आलेख

रामनाथ कोविंद : कम्युनिस्टों के दलित प्रेम का पर्दाफाश-लोकेन्द्र सिंह

बिहार  के राज्यपाल रामनाथ कोविंद के नाम को सामने कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी ने एकबार फिर से सबको चौंका दिया है। सबके कयास धरे रह गए। भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक के पहले रामनाथ कोविंद का नाम किसी तरह की चर्चा में भी नहीं था। लेकिन, जब भाजपा की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद के नाम की घोषणा की गई, तब विपक्ष मुश्किल में पड़ गया। अपने फैसले से सबको चौंकाने ..

देश को आर्थ‍िक नुकसान पहुँचाने वालों पर व्यर्थ की समय बर्बादी : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

अच्छे दिन आने की आस और सब का साथ-सबका विकास का लोकलुभावन नारे ने देखते ही देखते केंद्र में कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी पार्टियों को सत्ता से बाहर और भारतीय जनता पार्टी को सत्ता के सिंहासन पर विराजमान कर दिया था। इसके बाद समय अपनी रफ्तार से चलता रहा और अब तीन साल बीत चुके हैं। यूं, इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश जिस तेजी से आर्थ‍िक, समाजिक, संरचनात्मक, ढांचागत विकास की ओर सरपट दौड़ा है तथा निरंतर आगे की ओर गतिशील है, उतना वह पहले ..

"सेना को बदनाम करने का षड्यंत्र" कम्युनिस्टों का एजेंडा, सेना को करो बदनाम-लोकेन्द्र सिंह

भारतीय सेना सदैव से कम्युनिस्टों के निशाने पर रही है। सेना का अपमान करना और उसकी छवि खराब करना, इनका एक प्रमुख एजेंडा है। यह पहली बार नहीं है, जब एक कम्युनिस्ट लेखक ने भारतीय सेना के विरुद्ध लेख लिखा हो। पश्चिम बंगाल के कम्युनिस्ट लेखक पार्थ चटर्जी ने स..

कांग्रेस का एक ही गलती को बार-बार दोहराना ? डॉ. मयंक चतुर्वेदी

यह सर्वविदित है कि जब देश ब्रिटिश संसद द्वारा पारित भारतीय स्वातंत्र्य अधिनियम के प्रावधानों के अन्तर्गत आजाद हो रहा था तो तत्कालीन ब्रिटिश सत्ता के आधीन भारत को दो भागों में विभाजित करके दोनों भागों को डोमिनियन स्टेट्स प्रदान किया गया था। जिनमें से एक भारत था तो दूसरे का नाम पाकिस्तान था । देशभर की देशी रियासतों को उसी अधिनियम में निहित प्रावधानों के तहत यह अधिकार दिया गया था कि वे दोनों डोमिनियनों में से जिसके साथ जाना चाहें जा सकती हैं या अपने को स्वतंत्र भी रख सखती हैं । उस वक्‍त कुछ को छोड़कर ..

विरोध प्रदर्शन या क्रूरता का प्रकटीकरण-लोकेन्द्र सिंह

पशुओं को क्रूरता से बचाने के लिए केंद्र सरकार के आदेश का विरोध जिस तरह केरल में किया गया, कोई भी भला मनुष्य उसे विरोध प्रदर्शन नहीं कह सकता। यह सरासर क्रूरता का प्रदर्शन था। इसे अमानवीय और राक्षसी प्रवृत्ति का प्रकटीकरण कहना, किसी भी प्रकार की अतिशयोक्त..

सरकार का सरोकार और 3 साल - कल्पेश ठाकुर

मोदी सरकार के तीन साल पूरे हो गए हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली थी,तब मोदी कांग्रेस की लुटिया डुबोकर सत्ता के सिंहासन पर काबिज हुए थे। किसी भी पार्टी की सरकार क्यों ना हो आरोप - प्रत्यारोप का ..

नारद दिखाते हैं कल्याणकारी पत्रकारिता की राह-लोकेन्द्र सिंह

पत्रकारिता की तीन प्रमुख भूमिकाएं हैं- सूचना देना, शिक्षित करना और मनोरंजन करना। महात्मा गांधी ने हिन्द स्वराज में पत्रकारिता की इन तीनों भूमिकाओं को और अधिक विस्तार दिया है- लोगों की भावनाएं जानना और उन्हें जाहिर करना, लोगों में जरूरी भावनाएं पैदा करना, यदि लोगों में दोष है तो किसी भी कीमत पर बेधड़क होकर उनको दिखाना। भारतीय परम्पराओं में भरोसा करने वाले विद्वान मानते हैं कि देवर्षि नारद की पत्रकारिता ऐसी ही थी। देवर्षि नारद सम्पूर्ण और आदर्श पत्रकारिता के संवाहक थे। वे महज सूचनाएं देने का ही कार्य ..

नारद मुनि की पत्रकारिता और मानवीयता का दृष्टीकोण- परेश उपाध्याय

आधुनिक मीडिया को देखकर कई बार लगता है कि यह अपने पारंपरिक स्वरूप से निरंतर भटकता जा रहा है। बात चाहे मानवीयता से जुड़े मुद्दों की हो या फिर समाज की ज्वलंत समस्याओं की, इन सभी को लेकर मीडिया की कम होती संवेदनशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ऐसे में हमारी भारतीय परंपराओं में संचार के माध्यम से समाज को संकट से बचाने वाले देवऋषि नारद का स्वतः ही स्मरण हो जाता है। एक तरफ जहां वर्तमान मीडिया अच्छे और खराब आतंकवाद सहित असली और नकली राष्ट्रवाद पर चर्चा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नारद जी का संचार एवं पत्रकारिता ..

शहरी नक्सल भारत के 'अदृश्य दुश्मन' - भाग 1

शहरी नक्सल भारत के 'अदृश्य दुश्मन' हैं, उनमें से कुछ को तो पकड़ा जा चुका है, किन्तु अधिकांश आज भी पुलिस राडार के बाहर हैं और भारतीय राज्य व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह फैला रहे है। ये सभी उस तबके में से हैं, जिन्हें शहरी बुद्धिजीवी कहा जाता है | ये प्रभावशाली लोग, नक्सल आन्दोलन की रीढ़ कहे जा सकते हैं, क्योंकि ये ही उनके बौद्धिक रणनीति कार हैं ।इन सभी शहरी नक्सलियों की महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि इन्होने सामाजिक मुद्दों के विषय में चिंतित होने का नाटक कर आधुनिक युवा पीढी को अपनी गिरफ्त में लेने का प्रयास ..

विश्व भर के मुस्लिमों को राह दिखाएगा हिंदुस्तानी मुस्लिम

जैसे जैसे तीन तलाक के संदर्भ में नई नई बातें सुनने को मिल रहीं हैं और मुस्लिम व गैर मुस्लिम विश्व में तीन तलाक को लेकर लोग मुखर होते जा रहें हैं. वस्तुतः व्हाट्सएप्प पर तलाक, sms से तलाक, पोस्टकार्ड से तलाक इन विषयों के समाज के सामनें खुलते जाने से यह स्वाभाविक भी है. किन्तु खेद यह है कि जैसे जैसे मुस्लिम महिला जगत में तीन तलाक को लेकर सड़क पर आने की बात क्रियान्वित होती जा रही है वैसे वैसे ही मुस्लिम ला बोर्ड के कर्ता धर्ता अधिक कट्टर रूख अपनाते जा रहें हैं. कभी वह कहता है कि डेढ़ वर्ष में तीन तलाक ..

दर्शन, काव्य और तीर्थाटन के माध्यम से एक विखंडित राष्ट्र को एकजुट करने वाले आदि शंकराचार्य !

आदि शंकराचार्य  शंकर को देखने समझने के दो द्रष्टिकोण हैं | एक तो तथाकथित आधुनिक बौद्धिक वर्ग और दूसरा उनका परंपरागत अनुयायी वर्ग | दोनों वर्ग अपनी अपनी महत्वाकांक्षाओं से दूषित है तथा अपना वर्चस्व पसंद करते हैं | कुछ लोग जो मानते हैं कि इतिहास ही वास्तविकता है, और पौराणिक कथाएं मिथक हैं, झूठी हैं, वे आद्य शंकराचार्य के अद्वैतवाद के खिलाफ हो जाते हैं: “ब्रह्म सत्यम, जगत मिथ्या”, अर्थात यह दुनिया, उसके समस्त वैज्ञानिक निष्कर्ष, जिन्हें हम अनिवार्य आवश्यकता मानते हैं, और यहाँ तक ..

आधुनिकता का पर्याय कपड़े नहीं-अनुपमा श्रीवास्तव

किस तरह हम अपने सोच और कर्मों से अधिक कपड़ों से अपना परिचय देने लगे l कपडे तो आवश्यक हैं ही, अच्छी वेशभूषा का महत्त्व भी कम नहीं, लेकिन आज जिस तरह सब आकर ‘कपडा केन्द्रित’ हो गया है l हर दिन फैशन की अंधी दौड़ ने हमारे दिमाग और विवेक को जिस तरह ..

