आलेख

सबहिं नचावत राम गोसाईं  -जयराम शुक्ल

    एक मित्र सायकिल की दुकान पर मिल गए। बाहर उनकी चमचमाती कार खड़ी थी। मैंने पूछा-यहां कैसे? वो बोले- डाक्टर ने कहा सायकिल से चला करिए सो सायकिल से बचपन शुरू हुआ और अब बुढापा भी। दूकान वाले ने दार्शनिक अंदाज में कहा- क्या करियेगा ये जिंदगी भी..

वो यात्रा जो सफलता से अधिक संघर्ष बयाँ करती है। 

आज भारत विश्व में अपनी नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। वो भारत जो कल तक गाँधी का भारत था जिसकी पहचान उसकी सहनशीलता थी, आज मोदी का भारत है जो खुद पहल करता नहीं, किसी को छेड़ता नहीं लेकिन अगर कोई उसे छेड़े तो छोड़ता भी नहीं। गाँधी के भारत से शायद ही क..

शी जिनपिंग इन दिनों इतिहास में अमर होने की अपनी चाह में युद्ध पिपासु बन बैठे हैं

                                उमेश उपाध्याय      महाभारत के वनपर्व में यक्ष का प्रश्न था कि इस सृष्टि में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?युधिष्ठि..

हैदराबाद को भारत में शामिल कराना इतना आसान नहीं था

हैदराबाद को भारत में शामिल कराना इतना आसान नहीं था और काफी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा। सरदार पटेल साहब की गहरी समझ और सूझ बूझ के करण भारत का एक और विभाजन बच गया अगर नेहरू की बात मानी जाती तो भारत के लिये हैदराबाद एक और नासूर बन जाता भारत देश पर ब्रि..

दत्तोपंत ठेंगड़ी – एक श्रेष्ठ चिंतक, संगठक और दीर्घदृष्टा

   डॉ. मनमोहन वैद्य    जिस समय स्वर्गीय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी ने भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की वह साम्यवाद के वैश्विक आकर्षण, वर्चस्व और बोलबाले का समय था. उस परिस्थिति में राष्ट्रीय विचार से प्रेरित शुद्ध भारतीय विचार पर आधारित ए..

लौह व्यक्तित्व के भीतर धड़कता एक कवि ह्रदय-जयराम शुक्ल

      उनका कवि पक्ष बहुत कम प्रकाश में आया है..जबकि उन्होंने गुजराती में एक से एक भावप्रवण कविताएं रचीं।    गुजराती से हिन्दी में उनकी कई कविताओं का अनुवाद किया है रवि मंथा ने। रवि मोदीजी के निकट सहयोगी रहे हैं। इन कविताओं का एक संग्रह अँग्रेजी में 'ए जर्नी' नाम से रूपा पब्लिकेशन ने प्रकाशित की हैं।   नरेन्द्र मोदी का पहला काव्यसंग्रह 'आँख आ धन्य छे' नाम से 2007 में प्रकाशित हुआ। सात वर्ष बाद हिन्दी में 'आँख ये धन्य है' के नाम से काव्य संग्रह दिल्ली के ..

भारत की बड़ी सामरिक सफलता

  शशांक द्विवेदी    रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने हाल ही में ध्वनि की गति से छह गुना तेज गति से मार करने वाले हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक का सफल परीक्षण किया है। स्वदेश में विकसित इस मिसाइल तकनीक से देश के रक्षा तंत्र को बहुत बल मिलेगा। यह..

बॉलीवुड से उतरता वामपंथी सेक्यूलर लिबास...!

  डॉ अजय खेमरिया    बॉलीवुड का अपना एजेंडा है जो वामपंथी विचार से अनुप्राणित होकर हिंदुत्व के मानमर्दन पर सुनियोजित तरीके से काम करता है। पिछले 70 बर्षों से बॉलीवुड में कायम एकपक्षीय वैचारिकी को सुशान्त सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत औऱ कंग..

‘दूरदर्शन’ जो दिलों में सदा जिंदा है

       -    डॉ. पवन सिंह मलिक    दूरदर्शन, इस एक शब्द के साथ न जाने कितने दिलों की धड़कन आज भी धड़कती है। आज भी दूरदर्शन के नाम से न जाने कितनी पुरानी खट्टी-मिट्ठी यादों का पिटारा हमारी आँखों के सामने आ..

प्राचीनकाल से ही पर्यावरण के प्रति सचेत करने का विधान रहा है ‘प्रकृति वंदन’

               - सुदर्शन व्यास      सनातन परंपरा में संध्या वंदन का सार्वाधिक महत्व है। विद्वानों के मुताबिक त्रिकाल संध्या कर्म करने वाला व्यक्ति प्रकृति और ईश्वर के निकट रहता ह..

लोकल को ग्लोबल बनाने हेतु प्रयासरत केंद्र सरकार

        - प्रहलाद सबनानी       देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी ने एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम, “अमेरिका-भारत स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फ़ोरम के तीसरे लीडरशिप समिट”, को सम्बोधित करते हुए अभ..

कौव्वे हमारे पुरखे..इसलिए.!

          -जयराम शुक्ल      पितरपख लगा है कौव्वे कहीं हेरे नहीं मिल रहे। इन पंद्रह दिनों में हमारे पितर कौव्वे बनके आते थे। अपने हिस्से का भोग लगाते थे।  कौव्वे पितर बनके तर गए या फिर पितर ही कौव्वा बनकर..

राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020, में राजभाषा को अपेक्षित सम्मान मिले

        -  प्रो उमेश कुमार सिंह      हम सब को स्मरण होगा ही कि ‘भारत’ यह इस देश का प्राचीन नाम है, जिससे हमारी सांस्कृतिक धरोहर प्रतिविम्बित होती है।  कहने को और नाम है आर्यावर्त, अजनाभ वर्ष,..

