक कारुणिक कथाओं मे से एक कथा होगी। जिस देश मे मतदान की आयु श..

चीन विवाद: जनभावनाओं को समझने में चूकती कांग्रेस

राहुल गांधी कांग्रेस के लिए तब तक अपरिहार्य राजनीतिक समस्या बने रहेंगे जब तक वे संसदीय राजनीति में सक्रिय रहेंगे।उनके बिना देश की स्वाभाविक शासक पार्टी का कोई भी विमर्श पूरा नही हो सकता है क्योंकि उनकी अमोघ शक्ति है उनका उपनाम।कांग्रेस..

आत्मनिर्भर होने के मायने तलाशने होंगे

      - नीलम महेंद्र     आजकल देश में सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर चीन को बॉयकॉट करने कीमुहिम चल रही है। इससे पहले कोविड 19 के परिणामस्वरूप जब देश की अर्थव्यवस्था पर वैश्वीकरण के दुष्प्रभा..

युगपुरुष डॉक्टर हेडगेवार

       -  नरेंद्र सहगल    एक प्रखर स्वतंत्रता सेनानी डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने जन्मकाल से आज तक नाम, पद, यश, गरिमा, आत्मप्रशं..

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के अवरोधों को दूर किया जाए – विहिप

  नई दिल्ली. विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) केन्द्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि गत सैकड़ों वर्षों से अनवरत रूप से पुरी में निकाली जाने वाली भगवान श्रीजगन्नाथ की परम्परागत रथ यात्रा इस वर्ष भी निकाली जानी चाहिए. कोविड महामारी के संकट काल में भी ..

सरसंघचालक परंपरा के आदर्श हैं डॉक्टर साहब

        - लोकेन्द्र सिंह      राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्ष 2025 में शतायु हो जाएगा। अपनी सुदीर्घ यात्रा में संघ ने आदर्श, अनुशासन, सामाजिक एवं व्यक्ति निर्माण के कार्य में नित नये प्रतिमान स्थापित किए हैं। अपन..

चीन की गुस्ताखी पर पलटवार – रेलवे ने रद्द किया चीनी कंपनी को दिया 470 करोड़ रुपये का ठेका

  गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई मुठभेड़ में 20 जवानों के बलिदान के बाद पूरे देश में चीन को लेकर गुस्सा है. देश में अनेक जगहों पर नागरिक चीनी सामान का बहिष्कार कर अपना रोष प्रकट कर रहे हैं, इसके साथ ही सोशल मीडिया मीडिया पर भी #By..

ग्रामों के क्लस्टर बनाकर देश के आर्थिक विकास को दी जा सकती है गति 

     -  प्रहलाद सबनानी    कोरोना महामारी के कारण लगभग दो माह के लॉक डाउन के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को वापिस पटरी पर लाने की चुनौती अब हम सभी के सामने है। न केवल भारत बल्कि विश्व में कई देशों द्वारा धीरे धीरे अपनी आर्थिक ..

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई अपनी सुन्दरता, चालाकी और दृढ़ता के लिये तो चर्चित हैं ही, साथ ही स्‍वतंत्रता सेनानी नेताओं में सबसे अधिक खतरनाक वीरांगना के तौर भी यह दुनिया उन्‍हें याद करती है। रानी लक्ष्‍मीबाई का बखान करते हुए प्रसि‍द्ध कवियत्..

गंगादास की बड़ी शाला – जहाँ रानी लक्ष्मीबाई की रक्षा के लिए 745 संतों ने दिया था बलिदान

पड़ाव स्थित गंगादास की बड़ी शाला का इतिहास 450 साल पुराना है। गंगादास की बड़ी शाला के पहले महंतश्री परमानंददास जी महाराज को अकबर ने अपना गुरु बनाया था। अकबर ने उन्हें टोपी अौर वस्त्र दान में दिए थे। अकबर द्वारा दी गई टोपी अाज भी गंगादास की बड़ी शाला में..

रानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस विशेष :-खूब लड़ी मर्दानी

  सन् १८१८ में मराठों की पराजय के बाद अंग्रेजों के पैर देश में अच्छी तरह से जम गए थे। पेशवाओं से सारे अधिकार अंग्रेजों ने छीन लिए। बाजीराव द्वितीय निर्वासित जीवन जी रहे थे। उनको आठ लाख की पेंशन और बिठूर की छोटी-सी जागीर अंग्रेजों ने बख्शी थी। अनेक..

