आलेख

देश बदलना है तो देना होगा युवाओं को सम्मान - डॉ. नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). भारत एक युवा देश है। इतना ही नहीं , बल्कि युवाओं के मामले में हम विश्व में सबसे समृद्ध देश हैं। यानि दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा युवा हमारे देश में हैं। भारत सरकार की यूथ इन इंडिया,2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 1971 से 2011 के बीच य..

गांव बंद आन्‍दोलन से मध्‍यप्रदेश की अर्थव्‍यवस्‍था को तोड़ने का षड्यंत्र : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). पूर्ण कर्ज मुक्ति, सुनिश्चित आमदनी और स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करवाने के उद्देश्‍यों को लेकर एक से दस जून तक मध्‍यप्रदेश में किसान संगठन मिलकर गांव बंद आन्‍दोलन चलाने जा रहे हैं। जिसमें कि  किसान संगठन प्रत्&zw..

खबरें जिन पर झूठ चिपकाकर देश का माहौल बिगाड़ा गया -रमेश शर्मा

भोपाल(विसंके). भारत में जिस तरह साहित्य के पुरुस्कार लौटाकर दबाव बनाने वाले समूह है उसी प्रकार मीडिया में भी एक वर्ग है जो सरकार के बारे में यह बात फैला रहा है कि सरकार मीडिया की स्वतंत्रता से दबाने की कोशिश कर रही है। जबकि हकीकत कुछ और है।देश में पिछले क..

टीपू सुल्तानी सोच व हिंदू -लिंगायत विभाजन की पराजय - प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके).कर्नाटक विधानसभा चुनाव के संदर्भ में एक बात बड़ी ही स्पष्ट दिख रही थी; और वह यह थी कि कांग्रेस इस चुनाव को अपना अंतिम किला बचाने की लड़ाई के रूप में देख रही थी और भाजपा इस चुनाव में कर्नाटक को अपने दक्षिणी राज्यों में प्रवेश का स्वागत द्वार बन..

मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर पर एकल संवाद- विजय मनोहर तिवारी

भोपाल(विसंके).मिस्टर जिन्ना जब मुल्क को बांटकर दीवार खिंचवा दी तो दीवार के इस तरफ क्यों टंगे रहे? दीवार के उस तरफ ही तुम्हारी जगह होनी चाहिए थी। यहां जरूरत ही नहीं थी। हम ताे तस्वीरों और बुतों को मानने वाले लोग हैं। लेकिन तुम्हारी तस्वीर सिर्फ दीवार पर टं..

बुजुर्गों को लेकर मोदी चिंताएं : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). भारतीय संस्‍कृति में अपने माता-पिता और अन्‍य बुजुर्गों की चिंता करने की नसीयत ठीक उसी तरह दी गई है, जैसे कि हम अपने नवजात शिशु की देखभाल करते हैं। जिस देश में बचपन से ही बताया जाता रहा है कि मातृ देवो भवः ! पितृ देवो भवः ! आचार्य ..

नफरत की आग लगाना सरल है लेकिन .. - डॉ. किशन कछवाहा

भोपाल(विसंके). जहरीली सियासत की आंधी लगभग देश के अधिकांश हिस्सों में देखा जाना एक  अच्छा लक्षण नहीं माना जा सकता है. लोकतंत्र में बातों को और गंभीर समस्याओं को भी जनहित की दृष्टी से देखा जाता है, देखा जाना भी चाहिए. लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने अनुसुचि..

कर्नाटक में कांग्रेस का कुटिल दांव - हिंदू लिंगायत विभाजन

भोपाल(विसंके). भारत में हिंदू को अल्पसंख्यक बनाने के षड्यंत्र पूर्वक प्रयास पिछले कई दशकों से चल रहें हैं. प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष चलने वाले इन षड्यंत्रों को कई रूपों में अलग अलग प्रकार से चलाया जाता है. मुस्लिम व ईसाई जनसंख्या को वभिन्न माध्यमों से बढ़..

झूठ क्यों बोलते हैं राहुल गांधी? - लोकेन्द्र सिंह

भोपाल(विसंके). कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और उनके राजनीतिक सलाहकारों का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संबंध में अध्ययन ठीक नहीं है। इसलिए जब भी राहुल गांधी संघ के संबंध में कोई टिप्पणी करते हैं, वह बेबुनियाद और अतार्किक होती है। संघ के संबंध म..

पत्रकारिता के दार्शनिक आयाम का आधार है 'आदि पत्रकार नारद का संचार दर्शन'- लोकेन्द्र सिंह

भोपाल(विसंके). भारत में प्रत्येक विधा का कोई न कोई एक अधिष्ठाता है। प्रत्येक विधा का कल्याणकारी दर्शन है। पत्रकारिता या कहें संपूर्ण संचार विधा के संबंध में भी भारतीय दर्शन उपलब्ध है। देवर्षि नारद का संचार दर्शन हमारे आख्यानों में भरा पड़ा है। हाँ, य..

हिंदू बौद्ध संयुक्त रूप में आज भी विश्वगुरु हैं हम- – प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). बुद्ध जयंती अर्थात बुद्ध पूर्णिमा या वेसाक या हनमतसूरी बौद्ध धर्मावलम्बियों के साथ साथ सम्पूर्ण भारत वर्ष के लिए एक महत्वपूर्ण, आस्था जन्य और उल्लासपूर्वक मनाया जानें वाला पर्व है. भगवान् बुद्ध के अवतरण का यह पर्व वैशाख पूर्णिमा के दिन पड़ता..

कर्नाटक : राजनेताओं के बीच जहां राम से अधिक होती है भक्तों की पूजा - डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). प्रभु श्रीराम के बारे में सदियों से भारत में चहूं ओर यही बात कही और सुनी जाती है कि राम से बड़ा राम का नाम है जो काम स्वयं श्रीराम नहीं कर पाते, वह काम उनके नाम का जाप करने मात्र से पूरा हो जाता है। निश्‍चित ही उत्‍तरभारत की ..

नक्सलवाद को हराती सरकारी नीतियाँ -डॉ. नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). 24 अप्रैल 2017 को जब "नक्सली हमले में देश के 25 जवानों की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे" यह वाक्य देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था, तो देशवासियों के जहन में सेना द्वारा 2016 में  की गई सर्जिकल स्ट्राइक की यादें ताजा हो ग..

धुंध और तनाव फैलाकर प्रगति रोकने की साजिश-रमेश शर्मा

भोपाल(विसंके). अदालत का एक और फैसला आया। मक्का मस्जिद ब्लास्ट में असीमानंद एवं सभी आरोपी निर्दोष छूटे। इससे पहले इसी प्रकार के दो और प्रकरणों में ऐसा हुआ। इसके अलावा कठुआ बलात्कार कांड के आरोपियों ने नारको टेस्ट की मांग की? उन्होंने यह टेस्ट दोनों का मांग..