ग्लोबल टाइम्स, चीन और भारत

      - डॉ. मयंक चतुर्वेदी       चीन और भारत का सीमा विवाद कोई नया नहीं है। 1962 में चीन-भारत के बीच हुए युद्ध में जिस तरह से चीन ने भारतीय जमीन पर कब्‍जा जमाया था, उसे लगता है कि वह इससे आगे होकर 21वीं सदी के ..

नेहरू-गांधी परिवार को चीन से प्रेम क्यों है ?

    मृदुल त्यागी      चीन के साथ कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार का क्या रिश्ता है? 2007 में राहुल गांधी ने चीन के साथ कैसा समझौता किया था? इस परिवार में नेहरू से लेकर राहुल तक सभी की भूमिका संदिग्ध रही है। चीन के प्रति इस परिवार..

केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों से कृषि क्षेत्र देश के विकास में महती भूमिका निभाने को है तैयार  

  प्रह्लाद सबनानी   वर्तमान ख़रीफ़ 2020 के मौसम में देश में 1095 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में बुआई का कार्य सम्पन्न किया जा चुका है जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 1030 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में बुआई का कार्य सम्पन्न हुआ था। चावल, दालें, मोटा अनाज..

विवेकानन्द शिला स्मारक-एक ऐसा स्मारक, जिसके निर्माण के लिए पूरा भारत एक हुआ था.

   अलकागौरी     आज से 50 वर्ष पूर्व इसी महीने में एक अद्भुत स्मारक का राष्ट्रार्पण हो रहा था. एक ऐसा स्मारक जो आधुनिक भारत के इतिहास का ऐसा पहला भव्य निर्माण था जो राष्ट्रभक्त संन्यासी के लिए बनाया गया था. एक ऐसा स्मारक, जिसके ..

शिवसेना, कंगना और महाराष्‍ट्र सरकार : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

अभिनेत्री कंगना रनोट ने मुंबई में रहने को लेकर एक प्रश्‍न खड़ा किया था कि अब मुंबई सेफ नहीं है। कंगना के ट्वीट में  सवाल किया था कि मुंबई धीरे धीरे 'पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर' क्यों लगने लगी है, यह प्रश्‍न कितना सही है अथवा नही..

11 सितंबर विशेष -स्वामी विवेकानंद का शिकागो संदेश

   डॉ. पवन सिंह मलिक    127 साल पूर्व, दिन 11 सितंबर 1893 शिकागो शहर का  ‘पार्लियामेंट ऑफ़ रिलीजन’ सभागार। नीचे एक बड़ा हॉल और एक बहुत बड़ी गैलरी, दोनों में छह – सात हजार संसार भर के विभिन्न देशों के..

मोहन भागवत होने के मायने-:कृष्णमोहन झा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत आज अपने यशस्वी जीवन के ७१ वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं और इस शुभ अवसर पर उनके प्रति अपनी शुभेच्छाओं की अभिव्यक्ति हेतु आज जब मैं कागज कलम लेकर यह लेख लिखने बैठा हूं तब मेरे मानस पटल पर गत माह अयोध्या में..

प्रेमावतार नीम करौरी बाबा

बात बहुत पुरानी है। अपनी मस्ती में एक युवा योगी लक्ष्मण दास हाथ में चिमटा और कमण्डल लिये फरुर्खाबाद (उ.प्र.) से टूण्डला जा रही रेल के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में चढ़ गया। गाड़ी कुछ दूर ही चली थी कि एक एंग्लो इण्डियन टिकट निरीक्षक वहाँ आया। उसने बहुत..

भारत के गौरव पुरुष स्वामी विवेकानंद जी की पावन स्मृति और अक्षय विचार दर्शन को समर्पित राष्ट्रीयता के प्रतीक विवेकानंद स्मारक केंद्र

   सूर्यप्रकाश सेमवाल    “भारत में किसी तरह के सुधार या उन्नति की चेष्टा करने से पहले धर्म का विस्तार आवश्यक है. सर्वप्रथम हमारे उपनिषदों, पुराणों और अन्य शास्त्रों में जो अपूर्व सत्य छिपे हुए हैं, उन्हें मठों की चारदीवारियों ..

आइए..जिंदा पितरों की भी सुधि लें ....-जयराम शुक्ल

  चलिए इस पितरपक्ष का तर्पण जिंदा पितरों का हालचाल जानने से  करें। इनमें से कई घर में ही पितर बन जाने की प्रतीक्षा में हैं, कईयों को घर में ठौर नहीं इसलिए वृद्धाश्रमों में खैरात की रोटी तोड़ रहे हैं। बहुतेरे ऐसे भी हैं जो काशी-मथुरा-हरिद्वार ज..

खिलाफत आंदोलन - जबरदस्ती और नरसंहार!

  डॉ. श्रीरंग गोडबोले   खिलाफत आंदोलन का अगस्त 1920 से मार्च 1922 तक का दूसरा चरण ज़बरदस्ती और नरसंहार का चरण था. इसमें असहयोग आंदोलन ने जहाँ एक ओर जोर-जबरदस्ती पर जोर दिया वहीँ इसका अगला चरण हिंसा और नरसंहार का था. खिलाफत और असहयोग &ndash..

प्रशांत भूषण एन्ड कम्पनी: नए समावेशी भारत के दुश्मन

          (डॉ अजय खेमरिया)      संवैधानिक संस्थाएं औऱ लोकतंत्र 2014 से पहले कभी खतरे में क्यों नही थे ? अचानक ऐसा क्या हुआ है कि देश भर में एक वर्ग ऐसा वातावरण बनाने में जुटा है मानों भारत में कोई तानाशाही राज..