ड्रैगन की पूंंछ नहीं उसका फन कुचलिए! -जयराम शुक्ल

  विंध्य का एक और सपूत मातृभूमि की रक्षा करते हुए सीमा पर शहीद हो गया। रीवा जिले के फरेदा गाँव का दीपक सिंह उन 20 जाँबाजों में से एक हैं जिनकी शहादत हुई। चीन के इस ताजा विश्वासघात से समूचा देश गुस्से में है। क्रोध से धमनी और शिराएं फड़क रही हैं। &..

कृषि क्षेत्र के विकास में मुख्य अवरोध है मरुस्थलीकरण

प्रह्लाद सबनानी  पनप रहे मरुस्थलीकरण की भयावह स्थिति संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि प्रतिवर्ष विश्व में 1.20 करोड़ हेक्टेयर कृषि उपजाऊ भूमि ग़ैर-उपजाऊ भूमि में परिवर्तित हो जाती है। दुनियाँ में 400 करोड़ हेक्टेयर ज़मीन डिग्रेड हो चुकी है। एशिया ..

भारत की संप्रभुता का पहला पड़ाव – गिलगित बाल्तिस्तान

जम्मू कश्मीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा गिलगित बाल्तिस्तान है जो अब पाकिस्तान के कब्ज़े में है. अक्तूबर 1947 में जब पाकिस्तानी सेना ने कबायलियों की ढाल बना कर जम्मू कश्मीर पर हमला किया था, तब भी उसकी नज़र गिलगित बाल्तिस्तान पर ही लगी हुई थी. लेकिन उसे गि..

अयोध्या में मंदिर निर्माण के साथ ऐतिहासिक धरोहर को सहेजना भी आवश्यक है

विकास सारस्वत - तुष्टीकरण की राजनीति, बौद्धिकता में कपट और इतिहास लेखन में छल को भारत में यदि सबसे बड़ी और समग्र चोट किसी एक प्रसंग ने दी है तो वह है राम जन्मभूमि आंदोलन। न सिर्फ बातचीत की मेज़ से बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी के समर्थक वामपंथी इतिहासकारों क..

शहर काजी की मौत पर ग्वालियर की सडकों पर निकली भीड़, सारे नियम ताक पर

खुद कानून से भी ऊपर मानता है मुस्लिम समुदाय भारत देश एक लोकतांत्रिक देश है और कहा जाता है की भारत का कानून देश के प्रत्येक नागरिक के लिए एक समान है। इस कानून में किसी भी प्रकार से ऊंच-नीच छोटे बड़े के लिए भेदभाव की कोई जगह नहीं है लेकिन ऐसी देश मैं रहन..

संघ की वैचारिकी के आलोचक पढ़ें-सुनें-समझें⁠— भागवत प्रेम-कामी हैं, प्रदर्शन-कामी नहीं

डॉ आनंद पाटील -  ‘सामान्य ज्ञान’ वास्तव में ‘विशिष्ट’ ही नहीं, ‘अतिविशिष्ट’ होता है। बहुतांश लोग प्रायः सामान्य ज्ञान को महत्त्वपूर्ण नहीं मानते हैं। अतः उसके वैशिष्ट्य एवं हितोपकारी पक्ष (महत्त्व) से अनजान रह ज..

पूरा विश्व जता रहा है भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा

      - प्रह्लाद सबनानी     दिनांक 5 जून, 2020 को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। भारतीय इतिहास में पहली बार देश में विदेशी मुद्रा भंडार ने 500 बिलियन (50,000 करोड़) अमेरिकी डॉलर के आँकड़े क..

मुस्कराहट के पीछे छुपा होता है अवसाद, अपने आसपास के लोगों के प्रति संवेदनशील बनिए

    - सौरभ कुमार      सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने एक सवाल हम सबके बीच छोड़ा है? क्या सफलता का मतलब ही ख़ुशी है? क्या जिन्होंने मंजिल पा ली है वो मुस्कुरा रहे हैं? इस दौड़ भाग भरी जिंदगी में हम इतने रम गए हैं कि एक बार रुक कर सोचन..

