आलेख

कन्हैया कुमार के खिलाफ चार्जशीट दायर करने में क्यों लगे 3 साल ।

सांकेतिक चित्र   विसंके - जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में आतंकवादी अफज़ल गुरु की पुण्यतिथि के मौके पर कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अन्य के खिलाफ दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने आरोप पत्र दायर किया। चार्जशीट में शेहला राशिद और सीपीआई नेता डी र..

एक युवा सन्यासी का आध्यात्मिक एजेंडा – दरिद्र देवो भवः (भाग – 2)

12 जनवरी / जन्मदिवस, स्वामी विवेकानन्द अनैतिक सामाजिक व्यवस्थाओं और धार्मिक संस्थाओं के कुप्रबंधन के कारण समाज द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे दरिद्र और साधनहीन लोगों के प्रति हमदर्दी स्वामी जी में अकस्मात ही जागृत नहीं हुई थी. बचपन से ही उनका स्वभाव दयालू था..

शिक्षा नीति में दिखे विवेकानन्द का चिंतन

युवा नायक स्वामी विवेकानन्द को याद करते ही बुद्धि, हृदय और शरीर में ऊर्जा का संचार होने लगता है। स्वामी विवेकानन्द सबके प्रेरणा स्रोत हैं। लेकिन, युवाओं के तो वे हृदय सम्राट हैं। यही कारण है कि उनकी जयंती (१२ जनवरी) युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। दे..

एक युवा सन्यासी का आध्यात्मिक एजेंडा – दरिद्र देवो भवः (भाग – 1)

12 जनवरी / जन्मदिवस, स्वामी विवेकानन्द स्वामी विवेकानन्द के गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस ने अपने सभी शिष्यों की एक लघु सभा में घोषणा की थी – ‘नरेन्द्र धर्म की ध्वजा लेकर विश्व में सर्वत्र जाएगा और मानवों को जागृत करते हुए ज्ञान को सर्वत्र प्रस..

भारतीय सेना और मोदी सरकार : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

किसी भी देश पर शासन करनेवाली तत्‍कालीन राजनीतिक पार्टी की सरकार का उस पर किस तरह से सरकारात्‍मक और नकारात्‍मक प्रभाव होता है, दुनियाभर में इसके कई उदाहरण सहज ही देखे जा सकते हैं । भारत पर पिछली कांग्रेस-मनमोहन सरकार और वर्तमान भाजपा-मोदी सरकार..

सबरीमाला में महिला प्रवेश : आस्था या स्वतंत्रता का अहंकार

क्या अयप्पा दरबार में प्रवेश ही समानता का पर्याय केरल के सबरीमाला मंदिर में दो महिलाएं आखिरकार भगवान अयप्पा के दरबार में पहुंच ही गईं। महिला समानता के पैरोकार इसे बहुत बड़ी जीत बता रहे हैं। राज्य की सत्तारुढ़ माकपा सरकार अपनी पीठ ठोक रही है कि आखिरकार उस..

1000 साल पुराना राजा भोज का नगर नियोजन आज भी झलकता है भोपाल में - विजय मनोहर तिवारी

1000 साल पुराने नक्शे पर देश के शायद ही किसी और शहर की बसाहट इतनी स्पष्ट हो, जितना मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की है। यह बात तो सब जानते हैं कि परमार वंश के महान् राजा भोज ने भोपाल शहर को बसाया था। भोपाल नाम की उत्पत्ति भी भोज से ही है। भोपाल का बड़ा ताला..

समय है ज्ञान को किताबों से बाहर निकालने का - डॉ. नीलम महेंद्र

पढ़ाई वो ही नहीं हो जो  टीचर ने बताया और बच्चों ने उसे याद कर लिया बल्कि वो हो जो गुरु ने समझाया और बच्चों ने उसे महसूस किया। रोचक कहानियों के माध्यम से कूटनीति, राजनीति, मनोविज्ञान और व्यवहारिक ज्ञान बालकों को  देने का पंचतंत्र एक सर्व..

जेहादियों की मार से अब तो धर्मनिरपेक्षतावादी भी असुरक्षित - राजेश पाठक

रोहिंग्या मुसलमानों की देश के अंदर घुसपेठ के दौरान जब देश के अंदर एक वर्ग उनके प्रति सहानुभूति दिखाने में लगा हुआ था, तभी अमेंस्टी इंटरनेशनल के हवाले से  खबर आयी थी की यही रोहिंग्या कभी मयन्मार में जेहादियों की रहनुमायी में  हिन्दुओं के कत्..

क़र्ज़ माफ़ी सत्ता की चाबी – डॉ. नीलम महेंद्र

तीन राज्यों में विधानसभा चुनावों के नतीजों के परिणामस्वरूप कांग्रेस की सरकार क्या बनी, न सिर्फ एक मृतप्राय अवस्था में पहुंच चुकी पार्टी को संजीवनी मिल गई, बल्कि भविष्य की जीत का मंत्र भी मिल गया। जी हाँ, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने इरादे स्पष्ट..

गीता जयंती विशेष : समग्रता का उपदेश देता गीता का दर्शन – राजेश पाठक

‘क्रोध से सम्मोहन होता है, सम्मोहन से स्मृति लोप. स्मृति के लोप हो जाने से बुद्धि का नाश, और बुद्धि के नाश होने से व्यक्ति का नाश हो जाता है.’-[गीता:२-६६]. जीवन के नाश से बचने के लिए क्यों व्यक्ति को क्रोधादि अपने मानसिक आवेगों पर संयम रखना चा..

त्रेतायुग के राम और कलयुग की अयोध्या – विजय मनोहर तिवारी

भारत के ज़ख्मों से भरे इतिहास की एक धूलधूसरित कड़ी है अयोध्या। अंधेरे अतीत में एक रोशन मशाल जैसी, जो अपने बीते हुए कल की एक शानदार झलक दिखाती है। अयोध्या की स्मृतियों में क्या-क्या दर्ज होगा? दशरथ के महलों में राम की पहली किलकारी अयोध्या को याद होगी। कौशल्..