जलता स्वीडन पूछता है प्रश्न, जिसको दी शरण उसी ने आग में झोका मानवता की धरातल पर उठने वाले परोपकारी कदमों पर प्रश्न चिन्ह खडा कर दिया

    विष्णुगुप्त      मुस्लिम हिंसा में जलता स्वीडन सिर्फ नार्डिक देशों ही नहीं बल्कि पूरे यूरोप को डरा दिया है, भयभीत कर दिया है, कानून के शासन पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है, मानवता की धरातल पर उठने वाले परोपकारी कदमों पर प्रश्न ..

प्रधानमंत्री का “लोकल के लिए वोकल” का नारा नवाचारी,साधन और संबल का पर्याय

रवि प्रकाश   कोरोना संक्रमण की वज़ह से दुनिया बदल रही है. यह बदलाव हममें से किसे, किस मोड़ पर लाकर खड़ा कर देगा, हम में से किसी को नहीं पता. लॉकडाउन खत्‍म होने के कगार पर है. हम संभावनाओं और आशंकाओं के बीच नए भारत में प्रवेश करने की दि..

मौत में अपना अस्तित्व तलाशता मीडिया

  डॉ. नीलम महेंद्र    “लहू को ही खाकर जिए जा रहे हैं, है खून या कि पानी, पिए जा रहे हैं”   आजकल टीवी ऑन करते ही देश का लगभग हर चैनल “सुशांत केस में नया खुलासा” या फिर “सबसे बड़ी कवरेज” कार्यक्..

भारतीय मूल चेतना के धर्म में ही बने रहने की प्रेरणा  निर्मित करी.

भारत रत्न भीमराव अम्बेडकर जब युवा थे, वे शाम के वक्त  मुंबई के चर्नी रोड गार्डन [ अब सा.का. पाटिल गार्डन]  जाकर पढाई किया करते थे. इसी बाग़ में तब के विल्सन हाई स्कूल के ब्राह्मण प्रधानाध्यापक कृष्णाजी अर्जुन कैलुस्कर भी अक्सर घूमने जाया करते थ..

गति के लिए चरण व प्रगति के लिए आचरण की प्रेरणा है ‘शिक्षक’

     -    डॉ. पवन सिंह मलिक     आज शिक्षक दिवस है और हममें से कोई भी ऐसा नहीं, जिसके जीवन में इस शब्द का महत्व न हो। हम आज जो कुछ भी है या हमने जो कुछ भी सिखा या जाना है उसके पीछे किसी न किसी का प्रत्य..

राहुल के और योगी के बहनोई ....

  के. विक्रम राव    यह गाथा है दो जीजाओं की. एक सम्पन्न, समर्थ, पर बैठा-ठाला. दूसरा है विपन्न, मेहनतकश, धरती पर टिका, मगर औसत. इन दोनों व्यक्तियों की निजी मर्यादा पर ही आधारित है उनके पारिवारिक व्यवहार की शुचिता. यही अब मुद्दा भी है. उसक..

जिन्होंने भगवा ध्वज को कभी झुकने नही दिया

रोहन गिरि   गीता में भगवान श्री कृष्ण का उपदेश है कि दूसरे की नजर में अपना धर्म भले ही छोटा क्यों ना हो लेकिन दूसरे के धर्म से फिर भी वह श्रेष्ठ ही है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करना चाहिए। मेहतरों ने भी यही किया, काल के गाल..

कोरोना महामारी का पर्यटन उद्योग पर प्रभाव एवं केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे उपाय 

 प्रह्लाद सबनानी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव श्री एंटोनियो गुटेरेस ने कोरोना वायरस और पर्यटन की नीति पर बोलते हुए कहा है कि कोरोना महामारी से वैश्विक स्तर पर पर्यटन उद्योग को वित्तीय वर्ष 2020 के पहले पांच महीनों में 32,000 करोड़ अमेरि..

फेंकिए.. इस ओढी हुई गुलामी को - जयराम शुक्ल

    एक मित्र ने सवाल उठाया--जब फोर्ब्स और ट्रान्सपेरेसी इन्टरनेशनल आपको दुनियाभर में भ्रष्टतम बताती हैं तो आपको बुरा लगता है लेकिन ऐसी ही एजेन्सियां जब उपलब्धियों का बखान करती हैं तो आप न सिर्फ मुदित होते हैं सरकारी खर्चे से विज्ञापन छपवाते ..

इस 'एक रुपये' से समझिए औकात और हैसियत!

          -जयराम शुक्ल       हैसियत का मतलब औकात नहीं होता। प्रशांत भूषण की हैसियत अरबों रुपयों की है पर औकात..? सिर्फ ..एक रुपये की। सुप्रीम कोर्ट ने बस इतने का ही आँकलन किया।   किस्सा मशहूर है क..

शिक्षा की भाषा और भाषा की शिक्षा

       - गिरीश्वर मिश्र      जीवन व्यापार में भाषा की भूमिका सर्वविदित है . मनुष्य के कृत्रिम आविष्कारों में भाषा निश्चित ही सर्वोत्कृष्ट है. वह प्रतीक (अर्थात कुछ भिन्न का विकल्प या अनुवाद ! )  होने पर भी ..

प्रथम विश्व युद्ध और भारत का मुस्लिम नेतृत्व

  डॉ. श्रीरंग गोडबोले    भारत में तत्कालीन मुस्लिम मानस खुद को तुर्की के ज्यादा निकट देखता था। उस वक्त जो देश तुर्की से दुश्मनी पालते थे वे भारत के मुसलमानों के विरोध के निशाने पर आ जाते थे। भारत में खिलाफत आंदोलन का प्रारंभ वास्तव में नवं..

युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं जीते जाते, उसके लिए रणनीति और हिम्मत की जरुरत है

          - रजनीश कुमार        लद्दाख में भारतीय सेना ने एकबार फिर वह पराक्रम दिखाया है जिसकी मिसाल कई वर्षों तक दी जाएगी । लद्दाख का वह क्षेत्र जो 1962 के युद्ध में भारत ने गवां दिया था, उसे भारतीय जवानो..