कांग्रेस के गले में अटका महाभियोग प्रस्ताव - सुरेश हिन्दुस्थानी

भोपाल(विसंके). वर्तमान में देश में जिस प्रकार की विरोधात्मक राजनीति की जा रही है, वह केवल अविश्वसनीयता के दायरे को और बड़ा करती हुई दिखाई देती है। इसको विपक्षी राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों की नकारात्मक चिंतन की राजनीति कहा जाए तो ज्यादा ठीक होगा। विरो..

संविधान सार्थकता की कसौटी पर

भोपाल(विसंके). इस पृथ्वी पर जिसे पुण्यभूमि की संज्ञा दी जा सकती है, वह देश है भारतवर्ष. यहाँ क्षमा, धैर्य, दया, शुद्धता आदि सद्वृत्तियों का निरन्तर विकास हुआ है. ये मानव जाति का कल्याण करने वाली सद्वृत्तियां हैं, यहाँ आध्यात्म और आत्मा के बारे खोज की गयी ..

‘डॉ. बाबासाहब आंबेडकर और राष्ट्रीय धारा’ - प्रशांत पोळ

भोपाल(विसंके). डॉ. बाबासाहब आंबेडकर जी का भारत की राष्ट्रीय धारा का भरपूर अभ्यास था. उनके प्रबंध का विषय ही था, ‘भारत के राष्ट्रीय लाभांश का इतिहासात्मक और विश्लेषणात्मक अध्ययन’ (The National Divident of India – A Historical and Analytic..

डॉ. भीमराव अम्बेडकर, ब्राहम्ण और संस्कृत -रीतेश दुबे

भोपाल(विसंके). भारतीय वाड्ग्मय कहता है ‘‘जन्म जायते शूद्र‘‘ अर्थात् हर व्यक्ति जन्म से शूद्र होता है एवं कर्म ओैर गुण से ही ब्राहम्ण बनता अतः हमारी संस्कृति में मनुष्य का जन्म से नहीं कर्म व गुण से महान होना बतलाया गया है। ऐसी महान..

किसने कहा कि पुष्यमित्र शुंग के काल में ब्राह्मण और दलित जैसा विभाजन था -विवेक भटनागर

भोपाल(विसंके). यह विभाजन मुसलमानों और अंग्रेजों की देन है। वे अपने शासनकाल के दौरान हमारी वर्ण व्यवस्था को समझ ही नहीं सके। मुस्लमानों को शेख सैयद, मुगल व पठान जैसे विशेषणों वाली जाती व्यवस्था की आदत थी और अंग्रेजों में स्टूअर्ट, बार्बू, हेनरी और जैसी उच्..

सत्ता की तड़प और विरोधी दलों की राजनीति - सुरेश हिन्दुस्थानी

भारतीय राजनीति कब किस समय कौन सी करवट बैठेगी, यह कोई भी विशेषज्ञ अनुमान नहीं लगा सकता। अगर इसका अनुमान लगाएगा भी तो संभव है कि उसका यह अनुमान भी पूरी तरह से गलत प्रमाणित हो जाए। हमारे देश में लम्बे समय तक सत्ता पक्ष की राजनीति करने वालों राजनेताओं के लिए ..

कर्नाटक का एक मठ ऐसा भी जहाँ सत्ता के लिए राजनेता टेकते हैं माथा – डॉ. मयंक चतुर्वेदी

कर्नाटक राज्‍य में कहने को तो यहाँ मंदिर और मठों की संख्‍या उंगलियों में गिनने में आने से भी ज्‍यादा है, लेकिन इस विविध पंथ, धर्म एवं दर्शक के प्रदेश में 30 जिलों में 600 से ज्यादा बड़े मठ हैं। जिसमें कि अत्‍यधिक मान्‍य राज्य में लिंगा..

रामराज: आधुनिक भारत की सर्वोपरि आवश्यकता

राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट. ये वाक्य न जानें कहनें वाले ने किन अर्थों में किस आव्हान को करते हुए कहा था किन्तु वर्तमान भारत में यह आव्हान चरितार्थ और सुफलित होता दिखाई पड़ रहा है. तथ्य है कि भारत में जब यहाँ के एक सौ तीस करोड़ लोग बात करतें हैं तब औसत..

“गजवा-ए-हिन्द” जैसे षणयंत्र से जूझने के लिए हम कितने प्रतिबद्ध – सुरेश राने

भोपाल(विसंके). गजवा ए हिंद का शाब्दिक अर्थ है-भारत पर इस्लाम की पूर्ण विजय. यह एक हदीस है (पैगम्बर मुहम्मद के कुरान से अतिरिक्त कथनों को हदीस कहा जाता है) अतः यह मुसलमानों के लिये सुदृढ़ मान्यता का विषय है- 'काले झन्डे लिये हुए योध्दा खुरासान-(अफगानिस्त..

वो सिर्फ हिन्दू नहीं इंसान भी हैं। - केशव पटेल

भोपाल(विसंके). पाकिस्तान में हिन्दुओं को धर्म परिवर्तन करने पर दबाब बनाया जा रहा है। राजस्थान से डिपोर्ट हुए हिन्दू परिवार पाकिस्तान में मुस्लिम धर्म अपनाने को मजबूर हो रहे हैं। कारण साफ है मुस्लिम नहीं, तो जीना मुहाल। बहू-बेटियों की इज्जत से लेकर ..

भाजपा के बढ़ते प्रभाव के बीच ममता की छटपटाहट : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

देश में जैसे-जैसे एक के बाद एक राज्‍य भाजपा के रथ पर सवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह विजित करते जा रहे हैं, वैसे-वैसे कांग्रेस जैसी राष्‍ट्रीय राजनीतिक पार्टी के साथ कई क्षेत्रीय पार्टियों में हलचल मचती जा रही है। यह..

उपचुनावों के आधार पर लोकसभा चुनाव आंकना भूल होगी - डाँ नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). 19 मार्च को योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण कर रहे है। भारी बहुमत, जनता की अपेक्षाओं और आशीर्वाद के बीच यूपी के मुख्यमंत्री बनने के ठीक एक साल बाद अपने प्रदेश के दो लोकसभा क्षेत्रों के उ..

सृष्टि की रचना का दिन- भारतीय नव वर्ष - डॉ. सौरभ मालवीय

भोपाल(विसंके). 18 मार्च से विक्रम संवत 2075 का प्रारंभ हो रहा है. भारतीय पंचांग में हर नवीन संवत्सर को एक विशेष नाम से जाना जाता है. इस वर्ष इस नवीन संवत्सर का नाम विरोधकर्त है. भारतीय संस्कृति में विक्रम संवत का बहुत महत्व है. चैत्र का महीना भारतीय ..