वीर शिवाजी गाथा : आने वाली अमावस - सोनाली मिश्र

पैदल न चल पाने के कारण उन्होंने एक बार पुन: कहारों को इशारा किया और पालकी में बैठ गए.  जैसे जैसे मिर्जा राजे का शिविर और शिवाजी के मध्य दूरी कम हो रही थी, शिवाजी की स्वयं से दूरी बढ़ती जा रही थी. नहीं नहीं, यह तो उनका लक्ष्य नहीं था! उनके कानों में म..

वीर शिवाजी गाथा : अफज़ल का जाल - सोनाली मिश्र (लेखमाला : भाग -2)

भोपाल(विसंके). जून के महीने में एक अजीब सी घुटन शिवाजी के जीवन में छा रही थी, हवाएं स्थिर थीं और उस जून के महीने में शिवाजी अजीब पसीना हो रहे थे। जैसे-जैसे उनका कदम आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे कोई शक्ति उनसे संवाद कर रही थी। बार-बार वह उन्हें धिक्कार रही थी, ..

मानवाधिकार दिवस समय है आत्ममंथन करने का - डॉ नीलम महेंद्र

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान सम्पूर्ण विश्व में मानव समाज एक बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहा था। यह वो समय था जब मानव सभ्यता और मानवता दोनों ही शर्मसार हो रही थीं। क्योंकि युद्ध समाप्त होने के बाद भी गरीब और असहायों पर अत्याचार, जुल्म, हिं..

कोर्ट के कटघरे में हिन्दुओं की आस्था हिन्दुओं के कटघरे में कोर्ट की आस्था - नरेन्द्र सहगल

भारत के सम्पूर्ण राष्ट्र जीवन को झकझोर देने वाले, करोड़ों हिन्दुओं की आस्था के साथ जुड़े हुए, गत 490 वर्षों से निरंतर संघर्ष करते चले आ रहे हिन्दू समाज की अस्मिता श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर के पुर्ननिर्माण का ज्वलंत एवं भावुक विषय सर्वोच्..

भारत के गौरव का प्रतीक है राम मंदिर

आधुनिक भारत के कई राष्ट्र निर्माताओं ने ‘भारत की सामूहिक अंतश्चेतना’ को अपनी वाणी और आचरण से अभिव्यक्त किया है. इस‘सामूहिक अंतश्चेतना’ की इच्छा, आकांक्षा और संकल्प है अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाकर भारत के गौर..

राष्ट्र की अस्मिता : ‘शौर्य दिवस’ : अयोध्या आंदोलन- नरेंद्र सहगल (भाग – 13)

06 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बने एक जर्जर ढांचे को भारत के राष्ट्रीय स्वाभिमान पर एक विदेशी आक्रांता द्वारा लगाया गया कलंक का टीका मानकर लाखों कारसेवकों की भीड़ ने इस कलंक को मिटा दिया. यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है कि श्रीर..

वीर शिवाजी गाथा - सोनाली मिश्र (लेखमाला : भाग -1)

भोपाल(विसंके). वर्ष 1665 का समय था। 1659 में अफजल खान का वध करने के उपरान्त पूरे भारत में शिवाजी के पराक्रम की चर्चाएं जोरो पर थीं। दक्‍क्‍न का भगवा उत्‍तर में मुगलिया सल्‍तनत के माथे पर रोज ही बल पैदा कर रहा था। विरासत में मिले इस साम्राज..

राम मंदिर नहीं तो फिर कैसी अयोध्या - सुरेश हिन्दुस्थानी

वर्तमान में संतों के नेतृत्व में हिन्दू समाज पूरे मनोयोग से यही चाह रहा है कि भारत की संस्कृति और स्वाभिमान के प्रतीक भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर अयोध्या में बने। इसके लिए हिन्दू समाज ने लम्बे समय तक संघर्ष किया है। लेकिन अब सहन करने की सीमा भी समाप्त हो ..

प्राणोत्सर्ग करने का दृढ़ संकल्प : अयोध्या आंदोलन - नरेन्द्र सहगल(भाग- 12)

मंदिर पर लगे सरकारी ताले के खुलने के बाद सभी हिन्दू संगठनों ने इस स्थान पर एक भव्य मंदिर बनाने के लिए प्रयास शुरु कर दिए। इस कालखंड में निरंतर6 वर्षों के इंतजार के बाद सरकार भी टालमटोल करती रही और न्यायालय भी इस मुद्दे को लटकाता रहा। निरंतर 6-7&..

आध्यात्मिक इतिहास की एक दुलर्भ घटना : अयोध्या आंदोलन - नरेंद्र सहगल (भाग – 11)

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के बनते बिगड़ते स्वरूप और बलिदानों की अविरल श्रृंखला के बीच भी हिन्दुओं के द्वारा आरती वंदन और अखंड रामायण पाठ एक क्षण के लिए भी बंद नहीं हुआ. अयोध्या क्षेत्र में संत महात्मा तथा समस्त हिन्दू समाज अपने श्रीराम की प्रतिमा को जन्मभूमि ..

राष्ट्रवादी मुस्लिम सरदार और धूर्त अंग्रेज : अयोध्या आंदोलन – नरेन्द्र सहगल (भाग – 10)

औरंगजेब के पश्चात् कुछ समय तो शांति से कटा, परन्तु धर्मान्ध मुस्लिम नवाबों के अहम के कारण यह विवाद सुलझने के स्थान पर उलझता चला गया. हिन्दुओं ने एक दिन भी मंदिर पर अपने अधिकार को नहीं छोड़ा. एक कालखंड ऐसा भी आया जब हिन्दू मुस्लिम सद्भाव का वातावरण बना. सन्..

श्रीगुरु गोबिन्दसिंह और बाबा वैष्णवदास का रणकौशल - नरेन्द्र सहगल अयोध्या आंदोलन (भाग – 9)

अत्याचारी शासक और हिन्दू संहारक औरंगजेब ने अपने एक दुर्दांत सेनापति जांबाज खान को मुगल सेना के साथ अयोध्या की ओर कूच करने का हुक्म दे दिया. औरंगजेब की इन हिन्दुत्व विरोधी विनाशकारी चालों से हिन्दू संत महात्मा भी अनभिज्ञ नहीं थे. अयोध्या के पास ही सरयु नदी..