लव जिहाद – छद्म नाम से हिन्दू लड़कियों को फंसाया, शोषण कर मतांतरण का प्रयास

      - राघवेन्द्र सिंह     जयपुर. राजस्थान में लव जिहाद के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. मुस्लिम युवक छद्म हिन्दू नाम रखकर हिन्दू लड़कियों को फंसा रहे हैं. इसके बाद लड़कियों पर कथित दबाव बनाकर उनका मतांतरण और देहशोषण कि..

देश में प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाते हुए ही आर्थिक प्रगति हो

      - प्रह्लाद सबनानी     कोरोना वायरस महामारी के चलते लगभग 2 माह के लॉक डाउन के बाद भारत सहित विश्व के लगभग 75 प्रतिशत देश अपनी अर्थव्यवस्थाएँ धीरे धीरे खोलते जा रहे हैं। अब आर्थिक गतिविधियाँ पुनः तेज़ी से आगे बढ़ेंगी।..

जुर्म करे मौलाना, बदनाम हुए बाबा! मीडिया संस्थानों का हिन्दुफोबिया उजागर

      - अंकित शर्मा      मध्यप्रदेश के रतलाम शहर मैं अचानक से कोरोना विस्फोट होने की खबर फैलती है और पता चलता है कि देखते ही देखते रतलाम में 1- 2 नहीं बल्कि 24 लोग कोरोना की जद में आ गए हैं। यह खबर जब ..

भारत-अमेरिका में नस्लीय हिंसा की साजिश

     - शशांक शर्मा      संयुक्त राज्य अमेरिका के मेनियापोलिस शहर में एक अफ्रीकी अमेरिकी व्यक्ति की पुलिस कार्रवाई में मौत हो गई। एक पुलिस अधिकारी पर आरोप है कि उसने 25 मई को फ्लॉयड नामक व्यक्ति के गले को अपने घुटनों पर दब..

भीम-मीम एकता की राजनीति करने वाले जौनपुर की घटना पर चुप क्यूँ हैं?

      - सौरभ कुमार    उत्तरप्रदेश के जौनपुर में मंगलवार की रात एक मामूली सी कहासुनी में समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने अनुसूचित जाति की एक बस्ती में घुसकर आग लगा दी। लाठी डंडे लेकर पहुंची सैंकड़ों की भीड़ ने गाँव में हमला किया, मा..

'भारतमाता ग्राम्यवासिनी' ही आत्मनिर्भरता की जननी

कभी-कभी आपदाएं सबक लेकर आती हैं। कोविड-19 महामारी ने न सिर्फ़ हमारी जीवनदृष्टि को बदला है अपितु भविष्य के समावेशी और सर्वस्पर्शी विकास के नए माड़ल पर विचार करने का अवसर दिया है। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत का नारा इसी विपदा के बीच से निकला है। और जब हम आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं तब भारतमाता ग्राम्यवासिनी की एक सुघड़ तस्वीर रेखांकित हो जाती है। हम प्रदेश वासियों के लिए यह गर्व का विषय है कि केंद्र सरकार में 'ग्रामीण एवं पंचायत विकास, सहकारिता एवं समाज कल्याण' की गुरुतर जिम्मेदारी नरेंद्र तोमर ..

कोरोनाः मांसाहार से क्यों न बचें ?

  - डॉ. वेदप्रताप वैदिक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) के भोजन-सुरक्षा विशेषज्ञ पीटर एंवारेक ने कहा है कि मांसाहार से कोरोना के फैलने का खतरा जरुर है लेकिन हम लोगों को यह कैसे कहें कि आप मांस, मछली, अंडे मत खाइए ? चीन के वुहान शहर में कोरो..

पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती भारतीय परम्पराएं

       - लोकेन्द्र सिंह       भौतिक  विकास के पीछे दौड़ रही दुनिया ने आज जरा ठहरकर सांस ली तो उसे अहसास हुआ कि चमक-धमक के फेर में क्या कीमत चुकाई जा रही है। आज ऐसा कोई देश नहीं है जो पर्यावरण संकट पर..

