आलेख

साईं बाबा:न पाथरी के न शिरडी के,वे तो सबके हैं

कृष्णमोहन झा/ महाराष्ट्र में जब से शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एवं कांग्रेस की महा विकास आघाडी सरकार के हाथों में सत्ता की बागडोर आई है, तब से रोज नए विवादों के जन्म लेने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब इन विवादों की पहुंच उन क्षेत्रों..

संविधान के सनातन स्तंभ और सेक्युलरिज्म का सियासत

        (डॉ अजय खेमरिया)      देश भर में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध  में लोग सड़कों पर संविधान की किताब,बाबासाहब अंबेडकर की तस्वीर और तिरंगा लेकर आंदोलन कर रहे है।इस दलील के साथ कि मौजूदा केंद्र सरकार ..

हमारे लिए भी कोई रजिस्टर बनाओ सरकार ताकि हमारी भी गिनती हो सके

  बिना किसी अभिवादन के इस पत्र को शुरु करने की हमारी धृष्टता को क्षमा करते हुए हमारी भी सुनो सरकार। माना कि हमारा नाम किसी रजिस्टर में दर्ज नहीं है। हम जिंदा भी हैं या नहीं, ये किसी को पता नहीं है। हमारा आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र या किसी भी दे..

ब्रिटिश साम्राज्यवाद से जुड़ी धुन का अंत, अब बीटिंग द रिट्रीट 2020 वंदे मातरम के साथ होगा समाप्त।

अनिमेश पांडेय इस बार का गणतन्त्र दिवस काफी अनोखा होने वाला है। यदि मीडिया के सूत्रों की माने तो इस वर्ष गणतन्त्र दिवस के पश्चात 29 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी के विजय चौक पर आयोजित होने वाले बीटिंग द रिट्रीट का समापन वन्दे मातरम के साथ होगा। रक्षा मंत्रालय के एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया से कहा, “बीटिंग द रिट्रीट समारोह में हर प्रकार की धुनों के साथ प्रयोग किया जाता है। इस साल समारोह ‘एबाइड विद मी’ की बजाय ‘वंदे मातरम’ के साथ समाप्त होगा”। इस निर्णय ..

असम तक आईएलपी का विस्तार बुरा विचार क्योंकि भारत में ही वीज़ा नहीं होना चाहिए

आर जगन्नाथन पिछली सदी में बांग्लादेशियों के अनियंत्रित प्रवासन से असम में उत्पन्न संवेदनशीलताओं को देखते हुए कहीं भारत गलत निर्णय न ले ले। संजातीय असमी समूहों द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र उनकी शंकाओं क..

भड़का हुआ मुसलमान- नकली नेताओं को नहीं, आरिफ मोहम्मद जैसों को सुनने का समय

विजय मनोहर तिवारी  आशुचित्र- मुसलमान पहले वोट बैंक बनाकर साठ साल तक इस्तेमाल किए गए। ऐसा करने वाले तब सत्ता में मजे ले रहे थे। अब उन्हें संख्या का पशुबल बनाकर सड़कों पर उतार दिया गया है। ऐसा करने वाले अब सत्ता से बेदखल हैं। मुसलमानों को अपनी इस ..

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ: राष्ट्रभाव और हमले

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर फिर एक बार राजनैतिक हमलों की मानों बाढ़ आ गई है। हमला करने वालों में लगभग सभी विपक्षी दल हैं। सामान्यतया राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के किसी पदाधिकारी का बयान आया तो हमलों का सिलसिला शुरु होता है। पिछले दिनों तब संघ प्रमुख मोहन जी..

बुनियादी ढाँचे के विकास को गति दे रही है केंद्र सरकार

भारत सरकार ने देश में बुनियादी ढाँचे को विकसित करने एवं देश के आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए वर्ष 2025 तक 103 लाख करोड़ रुपए का निवेश करने का निर्णय लिया है। इसके लिए हाल ही में देश में पहली बार एक “राष्ट्रीय..

कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार: नदीमर्ग में 70 साल की महिला से लेकर 2 साल के मासूम तक को मारी गोली

      - देवेश खंडेलवाल    क्रूरता की हद पार करते हुए एक दिव्यांग सहित 11 महिलाओं, 11 पुरुषों और 2 बच्चों पर बेहद नजदीक से गोलियाँ चलाई गई। पॉइंट ब्लेंक रेंज से हिन्दुओं के सिर में गोलियाँ मारी गई थी। आतंकी यही नहीं रुके उन्..

देश में ऊर्जा के क्षेत्र में हो रही है क्रांति

हाल ही में अन्तर्राष्ट्रीय ऊर्जा संस्थान ने एक समीक्षा प्रतिवेदन जारी किया है जिसमें बताया गया है कि भारत में  95 प्रतिशत लोगों के घरों में बिजली मुहैया कराई जा चुकी है और 98 प्रतिशत परिवारों की, खाना पकाने के लिए, स्वच्छ ईंधन तक पहुँच बन गई है। सा..

श्री अपारबल सिंह कुशवाह ठाकुर साहब ....हमारे बीच नही रहे 

भाद्रपद मास के मध्य में ८ अगस्त १९३८ को लहार रोड पर भिंड से २० की.मी. दूर स्थित ग्राम लहरोली में अपारवल सिंह जी उपाख्य ठाकुर साहब का जन्म हुआ ! पिताजी चार भाई थे ! एक भाई अविवाहित तो दूसरे निसंतान ! दूसरे नंबर के अविवाहित चन्दन सिंह ही परिवार के मुखिया ..

क्या मुस्लिम महिलाएँ और बच्चे अब विपक्ष का नया हथियार हैं?

सीएए को कानून बने एक माह से ऊपर हो चुका है लेकिन विपक्ष द्वारा इसका विरोध अनवरत जारी है। बल्कि गुजरते समय के साथ विपक्ष का यह विरोध "विरोध" की सीमाओं को लांघ कर हताशा और निराशा से होता हुआ अब विद्रोह का रूप अख्तियार कर चुका है। शाहीन बाग का धरना इसी बात..