तथाकथित मानवतावादी अकबर की कुटिल कूटनीति अयोध्या आंदोलन – नरेन्द्र सहगल (भाग – 8)

इस्लाम की मूल भावना और शरीयत के सभी उसूलों को ताक पर रखकर बाबर ने मंदिर तोड़कर जो मस्जिद का ढांचा खड़ा कर दिया. यह हिन्दू समाज पर एक कलंक का टीका था. बाबर की विजय विदेश की विजय थी. आक्रमणकारी बाबर द्वारा किसी भी प्रकार का स्मृति चिन्ह समस्त भारत का अपमान था..

इस्लामिक सिद्धान्तों को भी दफन कर दिया बाबर ने अयोध्या आंदोलन – नरेन्द्र सहगल (भाग-7)

मुगल सेनापति मीरबांकी द्वारा मंदिर को तोड़कर बनाई गई मस्जिद का सफाया करने के लिए हिन्दुओं ने हमलों का तांता लगा दिया। बाबर रोज-रोज के इन युद्धों में हिन्दुओं के द्वारा अपमानित हो रहा था। वह कोई समझौता करके अपनी इज्जत बचाने की राह तलाशने लगा। मीरबांकी ने तो..

राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : मंदिर के खण्डहरों पर बाबरी ढांचा - नरेन्द्र सहगल (अयोध्या आंदोलन भाग – 6)

अयोध्या के प्रसिद्ध हिन्दू संत स्वामी श्यामानंद को अपना गुरु मानने वाले दोनों मुस्लिम फकीरों ख्वाजा अब्बास और जलालशाह ने बाबर को चेतावनी दी कि यदि रामजन्मभूमि पर बने मंदिर को नहीं तोड़ा गया तो हिन्दू पुनः संगठित और शक्तिशाली होकर बाबर और उसके सारे सैन्यबल ..

राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : दो विधर्मी फकीरों की गद्दारी - नरेन्द्र सहगल -(अयोध्या आंदोलन भाग -5)

सम्पूर्ण भारत के भूगोल, इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को बर्बाद करने के उद्देश्य से विदेशी हमलावरों ने जो हिंसक रणनीति अपनाई थी, उसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों को तोड़ना और अत्यंत अपमानजनक हथकंडे अपना कर भारत के राष्ट्रीय समाज ..

एक भी यवन सैनिक जिंदा नहीं बचा : नरेन्द्र सहगल अयोध्या आंदोलन (भाग – 4)

11वीं सदी के प्रारम्भ में कौशल प्रदेश पर महाराज लव के वंशज राजा सुहैल देव का राज था। उनकी राजधानी अयोध्या थी, इन्ही दिनों महमूद गजनवी ने सोमनाथ का मंदिर और शिव की प्रतिमा को अपने हाथ से तोड़कर तथा हिन्दुओं का कत्लेआम करके भारत के राजाओं को चुनौती दे दी। पर..

दिन ब दिन टूटते रिश्ते – डॉ. नीलम महेंद्र

हाल ही में जापान की राजकुमारी ने अपने दिल की आवाज सुनी और एक साधारण युवक से शादी की। अपने प्रेम की खातिर जापान के नियमों के मुताबिक, उन्हें राजघराने से अपना नाता तोड़ना पड़ा। उनके इस विवाह के बाद अब वे खुद भी राजकुमारी से एक साधारण ..

राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – नरेंद्र सहगल (भाग - 3)

श्रीराम जन्मभूमि के साथ भारत की अस्मिता और हिन्दुओं का सर्वस्व जुड़ा है. यही कारण है कि रावण से लेकर बाबर तक जिस भी विदेशी और अधर्मी आक्रांता ने रामजन्मभूमि को अपवित्र करने का जघन्य षड्यंत्र रचा, हिन्दुओं ने तुरन्त उसी समय अपने प्राणों का उत्सर्ग करते..

राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या आंदोलन – नरेन्द्र सहगल (भाग 2_

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भारत की सांस्कृतिक मर्यादा के अनुरूप अनेक महत्वपूर्ण निर्णय अपने जीवन में ही ले लिये थे. मरते दम तक सत्ता से चिपके रहने के अनैतिक दुर्भाव को ठोकर मारकर राजा राम ने समस्त साम्राज्य को अपने भाईयों एवं पुत्रों में बांट दिया था. ..

राष्ट्रीय चेतना का उदघोष : अयोध्या आंदोलन – नरेन्द्र सहगल (भाग -1)

जिसे युद्ध में कोई जीत न सके वही अयोध्या है। हिमालय की गोद में अठखेलियां खेलती हुई पण्य-सलिला सरयु अविरल चट्टानी रास्तों को तोड़कर मैदानी क्षेत्रों को तृप्त करती चली आ रही है। वैदिक काल से आज तक निरंतर चला आ रहा यह पुण्य प्रवाह अपने अंदर भारत राष्ट्र के सह..

तीन तलाक व हलाला के मुक्तिदाता मोदी – प्रवीण गुगनानी

नरेंद्र मोदी सरकार ने भारतीय मुस्लिम महिला समाज के लिए जो किया उस कार्य की आज तक किसी मुस्लिम पुरुष या महिला नेता ने कल्पना भी न की थी. मोदी सरकार ने सत्तर वर्षों से विभिन्न सरकारों द्वारा अनदेखी किये जा रहे इस मुद्दे पर अपनी दो टूक राय सुप्रीम कोर्ट के स..

क्या यह दबी चिंगारी को हवा देने की कोशिश है? – डॉ. नीलम महेंद्र

आतंकवादी घटना को अंजाम देने के लिए निरंकारी भवन जैसे स्थान को चुनना इत्तेफाक नहीं एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।  इस बहाने ये लोग सिक्ख समुदाय और निरंकारी मिशन के बीच मतभेद का फायदा उठाकर पंजाब को एक बार फिर आतंकवाद की आग में झुलसने की कोशिश ..

शबरीमला विवाद : हिंदू संस्कृति को ध्वस्त करना चाहती है केरल की वामपंथी सरकार

केरल की वामपंथी सरकार हिंदू संस्कृति और परंपरा को ध्वस्त करने पर उतारू है। वह हिंदू रीति-रिवाजों को कुचल देना चाहती है। इस बारे में उसे देश के सामाजिक ताने-बाने की रत्ती भर चिंता नहीं है शबरीमलामला का ताजा मामला मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, वामलोकतांत्..

