आलेख

आखिर कैसे देखते देखते हो जाता है सैंकड़ों एकड़ की सरकारी भूमि पर कब्जा?

            - रजनीश कुमार     अब्दुल सड़क पर टहल रहा था, उसे खाली पड़ी जमीन पसंद आई। अब्दुल की आँखे टकराईं और जाग गयी तमन्ना की काश ये हमारी होती। लड़की होती तो अब्दुल लव जिहाद करता, न मानने पर शायद सड़क पर ..

साधौ सबद साधना कीजै!

    प्रकाश पर्व     -  जयराम शुक्ल     पूज्य गुरु नानक कितने महान थे, उन्होंने शब्द को न सिर्फ़ ईश आराधना का आधार बनाया बल्कि उसे ईश्वर का दर्जा दिया। शबद क्या है, यही है उनका ईश्वर। गुरूग्रंथ साहिब श्रेष्ठ, हि..

आखिर संघ के बारे में क्या कहते थे गाँधीजी?

        - मनोज जोशी      यदि आप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के किसी जवाबदार स्वयंसेवक से वैचारिक चर्चा करेंगे। संघ साहित्य को पढ़ेंगे तो वह भी तो इन मुद्दों पर लगभग गाँधीजी की तरह बातें करते हैं। और विस्तार में जाएंगे त..

ग्वालियर से चला गया जीता जागता संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक, शिक्षाविद, समाजसेवी श्री बैजनाथ शर्मा का शुक्रवार की सुबह निधन हो गया। वे कुछ समय से बीमार थे। उन्हें स्वास्थ्य लाभ हेतु आरोग्यधाम चिकिसालय में भर्ती कराया गया था। ग्वालियर के उपनगर मुरार में दिनांक ३ अग..

सच्चे प्यार के लिए समर्पण चाहिए , जिहाद नहीं

       -  कृष्ण मोहन झा       देश में इस समय लव जिहाद का मुद्दा गरमाया हुआ है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में लव जिहाद के दायरे में आने वाली घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए बाकायदा एक अध्यादेश के ज..

विश्व-मानवता के लिए ख़तरा बन चुका है इस्लामिक कट्टरपंथ

        -  प्रणय कुमार       आज पूरी दुनिया युद्ध के मोड़ पर खड़ी है। फ्रांस आतंकवाद की आग में जल रहा है। वहाँ हो रहे आतंकवादी वारदातों और उनके विरुद्ध फ्रांसीसी सरकार की कार्रवाई एवं रुख़ को लेकर इस्लामिक क..

सारे पूर्वानुमानों को नकारते हुए कहीं तेज़ी से आगे बढ़ रही है भारतीय अर्थव्यवस्था

         -  प्रहलाद सबनानी     देश में कोरोना महामारी के चलते दिनांक 27 नवम्बर 2020 को वर्ष 2020-21 की द्वितीय तिमाही में, सकल घरेलू उत्पाद में, वृद्धि सम्बंधी आंकड़े जारी कर दिए गए हैं। विभिन्न वित्तीय एव..

एक देश एक चुनाव" केवल चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि भारत की जरूरत है

       - प्रवीण कुमार कुशवाहा     एक देश एक चुनाव केवल विचार विमर्श का विषय नहीं रहा बल्कि यह भारत की जरूरत है समय और धन दोनों बचाने के लिए इस ओर बढ़ना होगा, यह बात शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कही । गुज..

विश्व कर रहा है संस्कृत का सम्मान – मध्यप्रदेश के इन गांवों में बच्चा बच्चा बोलता है संस्कृत

       - रजनीश कुमार     लेबर पार्टी के नवनिर्वाचित युवा सांसद डॉ गौरव शर्मा ने बुधवार को न्यूजीलैंड की संसद में भारतीय संस्कृति का मान बढाते हुए संस्कृत में शपथ लिया। भारत से बाहर संस्‍कृत में शपथ लेने वाले नेता..

26 नवम्बर, जब देशवासियों की लाशों पर कांग्रेस ने लिखी हिन्दू आतंकवाद की साजिश

      - रजनीश कुमार      26 नवंबर 2008 की शाम तक मुंबई सामान्य था। हर दिन की भांति सडकों पर वहीं रफ़्तार थी, वाहनों के पहिये तेज गति से अपने मंजिलों की ओर बढ़ रहे थे। लोग बाजारों में खरीदारी कर रहे थे, वहीं कुछ लोग मरीन ड्र..

जलवायु परिवर्तन सम्बंधी लक्ष्यों को केवल भारत ही प्राप्त करता दिख रहा है

          -  प्रहलाद सबनानी       कोरोना वायरस महामारी इस सदी की सबसे बड़ी त्रासदी के रूप में पूरे विश्व पर आई है लेकिन आगे आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन के रूप में एक और महामारी पूरे विश्व को प्र..

हिंदुत्व कभी कट्टर और आक्रामक नहीं हो सकता

        - प्रणय कुमार     ठंड में कोरोना के बढ़ते प्रसार और उसकी चिंताओं के बीच पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और असदुद्दीन ओवैसी के बयानों ने पर्याप्त सुर्खियाँ बटोरीं और संभवतः वे चाहते भी यही थे। ओवैसी को राजनीति..

युवाओं के आक्रोश को समय रहते समझिए!

         -  जयराम शुक्ल        इंदौर के भँवर कुआँ इलाके में इनदिनों भुतहा सन्नाटा तो नहीं पर वह चहल-पहल भी गायब है जो सालभर पहले रहा करती थी। यह चहलपहल उन मेधावी छात्रों की होती थी जो यूपीएससी, पीए..

सिर्फ भावनात्मक नहीं है भारतियों का गौ प्रेम, वैज्ञानिकों ने भी माना वरदान है भारतीय नश्ल की गायें

        - रजनीश कुमार     मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा ‘गौ कैबिनेट’ का गठन करने के बाद अब मध्यप्रदेश देश का वह पहला राज्य बन चुका है जहां गौ संरक्षण और संवर्धन के लिए मंत्रिमंडल स्तर पर फैसले ..