केवल 70 वर्षों में इतना राष्ट्रद्रोह - संजय तिवारी

राष्ट्रद्रोह का ऐसा खुला खेल। केवल 70 वर्षों में। अब देश के विश्वविद्यालयों से भारत विरोध का ऐसा स्वर? आखिर भारत की यह कौन सी यात्रा है? कैसी पीढ़ी पैदा हो रही है और कौन इनको पैदा कर रहा है? ये बहके हुए नासमझ लोग तो नही हैं भाई? बहुत पढ़े लिखे हैं। डिग्रि..

शाहीनबाग के शिकारी- एक बहाने के सहारे आसमान में ऊँची उड़ान भरते और घात लगाते

विजय मनोहर तिवारी  जो दिखता है, वो बिकता है। दिखाऊ माल ही बिकाऊ माल है। शाहीनबाग दिख रहा है। शाहीनबाग बिक रहा है। एक महीना हो गया। शो हाऊसफुल है। एक समीक्षा में किसी परम ज्ञानी ने शाहीन का मतलब लिखा- “एक ऐसी चिड़िया जो बहुत ऊँचाई पर उड़ती है और ..

CAA ने कर दिया विपक्ष को पुनर्जीवित 

कृष्णमोहन झा इन दिनों नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष और विपक्ष में देशभर में रैलिया धरना प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियानों का जो सिलसिला चल रहा है, वह कब और किस बिंदु पर जाकर थमेगा, इस बारे में कुछ भी निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता है। इस नए कानून के विरोध में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के जल्द ही शांत हो जाने की सरकार की उम्मीदों पर पानी फिर गया तो मोदी सरकार और उसकी मुखिया पार्टी  भारतीय जनता पार्टी को यह चिंता सताने लगी है कि विपक्षी दल इस कानून को लेकर देशभर में भ्रम का माहौल निर्मित ..

देश के आर्थिक विकास में पर्यावरण का भी रखना होगा ध्यान

      - प्रह्लाद सबनानी    किसी भी देश में आर्थिक विकास और पर्यावरण में द्वन्द काफ़ी लम्बे समय से चला आ रहा है। तेज़ गति से हो रहे आर्थिक विकास से पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव अक्सर देखा गया है। विश्व में हो रहे जलवायु परिवर..

व्यक्तित्व निर्माण में सहायक सिद्ध होता है दान

     - डॉ नीलम महेंद्र    'जो हम देते हैं वो ही हम पाते हैं ' दान के विषय में हम सभी जानते हैं। दान, अर्थात देने का भाव, अर्पण करने की निष्काम भावना। भारत वो देश है जहाँ कर्ण ने अपने अंतिम समय में अपना सोने का दांत ही या..

युवा नायक स्वामी

       - लोकेन्द्र सिंह       महज ३९ साल की आयु में दुनिया का दिल जीतकर चले जाना आसान नहीं होता। निश्चिततौर पर ऐसा कोई असाधारण व्यक्ति ही कर सकता है। असाधारण होना नायक होने का पहला और नैसर्गिक गुण है। नायक प्र..

तान्हाजी एक कम प्रसिद्ध योद्धा की शौर्य गाथा

  -  डॉ कृपा शंकर चौबे   आम तौर पर मेरी फिल्मों के रिव्यू में विशेष रुचि नहीं है,किंतु इस फ़िल्म पर बात किया जाना आवश्यक है। भारतीय इतिहास साहसी योद्धाओं के पराक्रम का धधकता इस्पाती दस्तावेज है किंतु हमारी क्षुद्रता या सीमित समझ कहि..

कर्म और कर्तव्य

      - प्रतीक बाजपेई      भारतवर्ष को आज तक जितने भी महापुरुषों ने गौरवान्वित किया है, उनमें स्वामी विवेकानन्द जी का नाम सदा आदर से लिया जाता रहा है। कर्म, ज्ञान और भक्ति का त्रिवेणी संगम हमें उनके व्यक्तित्व में दे..

‘हिन्दीपन’ से मिलेगा हिंदी को सम्मान

  - लोकेन्द्र सिंह  भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है। बल्कि, इससे इतर भी बहुत कुछ है। भाषा की अपनी पहचान है और उस पहचान से उसे बोलने वाले की पहचान भी जुड़ी होती है। यही नहीं, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक भाषा का अपना संस्कार ह..

आधुनिक विश्व मे 47 संस्कृतियां थीं, 7 बची हैं, बाकी?- संजय तिवारी

यह मैं नही कह रहा। यूनेस्को के अध्ययन की रिपोर्ट है। जिसे आज सभ्य विश्व की संज्ञा दी जा रही है इसमें अभी कुछ दशक पहले तक 47 संस्कृतियां मौजूद थीं। आज बमुश्किल 7 बची हैं। इनमें से भी 4 बिल्कुल विलोप की अवस्था मे हैं। जब यह आलेख लिख रहा हूँ तो बहुत बेचैनी..

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर हमलों के मायने

     - रमेश शर्मा     यूं तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जब वे अस्तित्व में आया और उसने राष्ट्र एवं संस्कृति के समर्थन के प्रति अपने दायित्व घोषित किए तब से आज तक एक मानसिकता विशेष के निशाने पर रहा। इसके कारण दो रहे। एक तो य..

21वीं सदी में अभी तक भारत के 21 पड़ाव

आशीष चंदोरकर आशुचित्र- 2020 की शुरुआत से पहले देखें 21वीं सदी की उन 21 घटनाओं को जिन्होंने भारत की नियति को प्रभावित किया। “इतिहास उस बिंदु पर निर्मित होता है जहाँ स्मृति की त्रुटियाँ दस्तावेजों की अप्राप्यता से मेल खा जाती हैं।”, जूलिय..

  "नेताजी और आज़ाद हिन्द फ़ौज "

यह सुस्पष्ट है की भारतीय इतिहास की बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाओं को इतिहास में इतना श्रेय नहीं दिया गया, जिसके वे हक़दार हैं | साम्यवादी इतिहासकारों ने मौर्यों ,मुग़लों और अंग्रेज़ों को तो खूब गाया, परन्तु शक्तिशाली साम्राज्यों जैसे चोला, सातवाहन, चालुक्य, विज..