क्या इस कीमत पर विकास सोचा था आपने? – डॉ. नीलम महेंद्र

अब तक तो हमने प्रकृति का केवल दोहन किया है। अब समर्पण करना होगा। जितने जंगल कटे हैं उससे अधिक बनाने होंगे, जितने पेड़ काटे उससे अधिक लगाने होंगे, जितना प्रकृति से लिया, उससे अधिक लौटना होगा। प्रकृति तो माँ है, जीवनदायिनी है, दोनों हाथों से अपना प्यार लुटाए..

सनातन परम्पराओं को कुरीतियाँ कह कर खारिज करने का षडयंत्र

5 नवंबर को एक दिन की विशेष पूजा के लिए सबरीमाला मंदिर के द्वार कडे पहरे में खुले। न्यायालय के आदेश के बावजूद किसी महिला ने मंदिर में प्रवेश की कोशिश नहीं की। लेकिन कुछ बुद्धिजीवियों द्वारा सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश देन..

संघ शाखा के विरुद्ध कांग्रेस का विधवा प्रलाप - प्रवीण गुगनानी

कांग्रेस ने अपने मप्र के चुनावी घोषणा पत्र में संघ की शाखाओं पर शासकीय कर्मचारियों के जाने पर प्रतिबंध की बात की है वहीं  अभी अभी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी संघ के मंच पर संघ के सरसंघचालक संग खड़े होकर संघ की प्रसंशा करते दिखाई दिए थे. संघ एक पूर्..

कैसा समाज बनाएंगे हम? - डॉ नीलम महेंद्र

क्या कानून की जवाबदेही केवल देश के संविधान के ही प्रति है?क्या सभ्यता और नैतिकता के प्रति कानून जवाबदेह नहीं है ? क्या ऐसा भी हो सकता है कि एक व्यक्ति का आचरण कानून के दायरे में तो आता हो लेकिन नैतिकता के नहीं?  दरअसल माननीय न्य..

महिलाओं के लिए ये कैसी लड़ाई जिसे महिलाओं का ही समर्थन नहीं - डॉ नीलम महेंद्र

मनुष्य की आस्था ही वो शक्ति होती है जो उसे विषम से विषम परिस्थितियों से लड़कर विजयश्री हासिल करने की शक्ति देती है। जब उस आस्था पर ही प्रहार करने के प्रयास किए जाते हैं, तो प्रयास्कर्ता स्वयं आग से खेल रहा होता है। क्योंकि वह यह भू..

अपने मौलिक नाम से पहचाने जाना गौरव का विषय है विवाद का नहीं – डॉ. नीलम महेंद्र

नाम का असर उसके व्यक्तित्व पर पढ़ता है । शायद इसलिए हम लोग अपने बच्चों के नाम रावण या सूपर्णखा नहीं राम और सीता रखना पसंद करते हैं । बरसों पहले अंग्रेजी के मशहूर लेखक शेक्सपियर ने कहा था,  व्हाट इस इन द नेम? यानी नाम में क्या रखा है? अगर गु..

शिक्षा संस्थानों में आतंकी घुसपैठ - सुरेश हिन्दुस्थानी

भारत में चुनाव से पूर्व वातावरण खराब करने के पर्याप्त संकेत मिल रहे हैं। इसमें पड़ौसी देश पाकिस्तान और पाकिस्तान परस्त व्यक्तियों के शामिल होने का भी अनुमान है। क्योंकि आतंकवाद के समर्थन में आने वाले छात्रों के पास पाकिस्तान निर्मित एके 47 और विस्फोटक सामग..

अन्न की अपव्ययता पर अंकुश आवश्यक (विश्व खाद्य दिवस पर विशेष) – रितेश दुबे

भारतीय संस्कृति में अन्न को ब्रम्हा कहा गया है। शायद इसीलिए भारत कृषि प्रधान देश है। किसी भी फसल को तैयार होने में छह से चार माह लगते है। लेकिन हम न किसान की मेहनत को समझते है और न ही अन्न की उपयोगिता को, आज शादियां, उत्सवों और त्यौहारों में हम न जाने कित..

केवल पुरुषों को दोष देने से काम नहीं चलेगा – डॉ. नीलम महेंद्र

पुरानी यादें हमेशा हसीन और खूबसूरत नहीं होती। मी टू कैम्पेन के जरिए आज जब देश में कुछ महिलाएं अपनी जिंदगी के पुराने अनुभव साझा कर रही हैं तो यह पल निश्चित ही कुछ पुरुषों के लिए उनकी नींदें उड़ाने वाले साबित हो रहे होंगे और कुछ अपनी सांसें थाम कर बैठे होंगे..

गुजरात: यह हिंदी भाषियों पर नहीं देश के संघीय ढांचे पर हमला है..!-कृष्णमोहन झा

गुजरात के साबरकाठा जिलें में स्थित एक कारखाने में कार्य करने वाले बिहारी मजदूर को एक 14 माह की अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इसके बाद राज्य के आठ जिलों में भड़की हिंसा ने यहां कार्यरत उत्तर भारतीयों, जिनमे विशेषकर बिहार एवं ..

कार्बन उत्संर्जन से भारत को होता आर्थिक नुकसान : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

दुनिया विकास के पीछे भाग रही है। प्रकृति का अंधाधुंध शोषण, जीवन को नुकसान पहुँचाने वाले तत्‍वों का पर्यावरण में अत्‍यधिक समावेश, मानों आज के मनुष्‍य की दिनचर्या का हिस्‍सा हो गया है। सुबह उठते ही प्‍लास्‍ट‍िक के ब्रश से टूथपेस्..

उच्च शिक्षा, प्रधानमंत्री की भावनाएं और जमीनी सच्चालई : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

ज्ञान और शिक्षा सिर्फ किताबें नहीं हो सकती हैं। शिक्षा का लक्ष्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होना चाहिए। इसके लिए नवोन्मेष जरूरी है। अगर यह रुक जाता है तो जिंदगी ठहर जाती है। नालंदा, विक्रमशिला और तक्षशिला जैसे हमारे प्राचीन विश्वविद्यालयों में ज्ञान और नव..