वापिस पटरी पर आती भारतीय अर्थव्यवस्था: कुछ संकेत

      - प्रह्लाद सबनानी    देश में जारी लॉकडाउन के तीसरे एवं चौथे चरण एवं अनलॉक के प्रथम चरण के दौरान केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक गतिविधियों के सम्बंध में प्रदान की गई छूट के बाद देश में आर्थिक गतिविधियों के चालू होने के कारण म..

साँच कहै ता मारन धावै झूठे जग पतियाना

        -  जयराम शुक्ल     कबीर कब पैदा हुए कब मरे, हिंदू की कोख से कि मुसलमान की, उन्हें दफनाया गया कि मुखाग्नि दी गई, इसका सही-सही लेखा जोखा किसी के पास नहीं। फिर भी उनकी जयंती ढलते जेठ की उमस भरी तपन के बीच प..

अनुच्छेद 30 के विरोधी तो स्वयं गांधीजी भी थे

      - प्रवीन गुगनानी     हाल ही मे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने संविधान के अनुच्छेद 30 के औचित्य पर प्रश्न उठाया है। इसके जवाब मे आलोचकों व विरोधियों ने अपनी प्रवृत्ति के अनूरूप ही  विजयवर्गीय पर ..

अन लाक -1 में होगी हमारे संयम और सतर्कता की परीक्षा

     - कृष्णमोहन झा        देश में कोरोना वायरस के संक्रमण की दर जिस तरह भयावह रूप से बढ़ रही है  उसे देखते हुए यह अनुमान लगाए जा रहे थे कि 31 मई को लाक डाउन  के चौथे चरण की अवधि पूर्ण होने  के पहले ही केंद्र सरकार लाक डाउन के पांचवें चरण की घोषणा कर देगी परंतु केंद्र सरकार ने लगभग सवा दो माह के बाद लाक डाउन का न केवल रूप रंग पूरी तरह से बदल दिया बल्कि उसे नया नाम भी दे दिया |केन्द्र ने इसे अन लाक -1 नाम दिया है और जैसा कि इसके नाम से ही  ..

इस्लामिक आक्रमण : लूटेरों को पढ़ाया गया निजाम, सुल्तान व महान - विजय मनोहर तिवारी

  भोपाल। इतिहास के तहखाने में जाता हूं तो मेरे लिये जिंदा कहानियों के ब्यौरे हैं। अब से 400 वर्षों पहले के इस्लामिक आक्रमणों के इतिहास को खंगालता हूं तो अपना रक्त, कटा गर्दन, अपनी लाश, माताओं के जौहर की गाथाओं को महसूस करत..

स्वतंत्रता की चिंगारी पूरे नबाबी दौर में सुलगती रही

    - रमेश शर्मा          भारत के हृदयस्थल के रूप में अपनी पहचान रखने वाला यह भोपाल क्षेत्र देश की आजादी के साथ 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र नहीं हुआ था । इसके लिये लगभग बाईस महीने और संघर्ष करना पड़ा था । इसका कारण यह थ..

बदला तो काफी कुछ है यदि देखना चाहें तो

        -  जयराम शुक्ल       मोदी 2.0 के एक साल पूरा होने का जश्न करोना खा गया। कुलजमा छह सालों में यह छठवां साल धमाके का रहा। ऐसे काम हुए जो युगांतकारी हैं। कोई सोच भी नहीं सकता था कि कश्मीर का मसला यूँ ..

लाक डाउन 5.0 की विवशता को स्वीकार करें हम

       - कृष्णमोहन झा     कोरोना वायरस के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए संपूर्ण देश में जब पहली बार 21 दिन के लाक डाउन कीघोषणा की गई थीतब हमें यह उम्मीद थी कि कोरोना वायरस  को परास्त करने के लिए यह अवधि पर्..

भविष्यद्रष्टा सावरकर

      - प्रशांत पोळ     निर्भयता. निडरता. निर्भीकता. इन सब का पर्यायवाची शब्द हैं – वीर सावरकर. इस सामान्य कद – काठी के व्यक्ति में असामान्य और अद्भुत धैर्य था. अपने ८३ वर्ष के जीवन में वे किसी से नहीं डरे. २..