25 नवंबर 1947, जब पच्चीस हज़ार हिन्दुओं की लाश से पट गयी थी कश्मीर घाटी

    यह वो तारीख है जब पाकिस्तान, अब्दुला और नेहरू के कारण जम्मू कश्मीर के मीरपुर में 25000 हिंदूओं का नरसंहार हुआ था। यह तारीख मीरपुर नरसंहार कि है जब पाकिस्तानी सेना और कबाइलियों ने मीरपुर शहर में बर्बरतापूर्वक 25000 हिंदूओं की लाशें पाट दी..

हामिद अंसारी को अब राष्ट्रवाद महामारी नजर आने लगी है, तो अचरज क्या…?

  मोहम्मद हामिद अंसारी. भारतीय विदेश सेवा में विभिन्न पदों पर रहते हुए उप राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंचे और दस साल उप राष्ट्रपति के पद पर रहते हैं, लेकिन कहते हैं कि मुसलमान असुरक्षित हैं. ईरान में राजदूत रहते हुए उन पर संगीन आरोप हैं कि उन्होंने ..

धार्मिकता के बहाने लव जिहाद जैसी विकृति पर आवरण डालना देश हित में कतई नहीं है

   प्रमोद भार्गव      देश में कई नगरों में बडे विवाद का कारण बन रहे लव जिहाद पर प्रतिबंध के लिए कठोर कानूनी उपाय जरूरी हैं। मध्य प्रदेश समेत उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, कर्नाटक की राज्य सरकारों ने इस दृष्टि से कानून के प्र..

आतंकवाद तथा लोकतांत्रिक मूल्यों का मखौल उड़ाने वालों के खिलाफ एकजुट लड़ाई छेड़ने की दरकार

  ए. सूर्यप्रकाश फ्रांस में जिहादी तत्वों द्वारा एक स्कूली शिक्षक के अलावा कुछ अन्य लोगों की बर्बरतापूर्ण हत्या के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने अपने देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की जो मुखर पैरवी की, उसके खिलाफ कई इस्लामिक देशों में ह..

ऐसी स्त्री थीं रानी लक्ष्मीबाई

      महाराष्ट्र से पैदल चलकर वाराणसी जाने वाले जा रहे विष्णु भट्ट गोडसे शास्त्री गदर के कारण ग्वालियर-झांसी में फंस गए। उन्होंने उस समय चल रहे विप्लव को अपनी आंखों से देखा। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व और काम करने की शैली ..

केंद्र सरकार द्वारा अब रोज़गार सृजन पर दिया जा रहा है विशेष ध्यान

        -  प्रहलाद सबनानी      एक अनुमान के अनुसार, कोरोना महामारी के चलते देश में लगभग 20 लाख रोज़गारों  पर विपरीत प्रभाव पड़ा था। अतः केंद्र सरकार के सामने अब सबसे महत्वपूर्ण सोच का विषय यह है कि क..

आस्था के पुष्प - सेवागाथा

          - विजयलक्ष्मी सिंह    चमचमाती रेत के टीले कितने खूबसूरत दिखाई देते हैं, पर यही विशालकाय टीले पानी के बहाव से बहकर यदि घरों में घुस जाएं तो पल भर में सब कुछ तहस-नहस हो जाता है। 14 अगस्त 2020 की सुबह 10 बजे..

कोविड-19 :अवरोधों के बाद भी बढ़ रहा आयुर्वेद

          - डॉ नितिन अग्रवाल     इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को आपत्ति है कि भारत सरकार कोरोना मरीजों के इलाज में योग और आयुर्वेद को क्यों शामिल कर रही है। उसका यह रवैया ठीक नहीं है। आज पूरी दुनिया में योग और आयुर्..

स्वदेशी रोशनी से द्विगुणित हुआ दीपोत्सव का उल्लास

             - कृष्णमोहन झा         राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत कोरोना काल में विभिन्न माध्यमों से संघ के स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन करते रहे हैं  और उनका हर संदेश..

हिन्दू समाज को कमजोर कर रहा है लव जिहाद, कानून बनाये केंद्र सरकार

         - रजनीश कुमार     पिछले दिनों  कैथोलिक बिशप की सर्वोच्च संस्था ‘द सायनाड ऑफ़ सायरो’ मालाबार चर्च ने केरल में योजनाबद्ध तरीके से इसाई युवतियों के मतान्तरण का मुद्दा उठाया, लगभग उसी समय म..

तत्कालीन युग के एकलव्य और स्वामी विवेकानंद थे बिरसा मुंडा

       - रजनीश कुमार    भारतीय स्वातंत्र्य संग्राम वीरों के बलिदान की अमिट कहानी है। मां भारती के प्रति समर्पण और त्याग की प्रबल भावना लिए ऐसे कई नायक पैदा हुए जो किसी दिए की भांति प्रकाश प्रज्वलित करके स्वयं अंधेरे..

भारत की आत्मा ग्रामों में बसती है अतः देश में ग्रामीण विकास ज़रूरी

           - प्रहलाद सबनानी    अर्थ की महत्ता आदि काल से चली आ रही है। आचार्य चाणक्य ने भी कहा है कि राष्ट्र जीवन में समाज के सर्वांगीण उन्नति का विचार करते समय अर्थ आयाम का चिंतन अपरिहार्य बनता है। इस दृष्टि ..

बिरसा मुंडा जयंती: आर्य अनार्य विमर्श के अवसान का अवसर

         -  प्रवीण गुगनानी     बिरसा मुंडा महान क्रांतिकारी थे, जनजातीय समाज को साथ लेकर उलगुलान किया था उन्होने। उलगुलान अर्थात हल्ला बोल, क्रांति का ही एक देशज नाम। वे एक महान संस्कृत..