विरोध की कमजोर नींव पर खड़ी विपक्षी एकता - डाँ नीलम महेंद्र

देश के वर्तमान राजनैतिक पटल पर लगातार तेजी से बदलते घटनाक्रमों के अनर्तगत ताजा घटना  आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर वित्तमंत्री अरुण जेटली के बयान को आधार बनाकर तेलुगु देशम पार्टी के दो केंद्रीय मंत्रियों का एनडीए सरकार से उनक..

क्यों ना इस महिला दिवस पुरुषों की बात हो ? - डॉ. नीलम महेंद्र

"हम लोगों के लिए स्त्री केवल गृहस्थी के यज्ञ की अग्नि की देवी नहीं अपितु हमारी आत्मा की लौ है, रबीन्द्र नाथ टैगोर।"8 मार्च को जब सम्पूर्ण विश्व के साथ भारत में भी "महिला दिवस" पूरे जोर शोर से मनाया जाता है और खासतौर पर जब 2018 में यह आयोजन अपने 100 वें वर..

विज्ञान में आगे होते हम : डॉ. निवेदिता शर्मा

भोपाल(विसंके). विज्ञान हमारे दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज ऐसा कोई कार्य नहीं, जिसमें वैज्ञानिक गुणवत्‍ता की आवश्‍यकता महसूस न की गई हो। इसीलिए कहा गया है कि मानव जीवन विज्ञान के बिना आधा-अधूरा है। वैसे विज्ञान स्वयं में..

संभावनाओं के क्षितिज में अवनि की उड़ानसाँच कहै ता.. -जयराम शुक्ल

भोपाल(विसंके). शब्दचित्र कभी-कभी ही अर्थवान होते हैं लेकिन अवनि चतुर्वेदी के लिए यह बिलकुल सटीक बैठता है. अवनि यानी धरती ने व्योम की अनंत ऊँचाइयाँ नापने की ठानी है. इस अवनि की पृष्ठभूमि महानगर नहीं अपितु धूलधूसरित और सदियों से व्यवस्था से उपेक्षित वो इलाक..

जेएनयू, शिक्षा के मंदिर में शिक्षा का मजाक : डॉ. निवेदिता शर्मा

भोपाल(विसंके).विद्या के मंदिर का किस तरह मखौल उड़ाया जा सकता है, यह यदि किसी को देखना है तो एक बार वह देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के नाम से बने केंद्रीय विश्‍वविद्यालय जेएनयू अवश्‍य हो आए। एक के बाद एक ऐसे कारनामें यहां से उजागर ..

भागवत का कथन, संघ और सेना में समानता : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत का अपने स्‍वयंसेवकों के बीच का एक संबोधन क्‍या सामने आया, लग रहा है जैसे देश का एक धड़ा उबल उठा है। उबले भी क्‍यों न, संविधान ने अपने मौलिक अधिकार में वाक की स्‍वतंत्रता जो सभ..

कट्टरता, राममंदिर और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). दो वि‍द्वान, दोनों ही इस्‍लाम के उम्‍दा जानकार । दोनों का एक विषय पर स्‍वर भी एक कि उन्‍हें कभी हिन्‍दुओं से कोई दिक्‍कत नहीं हुई। हिन्‍दुओं ने हमेशा इज्‍जत और प्‍यार दिया है। पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्..

प्रसंगवश - मिसाइल का जवाब तो मिसाइल से ही देना होगा - आर.के.सिन्हा

भोपाल(विसंके). भारत और चीन के बीच ढाई-तीन महीने तक भारत-भूटान-चीन की सीमा पर डोकलाम में तना-तनी के बाद जब सीमा पर शांति कायम हुई तो पाकिस्तान ने मोर्चा खोल दिया। धूर्त पाकिस्तान की शैतानी हद से बाहर हो गई है। बीते दिनों उसने भारत पर मिसाइल तक दाग दिया। पा..

अंत्योदयी समाज के अच्छे दिन - जयराम शुक्ल

भोपाल(विसंके). बजट को लेकर मेरी कसौटी किसानों, गरीबों और युवाओं के लिए क्या? से शुरू होती है. बाकी मसले तो कर्मकांडी और रस्म अदायगी के होते हैं. इस बजट को सरसरी तौर पर पढ़ा तो पहली नजर में ही ऐसा लगा कि सरकार चुनावों से पहले सूटबूट की सरकार के लाँछन को पू..

भारत में अभी भी पकौड़े और चाय में बहुत स्कोप है साहब - डॉ नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). "साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार सार को गहि रहै थोथा दे उड़ाय।। " कबीर दास जी भले ही यह कह गए हों. लेकिन आज सोशल मीडिया का जमाना है जहाँ किसी भी बात पर  ट्रेन्डिंग और ट्रोलिंग  का चलन है। कहने का आशय तो आप समझ ही चुके होंगे। जी ..

संघ मेरी आत्मा – श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की आत्मकथा के अंश

भोपाल(विसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से मेरा प्रथम संपर्क 1939 में हुआ और वह भी आर्य समाज की युवा शाखा, आर्य कुमार सभा के माध्यम से उन दिनों ग्वालियर रियासत थी, जो किसी भी प्रांत का हिस्सा नहीं थी. एक कट्टर 'सनातती' परिवार से होने के बाद भी मैं आर्य कुम..

विदेशियों के दिल में भी बसे हैं भगवान राम

भोपाल(विसंके). भगवान राम हम सबके ही नहीं, विदेशियों के भी आदर्श हैं। राम और हनुमान की लीलाओं का गुणगान सात समंदर पार भी होता है। नई दिल्ली के कमानी आडिटोरियम में भारतीय कला संबंध परिषद की ओर से आयोजित कार्यक्रम में एशियान देशों के कलाकारों ने रामायण प्रस्..

हिंदुत्व का चोला स्वहितार्थ ढोंग या वास्तविक हृदय परिवर्तन...? - सुरेश राने

भोपाल(विसंके). "गर्व से कहो-हम हिंदु हैं"- यह उद्घोष तीन दशक पहले विश्व हिन्दू परिषद ने पुनर्प्रचलित किया. सेक्युलर गेंग को इस से बहुत चिढ़ थी, पर आज यहां स्वयं के असली हिन्दू होने का दावा करने वालों की कतार लग गयी है. इसमें राहुल गांधी के साथ दिग्विजय सि..

