आलेख

रहिमन विपदा हू भली, जो थोरे दिन होय !

         -जयराम शुक्ल        संकट के समय मनुष्य दार्शनिक बन जाता है। एकांतवास में नाना प्रकार के विचार आते रहते है- सोचो आखिर साथ क्या जाएगा। मुट्ठी बाँधे आया है.. हाथ पसारे जाएगा। आया है तो जाएगा राज..

कोरोना वायरस से निपटने हेतु केन्द्र सरकार ले रही कई आर्थिक निर्णय

     - - प्रह्लाद सबनानी    अब तो यह सर्व विदित ही है कि विश्व स्वास्थ संगठन ने कोरोना वायरस को विश्व में महामारी घोषित कर दिया है। विश्व मे कई देशों यथा चीन, इटली, स्पेन, ईरान, अमेरिका एवं अन्य कई यूरोपीयन देशों में तो कोरोना ..

मोदी 33 करोड़ परिवारों के सदस्य नहीं मुखिया बन गये हैं

     - प्रवीन गुगनानी      कोरोना वायरस संकट के कारण देश में लगाए गए 21 दिनों के लॉकडाउन को देखते हुए मोदी सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विश्व के सबसे बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा की। इसके साथ ही मोदी जी ने जी 20 ..

कोरोना वायरस : संयम और संकल्प से जीतेगा भारत

        - प्रांशु राने  (अप्रतिम)      कोरोना' पिछले कुछ दिनों में अधिकतर लोगों द्वारा बोले गए शब्दो में से शायद सबसे ज्यादा बार बोला गया शब्द होगा। चीन के वुहान से जिस कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरुआत हुई और..

चौथी बार भी शिवराज इसलिए..!

     -जयराम शुक्ल       मध्यप्रदेश से कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का तो जाना पहले दिन से ही तय था, पर इसकी कल्पना तक न थी कि नये मुख्यमंत्री ऐसे भुतहे सन्नाटे में शपथ लेंगे जब पंडाल के ऊपर  करोना महाम..

कुशाभाऊ ठाकरे का नाम हटाना चंदूलाल जी का सम्मान नहीं

  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नाम संजय द्विवेदी का खुला पत्र सेवा में, श्री भूपेश बघेल जी मुख्यमंत्रीः छत्तीसगढ़ शासन, रायपुर    आदरणीय भूपेश जी,  सादर नमस्कार,     आशा है आप..

जलती रहेगी लोहिया के विचारों की मशाल

          - जयराम शुक्ल       राजनीति ऐसा तिलस्म है कभी सपनों को यथार्थ में बदल देता है तो कभी यथार्थ को काँच की तरह चूर चूर कर देता है। काँग्रेसमुक्त भारत की सोच डाक्टर राममनोहर लोहिया की थी। आज देश लगभग..

यदि गांधीजी और संघ का स्वदेशी मंत्र चलता तो कोरोना का इतना कहर न होता

      - रमेश शर्मा    चीन से निकला कोरोना वायरस पूरी दुनिया में मानों एक कहर बन गया है। दुनिया के 162 देश इसकी चपेट में है और यूनेस्कों ने इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया है। भारत उन सौभाग्यशाली देशों में है जहां इसका प्रभा..

सिंधिया की आमद से मप्र में निखरेगी कमल सरोवर की छटा

           कृष्णमोहन झा             पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मध्यप्रदेश में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे  ज्योतिरादित्य सिंधिया गत विधानसभा चुनाव के बाद जब प्रदेश में 15 सालों के ब..

कोरोना एक अद्र्श्य सेना के खिलाफ लड़ाई है

         -  डॉ नीलम महेंद्र        कोरोना से विश्व पर क्या असर हुआ है इसकी बानगी अमरीकी राष्ट्रपति का यह बयान है कि, "विश्व कोरोना वायरस की एक अदृश्य सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है।" चीन के वुहान से शुरू होने वाली कोरोना नामक यह बीमारी जो अब महामारी का रूप ले चुकी है आज अकेले चीन ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए परेशानी का सबब बन गई है। लेकिन इसका सबसे अधिक चिंताजनक पहलू यह है कि वैश्वीकरण की वर्तमान परिस्थितियों में यह बीमारी समू..

गो कोरोना... हम तैयार हैं

मृदुल त्यागी पूरी दुनिया इस समय ताज्जुब में है. दुनिया में आबादी के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा देश भारत कोरोना से कैसे निपट रहा है. मोदी सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के चलते कोरोना अब तक महामारी का रूप नहीं ले सका. कोरोना से निबटने के लिए भारत द्वारा किए प्रयासों के लिए दुनिया भर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा हो रही है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे अच्छा देश इटली इस समय लाशों के ढेर पर बैठा है. 2020 इतिहास में कोरोना वायरस के लिए याद रखा जाएगा. चीन ..

स्वच्छ भारत अभियान के आर्थिक लाभ, दूसरे चरण की सफलता के चार आधार-स्तंभ

निष्ठा अनुश्री  शहरी अर्थव्यवस्था में स्वच्छ भारत अभियान की भूमिका बताते हुए केंद्रीय आवास व शहरी मामले मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि 2030 तक भारत की शहरी आबादी 60 करोड़ यानी देश की जनसंख्या का 40 प्रतिशत हो जाएगी। ऐसा होने के बाद “शहरी क्..

स्वामी विवेकानंद का ‘प्लेग मैनिफेस्टो’: कोरोनावायरस जैसी हर महामारी के दौरान एक सबक है

निखिल यादव जब दुनिया के दुनिया के 100 से भी ज्यादा देश कोरोनावायरस के संक्रमण से जूझ रहे हैं तब 1899 में बंगाल में आए प्लेग (महामारी) और स्वामी विवेकानंद के ‘प्लेग मैनिफेस्टो‘ को याद करने का समय है. उनका यह मैनिफेस्टो हमें मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक रूप से समस्याओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है   इस प्रकार की चिकित्सा आपात स्थिति भारत या दुनिया के लिए पूरी तरह से नई नहीं है, उचित दवाइयां विकसित करने में कुछ और महीने लग सकते हैं, घबराएं नहीं, धैर्य रखें.   स्वामी ..