सतपुड़ा के कोरकू गौरव - क्रांतिकारी राजा भभूत सिंह

    सुप्रसिद्ध देवगढ़ राज्य के गोण्ड राजवंश द्वारा राजकीय सनद से भोपा गोत्र के महादेव भक्त कोरकुओं को पचमढ़ी जागीर का अधिकार दिया गया था जो वर्तमान होशंगाबाद तथा छिन्दवाड़ा जिलों के बड़े हिस्सों में फैली हुई थी। पचमढ़ी बड़ा महादेव के पारंपरिक सेव..

दातार में फैला शिक्षा का उजाला

          - विजयलक्ष्मी सिंह  आज समूचे गांव में सुगंधित सुवासित इत्र छिड़का गया था। गांव की आबोहवा में एक अलग ही स्फूर्ति थी। घर-घर में  बड़े जतन से  साफ-सफाई की गई थी। मानो जैसे कोई उत्सव हो। वक़्त के पन्नो को ..

मध्‍य प्रदेश में सत्‍ता परिवर्तन और राजनीति का धर्म

      - डॉ. मयंक चतुर्वेदी     मध्य प्रदेश में विधानसभा की 28 सीटों पर उपचुनाव के परिणाम साफ हो चुके हैं, भारतीय जनता पार्टी की शिवराज सरकार को अल्‍पमत का कोई खतरा अब शेष नहीं ।  कांग्रेस ने सत्‍ता खोन..

पर्व-संस्कृति: आस्था, विश्वास और विवेक

          - जयराम शुक्ल      कार्तिक महीना पावन व मनभावन होता है। ग्रीष की विदाई और शरद के स्वागत का यह महीना पूजन, आराधन वह भक्तिभाव से परिपूर्ण रहता है।  यह सिलसिला दीपावली-डिहठोन(देव प्रबोधनी एकादशी) ..

लंदन और अमेरिका सब जगह करवाचौथ की धूम है 

आसमान से निकलने वाले धवल चांद को शायद इतनी कशिश और बेइंतहा प्यार के साथ किसी और दिन न देखा जाता होगा। वो चांद जो रात्रि की कालिमा में आसमान का इकलौता सम्राट है। एक साथ दुनिया भर की सौभाग्यवतियों से अर्घ्य पाता चंद्रमा आज के दिन इठलाता तो होगा। सूरज अगर ..

मुनव्वर राणा की “इंसानियत, सेकुलरिज्म और बुद्धिजीविता” सभी का मुलम्मा उतर रहा है.

     प्रशांत बाजपेई    मुनव्वर राणा की “इंसानियत, सेकुलरिज्म और बुद्धिजीविता” सभी का मुलम्मा उतर रहा है. राम मंदिर फैसले का विरोध, सीएए क़ानून का विरोध, तालिबान का समर्थन, भारत के मित्र देशों से नाराजगी, वैश्वि..

फ्रांस से उठी क्रांति विश्व को इस्लामी आतंक के खिलाफ करेगी लामबंद

  कुमार नारद   फ्रांस में जिहादी मानसिकता के एक मुस्लिम युवक ने एक शिक्षक की गला काटकर हत्या कर दी. उसके कुछ दिन एक बार फिर मुस्लिम जिहादी युवक ने चर्च में एक महिला सहित तीन लोगों की गला काटकर हत्या कर दी. इन घटनाओं की विश्व में कड़ी न..

यदि नेहरू कश्मीर की आशक्ति छोडकर पटेल के फार्मूले पर अड़ जाते तो आज लाहौर और कराँची हमारा होता"- -जयराम शुक्ल

पटेल चाहते थे कि पाकिस्तान से सभी हिन्दू सिख निकल आएं। मुसलमानों को लेकर उन्हें कोई चिंता नहीं थी क्योंकि उन्हें पाकिस्तान मिल चुका था...।   यदि नेहरू कश्मीर की आशक्ति छोडकर पटेल के फार्मूले पर अड़ जाते तो आज लाहौर और कराँची हमारा होता"     31 अक्टूबर की तारीख का बड़ा महत्व है। आज के दिन ही सरदार बल्लभ भाई पटेल पैदा हुए थे। इस महान हस्ती को इतिहास के पन्ने से अलग कर दिया जाए तो हम भारतवासीयों की पहचान रीढविहीन और लिजलिजी हो जाएगी। इसलिए इस दिन को मैं प्रातः स्मरणीय मानता हूँ।  हमा..

सरदार पटेल: आधुनिक भारत के राष्ट्रनिर्माता

 डाॅ. जीवन एस. रजक  जीवन का अर्थ है, अविराम निरन्तर उद्देश्यपूर्ण गतिशीलता। ऐसी गतिशीलता जो अवरोधों पर रूके नहीं, चट्टानों पर झुके नहीं और तूफानों में मुड़े नहीं। सरदार वल्लभ भाई पटेल का व्यक्तित्व एक ऐसे ही महान व्यक्ति का व्यक्तित्व है, जिसन..

और आज प्रभाकर जी भी चले गये.....

    श्रीराम जी आरावकर   और आज प्रभाकर जी भी चले गये। प्रभाकर जी याने प्रभाकर जी केलकर(मूलतः केळकर) वे सदैव ही मुझसे दो कदम आगे ही चलते रहे। शिशु मंदिर का का कखग मैने प्रभाकर जी से ही सीखा। 1974 मे जब मैने सरस्वती शिशु मंदिर शिवाज..

इस्लाम : धर्म या आतंकवाद का पर्याय…….??

  सुखदेव वशिष्ठ   समूचे विश्व में आतंकवाद के प्रसार के बाद से ही बार-बार आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ा जाता रहा है. लेकिन इस बात पर लंबे समय से बहस जारी रही है कि क्या आतंकवाद को किसी धर्म विशेष के साथ जोड़ना जायज है? कुछ का मानना है कि ऐसा..

तुष्टिकरण की राजनीति से मुक्ति की और असम

   डॉ नीलम महेंद्र    असम सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि अगले माह यानी नवंबर में वो राज्य में राज्य संचालित सभी मदरसों और संस्कृत टोल्स या संस्कृत केंद्रों को बंद करने संबंधी एक अधिसूचना लाने जा रही है।इस फैसले के अंतर्गत असम सर..