भारत में नक्सलवाद : विचारधारा से विवेकशून्यता तक-शुभ्रता मिश्रा

सुकमा में हाल ही में हुए एक और नक्सली हमले और भारत के जवानों की शहादत की मार्मिक वेदना एक बार फिर सदियों पहले के उस भारत में ले जाती है, जब कभी ब्रिटिश सरकार के अधीन वाले परतंत्र भारत में जंगलों के प्राकृतिक संसाधनों पर अपने अधिकार के लिए एक आदिवासी योद्ध..

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा समानता, समता और बंधुता की नई पहल-अरुण कुमार सिंह

 बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती के दिन दिल्ली में सामाजिक समरसता के लिए एक नई पहल हुई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली प्रांत के इस कदम की बड़ी प्रशंसा हो रही है। आने वाले समय में यह कदम सामाजिक समरसता का सेतु सिद्ध हो सकता है समरसता के लिए आजीवन..

भोग से मुक्ति का मार्ग दिखाता है योग- नीलम महेंद्र

मानव सभ्यता आज विकास के चरम पर है ।भले ही भौतिक रूप में हमने बहुत तरक्की कर ली हो लेकिन शारीरिक आघ्यात्मिक और सामाजिक स्तर पर लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। मनुष्य अपनी बुद्धि का प्रयोग अपने शारीरिक श्रम को कम करने  एवं प्राकृतिक संसाधनों को भोगने के लिए कर रहा है । यह आधुनिक भौतिकवादी संस्कृति की देन है कि आज हमने इस शरीर को विलासिता भोगने का एक साधन मात्र समझ लिया है। भौतिकता के इस दौर में हम लोग केवल वस्तुओं को ही नहीं अपितु एक दूसरे को भी भोगने में लगे  हैं। इसी उपभोक्तावाद संस्कृति के ..

जीवित मनुष्य से बढ़कर हैं नदियाँ-लोकेन्द्र सिंह

माँ गंगा और यमुना के बाद अब नर्मदा नदी को भी मनुष्य के समान अधिकार प्राप्त होंगे। देवी नर्मदा भी अब जीवित इंसानों जैसी मानी जाएगी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी घोषणा की है। जल्द ही विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर नर्मदा नदी को इंसान का दर्जा दे दिया जाएगा। यह शुभ घोषणा है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन, जीवनदायिनी नदियों को मनुष्य के समकक्ष स्थापित करने से पहले हमें यह जान लेना चाहिए कि हमारे ग्रंथों में नदियों का स्थान बहुत ऊँचा है। वेदों में नदियों को माँ ही नहीं,अपितु ..

कौन विष घोल रहा है? - डॉ किशन कछवाहा

रामजस कॉलेज में अंग्रेजी विभाग की ओर से ‘‘कल्चर ऑफ प्रोटेस्ट‘‘ नाम से दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया था । इसमें कुल 18 वक्ताओं के नाम थे जिनमें उमर खालिद और जेएनयू की छात्रा शहला रशीद का भी नाम था । कॉलेज के छात्रों ने प्राध..

पत्थरबाजों का समर्थन करने से बाज आएं नेता-लोकेन्द्र सिंह

सेना के जवानों की पिटाई और उनके साथ बदसलूकी का वीडियो सामने आया, तब देश के ज्यादातर लोग खामोश थे। भारत और भारतीय सेना के लिए जिनके मन में सम्मान है, सिर्फ उन्हीं महानुभावों को वीडियो में अमानवीय हरकतें देखकर दु:ख हुआ। उन्होंने अपने-अपने ढंग से सेना के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट भी कीं। क्रिकेट में भारत का झंडा बुलंद करने वाले खिलाड़ी वीरेन्द्र सहभाग और गौतम गंभीर ने बहुत ही कठोर प्रतिक्रिया दीं। जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ के जवानों पर पत्थरबाजों ने जिस तरह लात-घूसे बरसाये, उसे देखकर निश्चिय ही देश ..

भारी पड़ेगी चाल-ज्ञानेन्द्र बरतरिया

'मैं पाकिस्तान में भारत का जासूस था'— मोहनलाल भास्कर की यह आत्मकथा हम में से कई लोगों ने पढ़ी होगी। इस आत्मकथा का एक वाकया ध्यान देने लायक है। मोहनलाल भास्कर को जब पाकिस्तान में ट्रेन से एक शहर से दूसरे शहर ले जाया जा रहा था, तो हर स्टेशन पर भारी ..

समता का विकल्प नहीं, भीमराव अंबेडकर का अमर वाक्य यथार्थ में बदला-भरतचन्द्र नायक

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निमात्री समिति में 1949 में अपने भाषण में बताया था कि भारतीय संविधान के निर्माण में भले दो वर्ष ग्यारह माह सत्रह दिन लगे। लेकिन संविधान सभा की 11 बैठकें हुई और इन सत्रों में 6 सत्रों में संविधान के उद्देश्य, मूलभूत अधिकार, संघ की शक्तियों, राज्यों के अधिकार पर विचार के अलावा अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति, जनजातियों के हित में बनी समितियों की अनुशंसाओं पर समग्रता से विचार हुआ। शेष सत्रों में संविधान पर समग्र विचार होने के साथ 165 दिनों में फैले 11 सत्रों ..

बाबासाहेब – एक अनुकरणीय व्यक्तित्व

हिन्दू समाहित जाति व्यवस्था को लेकर बोधिसत्व बाबा साहेब का जिस प्रकार का मुखर विरोध रहा वह किसी से छुपा नहीं है और यह विरोध उनकें द्वारा एक दीर्घ रचना संसार के रूप में प्रकट हुआ है. जाति व्यवस्था को ही लेकर महात्मा गांधी से उनका विरोध भी सर्व विदित है. किन्तु एक वाक्य है उनकें 1916 में लिखे शोध निबंध का जो न केवल उनकें कृतित्व का बोधवाक्य था अपितु जाति व्यवस्था के प्रति उनकें विरोध के पीछे छिपे रचनात्मक, सकारात्मक और विचारात्मक स्वरूप को आमूल प्रकट करता है. उन्होंने उस शोध निबंध के बोध वाक्य के रूप ..

क्या पांच वक्त का नमाजी कट्टर मुस्लिम भी आरएसएस का स्वयंसेवक बन सकता हैं?

अभी अभी विगत दिनों हुए उत्तर प्रदेश राज्य विधानसभा के चुनाव ने कई लोगों की आँखें खोल दीं । आम धारणा के विपरीत, कई मुसलमानों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पक्ष में मतदान किया। इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवको..

सर्वसमावेशी है हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा-प्रवीण गुगनानी

हाल ही में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा को सही बताया तो पुरे देश में जैसे एक वैचारिक द्वन्द छिड़ गयाl वस्तुतः यह कथन(हिन्दू राष्ट्र), यह व्यक्ति(योगी) और यह समय(जबकि देश अपने मूल विचार की ओर लौटने की यात्रा प्रारंभ कर चुका है) तीनों ही बड़े सटीक हैंl भारत भूमि पर विधर्मियों के आक्रमणों, कब्जे व अकूत संख्या में किये गए धर्मांतरण के बाद से ही हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना का विचार इस देश के नागरिकों में जन्म ले चुका था किंतु देश, काल व परिस्थिति के अनुसार इस कल्पना ..

गौ-संरक्षण में गुजरात सरकार का अनुकरणीय प्रयास-लोकेन्द्र सिंह

भारतीय संस्कृति में गाय का बड़ा महत्व है। गाय के साथ इस देश का संबंध मात्र भावनात्मक नहीं है, वरन भारतीय समाज के पोषण में गौवंश का प्रमुख स्थान रहा है। भारत में गाय धार्मिक और आर्थिक, दोनों की बराबर प्रतीक है। यही कारण है कि प्राचीन समय में गौ-धन से सम्प..

"आजकल हर जगह भाषा की गरिमा , उत्कृष्टता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है"-अनुपमा श्रीवास्तव

भाषाई व्याभिचार, अभद्र,  अशिष्ट शब्दों के अतिक्रमण से ,  भाषा की अस्मिता के साथ दुर्व्यवहार।   आजकल हर जगह , हर मंच पर  , हर जगह  भाषा  की गरिमा , उत्कृष्टता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और बताया जाता है कि हम  "ज़रा हट कर  "हैँ !   जरा हटकर के फंडे को अपनाने वाले लोग समझते हैं कि हम इस प्रतिद्वंदिता के युग में तभी टिक  सकते हैं, जब हम कुछ हटकर करें और ऐसे- ऐसे शब्दों का , असंगत भाषा,  चलताऊ शब्दावली का उपयोग करते हैं,  अपनी बोलचाल ..

यूपी में बूचड़खाना विवाद कितना सही ? : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

हाल ही में उत्‍तरप्रदेश में सम्‍पन्‍न हुए विधानसभा चुनावों के पूर्व सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपने चुनावी घोषणा पत्र के जरिए जनता से सत्‍ता में आने की शर्त पर कुछ वादे किए थे, जिसका मूल था कि सत्‍ता में आने के तुरंत बाद वे उन पर अक्षरस: अमल करेंगे। संयोग से इन वायदों में यूपी की जनता ने भाजपा को अपने लिए मुफीद पाया और उस पर विश्‍वास करते हुए अपना बहुमत भारतीय जनता पार्टी को दे दिया। सरकार बनते ही भाजपा उन्‍हें पूरा करने में लग गई। उनमें फिर महिला सुरक्षा के लिए उठाए जाने ..