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में वर्तमान मकर संक्रांति

  -  नरेन्द्र सहगल तमसो मा ज्योतिर्गमय - धारा 370 का अंधकार समाप्त असतो मा सद्गमय - श्री राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त मृत्योर्मामृतम् गमय - नागरिकता संशोधन अधिनियम, मौत का साया समाप्त पर्व/त्य..

भोपाल में सीएए समर्थन रैली में लोगों का प्रश्न- आपने यह कैसा इंडिया डिस्कवर किया है?

    - विजय मनोहर तिवारी अब तक मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर झंडे-बैनर हाथ में लिए जो भी आते थे, हारफूल चढ़ाने या ज्ञापन सौंपने के लिए ही आया करते थे। पहली बार ऐसा हुआ कि वे इस शानदार प्रतिमा के सामने से सिर्फ नारे लग..

ननकाना साहिब में दिखा वहशत का रंग असल में सरहद की दोनों तरफ है

विजय मनोहर तिवारी  पाकिस्तान के ननकाना साहिब गुरुद्वारे के सामने जो कुछ हुआ, वह पूरी दुनिया के लिए एक धमकी है। उन वहशियों के सिर पर खून सवार था। वे खुलेआम धमका रहे थे कि वहाँ एक भी सिख को नहीं रहने देंगे। वहाँ गुरुद्वारा भी नहीं रहेगा। उसकी जगह मस्ज..

गरीबों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना मिशन मोड में

देशवासियों को अपना घर” का सपना पूरा करने के उद्देश्य से देश में प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने वर्ष 2022 तक सबको घर देने का वादा किया है। इस वादे को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से दिनांक 25 जून 2015 को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) ए..

नागरिकता के नाम पर मचा शोर मुस्लिम केंद्रित सेक्युलरिज्म के पराजय की खीज है

विजय मनोहर तिवारी  नागरिकता के सवाल पर मचे उत्पात से उपजी हर घटना 70 साल से ओढ़े हुए नकली सेक्युलरिज्म की पोल खोल रही है। हिंसा की हर सुर्खी इस बात का पर्दाफाश कर रही है कि किस तरह इस देश में मुस्लिम तुष्टिकरण को ही सेक्युलरिज्म का घातक पर्याय मान लि..

छूपा एजेंडा उजागर हुआ

 नरेंद्र सहगल देश को ये जानना बहुत जरूरी है कि जो मुसलमान ट्रिपल तलाक पर शांत रहा,धारा 370 पर शांत रहा,राम मंदिर पर शांत रहा वो नागरिक संशोधन बिल पर एकाएक आक्रमक क्यो हो गया ? असल मे इसकी वजह जानने के लिये हमें कुछ सालों पीछे जाना पड़ेगा। कुछ साल प..

भारत का स्वभाव धर्म है

2019 के लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद वामपंथी खेमे के कहे जाने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार ने मुझसे पूछा कि कांग्रेस की स्थिति ऐसी क्यों हुई? यह आकस्मिक प्रश्न था. मैंने प्रतिप्रश्न किया – कांग्रेस का पूरा नाम क्या है? वे इस प्रश्न के लिए तैयार नहीं थे. थ..

चमकौर का वह युद्ध जिसे कभी नहीं भुला सकता इतिहास

प्रो उमेश कुमार सिंह चमकौर के किले में गुरु गोविंद सिंह को दो तरफ़ से समाचार मिला, एक उनके साथियों से दूसरा जनता से कि, ‘ 27 दिसम्बर सन्‌ 1704 को दो बेटे जोरावर सिंह व फतेह सिंह किले की दीवार में जिंद..

अटल भूजल योजना आज की आवश्यकता

     - प्रह्लाद सबनानी     भारत में कृषि से सम्बंधित पानी की कुल माँग का 65 प्रतिशत और घरों में पानी की कुल माँग का 85 प्रतिशत हिस्सा भूजल प्रदान करता है। बढ़ती जनसंख्या, बढ़ता शहरीकरण और बढ़ते औद्योगीकरण के कारण भूज..

राधेश्याम शर्मा होने का मतलब"एक ध्येयनिष्ठ पत्रकार" संवेदनशील मनुष्य के रूप में याद किया जाएगा उन्हें-प्रो. संजय द्विवेदी

  इस साल का दिसंबर महीना जाते-जाते एक ऐसा आघात दे गया है जिसे हमारे जैसे तमाम लोग अरसे तक भूल नहीं पाएंगे। यह 28 दिसंबर,2019 का दिन था, शनिवार का दिन, इसी दिन शाम को हमारे प्रिय पत्रकार-संपादक और अभिभावक श्री राधेश्याम शर्मा ने पंचकूला में आखिरी सा..

उदयपुर को उद्धार की प्रतीक्षा, मध्य प्रदेश में उदयादित्य के बसाए शहर की हैरिटेज वॉक

विजय मनोहर तिवारी मैं हर बार उदयपुर में उस संकरी गली से मंदिर जाकर लौट आता था। हमेशा यह सोचता हुआ कि इस बस्ती में यह हीरा रखा हुआ है लेकिन कोई हीरे को घूरे पर सजाने की कला हमसे सीखे। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से पूरे 150 किलोमीटर दूर गंज बासौदा से आगे..

कैसे हुआ अंग्रेजी केलेन्डर के 12 महीनों का नामकरण

नकली कैलेण्डर के अनुसार नए साल पर, फ़ालतू का हंगामा करने के बजाये, पूर्णरूप से वैज्ञानिक और भारतीय-कैलेण्डर (विक्रम संवत) के अनुसार आने वाले चैत्र वर्ष-प्रतिपदा पर, समाज उपयोगी सेवाकार्य करते हुए नवबर्ष का स्वागत करें...!!   जनवरी : रोमन देवता 'जे..

आग मत लगाइए, यह 1947 का भारत नही है - संजय तिवारी

विपक्ष यह नही समझ पा रहा है कि यह भारत वह नही है जो 1947 में था। नागरिकता कानून को आपके कहने भर से देश काला कानून नही मान लेगा। आप जिस तरह अपनी राजनीति को जे पी आंदोलन की तरह बनाने की जुगत में है वह संभव नहीं। क्योंकि आप की जमात के परिसर भी अब बहुत कुछ ..