नई ऊँचाईयों को छूता कृषि उत्पादों का निर्यात

  प्रहलाद सबनानी   भारत से कृषि उत्पादों के निर्यात को लेकर लगातार चिंताएं जताईं जाती रही हैं। परंतु, हाल ही के समय में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए कई निर्णयों के चलते कृषि उत्पादों का निर्यात बहुत तेज़ी से वृद्धि दर्ज करता देखा जा रहा है। ..

निकिता तोमर की हत्या पर सेकुलर मीडिया और कथित बुद्धिजीवी वर्ग की चुप्पी आखिर क्यों ?

  डॉ. अंशु जोशी    निकिता को तौसीफ ने मार डाला। तौसीफ राजनीतिक रसूख वाले परिवार है। निकिता के परिजनों ने स्पष्ट कहा है कि वह उस पर कन्वर्जन कर निकाह का दबाव बना रहा था। उसने मना किया तो सरेराह उसे गोली मार दी पिछले कई दिनों से मैं छद्म धर..

वनवासी अस्मिता की बुलंद आवाज – बाबा कार्तिक उरांव

प्रशांत पोळ   कल (दिनांक २९ अक्तूबर) को कार्तिक उरांव जी की जयंती हैं. तीन वर्ष पश्चात उनके जन्म शताब्दी के कार्यक्रम प्रारंभ हो जाएँगे. कार्तिक उरांव तीन बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे. उनके मृत्यु के समय वे नागरिक उड्डयन एवं संचार मंत्र..

समर्पण और देशभक्ति की पर्याय : भगिनी निवेदिता

“भारतवर्ष से जिन विदेशियों ने वास्तविक रूप से प्रेम किया है, उनमें निवेदिता का स्थान सर्वोपरि है।” —अवनीन्द्रनाथ ठाकुर  भारत भूमि और भारतीय संस्कृति के वैभवशाली स्वरुप के आकर्षण ने सदैव ही विदेशियों को प्रभावित किया और इसी कारण क..

भारतीय मीडिया में ‘स्व’ की दो बारीक धाराओं, दो परिभाषाओं को अभिव्यक्त करता द्वंद्व मुखर हो रहा है

  हितेश शंकर   कोरोना काल में अलग-अलग चुनौतियों के सामने डटकर खड़ा भारत ‘स्व’ के मंत्र से संकटों का समाधान कर रहा है, किन्तु भारतीय मीडिया में ‘स्व’ की दो बारीक धाराओं, दो परिभाषाओं को अभिव्यक्त करता द्वंद्व मुखर हो ..

संघ प्रमुख ने विजयादशमी पर दिया सतर्कता का संदेश

  कृष्णमोहन झा    प्रतिवर्ष विजयादशमी के पावन पर्व पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर स्थित मुख्यालय में परंपरागत शस्त्र पूजा के बाद सरसंघचालक द्वारा  जो उदबोधन दिया जाता है उसकी सारे देश में काफी पहले से ही उत्सुकता से प्रतीक्षा ..

भारतीय अर्थव्यवस्था में आ रहे हैं कई सकारात्मक बदलाव

कोरोना वायरस महामारी के चलते आर्थिक गतिविधियां पूरे विश्व में ठप्प पड़ गईं थीं। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा एवं मार्च 2020 के बाद से देश में आर्थिक गतिविधियों में लगातार कमी दृष्टिगोचर हुई। जिसके चलते, कई देशवासियों के रोज़गार पर विपरीत असर पड़ा था एवं ..

दशहरे से हारा कोरोना : राष्ट्र विजय का संकल्प

- रमेश शर्मा    असत्य पर सत्य की विजय के पर्व विजयादशमी इस वर्ष नये अंदाज में आया । सामान्यतः अब तक विजयादशमी पर बुराइयों से दूर रहने और सत्य-धर्म की राह पर चलने का आव्हान होता रहा है, प्रतिवर्ष राम की तरह आदर्श जीवन जीने का संकल्प होता था । ..

सिटिज़न जर्नलिज़्म: प्रोत्साहन के साथ-साथ प्रशिक्षण भी जरुरी

     डॉ. पवन सिंह मलिक    सिटिज़न जर्नलिज़्म शब्द जिसे हम नागरिक पत्रकारिता भी कहते है आज आम आदमी की आवाज़ बन गया है। यह समाज के प्रति अपने कर्तव्य को समझते हुए, संबंधित विषय को कंटेंट के माध्यम से तकनीक ..

शक्ति की आराधना करें, जिससे हिन्दू समाज में वैमनस्यता, अलगाव का जहर फैला रहे इन राक्षसों का समूल नाश हो

 बुधपाल सिंह  देश में कुछ वर्षों से वनवासियों के नाम पर बने अनेक आदिवासी संगठन गोंड जनजाति समाज को हिन्दू समाज, हिन्दू धर्म से अलग करने के लिए प्रयासरत हैं. जैसे ही दशहरा, दीवाली का समय नजदीक आता है, तब इस प्रकार के संगठन के लोग कहत..

भारत के हर शहर में अनूठे ढंग से होता है दशहरा!

    ऋषभ त्रिपाठी   हिन्दी पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हर वर्ष दशहरा या विजयादशमी का त्योहार मनाया जाता है। विजयदशमी श्री राम की  विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ..

शस्त्र, शास्त्र, शक्ति पूजन और राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ  :  डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भारत में अनादि काल से परम्‍परागत शस्त्र, शास्त्र और शक्ति पूजन हो रहा है। हमारी यह परंपरा शास्त्रों के साथ शस्त्र पूजन और विधिवत शक्ति आराधना के लिए प्रेरित करती है। महाकवि निराला के मन और ह्दय से जब ''राम की शक्‍ति पूजा'' कविता प..