बांग्लादेश में कैसे बचेंगे हिन्दु ?? - तसलीमा नसरीन

भोपाल(विसंके). फेसबुक पर एक रोती हुई वृद्ध महिला और आग में जलते उसके घर की फोटो देखकर लगा कि यह किसी रोहिंग्या के घर फुंकने का दृश्य है और असहाय रोहिंग्या के वृद्धा संपत्ति नष्ट हो जाने की वजह से रो रही है. जब फोटो के नीचे लिखे शब्दों पर निगाह गई तो वहां ..

भारत-इजराइल संबंधों की नई उड़ान : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). भारत को लेकर इजराइयली क्‍या सोचते हैं, यह इस बात से पता चलता है कि वहां रहकर अपनी उच्‍च शिक्षा पूरी कर रहे भारतीय अपने को सबसे अधिक सुरक्षित और सम्‍मानित अनुभव करते हैं। भारत के प्रधानमंत्री ने जब पिछले साल 3 जुलाई को इजराइल की ..

प्रार्थनाएं धर्म की नहीं, भारतीयता की प्रचारक - लोकेन्द्र सिंह

भोपाल(विसंके). देश के लगभग एक हजार केंद्रीय विद्यालयों में पढऩे वाले विद्यार्थियों को संस्कृत और हिंदी में प्रार्थना कराई जाती हैं। वर्षों से यह प्रार्थनाएं हो रही हैं। परंतु, आज तक देश में कभी विद्यालयों में होने वाली प्रार्थनाओं पर विवाद नहीं हुआ। कभी क..

हिन्दुकुश शब्द का अर्थ हिन्दुओ की सामूहिक हत्या का प्रतीक - सुरेश राने

हिंदुकुश दो शब्दों से बना है, हिन्दु और कुश कुश फारसी शब्द है जिसका अर्थ है हत्यारा जैसे खुदकुशी या आत्महत्या और खुदकुश का अर्थ होता है, आत्म हत्या करने वाला, गोकुशी अर्थात गौहत्या, गोकुश(गौहत्यारा). हिन्दुकुश शब्द कैसे और कब प्रचलित हुआ, यह जानने के लि..

सामाजिक सरोकार की पर्याय बनती एकात्म यात्रा - कृष्णमोहन झा

भोपाल(विसंके). नर्मदा नदी के जल, मृदा संरक्षण, स्वच्छता, प्रदूषण की रोकथाम, जैविक कृषि के प्रोत्साहन और तटीय क्षेत्रों के संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने प्रदेश में निकाली गई नमामि देवि नर्मदे - नर्मदा सेवा यात्रा की सफलता के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ..

तात्कालिक स्वार्थ के लिये समाज और देश को क्षति पहुंचाने वालो को इतिहास में कोई जगह नही मिलती – सुरेश राने

भोपाल(विसंके). देश  में कुछ समय से दलित-मुस्लिम एकता स्थापित कर एक सशक्त राजनीतिक शक्ति खड़ी करने का प्रयास हो रहा है. इसके लिये दोनों वर्गों के कुछ अति-उतावले नेता सक्रिय हैं. बहन मायावती ने एक बार मुस्लिम वोट प्राप्त कर उत्तरप्रदेश में सरकार बनाई, ..

बांग्लादेशी घुसपैठियों पर निर्णायक मूड में नमो सरकार – प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). अंततः संघ परिवार की नीतियों के अनुरूप बांग्लादेशी घुसपैठियों के सन्दर्भ में असम की सर्वानंद सरकार ने व केंद्र की नमो सरकार ने अपना राष्ट्रवादी मास्टर प्लान लागू कर दिया है. 22 फरवरी 2014 को, लोक सभा चुनाव के दौरान भाजपा के प्रधानमंत्री पद क..

भगवान श्रीराम, महराणा प्रताप, शिवाजी के साथ खड़ा रहा वनवासी समाज – सोमया जुल्लु जी

भोपाल(विसंके). 28 दिसम्बर से ३१ दिसम्बर तक अखिल भारतीय कल्याण आश्रम द्वारा आयोजित 20वी राष्ट्रीय वनवासी खेल प्रतियोगिता का भव्य आयोजन का समापन हुआ. भोपाल के कमला देवी पब्लिक स्कूल करोंद, में तीरन्दाजी व खो–खो प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ ब्जिसमे वि..

हैप्पी न्यू ईयर या नववर्ष, तय कीजिए- लोकेन्द्र सिंह

दृश्य एक। सुबह के पांच बजे का समय है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि यानी वर्ष प्रतिपदा का मौका है। ग्वालियर शहर के लोग शुभ्रवेश में जल विहार की ओर बढ़े जा रहे हैं। जल विहार के द्वार पर धवल वस्त्र पहने युवक-युवती खड़े हैं। उनके हाथ में एक कटोरी ह..

'संघ और समाज' के आत्मीय संबंध को समझने में मदद करते हैं मीडिया विमर्श के दो विशेषांक- लोकेन्द्र सिंह

भोपाल(विसंके). लेखक एवं राजनीतिक विचारक प्रो. संजय द्विवेदी के संपादकत्व में प्रकाशित होने वाली जनसंचार एवं सामाजिक सरोकारों पर केंद्रित पत्रिका 'मीडिया विमर्श' का प्रत्येक अंक किसी एक महत्वपूर्ण विषय पर समग्र सामग्री लेकर आता है। ग्यारह वर्ष की अपनी या..

कब कैसा नववर्ष हमारा?- विनोद बंसल

भोपाल(विसंके). भारत-वर्ष पर्व त्यौहारों का देश है जिसका हर दिन कोई न कोई विशिष्टता लिए हुए होता है. कोई किसी महापुरुष का जन्मदिवस है तो कोई पुण्य तिथि. कोई फसल से सम्बंधित होता है तो कोई किसी खगोलीय घटना से सम्बन्धित. कोई समाज जीवन को प्रेरणा स्वरूप मना..

...तो फिर 2जी घोटाले का दोषी कौन? -सुरेश हिन्दुस्थानी

भोपाल(विसंके). देश में संप्रग सरकार के समय हुए 2जी घोटाले में न्यायालय के निर्णय के साथ ही भाजपा और कांग्रेस में राजनीतिक बयानबाजी प्रारंभ हो गई है. कांग्रेस जहां इस घोटाले को पूरी तरह से झूठा प्रमाणित करने की कवायद कर रही है, वहीं भाजपा की तरफ से अभी भ..

सबके अटल जी-जन्मदिवस/25 दिसम्बर, 2017 - प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात ने कहा था कि “जिस देश का राजा कवि होगा उस देश में कोई दुखी न होगा” – अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल में यह बात चरितार्थ हो रही थी.           &nbs..