“सामाजिक और व्यावहारिक है भारतीय नववर्ष”-रश्मि मुकेश व्यास

हिन्दुस्तान की असली धरोहर है, हिन्दू संस्कृति । हमारी संस्कृति हमें अपने-अपने तरीके से खुशियां मनाने के अवसर प्रदान करती है। हिन्दू धर्म से जुड़े देवी-देवता एवं संत-महात्मा हमारी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। इनके जन्म दिवस, अवतरण दिवस और विवाह द..

शक्ति की साधना में रत ‘भारत’- लोकेन्द्र पाराशर

सर्वविदित है कि नवरात्रि पर्व शक्ति साधना का पर्व हैं। हम भारतीय यह आदि काल से करते भी आये हैं, कर ही रहे हैं, करते भी रहेंगे। परन्तु साधना के केन्द्र में व्यष्टि भाव होने के कारण साधक की चेतना समष्टि स्वरूप में कम ही दिखाई दी। कारण बहुत स्पष्ट है कि हम व्यक्तिगत असुरक्षा की भावना के कारण स्वयं के लिए शक्ति संचय की जुगाड़ से ही बाहर नहीं आ पाये। परिणामतः हमारे व्यापक समाज अर्थात भारत की साख सभी स्तरों पर गिरती रही और शून्य से शिखर तक हम एक-दूसरे को कोसते रहे। हमने स्वामी विवेकानंद के सपनों ..

हिंदू-मुस्लिम एकता की भव्य इमारत खड़ी करने का अवसर-लोकेन्द्र सिंह

भारत के स्वाभिमान और हिंदू आस्था से जुड़े राम मंदिर निर्माण का प्रश्न एक बार फिर बहस के लिए प्रस्तुत है। उच्चतम न्यायालय की एक अनुकरणीय टिप्पणी के बाद उम्मीद बंधी है कि हिंदू-मुस्लिम राम मंदिर निर्माण के मसले पर आपसी सहमति से कोई राह निकालने के लिए आगे आएंगे । राम मंदिर निर्माण पर देश में एक सार्थक और सकारात्मक संवाद भी प्रारंभ किया जा सकता है ।..

कौन हैं मुसलमानों को योगी का डर दिखाने वाले लोग?- लोकेन्द्र सिंह

उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद से जिन्हें प्रदेश में मुसलमानों के लिए संकट दिखाई दे रहा है, वे लोग पूर्वाग्रह से ग्रसित तो हैं ही, भारतीय समाज के लिए भी खतरनाक हैं। उनके पूर्वाग्रह से कहीं अधिक उनका बर्ताव और उनकी विचार प्रक्रिया सामाजिक ताने-बाने के लिए ठीक नहीं है। योगी आदित्यनाथ को मुस्लिम समाज के लिए हौव्वा बनाकर यह लोग उत्तरप्रदेश का सामाजिक सौहार्द बिगाडऩा चाहते हैं । योगी आदित्यनाथ सांप्रदायिक हैं, वह कट्टर हैं, मुख्यमंत्री पद के लिए उनके नाम की घोषणा के बाद ..

‘‘यह पब्लिक है: सब जानती है’’-वीरेन्द्र सिंह परिहार

उत्तरप्रदेश में ऐसा क्या हुआ कि सारे सर्वे और एक्जिट पोल फेल हो गए । बात यहीं तक नहीं रुकती, हकीकत में सभी जाति और सम्प्रदाय के समीकरण टूट गए । जैसा कि लोगों का मानना था कि उत्तरप्रदेश में भाजपा को मुस्लिमों का वोट कतई नहीं मिलेगा? पर अधिकांश मुस्लिम-बह..

"कट्टरपंथ की बुरी नजर से कला-संस्कृति को बचाना होगा"- लोकेन्द्र सिंह

  असम  के 46 मौलवियों की कट्टरपंथी सोच को 16 वर्षीय गायिका नाहिद आफरीन ने करारा जवाब दिया है। नाहिद ने कहा है कि खुदा ने उसे गायिका का हुनर दिया है, संगीत की अनदेखी करना मतलब खुदा की अनदेखी होगा। वह मरते दम तक संगीत से जुड़ी रहेंगी और वह किसी..

समरसता के मोती-राकेश सेन

भारत वर्ष में समय समय पर अनेक राष्ट्रपुरुषों ने जन्म लिया है l उन्होंने अपने जीवन काल का सम्पूर्ण समय समाज को सुधारने में लगाया l राजा राममोहन राय से डॉ. बाबा साहब आम्बेडकर तक सभी राष्ट्र पुरुषों का यही प्रयास रहा है l अधोगति के आखिरी पायदान पर पहुंची ह..

सपा को विपक्ष में बैठकर काम करने का सबक : डॉ. मयंक चतुर्वेदी 

उत्‍तरप्रदेश में जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में विधानसभा चुनावों के एक तरफा रुझान आए हैं, उसने इस बार समुचे देश को यही संदेश दिया है कि अब जातिगत आधार पर या धर्म के आधार पर अगला-पिछला की राजनीति नहीं चलेगी। सत्‍ता में बने रहना है तो व..

“अरुणाचल पर चीन का बार-बार दुस्‍साहस नेहरू की देन”-डॉ मयंक चतुर्वेदी

भारत के लिए उसके एक प्रधानसेवक की गलती कितनी भारी पड़ी है, इसका यह एक जबरदस्‍त उदाहरण है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गलतियां ऐसी ही रही हैं जिन्हें भारत आज 69 साल बीत जाने के बाद भी लगातार भुगत रहा है। कश्मीर के मुद्दे को यूएन में ले जाने का एलान हो, देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने के स्‍थान पर हिन्‍दू कोड बिल लागू करना, अमेरिका की भारत से सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल होने की पेशकश को ठुकराकर उसमें चीन को शामिल करने का आग्रह हो या तिब्बत पर चीन ..

“राजनीति के बदलते आयाम”-वीरेंद्र सिंह परिहार

प्राथमिक शिक्षा में गुणवत्ता में सुधार के लिए केन्द्र सरकार योग्य शिक्षक तैयार करने की दिशा में आधारभूत कदम उठाने जा रही है। इसके लिए मेडिकल एवं इंजीनियरिंग की तरह एक राष्ट्रीय परीक्षा आयोजित कराये जाने पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है, ताकि योग्य उम्मीदव..

अरुणाचल पर चीन का बार-बार दुस्‍साहस नेहरू की देन : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भारत के लिए उसके एक प्रधानसेवक की गलती कितनी भारी पड़ी है, इसका यह एक जबरदस्‍त उदाहरण है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गलतियां ऐसी ही रही हैं जिन्हें भारत आज 69 साल बीत जाने के बाद भी लगातार भुगत रहा है। कश्मीर के मुद्दे को यूएन में ले ज..

रामजस पर हल्ला, केरल पर चुप्पी क्यों?-लोकेन्द्र सिंह

रामजस महाविद्यालय प्रकरण से एक बार फिर साबित हो गया कि हमारा तथाकथित बौद्धिक जगत और मीडिया का एक वर्ग भयंकर दोगला है। एक तरफ ये कथित धमकियों पर भी देश में ऐसी बहस खड़ी कर देते हैं, मानो आपातकाल ही आ गया है, जबकि दूसरी ओर बेरहमी से की जा रही हत्याओं पर भी चुप्पी साध कर बैठे रहते हैं । वामपंथ के अनुगामी और भारत विरोधी ताकतें वर्षों से इस अभ्यास में लगी हुई हैं । अब तक उनका दोगलापन सामने नहीं आता था, लेकिन अब सोशल मीडिया और संचार के अन्य माध्यमों के विस्तार के कारण समूचा देश इनके पाखण्ड को देख पा रहा ..

परंपरागत ‘शिक्षा संस्कृति’ के संरक्षण की आवश्यकता”- चेतन कौशल नूरपुरी

यह शाश्वत सत्य है कि हम जैसी संगत करते हैं ,हमारी वैसी भावना होती है l हमारी जैसी भावना उत्पन्न होती है,हमारा वैसा विचार होता है l हमारा जैसा विचार पैदा होता है,हमारा वैसा ही कर्म पैदा होने लगता है और जब हम जैसा काम करते हैं,तब हमें उसका वैसा फल मिलने ल..

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रति असहिष्णुता सेकुलरवाद का छद्म-भरतचन्द्र नायक

‘‘सूख हाड़ ले जात सठ स्वान, निरखि मृगराज’’ लंपटीय तासीर सत्ता लोलुपों का स्वभाव आदि काल से व्यवहार में देखा सुना गया । सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से प्रेरित संगठन की प्रेरणा का यहीं जन्म होता है । अंगे्रजों ने बांटो और राज करो की मंशा से भारतीय समाज के विखंडन के बीज बोये । 1925 में राष्ट्र को एकता के सूत्र में गुंथित करने का अनुष्ठान आरंभ हुआ । समय ने करवट ली । भारत को आजादी मिली । लेकिन सत्ता में आने के साथ समाज को फिरकों में बांट कर तुष्टीकरण को परवान चढ़ाना ..