तनाव है तो होने दे, इसमें बुरा क्या है?  

स्ट्रेस यानी तनाव।  पहले इसके बारे में यदा कदा ही सुनने को मिलता था। लेकिन आज भारत समेत सम्पूर्ण विश्व के लगभग सभी देशों में यह किस कदर तेज़ी से फैलता जा रहा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज हर जगह स्ट्रेस मैनेजमेंट अर्थात ..

भारत की नैतिक जिम्मेदारी है कि विस्थापितों को सम्मान और गर्व के साथ जीवन जीने का अधिकार मिले

      -  देवेश खंडेलवाल    नागरिकता संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित होने बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के पश्चात कानून बन गया है. अब पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक रूप से प्रताड़ित होकर आए अल्पसंख..

नागरिकता संशोधन अधिनियम बनाम गढ़े गए विवाद

दुनिया में हर विवाद का हल व समस्या का समाधान है. परन्तु गढ़े गए विवादों का जब तक निपटान होता है, तब तक बहुत अनर्थ हो चुका होता है और सिवाए पछतावे के कुछ हाथ नहीं लगता. नागरिकता सन्शोधन अधिनियम पर पैदा हुए विवाद को भी इसी श्रेणी में शामिल किया जा सकता है..

इन्हें चिंदियों में हिंदुस्तान चाहिए!

        -जयराम शुक्ल       अरुंधती राय को कौन नहीं जानता? चिंदियों का देवता(गाड आफ स्माल थिंग) नामक उपन्यास के लिए इन्हें बुकर पुरस्कार मिला है। इस नाते वे अंर्तराष्ट्रीय बौद्धिक व्यक्तित्व हैं। अभी हाल ही में..

देश के आर्थिक विकास में सुधार के दिखने लगे संकेत

        प्रह्लाद सबनानी    केंद्र सरकार ने पिछले 5 माह के दौरान देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि दर तेज़ करने के उद्देश्य से कई उपायों की घोषणा की है। केंद्र सरकार के आर्थिक विकास सम्बंधी इन उपायों का असर होने लगा है क्योंक..

हमारे जीवन में तत्व को कसने की कसौटी है – शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज

 श्रद्धेय शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती महाराज जी ने कहा कि हमारे पास पांच गुण, ज्ञान इंद्री, तत्व हैं. हमारे जीवन में तत्व को कसने की कसौटी है. शंकराचार्य जी चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्..

कभी हार न मानने वाले प्रखर वक्ता थे अटल जी

      हितेश शंकर    भारत की मिट्टी में जन्म लेने वाले सौभाग्यशाली राजनेताओं में ऐसे बिरले ही हैं जो अपनी कला, संस्कृति और साहित्य से निरंतर जुड़े रहकर अपनी राजनीति के चक्रव्यूहों के बीच भी अपनी लेखनी को विराम नहीं देते। उदारमना..

जिनके व्यक्तित्व की कोई थाह नहीं

        जन्मदिन विशेष/जयराम शुक्ल    आज की उथली राजनीति और हल्के नेताओं के आचरण के बरक्स देखें तो अटलबिहारी बाजपेयी के व्यक्तित्व की थाह का आंकलन कर पाना बड़े से बड़े प्रेक्षक, विश्लेषक और समालोचक के बूते की बात नहीं। बाजप..

भारत में"मतदान व्यवहार "को परिपक्वता देता झारखंड का जनादेश

           कैडर के मन की बात को भी समझने  की जरूरत   (डॉ अजय खेमरिया)   अबकी बार 65 पार झारखंड में,हरियाणा और छत्तीसगढ़ में 75 पार, मप्र में 200 पार,राजस्थान में 150 पार, महाराष्ट्र में 200 पार ।यह नारे बीजे..

25 दिसंबर का न तो यीशु से कोई लेना देना है और न ही संता क्‍लॉज से । - संजय तिवारी

कितने आश्चर्य की बात है कि भारत में कुछ अति बुद्धिजीवी राम के अस्तित्व पर सवाल करते हैं तो बहुत से लोग उसे मान भी लेते हैं, यहां तक कि इस देश पर शासन करने वाले कुछ राजनीतिक दल भी । किन्तु 25 दिसंबर ईसा का जन्मदिन कैसे माना जाता है, इस पर कोई चर्चा भी नह..

फिर से लौट आओ अटल जी..

  इन्द्रभूषण कुमार     काल के कपाल पर लिखने और मिटाने वाला, हिम्मत और चुनौतियों के बादलों में विजय का सूरज उगाने वाला। जो न हार से कभी विचलित होता था न जीत में दंभ भरत था। विषम परिस्थितियों में भी जिसका न कभी विश्वास डिगा न कभी आत्मविश्वास की डोर कमजोर हुई। सरकार में रहे तो भी और सरकार में नहीं रहे तब भी सदन में सर्वप्रिय नेता और प्रखर वक्ता के रुप में सबके दिलों पर राज करने वाले अजातशत्रु अटल जी की कमी आज बहुत अखर रही है। उन्होंने जी भर के जिया, पचास साल तक सांसद रहे, तीन ..

राष्ट्र का सांस्कृतिक एकात्म

     -  जयराम शुक्ल     राष्ट्र को लेकर पं.दीनदयाल उपाध्याय के विचार पण्डित दीनदयाल उपाध्याय स्वतंत्र भारत के तेजस्वी, तपस्वी व यशस्वी चिन्तकों में से एक हैं। उनके चिन्तन के मूल में लोकमंगल और राष्ट्र का कल्याण सन्न..

सरफ़रोशी की तमन्ना: स्वतंत्रता सेनानी रामप्रसाद बिस्मिल की अनकही कहानी!

“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-कातिल में है।” भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ये पंक्तियाँ सेनानियों का मशहूर नारा बनीं। 1921 में बिस्मिल अज़ीमाबादी की लिखी इन पंक्तियों को जिस व्यक्ति ने अमर बना दि..