सामूहिक गणेशोत्सव - सामाजिक एकीकरण की निरंतर परंपरा

  ब्रिटिश कालखंड में भारत को अंग्रेजों की परतंत्रता से मुक्त करवाने के लिए समाज का एकजुट होना आवश्यक था. इसे ध्यान में रखते हुए लोकमान्य तिलक ने सार्वजनिक गणेशोत्सव की स्थापना की. लोगों ने लोकमान्य तिलक के प्रयास का भरपूर समर्थन किया तथा धीरे-धीरे..

कोरोना ने जगाई जनचेतना!

  पूनम नेगी     एक छोटे से अदृश्य विषाणु ने जिंदगी के प्रति लोगों का नजरिया पूरी तरह बदल दिया है। विपदा का यह दौर हर खासोआम को सावधानी व जागरूकता का अनूठा पाठ पढ़ा रहा है। प्रकृति से सामंजस्य बनाकर जीने की प्रेरणा दे रहा है   ए..

क्या भारत-चीन के बीच अब युद्ध होगा?

बलबीर पुंज   सीमा पर तनातनी के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर का एक वक्तव्य सामने आया है। एक वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में उन्होंने लद्दाख की वर्तमान स्थिति को 1962 के बाद, सबसे गंभीर बताया है। उनके अनुसार, 'पिछले 45 वर्षों में सीमा पर पहली बार ह..

शांति वार्ता – नागालैंड को अशांत करने के लिए फिर सिर उठा रहे एनएससीएन और थुंगालेंग मुइवा

   प्रो. रसाल सिंह     नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नागालिम (आईएम) के महासचिव थुंगालेंग मुइवा की हठधर्मिता और अड़ियल रवैये के चलते एकबार फिर नागा समुदाय के साथ जारी शांति-वार्ता में गतिरोध पैदा होने की आशंका पैदा हो गई है. एनएससीएन..

गोंडवाना के जननायक : श्रद्धेय प्रेमसिंह मार्को जी

      अविभाज्य मंडला जिले में वनवासी कार्यकर्ता रूप में अगर सर्वप्रथम किसके नाम लिया जाय तो वो हैं श्रद्धेय श्री प्रेम सिंह मार्को जी।   आ.भा.व. कल्याण आश्रम का छतीश गढ़ को अलग कर सन 1992 में जो नूतन महाकोशल प्रान्त गठित हुआ उसके..

चल पड़े जिधर दो डग, मग में, चल पड़े कोटि पग उसी ओर

          - श्रीमती पिंकेश लता रघुवंशी        राष्ट्र सेविका समिति, विश्व के सबसे बड़े अशासकीय महिला संगठन की तृतीय प्रधानसंचालिका वंदनीया उषाताई चाटी एक ऐसा जीवन जिसने परिवार व संगठन दोनों में समन्वय ..

भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देकर भी देश की अर्थव्यवस्था को दी जा सकती है गति

         - प्रह्लाद सबनानी      देश में संस्कृति की अर्थव्यवस्था पर आज तक ग़ौर नहीं किया गया है और इस तरह के  मुद्दे पर देश में शायद सारगर्भित चर्चा भी नहीं की गई हैं। वैसे तो भारत की संस्कृति हज़ारों सा..

पावन प्रकृति की पूजा का अभियान – प्रकृति वंदन

    दयानन्द अवस्थी     प्रकृति ईश्वर का दिया गया सबसे अनमोल वरदान है. प्रकृति ही हमारे जीवन का मुख्य आधार है जो हमें प्राणवायु, जल, खाद्य एवं हमारी जिंदगी की सभी आवश्यकताओं को पूरा करती है. प्रकृति के बिना हमारे जीवन की कल्पना मु..

"अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर वामपंथी प्रभाव"

  -आर्य शुभम् वर्मा   Freedom of Expression यह शब्द सबसे पहले मैंने तब सुना था जब मकबूल फिदा हुसैन ने भारत माता तथा हिन्दू देवियों की नंगी तस्वीरे बनाई थीं तथा उनकी प्रदर्शनी लगाई थी । इसके बाद जब हिन्दुओ ने इसका विरोध किया तो तमाम वामपंथी..

प्रकृति के प्रति श्रद्धा ही प्रकृति को बचाएगी

    प्रकृति वंदन कार्यक्रम का अनुमोदन स्वयं देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी व हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किया है।आज के इस विशेष कार्यक्रम में हम सभी को  सरसंघचालक परम पूजनीय डॉक्टर मोहन राव भागवत जी क..

प्रकृति – मातृ स्वरूपा

   दीप्ति शर्मा      प्रकृति – मातृ  स्वरूपा अर्थात् प्रकृति माँ के समान है. भारतीय संस्कृति में प्रकृति को माता माना गया है एवं माँ रहित जीवन की कल्पना हेतु कहा गया है – नास्ति मातृस..

सार्वजनिक गणेशोत्सव – कोरोना कालखंड में भी सेवा कार्य की अखंड परंपरा….!

  लोकमान्य तिलक जी ने स्वाधीनतापूर्व काल में धार्मिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय जनजागरण का उद्देश्य सामने रखकर सार्वजनिक गणेशोत्सव का प्रारंभ किया. गणेशोत्सव को प्रचार का प्रभावी माध्यम बनाकर समाज संगठित होगा, उनके मन में राष्ट्रीय एकात्मता की भावना..

गुणवत्तायुक्त आत्मनिर्भरता

  ‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और में उसको लेकर रहूँगा’ –ऐसा कहने वाले लोकमान्य तिलक ‘आत्मनिर्भरता’ के  प्रबल पक्षधर तो थे ही , लेकिन ‘गुणवत्ता’  के साथ कोई समझोता हो ये भी उन्हें स्वी..