अरुणाचल प्रदेश में घटती हिन्दू आबादी

अरुणाचल प्रदेश में हिंदू जनसंख्या के सन्दर्भ में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू के बयान पर कुछ लोग विवाद खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि उनका बयान एक कड़वी हकीकत को बयां कर रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि उनके बयान पर वो लोग हायतौबा मचा रहे हैं, जो खुद को पंथनिरपेक्षता का झंडाबरदार बताते हैं। हिंदू आबादी घटने के सच पर विवाद क्यों हो रहा है, जबकि यह तो चिंता का विषय होना चाहिए। जनसंख्या असंतुलन आज कई देशों के सामने गंभीर समस्या है, लेकिन हमारे नेता इस गम्भीर चुनौती को भी क्षुद्र मानसिकता के साथ देख ..

सेवा भारती की श्रम साधना : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

हिंदू चिंतन या कहें कि प्राचीन सनातन चिंतन के अनुसार सेवा का मतलब निस्वार्थ भाव से, पूजा भाव से, कर्तव्य भाव से उन सभी को सहयोग करना है, जिन्‍हें कि सहायता की आवश्‍यकता है। स्वामी विवेकानंद भी सेवा का यही अर्थ समझाते हैं। वे कहते हैं कि कर्तव्य भाव का होना ही सेवा करना है। दुर्भाग्यवश किसी न किसी वजह से जो लोग पीछे रह गए हैं, उनकी उन्नति के लिये, उन्हें आगे लाने के लिये एक साधन सेवा है। राष्‍ट्रीय स्‍वंयसेवक संघ आज सेवाभारती एवं अपने अन्‍य ..

पाकिस्तान में आधी आबादी पर अत्याचार के अनेक बहाने : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

सरहदें दीवार खींच सकती हैं, लेकिन भावनाओं को बहने से नहीं रोक सकतीं, नहीं तो ऐसा कभी नहीं होता कि पाकिस्‍तान में बैठे बच्‍चों से पूछा जाता है तो वे हिन्‍दुस्‍तान को अपने लिए सबसे अच्‍छा देश बताएं और भारत के बच्‍चों की नजर में पाकिस्‍तान हमारा ही है, हम जैसे लोग ही वहाँ रहते हैं, कहा जाए। इसलिए संवेदना के स्‍तर पर जब कोई भावना से जुड़ी घटना हो जाती है तो दर्द सरहदों की सभी हदें पार कर जाता है । अभी हाल ही में पाकिस्‍तान से एक खबर आई हैं, उसे जब से जाना, लगातार यही ..

"10 फरवरी माघ पूर्णिमा, संत रविदास जयंती" हिन्दू धर्म के आदि रक्षक संत रैदास- प्रवीण गुगनानी

लगभग सवा छः सौ वर्ष पूर्व 1398 की माघ पूर्णिमा को काशी के मड़ुआडीह ग्राम में संतोख दास और कर्मा देवी के परिवार में जन्में संत रविदास यानि संत रैदास को निस्संदेह हम भारत में धर्मांतरण के विरोध में स्वर मुखर करनें वाली और स्वधर्म में घर वापसी करानें वाली प्रारम्भिक पीढ़ियों के प्रतिनिधि संत कह सकतें है l संत रैदास संत कबीर के गुरुभाई और स्वामी रामानंद जी के शिष्य थे l उनकें कालजयी लेखन को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि उनकें रचित 40 दोहे गुरु ग्रन्थ साहब जैसे महान ग्रन्थ में सम्मिलित किये गए हैं l भारतीय ..

"राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और सेवा कार्य"-संजय द्विवेदी

समाज में व्याप्त भेदभाव, छूआछूत, को मिटाने के लिए संत रविदास ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके आदर्शों और कर्मों से सामाजिक एकता की मिसाल हमें देखने को मिलती है लेकिन वर्तमान दौर में इस सामाजिक विषमता को मिटाने के सरकारी प्रयास असफल ही कहे जा सकते हैं। कहीं-कहीं आशा की किरण समाज क्षेत्र में कार्यरत सेवा भारती जैसे संस्थानों के प्रकल्पों में दृष्टिगोचर होती है। भारत गावों में बसता है, गांवों में आज भी सामाजिक कुरीतियां कम नहीं हुयी हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने छुआछूत को मिटाने का नारा दिया, ..

संस्कारों की प्रथम पाठशाला है परिवार -तुषार कोठारी

वर्तमान समय संस्कारों के क्षरण का समय है l समाज अजीब सी उलझन में है l बच्चों का बचपन डोरेमोन और शिनचैन जैसे अश्लील विदेशी कार्टून कार्यक्रमों से प्रेरित हो रहा है l जन्मदिन पर केक काटकर हैप्पी बर्थडे बोलना मानो वैदिक संस्कार बन चुका है l मोबाइल गेम्स और..

नई पौध की घटती स्वाध्याय वृत्ति-डॉ विकास दवे

“परिवार ही दे सकता है बच्चों को संस्कार और सदसाहित्य पढने की आदत” विगत दिनों इन्टरनेट पर संयुक्त राष्ट्र संघ के एक वैश्विक सर्वेक्षण के निष्कर्ष को पढ़ रहा था l वह सर्वेक्षण बच्चों की पढने-लिखने की आदतों को लेकर हुआ था l निष्कर्ष के शब्दों ने मुझे चौका दिया l आप भी देखिये उस निष्कर्ष को –आज विश्व के समक्ष आतंकवाद से भी बड़ी एक चुनौती आ खड़ी हुई है l हमारी नई पीढ़ी अब केवल “लिसनर” और “दर्शक” बन कर रह गई है l वह “रीडर” ही नहीं बची तो “राइटर” ..

केरल तेजी से पाकिस्तान बनता जा रहा है - तुफैल अहमद

तुफैल अहमद दो अक्टूबर को केरल में इस्लामिक स्टेट यानी आइएस से संबद्ध छह मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया। वे भारत में हमला करने की योजना बना रहे थे। वे युवा आइएसआइएस के वृहत नेटवर्क का हिस्सा थे। सुरक्षा अधिकारी केरल के कन्नूर, कोझिकोड और मल्लपुरम सहित तमिलनाडु के चेन्नई और कोयंबटूर में कुछ और संदिग्ध आतंकवादियों की धरपकड़ के लिए जांच पड़ताल कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि गिरफ्तार किए गए युवा इस्लामिक स्टेट से जुड़ने के लिए जून में ही भारत छोड़ अफगानिस्तान और सीरिया जा चुके केरल के करीब ..

इस बार राजनीतिक शुचिता का श्रेष्‍ठ उदाहरण बने हैं पद्म पुरस्कार-डॉ मयंक चतुर्वेदी

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री होने का फर्क देश हर जगह अनुभव कर रहा है । जब भी राष्‍ट्रीय स्‍तर के पुरस्‍कारों की घोषणा की जाती थी, आरोप यही लगते थे कि इसमें पसंद और ना पसंद के बीच योग्‍यता व कर्मठता को नजरअंदाज किया गया है। किंतु इस बार जो नाम इन पुरस्‍कारों के लिए चयनित किए गए हैं। उनके लिए कहना होगा कि वे सभी अपने क्षेत्र में दिए गए योगदान के श्रेष्‍ठ न होकर सर्वश्रेष्‍ठ उदाहरण हैं। पद्म पुरस्कार इस बार राजनीतिक मंशा, पैरवी या जनसंपर्क के दाग से दूर हैं। ये दिल्ली जैसे ..

सामाजिक न्याय ही सरोकार, वंचितों की पक्षधर सरकार- भरतचन्द्र नायक

यह एक शास्वत सत्य है कि भारत की जीवन प्रणाली लोकतंत्री है। जिस लोकतंत्र के उदय के इतिहास में भारत को पीछे बताया जाता है वह विवादित और बहस का मुद्दा है। सच्चाई यही है कि भारत के लोक जीवन में लोकतांत्रिक व्यवस्था अघोषित रूप से रची पची हैं यही राम राज्य की कल्पना है, जिसके पेरोकार इतिहास पुरूष के रूप में सराहे गये हैं। आजादी के बाद प्रशासनिक और संवैधानिक दृष्टि से लोकतंत्र की छाया में हमें अधिकार का कवच और कत्र्तव्य का नैतिक बोध कराया गया। लेकिन हमारी जीवन शैली में जनतंत्र रचा-पचा है। 1948 में स्वतंत्रता ..

केरल में जंगलराज- लोकेन्द्र सिंह

केरल में बढ़ती हिंसा इस बात का सबूत है कि वामपंथ से बढ़कर हिंसक विचार दूसरा कोई और नहीं है। वामपंथी विचार घोर असहिष्णु है। असहिष्णुता इस कदर है कि वामपंथ को दूसरे विचार स्वीकार्य नहीं है, अपितु उसे अन्य विचारों का जीवत रहना भी बर्दाश्त नहीं है। इस विचारधारा के शीर्ष विचारकों ने अपने जीवनकाल में हजारों-लाखों निर्दोष लोगों का खून बहाकर उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। जिस वामपंथी नेता ने विरोधियों का जितना रक्त बहाया, उसे उतना ही अधिक महत्त्व दिया गया है। दरअसल, वामपंथी विचारधारा के मूल में हिंसा है, जिसका ..