विकलांग क्रांतिवीर चारुचंद्र बोस

बंगाल के क्रांतिकारियों की निगाह में अलीपुर का सरकारी वकील आशुतोष विश्वास बहुत समय से खटक रहा था। देशभक्तों को पकड़वाने, उन पर झूठे मुकदमे लादने तथा फिर उन्हें कड़ी सजा दिलवाने में वह अपनी कानूनी बुद्धि का पूरा उपयोग कर रहा था। ब्रिटिश शासन के लिए वह एक प..

भंवर के ‘मध्य’ कांग्रेस

  रंग में भंग पड़ेगा, यह निश्चित था। अंतत: होली के दिन मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार का रंग उतर ही गया। ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए   इस घटनाक्रम के दो महत्वपूर्ण पक्ष हैं। पहला, यह ऐसी घटना है जहां सिंधिया पर एक अंगुली उठाते ही चार अंगुलियां कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व, या कहिए सोनिया गांधी की ओर उठती हैं। कांग्रेस के कर्णधार सिंधिया पर मौकापरस्त या पदलोलुप होने का आरोप नहीं मढ़ सकते। राज्यसभा का पद एक बात है किन्तु बात सिर्फ इतनी भर नहीं थी। यह जनता के ..

कच्चे तेल की क़ीमतों में हो रही भारी कमी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

प्रहलाद सबनानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 30 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसका फायदा अब आम भारतीयों को भी मिलने लगा है। भारत में भी पेट्रोल और डीजल की क़ीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. तेल निर्यातक देशों के समूह ओपेक द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती कर बाजार में संतुलन बनाने के लिए रूस को मनाने में विफल रहने के बाद ओपेक के प्रमुख सदस्य देश सऊदी अरब ने सस्ते दाम पर तेल बेचने का फैसला लिया है जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम काफी नीचे आ गए ..

जवाहरलाल नेहरू ने सावरकर का कभी तिरस्कार नहीं किया

  नई दिल्ली. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सुबनसर हॉस्टल के नजदीक एक सड़क का नाम बदलकर वीर सावरकर मार्ग किया गया है. विश्वविद्यालय के वामपंथी व कांग्रेसी छात्रों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. जेएनयूसू की अध्यक्ष आइशी घोष ने अपने ट्विटर हैंडल से..

ददलानी का देशद्रोही दर्द, बॉलीवुड की जिहादी मानसिकता

 कांग्रेस समर्थित वामपंथी वैचारिक वायरस कोने-कोने में समाए हुए हैं. जब इनके वैचारिक आतंक को चुनौती मिलती है, तो ये बिलबिला उठते हैं. समाज और देश के हर तबके में इनके वैचारिक आतंक के खिलाफ विद्रोह है. इस्लामिक जिहाद, विभाजनकारी और विध्वंसकारी सोच के ..

भारतीय बैंकिंग उद्योग में रेग्युलेटर की भूमिका है महत्वपूर्ण

      - प्रह्लाद सबनानी      अभी हाल ही के समय में देश के कुछ बैंकिंग संस्थानों में कुछ वित्तीय समस्याएँ उभर कर सामने आई हैं। इनमें मुख्य रूप से येस बैंक, पंजाब एवं महाराष्ट्र कोआपरेटिव बैंक एवं आईएलएंडएफएस का नाम यहाँ लि..

“वीर उधम सिंह” जिन्होंने जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड का बदला लिया / इतिहास स्मृति -13 मार्च 1940

अमर शहीद ऊधम सिंह ने 13 अप्रैल, 1919 ई. को पंजाब में हुए भीषण जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के उत्तरदायी माइकल ओ’डायर की लंदन में गोली मारकर हत्या करके निर्दोष भारतीय लोगों की मौत का बदला लिया था। स्वतंत्र..

शाहीनबाग की शेरनियाँ क्या बिलों में लौट गईं हैं? हंगामे के बाद रह गए कुछ अनुत्तरित प्रश्न

मैं न्यूज़ चैनल न के बराबर देखता हूँ। सामाजिक सरोकारों की पत्रकारिता के नाम पर जिन्हें पहले बड़ा ईमानदार एंकर-पत्रकार मानते थे, उनके एकतरफा आलापों ने पूरे देश को ही निराश किया है। उनकी सेक्युलर सच्चाई उजागर हो चुकी है। फिर भी कभी-कभार चैनलों पर ताका-..

मज़बूत है भारतीय बैंकिंग उद्योग, सुरक्षित हैं बैंकों के ग्राहकों के हित

      - प्रह्लाद सबनानी      हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक ने निजी क्षेत्र के एक बैंक, येस बैंक, के लेनदेन पर अधिस्थगन का आदेश दिया है। इस अधिस्थगन आदेश के अनुसार, इस बैंक के जमाकर्ता, अगले आदेश तक, रुपए 50,000 तक की जमा..

हम पाखंडी जनम जनम के!- महिला दिवस विशेष

     - जयराम शुक्ल       "लछमी देवी दर दर भटकें  बेबस निर्धन चार टके को दुर्गा पर गुंडे लहटे हैंं निर्बल  अबला जान समझ के। सरस्वती को दिया मजूरी   डाट दपटकर बेलदार ने, लिया अँगूठा मस्टर बुक पर ..

विश्व महिला दिवस विशेष- स्री पुरुष के समग्र चिंतन का प्रतीक है अर्द्धनारीश्वर की हिंदू अवधारणा 

कृतिका गुगनानी   हिंदू परम्परा के परिवारों में सामान्यतः पितृसत्तात्मक समाज ही होते हैं, किंतु इसके साथ साथ सदा से यह स्थापना भी रही कि नारी प्रथम प्रणाम की अधिकारी है. इसके फलस्वरूप ही लिखा गया कि – पूजनीय आधारभूते मातृशक्ति ..

दंगों के इंजीनियर

-हितेश शंकर दिल्ली में दंगे हुए, लेकिन इन्हें केवल दंगे कहना सही नहीं होगा। वास्तव में यह सुविचारित हिंसा थी जिसका खाका कुछ लोग पहले से खींचे बैठे थे। किसी सैन्य मुहिम की तरह भारत विरोधी ताकतें अपना-अपना मोर्चा संभाले थीं   नागरिकता (संशोधन) कानून (सीएए) पारित होने के बाद देश में जो माहौल रचा गया उससे यह साफ था कि देश में सामान्य जनजीवन में उथल-पुथल पैदा करने और संवैधानिक संस्थाओं पर हल्ला बोलने निकली टुकड़ियां इस बार हद पार करने का मन बना चुकी हैं। किसी सैन्य मुहिम की तरह भारत विरोधी ..