वैश्विक गणेश / पांच – चीन में ‘भगवान विनायक’

    प्रशांत पोळ     चीन और भारत के संबंध बहुत प्राचीन हैं. कितने प्राचीन हैं…? कुछ ठोस कहना कठिन है. पहली शताब्दी के प्रमाण मिले हैं, चीन में हिन्दू मंदिरों के. किन्तु हिन्दू धर्म का प्रादुर्भाव चीन में उससे भी और अधिक प..

राम राज्‍य केवल शब्‍द संकल्पना नहीं है, एक आदर्श सामाजिक व्‍यवस्‍था है

रवि प्रकाश अब, जबकि पूरे विश्व के समग्र हिन्दुओं की आस्था और भावना के प्रतीक भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया अयोध्या में आरम्भ हो चुकी है, तब यह आकांक्षा उत्पन्न होना स्वाभाविक है कि इसी के साथ भारत में राम राज्य की स्थापना का सूत्रपात भ..

वैश्विक गणेश - जापान से लेकर थायलैंड तक

वैश्विक गणेश / एक – जापान में भगवान गणेश     ‘विघ्नहर्ता गजानन’ का दस दिवसीय उत्सव प्रारंभ हो चुका है. श्री गजानन हिन्दू संस्कृति के आराध्य हैं, तथा प्रतीक भी. विश्व के प्रत्येक भाग में भगवान गणेश पाए जाते हैं. यह इस बा..

टेरेसा का का उद्देश्य धर्मांतरण था : डा भागवत

      मिशनरीज ऑफ चैरिटी एक रोमन कैथोलिक स्वयंसेवी संस्था है। टेरेसा, सेकुलर मीडिया के एक बड़े वर्ग द्वारा घोषित त्याग एवं सेवा की प्रतिमूर्ति, ने 1950 में इसकी स्थापना की थी। कहने को इस संस्था की स्थापना गरीब, बीमार, शोषित और वंचित लोग..

समत्व का अद्भुत प्रकल्प है 'शिवपरिवार '

   -जयराम शुक्ल      विपत्ति में हमारी आस्था और विश्वास और भी प्रबल हो जाता है। कोरोना का यह भयकाल भी इसके आड़े नहीं आ सका। घर-घर गणेश जी बिराजे हैं। भक्तिभाव से उनका पूजन-अर्चन हो रहा है। यह अच्छा ही है कि इस बार सबकुछ शांत वातावरण में चल रहा है। पंडाल, चोंगे, नाचगाना, शोरशराबा जैसा प्रपंच नहीं। वैसे मैं इन प्रपंचों का विरोधी नहीं क्योंकि हमारे पर्व-त्योहार, कुंभ-सिंहस्थ, संक्रांति के मेले देश की अर्थव्यवस्था को अतुलनीय योगदान देते हैं। गणेशोत्सव की बात ही क्या ..

भारत के गजानन, विश्व के गणेश

   श्रीमती पिंकेश लता रघुवंशी     “गणपतिः विघ्नराजो, लम्बतुन्डो गजाननः।द्वै मातुरश्च हेरम्ब, एकदंतो गणाधिपः।।विनायकः चारूकर्णः, पशुपालो भवात्मजः।द्वादश एतानि नामानि,प्रातः उत्थाय यः पठेत्।।विश्वम तस्य भवेद्, वश्यम् न च विघ्..

बलिदान को उत्सुक  राजगुरु

  सामान्यतः लोग धन, पद या प्रतिष्ठा प्राप्ति के लिए एक-दूसरे से होड़ करते हैं; पर क्रांतिवीर राजगुरु सदा इस होड़ में रहते थे कि किसी भी खतरनाक काम का मौका भगतसिंह से पहले उन्हें मिलना चाहिए। श्री हरि नारायण और श्रीमती पार्वतीबाई के पुत्..

खिलाफत आंदोलन - याचिका और अनुनय

  डॉ. श्रीरंग गोडबोले  साधारणतया यह कहा जा सकता है कि अपनी शक्ति के क्षीण होने के पहले खिलाफत आन्दोलन दो चरणों में विभाजित था. पहला चरण (दिसम्बर 1918- जुलाई 1920 ) निवेदन और प्रोत्साहन का था. इसमें जनमत तैयार करना, संगठन बनाना प्रस्ताव पारि..

केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों से भारतीय अर्थव्यवस्था का बदलता स्वरूप 

   प्रह्लाद सबनानी    कोरोना वायरस महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप कुछ बदलने की राह पर जाता दिखाई दे रहा है। अभी तक भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान काफ़ी कम रहता है एवं सेवा क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक रहता है। परं..

माओवादी ईसाई गठजोड़ औऱ स्वामी लक्ष्मणानंद का बलिदान

   (डॉ अजय खेमरिया)       एक महान सन्यासी जिसने वनवासियों के लिए सुरक्षा,सँस्कृति औऱ समृद्धि के द्वार खोलकर सनातन जीवनशैली की दुंदभी बजाई।जिसके निस्वार्थ व्यक्तित्व और कृतित्व की आभा ने वैश्विक ईसाई मिशन को उड़ीस..

नई शिक्षा नीति:वाम प्रलाप के रुदन को समझने की जरूरत 

(डॉ अजय खेमरिया)     मोदी सरकार द्वारा घोषित नई शिक्षा नीति को लेकर आलोचक  ऐसे पहलू गढ़ रहे है जो केवल कल्पनाओं पर आधारित है।आरएसएस के प्रति अपनी घृणा और दुश्मनी को अभिव्यक्त करने के मोर्चे पर वे आज भी कायम है लेकिन नई नीति  व्यापकता और समावेशी फलक पर अबलंबित है इसलिए इस वर्ग का  विरोध  तार्किक नही हैं।वाम विमर्श अपने इर्दगिर्द कुछ ऐसे शब्दों का जाल भी खड़ा करके चलता है जो तथाकथित बौद्धिक वर्ग में बहुत भारी भरकम प्रतीत होते है। मसलन 'कार्पोरेटाइजेशन'  एक ऐसा ही ..