गुजरात चुनावो के प्रसंगवश-3 -प्रशांत पोल

भोपाल(विसंके). गुजरात की १८२ विधानसभा सीटों में ५५ सीटें शहरी परिवेश में तथा १२७ सीटें ग्रामीण क्षेत्र में हैं. इन ५५ शहरी विधानसभा क्षेत्रों में से इस बार भाजपा को मिली हैं ४४ सीटें. सन २०१२ के चुनावों में यही संख्या ४८ थी. ग्रामीण क्षेत्र में १२७ में ..

गुजरात चुनावों के प्रसंगवश –2 –प्रशांत पोल

भोपाल (विसंके). गुजरात चुनाव में ‘नोटा’ का खूब प्रयोग हुआ. लगभग २% वोट नोटा को मिले. अर्थात, नोटा यदि राजनीतिक दल होता, तो वह तीसरा सबसे बड़ा दल कहलाता..! शरद पवार की ‘राकापा’ (एनसीपी) को और केजरीवाल के ‘आप’ को नोटा से..

भाजपा को चेतावनी, कांग्रेस को सबक-सुरेश हिन्दुस्थानी

  गुजरात के चुनाव परिणामों ने जहां भारतीय जनता पार्टी के कान खड़े कर दिए हैं, वहीं बर्फीले प्रदेश हिमाचल में कांग्रेस को बहुत बड़ा सबक दिया है। इन दोनों चुनावों के परिणामों के नेपथ्य से कुल मिलाकर यह संदेश तो प्रवाहित हो रहा है कि कांग्रेस धीरे-धीरे..

कांग्रेस: जनेऊ, नीच इंसान से अयोध्या निर्णय टलवाने तक की नौटंकी- प्रवीण गुगनानी

  देश की राजनैतिक प्रयोगशाला गुजरात में भाजपा की पुनः जीत ने कई राष्ट्रीय मान्यताओं को स्पष्ट किया है तो कई राष्ट्रीय धारणाओं को भंग भी कर दिया है. लेकिन एक बात यह बात बड़ी स्पष्ट हो गई कि कांग्रेस, राजनैतिक पार्टी कम सिनेमाई पार्टी अधिक हो गई है. ..

समाज-राष्ट्र को समर्पित पत्रकारों से परिचित कराती है 'अनथक कलमयोद्धा'-लोकेन्द्र सिंह

भोपाल (विसंके). हम सब जानते हैं कि विश्व संवाद केंद्र, भोपाल पत्रकारिता के क्षेत्र में भारतीय मूल्यों को लेकर सक्रिय है। विश्व संवाद केंद्र का प्रयास है कि पत्रकारिता में मूल्य बचे रहें। प्रबुद्ध वर्ग में चलने वाले विमर्शों को आधार माने तब पत्रकारों के ..

सामाजिक क्रांति के अग्रदूत डॉ. अम्बेडकर-डॉ किशन कछवाहा

“संतन के मन होत है, सब के हित की बात” डॉ. अम्बेडकर ऐसे ही महापुरुष थे जिन का मानना था कि समाज जीवन सुचारू ढंग से चलाना है, तो समाज रचना समरसता व न्याय के तत्व पर खड़ी करनी चाहिए | समाज के किसी भी घटक के मन में ऐसी भावना उठने का अवसर नहीं दिया..

उत्तरप्रदेश : छोटे चुनाव से बड़ा संदेश-सुरेश हिन्दुस्तानी

देश में जबसे नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, तबसे राजनीति में एक परिवर्तन सा दिखाई दे रहा है. वह परिवर्तन किस प्रकार का है, वह तो हम आगे बात करेंगे, लेकिन उसका प्रभाव साढ़े तीन वर्ष बाद भी देश की राजनीति में दिखाई दे रहा है. उत्तरप्रदेश के लोकसभा के ..

ध्रुवीकरण का ओछा प्रयास है पादरी की चिट्ठी

गुजरात चुनाव में चर्च ने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का सीधा प्रयास किया है। गांधीनगर के आर्चबिशप (प्रधान पादरी) थॉमस मैकवान ने चिट्ठी लिखकर ईसाई समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे गुजरात चुनाव में 'राष्ट्रवादी ताकतों' को हराने के लिए मतदान करें। यह स्पष्टतौर पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय एवं चुनाव आयोग की आचार संहिता का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय ने इसी वर्ष जनवरी में जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 (3) की नए सिरे से व्याख्या करते हुए निर्णय दिया था कि कोई भी धर्म, जाति, समुदाय या भाषा इत्यादि के ..

गुजरात में कांग्रेस के सामने चुनौतियों का पहाड़-सुरेश हिंदुस्थानी

देश के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में अभी से ऐसे हालात बनने लगे हैं, जिनके कारण कांग्रेस के समक्ष एक तरफ कुआ तो एक तरफ खाई जैसी परिस्थितियां निर्मित होती दिखाई दे रही हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में गहरा प्रभा..

जम्मू-कश्मीर पर कांग्रेस का अलगाववादी सुर-लोकेन्द्र सिंह

कांग्रेस  के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने जम्मू-कश्मीर पर भारत विरोधी टिप्पणी करके अपनी पार्टी को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। जम्मू-कश्मीर पर चिदंबरम का बयान अलगाववादियों और पाकिस्तानियों की बयानबाजी की श्..

अयोध्या की दीपावली कुछ कहती है- लोकेन्द्र सिंह

दीपावली भारत का प्रमुख पर्व है। त्रेता युग में भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन के बाद दीपावली मनाई गई थी। श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर और अत्याचारी रावण का वध कर अयोध्या लौटे थे। समूची अयोध्या उनकी प्रतीक्षा कर रही थी। कार्तिक अमावस्या के अं..

सज्जनशक्ति को जगाने का 'जामवन्ती' प्रयास-लोकेन्द्र सिंह

विजयादशमी उत्सव के उद्बोधन में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि निर्भयतापूर्वक सज्जनशक्ति को आगे आना होगा, समाज को निर्भय, सजग और प्रबुद्ध बनना होगा विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए विजयादशमी उत्सव का बहुत महत्त्व है। वर्ष 1925 में विजयादशमी के अवसर पर ही संघ की स्थापना स्वतंत्रतासेनानी डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। विजयादशमी के अवसर पर होने वाला सरसंघचालक का उद्बोधन देश-दुनिया में भारतवंदना में रत स्वयंसेवकों के लिए पाथेय का काम करता है। इस उद्बोधन से संघ ..