पाकिस्तान की रिंकल कुमारी के आंसू क्यों नहीं दिखते…!!!!!

पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भागकर भारत आने वाले हिन्दुओं, पारसी, सिक्खों आदि के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक की आवश्यकता क्यों है, इसे समझने के लिए लाखों पीड़ितों की व्यथित करने वाली आपबीतियां हैं. इनमें से एक कहानी है – इस्लामी रिपब्लिक ..

मरीचझापी जैसी घटनाओं से आहत भारतीयता पर मरहम है नागरिकता संशोधन विधेयक

विकास सारस्वत - वर्ष 1979, जनवरी का महीना था। पश्चिम बंगाल के दलदली सुंदरबन डेल्टा में मरीचझापी नामक द्वीप पर बांग्लादेश से भागे करीब 40,000 शरणार्थी एकत्रित हो चुके थे। मुख्यतः नामशूद्र दलित हिंदुओं का यह समूह उस महापलायन के क्रम में छोटी-सी एक कड़ी थी ..

चमकौर कुछ कह रहा है जो हर भारतीय को ज्ञात होना चाहिए

आज 22 दिसंबर है। यह कोई नई बात नहीं है। हर साल आता है। इसमें नया क्या है? नया कुछ नहीं है। लेकिन यह भारत के इतिहास का एक बेहद खास दिन है। ऐसा दिन जो हमारी स्मृतियों में सदा जीवंत होना चाहिए। एक ऐसे दुखद प्रसंग का दिन, जिसने भारत को भारत होने के अर्थ दिए..

जनमानस में जानकारी का आभाव बना विपक्ष का हथियार

        - डॉ नीलम महेंद्र        नागरिकता संशोधन कानून बनने के बाद से ही देश के कुछ हिस्सों में इस कानून के विरोध के नाम पर जो हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं वो अब गंभीर चिंता ही नहीं चिंतन का भी विषय बन गए है..

भारत में अल्पसंख्यकवाद को क्यों जिंदा रखना चाहते है वामपंथी

      (डॉ अजय खेमरिया)      रामचन्द्र गुहा और अन्य लेखकों को विरोध प्रदर्शन करते समय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया इसे लेकर वामपंथी विचारक और समर्थक सरकार को गरिया रहे है।इस बीच सोशल मिडिया पर ऐसे तमाम वीडियो जारी हुए है जिनमें नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने हिंसक रुख अख्तियार करते हुए पुलिसकर्मियों पर खूनी हमले किये है ।सरकारी सम्पति को नुकसान पहुचाया है।लेकिन किसी वामपंथी और जनवादी लेखक ने इस तरह के हिंसक कृत्यों की कोई निंदा नही की है।सवाल ..

गोवा स्वतंत्रता संग्राम के अग्रिम मोर्चे पर संघ

 -    नरेन्द्र सहगल    अपने देश पर आने वाली प्रत्येक विपत्ति को संघ ने एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया हैI ‘संघ पीछे और ध्येय आगे’ के सिद्धांत पर चलते हुए अपने राष्ट्र के लिए प्रत्येक प्रकार के बलिदान देने वाले सं..

बॉरिस जॉनसन की जीत के दक्षिणपंथी निहितार्थ

 डॉ अजय खेमरिया     नागरिकता संशोधन कानून के शोर शराबे के बीच एक दूसरी खबर भी भारत में चर्चा का विषय है , ब्रिटिश संसद के चुनाव में बोरिस जॉनसन  का प्रधानमंत्री चुना जाना।जॉनसन ब्रिटेन की कंजरवेटिव पार्टी के उम्मीदवार थे उन्होंने निचले सदन की 650 सीटों में से 363 सीट जीतकर लेबर पार्टी के जेरेमी कार्बिन को तगड़ी शिकस्त दी है।भारत के लिये बोरिस जॉनसन का राजनयिक महत्व अपनी जगह मोदी के साथ उनके घोषित रिश्तों को लेकर तो है ही लेकिन इससे बड़ा सवाल भारत के उन बुद्धिजीवियों के लिये बहुत ..

किसका है देश, हम किसके लिए मरें!

-जयराम शुक्ल   इस साल का सोलह दिसम्बर वीर जवानों के पराक्रम और बलिदान को हमने भोपाल के शौर्य स्मारक में दिए जलाकर और रात को रवीन्द्र भवन में कविताएं सुनते हुए मनाया। मानें तो यह दिन देश के लिए उतना ही खास है जितना छब्बीस जनवरी, पंद्रह अगस्त। 1971 में इसी दिन हमारी फौज ने ढाँका में 96000 पाकिस्तानी सैनिकों को घुटनों और टखनों के बल समर्पण के लिए विवश किया था। एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र बांग्लादेश को जन्म दिया। यह विश्व के सैन्य इतिहास की दुर्लभतम घटना है। अपने वीर जवानों के इस अप्रतिम शौर्य ..

नागरिकता संशोधन विधेयक – 1947 का कार्य 2019 में पूर्ण हुआ

अंततः देश विभाजन के तुरंत बाद किया जाने वाला बहू प्रतीक्षित व प्राकृतिक न्याय वाला कार्य संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होने के साथ अब पूर्ण हुआ. चाणक्य ने कहा था कि ऋण, शत्रु और रोग को समय रहते ही समाप्त कर देना चाहिए. जब तक शरीर स्वस्थ और आपके ..

विश्व व्यापी आर्थिक मंदी और हम

      राजेश पाठक    पिछले  दिनों एक लेख पढ़ने में आया जो कि हाल के दिनों में मंद पड़ती देश की आर्थिक-वृद्धि पर था. अन्य कारणों के साथ इसका एक कारण ये बताया कि पिछले कुछ वर्षों में सड़क, बिजली व  दूरसंचार के ताने बाने ने..

केब – 1947 का कार्य 2019 मे हुआ पूर्ण

   प्रवीण गुगनानी    अंततः देश विभाजन के तुरंत बाद किया जाने वाला बहू प्रतीक्षित व प्राकृतिक न्याय वाला कार्य अब पूर्ण हुआ और संसद ने नागरिकता संशोधन बिल पारित कर दिया।  चाणक्य ने कहा था कि ऋण, शत्रु और रोग को समय रहते ही समाप्..