विजयादशमी: स्वयं अब जागकर हमको, जगाना देश है अपना

   डॉ. पवन सिंह मलिक    आज का दिन विजय के संकल्प का दिन है। यह विजय न किसी एक व्यक्ति की दूसरे व्यक्ति पर और न ही किसी देश की दूसरे देश पर विजय है। अपितु यह धर्म की अधर्म पर, नीति की अनीति पर, सत्य की असत्य पर, प्रकाश की अंधकार पर औ..

राष्ट्र सेविका समिति के कार्य की शुरुआत राष्ट्रीय विचारों से कटिबद्ध महिला कार्य का सही अर्थों में मंगल प्रारंभ सिद्ध हुआ

    सुनीला सोवनी   पूरे समाज को सुखी और बलशाली बनाकर भारत को परमवैभव के शिखर पर विराजमान करने के विराट संकल्प की पूर्ति के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना विजयादशमी के दिन १९२५ में हुई थी. संघ का विस्तार हुआ और उसका प्रभाव म..

'हिन्दुत्व' का मूल संस्कार और प्रचंड विचारधारा वसुधैव कुटुम्बकम् और ओम शांति है

                  'हिन्दुत्व' बन गया अमेरिका की प्रेरणा प्रहरी    विष्णु गुप्त     'हिन्दुत्व' एक स्वतंत्र विचार प्रवाह है। 'हिन्दुत्व का मूल संस्कार और प्रचंड विचारधारा वसुधैव कुटु..

वनवास में रहे प्रभु श्री राम वनवासीयों के ज़्यादा क़रीबी थे

 प्रहलाद सबनानी   यह एक एतिहासिक तथ्य है कि प्रभु श्री राम ने लंका पर चढ़ाई करने के उद्देश्य से अपनी  सेना वनवासियों एवं वानरों की सहायता से ही बनाई थी। केवट, छबरी, आदि के उद्धार सम्बंधी कहानियाँ तो हम सब जानते हैं। परंतु, जब व..

भारत और भारतीयता को प्राथमिकता मिल रही

पश्चिमी आधुनिकता और भारतीयता के द्वंद ने लंबे समय तक भारतीय ज्ञान पद्धति को प्रभावित किया   अनंत विजय    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने एक भाषण में कहा कि ‘किसान क्षेत्र के हित के लिए काम करने वाला हमारा स..

संघ के स्वयंसेवक आज भारत के कोने-कोने में देश-प्रेम, समाज-सेवा, हिन्दू-जागरण और राष्ट्रीय चेतना की अलख जगा रहे हैं

विजयादशमी – संघ स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में विशेष नरेंद्र सहगल वर्तमान राजनीतिक परिवर्तन के फलस्वरूप हमारा भारत ‘नए भारत’ के गौरवशाली स्वरूप की और बढ़ रहा है. गत् 1200 वर्षों की परतंत्रता के कालखण्ड में भारत और भारतीयता क..

छद्म उदारता दिखाता है तनिष्क का एकत्वम विज्ञापन

        -  विवेक कुमार पाठक    एक हुए हम तो क्या न कर जाएंगे हम। तनिष्क के जूलरी विज्ञापन ने इस पंच लाइन के साथ संदेश दिया था कि मुस्लिम समुदाय आज इतना उदार है कि हिन्दू बहू की खुशी के लिए गोद भराई की रस्म करने जा र..

जेहाद के इस नए अंदाज को समझिए

         -जयराम शुक्ल                गहना बेचने वाली एक नामी कंपनी के एक चर्चित विज्ञापन पर कुछ बात करें, आएं उससे पहले मेरी स्मृति में टँकी एक सच्ची कहानी-   बात 67-68 की है।..

बोरी में मिली शैलेन्द्र की लाश, मोहन को जिन्दा जलाया : 15 घटनाएं जब मुस्लिम लड़की से दोस्ती के बदले हिन्दू लड़के को मिली मौत

       - सौरभ कुमार      नई दिल्ली. तनिष्क के ऐड का विरोध क्या हुआ तमाम सेक्युलर एक साथ उठ खड़े हुए. शोर मचा-मचा कर पूरी दुनिया को बता रहे हैं कि देखो! भारत का हिन्दू कितना असहिष्णु हो गया है, रेडिकल हो गया है. अरे भा..

राष्ट्रवाद के लिए लोकपथ को अपनाने वाली राजनेता थीं राजमाता विजयाराजे सिंधिया

          -  विवेक कुमार पाठक     "मैं अब बिना किसी ग्लानि के परलोक जा सकती हूं। मैंने अपने सपने को सच होते देख लिया है।" रामजन्मभूमि आंदोलन के समय अयोध्या में कारसेवकों को नमन करते हुए ये प्रखर हिन्दूवादी..

ग्रामों को केंद्र में रखकर आत्म निर्भरता को दिया जा सकता है व्यापक स्वरूप

         -  प्रहलाद सबनानी    21वीं सदी में यदि भारत को पुनः एक वैश्विक शक्ति बनाना है तो हर क्षेत्र में हमें आत्म निर्भरता हासिल करना ज़रूरी है। आत्म निर्भरता का सामान्यतः शाब्दिक अर्थ यह लगाया जाता है कि देश ..

खिलाफत आंदोलन - मोपला जिहाद-डॉ. श्रीरंग गोडबोले

खिलाफत आंदोलन के बीच हिंसा की कई घटनायें हुईं. खिलाफत आंदोलन के दौरान 1919-1922 के बीच मुस्लिम दंगों की अनुमानित सूची इस प्रकार है (गांधी एंड अनार्की, सर सी शंकरन नायर, टैगोर एंड कंपनी मद्रास, 1922, पृ. 250, 251): नेल्लोर (22 सितंबर 1919), मुथुपेट, तंजा..

लोकनायक के वारिसों से कुछ सवाल तो बनते ही है..