भारत के विश्‍व गौरव को स्‍वानुभूत करने के साथ आत्‍ममंथन का वक्‍त : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

देश दशहरा मना रहा है। वैसे भी यह दिन असत्‍य पर सत्‍य और आत्‍मबल की विजय का प्रतीक है। यह पर्व यह भी सीख देता है कि आप के समक्ष परिस्‍थ‍ितियां कितनी भी प्र‍तिकूल क्‍यों न हो, यदि मार्ग आपने सही चुना है, जिसमें पुरुषार्थ के साथ तेस्‍विता और सत्‍य है तो अंतत: सफलता आपको ही मिलेगी। श्रीराम ने जिस तरह से विपरीत परिस्‍थ‍ितियों के दौरान भी जैसा साहस दिखाया और कम संसाधन होने एवं रावण जैसी प्रशिक्षित सेना के अभाव में भी युद्ध को अपने पक्ष में कर लिया था, देखाजाए ..

हवन का महत्व

फ़्रांस के ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च की। जिसमे उन्हें पता चला की हवन मुख्यतः आम की लकड़ी पर किया जाता है। जब आम की लकड़ी जलती है तो फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नामक गैस उत्पन्न होती है जो की खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणुओ को मारती है तथा वातावरण को शुद्द करती है। इस रिसर्च के बाद ही वैज्ञानिकों को इस गैस और इसे बनाने का तरीका पता चला। गुड़ को जलाने पर भी ये गैस उत्पन्न होती है। (२) टौटीक नामक वैज्ञानिक ने हवन पर की गयी अपनी रिसर्च में ये पाया की यदि आधे घंटे हवन में बैठा जाये अथवा हवन के धुएं से शरीर ..

ममता सरकार के तुष्टीकरण को न्यायालय ने दिखाया आईना-लोकेन्द्र सिंह

माननीय न्यायालय में एक बार फिर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुष्टीकरण की नीति का सच सामने आ गया। ममता बनर्जी समाज को धर्म के नाम पर बाँट कर राजनीति करने वाले उन लोगों/दलों में शामिल हैं, जो अपने व्यवहार और राजनीतिक निर्णयों से घोर सांप्रदायिक हैं लेकिन, तब भी तथाकथित 'सेकुलर जमात' की झंडाबरदार हैं। मुहर्रम का जुलूस निकालने के लिए दुर्गा प्रतिमा विसर्जन पर प्रतिबंध लगाना, क्या यह सांप्रदायिक निर्णय नहीं था? क्या तृणमूल कांग्रेस सरकार के इस फैसले में तुष्टीकरण और वोटबैंक की बदबू नहीं आती? ..

देश पर कम होता ऋण भार : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

ऋण को विकास के लिए जितना अधिक अपरिहार्य माना गया है, उतना ही लगातार इससे डूबे रहने को जनमानस में घोर विपत्‍ति‍कारक स्‍वीकार्य किया गया है। भारत पर आज दुनियाभर का कितना कर्ज है, यह जानकर जितनी अधिक चिंता होती है, वहीं इन दिनों ..

हिन्दी की अस्मिता का प्रश्न-लोकेन्द्र सिंह

सर्वसमावेशी  भाषा होना हिन्दी का सबसे बड़ा सौन्दर्य है। हिन्दी ने बड़ी सहजता और सरलता से, समय के साथ चलते हुए कई बाहरी भाषाओं के शब्दों को भी अपने आंचल में समेट लिया है। पहले से ही समृद्ध हिन्दी का शब्द भण्डार और अधिक समृद्ध हो गया है। हिन्दी ..

आतंकियों के सहयोगी रोहिंग्याइयों के हमदर्द शाही इमाम

बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला पूर्व से ही देश के समक्ष एक चुनौती बन कर खड़ा हुआ है. आसाम और अन्य कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में सामाजिक तानेबाने व स्थानीय शांति व्यवस्था के लिए घातक ख़तरा बन चुके ये घुसपैठिये तमाम प्रकार की आपराधिक व आतंकवादी गतिविधियों में..

गौरी लंकेश हत्याकांड : जवाब माँगते कुछ सवाल

लोकतंत्र और सभ्य समाज में हत्या के लिए किंचित भी स्थान नहीं है। किसी भी व्यक्ति की हत्या मानवता के लिए कलंक है। चाहे वह सामान्य व्यक्ति हो या फिर लेखक, पत्रकार और राजनीतिक दल का कार्यकर्ता। हत्या और हत्यारों का विरोध ही किया जाना चाहिए। लोकतंत्र कि..

जेएनयू में एबीवीपी नहीं हारी है : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

यहां छात्र संघ चुनाव के आए परिणामों को देखें तो एकदम से ऐसा लगेगा कि जेएनयू के चुनावों में वामदल समर्थक छात्रों ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र प्रत्‍याशियों को हरा दिया। जीत का जश्‍न आज उनके नाम है जो देश में विरोध की राजनीति करते आए ह..

गौरी लंकेश हत्याकाण्ड : विरोध या सियासत- लोकेन्द्र सिंह

वामपंथी पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद देश में जिस प्रकार का वातावरण बनाया गया है, वह आश्चर्यचकित करता है। नि:संदेह हत्या का विरोध किया जाना चाहिए। सामान्य व्यक्ति की हत्या भी सभ्य समाज के माथे पर कलंक है। समवेत स्वर में हत्याओं का विरोध किया ज..

डोकलाम के बाद नरेंद्र मोदी की दूसरी जीत चीन के नहले पर मोदी का दहला - भरतचन्द्र नायक

एक संत पुरूष के सात्विक पक्ष हमेशा तिरस्कार का दंश भोगता है। वे जब गांव में निकलते तो उनकी सादगी का मजाक उड़ाया जाता। वे ऐसे लोगों को कुछ प्रसाद, कुछ सिक्के देकर पिंड छुड़ा लेते थे। इस दिन दिनचर्या को सभी देखते और ऐसा करने को प्रोत्साहित होते। कुछ ऐस..

मोदी मंत्रीमण्‍डल में निर्मला सीतारमन का रक्षामंत्री बनना : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

एक निर्णय अप्रत्‍याशित है, कोई यह स्‍वप्‍न में भी उम्‍मीद नहीं कर सकता था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार में निर्मला सीतारमन का प्रमोशन करते हुए उन्हें कैबिनेट मंत्री के तौर पर रक्षा मंत्री अहम जिम्मेदारी सौंपेंगे। किं..

कश्‍मीर ईद पर भी क्‍यों जल रहा है ? - डॉ. मयंक चतुर्वेदी

यह प्रश्‍न इसलिए कि ईद को इस्‍लाम में अमन चैन का त्‍यौहार कहा जाता है, ईद भाईचारे का त्‍यौहार भी है इसके बाद भी कश्‍मीर से कई स्‍थानों पर ईद के दिन भी न भाईचारा नजर आया और न ही अमन चैन, जो दिखाई दिया वह प..