राष्ट्र,राष्ट्रीयता और राष्ट्रवादी पत्रकारिता : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

राष्‍ट्रवादी पत्रकारिता पर चर्चा आरंभ करने से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर यह राष्‍ट्र, राष्‍ट्रीयता और राष्‍ट्रीय पत्रकारिता है क्‍या ? इसके बाद यह जानेंगे कि राष्‍ट्रवादी पत्रकारिता के आधुनिक संदर्भ कहने का अर्थ यहाँ क्‍या है। वस्तुतः राष्ट्र की परिभाषा एक ऐसे जन समूह के रूप में की जा सकती है जो कि एक भौगोलिक सीमाओं में समान परम्परा, समान हितों तथा समान भावनाओं से बँधा हो और जिसमें एकता के सूत्र में बाँधने की उत्सुकता तथा समान राजनैतिक महत्त्वाकांक्षाएँ पाई जाती हों। ..

मध्‍यप्रदेश में प्राचीन भवनों के संरक्षण की अनुपम पहल : डॉ मयंक चतुर्वेदी

संस्‍कृति एवं परंपरा के कभी जागृत नमूने रहे भवन आज भले ही अपने वैभव से दूर होकर अनेक स्‍थानों पर टूटे-फूटे स्‍मारकों में तब्‍दील हो गए हों, किंतु वे हैं तो हमारे अतीत का दिग्‍दर्शन करानेवाले आधार स्‍तम्‍भ ही हैं । इसलिए उन्‍हें उनके प्राचीन गौरवपूर्ण स्‍वरूप में वापस लाकर उनसे निरंतर प्रेरणा प्राप्‍त करते रहना हम सभी का दायित्‍व बनता है। इन दिनों इस दिशा में मध्‍यप्रदेश की सरकार जिस तरह से प्रयत्‍न कर रही है और स्‍वयं मुख्‍यमंत्री शिवराज ..

बहुमूल्य जीवन का उपहार व्यर्थ के दिखावे से श्रेष्ठ नहीं बनता-प्रदीप कुमार सिंह पाल

इस संसार में हर व्यक्ति के अन्दर स्वयं को अधिक श्रेष्ठ ,अधिक सुन्दर ,कुछ विशेष ,सबसे हटकर प्रदर्शित करने का एक गुण छुपा हुआ है l इसे महत्वपूर्ण दिखने का शौक भी कह सकते हैं l इस कारण हर व्यक्ति इसी कोशिश में लगा रहता है कि कैसे वह सबकी नज़रों में ऊपर चढ़ जाये l दूसरों की नज़रों में अच्छा दिखने के लिए ,अपनी छवि बनाने के लिए यदि व्यक्ति को अनैतिक कार्य भी करना पड़ता है ,तो वह उसे करने से नहीं कतराता l इस तरह के किये गए अनैतिक कार्यों से वह अपने भविष्य के धरातल पर कांटे बोता रहता है ,लेकिन उसे यह पता ही नहीं ..

“तस्वीर की जगह गांधी विचार पर बहस होनी चाहिए”-लोकेन्द्र सिंह

कैलेंडर और डायरी पर महात्मा गांधी की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर से उत्पन्न विवाद बेवजह है। यह इसलिए,क्योंकि भारत में इस बात की कल्पना ही नहीं की जा सकती है कि किसी कागज के टुकड़े पर चित्र प्रकाशित नहीं होने से गांधीजी के व्यक्तित्व पर पर्दा पड़ जाएगा। यह तर्क तो हास्यास्पद ही है कि गांधीजी के चित्र की जगह प्रधानमंत्री का चित्र इसलिए प्रकाशित किया गया है, ताकि गांधी की जगह मोदी ले सकें। गांधीजी की जगह वास्तव में कोई नहीं ले सकता। आश्चर्य की बात यह है कि गांधीजी के चित्र को लेकर सबसे ..

शिव के श्रम स्वेद से निकली नर्मदा को बचाने अब शिव बहायेंगे स्वेद – महेश श्रीवास्तव

  श्री महेश श्रीवास्तव  पुराणों के अनुसार नर्मदा की उत्पत्ति शिव के स्वेद से हुई ! वायु पुराण के अनुसार तांडव नृत्य के मध्य बहे शिव के श्रम स्वेद से तो स्कन्द पुराण के अनुसार शिव पार्वती की तपस्या के ताप से उत्पन्न स्वेद से नर्मदा का आविर्भाव हुआ ! इसीलिए इसे “रुद्रदेह समुद्भूता” कहा गया है ! महर्षि मार्कंडेय ने इसे “कल्पांत स्थापनी” अर्थात सात कल्पों तक यथावत रहने वाली बताया और इसीलिए इसे अमर अर्थात “न मृता तेन नर्मदा” कहा गया !  यह ..

“कुटुंब,राष्ट्रीयता व सामजिक मर्यादाएं”-विनोद बंसल

किसी भी देश या समाज की उन्नति उसके नागरिकों की सोच व व्यवहार पर निर्भर करती है l भारतीय परिप्रेक्ष्य में परिवार या कुटुंब का महत्व सदा से ही रहा है l सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर आज तक जितने भी महापुरुष या दिव्यात्मएं इस पुण्य भूमि पर जन्मी वे किसी न किसी..

युवा भारत हेतु प्रेरणा स्त्रोत: शिकागो संभाषण - प्रवीण गुगनानी

प्रवीण गुगनानी  भारतीय युवाओं पर ईश्वर की कितना कृपा है यह केवल इस बात से समझा जा सकता है कि ईश्वर ने हमें प्रेरणा देनें हेतु भारत भू पर स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष को जन्म दिया !! आज भारत सम्पूर्ण विश्व में सर्वाधिक युवा जनसंख्या वाला राष्ट्र है, अतः इस युवा भारत में स्वामी विवेकानंद का महत्त्व और अधिक बढ़ जाता है. आवश्यकता केवल इस बात की है कि आज की युवा पीढ़ी स्वामी विवेकानंद को संपूर्णतः पढ़े, उन्हें समझे, उनके अनुरूप ढले व उनके पद चिन्हों पर चलने का प्रयास करे. यदि आज भारतीय ..

मध्यप्रदेश में खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए किये गए जबरदस्त प्रयत्न - डॉ. मयंक चतुर्वेदी

डॉ मयंक चतुर्वेदी  भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और दूसरे बड़े नेताओं ने अपने उद्बोधन में पांच राज्यों के चुनाव को प्रमुखता दी, वहीं भाजपा शासित राज्यों के सभी मुख्..

हैप्पी न्यू ईयर या नववर्ष, तय कीजिए-लोकेन्द्र सिंह

लोकेन्द्र सिंह दृश्य एक । सुबह के पांच बजे का समय है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि यानी वर्ष प्रतिपदा का मौका है। ग्वालियर शहर के लोग शुभ्रवेश में जल विहार की ओर बढ़े जा रहे हैं। जल विहार के द्वार पर धवल वस्त्र पहने युवक-युवती खड़े हैं। उनके हाथ में एक कटोरी है। कटोरी में चंदन का लेप है। वे आगंतुकों के माथे पर चंदन लगा रहे हैं। भारतीय संगीत की स्वर लहरियां गूंज रही हैं। सुर-ताल के बेजोड़ मेल से हजारों मन आल्हादित हो रहे हैं। बहुत से लोगों ने तांबे के लोटे उठाए और जल कुण्ड के किनारे ..

नोटबंदी के 50 दिन: जड़ों से हिल गया काले धन का साम्राज्य - सुकुमार मुखोपाध्याय

  सुकुमार मुखोपाध्याय मैंने बाजार में और बैंक की कतारों में खड़े लोगों से भी नोटबंदी को लेकर सवाल पूछे । उन्हें असुविधा हो रही थी, फिर भी वे इस कदम से सहमत थे, उनमें से अधिकाँश ने नोटबंदी का काफी हद तक समर्थन ही किया। इसके पीछे तर्क केवल यह था कि वे मान रहे थे कि इस आदेश से काले धन के जमाखोरों पर अंकुश लगेगा और इस पूण्य कार्य के लिए वे कष्ट सहन करने को भी तैयार थे । लेखकों और अर्थशास्त्रियों ने अपनी अपनी राजनैतिक प्रतिबद्धता के अनुसार प्रतिक्रिया व्यक्त की । इसका सबसे अच्छा और सबसे खराब ..

"महिला अधिकारों की गूंज"-अरुण कुमार सिंह

बीते वर्ष को महिला अधिकारों के लिए याद किया जाएगा। इस वर्ष तीन तलाक के साथ-साथ महिलाओं के मंदिरों और दरगाहों में प्रवेश को लेकर भी कई अच्छे निर्णय हुए और सबसे बड़ी बात उनका पालन भी हो रहा है। वर्ष के शुरू (फरवरी) में तीन तलाक को लेकर जो बहस शुरू हुई, वह..