  डॉ अजय खेमरिया      आजादी के स्वर्णिम आंदोलन के बाद जिस महान नेता को देश ने लोकनायक के रूप में स्वीकार किया उस जयप्रकाश नारायण यानी जेपी के बिना आजाद भारत का कोई भी राजनीतिक विमर्श पूर्ण नही होता है।समकालीन राजनीति में नेतृत्व करने वाली पूरी पीढ़ी वस्तुतः जेपी की छतरी से निकलकर ही स्थापित हुई है ,जो आज पक्ष विपक्ष की भूमिकाओं में है।जेपी के महान व्यक्तित्व को लोग कैसे स्मरण में रखना चाहेंगे यह निर्धारित करने की जबाबदेही असल मे उनके राजनीतिक चेलों की ही थी। जेपी का मूल्यांकन ..

टीआरपी: मीडिया की साख पर आंच

    -    डॉ. पवन सिंह मलिक      चौबीस घंटे सबकी खबरें देने वाले टीवी न्यूज़ चैनल अगर खुद ही ख़बरों में आ जाए, तो इससे बड़ी हैरानी व अचंभित करने वाली ख़बर क्या होगी। परंतु पिछले कुछ घंटो में ऐसा ही नज़ारा टी..

विशेष साक्षात्कार - राम मंदिर से रामराज्य की ओर

  "विवेक" हिन्दी मासिक पत्रिका के साथ परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी का साक्षात्कार प्रश्न - अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के प्रारंभ के साथ ही राम जन्मभूमि आंदोलन समाप्त हो गया लेकिन क्या अब भगवान श्रीरामजी का विषय भी समाप्त हो गया?     श्रीराम मंदिर का शिलान्यास 1989 में पहले ही हो गया था. 5 अगस्त 2020 को केवल मंदिर निर्माण कार्यका शुभारंभ हुआ. मंदिर निर्माण के लिए भूमि प्राप्त हो इसलिए श्री रामजन्मभूमि का आंदोलन चल रहा था.सर्वोच्च न्यायालय का इस ..

मध्यप्रदेश सरकार फिर शुरू करेगी माणिकचंद्र वाजपेयी ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता सम्मान

  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की घोषणा, मामाजी माणिकचंद वाजपेयी समारोह समिति, विश्व संवाद केंद्र मध्यप्रदेश और पत्रकार जगत ने किया स्वागत भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस ..

मामाजी; जस की तस धर दीनी चदरिया

  जयराम शुक्ल      मामा माणिकचंद्र वाजपेयी स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद स्वतंत्रता संग्राम के समय की पत्रकारिता के ध्येय को लेकर चलने वाले अंतिम ध्वजवाहक थे। जलियांवाला बाग नरसंहार के वर्ष ही वे पैदा हुए थे। वे पत्रकारिता में देर से आए। या यूँ कहें कि उनकी संपादक के रूप में पहचान सन् 47 से बीस साल बाद बनी जब वे स्वदेश समूह का संपादकीय नेतृत्व सँभाला। लेकिन उनकी पत्रकारिता में नैतिकता, सामाजिक आदर्श, राष्ट्रगौरव, और अन्याय के खिलाफ प्रतिकार का वही उत्स रहा जो स्वतंत्रता ..

हिन्दी पत्रकारिता के ‘माणिक’ मामाजी

  - लोकेन्द्र सिंह  ‘मन समर्पित, तन समर्पित और यह जीवन समर्पित। चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँ’। कवि रामावतार त्यागी की यह पंक्तियां यशस्वी संपादक माणिकचंद्र वाजपेयी उपाख्य ‘मामाजी’ ..

पत्रकारिता के  अनुकरणीय परमहंस थे माणिकचन्द्र वाजपेयी

(डॉ अजय खेमरिया) पत्रकारिता के पराभव काल की मौजूदा परिस्थितियों में मामा जी यानी माणिकचंद्र जी वाजपेयी का जीवन हमें युग परिवर्तन का बोध भी कराता है।पत्रकारिता में मूल्यविहीनता के अपरिमित सैलाब के बीच अगर मामाजी को याद किया जाए तो इस बात पर सहज भरोसा कर..

मुझ पर मामाजी की वो पचास रुपए की उधारी...

     गिरीश उपाध्‍याय    मुझसे कहा गया है कि मैं ‘मामाजी’ के बारे में कुछ लिखूं। यह स्थिति ठीक वैसी ही है जैसे किसी अक्षर से कहा जाए कि तू महाकाव्‍य के बारे में कुछ लिख। बहुत दिनों से यही सोचते सोचते कि &lsq..

मामा माणिकचंद: एक ध्येय समर्पित पत्रकार

  डॉ. पवन सिंह मलिक     भारतीय पत्रकारिता में मूल्यों को स्थापित करने में अनेक नामों की एक लंबी श्रृखंला हमको दिखाई देती है। लेकिन उन मूल्यों को अपने जीवन का ध्येय बना पूरा जीवन उसके लिए समर्पित कर देना और उसी ध्येय की पूर्ति के लिए..

राष्ट्र -देवता के चिर-साधक- मामा माणिक चंद वाजपेयी 

राज किशोर  वाजपेयी"अभय" राष्ट्र -साधना का सच्चा स्वरूप देखना हो तो मामा माणिकचंद वाजपेयी के जीवन-वृत से देखा जा सकता है। उनका जीवन आडम्बरहीन सहज सेवा भावी, और ध्येय के प्रति समर्पित  था। वे आत्म-प्रवंचना से सदैव दूर ही रहे।  7 अकटूबर 1919..

बहुमुखी प्रतिभा के धनी कर्मयोगी पत्रकार मामाजी

    प्रवीण दुबे   मामा मानिकचन्द वाजपेयी अर्थात बहुमुखी प्रतिभा से ओतप्रोत ऐसा व्यक्तित्व जिससे जितना भी सीखा जाए कम है। जीवन के हर पहलू को मामाजी का व्यक्तित्व प्रभावित करता है। वे एक ऐसे कर्मयोगी थे जिन्होंने भगवान कृष्ण के गीत..