भारत का एनएसजी सदस्‍यता में चीनी अंड़गा खत्‍म होगा : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

पिछले कई वर्षों से भारत सरकार इस कोशिश में लगी है कि भारत भी न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) का हिस्सा बन जाए। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद तो जैसे इस प्रयत्‍न में अत्‍यधिक तेजी आ गई है, किंतु इसके बाद भी पिछले कई सालों में हमें इस सम..

डोकलाम पर भारत की कूटनीतिक जीत : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

डोकलाम विवाद सुलझ गया, वह भी बि‍ना किसी की संप्रभुता को चुनौती दिए बगैर । भारत सरकार की ओर से जो लगातार कूटनीतिक प्रयत्न पिछले दिनों अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर किए गए हैं, जिसमें कि जापान से लेकर अमेरिका तक कई देशों का साथ उसे मिला किंत..

तनाव और जवाब-ज्ञानेन्द्र बरतरिया

डोकलाम विवाद पर चीन शोर मचा रहा है कि भारत ने अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाया तो युद्ध हो जाएगा और भारत को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। दूसरी ओर भारत अपने रवैये पर डटा हुआ है और चीन को सबक सिखाने के लिए चीन से होने वाले आयात की समीक्षा कर रहा है। इसे चीनी श..

ट्रिपल तलाक पर महिलाओं की पहली जीत : डॉ. निवेदिता शर्मा

सर्वोच्च न्यायालय ने की बेंच ने जिस तरह से बहुमत के आधार पर ट्रिपल तलाक पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, उससे यह साफ हो गया है कि भारतीय संविधान किसी भी धर्म से ऊपर, लिंग से ऊपर व्‍यक्‍ति की संवेदनाओं को महत्‍व देता है। संविधान में हम..

भारतवर्ष का सतत प्रवाह - श्री रंगा हरी जी

  वैदिक काल से आज तक भारत राष्ट्र की भारतीय संकल्पना क्या है? इंडिया इंटरनेशनल सेंटर दिल्ली में नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री रंगा हरी जी द्वारा व्यक्त किये गए विचार - बहुत से लोग कहते हैं कि राष्ट्रवाद भारत में एक नई अवधारणा है और इसकी उत्पत्ति ब्रिटिश लोगों के आगमन के बाद हुई | यह निश्चित नहीं है | वस्तुतः राष्ट्रवाद की अवधारणा भारत में बहुत प्राचीन है और यह दृढ़ता पूर्वक हमारी संस्कृति में ही अंतर्निहित है। हमें इसके प्रमाण ..

चीन की विस्तारवादी नीति पर भारतीय प्रतिकार : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

डोकलाम क्षेत्र को लेकर चीन के विदेश विभाग की ओर से लगातार जिस तरह के बयान दिए जा रहे हैं, उससे यही लगता है कि चीन किसी भी सीमा तक जाकर इस क्षेत्र पर अपना कब्‍जा जमाने की मंशा रखता है। वह इन दिनों इसी कोशिश में लगा हुआ है‍ कि किसी भी तरह से भारत से धमकाने में सफल हो जाए और अपनी मंशाएं पूरी कर ले। डोकलाम पर पिछले दो माह से चल रहे गतिरोध पर अब चीन कह रहा है कि यदि सीमा पर भारत के बुनियादी ढांचे के खिलाफ हमारी सेना कदम उठाती है तो कोहराम मच जाएगा।..

कोई तो लक्ष्मण रेखा हो – प्रफुल्ल केतकर

  स्वतंत्रता दिवस पर चिंतन  "क्या इतिहास खुद को दोहराएगा? यह एक ऐसा विचार है जो मुझे सदैव चिंतित करता है | यह चिंता तब और बढ़ जाती है, जब में देखता हूँ की जाति और पंथ के विभेद जैसे हमारे पुराने दुश्मनों के अतिरिक्त अलग अलग विचारों और मान्यताओं वाले तथा एक दूसरे के विरोधी राजनीतिक दलों के रूप में नए दुश्मन और पैदा हो गए हैं । । क्या भारतीय देश को अपने पंथ से ऊपर स्थान दे सकेंगे या फिर पंथ को ही देश के ऊपर मानेंगे? " संविधान स्वीकृति के अवसर पर संविधान सभा में डॉ. बी आर अंबेडकर का अंतिम ..

भाजपा की विजय यात्रा का केंद्र बनते अमित शाह-डॉ मयंक चतुर्वेदी

सत्‍ता और संगठन में एक राजनीतिक पार्टी का अध्‍यक्ष क्‍या मायने रखता है, यह आज किसी को बताने की आवश्‍यकता नहीं है। संगठन मजबूत होगा तो स्‍वत: ही सत्‍ता नतमस्‍तक हो जाती है। इन दिनों यह बात भारतीय जनता पार्टी पर पूरी तरह ख..

नाम बदलने से दिक्कत कब होती है और कब नहीं-लोकेन्द्र सिंह

उत्तरप्रदेश  के प्रमुख रेलवे स्टेशन 'मुगलसराय' का नाम भारतीय विचारक 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय' के नाम पर क्या रखा गया, प्रदेश के गैर-भाजपा दलों को ही नहीं, अपितु देशभर में तथाकथित सेकुलर बुद्धिवादियों को भी विरोध करने का दौरा पड़ गया ह..

अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी जरूरी-सीताराम गुप्ता

हम सब चाहते हैं कि हमारे बच्चे पढ़-लिखकर बहुत आगे निकल जायें | हमसे भी आगे निकल जायें | कुछ हमारी इच्छाओं व प्रेरणा के कारण और शेष अपने परिश्रम के बल पर बच्चे सचमुच अपनी पिछली पीढ़ी से आगे निकल जाते हैं | आगे निकलने का अर्थ है कि उनमे कई परिवर्तन भी आ जात..

नेहरु वंश ने किया देश की सुरक्षा से खिलवाड़-तरुण विजय

जनस्मृति बहुत क्षीण होती है | जो कांग्रेसी आज कह रहें हैं कि देश उनकी वजह से आजाद हुआ , उन्हें बताना चाहिए कि उनकी वजह से देश बंटा | आजाद हुआ तो सुभाष चन्द्र बोस भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के कारण जो कभी कांग्रेस के लिए महत्पूर्ण नहीं रहे | 15 अगस्त, ..

देश तो देशवासी बनातें हैं-नीलम महेंद्र

इतिहास केवल गर्व महसूस करने के लिए नहीं होता सबक लेने के लिए भी होता है क्योंकि जो अपने इतिहास से सीख नहीं लेते वो भविष्य के निर्माता भी नहीं बन पाते।“ भारत के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी ने जिस प्रकार "मन की बात" कार्यक्रम से पूरे देश से स..