नारद दिखाते हैं कल्याणकारी पत्रकारिता की राह-लोकेन्द्र सिंह

पत्रकारिता की तीन प्रमुख भूमिकाएं हैं- सूचना देना, शिक्षित करना और मनोरंजन करना। महात्मा गांधी ने हिन्द स्वराज में पत्रकारिता की इन तीनों भूमिकाओं को और अधिक विस्तार दिया है- लोगों की भावनाएं जानना और उन्हें जाहिर करना, लोगों में जरूरी भावनाएं पैदा करना, यदि लोगों में दोष है तो किसी भी कीमत पर बेधड़क होकर उनको दिखाना। भारतीय परम्पराओं में भरोसा करने वाले विद्वान मानते हैं कि देवर्षि नारद की पत्रकारिता ऐसी ही थी। देवर्षि नारद सम्पूर्ण और आदर्श पत्रकारिता के संवाहक थे। वे महज सूचनाएं देने का ही कार्य ..

1947 से आजतक लगातार विध्वंशक राजनीति का शिकार बंगाल !

सत्तारूढ़ दल के सहयोग और समर्थन के चलते बढ़ रहे जिहादी उन्माद के कारण बंगाल की अस्मिता और अस्तित्व पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं । स्वाभाविक ही इससे राज्य के हित भी प्रभावित हो रहे हैं।यह कितनी दुखद स्थिति है कि भारत की आजादी के लिए संघर्ष में अग्रणी रहा बंगाल, क्रांतिकारी राष्ट्रवादियों की भूमि बंगाल, भारत की बौद्धिक परंपराओं का प्रतीक बंगाल, आज भारत विभाजक षडयंत्रकारियों का अखाडा बन गया है । वे सक्रिय हैं, बराये मेहरवानी राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी की मिलीभगत से ।जब कम्युनिस्टों का शासन था, तब ..

"रक्षा मामलों में देश की चिंताएँ"-डॉ मयंक चतुर्वेदी

वीर भोग्‍या वसुन्‍धरा यह बात आज से हजारों वर्ष पहले से निरंतर भारत में श्रुति परंपरा में प्रचलित रही है। इसका आशय सीधा और सुस्‍पष्‍ट है कि भारत में पुरुषार्थी ही वीर कहलाते हैं और वीर ही पुरुषार्थी हैं। प्राय: वीर शब्‍द को शूर का पर्यायवाची समझा जाता है किंतु ऐसा है नहीं। भाषायी दृष्टि से विवेचना करें तो दोनों का यह अंतर कुछ इस प्रकार दृष्टिगत होता है। शूर शब्द हिन्सार्थक श्री धातु से बना है, जिसके कारण यह शब्द उस सैनिक का वाचक है जो अपने अधिकारी के आदेश मिलते ही गोली चलाने ..

“ग्राहक जागरूकता” समय की आवश्यकता –दिनकर सबनीश

देश की अर्थव्यवस्था में ग्राहक का महत्वपूर्ण स्थान होता है वह राजा होता है ग्राहक तय करता है कि उसे क्या खरीदना है ? क्योंकि उसे चयन का अधिकार प्राप्त है। परंतु अब बाजार घरों में घुस गया है अब बाजार तय कर रहा है कि समाज का व्यक्ति क्या खरीदेगा ? समाज का प्रत्येक व्यक्ति ग्राहक की भूमिका निभा रहा है फिर भी शोषण की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा उलझनों वाला व्यक्ति ग्राहक ही है। जब तक ग्राहकों का नियमित प्रबोधन नहीं करेंगे ,उसको जानकारी नहीं देंगे, वह मौन ही रहेगा और उसका शोषण होते ही रहेगा।  आश्चर्यजनक ..

पाकिस्तान पर अमेरिका की दोहरी नीति – डॉ मयंक चतुर्वेदी

पाकिस्तान कई वर्षों से लगातार आतंकवाद को प्रश्रय दे रहा है, यह बात आज विश्व जानता है, ऐसे में यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि अमेरिका से यह बात छिपी हुई है, किंतु उसके बाद भी अमेरिका आतंकवाद को समाप्त करने एवं अन्य सामाजिक व्यवस्था में सुधार के नाम पर लगातार पाकिस्तान को कई हजार करोड़ डालर की आर्थिक सहायता कर रहा है। भारत द्वारा अनेक अवसरों पर अंतर्राष्ट्रीय मंचों से इस बात को साझा करने के साथ प्रमाण स्वरूप दस्तावेज भी दुनिया के सामने सौंपे जा चुके हैं कि किस तरह से हिन्दुस्तान का यह पड़ौसी मुल्क आतंकवाद ..

सेना पर राजनीति कांग्रेस की कृसित मानसिकता -सिद्धार्थ शंकर गौतम

जैसे ही केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और पीएम हारिज के नाम को दरकिनार करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को नया थल सेनाध्यक्ष बनाया, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए राजनीति की शुरुआत कर दी है। फिलहाल थल सेना उपाध्यक्ष बिपिन रावत 31 दिसंबर को जनरल दलबीर सिंह सुहाग की जगह लेंगे किन्तु ऐसा प्रतीत होता है मानो कांग्रेस ने उनकी नियुक्ति को लेकर सरकार से दो-दो हाथ करने की ठान ली है। कांग्रेस का कहना है कि नए थल सेनाध्यक्ष की नियुक्ति में अनुभव वरीयता ..

हम कब तक खोते रहेंगे सैनिकों को ?-डॉ. मयंक चतुर्वेदी

यह प्रश्‍न किसी एक भारतीय का नहीं, देश के हर उस भारतीय का है जो अपने देश को अपार प्रेम करता है। पाकिस्‍तान प्रायोजित आतंकवाद से देश के अंदर और सीमाओं पर हमारे अपने सैनिक पाकिस्‍तानी गोलियों के शिकार हो रहे हैं। भारत सरकार फिर वो आज की राष्&z..

विमुद्रीकरण त्रासदी या उपचार - श्री एस. गुरुमूर्ति

  श्री एस. गुरुमूर्ति  डॉ. मनमोहन सिंह ने 9 दिसंबर 2016 को हिन्दू में प्रकाशित अपने लेख “Making of a mammoth tragedy” (एक विशाल त्रासदी का निर्माण) में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार द्वारा उच्च मूल्य वर्ग की मुद्रा को बदलने के निर्णय की आलोचना की । डॉ सिंह का सम्मान एक अर्थशास्त्री के रूप में कहीं अधिक है, बनिस्बत पूर्व प्रधान मंत्री के, किन्तु वस्तुतः उनके इस आलेख ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है । अच्छा होता अगर वे आर्थिक मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते समय राजनीतिक ..

जन जन में पैठ बनाती "आरोग्य भारती"-डॉ अशोक कुमार वाषर्णेय

सर्व सामान्य धारणा है,कि रोगी की निःशुल्क चिकित्सा करना ही स्वास्थ्य-सेवा है,परन्तु इसके साथ –साथ स्वस्थ व्यक्तियों को स्वस्थ बनाये रखना और अगर किसी कारण से छोटे-मोटे रोग होते है तो व्यक्ति स्वयं से प्रयास करके यथा दिनचर्या व्यवस्तिथ करके ,आहार –विहार को संयमित कर थोडा शारीरिक परिश्रम करते हुए अथवा परिवार में उपलब्ध सहज वस्तुओं द्वारा अपने को स्वस्थ रख सके ,इन सबका प्रशिक्षण देकर व्यक्ति को स्वस्थ रहने में सहायक बनाना –सेवा है l दवाओं से शारीरिक स्वास्थ तो ठीक हो सकता है ,परन्तु ..

एसोचैम की बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत :  डॉ. मयंक चतुर्वेदी

  डॉ मयंक चतुर्वेदी  बड़े नोटों को बंद करने का निर्णय जिस तरह से सामने आया, उसके बाद देशभर से मिली-जुली प्रक्रिया अब तक आ ही रही है। विपक्ष जहाँ इसके लिए सरकार पर कई आरोप लगा रहा है, यहाँ तक कि देश की जीडीपी ग्रोथ गिरने तक की बात करने के साथ इससे जोडक़र अन्ये मुद्दों को भी प्रमुखता से उठा रहा है तो वहीं केंद्र सरकार से लेकर कई ऐसे संगठन भी हैं जो इस निर्णय के पक्ष में नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने देश से  दो माह का समय व्यवस्था सुधारने एवं नोटबंदी की असुविधा से मुक्त होने ..

केजरीवाल समझें, दुनिया में फकीर ही सबसे ज्यादा अमीर होते हैं ? -डॉ. मयंक चतुर्वेदी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल किसी न किसी बहाने से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते रहते हैं। उनकी शैली शानदार है, जब वे अपनी बात कह रहे होते हैं तो इतने सामान्‍य आदमी की भाषा में और इस तरह से कहते हैं कि उन्‍हें सुनते वक्‍त कोई ईमानदार आदमी हो तो वह भी लजा जाए। इस बार केजरीवाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फकीर वाली टिप्पणी पसंद नहीं आई है। जिसका जिक्र उन्‍होंने अपने मुरादाबाद में दिए गए भाषण के दौरान किया था। केजरीवाल ने ट्वीट करके कहा कि 'मोदी..