प्रगतिशीलता ही हिंदुत्त्व का परमतत्व है

प्रवीण गुगनानी    ॐ गजाननं भूंतागणाधि सेवितम्, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम् |उमासुतम् शोक विनाश कारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम् || इस महाआपदा कोरोना के कालखंड मे स्वाभाविक ही है कि प्रथम पूज्य श्रीगणेश का जन्मदिवस अर्थात गणेशोत्सव का हमारा प..

भारत में वित्तीय समावेशन पकड़ रहा है गति   

     प्रह्लाद सबनानी,    सामान्य तौर पर वित्तीय समावेशन की सफलता का आँकलन इस बात से हो सकता है कि सरकार द्वारा इस सम्बंध में बनायी जा रही नीतियों का फ़ायदा समाज के हर तबके, मुख्य रूप से अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक, पहुँच रहा है..

इन सात वर्षों में भारत ने ऐसे लिखी अपनी सामर्थ्य कथा -जयराम शुक्ल

लालकिले की प्राचीर पर पंद्रह अगस्त को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सातवीं बार तिरंगा ध्वज फहरा रहे थे तब ऐसा लग रहा था मानो विश्व के समक्ष भारत अपने उन्नत भाल के साथ समर्थ और सामर्थ्य का संदेश दे रहा है..। भारत अब 1962 के बाद का ..जरा आँख में भर लो पानी वाला नहीं रहा..। बहत्ततर साल बाद वह दुश्मन को खून के आँसू रुलाने वाला बन चुका है।    इन सात वर्षों में सत्तर साल के उस व्यक्ति ने यह करके दिखाया है जिसे 2014 से पहले राजनीतिक तौर पर अछूत बनाए रखने की हरचंद कोशिशें की गईं। यह वही ..

बेंगलुरु-हिंसा से उठते सवाल...

  प्रणय कुमार    किसी भी सभ्य समाज में मार-काट, उपद्रव, हिंसा, आगज़नी, अराजकता आदि के लिए कोई जगह नहीं होती| ऐसी दुष्प्रवृत्तियों को कदापि स्वीकार नहीं किया जा सकता| और भारत जैसे लोकतांत्रिक एवं सर्वसमावेशी देश में तो इसके लिए किंचित मात्र ..

आत्मनिर्भर भारत/कृषि: अन्नदाता भी होंगे आत्मनिर्भर

   उमाशंकर मिश्र    किसानों के लिए मोदी सरकार ने अनेक योजनाओं की सिर्फ घोषणाएं नहीं कीं, अपितु उन पर काम भी शुरू हो गया है। कोरोना काल में छोटी जोत वाले किसानों का रखा गया है विशेष ध्यान  बढ़ते कदम रबी और खरीफ फसलों के समर्थन ..

सतर्क और शक्तिशाली भारत

   हितेश शंकर    कोविड कुहासे के बीच भारत के इस स्वतंत्रता दिवस का सूर्योदय कुछ अलग है। महामारी को चित्त करने के लिए दुनिया सामाजिक दूरी का दाव आजमा रही है और इस बीच भारत ने वैश्विक संबंधों की दशकों पुरानी खाइयों को पाटने वाले लंबे डग..

"खिलाफ़त का ब्रांड एंबेसडर आमिर खान"

तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन की पत्नी का आमिर खान से मिलना एक विशेष संदेश का द्योतक है। आमिर खान तुर्की में पुनः हिजाब की मानसिकता खड़ी करने में ब्रांड एंबेसेडर के रूप में अर्दोआन का सहयोग कर रहे हैं। वह कट्टर इस्लामी खिलाफ़त स्थापित करने के मजहबी एजेंडे ..

मुस्लिम-ब्रिटिश सांठगांठ और हिन्दुओं का भोलापन (1857-1919)

  डॉ. श्रीरंग गोडबोले     खिलाफत आंदोलन (1919-1924) की शुरुआत 27 अक्टूबर 1919 से मानी जा  सकती है, जब यह दिन पूरे भारत में खिलाफत दिवस के रूप में घोषित हुआ. एक वर्ष के भीतर, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (जिसे आगे से इस लेख में ..

ब्रिटिश साम्राज्य पर अंतिम निर्णायक प्रहार करने वाले नेता जी सुभाष चंद्र बोस

  नरेंद्र सहगल    “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा”  यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिन्द फौज ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद पर अंतिम निर्णायक प्रहार किया था. 21 अ..

संप्रदाय-केंद्रित भाव रखने वाला मुस्लिम ‘पीड़ित’, उदार धर्म का अनुयायी हिंदू ‘असहिष्णु’?

आदित्य कुमार गिरि -  बेंगलुरु की घटना इस्लाम के धर्म नहीं बल्कि एक संप्रदाय, पंथ होने की ओर संकेत करती है। धर्म में जहाँ वैयक्तिक-स्वतंत्रता नियम की तरह आवश्यक है वहीं संप्रदायों में वैयक्तिक-चेतना की जगह समूहवादी चेतना प्रमुखता से विद्यमा..

अरुणोदय हो चुका वीर अब कर्मक्षेत्र में जुट जाएँ

डॉ. मनमोहन वैद्य 05 अगस्त, 2020 को अयोध्या में श्रीराम जन्मस्थान पर भव्य मंदिर के निर्माण का नेत्रदीपक समारंभ समूचे भारत, और विश्व भर में फैले भारतीय मूल के लोग और भारत प्रेमियों ने जी भर कर देखा. अगणित लोगों को यह दृश्य एक स्वप्नपूर्ति का अनुभ..

अटलजीः गठबंधन धर्म के प्रवर्तक-जयराम शुक्ल

"लोकतंत्र 51 बनाम 49 का खेल नहीं है । लोकतंत्र मूलतः परंपराओं, सहयोग और सहिष्णुता के आधार पर सत्ता में भागीदार बनाने का तंत्र है"         -अटल बिहारी बाजपेयी   भारतीय लोकतंत्र में गठबंधन की राजनीति की विवशता को गठबंधन धर्म वि..