‘‘दिव्य ध्येय की ओर तपस्वी, जीवन भर अविचल चलता है।।’’

     हितानन्द शर्मा       प्रेरणापुंजः श्री रोशनलाल जी सक्सेना   तपस्वी जीवनव्रती - एक संकल्प को लेकर अनवरत साधना में रत सन्यासी जीवन जीने वाले ‘‘ज्ञान की रोशनी से समाज को रोशन करने वाले रोशनलाल जी सक्सेना’’। विद्याभारती के लक्ष्य अनुरूप समाज जागरण हेतु शिक्षा के माध्यम से ऐसी पीढ़ी का निर्माण हो सके जो कर्तव्यनिष्ठ, राष्ट्रभक्त, सेवाभावी एवम् संस्कारी हो, सदैव इस दिव्य ध्येय को लेकर अंतिम ..

देश में आर्थिक गतिविधियाँ पटरी पर लौटीं

  प्रहलाद सबनानी    पूरे विश्व में कोरोना वायरस महामारी के चलते आर्थिक गतिविधियाँ ठप्प पड़ गई थीं। भारत भी इस प्रभाव से अछूता नहीं रहा था। लॉकडाउन के चलते, मार्च 2020 के बाद से लगातार आर्थिक गतिविधियों में कमी देखने में आई थी। परंतु अब ह..

राजस्थान की घटनाओं पर मौन क्यों है कांग्रेस ?

  हाथरस की घटना निश्चित रूप से निंदनीय है। अपराधियों को कठोरतम दंड मिलना चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन कर फार्स्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया है। पीड़िता के परिवार को आर्थिक सहायता, मकान और नौकरी ..

धर्मांतरण राष्ट्रीय अस्तित्व के लिए खतरा

   हृदयनारायण दीक्षित     धर्मांतरण से राष्ट्रांतरण होता है. प्रत्येक राष्ट्र की एक भूमि और संस्कृति होती है. इतिहास भी होता है. राष्ट्र के निवासियों की अपनी भूमि और संस्कृति के प्रति श्रद्धा होती है. भूमि, संस्कृति और इतिहास क..

प्रणव दा जैसे लोग  बढ़ते रहें, फलते रहें, फूलते रहें, फैलते रहें

   डॉ. मनमोहन वैद्य    भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी के निधन से भारत की राष्ट्रीय राजनीति का एक दैदिप्यमान नक्षत्र अस्त हुआ है. भारतीय राजनीतिक क्षेत्र की बहुत बड़ी हानि हुई है. अपने राजनीतिक विचार के प्रति प्रतिबद्धता क..

स्वदेशी गांधी बनाम अंग्रेजी नेहरु

    नरेंद्र सहगल    महात्मा गांधी एक व्यक्ति अथवा नेता नहीं थे. भारतीय अंतर्मन के एक सशक्त हस्ताक्षर थे महात्मा जी. ‘रामराज्य’, ‘वैष्णव-जन’ एवं हिन्द स्वराज जैसे आदर्श उनकी जीवन यात्रा के घोषणा पत्र थे. स्वद..

दुष्कर्म जैसी घटनाओं पर भी सिलेक्टिव विरोध क्यों ?

उत्तरप्रदेश के हाथरस में बच्ची के साथ जो कुछ हुआ, उससे पूरा देश उद्वेलित है. तथाकथित महिला अधिकार और मानवाधिकार संगठनों के कार्यकर्ता देशभर में प्रदर्शन कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा देखने को मिल ..

गांधी के अपने देश भारत में गांधीवाद हाशिए पर क्यों ?

 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गांधी की हत्या भले कर दी थी, लेकिन गांधी मरे नहीं थे। क्योंकि वे शरीर नहीं एक विचारपुंज थे। एक ऐसा विचार पुंज जिसमें समग्र लोक कल्याण के चिंतन और दर्शन का अमृत्व था। गांधीजी के देहावस..

किसान मुद्दा क्या केवल विपक्ष जिम्मेदार है?

  डॉ नीलम महेंद्र      ऐसा पहली बार नहीं है कि सरकार द्वारा लाए गए किसी कानून का विरोध कांग्रेस देश की सड़कों पर कर रही है। विपक्ष का ताजा विरोध वर्तमान सरकार द्वारा  किसानों से संबंधित दशकों पुराने कानूनों में संशोधन करके बनाए..

किसान केवल मुद्दा बनेंगे या उनकी मदद भी करेंगे

       - शशांक शर्मा     भारत मुद्दों का देश है, कोई न कोई मुद्दा जनता के हित और कल्याण के नाम पर राजनीतिक फ़लक में बना रहता है। यह बात अलग है कि संसद के भीतर, सड़क पर और मीडिया में हजारों - लाखों मुद्दों पर सवाल-जवा..

नए श्रम क़ानूनों के लागू होने से देश के आर्थिक विकास को लग सकते हैं पंख

            - प्रहलाद सबनानी     किसी भी संस्थान की सफलता में उसके मज़दूरों एवं कर्मचारियों का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहता है। बिना मज़दूरों एवं कर्मचारियों के सहयोग के कोई भी संस्थान सफलता पूर्वक..

युवाशक्ति को सोख रही है ये आभासी दुनिया!

           -  जयराम शुक्ल       कोरोना ने इस साल की पढ़ाई लिखाई में भी ग्रहण लगा दिया। स्कूल कालेज कब से शुरू होंगे कहा नहीं जा सकता। पढ़ाई का आँनलाइन तरीका निकला है। अध्यापक मजबूरी में पढ़ा भी र..

उदारवादी बुद्धिजीवी औऱ विदेशी मीडिया का बेनकाब याराना..!

          - डॉ अजय खेमरिया       भारत में बेनकाब हो चुके सेक्युलरिस्ट उदारवादियों का विदेशी नेक्सस(याराना)वैश्विक जगत में भी सबको नजर आने लगा है।टाइम पत्रिका के ताजा अंक में विश्व की 100 ताकतवर शख्सियत ..