राष्ट्र गान बनाम देशभक्ती की चेतना - डॉ नीलम महेंद्र

" एक बालक को देशभक्त नागरिक बनाना आसान है बनिस्बत एक वयस्क के क्योंकि हमारे बचपन के संस्कार ही भविष्य में हमारा व्यक्तित्व बनते हैं।"सुप्रीम कोर्ट का फैसला , सिनेमा हॉल में हर शो से पहले राष्ट्र गान बजाना अनिवार्य होगा।हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है और चूँकि हम लोग अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति बेहद जागरूक हैं और हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हासिल है तो हम हर मुद्दे पर अपनी अपनी प्रतिक्रिया देते हैं और किसी भी फैसले अथवा वक्तव्य को विवाद बना देते हैं , यही हमारे समाज की विशेषता..

परम्परा, आधुनिकता और परिवार: डॉ. मयंक चतुर्वेदी

साहित्‍यकारों, विद्वानों एवं ज्ञानियों के बीच यह चर्चा लम्‍बे समय से चल रही है कि परिवार, परंपरा और आधुनिकता का आपस में कोई संबंध है भी या नहीं। इन तीनों के बीच सदियों से सतत चली आ रही परिवार व्‍यवस्‍था आज कितनी प्रासंगिक रह गई है, यह बहुत गौर करने वाली बात है। इसलिए कि ग्‍लोबल विश्‍व की अवधारणा के बीच इंटरनेट के सहयोग से सभी भौतिक सुविधाएँ आपके एक छोटे से कमरे में सिमट चुकी हैं। वस्‍तुत: इस विषय की गहराई में जितना जाने की कोशिश की जाती है, लगता है, यह ..

ओम साधना से ओज की वृद्धि होती है-सत्यपाल शर्मा

  शास्त्रीय संगीत नाद –साधना,प्राण,योग का सनातन स्त्रोत हैl आपने देखा होगा कि ओमसाधना से ओज की वृद्धि होती है एवं आध्यात्मिक सिद्धि मिलती है l ओम में ‘अ’ ऋग्वेद ,’उ’ सामवेद ,’म’ यजुर्वेद है l सिद्धि साधना व जीवन के सर्वतोमुखी विकास के लिए जब आराधना की जाती है ,वह ‘तत्व’ अथर्ववेद है l पूरे ब्रम्हांड में ओंकार का सूक्ष्म नाद समाया हुआ है जो प्राणवायु ऑक्सीजन को सक्रिय करता है l धार्मिक दृष्टि से नहीं, चिंतन करने पर पता चलेगा कि ‘ओंकार’ ..

स्वास्तिक शास्वत और विश्वव्यापी सनातन प्रतीक -डॉ राधेश्याम दिवेदी

स्वास्तिक का अस्तित्व सिन्धु घाटी सभ्यता के भी पहले का माना जाता हैl इसका प्रयोग अन्य धर्मों में भी किया जाता है l सिन्धु घाटी सभ्यता कि खुदाई में ऐसे चिन्ह व अवशेष प्राप्त हुए हैं,जिनसे यह प्रमाणित हो जाता है कि लगभग 2-3 हज़ार वर्ष पूर्व में भी मानव सभ्यता अपने भवनों में इस मंगलकारी चिन्ह का प्रयोग करती थी l 11,000 सालों से स्वास्तिक मानव सभ्यता में मौजूद हैl वेदों में भी इसका ज़िक्र मिलता है ,इससे पता चलता है कि हिन्दू सभ्यता को जितना पुराना माना जाता है वो उससे भी ज्यादा पुरानी है l स्वास्तिक ..

इतिहास स्मृति -कोटली के अमर बलिदानी "स्वयंसेवक"

हंस के लिया है पाकिस्तान, लड़ के लेंगे हिन्दुस्तान’ की पूर्ति के लिए नवनिर्मित पाकिस्तान ने वर्ष 1947 में ही कश्मीर पर हमला कर दिया था. देश रक्षा के दीवाने संघ के स्वयंसेवकों ने उनका प्रबल प्रतिकार किया. उन्होंने भारतीय सेना, शासन तथा जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरिसिंह को इन षड्यन्त्रों की समय पर सूचना दी. इस गाथा का एक अमर अध्याय 27 नवम्बर, 1948 को कोटली में लिखा गया, जो इस समय पाक अधिकृत कश्मीर में है. युद्ध के समय भारतीय वायुयानों द्वारा फेंकी गयी गोला-बारूद की कुछ पेटियां शत्रु सेना क्षेत्र ..

क्या जीत पाएंगे मोदी जी - भ्रष्ट तंत्र के सहारे ईमानदारी की लड़ाई ? - नीलम महेंद्र

डॉ.नीलम महेंद्र नोट बंदी के फैसले को एक पखवाड़े से ऊपर का समय बीत गया है बैंकों की लाइनें छोटी होती जा रही हैं और देश कुछ कुछ संभलने लगा है। जैसा कि होता है , कुछ लोग फैसले के समर्थन में हैं तो कुछ इसके विरोध में स्वाभाविक भी है किन्तु समर्थन अथवा विरोध तर्कसंगत हो तो ही शोभनीय लगता है। जब किसी भी कार्य अथवा फैसले पर विचार किया जाता है तो सर्वप्रथम उस कार्य अथवा फैसले को लागू करने में निहित लक्ष्य देखा जाना चाहिए यदि नीयत सही हो तो फैसले का विरोध बेमानी हो जाता है। यहाँ बात हो रही थी नोटबंदी ..

स्वच्छ भारत -स्वस्थ भारत

हमें वातावरण को स्वच्छ बनाने के लिए जगह-जगह पेड़ लगाना चाहिए l पेड़ हमें प्राण वायु देते हैं जिससे हमारा जीवन दीर्घायु होता है l पेड़ हमें शीतल सुखद छाया ,फल और अनेकों प्रकार कि औषधियां भी प्रदान करते हैं जिनके उपयोग से हम स्वस्थ रहते हैं l हम भोजन और पानी..

भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान का अगला निशाना . बेनामी संपत्ति - प्रमोद भार्गव

मोदी सरकार का अगला कदम देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार का अगला कदम बेनामी संपत्ति पर करारी चोट के रूप में सामने आ गया है। साफ है,भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री ने कमर कस ली है। इस दृश्टि से सरकार की और से बेनामी संपत्ति लेन-देन कानून 1988, संशोधन के बाद 1नबंवर से लागू कर दिया गया है। इस कानून के अमल में आने के बाद सरकार को अधिकार मिल गया है कि वो बेनामी संपत्तियों को ज़ब्त कर सकती है. इसके लिए सरकार को वैधानिक और प्रशासनिक शक्तियां प्रदान की गई हैं. जानकारों की मानें ..

जो हम देते हैं वो ही हम पाते हैं -डॉ नीलम महेंद्र

डॉ.नीलम महेंद्र दान के विषय में हम सभी जानते हैं। दान , अर्थात देने का भाव  , अर्पण करने की निष्काम भावना । हिन्दू धर्म में दान चार प्रकार के बताए गए हैं  , अन्न दान ,औषध दान , ज्ञान दान एवं अभयदान  एवं आधुनिक परिप्रेक्ष्य में अंगदान का भी विशेष महत्व है। दान एक ऐसा कार्य , जिसके द्वारा हम न केवल धर्म का पालन करते हैं बल्कि समाज एवं प्राणी मात्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन भी करते हैं। किन्तु दान की महिमा तभी होती है जब वह निस्वार्थ भाव से किया जाता है अगर कुछ पाने की लालसा ..

नये भारत की नींव लोकमंथन - डाँ नीलम महेंद्र 

डॉ.नीलम महेंद्र  "कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी "! आगामी 12 ,13 ,14  नवंबर को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में लोकमंथन कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है। जैसा कि इस आयोजन का नाम अपने विषय में स्वयं ही बता रहा है लोक के साथ मंथन । किसी भी समाज की उन्नति में  विचार विमर्श एवं चिंतन का एक महत्वपूर्ण स्थान होता है और जब इस मंथन में  लोक शामिल होता है तो वह उस राष्ट्र के भविष्य के लिए सोने पर सुहागा सिद्ध होता है। लेकिन यहाँ प्रश्न यह उठता है कि राष्ट्र क्या है ? आज के इस दौर में ..

स्वान्त्र्योत्तर भारत का सर्वाधिक बड़ा निर्णय   

  प्रवीण गुगनानी  कालखंड या समय या इतिहास को हम दो भागों में विभाजित करते हैं, एक bc अर्थात बिफोर क्राइस्ट और दुसरे dc अर्थात एन्नो डोमिनी. इसी प्रकार अब यह सुनिश्चित हो गया है कि स्वातंत्र्योत्तर भारत की अर्थव्यवस्था अब दो कालखंडो से जानी जायेगी एक नरेंद्र मोदी के पूर्व 500-1000 के नोटों के बंद होने के पूर्व की भारतीय अर्थव्यवस्था और दुसरी नरेंद्र मोदी द्वारा इस प्रतिबंध के बाद की भारतीय अर्थव्यवस्था.                ..