सावरकर, जिन्होंने क्रांति की नई परिभाषा गढ़ी

        - जयराम शुक्ल      मातृभूमि! तेरे चरणों में पहले ही मैं अपना मन अर्पित कर चुका हूँ। देश-सेवा ही ईश्वर-सेवा है, यह मानकर मैंने तेरी सेवा के माध्यम से भगवान की सेवा की।           &..

महात्मा गांधी की दृष्टि में स्वातंत्र्यवीर सावरकर

     - लोकेन्द्र सिंह     “सावरकर बंधुओं की प्रतिभा का उपयोग जन-कल्याण के लिए होना चाहिए। अगर भारत इसी तरह सोया पड़ा रहा तो मुझे डर है कि उसके ये दो निष्ठावान पुत्र सदा के लिए हाथ से चले जाएंगे। एक सावरकर भाई को..

कोरोना से लड़ाई में भारत के अहम हथियार – प्रभावी नेतृत्व और सहयोगी समाज

       - सौरभ कुमार    मुश्किल समय किसी के भी क्षमताओं की परीक्षा लेता है, कोरोना महामारी के इस दौर ने विश्व के सभी देशों की परीक्षा ली है। अमेरिका और यूरोप जैसे शक्तिसंपन्न, समृद्ध देश भी घुटने टेकते नजर आये। अस्पतालों म..

नव सृजन की प्रसव पीड़ा है ‘करोना महामारी’ - 3

        - नरेन्द्र सहगल   नव सृजन की प्रसव पीड़ा है ‘करोना महामारी’ - 2 प्रत्येक व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र किसी दैवी उद्देश्य के साथ धरती पर जन्म लेते हैं। कर्म करने में स्वतंत्र सृष्टि..

साँप से डरें नहीं, उसके जहर की दवा बनाना सीख लें !

      -जयराम शुक्ल      डेल कारनेगी जीवन प्रबंधन के विश्वविख्यात गुरू माने जाते हैं। उनकी दो पुस्तकें- 'लोक व्यवहार' व 'चिंता छोड़ों सुख से जियो'..के नाम सबसे ज्यादा बिकने और पढ़ी जाने वाली पुस्तकों में है। इन पुस्तकों की विशेषता यह कि इनमें न गप्प है' न लेखकीय परिकल्पना। जो वास्तव में हुआ वही लिखा। कुछेक कहानियां तो ऐसी भी हैं जो मौत के एक सेंकड पहले जीवन दृष्टि बदल देती हैं। आज इन्हीं में से एक कहानी की चर्चा करते हैं।   बड़े बाँध की योजनाएं हर किसानों को भारी ..

नव सृजन की प्रसव पीड़ा है ‘करोना महामारी’ - 2

     - नरेन्द्र सहगल      भाग 1 - नव सृजन की प्रसव पीड़ा है ‘करोना महामारी’ संपूर्ण विश्व को एक साथ अपनी लपेट में लेने वाले करोना वायरस में सभी धर्मों, विचार धाराओं और चिंतन प्रहारों को अपने गिरेबा..

करोना काल और उसके बाद का मीडिया

       -जयराम शुक्ल     करोना के लाकडाउन ने जीवन को नया अनुभव दिया है, अच्छा भी बुरा भी। जो जहां जिस वृत्ति या कार्यक्षेत्र में है उसे कई सबक मिल रहे और काफी कुछ सीखने को भी। ये जो सबक और सीख है यही उत्तर करोना काल क..

नए क्रांतिकारी आर्थिक सुधार कार्यक्रम से कृषि क्षेत्र को लगेंगे पंख

        - प्रहलाद सबनानी     भारत वर्ष आज भी गाँवों में ही बसता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि देश की लगभग 60 प्रतिशत आबादी गाँवों में ही निवास करती है। केंद्र में माननीय श्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा वर्ष 2014 ..

‘देशप्रेम की साकार और व्यावहारिक अभिव्यक्ति है स्वदेशी’

       - लोकेन्द्र सिंह      मुझे आज तक एक बात समझ नहीं आई कि कुछ लोगों को स्वदेशी जैसे अनुकरणीय, उदात्त और वृहद विचार का विरोध क्यों करते हैं? स्वदेशी से उन्हें क्या दिक्कत है? मुझे लगता है कि स्वदेशी का व..