सीएए:अब आगे क्या     

  -जयराम शुक्ल अब तो और भी दृढ़ता से आगे बढ़ना होगा..!   यह स्वाभाविक ही है कि जब शरीर पर चोट का बड़ा घाव हो जाता है तब फोड़े-फुंसी,सर्दी-जुखाम की तकलीफें दब जाती हैं। दंगे ने सीएए के फिलहाल दबा दिया है। बुधवार को राहुल गांधी उत्तर-पूर्व दिल्ली की राख फूल उठा आए हैं। केजरीवाल की सरकार बर्बाद हुए परिवारों का लेखा लगा रही है। भाजपाई फरार दंगाखोरों की सुराग लगाने में लगे हैं। इधर दंगों पर वक्तव्य और गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की माँग को लेकर संसद ठप्प है। नागरिक संशोधन कानून को लेकर शाहीनबाग, ..

नीमड़ा का नरसंहार

अंग्रेजी शासन में देशवासी अंग्रेजों के साथ-साथ उनकी शह पर पलने वाले सामंतों के शोषण से भी त्रस्त थे। वनों और पर्वतों में रहने वाले सरल स्वभाव के निर्धन किसान, श्रमिक, वनवासी तथा गिरिवासी इस शोषण के सबसे अधिक शिकार होते थे।राजस्थान में गोविन्द गुरु ने धार्..

कोरोना वाइरस और भारतीय अर्थव्यवस्था

    - प्रह्लाद सबनानी    देश की वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन ने संसद में बजट पर चर्चा के दौरान कहा था कि अर्थव्यवस्था के बुरे दिन अब ख़त्म होने वाले हैं और सुधार के संकेत अब साफ़ दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने उस समय सुधरती वै..

संबंधों के नए युग की शुरुआत

शिवप्रकाश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले बर्ष अमेरिक यात्रा के दौरान उनका स्वागत ह्युस्टन में “हाउडी मोदी “ कार्यक्रम के माध्यम से किया गया। अमेरिका में मिले इस मान सम्मान को ध्यान में रखते हुए भारत में भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अभिनंदन के लिए अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम आयोजित हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति का भारत का यह दौरा ऐतिहासिक रहा है। ऐतिहासिक इसलिए क्योंकि यह अमेरिका और भारत के संबंधों में एक नये युग की शुरूआत जैसा है। यह ..

रेणू का स्मरण हो आता है जब लेखन में संवेदनशीलता और अबोध सत्यता नहीं दिखती

साकेत सूर्येश -   आज हिंदी के मूर्धन्य लेखक, कथाकार एवं पत्रकार फणीश्वर नाथ रेणु का जन्मदिन है। एक सशक्त, संवेदनशील बुद्धिजीवी वह प्रकाशपुंज होता है जिसे जाने के पश्चात् याद करने पर यह हर्ष भी होता है कि एक समय हमारा समाज ऐसी महान विभूति के स्नेह स..

राष्‍ट्रबोध का सर्वोच्‍च विचार रखनेवाले हमारे बलदेव भाई जी : डॉ. मयंक चतुर्वेदी 

    हम धन्य है इस जग जननी कि, सेवा का अवसर है पाया इसकी माटी, वायु, जल से, दुर्लभ जीवन है विकसाया यहाँ पुष्प उसी के चरणों में, माँ प्राणों से भी प्यारी है मन मस्त फकीरी धारी है अब एक ही धुन जय जय भारत ।  जब-जब प्रो. बलदेव भाई का स्&..

एमपी और छत्तीसगढ़ से लगे अमरकंटक के जंगलों में माओवादी बना रहे सुरक्षित ठिकाने

  अमरकंटक के जंगल झारखण्ड, उड़ीसा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों  की सीमा से लगे हुए हैं जो कि माओवादियों को एक सुरक्षित रास्ता उपलब्ध करवाता है। छत्तीसगढ़ के पुलिस अधिकारी के मुताबिक भाकपा के माओवादी बस्तर के दक्षिण अबूझमाड़ के जंगलों ..

समाज की कहानियां सामने लाएगीं ये शॉर्ट फिल्में

चित्र भारती राष्ट्रीय फिल्म समारोह में नामी फिल्म  निर्माता सुभाष घई ने की मन की बात ग्वालियर। हीरो, कर्मा, कालीचरण, सौदागर, परदेश और ताल जैसी सुपरहिट फिल्में बनाने वाले सुभाष घई वो नामी निर्माता निर्देशक हैं जो राजकपूर के बाद मुंबई सिनेमा में शोमैन..

भारत की साख बढ़ी, उन्मादी बौखलाए

हितेश शंकर - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत दौरा ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि कई प्रकार के भ्रम तोड़ने वाला है। यह दौरा इसलिए भी याद किया जाएगा कि अमेरिका, जिसे लोग एक महाशक्ति के तौर पर, दुनियाभर में चौधराहट कायम करने की इच्छुक शक्ति के तौर पर देखते हैं; इस दौरे में अमेरिका की वह छवि टूटती दिखाई देती है। भारत के साथ 3 अरब डॉलर का अपाचे और रोमियो हेलीकॉप्टर सौदा या मिसाइल प्रतिरक्षा कवच की खरीद की बातचीत अगर एक ओर रख दें तब भी ऊर्जा, चिकित्सा एवं अंतरिक्ष के क्षेत्र में तथा मादक पदार्थ व आतंकवाद ..

करगिल युद्ध का सूरमा संजय कुमार

भारत माता वीरों की जननी है। इसकी कोख में एक से बढ़कर एक वीर पले हैं। ऐसा ही एक वीर है संजय कुमार, जिसने करगिल के युद्ध में अद्भुत पराक्रम दिखाया। इसके लिए भारत के राष्ट्रपति महोदय ने उसे युद्धकाल में अनुपम शौर्य के प्रदर्शन पर दिया जाने वाला सबसे बड़ा पुर..

जब गोवध के ख़िलाफ़ हिंदुओं के साथ मिलकर खड़े हुए मुसलमान

  -शिवकुमार विवेक आने वाले सितंबर में रतौना आंदोलन के सौ साल पूरे हो रहे हैं। यह समाज के एक ऐसे आंदोलन की याद है जिसने वर्ष १९२० में ज़िद्दी ब्रिटिश सरकार को झुकने को मजबूर कर दिया था। रतौना आंदोलन हिंदू मुस्लिम एकता का सेतुबंधष् के मुताबिक सागर की..