श्री कृष्ण एक राष्ट्रपुरुष -ओमप्रकाश कौशिक

श्री कृष्ण योगिराज यानि योगियों के भी योगी थे | वे राष्ट्रपुरुष और इतिहास-पुरुष के रूप में अद्वितीय हैं | अर्थात श्रेष्ठ पुरुष | भगवान् श्रीराम मर्यादा से बंधे पुरुषोत्तम हैं | कृष्ण का कर्तव्य विराट था | द्वारका से लेकर मणिपुर तक भारत को एकसूत्र में आब..

सहिष्‍णु देश में हामिद अंसारी की असहिष्‍णुता : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

विश्‍वभर में भारत में मुसलमान कितने सुरक्षित एवं सफल हैं यह सदियों से किसी से छिपी बात नहीं है, किंतु इसके बाद भी जब किसी न किसी तरह देश के बहुसंख्‍यक समाज को कटघरे में खड़ा किया जाता है तब अवश्‍य यह यक्ष प्रश्‍न उभरकर आता है कि आखि..

पत्रकारिता में भी 'राष्ट्र सबसे पहले' जरूरी-लोकेन्द्र सिंह

मौजूदा दौर में समाचार माध्यमों की वैचारिक धाराएं स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। देश के इतिहास में यह पहली बार है, जब आम समाज यह बात कर रहा है कि फलां चैनल/अखबार कांग्रेस का है, वामपंथियों का है और फलां चैनल/अखबार भाजपा-आरएसएस की विचारधारा का है। समा..

सियासत की विरासत- भरतचन्द्र नायक

"बोए पेड़ बबूल का फूल कहां ते होय" भारतीय लोकतंत्र की महिमा निराली है। यहां दशकों तक एक राजनैतिक दल ने आजादी के जंग में कामयाबी का श्रेय भी लूटा और राजनैतिक एकाधिकार भी जमाया। तब निर्वाचित सरकारे लोकतंत्र के नाम पर भंग भी की जाती रही और समय आने पर आया र..

हिन्दू संस्कृति : व्यष्टि से परमेष्ठी की अविरल यात्रा- नरेन्द्र जैन

अपने देश को छोड़कर शेष दुनिया में समाज जीवन को संचालित करने का आधार कानून है, जबकि हमारे यहां धर्म संचालित समाज जीवन है. सृष्टि संचालन के नियमों को समझने में असफल पश्चिम ने समाज व्यवस्था के लिए कानून का सहारा लिया, जो कृत्रिम व्यवस्था है. रवींद्र ना..

आरएसएस और सामाजिक समरसता : मिथक व तथ्य-अरुण आनंद

लम्बे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विरोधियों द्वारा यह प्रयास किया गया है कि संघ को एक दलित विरोधी तथा ब्राह्मणवादी संगठन के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इन प्रयासों में हाल ही के दिनों में खासी तेजी आई है लेकिन वास्तव में असलियत क्या है ? ..

"बेहयायी हमारे जीवन का प्रधान तत्व नहीं "-अनूप शर्मा

हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म का समीक्षात्मक विश्लेषण  लिपस्टिक_अंडर_माइ_बुरखा फ़िल्म का आकर्षक शीर्षक दर्शाता है कि प्रदर्शन लोलुपता में कितनी शक्ति होती है । पर यहां पर स्त्री विमर्श की आज़ादी के नाम पे ,निरुक्त भावाभिव्यक्ति है !! ""आज़ाद बुनियाद पर टिके खोखले सामाजिक निर्माण में बिकाऊ अश्लीलता का रंग रोगन करने की चेष्ठा असल में ...अपने साथ हुए अन्याय का बदला लेने के प्रतिउत्तर में स्त्रियों को बेसुध मादकता की ओर धकेलने का संदेश दे रही है ,पर ऐसा विचार स्वस्थ संदेश देने की सोच वाला नहीं अपितु ..

बुराइयां तभी तक मुखर हैं जब तक अच्छाइयां मौन है- अनुपमा श्रीवास्तव

आदि काल से नकारात्मक शक्तियों का अस्तित्व रहा।पौराणिक काल में इन्हें दानव, दुष्ट ,राक्षस कहा गया और इन आसुरी शक्तियों पर विजय बुराइयों पर अच्छाइयों की प्रतीक बनी  ।साहित्य तो हमेशा ही वह आवाज़ बना जो शासकों को सही दिशा निर्देश दे , जनहित की ओर प्रे..

क्या भारत शुद्र विरोधी था : एक ऐतिहासिक विश्लेषण

आज भारत में विदेशी पैसे से कई आन्दोलन ऐसे चल रहे हैं जिनका काम सिर्फ दलित और उच्च वर्ग के लोगों के बीच वैमनस्य की भावना को बढ़ाना है l पता नहीं क्यों मगर यह सभी आन्दोलन यह मान कर बैठे हैं के अंग्रेजों द्वारा बनाये गए एस.सी. / एस.टी. ही दलित हैं तथा दलित ही शुद्र हैं | इन सभी आन्दोलनों में गरीब भोले भाले हिन्दुओं को यह बताया जाता है  के तुम शुद्र हो तथा तुम इसलिए गरीब हो क्योंकि भारत के उच्च जाती के लोगों ने तुम पर अत्याचार किये तथा तुम्हारा पैसा लूटा है | इसके बाद बड़ी खूबसूरती से यह एनजीओ ..

प्रेम का पान्‍थिक कुचक्र-डॉ मयंक चतुर्वेदी

प्रेम शब्‍द आनन्‍द की अनुभूति कराता है। प्रेम समर्पण का प्रतीक है। प्रेम का आशय सीधे तौर पर त्‍याग है।  प्रेम प्रतिउत्‍तर में कोई अपेक्षा नहीं करता, वह तो सिर्फ देने में और सतत देते रहने में ही अपना विश्‍वास करता है। प्रेम में त्‍याग का उदाहरण कैसा होता है, इसे सूरदास कुछ यूं समझाते हैं - प्रीति करि काहू सुख न लह्यो। प्रीति पतंग करी दीपक सों आपै प्रान दह्यो।। अलिसुत प्रीति करी जलसुत सों¸ संपति हाथ गह्यो।सारंग प्रीति करी जो नाद सों¸ ..

राष्ट्रीय हितों की हिफाजत पहली बार प्रतिबद्धता बनी-भारतचंद्र नायक

अपने हितों की हिफाजत की प्रतिबद्धता सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का बोध करती है। चीनी आक्रमण का दौर, साठ के दशक में जब संसद में चीन द्वारा उत्तरी सीमा में किये गये अतिक्रमण की चिन्ता व्यक्त की गई, तपाक से तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. नेहरू ने कहा कि हिम..