राफेल पर कांग्रेस के झूठ की पराकाष्ठा : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

राजनीति के बारे में कहा यही जाता है कि‍वह शब्‍दों से खेलती है, शब्‍दों के आडम्‍बर से एक काल्‍पनिक संसार बनाती है और उस काल्‍पनिक संसार को सच में बदलने के लिए फिर अपने कार्यकर्ताओं के माध्‍यम से जतन करती है। वस्‍तुत: यही परि..

हिन्दुत्व अर्थात भारतीयता - राष्ट्र की सनातन पहचान से परहेज कैसा? - नरेन्द्र सहगल

हिन्दुस्थान में हिन्दुत्व का विरोध हो, तो हिन्दुस्थानियों के लिए इससे दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है? इसके लिए वर्तमान राजनीतिक वातावरण जिम्मेदार है और इस वातावरण को बनाया है उन लोगों ने जिन्हें राष्ट्र और समाज की भारतीय अवधारणा से कुछ भी लेन..

निष्काम कर्मयोगी राजनेता - पंडित दीनदयाल उपाध्याय - रितेश दुबे

पुण्य भूमि भारत में अनेक महापुरूषों ने जन्म लिया है ,उनमें से एक थे निष्काम कर्म योगी पंडित दीनदयाल उपाध्याय । पंडित जी कहा करते थे देश के लिये मरने वाला जितना महान होता है ,उतना ही महान देश और समाज के लिये जीने वाला होता है जीते जी समाज के लिए समर्पित हो..

संघ प्रमुख की बेबाक राय से बदलेगी आम जन में संघ के प्रति धारणा!- कृष्णमोहन झा

अभी तक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए समर्पित संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सारे महत्वपूर्ण कार्यक्रम उसके मुख्यालय नागपुर तक ही सीमित रहा करते थे, परंतु हाल ही में उसने अनूठी व्याख्यानमाला का आयोजन देश की राजधानी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में किया। इस व..

संघ ने दी वैचारिक चुनौती भाग खड़े हुए संघ विरोधी - नरेन्द्र सहगल

हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय संवाद-सम्मेलन में  आमंत्रित किए जाने के बावजूद भी संघ विरोधियों ने दूरी बनाए रखी। इतना ही नहीं, इन लोगों ने राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रनीति को सुनने और सहमत होने से भी इन्कार कर दि..

भविष्य का भारत : ‘परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्’ – लोकेन्द्र सिंह

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन दिवसीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम पर सबकी नजर है। देश में भी और देश के बाहर भी। सब जानना चाहते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संगठन आरएसएस ‘भविष्य का भारत’ को किस तरह देखता है? संघ का ‘भा..

सर्वसमावेशी संघ : समय के साथ आगे बढ़ता - आशीष अंशु

 भोपाल(विसंके). चन्द्रभान प्रसाद ने यह बात दलित समाज को लेकर कही थी। दलित चिन्तकों ने दलितों को जहां वे खड़े हैं, उससे बीस साल पीछे धकेल दिया है। दलित चिन्तक दलितों को लेकर इतने चिन्तित है कि उन्हें यकिन ही नहीं होता कि दलित आगे बढ़ रहा है। इस दुख मे..

भविष्य का भारत और संघ - डॉ. मयंक चतुर्वेदी

जब १९४७ में भारत आजाद हो गया उसके बाद हैदराबाद की जनता भी भारत में विलय चाहती थी. पर उनके आन्दोलन को निजाम ने अपनी निजी सेना रजाकार के द्वारा दबाना शुरू कर दिया. रजाकार एक निजी सेना (मिलिशिया) थी जो निजाम ओसमान अली खान के शासन को बनाए रखने तथा हैदराबाद को..

‘हिन्दीपन’ से मिलेगा हिंदी को सम्मान

भोपाल(विसंके). भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है। बल्कि, इससे इतर भी बहुत कुछ है। भाषा की अपनी पहचान है और उस पहचान से उसे बोलने वाले की पहचान भी जुड़ी होती है। यही नहीं, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक भाषा का अपना संस्कार होता है। प्रत्येक व्..

संघ का अंतिम लक्ष्य परम वैभवशाली भारत- नरेन्द्र सहगल

भोपाल(विसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कल्पना में ‘परमवैभवशाली भारत’ ही भविष्य का भारत है। यही कल्पना स्वामी विवेकानन्द, स्वामी दयानन्द, स्वामी रामतीर्थ, महर्षि अरविंद, डॉक्टर हेडगेवार, सुभाष चन्द्र बोस,&n..

भला ऐसा समाजवाद और कहाँ.. - जयराम शुक्ल

भोपाल(विसंके). जैसा कि पिछले साल "अगले बरस तू लौकर आ" का वायदा किया था, गणपत बप्पा घर-घर पधार गए। क्या महाराष्ट्र, क्या गुजरात, समूचा देश आज से गणपति मय है। बड़े गणेशजी, छोटे गणेशजी, मझले गणेशजी।  गणेशजी जैसा सरल और कठिन देवता और कौन? लालबाग के राजा ..

‘सवर्ण’ और ‘दलित’ हिन्दुओं को बांटने का षड्यंत्र है यह समाजघातक शब्दावली - नरेन्द्र सहगल

भोपाल(विसंक). मैं अपनी बात को एक प्रश्न के साथ शुरु करता हूं। जब अनेक सड़कों, शहरों, योजनाओं, संस्थाओं और अदारों के नाम बदले जा रहे हैं तो फिर समाज को तोड़ने वाली सवर्ण और दलित जैसी खतरनाक शब्दावली को क्यों नहीं बदला जा रहा? इन दिनों दलित बन..

देश विरोधी विचार रखने वालों के समर्थन में यह कौन लोग है? – डॉ. नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). भारत शुरू से ही एक उदार प्रकृति का देश रहा है, सहनशीलता इसकी पहचान रही है और आत्म चिंतन इसका स्वभाव। लेकिन जब किसी देश में उसकी उदार प्रकृति का ही सहारा लेकर उसमें विकृति उत्पन्न करने की कोशिशें की जाने लगें, और उसकी सहनशीलता का ही सहारा ले..

भारत के आर्थिक विकास पर बेवजह विवाद : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). विश्वभर में सभी देशों के बीच भारत तेजी के साथ आर्थिक विकास की दौड़ लगा रहा है।  तमाम आलोचनाओं और विरोधों के बीच निरंतर भारत का विकास दर में आगे होते जाना इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की सरकार आर..