खंडवा में आतंकी के जनाजे में साढ़े तीन हजार – पीछे छुपा सन्देश ! – डॉ. राहुल रंजन

  आतंकी का जनाजा  एक मारोगे तो सौ पैदा होंगे, किन्तु यहाँ तो हजारों पैदा हो गए ! आठ आतंकियों के मारे जाने के बाद जब इनका जनाजा खंडवा में निकला तो हजारों शामिल हुए, मानो किसी वीर का जनाजा हो ! यह नजारा प्रमाणित करता है कि आतंकियों की संख्या..

भरत मुनि के नाट्यशास्‍त्र से लोकमंथन तक : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

डॉ . मयंक चतुर्वेदी   मध्‍यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 12 से 14 नवम्‍बर तक आयोजित होने वाले लोकमंथन में जहाँ देश के वर्तमान मुद्दों पर विचार-विमर्श और मनन-चिन्तन होगा, भारत के उत्कर्ष के सभी आयाम विस्‍तार लेंगे, वहीं इसका कलामंच देश की कला संस्कृति का भी पोषण करेगा ।जब भारतीय कला संस्कृति की बात हो तब भरत मुनि को कोई भूला दे ऐसा संभव नहीं। स्‍वभाविक भी है, व्‍यक्‍ति की पहचान उसके कर्म से होती है। एक राजा जब तक राजा है, तब तक कि वह उस पद पर विराजमान ..

लोक मंथन की प्राचीन परंपरा और अधुनातन राष्‍ट्रीय आयोजन : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी  मंथन भारत का आधारभूत तत्‍व है, इसलिए विमर्श के बिना भारत की कल्‍पना भी की जाएगी तो वह अधूरी प्रतीत होगी। यहां लोकतंत्र शासन व्‍यवस्‍था की सफलता का कारण भी यही है कि वेद, श्रुति, स्‍मृति, पुराण से लेकर संपूर्ण भारतीय वांग्‍मय, साहित्‍य संबंधित पुस्‍तकों और चहुंओर व्‍याप्‍त संस्‍कृति के विविध आयामों में लोक का सुख, लोक के दुख का नाश, सर्वे भवन्‍तु सुखिन: और जन हिताय-जन सुखाय की भावना ही सर्वत्र ..

भारत को असली ख़तरा आतंकवादियों से नहीं उनके मददगारों से है - डाँ नीलम महेंद्र 

  डॉ.नीलम महेंद्र दीपावली की रात जेल से भागे 8 आतंकवादी जो कि प्रतिबंधित संगठन सिमी से ताल्लुक रखते थे उन्हें मध्यप्रदेश पुलिस  8 घंटे के भीतर मार गिराने के लिए बधाई की पात्र है  । बधाई स्थानीय लोगों को भी जिन्होंने पुलिस की मदद कर के देशभक्ति का परिचय देते हुए किसी बड़ी आतंकवादी घटना रोकने में प्रशासन की मदद की । देश में यह एन्काउन्टर अपने आप में शायद ऐसा पहला आँप्रेशन है जिसमें पुलिस ने फरार होने के आठ घंटों के अन्दर ही सभी आतंकवादियों को मार गिराया हो।इन सभी का बेहद संगीन आपराधिक ..

आतंकियों की मौत पर आंसू ? - प्रमोद भार्गव

  प्रमोद भार्गव भोपाल के केंद्रीय करागार से दीपावली के शोर-शराबे का लाभ उठाकर भागे आठों आतंकियों को आठ घंटे के भीतर ढेर कर दिया गया ! यदि इन आतंकियों का काम तमाम नहीं हुआ होता तो पूरे देश पर संकट के बादल मंडरा रहे होते। इस लिहाज से इनका यही हश्र देशहित में था। जनता ने भी इनकी मौत से राहत अनुभव की है। इनमें से तीन आतंकी तीन साल पहले 2013 में दिवाली की रात ही खण्डवा जेल तोड़कर भाग निकले थे। यहां से नौ दो ग्यारह होने के बाद कई बम विस्फोट किए, बैंक लूटे और आतंक रोधी दस्ते के पुलिसकर्मियों की ..

बच्चा चुराने वालों को अब आजीवन कारावास : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

डॉ. मयंक चतुर्वेदी  केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पिछले दिनों मानव तस्करी रोधी विधेयक के मसौदे को कैबिनेट के पास भेजा है, जिसमें मानव तस्करी के मामलों में दोषी पाए जाने पर हत्या करने या हत्या के प्रयासों के लिए दी जाने वाली सजा के समकक्ष तक सजा देने का प्रावधान है ! वर्तमान भारत एशिया में मानव तस्करी का गढ़ बन गया है। यह निष्कर्ष संयुक्त राष्ट्र नशीली दवा और अपराध कार्यालय के हैं।  इस संदर्भ में आज से दो वर्ष पूर्व आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे भारत मानव तस्करी ..

हकीकत न बन जाए उनका मुगलिस्तान का सपना – व्ही. के. गौर (सेवानिवृत्त आईजी, बीएसएफ)

ढाका में कट्टरपंथी इस्लामवादियों द्वारा हाल ही में हुईं आतंकवादी हिंसा खतरनाक है। राजनीतिक षड्यंत्र, बांग्लादेश में उथल-पुथल और हमारे सीमावर्ती राज्यों में नियमित रूप से होने वाली घुसपैठ इन सबने मिलकर गंभीर सुरक्षा समस्या पैदा कर दी है । शेख हसीना की सत्ता में वापसी से पहले तक बांग्लादेश में भारत विरोधी शासन था, जिसने अपनी भारत विरोधी मुहिम के चलते कट्टरपंथियों को प्रोत्साहित किया । उन दिनों पूर्वोत्तर के कई उग्रवादी और अलगाववादी समूहों के लिए बांग्लादेश सुरक्षित अभयारण्य हो गया । खालिदा जिया के प्रधानमंत्..

देश और समाज हित में संघ का समग्र चिंतन - लोकेन्द्र सिंह

विजयादशमी  के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक का उद्बोधन स्वयंसेवकों के लिए पाथेय का काम करता है। संघ की स्थापना को 91 वर्ष पूर्ण हो गए हैं। इन वर्षों में संघ का इतना अधिक विस्तार हो चुका है कि विजयादशमी का उद्बोधन स्वयंसेवकों के लिए ही ..

समान नागरिक आचार संहिता : आज की जरूरत

समान नागरिक आचार संहिता का मुद्दा आज एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है. वर्तमान केन्द्र सरकार ने कानून आयोग को इस संहिता को लागू करने के लिए आवश्यक सभी पहलुओं पर विचार करने को कहा है. दरअसल यह मुद्दा आज का नहीं है. यह अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है...

सर्जिकल स्ट्राइक : शक्ति की उपासना का प्रकटीकरण - लोकेन्द्र सिंह

फाइल फोटो   आज  से नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं। शक्ति की उपासना का पर्व। भारत के पर्व उसकी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रत्येक पर्व अपने साथ सामाजिक संदेश लेकर आता है। यह सुयोग ही है कि शक्ति पर्व के प्रारंभ से पहले पाकिस्तान में पनाह लिए आतंकवादियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करके भारत ने दुनिया को बता दिया कि वह शास्त्र के साथ शस्त्र का भी धारण करता है। हम देखें तो पाएंगे कि हमारे प्रत्येक देवी-देवता शस्त्र और शास्त्र दोनों धारण करते हैं। स्पष्ट संदेश है कि अकेला शस्त्र खतरनाक ..

विवेकानंद जी की भविष्यवाणी - सुदर्शन जी की जुबानी !

1894 – 95 में स्वामी विवेकानंद ने अपने गुरू भाईयों को लिखे पत्र में कहा था – 1836 में जब स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जन्म हुआ, तो एक युग परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई, एक स्वर्णयुग का प्रारम्भ हुआ ! युग संधि का काल 175 वर्ष का होता है ! जैसे..

भारत आतंकवाद के खिलाफ है किसी देश के नहीं - डॉ नीलम महेंद्र

विश्व इस बात को भूला नहीं है कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की धरती पर ही मारा गया था । भारत का मोस्ट वान्टेड अपराधी दाउद को भी पाक में ही पनाह मिली हुई है। आज यह भारत की उपलब्धि है कि वह विश्व को यह भरोसा दिलाने में कामयाब हुआ है कि इस प्रकार की सैन्य कार्यवाही किसी देश के खिलाफ न होकर केवल आतंकवाद के खिलाफ है। डॉ.नीलममहेन्द्रा जी की लेखनी से सृजित आलेख पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है, मानो वे रणभूमि का आँखों देखा हाल बयान कर रही हों !..

यूजीसी के अध्यक्ष का एबीवीपी ने फूंका पुतला

लखनऊ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) द्वारा एमफिल और पीएचडी छात्रों को दी जाने वाली नॉन-नेट फेलोशिप खत्म करने के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने लखनऊ विश्वविद्यालय के परिसर में शनिवार को यूजीसी के अध्यक्ष का पुतला दहन किया। ..

लक्ष्मण राव जी का सड़क दुर्घटना में निधन

जबलपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख एवं वर्तमान में क्रीड़ा भारती के अखिल भारतीय कार्यकारी अध्यक्ष के बारे में कहा जाता कि वे साधारण-से-साधारण दिखते हैं, परंतु असाधारण कर्तृव के धनी हैं. समय के पाबन्द, अपने ध्ये..