नव सृजन की प्रसव पीड़ा है ‘करोना महामारी’

       - नरेन्द्र सहगल    निष्ठुर भौतिकवाद की अंधी दौड़ में एक दूसरे को पीछे छोड़ने की प्रतिस्पर्धा में पागल हो चुके विश्व को करोना महामारी ने झकझोर कर रख दिया है।  समस्त संसार की संचालक दिव्य शक्ति ‘..

रियायतों की खुशी के साथ जिम्मेदारी का अहसास भी जरूरी

       -  कृष्णमोहन झा    देश में कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए गत 55 दिनों से जारी लाक डाउन को चौथी बार  बढा दिया गया है और अब यह 31मई तक जारी रहेगा। गौरतलब है कि लाक डाउन 3.0की समय सीमा 17 मई तय की..

अनिल दवेः परंपरा के पथ का आधुनिक नायक

       -संजय द्विवेदी    पर्यावरण,जल,जीवन और जंगल के सवाल भी किसी राजनेता की जिंदगी की वजह हो सकते हैं तो ऐसे ही एक राजनेता थे अनिल माधव दवे। 18 मई,2017 को वे हमें छोड़कर चले गए इसके बाद भी उनकी दिखाई राह आज भी..

राजनीति में त्रिबिध बयार थे दवे जी

    पुण्यस्मरण    - जयराम शुक्ल    नर्मदा के नीर की तरह निर्मल निश्छल और पुराणकालीन अमरकंटक में बहने वाली त्रिबिध (शीतल,मंद,सुगंध)बयार से थे अनिल माधव दवे..जी हां उन्हें देखकर यही छवि उभरती थी।    मैं उनके न..

मजबूरी के मजदूर

     - प्रवीण पाण्डेय    कोरोना संक्रमण की इस महामारी ने देश के लाखों और करोड़ों उन दिहाड़ी मजदूरों की भयावह तस्वीर दिखाई है, जिसे देख मन तो व्यथित होता ही है साथ ही मन में कई प्रश्न भी उठते हैं। आखिर ये मजदूर अपने गांव, ..

कोरोना संकट:सीएसआर कितना समावेशी और परिणामोन्मुखी?

         - डॉ अजय खेमरिया         इन दिनों पीएम केयर फ़ंड और सीएसआर मद को लेकर खूब चर्चाएं हो रहीं है।कांग्रेस सहित गैर बीजेपी शासित राज्य इस बात पर आपत्ति कर रहे है की कोरोना से निबटने के लिए जो नय..

गिलगिट – बाल्टिस्तान और चीन !

            - प्रशांत पोळ         पिछले कुछ दिनोंसे चीन चर्चा में हैं. जी नहीं, COVID-19 के लिए नहीं. उसके लिए तो वह सारे विश्व की गालियां खा रहा हैं. चीन चर्चा में हैं, वह भारत के साथ सीमा पर कुर..

केंद्र सरकार के 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज में विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र को मज़बूत करने की क़वायद

      - प्रह्लाद सबनानी     सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) देश की अर्थव्यवस्था के विकास में एक अहम भूमिका अदा करता है। एमएसएमई क्षेत्र की देश के सकल घरेलू उत्पाद में 30 प्रतिशत, औद्योगिक उत्पादन में 45 प्रतिशत और..

दीपनिष्ठा’ को जगाओ अन्यथा मर जाओगे

      - जयराम शुक्ल        यह घड़ी बिल्कुल नहीं है शांति और संतोष की, ‘सूर्यनिष्ठा’ सम्पदा होगी गगन के कोष की। यह धरा का मामला है घोर काली रात है, कौन जिम्मेदार है यह सभी को ज्ञात है। रोशनी की खोज में किस सूर्य के घर जाओगे, ‘दीपनिष्ठा’ को जगाओ अन्यथा मर जाओगे।    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के राष्ट्र के नाम संबोधन को गुन-धुन रहा था कि सयास बालकवि बैरागी के उपरोक्त काव्यांश का स्मरण हो आया। उस दिन बैरागी जी दूसरी ..