बलदेव भाई शर्मा होने का मतलब

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नए कुलपति का चयन क्यों है महत्त्वपूर्ण -प्रो.संजय द्विवेदी हिंदी पत्रकारिता के विनम्र सेवकों की सूची जब भी बनेगी उसमें प्रो. बलदेव भाई शर्मा का नाम अनिवार्य रूप से शामिल होगा। ऐसा इसलिए नहीं कि उन्हें रायपुर स्थ..

मुस्लिम समाज, गैर-मुस्लिमों, सरकार, विपक्ष, सबके लिए शाहीनबाग-जाफराबाद के सबक

विजय मनोहर तिवारी  दिल्ली का दंगा सबके लिए कुछ कड़वे सबक छोड़ गया है, बशर्ते हम देखना चाहें। सबसे पहले तो यह धारणा दूर हो जानी चाहिए कि गंगा-जमनी जैसी कोई संस्कृति भारत में है। यह एक छलावा है, जो मस्जिद के सामने निकली एक शोभायात्रा या एक हिंदू-मुस्लिम..

धार्मिक स्थल बने ईरान और दक्षिण कोरिया में कोरोनावायरस के फैलाव का कारण

निष्ठा अनुश्री चीन के बाद कोरोनावायरस सबसे अधिक ईरान और दक्षिण कोरिया में फैला है और संयोगवश दोनों ही देशों में इसके फैलाव का केंद्र धार्मिक स्थल रहे। दक्षिण कोरिया में संक्रमण से प्रभावित लोगों की संख्या 4,212 और मरने वालों की संख्या 22 पहुँच गई है। ..

पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर – भूल और सुधार

      - देवेश खंडेलवाल    प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव का कार्यकाल जम्मू और कश्मीर के लिए अनेक उतार-चढ़ावों वाला था. एक तरफ कश्मीर घाटी से हिन्दुओं का नरसंहार और निष्कासन लगातार जारी था. वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान अधिकृत जम्..

सरकार और प्रशासन की नाकामी है दिल्ली दंगे  

    - डॉ नीलम महेंद्र    शाहीनबाग़ संयोग या प्रयोग हो सकता है लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान देश की राजधानी में होने वाले दंगे संयोग कतई नहीं हो सकते। अब तक इन दंगों में एक पुलिसकर्मी और एक इंटेलीजेंस कर्मी समे..

आतंक के अंधड़ में अमृत की दो बातें

ढाई महीने से देश में जो मचा है और चार दिन से दिल्ली में जो चला है, उससे सबके मन खराब हैं। दंगाइयों के हाथों दो स्कूलों के जलाने की खबर आई तो लगा कि नालंदा और विक्रमशिला फिर राख हो गए। वे जाहिल बाहरी लुटेरे-हमलावर थे। अपना वैचारिक कूड़ा फैलाकर वे कम्बख्त ..

सालों से मुसलमानों के दिमाग में भरे जा रहे जहर की उपज हैं दिल्ली के दंगे

  आखिर एक शाम में ऐसा क्या हुआ कि दंगों से कोसों दूर रहने वाली दिल्ली की जनता अचानकआग की लपटों में घिर गई? आखिर कैसे अचानक शुरू हुए दंगों में टनों पत्थर फेंके गए, सैकड़ों पेट्रोल बम चले और अंधाधुंध फायरिंग की गई? दिल्ली में अचानक भीड़ सड़कों पर निक..

जावेद अख्तर के नाम एक पैगाम- सेक्युलर शायर का झीना लिबास तार-तार हो चुका है

विजय मनोहर तिवारी  किसी शायर या अफसानानिगार के भीतर का दर्द ही उसकी शायरी और कथा-कहानी में अलफाजों की शक्ल लेता है। जावेद अख्तर फिल्मों में लिखते थे। पता नहीं कब शायर हो गए। पता नहीं पहले शायर थे और फिल्मों में लिखने बाद में गए। उनके पिता जांनिसार अ..

विभाजित करने के लिए उठे कदम

        - इ. राजेश पाठक    भारत में नागरिकता  संशोधन कानून [सीएए] को लेकर सेकुलरों के विरोध के बीच पिछले दिनों पाकिस्तान से खबर आयी है  कि जिस हिन्दू लड़की महक नें मुल्लाओं के दवाब में २१ जनवरी को कोर्ट में ये म..

शिवमूर्तियों के अपमान से लोक आस्था को पहुंचाई जा रही ठेस

  शिमला, वि.सं.कें.। प्रदेश में योजनाबद्ध तरीके से शिवप्रतीकों के साथ अपमान की घटनायें सामने आने से लोक आस्था को भारी क्षति पहुचाने साजिश की जा रही है। ताजा मामला धर्मशाला के नगर निगम के वार्ड सिद्धपुर का है। इस मंदिर में शिवलिंग एवं उनके प्रतीकों..

सावरकर को क्यों दुश्मन मानते हैं कांग्रेस और वामपंथी ?

दुनिया यह जानती है कि बेगुनाहों की जान लेते हुए भी दिल में जन्नत और बहत्तर हूरों का ख्वाब पालने वाला कोई इस्लामी जिहादी भले हो, सामान्य इंसान नहीं हो सकता!लेकिन मरने वाले की कलाई पर कलावा बंधा हो तो बात उलझ सकती है! मुंबई हमला दुनिया को उलझन में डालने व..

गोकाष्ठ का सफल भोपाल मॉडल- गाय के गोबर से बनी लकड़ी खप रही शवदाह गृहों में

विजय मनोहर तिवारी  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे छोटे-से गाँव मुगलिया छाप में 30 वर्षीय अजय पाटीदार महामृत्युजंय गोशाला समिति के कार्यकर्ता ने गोकाष्ठ के एक नए प्रयोग को सफल भोपाल-मॉडल बना दिया है। बूढ़ी और बीमार गायों की देखरेख के लिए वैसे तो..

ताज महल नहीं, काश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नालंदा या विजयनगर जाते-विजय मनोहर तिवारी

मैंने भारत की औसत आठ बार लगातार यात्राएँ की हैं। कुछ राज्यों में 10 या इससे अधिक बार जाना हुआ है। उत्तर प्रदेश ऐसा ही एक राज्य है, जहाँ कई बार गया हूँ। लगभग सारे बड़े शहरों में घूमा हूँ। दूर देहातों में भी गया हूँ। बेशक आगरा भी इनमें से एक है। मै..