भारत के भाल पर उभरे चंद्र की स्तुति का अनुभव- विजय मनोहर तिवारी

मध्यप्रदेश के सागर में आयोजित हो रहा अद्वैत उत्सव       यह विश्वविद्यालयों में होने वाले सेमिनारों और कार्यशालाओं से अलग आभा का आयोजन है। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी विश्वविद्यालय में भारत की सनातन ज्ञान परंपरा के गुरुकुलों के आचार्य और..

नागरिकता विधेयक का विरोध क्यों?

  सुरेश हिन्दुस्थानी पड़ौसी देशों में धार्मिक हिंसा के शिकार होने वाले गैर मुस्लिम नागरिकों को भारत की नागरिकता देने वाले नागरिकता विधयेक से बाहर करने वाले पर वोट बैंक की स्वार्थी राजनीति करने वाले राजनीतिक दल इसके विरोध में आते जा रहे हैं। कांग्रेस ने खुले रुप में इसका विरोध कर रही है, वहीं दूसरी ओर नागरिकता विधेयक को लेकर बहुत बड़े भ्रम की स्थिति भी निर्मित करने का खेल भी चल रहा है। कांग्रेस और नागरिकता विधेयक का विरोध करने वाले अन्य दल इसे अल्पसंख्यकों के विरोध में मानकर प्रचारित कर रहे ..

अब निदान की, समाधान की राह निकली है

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार निरंतर देश व समाज हित में निर्णय ले रही है. तीन तलाक की बर्बरता और अनुच्छेद 370 के अन्याय का उपचार करने के बाद जिस तरह संसद के दूसरे ही सत्र में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर सरकार आगे बढ़ी, उससे सरकार में जनता का विश्वास..

प्रत्येक परिवार गाय का रखवाला बन जाए तो देश में आमूल परिवर्तन होंगे – डॉ. मोहन भागवत

पुणे (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि “अगर प्रत्येक परिवार गाय का रखवाला बन जाए तो देश में आमूल परिवर्तन होंगे। सारा समाज जागृत होगा। समाज की भावना जागे तो मनुष्य का जीवन ही बदल जाएगा। भारतीय संस्कृति ने ..

राष्ट्रीय कलंक का परिमार्जन

भारत में विधर्मी आक्रमणकारियों ने बड़ी संख्या में हिन्दू मन्दिरों का विध्वंस किया। स्वतन्त्रता के बाद सरकार ने मुस्लिम वोटों के लालच में ऐसी मस्जिदों, मजारों आदि को बना रहने दिया। इनमें से श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर (अयोध्या), श्रीकृष्ण जन्मभूमि (मथुरा) और क..

स्वदेशी रक्षा तकनीक को सेना से मिल रहा प्रोत्साहन, ‘मेक इन इंडिया’ आ सकता है काम

प्रमोद जोशी  गत 19 सितंबर को बेंगलुरु के एचएएल विमान पत्तन से स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस पर उड़ान भरने के बाद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अगले एक दशक में यानी 2029-30 तक भारतीय सुरक्षा बलों के पास उपलब्ध तकनीक का 75 प्रतिशत भाग स्वदेश..

मिशनरी विद्वानों के परकोटे में कैद अंबेडकर का राष्ट्रीय दर्शन

     (डॉ अजय खेमरिया)    क्या डॉ. बी.आर. अंबेडकर सिर्फ दलित नेता थे ? और थोड़ा सुने तो भारत के संविधान के निर्माता। सरकारी इश्तहारों और तथाकथित दलित विमर्श की प्रतिध्वनि इस शख्स को एक लौह आवरण में कैद करती जान पड़ती है. इस आवर..

नागरिकता संशोधन विधेयक – ‘वोट बैंक’ के सौदागरों को दर-दर भटक रहे हिन्दुओं को मिल रही राहत स्वीकार नहीं…..!

 प्रशांत बाजपई 15 अगस्त, 1947 के दिन तक पाकिस्तान में हिन्दुओं की आबादी उसकी कुल आबादी का 11 प्रतिशत थी, जो अब 2 प्रतिशत से कम है. बांग्लादेश जो उस समय पूर्वी पाकिस्तान था, वहां हिन्दुओं की आबादी कुल आबादी का 28 प्रतिशत थी, जो आज 8 प्रतिशत है. आखिर,..

प्याज की कीमत बढ़ने के क्या रहे कारण, मांग-आपूर्ति ताकतों में फँसा फसल का मूल्य

एम. आर. सुब्रमणि प्याज की बढ़ती कीमत बुधवार (4 दिसंबर) को संसद चर्चा का भी विषय बनी। लोकसभा में एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार पर बढ़ते दामों के लिए प्रश्न उठाया जिसके उत्तर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि मूल्यों को काबू में करने के लि..

भारतीय स्थापत्य शास्त्र

–  प्रशांत पोळ एक प्रश्न मैं कई बार अलग अलग मंचों से पूछता हूँ, और दुर्भाग्य से लगभग नब्बे प्रतिशत इसका उत्तर नहीं मिलता है, या फिर गलत मिलता है. प्रश्न है – ऐसा कौनसा देश है, जिसके राष्ट्रध्वज पर हिन्दू मंदिर है…? ‘विश्व क..

भारतीय सामाजिकता का नया समय

 प्रो. संजय द्विवेदी हमारे सामाजिक विमर्श में इन दिनों भारतीयता और उसकी पहचान को लेकर बहुत बातचीत हो रही है। वर्तमान समय ‘भारतीय अस्मिता’ के जागरण का समय है। यह ‘भारतीयता के पुर्नजागरण’ का भी समय है। ..

शुभ्र बंगाल मे संघ पर होते सतत हमले

   प्रवीण गुगनानी    बंगाल मे जैसे श्रंखलाबद्ध राजनैतिक वध किये जा रहें हैं वैसे तो केवल अंग्रेजों के शासनकाल मे ही कभी देखें गए थे। अंग्रेजों के समय व विभाजन के समय मुस्लिम पक्ष द्वारा घोषित डायरेक्ट एक्शन डे जैसे वातावरण को छोड़ द..