इस्लामोफोबिया की आड़ में छुपाये जा रहे हैं जहरीले इरादे

    पिछले दिनों दो खबरें सोशल मीडिया के माध्यम से डिबेट का हिस्सा बनीं, एक घटना झारखण्ड के रांची से जुडी थी और दूसरी घटना चेन्नई की है। एक जगह अपने ठेले में हिन्दू लिखने की वजह से फल दूकानदार को गिरफ्तार किया गया और दूसरी जगह एक जैन बेकरी पर..

प्रधानमंत्री का संदेश देगा आपदा को अवसर में बदलने की ताकत

      - कृष्णमोहन झा     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोरोना संक्रमण की शुरुआत के बाद देश वासियों को पांचवी बार संबोधित करते हुए   20 लाख करोड़ रुपये के जिस राहत पैकेज की घोषणा की है उसकी समाज के सभी वर्..

भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए देशी उत्पादों को अपनाना ही होगा

        - प्रह्लाद सबनानी      देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी ने दिनांक 12 मई 2020 को सायं 8 बजे देश को सम्बोधित करते हुए अपने उदबोधन में कहा है कि दुनिया को कोरोना संकट से मुक़ाबला करते हुए अब 4 महीने..

भारत में पलायन की समस्या का हल कैसे हो

    - प्रहलाद सबनानी      देश में पलायन की समस्या इतनी विकराल तब दिखी जब कोरोना वायरस के कारण इतनी भारी तादाद में लोग शहरों से ग्रामों की ओर पलायन करने लगे। हालाँकि केंद्र सरकार ने लोगों को विभिन्न शहरों से उनके घरों तक पहुँचान..

नारद का वास्तविक परिचय

         - प्रो. बृज किशोर कुठियाला      नारद एक ऐसे पात्र हैं जो भारतवर्ष के प्राचीन इतिहास के हर काल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सतयुग में नारद राजा हरिश्चन्द्र को आदर्श राजधर्म का मार्ग दिखाते हैं तो ..

पत्रकारिता के आदर्श व्यक्तित्व – देवर्षि नारद

     -  प्रशांत पोळ    आज जेष्ठ कृष्ण द्वितीया, अर्थात देवर्षि नारद जयंती. देवाधिदेवों के ऋषि याने नारद मुनि. अत्यंत कुशाग्र बुध्दी के. अनेक विषयों के ज्ञाता. अनेक ग्रन्थों के रचयिता. नारद जी द्वारा रचित ग्रन्थों में से क..

प्रारंभ से पत्रकारिता के अधिष्ठात्रा हैं देवर्षि नारद

       - लोकेन्द्र सिंह     भारतीय परंपरा में प्रत्येक कार्यक्षेत्र के लिए एक अधिष्ठात्रा देवता/देवी का होना हमारे पूर्वजों ने सुनिश्चित किया है। इसका उद्देश्य प्रत्येक कार्यक्षेत्र के लिए कुछ सनातन मूल्यों की स..

साजिश की कोख से जन्मा है चीनी वायरस करोना!

         -जयराम शुक्ल      चीन में एक दार्शनिक थे सुन त्जू। बहुत पहले वहां के शासकों को एक मंत्र दिया था- युद्ध के बगैर शत्रु को हराना ही सबसे उत्तम कला है और यह कला आर्थिक ताकत से सधती है। करोना ने जिस तरह वि..

विश्वगुरु मार्ग का मील पत्थर – बुद्धत्व

  भारत किसी समय मे विश्वगुरु यूं ही नहीं कहलाता था। भारत एक ऐसा देवदुर्लभ, बिरला, अनोखा राष्ट्र है जिसने कभी किसी राष्ट्र की सीमाओं पर हमला नहीं किया। कभी स्वयं की सीमाओं के विस्तार का प्रयास नहीं किया। साथ ही भारत एक ऐसा भी बिरला राष्ट्..

चौतरफा चुनौतियों से घिरा देश

      - नरेंन्द्र सहगल    भारत की यशस्वी सरकार, कर्तव्यनिष्ठ करोना योद्धा, भारत की सेना और भारत के देशभक्त नागरिक अनेक चुनौतियों का सामना जिस साहस और जज्बे के साथ कर रहे हैं उसकी पूरे विश्व में सराहना की जा रही है|&n..