श्री राम जन्मभूमि आन्दोलन के ध्वजवाहक अशोक सिंहल

   नरेन्द्र सहगल    श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के दौरान जिनकी हुंकार से रामभक्तों के हृदय हर्षित हो जाते थे, वे श्री अशोक सिंहल संन्यासी भी थे और योद्धा भी; पर वे स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक प्रचारक ही मानते थे। ..

भारत में सर्व समावेशी विकास से ही तेज़ आर्थिक प्रगति सम्भव   

   प्रहलाद सबनानी      वर्तमान परिदृश्य में आर्थिक गतिविधियों का महत्व पूरे विश्व में बढ़ता ही जा रहा है। आचार्य चाणक्य ने भी कहा है “सुखस्य मूलम धर्म:, धर्मस्य मूलम अर्थ:” अर्थात राष्ट्र जीवन में समाज के सर्वांगीण..

दुनिया को पूंजीवाद या साम्यवाद नहीं, बल्कि मानववाद की जरूरत है-दीनदयाल जी

किसी भी देश के चिंतक अथवा विचारक उस मानव समाज के अभिभावक स्वरूप होते हैं,जो समाज में मार्गदर्शन का कार्य करते हैं.भारत में ऐसे विचारकों की एक लम्बी श्रृंखला है .इन्हीं में से एक नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय का है..

पंडित दीनदयाल उपाध्याय: एक यायावर महाव्रती  -जयराम शुक्ल

मुगलसराय जंक्शन अब पं.दीनदयाल उपाध्याय के नाम से जाना जाता है। कुछ वर्ष पहले जब नाम बदलने की बात उठी तो यह सुनते ही कई योद्घा विचलित हो गए, कहा इतिहास को भगवा रंग ओढाया जा रहा है हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते। यह मुगलों का सराय था और मुगलों का सराय ही रहेगा।    मैंने एक लेख के जरिए पूछा कि जब यहां मुगल नहीं थे तब क्या था..? वे सनातनी तो हैंं नहीं। बारहवीं सदी के बाद मारकाट लूटपाट करने आए थे। उससे पहले इस इलाके को किसी न किसी नाम से तो जाना ही जाता रहा होगा। मुगलों ने जिस तरह उसे मिटाकर ..

दीनदयाल उपाध्याय: राजनीति में संस्कृति के राजदूत

-    डॉ. पवन सिंह मलिक          आप देश की सबसे बड़ी नौकरी (भारतीय प्रशासनिक सेवा) के लिए साक्षात्कार देने आये हैं। क्या आपको पता नहीं था कि साक्षात्कार के लिए सूट पहनना अनिवार्य है? जी श्रीमान मैं यह जा..

वैचारिक आन्दोलन के प्रणेता थे दीनदयाल जी

 कृष्णमोहन झा     भारतीय जनता पार्टी आज केंद्र और अनेक राज्यों में सत्ता की बागडोर थामे हुए है। लगभग सारे देश में ‌वह अपनी जड़ें जमा चुकी है। उसे विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल होने का गौरव  मिल चुका है । इस विराट   राजनीतिक दल ने १९५१में जब भारतीय जनसंघ के नाम से एक छोटी सी ‌पार्टी के रूप में देश की राजनीति में अपना सफर प्रारंभ किया तब  डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जोड़ी का दृढ़ संकल्प और अदम्य इच्छा शक्ति ..

तिरंगे की प्रथम निर्माता भीकाजी कामा

आज स्वतन्त्र भारत के झण्डे के रूप में जिस तिरंगे को हम प्राणों से भी अधिक सम्मान देते हैं, उसका पहला रूप बनाने और उसे जर्मनी में फहराने का श्रेय जिस स्वतन्त्रता सेनानी को है, उन मादाम भीकाजी रुस्तम कामा का जन्म मुम्बई के एक पारसी परिवार म..

पत्रकारिता में शुचिता, नैतिकता और आदर्श के हामी दीनदयालजी

  - लोकेन्द्र सिंह     पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजनीतिज्ञ, चिंतक और विचारक के साथ ही कुशल संचारक और पत्रकार भी थे। उनके पत्रकार-व्यक्तित्व पर उतना प्रकाश नहीं डाला गया है, जितना कि आदर्श पत्रकारिता में उनका योगदान है। ..

यह ताव आज  के कवि-कोविदों  में कहां..

     जयराम शुक्ल       रामधारी सिंह दिनकर नेहरू के करीबी माने जाते थे। प्रधानमंत्री रहते हुए पंड्डिजी ने ही उन्हें राष्ट्रकवि का खिताब बख्शा व राज्यसभा में कांग्रेस की ओर से मनोनीत करवाया।  दिनकर की यशस्वी कृति ..संस्कृति के चार अध्याय ..की भूमिका जवाहरलाल नेहरू ने ही लिखी थी लेकिन जब 1962 के युद्ध में हमारे सैनिक मारे गए तब वो नेहरू की आलोचना करने से भी नहीं चूके, ... दिनकर संकेत देते हुए लिखते हैं..   घातक है, जो देवता-सदृश दिखता है लेकिन, ..

चीन की आक्रामकता और बेचैनी क्यों?

  कर्नल शिवदान सिंह   भारत का लद्दाख क्षेत्र में बुनियादी ढांचा विकसित करना चीन को हजम नहीं हो रहा, वह जिस क्षेत्र पर अपना हक मान कर वह बरसों से गिद्ध दृष्टि गड़ाए बैठा था,  अब उसेa वहां से चुनौती मिल रही लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्..

आदमी को पहाड़ खाते देखा है...

    जयराम शुक्ल      कहते  हैं कि हमारा समाज धर्मभीरु है। उसकी रक्षा के लिए हम किसी पराकाष्ठा तक जा सकतें हैं। यदि ऐसा आप भी सोचते हैं तो एकबार चित्रकूट हो आइए, वहां जाकर  देखिए कि आस्थाएं किस तरह स्वार्थ की बलि चढ़ा..