आदिवासी या वनवासी हिन्दू कैसे नहीं है?

     - रमेश शर्मा    इन दिनों पूरे देश में एक और भी बड़ी बहस आरंभ हो गई है। वह है कि क्या भारत के वनवासी जिन्हें अंग्रेजों ने आदिवासी नाम दिया, का संबंध हिंदु धर्म से है या नहीं। यह बहस उस चर्चा के बाद आरंभ हुई जब मीडिया में य..

पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर – भूल और सुधार

प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव का कार्यकाल जम्मू और कश्मीर के लिए अनेक उतार-चढ़ावों वाला था. एक तरफ कश्मीर घाटी से हिन्दुओं का नरसंहार और निष्कासन लगातार जारी था. वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में भारत के खिलाफ आतंकवादियों के प्..

जयंती विशेष: हिंदुत्व के गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज

छत्रपति शिवाजी जैसे आदर्श शासक और संगठक विश्व के इतिहास में दूसरे नहीं मिलते हैं। उन्होंने एक राजा के तौर पर निष्पक्ष शासन किया और एक सेनापति के नाते हर सैनिक का ऐसा मनोबल बढ़ाया कि पलक झपकते ही दुश्मन ढेर हो जाते थे। आज शिवाजी महाराज की जयंती है। शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 में शिवनेरी दुर्ग में हुआ था   भारत की पवित्र माटी में जन्मे छत्रपति शिवाजी महाराज साहस, राजकौशल और कुशल प्रशासक की सनातन प्रतिमूर्ति थे। उन जैसा योजनाकार और संगठनकर्ता कहीं नहीं दिखते हैं। उन्होंने अनेक उतार-चढ़ावों ..

लघु और सीमांत किसानों की ओर देना होगा विशेष ध्यान

प्रह्लाद सबनानी कृषि जनगणना 2015-16 के अनुसार, भारत में लघु एवं सीमांत किसानों की संख्या 12.563 करोड़ है। देश में 35 प्रतिशत किसानों के पास 0.4 हेक्टेयर से कम जमीन है। जबकि 69 प्रतिशत किसानों के पास 1 हेक्टेयर से कम जमीन है और 87 प्रतिशत किसानों के ..

पाकिस्तान: गले की हड्डी बने हाफ़िज़ सईद के गले में कानून का फंदा

कृष्णमोहन झा/   भारत द्वारा मुंबई में हुए भयावह आतंकी हमले की साजिश रचने वाले कुख्यात आतंकी मास्टरमाइंड हाफिज सईद के विरुद्ध अनेकों पुख्ता सबूत देने के बावजूद पाकिस्तान सरकार ने उसे हमेशा संरक्षण प्रदान किया है। इतना ही नही पाकिस्तान ने उसे देशभर में रैलियां कर भारत के विरुद्ध जहर घोलने क की भी खुली छूट भी प्रदान की हुई है ,परंतु अब जब उसे इस कढ़वी हकीकत का एहसास हो गया कि हाफिज सईद के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई को टालते रहने से उसे फाइनेंशियल एक्शन टास्क अपनी काली सूची में डाल देने ..

हिन्दुओं के खिलाफ षड़यंत्र पर जनजातीय नेता का कमलनाथ को खुला पत्र

मध्यप्रदेश की कांग्रेस ने आदिवासियों द्वारा जनगणना में अपना धर्म हिन्दू लिखवाए जाने के आह्वाहन का विरोध करते हुए यह घोषणा की थी कि वह घर घर जाकर उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए प्रेरित करेंगे। कांग्रेस के इस रुख पर मध्यप्रदेश के वरिष्ट जनजातीय नेता एवं बैतू..

आध्यात्मिक कर्मयोगी: श्री गुरुजी भाग-2 - नरेंद्र सहगल

    भारत के प्रत्येक जिले में प्रवास करते हुए श्री गुरुजी राष्ट्रीय महत्व की समस्याओं और मुद्दों पर लोगों एवं सरकार को सचेत करते हुए भविष्य में आने वाले संकटों की जानकारी तथा उनका समाधान बताते रहते थे. दिसंबर 1951 में वैश्य कॉ..

आरक्षण पर सरकार को घेरने की कुचेष्टा कर रही कांग्रेस!

कृष्णमोहन झा/   यह बड़े आश्चर्य की बात है कि कांग्रेस पार्टी अपनी ही पूर्ववती सरकारों द्वारा अतीत में लिए गए फैसलों के लिए केंद्र की वर्तमान मोदी सरकार को घेरने का प्रयास करती रही है।1951 में स्वर्गीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पाकिस्तान के त..

आध्यात्मिक कर्मयोगी: श्री गुरुजी-भाग 1

राष्ट्राभिमुख समाज रचना के पुरोधा आदरणीय माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य ‘श्री गुरु जी’ के राष्ट्र समर्पित जीवन के अनेक प्रेरक प्रसंग हमारा मार्ग दर्शन कर सकते हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी ने ..

विविधता के मूल में एकता की अनुभूति

डॉ. मनमोहन वैद्य भारतीय समाज की कुछ विशेषताएं हजारों वर्षों की सामाजिक यात्रा के कारण उसकी पहचान बन गई हैं. इस पहचान को बनाए रखने का अर्थ है राष्ट्रीय होना. अपनी स्थापना के करीब 20 वर्ष बाद कांग्रेस ने ब्रिटिश विरोधी स्वतंत्रता आंदोलन का रूप लिया. तब..

भारत के उत्थान का आधार है सांस्कृतिक राष्ट्रजीवन-3

 भारतीय चिंतन में राष्ट्र एक महान जीवमान, स्वयंभू सांस्कृतिक इकाई है, जबकि पश्चिम में राष्ट्र को राज्य मानकर एक राजनीतिक परिकल्पना मान लिया गया है. भारतीय चिंतन के अनुसार राष्ट्र प्रकृति की एक सहज परिकल्पना के अंतर्गत ही अस्तित्व में आते ..

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अगला दशक भारत के प्रभुत्व का होगा

 21वीं सदी के तीसरे दशक में समाहित, वर्ष 2022 में भारत अपनी स्वतंत्रता के75 वर्ष पूर्ण करेगा। आज देश के अंदर ही नहीं बल्कि देश के बाहर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार कई वर्गों, अर्थशास्त्रियों, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में यह धारणा प्रबल होती जा रही ..