राष्ट्रद्रोह को असहमति के साथ मत फेंटिए जनाब!साँच कहै ता- जयराम शुक्ल

भोपाल(विसंके). डाक्टर राममनोहर लोहिया ने कहा था- जब हम किसी का जिंदाबाद बोलते हैं तो उसका मुर्दाबाद करने का अधिकार स्वमेव मिल जाता है। डाक्टर लोहिया नेहरू युग में असहमति के प्रखर स्वर रहे हैं। स्वस्थ लोकतंत्र में असहमति का दर्जा सबसे महत्वपूर्ण होता है क्..

अनुच्छेद 35 ए की संवैधानिकता सवालों के घेरे में - भरतचन्द्र नायक

भोपाल(विसंके).  जम्मू कश्मीर के नागरिकों के लिए विशेष अधिकार और सुविधाओं से जुड़ा अनुच्छेद 35 ए न्यायिक समीक्षा में है। सर्वोच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की खंडपीठ इस पर विचार करेगी। मामला चारू बाली खन्ना की याचिका के कारण सुनाई में आया ..

देश तोड़ने वालों का कैसा मानवाधिकार - डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). एक बड़ा प्रश्न है कि देश तोड़ने वालों का कैसा मानवाधिकार ? वस्तुतः जिन लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने की साजिश में पकड़ा गया है, उन पर नक्सलियों से साठगांठ रखने के आरोप पहले से लगते रहे हैं, किन्तु राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ..

लोक कलाएं हैं ज्ञान का भंडार

पतंजलि ने योग की जिन आठ परंपराओं को प्रस्तुत किया वह आज बाबा रामदेव के प्रयास से लोकप्रिय हुई है, लेकिन हमारे पूर्वजों ने योग एवं स्वास्थ्य के अभिन्न संबंध को समझकर हर लोक नृत्य में योग की प्रक्रिया का संगीतमय और लालित्यपूर्ण समावेशन किया। गोटी पुआ नृत्य ..

गांधी, लोहिया और उपाध्याय का अदभुत सम्मिश्रण स्वयंसेवक ‘अटल’ - नरेन्द्र सहगल

भोपाल(विसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निष्ठावान स्वयंसेवक अटलबिहारी वाजपेयी अपने बाल्यकाल से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक अपने स्वयंसेवकत्व पर अटल रहे। संघ का स्वयंसेवक अर्थात अपने संगठन, समाज और राष्ट्र के हित में स्वयं की प्रेरणा से निःस्वार्थ भा..

असम की 40 लाख आबादी को कौन देगा शरण ? - कृष्णमोहन झा

भोपाल(विसंके). असम में अवैध रूप से रह रहे विदेशी घुसपैठियों का पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन (एनआरसी) बनाने के निर्देश दिए थे तब कोर्ट की निगरानी में दो मसौदे तैयार किए गए। पहला मसौदा विगत वर्ष 31 दिसंबर को जारी किया गया था, जि..

इमरान खान ने पहना है कांटों भरा ताज - कृष्णमोहन झा

भोपाल(विसंके). पाकिस्तान की नेशनल असेम्बली के हॉल ही में संपन्न हुए चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें पाने वाली तहरीफ़- ए इंसाफ पार्टी के मुखिया इमरान खान जल्द ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री  के रूप में शपथ ले सकते है। इमरान की पार्टी को 272 सीटों पर हुए चुना..

नर्मदा घाटी संदर्भ: आदिवासी दिवस व बाबासाहेब – प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). जनजातीय समाज की प्रतिष्ठा, उसके रक्षण व विकास की भारत में प्राचीन परंपरा रही है. प्रकृति पूजन हमें वेदों से प्राप्त हुआ जिसके प्रति  नगरीय समाज की अपेक्षा जनजातीय समाज अधिक आग्रही रहा. जनजातीय समाज रक्षण का पात्र नहीं अपितु शेष समाज का..

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 8 - नरेन्द्र सहगल

विदेशी/विधर्मी परतंत्रता के कारणों पर गहरा मंथन भोपाल(विसंके). सन् 1922 में डॉक्टर हेडगेवार को मध्य प्रांत की कांग्रेस इकाई ने प्रांतीय सह मंत्री का पदभार सौंप दिया। डॉक्टर जी ने कांग्रेस के भीतर ही एक संगठित स्वयंसेवक दल बनाने का प्रयास किया थ..

वे पंद्रह दिन... 3 अगस्त, 1947 - प्रशांत पोळ

भोपाल(विसंके). आज के दिन गांधीजी की महाराजा हरिसिंह से भेंट होना तय थी. इस सन्दर्भ का एक औपचारिक पत्र कश्मीर रियासत के दीवान, रामचंद्र काक ने गांधीजी के श्रीनगर में आगमन वाले दिन ही दे दिया था. आज ३ अगस्त की सुबह भी गांधीजी के लिए हमेशा की तरह ही थी. अगस्..

देश देख रहा है - डॉ. नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). आज राजनीति केवल राज करने अथवा सत्ता हासिल करने मात्र की नीति बन कर रह गई है उसका राज्य या फिर उसके नागरिकों के उत्थान से कोई लेना देना नहीं है। यही कारण है कि आज राजनीति का एकमात्र उद्देश्य अपनी सत्ता और वोट बैंक की सुरक्षा सुनिश्चित करना र..

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 2 - नरेन्द्र सहगल (1 अगस्त से 14 अगस्त तक जारी)

भोपाल(विसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जन्मजात स्वतंत्रता सेनानी थे। ‘‘हिन्दवी स्वराज’’ के संस्थापक छत्रपति शिवाजी, खालसा पंथ का सृजन करने वाले दशमेशपिता श्रीगुरु गोविंदसिंह और आर्यसमाज के सं..

वे पन्द्रह दिन…/ 02 अगस्त 1947- प्रशांत पोल

17, यॉर्क रोड…. इस पते पर स्थित मकान, अब केवल दिल्ली के निवासियों के लिए ही नहीं, पूरे भारत देश के लिए महत्त्वपूर्ण बन चुका था. असल में यह बंगला पिछले कुछ वर्षों से पंडित जवाहरलाल नेहरू का निवास स्थान था. भारत के ‘मनोनीत’ प्रधानमंत्री क..

डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम - नरेन्द्र सहगल (1 अगस्त से 14 अगस्त तक जारी)

भोपाल(विसंके). एक प्रखर स्वतंत्रता सेनानी डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने जन्मकाल से आज तक नाम, पद, यश, गरिमा, आत्मप्रसंशा और प्रचार से कोसों दूर रहकर राष्ट्र हित में समाजसेवा, धर्मरक्षा और राष्ट्रभक्..

1 अगस्त, 1947 का वो पहला दिन - प्रशांत पोळ (वे पंद्रह दिन भाग – 1)

भोपाल(विसंके). शुक्रवार, १ अगस्त १९४७. यह दिन अचानक ही महत्त्वपूर्ण बन गया. इस दिन कश्मीर के सम्बन्ध में दो प्रमुख घटनाएं घटीं, जो आगे चलकर बहुत महत्त्वपूर्ण सिद्ध होने वाली थीं. इन दोनों घटनाओं का आपस में वैसे तो कोई सम्बन्ध नहीं था, परन्तु आगे होने वाले..

असम में जाति माटी भेटी की विजय - प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). प्लेटो के शिष्य व सिकंदर के गुरु अरस्तु ने कहा था – “राज्य से पृथक व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं होता” यही एनआरसी का सार है. राजनीति में ऐसा तब ही संभव हो पाता है जब एक शुद्ध राजनैतिक संगठन के पीछे एक विशुद्ध वैचारिक व सांस..

मुंशी प्रेमचंद की गाय आज के परिप्रेक्ष में - प्रमोद भार्गव

यह कहानी लेन-देन यानी ब्याज का धंधा करने वाले दाऊदयाल और एक गाय-बछड़े के मालिक व दाऊदयाल के ऋणी रहमान से जुड़ी है। दाऊ एक तरह से डंडा-बैंक चलाने वाले साहूकार हैं, क्योंकि वे 25-30 रुपए सैंकड़ा की दर से ब्याज पर कर्ज देते हैं और तय दिनांक को नहीं चुकाने पर ..

अपने पांव पर मजबूती से खड़ा है विश्व का सबसे बड़ा संगठन - नरेन्द्र सहगल

भोपाल(विसंके). भारतवर्ष के सम्पूर्ण राष्ट्रजीवन के प्रतीक, भगवान भास्कर के उदय की प्रथम रणभेरी, भारतीय संस्कृति की पूर्ण पहचान और भारत के वैभवकाल से लेकर आजतक के कृमिक इतिहास के प्रत्यक्षदर्शी परम पवित्र भगवा ध्वज को श्रीगुरु मानकर राष्ट्र के पुर्नउत्थान ..

क्यों है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गुरु 'भगवा ध्वज' ?

पर्वों, त्योहारों और संस्कारों की भारतभूमि पर गुरु का परम महत्व माना गया है। गुरु शिष्य की ऊर्जा को पहचानकर उसके संपूर्ण सामर्थ्य को विकसित करने में सहायक होता है। गुरु नश्वर सत्ता का नहीं, चैतन्य विचारों का प्रतिरूप होता है। रा. स्व. संघ के आरम्भ से ही भ..

शशि थरूर के हिंदुत्व पर दिये ब्यान के निहितार्थ - कृष्णमोहन झा

भोपाल(विसंके). कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर यूं तो अपने बयानों के लिए प्रायः सुर्खियों में रहते है परंतु कुछ दिनों पहले उन्होंने सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध मौत के मामले में अदालत से अग्रिम जमानत लेकर स्वयं को औऱ अधिक चर्चाओं में ला दिया था।अपनी तीसरी पत..

आधुनिक विचारों में हमारे कुछ मौलिक विचार कहीं खो गए – डॉ. नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). नारी, स्त्री, महिला वनिता, चाहे जिस नाम से पुकारो नारी तो एक ही है। ईश्वर की वो रचना जिसे उसने सृजन की शक्ति दी है, ईश्वर की वो कल्पना जिसमें प्रेम त्याग सहनशीलता सेवा और करुणा जैसे भावों  से भरा ह्रदय  है। जो  शरीर से भले ही..

पर्यावरणीय चिंता की आवश्यकता - रीतेश दुबे

भोपाल(विसंके). पिछले कई वर्षों से मानसून की भविष्यवाणियां सटीक नहीं बैठ पा रही जहां बारिश हो रही है वहां लगातार बाढ जैसे हालात बन रहे है और जहाँ पानी नहीं गिर रहा है वहां सूखे का अंदेशा है। कुछ बरस पहले तक जुलाई माह के पहले पखवाड़े में देश भर में मानसून छा..

झूठ के पांव नहीं होते, सोशल मीडिया ने अफवाहों को पंख दिये - भरतचन्द्र नायक

सोशल मीडिया हब बनाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव ने विपक्ष को विचलित कर दिया है। सर्वोच्च न्यायाल ने इसी तरह की एक यात्रिका विचार के लिए स्वीकृति करते हुए यह कहकर कि सरकार की मंशा निगरानी राज स्थापित करने की लगती है। इसे बहस का मुद्दा बना दिया है। लोकतंत्..

सजा का फैसला भीड़ के हाथों में मत जाने दीजिये – गिरीश उपाध्याय

भोपाल(विसंके). हमारे भोपाल में शनिवार को फिर वही हुआ जिसके बारे में मैंने 4 जुलाई को लिखा था। 12 दिन पुराने उस कॉलम में मैंने कहा था कि ‘’सोशल मीडिया पर लोकतंत्र को भीड़ तंत्र में बदला जा रहा है। अब वहां से फतवे जारी होते हैं और देखते ही देखते..

विवादित बयान इत्तेफाक या साज़िश -डॉ. नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). वैसे तो शशि थरूर और विवादों का नाता कोई नया नहीं है। अपने आचरण और बयानों से वे विवादों को लगातार आमन्त्रित करते आएँ हैं। चाहे जुलाई 2009 में भारत पाक के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और युसुफ रजा गिलानी के बीच हुई बातचीत के बाद जारी संय..