राक्षस फाँसी से भी कहाँ डरते हैं!

       -जयराम शुक्ल       हैदराबाद की घटना के बाद देशभर में एक बार फिर भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा है। सात साल पहले इसी दिसम्बर में दिल्ली के निर्भया कांड को लेकर गुस्से का ऐसा प्रकटीकरण हुआ था। इन सात वर्षों में..

आधीदुनिया के इस तेवर को प्रणाम्

  जयराम शुक्ल    हम अतीतजीवी हैं।  हर सामाजिक बदलाव को विद्रूप बताते हुए उस पर नाहक ही लट्ठ लेकर पिल पड़ते हैं। अक्सर सुनते हैं कि हमारा जमाना कितना अच्छा था। यहां तक कि लोग अँग्रजों और राजशाही के जमाने के गुन गाने लगते हैं। आज जो ..

कर्नाटक की राह पर महाराष्ट्र

       सुरेश हिंदुस्थानी      महाराष्ट्र में सरकार बनाने की लम्बी कवायद के बाद आखिरकार शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार का गठन हो चुका है। इस सरकार को राजनीति के ऐसे दो ध्रुवों का जबरदस्ती मिलन कहा ज..

भोपाल गैस त्रासदी के 35 साल : जब लाशों के सामने कब्रिस्तान और श्मशान की जमीं कम पड़ गयी

    - इंद्रभूषण मिश्र     भोपाल गैस त्रासदी के 35 साल पूरे हो गए हैं। इतने सालों बाद भी यहां सैकड़ों परिवारों के जख्म आज भी हरे हैं। आज भी लोग उस काली रात के मंजर को याद कर कांप जाते हैं। मंजर कुछ ऐसा था कि शहर दर्द के मारे चीखना चाहता था, पर हलक से आवाज नहीं निकल रही थी। लोग भागना चाहते थे पर भाग नहीं पा रहे थे। जब तक की लोगों को माजरा समझ आता तब तक तक अस्पताल के अस्पताल लाशों से पट चुके थे। जिधर नजर जाती उधर लाश ही लाश नजर आती थी। भोपाल के कब्रिस्तानों और श्मशानों ने ..

भारतीय पुलिस : गुलामी के अवशेष अब नही रहेंगे

     (डॉ अजय खेमरिया)    गृहमंत्री अमित शाह ने भारत की मौजूदा आईपीसी और सीआरपीसी में आमूल चूल परिवर्तन के मसौदे पर काम करना शुरू कर दिया है।लख़नऊ में आयोजित47वी पुलिस साइंस कांग्रेस के समापन समारोह में उन्होंने इस आशय की घोषणा ..

भारत के 'स्व' से जुड़े अर्थतंत्र के आग्रही श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी

देशभर में प्रख्यात आर्थिक चिंतक स्व. दत्तोपंत ठेंगड़ी के जन्मशती समारोहों का सिलसिला शुरू होने को था कि एक बड़ी खबर ने सबका ध्यान खींचा-भारत ने व्यापक आर्थिक क्षेत्रीय साझेदारी समझौते (आरसेप) में शामिल न होने का फैसला किया। दोनों खबरों का साझा संदर्भ ब..

समान नागरिक आचार संहिता : आज की जरूरत

देश में समान नागरिक आचार संहिता का मुद्दा चर्चा का विषय है। समय—समय पर अनेक टी.वी. चैनलों पर बहस भी होती रहती है। कुछ लोग इसे लागू करने की बात कह रहे हैं तो कुछ विरोध में खड़े हैं। वर्तमान सरकार ने भी हालही में कानून आयोग को इस संहिता को लागू करने ..

सैफ़ुद्दीन सोज़ की किताब के बहाने , कश्मीर समस्या की जड़ की खोज-डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

जून के अंतिम दिनों में सोनिया कांग्रेस के एक बड़े नेता सैफ़ुद्दीन सोज़ की जम्मू कश्मीर को लेकर लिखी गई एक नई किताब Kashmir- Glimpses of History and the story of struggle  की चर्चा अख़बारों और टैलीविजन में शुरु हो गई थी । चर्चा को हवा देने के लिए ..

योद्धा, युद्ध पुकार और देवी

कमलप्रीत सिंह गिल आशुचित्र- देवी का आह्वान करके शूरवीर राजा और साहसी सैनिक भारतीय सभ्यता की रक्षा करते आए हैं और विजयी बनकर उभरे हैं। सृजन की मौलिक शक्ति मानी जाने वाली देवी की पूजा की परंपरा भारतीय उपमहाद्वीप पर तब से है जब से यहाँ सभ्यता की शुरुआ..

राजनीतिक सुचिता की पुरातत्वीय संपदा थे कैलाश जोशी जी

               श्रद्धांजलि/जयराम शुक्ल    आज जब राजनीति में सुचिता रुई के धूहे में सुई ढूंढने जैसा है ऐसे में कैलाश जोशी जी का जाना लोकतंत्र के कलेजे में हूक देने वाला है। मनुष्य उम्रजयी तो नहीं बन..

मुस्लिम लेखकों ने भी लिखा, अयोध्या में मंदिर तोड़ मस्जिद बनाई गई थी

श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का मुस्लिमों सहित सारे देश ने स्वागत किया है, लेकिन स्वयं को मुस्लिमों का प्रतिनिधि कहने वाले आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने घोषणा की है कि वो न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा. दशकों से चल ..

भोपाल: पहले पॉकेट मनी से और अब सैलरी से, हर रविवार पौधे लगाते हैं ये बैंकर, कई बन चुके हैं पेड़!

यदि आप दिल से कुछ करना चाहें तो तमाम कामों के बीच उसके लिए समय निकाल ही लेते हैं। भोपाल के शांतनु परिहार और पूनम मिश्रा इसका सटीक उदाहरण हैं। दोनों पेशे से बैंकर हैं, प्रोफेशनल लाइफ का दबाव इतना ज्यादा रहता है कि कभी-कभी अपने बारे में सोचने का भी वक्त न..