भारत के उत्थान का आधार है सांस्कृतिक राष्ट्रजीवन-2

नरेंद्र सहगल सामर्थ्यशाली राष्ट्रीय संस्कृति  भारतीय राष्ट्र जीवन का आधार भारत की सनातन संस्कृति न केवल भारतीयों को एकजुट रखने में सामर्थ्यशाली है, अपितु इस सार्वभौम संस्कृति में संसार के सभी राष्ट्रों को एकसूत्र में बाँधने का परमात्व तत्व भी ..

भारत के उत्थान का आधार है सांस्कृतिक राष्ट्रजीवन

नरेंद्र सहगल भारतीय राष्ट्र जीवन का आधार भारत की सनातन संस्कृति न केवल भारतीयों को एकजुट रखने में सामर्थ्यशाली है, अपितु इस सार्वभौम संस्कृति में संसार के सभी राष्ट्रों को एकसूत्र में बाँधने का परमात्व तत्व भी समाया हुआ है. भारतीय संस्कृति के चार मूलभू..

भारत के उत्थान का आधार है सांस्कृतिक राष्ट्रजीवन-1

  राष्ट्र, संस्कृति और मानवीय सभ्यता पर लंबे-लंबे भाषण देने वाले विद्वान लोग प्राय: अपने उद्बोधनों में उर्दू के प्रसिद्ध शायर इकबाल की इन पंक्तियों को दोहराना नहीं भूलते   यूनान, मिस्र, रोमा, सब मिट गए जहां से कुछ बात है कि हस्ती मिटत..

दुनिया के दरवाजे पर कोरोना वायरस की दस्तक खतरे की घंटी है

    - कृष्णमोहन झा     जानलेवा कोरोना वायरस से अब तक चीन में लगभग 400 से अधिक लोगों की असमय मौत हो गई है वही इस वायरस से संक्रमित 18 सौ से अधिक मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। चीन के जिस वुहान शहर को कोरोना वायरस के प्रको..

गांधी जी के साथ ही चला गया ‘गांधी-दर्शन’

   - नरेंद्र सहगल    महात्मा गांधी एक व्यक्ति अथवा नेता नहीं थे. भारतीय अंतर्मन के एक सशक्त हस्ताक्षर थे महात्मा जी. ‘रामराज्य’, ‘वैष्णव-जन’ एवं हिन्द स्वराज जैसे आदर्श उनकी जीवन यात्रा के घोषणा पत्र थे. स्वद..

राष्ट्र का सांस्कृतिक एकात्म - जयराम शुक्ल

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय स्वतंत्र भारत के तेजस्वी, तपस्वी व यशस्वी चिन्तकों में से एक हैं। उनके चिन्तन के मूल में लोकमंगल और राष्ट्र का कल्याण सन्निहित है। उन्होंने राष्ट्र को धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का सनातन पुंज बताते हुए राजनीति की नयी व्याख्या की।..

वर्ड ऑफ ईयर "संविधान" संसदीय सियासत का बदरंग शोर

    - डॉ अजय खेमरिया     ऑक्सफोर्ड शब्दकोश ने " संविधान"शब्द को हिंदी वर्ड ऑफ ईयर 2019 घोषित किया है।भारत में बीते बर्ष यह शब्द संसद,सुप्रीम कोर्ट और सड़क पर सर्वाधिक प्रचलित औऱ प्रतिध्वनित हुआ है।ऑक्सफोर्ड शब्दकोश हर साल इस ..

गांधीजी की हत्या के बहाने संघ का दमन करने वाला कौन? 

- रमेश शर्मा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने उद्भव के पहले दिन से राष्ट्रसेवा में संलग्र है। वह राष्ट्र संस्कृति के लिए समर्पित है। समाजसेवा उसके प्रत्येक स्वयं सेवक की प्राथमिकता में है। स्वतंत्रता के बाद संघ का राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण सबने देखा..

नव-वामपंथ का षड्यंत्र

भारत में छात्र आंदोलन इस समय सबसे नाजुक दौर में है। आम तौर पर हम यह मान कर चलते हैं कि अगर छात्र अपनी राह से भटकेगा, तो शिक्षक उसे सही रास्ता दिखाएगा। निश्चित रूप से, और कुछ परिस्थितियों में, असहमति और अविश्वास के भी क्षण पैदा होते हैं, लेकिन गुरु और शि..

प्राचीनतम सभ्यता – नर्मदा घाटी

हाल ही के दशकों में किये अन्वेषणों व खुदाइयों से नर्मदा घाटी का एक नया स्वरूप उभर कर आया है। नर्मदा घाटी से ऐसे बहुत से ऐसी शिलाएं, शिलालेख, निर्मितियां, भित्ति चित्र, तैल चित्र आदि मिलें हैं जिनसे भारतीय सभ्यता के इतिहास को नए आयाम प्राप्त होते हैं। नर..

चंदेरी की मणिमाला का जौहर, जिसे देखकर घबरा गया था बाबर, चौथी बीबी दिलावर बेगम हो गयी थी बेहोश

आज हम आप लोगो को ऐसे जौहर एवं शाके की जानकारी दे रहे जिसे देखकर बाबर भी घबरा गया था ! चंदेरी के महाराज मेदिनीराय एवं उनकी रानी मणिमाला के बलिदान पर यह लेख जरुर पढकर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं ! 27 जनबरी 1528 की रात्रि का अंतिम प्रहर समूची प..

विरोध छोटा, षड्यंत्र बड़ा

हल्ला मचाया गया, भ्रम फैलाया गया, दबाव बनाने की कोशिशें हुईं किन्तु सर्वोच्च न्यायालय ने बात साफ कर दी। नागरिकता (संशोधन) कानून (सीएए) पर तुरत-फुरत कोई रोक नहीं लगेगी !   जिस तरह सरकार विरोधी दल इस मुद्दे पर एकाएक लामबंद हुए उससे यह साफ है ..

साईं बाबा:न पाथरी के न शिरडी के,वे तो सबके हैं

कृष्णमोहन झा/ महाराष्ट्र में जब से शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एवं कांग्रेस की महा विकास आघाडी सरकार के हाथों में सत्ता की बागडोर आई है, तब से रोज नए विवादों के जन्म लेने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब इन विवादों की पहुंच उन क्षेत्रों..