हिंदू धर्म और हिंदी में तलाक का कोई विकल्प नहीं

भोपाल(विसंके). हिन्दू धर्म में शादी के बाद पति-पत्नी के एक हो जाने के बाद उनके अलग होने का कोई प्रावधान नहीं है। हमारे यहां शादी को ईश्वरीय विधान माना जाता है और पति-पत्नी को विष्णु और लक्ष्मी का रूप। हिंदी में तलाक का कोई विकल्प ही नहीं है। तलाक व डाइवोर..

यह लड़ाई है अच्छाई और बुराई की - डॉ नीलम महेंद्र

भोपाल(विसंके). उच्चतम न्यायालय ने 9 जुलाई 2018 के अपने ताजा फैसले में 16 दिसंबर 2012 के निर्भया कांड के दोषियों की फाँसी की सजा को बरकरार रखते हुए उसे उम्र कैद में बदलने की उनकी अपील ठुकरा दी है।  दिल्ली का निर्भया कांड देश का वो कांड था जिसने पूर..

हिंदुत्व को कांग्रेसी उपहार: “भगवा आतंकवाद” के बाद “हिंदू पाकिस्तान” – प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके).विश्व के सुप्रसिद्ध कूटनीतिज्ञ, राजनयिक, शासक व ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि“इतिहास  पढ़िए ,इतिहास  प..

फसाद की जड़ धारा 370 अलगाववादियों का यह ‘सुरक्षा कवच’ कब तक?- नरेन्द्र सहगल

भोपाल(विसंके). एक विशेष समुदाय के तुष्टीकरण के लिए भारत के संविधान में जबरदस्ती डाली गई धारा 370 भारत की राष्ट्रीयता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और संघीय ढांचे का मजाक उड़ा रही है। अब तो यह धारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ध्येय वाक्य ‘सब का साथ - सब..

आज दिशाओं के बारे में बताना चाहूंगी कि, कौन सी दिशा कितनी महत्वपूर्ण है - अंशुल उपाध्याय

भोपाल(विसंके). बातो ही बातों में एक दिन मैंने अपने पिता जी से पूछ लिया की सूर्य पूर्व से निकलता है। तो क्या पूर्व दिशा ही सबसे बड़ी है चारो दिशाओं में?? तब पिता जी ने जो कहा वह बताती हूँ। उन्होंने कहा नहीं पूर्व सबसे बड़ी नहीं है मैंने पूछा क्यों उन्होंने क..

वेगड़ जी का जाना - प्रशांत पोळ

भोपाल(विसंके). १९८३ का दिसंबर या जनवरी का महीना. मेरे जिगरी दोस्त के बड़े भाई का विवाह था, भोपाल में. बाराती बन के हम भी गए थे. सुबह थोड़ा समय था, सोचा भारत भवन घूम के आते हैं. हम दो-तीन दोस्त भारत भवन में गए. वहां सैयद हैदर रझा जी के चित्रों की प्रदर्शनी..

केवल फाँसी की सजा से नही सामाजिक भय से रुकेगी दुष्कर्म की घटना! - कृष्णमोहन झा

भोपाल(विसंके). मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में बेटी बचाओ अभियान शुरू कर समूचे प्रदेश की बेटियों को यह भरोसा दिलाया था कि उनके शासन में बेटियों के सम्मान,सुरक्षा एवं उन्हें समानता का अधिकार प्रदान करने में कोई कसर बाकी नही रखी जाएग..

किसी मुस्लिम गड़रिये ने नहीं खोजी अमरनाथ गुफा- प्रवीण गुगनानी

भोपाल(विसंके). आजकल जबकि प्रतिवर्ष अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं पर मुस्लिम आतंकवादियों का ख़तरा मंडराता रहता है व यात्रियों पर घातक हमले भी होते रहते हैं तब ऐसे जहरीले वातावरण में एक झूठी मान्यता यह भी प्रायोजित कर दी गई है कि वर्ष 1850 में एक कश्मीर..

अमरनाथ यात्रा पर इस्लामी कहर का भय : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). हम लोकतांत्रिक देश में रहते हैं। हमारा संविधान प्रत्येक भारतवासी को कुछ मौलिक अधिकार देता है। यह अधिकार इस बात की घोषणा करते हैं कि सभी भारतीय एक समान हैं और उनके बीच कानून, धर्म, लिंग के आधार पर, लोक नियोजन के अवसरों में तथा अस्पृश्यता के ..

मैला प्रथा पर भारतीय संवेदनहीनता : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल(विसंके). जिस देश में छोटी-छोटी बातें भयंकर लड़ाई का स्वरूप ले लेती हों और अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल से जहां लोग एक-दूसरे को मारने से लेकर आत्महत्या तक करने के लिए प्रेरित हो उठते हों उस देश में यदि सिर पर मैला उठाने की प्रथा विद्यमान रहे और इसकी प..

कम्युनिस्टों को तानाशाह बताते थे डॉ. आंबेडकर

भोपाल(विसंके). यह कुछ वैसा ही है कि ‘ उल्टा चोर कोतवाल को डांटे ’ । पिछले कई दशकों से इस देश के कम्युनिस्ट संगठन व मार्क्सवादी बुद्धिजीवी स्वयं को बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का मानस-पुत्र दिखाने का प्रयास कर उन लाखों दलितों की आंखों में धूल झोंक..

आपातकाल : जब 'भारत माता की जय' कहना भी अपराध था - लोकेन्द्र सिंह

भोपाल(विसंके). आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय है। आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता का हनन ही नहीं किया गया, अपितु वैचारिक प्रतिद्वंदी एवं जनसामान्य पर अमानवीय अत्याचार भी किए गए। आपातकाल के विरुद्ध आवाज उठाने वाले लोगों को पकड़..

खूंटी सामूहिक बलात्कार के पीछे चर्च और नक्सलियों का खतरनाक गठजोड़ - लोकेन्द्र सिंह

भोपाल(विसंके). झारखंड के खूंटी जिले में पाँच महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं से सामूहिक बलात्कार और पुरुष कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट एवं उन्हें पेशाब पिलाने का अत्यंत घृणित कृत्य सामने आया है। यह बहुत दु:खद और डरावनी घटना है। पीडि़त महिलाएं एवं पुरुष अनुसूचित ..