प्रवासी मजदूर: समस्या भोजन, आवास किराये व मोबाइल रिचार्ज की है

     - प्रवीण गुगनानी     प्रवासी श्रमिकों का प्रश्न देश की व्यवस्था के लिये मात्र सिरदर्द ही नहीं है, संभवतः शीघ्र ही यह समस्या समूची व्यवस्था का नासूर भी बनने जा रही है। अपने  गांवों से सैकड़ों किमी बैठा हुआ यह..

कोरोना महामारी के बाद स्वदेशी मॉडल ही भारतीय अर्थव्यवस्था का सहारा

      -  प्रह्लाद सबनानी     आज पूरे विश्व में कोरोना महामारी की जो स्थिति है उससे हम सभी भलीभाँति वाक़िफ़ हैं। केंद्र सरकार ने इस महामारी को भारत में फैलने से रोकने के लिए कैसे-कैसे गम्भीर प्रयास किए इसके भी आप साक..

इतिहास को अब नहीं मिलेगा डॉ. वाकणकर सा बिरला अध्येता, जिन्‍होंने ऐतिहासिक मानचित्रों की पुनर्व्याख्या में जिंदगी खपाई

      (शिवकुमार विवेक)     सरस्वती नदी के उद्गम और प्रवाह मार्ग की खोज करने के प्रयासों का जब भी जिक्र किया जाएगा, डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के उल्लेख के बिना अधूरा रहेगा। डॉ. वाकणकर देश के उन गिने-चुने अध्येताओं में से थे..

मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमण को नियंत्रण में रखने में प्रभावी रहा है लॉकडाउन

      मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की संवेदनशीलता के कारण सफल रहा अब तक का लॉकडाउन, आज से लॉकडाउन-3.0, सभी वर्गों की चिंता करे सरकार     - लोकेन्द्र सिंह    कोरोना महामारी से जीतने के लिए सबसे महत्वपूर्ण और ..

मोदी सरकार द्वारा विकसित किए गए डिजिटल प्लेटफ़ार्म से ग़रीबों तक मदद पहुँचाने में हो रही है आसानी

      - प्रह्लाद सबनानी      पूरे विश्व में फैली कोरोना वायरस महामारी से होने वाले गम्भीर परिणामों का आँकलन केन्द्र में मोदी सरकार द्वारा सही समय पर ही कर लिया गया था एवं इसीलिए भारत में विशेष रूप से ग़रीब वर्ग को राहत दे..

आइए, डॉ. वाकणकर के संकल्पों के लिए वचनबद्ध हों

  स्मृतियां कभी मरती नहीं हैं। अवचेतन से हम उन्हें उकेरते रहते हैं। जयंतियां और तिथियां इसीलिए आती हैं। ये उन स्मृतियों को कर्तव्य और करणीय की राह दिखाती हैं। डॉ. विष्णु श्रीधऱ वाकणकर की जन्मशताब्दी ऐसे ही अवसर के रूप में उपस्थित हुई। आगामी 4 मई ..

मजदूर दिवस विशेष : श्रीराम जैसा मजदूर-हितैषी और वर्ग-भेद को पाटने वाला कोई नहीं

    मालिक और मजदूर के संबंधों को समझना हो, श्रम के सम्मान को समझना हो, श्रम से आत्मगौरव का बोध जागरण करना हो, मजदूर यानि धर्मविरोध नहीं बल्कि धर्म के अनुपालन का भाव देखना हो, वर्ग-संघर्ष न जन्म ले इसके लिये भाषण और दर्शन देने की जगह स्वयं के..

संघप्रमुख के बौद्धिक से निकले सूत्रों का सुफल

     -जयराम शुक्ल        देखते- देखते काफी कुछ बदल गया, दो महीने के ही भीतर। रहन-सहन, नाते-रिश्ते, जीवनदृष्टि, जल-थल-नभ का वातावरण। संकट ऐसी कसौटी है जिससे कसकर निकला मनुष्य भविष्य में धोखा नहीं खाता. उससे सबक लेता है। दर्द का रिश्ता उल्लास की नातेदारी से ज्यादा मजबूत होता है। विश्व के जितने भी देश परतंत्रता या अन्य संकटों मुक्त हुए हैं उसकी पृष्ठभूमि में दर्द के रिश्ते की प्रगाढ़ता की ही ताकत रही है। इसलिए जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डा. मोहन भागवत ..