संविधान के सनातन स्तंभ और सेक्युलरिज्म का सियासत

        (डॉ अजय खेमरिया)      देश भर में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध  में लोग सड़कों पर संविधान की किताब,बाबासाहब अंबेडकर की तस्वीर और तिरंगा लेकर आंदोलन कर रहे है।इस दलील के साथ कि मौजूदा केंद्र सरकार ..

हमारे लिए भी कोई रजिस्टर बनाओ सरकार ताकि हमारी भी गिनती हो सके

  बिना किसी अभिवादन के इस पत्र को शुरु करने की हमारी धृष्टता को क्षमा करते हुए हमारी भी सुनो सरकार। माना कि हमारा नाम किसी रजिस्टर में दर्ज नहीं है। हम जिंदा भी हैं या नहीं, ये किसी को पता नहीं है। हमारा आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र या किसी भी दे..

ब्रिटिश साम्राज्यवाद से जुड़ी धुन का अंत, अब बीटिंग द रिट्रीट 2020 वंदे मातरम के साथ होगा समाप्त।

अनिमेश पांडेय इस बार का गणतन्त्र दिवस काफी अनोखा होने वाला है। यदि मीडिया के सूत्रों की माने तो इस वर्ष गणतन्त्र दिवस के पश्चात 29 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी के विजय चौक पर आयोजित होने वाले बीटिंग द रिट्रीट का समापन वन्दे मातरम के साथ होगा। रक्षा मंत्रालय के एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया से कहा, “बीटिंग द रिट्रीट समारोह में हर प्रकार की धुनों के साथ प्रयोग किया जाता है। इस साल समारोह ‘एबाइड विद मी’ की बजाय ‘वंदे मातरम’ के साथ समाप्त होगा”। इस निर्णय ..

असम तक आईएलपी का विस्तार बुरा विचार क्योंकि भारत में ही वीज़ा नहीं होना चाहिए

आर जगन्नाथन पिछली सदी में बांग्लादेशियों के अनियंत्रित प्रवासन से असम में उत्पन्न संवेदनशीलताओं को देखते हुए कहीं भारत गलत निर्णय न ले ले। संजातीय असमी समूहों द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र उनकी शंकाओं क..

भड़का हुआ मुसलमान- नकली नेताओं को नहीं, आरिफ मोहम्मद जैसों को सुनने का समय

विजय मनोहर तिवारी  आशुचित्र- मुसलमान पहले वोट बैंक बनाकर साठ साल तक इस्तेमाल किए गए। ऐसा करने वाले तब सत्ता में मजे ले रहे थे। अब उन्हें संख्या का पशुबल बनाकर सड़कों पर उतार दिया गया है। ऐसा करने वाले अब सत्ता से बेदखल हैं। मुसलमानों को अपनी इस ..

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ: राष्ट्रभाव और हमले

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर फिर एक बार राजनैतिक हमलों की मानों बाढ़ आ गई है। हमला करने वालों में लगभग सभी विपक्षी दल हैं। सामान्यतया राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के किसी पदाधिकारी का बयान आया तो हमलों का सिलसिला शुरु होता है। पिछले दिनों तब संघ प्रमुख मोहन जी..

बुनियादी ढाँचे के विकास को गति दे रही है केंद्र सरकार

भारत सरकार ने देश में बुनियादी ढाँचे को विकसित करने एवं देश के आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए वर्ष 2025 तक 103 लाख करोड़ रुपए का निवेश करने का निर्णय लिया है। इसके लिए हाल ही में देश में पहली बार एक “राष्ट्रीय..

कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार: नदीमर्ग में 70 साल की महिला से लेकर 2 साल के मासूम तक को मारी गोली

      - देवेश खंडेलवाल    क्रूरता की हद पार करते हुए एक दिव्यांग सहित 11 महिलाओं, 11 पुरुषों और 2 बच्चों पर बेहद नजदीक से गोलियाँ चलाई गई। पॉइंट ब्लेंक रेंज से हिन्दुओं के सिर में गोलियाँ मारी गई थी। आतंकी यही नहीं रुके उन्..

देश में ऊर्जा के क्षेत्र में हो रही है क्रांति

हाल ही में अन्तर्राष्ट्रीय ऊर्जा संस्थान ने एक समीक्षा प्रतिवेदन जारी किया है जिसमें बताया गया है कि भारत में  95 प्रतिशत लोगों के घरों में बिजली मुहैया कराई जा चुकी है और 98 प्रतिशत परिवारों की, खाना पकाने के लिए, स्वच्छ ईंधन तक पहुँच बन गई है। सा..

श्री अपारबल सिंह कुशवाह ठाकुर साहब ....हमारे बीच नही रहे 

भाद्रपद मास के मध्य में ८ अगस्त १९३८ को लहार रोड पर भिंड से २० की.मी. दूर स्थित ग्राम लहरोली में अपारवल सिंह जी उपाख्य ठाकुर साहब का जन्म हुआ ! पिताजी चार भाई थे ! एक भाई अविवाहित तो दूसरे निसंतान ! दूसरे नंबर के अविवाहित चन्दन सिंह ही परिवार के मुखिया ..

क्या मुस्लिम महिलाएँ और बच्चे अब विपक्ष का नया हथियार हैं?

सीएए को कानून बने एक माह से ऊपर हो चुका है लेकिन विपक्ष द्वारा इसका विरोध अनवरत जारी है। बल्कि गुजरते समय के साथ विपक्ष का यह विरोध "विरोध" की सीमाओं को लांघ कर हताशा और निराशा से होता हुआ अब विद्रोह का रूप अख्तियार कर चुका है। शाहीन बाग का धरना इसी बात..

केवल 70 वर्षों में इतना राष्ट्रद्रोह - संजय तिवारी

राष्ट्रद्रोह का ऐसा खुला खेल। केवल 70 वर्षों में। अब देश के विश्वविद्यालयों से भारत विरोध का ऐसा स्वर? आखिर भारत की यह कौन सी यात्रा है? कैसी पीढ़ी पैदा हो रही है और कौन इनको पैदा कर रहा है? ये बहके हुए नासमझ लोग तो नही हैं भाई? बहुत पढ़े लिखे हैं। डिग्रि..