क्रांतिदूत, महायोगी और विश्वगुरु भारत

      -  देवीदास देशपांडे    भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से बोलते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योगी श्री अरविंद का उल्लेख किया. यह बहुत ही उल्लेखनीय और शानदार बात कही जानी चाहिए. इसका कारण यह है कि जब..

अखंड भारत की सर्वांग स्वतंत्रता

         - नरेंद्र सहगल        भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग की पूर्ण सहमति के बाद विश्व के सबसे प्राचीन राष्ट्र के टुकड़े कर के अंग्रेज अपने घर चले गए. इस दुर्भाग्यशाली अवसर पर &lsquo..

अखंड भारत - संकल्प से होगा सपना साकार

           - डॉ. पवन सिंह मलिक    अखंड भारत भारतवासियों के लिए केवल शब्द नहीं है ।  यह हमारी श्रद्धा, भाव, देशभक्ति व संकल्पों का अनवरत प्रयास है जिसे प्रत्येक देशभक्त ज..

स्वदेशी बनाम निजीकरण और मोदी सरकार के विरोध का औचित्य - एक दृष्टिकोण

- डॉ विश्वास चौहान  देश की अर्थव्यवस्था के संदर्भ में कुछ नीतियां बहुत प्रचलित हैं जैसे उदारीकरण ,निजीकरण और वैश्वीकरण ,इन तीनो से मिलकर बनता है अर्थव्यवस्था का LPG मॉडल जिसे प्रायः सभी जानते हैं ।दो शब्द और वर्तमान में बहस में हैं स्वदेशी और आत्मनिर्भरता ...वर्तमान में सार्वजिनक सेवाओ के उपक्रमो में विभिन्न एम्प्लॉय एसोसिशन या कामगार संगठनों में सरकार के खिलाफ आंदोलन की होड़ है । वास्तव में देश हित मे सोच विचार के बिना ये होड़ ऐसी  है कि "वो संगठन कर रहा है कहीँ हमारा आधार या मेम्बरशिप कमजोर ..

हरि अनंत हरि कथा अनंता

  श्रीमती पिंकेश लता रघुवंशी   श्रीराम जैसे सम्पूर्ण विश्व में सर्वव्याप्त हैं वैसे ही रामकथा भी समस्त विश्व में वहाँ की संस्कृति व वातावरण के अनुरूप कही व सुनी जाती है।जैसे भारतवर्ष के हर कोने में रामकथा विभिन्न प्रकार से घर-घर में गाई ..

वामपंथी संघ को बदनाम करने के लिए झूठी कहानियां गढ़ते हैं - 2

    वामपंथी संघ को बदनाम करने के लिए झूठी कहानियां गढ़ते हैं - 1     - डॉ मनमोहन वैद्य      19 अप्रैल 2020 को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में सरसंघचालक मोहन भागवत ने सभी स्वयंसेवकों से आग्रह किया, “हमें प्रचार ..

बेंगलुरू, दिल्ली, राम मंदिर और कुछ बातें जो हम समझ जाएं तो बेहतर है…!

          - सौरभ कुमार       बेंगलुरू में एक फेसबुक पोस्ट पर पुलिस स्टेशन में आग लगा दी गई. आरोप है कि कर्नाटक के कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवासमूर्ति के रिश्तेदार ने प्रोफेट मुहम्मद को लेकर फेसबुक पोस्ट..

जन्माष्टमी विशेष : भगवान श्रीकृष्ण एक प्रेमावतार

       - हृदयनारायण दीक्षित    इतिहास भूत होता है। इसमें जोड़-घटाव उचित नहीं होता। जैसा घटित हुआ, वैसा ही इतिहास बना। हम चाहकर भी भूतकाल नहीं बदल सकते। लेकिन इस भूत इतिहास की शरीर स्मृति में अनुभूत भी होता है। भूत इतिहास बन..

राम, कृष्ण, मुक्ति संघर्ष और स्वतंत्रता

   -   जयराम शुक्ल       ऋतुराज वसंत शौर्य, उत्सव और उत्सर्ग के लिए जाना जाता है तो पावस(वर्षा ऋतु) की हरीतिमा में पवित्रता, मुक्ति, विजय और क्रांति के सूत्र जुड़े है। सावन और भादौं की संक्रांति में अँग्रेज़ी मही..

वामपंथी संघ को बदनाम करने के लिए झूठी कहानियां गढ़ते हैं - 1

          - डॉ मनमोहन वैद्य      कम्युनिस्ट विचारधारा जीवन के भारतीय दृष्टिकोण के प्रति बिल्कुल उदासीन है, क्योंकि भारतीय दृष्टिकोण आध्यात्मिकता पर आधारित है, और वामपंथियों के लिए, आध्यात्मिकता एक 'झूठी चेतना'..

श्रीराम मंदिर – यह केवल एक मंदिर नहीं, भारत के सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है

          - डॉ. मनमोहन वैद्य      अयोध्या में रामजन्मभूमि पर करोड़ों भारतीयों की आस्था और आकांक्षा के प्रतीक भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण का शुभारम्भ 5 अगस्त, 2020 को होने जा रहा है. भारत के सांस्कृतिक इतिहास..

आत्मनिर्भर भारत – भारत में बनेंगे स्वदेशी रक्षा उपकरण, 101 रक्षा उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध

  सूर्यप्रकाश सेमवाल   ‘वीर भोग्या वसुंधरा’ भारतीय सैन्य शक्ति का संकल्प मन्त्र है और अपने शौर्य व पराक्रम से हमारे सैनिक इसे समय-समय पर प्रमाणित भी करते रहे हैं. जब समूचे विश्व के साथ भारत भी चीन द्वारा फैलाई कोरोना नामक महा..