पूर्वोत्तर भारत के 'शिवाजी' वीर योद्धा लचित बरफूकन

 मुगल आक्रांताओं से पूर्वोत्तर भारत की रक्षा करने वाले वीर योद्धा लचित बरफूकन का जीवन और व्यक्तित्व शौर्य, साहस, स्वाभिमान, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का पर्याय है। इसलिए उन्हें पूर्वोत्तर भारत का 'शिवाजी' कहा जाता है   भारतवर्ष का इतिहास लचित बरफूकन जैसे वीर सपूतों के शौर्य और वीरता का महा आख्यान है। प्रसिद्ध इतिहासकार सूर्यकुमार भुइयां ने उन्हें पूर्वोत्तर भारत का 'शिवाजी' माना है। बरफूकन ने पूर्वोत्तर भारत में वही स्वातंत्र्य-ज्वाला जलाई, जो मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध दक्षिण भारत में ..

16 वर्षों तक सरपंच रहकर गाँव को प्राकृतिक संपदा लौटाने वाले की अनुकरणीय कहानी

विजय मनोहर तिवारी विदिशा जिले में कुल्हार नामक एक गाँव है। यह एक छोटा सा रेलवे स्टेशन है, जिसके आसपास 1,000-1,500 साल पुराने ऐतिहासिक स्मारकों की विरासत है। लेकिन गाँव की आधुनिक विरासत है- हरे-भरे दो घने जंगल और छह बड़े तालाब। 68 साल के वीएम शर..

क्या अब राजनीति की परिभाषा बदल गई ?

    -  डॉ नीलम महेंद्र    यह बात सही है कि राजनीति में अप्रत्याशित और असंभव कुछ नहीं होता, स्थाई दोस्ती या दुश्मनी जैसी कोई चीज़ नहीं होती हाँ लेकिन विचारधारा या फिर पार्टी लाइन जैसी कोई चीज़ जरूर हुआ करती थी।  कुछ समय..

संविधान की सनातन स्वरलहरियों के बीच 70 साल का सफर

  संविधान में संजोए गए 22 चित्रों का क्या महत्व है हमारे लिये?        (26 नबम्बर1949) हम भारतीयों का संविधान बनकर तैयार हुआ था।आज 70 बर्ष बाद हमारा संविधान क्या अपनी उस मौलिक प्रतिबद्धता की ओर उन्मुख हो रहा है जिसे इसके रचन..

जानें क्या है BHU में विरोध का पूरा मामला

     -  श्रीनिवास वैद्य    बनारस हिंदू विश्व विद्यालय के‌ संस्कृत विभाग में‌  सहायक प्राध्यापक पद पर डॉ ‌.फिरोज़ खान नामक प्राध्यापक की नियुक्ती कों‌ लेकर‌ विवाद छ़िडा है। इस नियुक्ती के&zwnj..

ब्यूरोक्रेटिक एक्टिविज्म के विरुद्ध मप्र में डॉक्टरों का सत्याग्रह कितना तार्किक

     सांकेतिक चित्र         (डॉ अजय खेमरिया)     मप्र में सरकारी औऱ गैर सरकारी डॉक्टर्स इन दिनों ब्यूरोक्रेसी के विरुद्ध लामबंद हो रहे है लगभग एक दर्जन चिकित्सकीय संगठनों ने ग्वालियर के गजराराजा ..

 सांप्रदायिक सौहाद्र को चुनौती  - अयोध्या पर पुनर्विचार याचिका  

" हो जाये ग़र शाहे ख़ुरासान का ईशारा सजदा न करूं हिन्द की नापाक ज़मीं पर " अल्लामा इकबाल की ये पंक्तियां और यह समय जबकि मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने तय किया है कि वह जन्मभूमि अयोध्या पर सर्वोच्च निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका लगाएगी; ये दो सर्वाधिक, सट..

भारत की समृद्ध खाद्य संस्कृति

     -  प्रशांत पोळ     समूचे विश्व को मोह लेने वाला ‘डोसा’ अथवा ‘मसाला डोसा’ (दोसा) नामक पदार्थ कितना पुराना है..? इस बारे में निश्चित रूप से कोई नहीं बता सकता. परन्तु लगभग दो हजार वर्ष से अध..

रॉफेल मुद्दे पर फिर बेपरदा हुई कांग्रेस

   - सुरेश हिन्दुस्थानी   पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से मुद्दा बनाए गए रॉफेल मामले पर एक बार फिर से कांग्रेस के नीचे से जमीन निकल गई है। हालांकि पूर्व में इस बारे में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का बयान झूठा सा..

अयोध्या निर्णय :अवसर है एक भारत श्रेष्ठ भारत के उद्घोष का

    गौरी, ग़जनी की जगह कलाम, और हमीद क्यों नही मेरे मुल्क की पहचान!      (डा अजय खेमरिया)     अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय भारत के हिन्दू और मुसलमानों के लिए एक ऐसा अवसर है जहां से वे राम और इम..

वनवासी संस्कृति में गड़ी है हमारी गर्भनाल!

     विमर्श/जयराम शुक्ल   एक पत्रकार के नाते जल-जंगल-जमीन और जन पर लिखना-पढ़ना मुझे हमेशा से सुभीता रहा है। वनवासियों पर मेरी समझ किताबों के जरिए नहीं बन पाई, इस समाज को आंखों से जितना देखा और उनके बीच जाकर जो जाना बस उतना ही ..

वनवासी संस्कृति में गड़ी है हमारी गर्भनाल!

  विमर्श/जयराम शुक्ल   एक पत्रकार के नाते जल-जंगल-जमीन और जन पर लिखना-पढ़ना मुझे हमेशा से सुभीता रहा है। वनवासियों पर मेरी समझ किताबों के जरिए नहीं बन पाई, इस समाज को आंखों से जितना देखा और उनके बीच जाकर जो जाना बस उतना ही ज्ञान..

 देश के निर्यात को एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य  

वर्ष 2025 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु देश के निर्यात को भी वर्ष 2018 के 50,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर वर्ष 2025 तक 1 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का करने का ल..