शाहीनबाग के शिकारी- एक बहाने के सहारे आसमान में ऊँची उड़ान भरते और घात लगाते

विजय मनोहर तिवारी  जो दिखता है, वो बिकता है। दिखाऊ माल ही बिकाऊ माल है। शाहीनबाग दिख रहा है। शाहीनबाग बिक रहा है। एक महीना हो गया। शो हाऊसफुल है। एक समीक्षा में किसी परम ज्ञानी ने शाहीन का मतलब लिखा- “एक ऐसी चिड़िया जो बहुत ऊँचाई पर उड़ती है और ..

CAA ने कर दिया विपक्ष को पुनर्जीवित 

कृष्णमोहन झा इन दिनों नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष और विपक्ष में देशभर में रैलिया धरना प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियानों का जो सिलसिला चल रहा है, वह कब और किस बिंदु पर जाकर थमेगा, इस बारे में कुछ भी निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता है। इस नए कानून के विरोध में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के जल्द ही शांत हो जाने की सरकार की उम्मीदों पर पानी फिर गया तो मोदी सरकार और उसकी मुखिया पार्टी  भारतीय जनता पार्टी को यह चिंता सताने लगी है कि विपक्षी दल इस कानून को लेकर देशभर में भ्रम का माहौल निर्मित ..

देश के आर्थिक विकास में पर्यावरण का भी रखना होगा ध्यान

      - प्रह्लाद सबनानी    किसी भी देश में आर्थिक विकास और पर्यावरण में द्वन्द काफ़ी लम्बे समय से चला आ रहा है। तेज़ गति से हो रहे आर्थिक विकास से पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव अक्सर देखा गया है। विश्व में हो रहे जलवायु परिवर..

व्यक्तित्व निर्माण में सहायक सिद्ध होता है दान

     - डॉ नीलम महेंद्र    'जो हम देते हैं वो ही हम पाते हैं ' दान के विषय में हम सभी जानते हैं। दान, अर्थात देने का भाव, अर्पण करने की निष्काम भावना। भारत वो देश है जहाँ कर्ण ने अपने अंतिम समय में अपना सोने का दांत ही या..

युवा नायक स्वामी

       - लोकेन्द्र सिंह       महज ३९ साल की आयु में दुनिया का दिल जीतकर चले जाना आसान नहीं होता। निश्चिततौर पर ऐसा कोई असाधारण व्यक्ति ही कर सकता है। असाधारण होना नायक होने का पहला और नैसर्गिक गुण है। नायक प्र..

तान्हाजी एक कम प्रसिद्ध योद्धा की शौर्य गाथा

  -  डॉ कृपा शंकर चौबे   आम तौर पर मेरी फिल्मों के रिव्यू में विशेष रुचि नहीं है,किंतु इस फ़िल्म पर बात किया जाना आवश्यक है। भारतीय इतिहास साहसी योद्धाओं के पराक्रम का धधकता इस्पाती दस्तावेज है किंतु हमारी क्षुद्रता या सीमित समझ कहि..

कर्म और कर्तव्य

      - प्रतीक बाजपेई      भारतवर्ष को आज तक जितने भी महापुरुषों ने गौरवान्वित किया है, उनमें स्वामी विवेकानन्द जी का नाम सदा आदर से लिया जाता रहा है। कर्म, ज्ञान और भक्ति का त्रिवेणी संगम हमें उनके व्यक्तित्व में दे..

‘हिन्दीपन’ से मिलेगा हिंदी को सम्मान

  - लोकेन्द्र सिंह  भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है। बल्कि, इससे इतर भी बहुत कुछ है। भाषा की अपनी पहचान है और उस पहचान से उसे बोलने वाले की पहचान भी जुड़ी होती है। यही नहीं, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक भाषा का अपना संस्कार ह..

आधुनिक विश्व मे 47 संस्कृतियां थीं, 7 बची हैं, बाकी?- संजय तिवारी

यह मैं नही कह रहा। यूनेस्को के अध्ययन की रिपोर्ट है। जिसे आज सभ्य विश्व की संज्ञा दी जा रही है इसमें अभी कुछ दशक पहले तक 47 संस्कृतियां मौजूद थीं। आज बमुश्किल 7 बची हैं। इनमें से भी 4 बिल्कुल विलोप की अवस्था मे हैं। जब यह आलेख लिख रहा हूँ तो बहुत बेचैनी..

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर हमलों के मायने

     - रमेश शर्मा     यूं तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जब वे अस्तित्व में आया और उसने राष्ट्र एवं संस्कृति के समर्थन के प्रति अपने दायित्व घोषित किए तब से आज तक एक मानसिकता विशेष के निशाने पर रहा। इसके कारण दो रहे। एक तो य..

21वीं सदी में अभी तक भारत के 21 पड़ाव

आशीष चंदोरकर आशुचित्र- 2020 की शुरुआत से पहले देखें 21वीं सदी की उन 21 घटनाओं को जिन्होंने भारत की नियति को प्रभावित किया। “इतिहास उस बिंदु पर निर्मित होता है जहाँ स्मृति की त्रुटियाँ दस्तावेजों की अप्राप्यता से मेल खा जाती हैं।”, जूलिय..

  "नेताजी और आज़ाद हिन्द फ़ौज "

यह सुस्पष्ट है की भारतीय इतिहास की बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाओं को इतिहास में इतना श्रेय नहीं दिया गया, जिसके वे हक़दार हैं | साम्यवादी इतिहासकारों ने मौर्यों ,मुग़लों और अंग्रेज़ों को तो खूब गाया, परन्तु शक्तिशाली साम्राज्यों जैसे चोला, सातवाहन, चालुक्य, विज..

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में वर्तमान मकर संक्रांति

  -  नरेन्द्र सहगल तमसो मा ज्योतिर्गमय - धारा 370 का अंधकार समाप्त असतो मा सद्गमय - श्री राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त मृत्योर्मामृतम् गमय - नागरिकता संशोधन अधिनियम, मौत का साया समाप्त पर्व/त्य..

भोपाल में सीएए समर्थन रैली में लोगों का प्रश्न- आपने यह कैसा इंडिया डिस्कवर किया है?

    - विजय मनोहर तिवारी अब तक मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर झंडे-बैनर हाथ में लिए जो भी आते थे, हारफूल चढ़ाने या ज्ञापन सौंपने के लिए ही आया करते थे। पहली बार ऐसा हुआ कि वे इस शानदार प्रतिमा के सामने से सिर्फ नारे लग..