देहिक दैविक भौतिक तापा, राम राज काहहु नही व्यापा जग के राम जग में राम

श्रीमती पिंकेश लता रघुवंशी श्री राम भारत की आध्यात्मिक चेतना के केंद्र हैं। प्रधानमंत्री जी भूमिपूजन के समय जब श्री राम की सार्वभौमिकता का वर्णन करते हुये इंडोनेशिया, मलेशिया, जावा ,सुमात्रा, वाली व अन्य देशों में राम की स्वीकार्यता की बात करते हैं तो स्..

सर्पदंश :हर दस मिनिट में असमय मरता एक गरीब भारतीय

  (डॉ अजय खेमरिया)   कोरोना महामारी के शोर में इस साल जून से अब तक करीब  बीस हजार भारतीय अपने खेतों में सर्पदंश से मौत का शिकार हो चुके हैं। देश भर में करीब तीन लाख लोग हर साल सांप के काटने का शिकार होते है ।हर दस मिनिट में एक व्यक्ति ..

 जन्माष्टमी पर विशेष-समग्र क्रांति के अग्रदूत योगेश्वर श्रीकृष्ण

 - नरेन्द्र सहगल -   अधर्मियों, आतंकवादियों, समाजघातकों, देशद्रोहियों और भ्रष्टाचारियों को समाप्त करने के उद्देश्य से धराधाम पर अवतरित हुए योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्म से लेकर अंत तक अपने निर्धारित उद्देश्य के लिए सक्रिय रह..

सब भारतवासी मूलनिवासी – जनजातियों के धर्मान्तरण के पीछे राष्ट्र को खंडित करने का षड्यंत्र

    भारतीय सनातन संस्कृति सदैव  से आक्रांताओं के निशाने पर रही है, जिसका क्रम मुगलों एवं अंग्रेजों से स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भी थम नहीं पाया है. विदेशी शक्तियां एवं देश के अन्दर राष्ट्रघाती तत्वों द्वारा गुपचुप तरीके से भारत राष्..

भारतीय जनजातियाँ और विश्व मूलनिवासी दिवस

        - बुधपाल सिंह       भारत में ब्रिटिश शासन काल से ही भारतीय जनजातीय समाज को मूल हिन्दू समाज से अलग करने के प्रयास किये जाते रहे हैं। हमारे जनजातीय इतिहास में अगर हम सबसे ज्यादा कमजोर हुए हैं या गरीब हु..

जंगल की आत्मा है आदिवासी

      -   चन्द्रशेखर पटेल “कुशवाहा”      “जिसने धरोहर बचाई, पर्यावरण सम्मान किया वह आदिवासी है” संभाल रखी है परम्पराएं, संस्कृति, आदिम व्यवस्था जिसने वह भारत का वासी है, वह आदिवासी है..

इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों से निपटने में सक्षम है नई शिक्षा नीति

कृष्णमोहन झा केंद्रीय मानव संसाधन  विकास मंत्रालय का नया नाम अब शिक्षा मंत्रालय होगा . केंद्र सरकार के द्वारा हाल में ही घोषित नई शिक्षा नीति में  मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम भर  नही बदला है ,इसमें बहुत कुछ बदल गया है . देश में अभी त..

बिरसा मुंडा का उलगुलान ही मूलनिवासी दिवस का खंडन है

         - प्रवीण गुगनानी     मूलनिवासी दिवस या इंडिजिनस पीपल डे एक भारत मे एक नया षड्यंत्र है। सबसे बड़ी बात यह कि इस षड्यंत्र को जिस जनजातीय समाज के विरुद्ध किया जा रहा  है, उसी समाज के काँधों पर रखकर इसकी..

भारतीय सनानत संस्कृति की जन्मदात्री है-प्राचीन अरण्य (वनवासी) संस्कृति

           - प्रकाश सिंह उईके       यह एक आश्चर्यजनक तथ्य है कि वर्तमान में जिस अरण्य अर्थात वनवासी सभ्यता को असभ्यता की निशानी माना जाता है और जिस वन के कानून को बर्बरता का पर्यायवाची माना जात..

सह अस्तित्व और जीवन मूल्यों का मर्मस्पर्शी लोकपर्व: बहुला चौथ

           -  जयराम शुक्ल      लोकपर्व और व्रत कथाएं सनातन से चली आ रही उदात्त संस्कृति के साक्षात् दर्शन हैं। उसमें निहित संदेश समाज को संजीवनी शक्ति देते हैं। इस समाज में सिर्फ़ मनुष्य ही नहीं ..

राष्ट्रवादी मुस्लिम सरदार और धूर्त अंग्रेज

 - नरेन्द्र सहगल -   औरंगजेब के पश्चात् कुछ समय तो शांति से कटा, परन्तु धर्मान्ध मुस्लिम नवाबों के अहम के कारण यह विवाद सुलझने के स्थान पर उलझता चला गया. हिन्दुओं ने एक दिन भी मंदिर पर अपने अधिकार को नहीं छोड़ा. एक कालखंड ऐसा भी आया जब ह..

सारे जगत में स्वयं को और स्वयं में सारे जगत को देखने की दृष्टि भारत की है - सरसंघचालक

          श्रीराम मंदिर निर्माण कार्य शुभारंभ कार्यक्रम में पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का उद्बोधन     आज आनंद का क्षण है, बहुत प्रकार से आनंद है। हम सबने एक संकल्प लिया था। मुझे स्मरण है कि तब के हमारे संघ..

श्रीगुरु गोबिन्दसिंह और बाबा वैष्णवदास का रणकौशल

 -नरेंद्र सहगल-  राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण – 10   अत्याचारी शासक और हिन्दू संहारक औरंगजेब ने अपने एक दुर्दांत सेनापति जांबाज खान को मुगल सेना के साथ अयोध्या की ओर कूच करने का हुक्म दे द..