आलेख

भारत के भाल पर उभरे चंद्र की स्तुति का अनुभव- विजय मनोहर तिवारी

मध्यप्रदेश के सागर में आयोजित हो रहा अद्वैत उत्सव       यह विश्वविद्यालयों में होने वाले सेमिनारों और कार्यशालाओं से अलग आभा का आयोजन है। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी विश्वविद्यालय में भारत की सनातन ज्ञान परंपरा के गुरुकुलों के आचार्य और..

नागरिकता विधेयक का विरोध क्यों?

  सुरेश हिन्दुस्थानी पड़ौसी देशों में धार्मिक हिंसा के शिकार होने वाले गैर मुस्लिम नागरिकों को भारत की नागरिकता देने वाले नागरिकता विधयेक से बाहर करने वाले पर वोट बैंक की स्वार्थी राजनीति करने वाले राजनीतिक दल इसके विरोध में आते जा रहे हैं। कांग्रेस ने खुले रुप में इसका विरोध कर रही है, वहीं दूसरी ओर नागरिकता विधेयक को लेकर बहुत बड़े भ्रम की स्थिति भी निर्मित करने का खेल भी चल रहा है। कांग्रेस और नागरिकता विधेयक का विरोध करने वाले अन्य दल इसे अल्पसंख्यकों के विरोध में मानकर प्रचारित कर रहे ..

अब निदान की, समाधान की राह निकली है

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार निरंतर देश व समाज हित में निर्णय ले रही है. तीन तलाक की बर्बरता और अनुच्छेद 370 के अन्याय का उपचार करने के बाद जिस तरह संसद के दूसरे ही सत्र में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर सरकार आगे बढ़ी, उससे सरकार में जनता का विश्वास..

प्रत्येक परिवार गाय का रखवाला बन जाए तो देश में आमूल परिवर्तन होंगे – डॉ. मोहन भागवत

पुणे (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि “अगर प्रत्येक परिवार गाय का रखवाला बन जाए तो देश में आमूल परिवर्तन होंगे। सारा समाज जागृत होगा। समाज की भावना जागे तो मनुष्य का जीवन ही बदल जाएगा। भारतीय संस्कृति ने ..

राष्ट्रीय कलंक का परिमार्जन

भारत में विधर्मी आक्रमणकारियों ने बड़ी संख्या में हिन्दू मन्दिरों का विध्वंस किया। स्वतन्त्रता के बाद सरकार ने मुस्लिम वोटों के लालच में ऐसी मस्जिदों, मजारों आदि को बना रहने दिया। इनमें से श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर (अयोध्या), श्रीकृष्ण जन्मभूमि (मथुरा) और क..

स्वदेशी रक्षा तकनीक को सेना से मिल रहा प्रोत्साहन, ‘मेक इन इंडिया’ आ सकता है काम

प्रमोद जोशी  गत 19 सितंबर को बेंगलुरु के एचएएल विमान पत्तन से स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस पर उड़ान भरने के बाद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अगले एक दशक में यानी 2029-30 तक भारतीय सुरक्षा बलों के पास उपलब्ध तकनीक का 75 प्रतिशत भाग स्वदेश..

मिशनरी विद्वानों के परकोटे में कैद अंबेडकर का राष्ट्रीय दर्शन

     (डॉ अजय खेमरिया)    क्या डॉ. बी.आर. अंबेडकर सिर्फ दलित नेता थे ? और थोड़ा सुने तो भारत के संविधान के निर्माता। सरकारी इश्तहारों और तथाकथित दलित विमर्श की प्रतिध्वनि इस शख्स को एक लौह आवरण में कैद करती जान पड़ती है. इस आवर..

नागरिकता संशोधन विधेयक – ‘वोट बैंक’ के सौदागरों को दर-दर भटक रहे हिन्दुओं को मिल रही राहत स्वीकार नहीं…..!

 प्रशांत बाजपई 15 अगस्त, 1947 के दिन तक पाकिस्तान में हिन्दुओं की आबादी उसकी कुल आबादी का 11 प्रतिशत थी, जो अब 2 प्रतिशत से कम है. बांग्लादेश जो उस समय पूर्वी पाकिस्तान था, वहां हिन्दुओं की आबादी कुल आबादी का 28 प्रतिशत थी, जो आज 8 प्रतिशत है. आखिर,..

प्याज की कीमत बढ़ने के क्या रहे कारण, मांग-आपूर्ति ताकतों में फँसा फसल का मूल्य

एम. आर. सुब्रमणि प्याज की बढ़ती कीमत बुधवार (4 दिसंबर) को संसद चर्चा का भी विषय बनी। लोकसभा में एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार पर बढ़ते दामों के लिए प्रश्न उठाया जिसके उत्तर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि मूल्यों को काबू में करने के लि..

भारतीय स्थापत्य शास्त्र

–  प्रशांत पोळ एक प्रश्न मैं कई बार अलग अलग मंचों से पूछता हूँ, और दुर्भाग्य से लगभग नब्बे प्रतिशत इसका उत्तर नहीं मिलता है, या फिर गलत मिलता है. प्रश्न है – ऐसा कौनसा देश है, जिसके राष्ट्रध्वज पर हिन्दू मंदिर है…? ‘विश्व क..

भारतीय सामाजिकता का नया समय

 प्रो. संजय द्विवेदी हमारे सामाजिक विमर्श में इन दिनों भारतीयता और उसकी पहचान को लेकर बहुत बातचीत हो रही है। वर्तमान समय ‘भारतीय अस्मिता’ के जागरण का समय है। यह ‘भारतीयता के पुर्नजागरण’ का भी समय है। ..

शुभ्र बंगाल मे संघ पर होते सतत हमले

   प्रवीण गुगनानी    बंगाल मे जैसे श्रंखलाबद्ध राजनैतिक वध किये जा रहें हैं वैसे तो केवल अंग्रेजों के शासनकाल मे ही कभी देखें गए थे। अंग्रेजों के समय व विभाजन के समय मुस्लिम पक्ष द्वारा घोषित डायरेक्ट एक्शन डे जैसे वातावरण को छोड़ द..

राक्षस फाँसी से भी कहाँ डरते हैं!

       -जयराम शुक्ल       हैदराबाद की घटना के बाद देशभर में एक बार फिर भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा है। सात साल पहले इसी दिसम्बर में दिल्ली के निर्भया कांड को लेकर गुस्से का ऐसा प्रकटीकरण हुआ था। इन सात वर्षों में..

आधीदुनिया के इस तेवर को प्रणाम्

  जयराम शुक्ल    हम अतीतजीवी हैं।  हर सामाजिक बदलाव को विद्रूप बताते हुए उस पर नाहक ही लट्ठ लेकर पिल पड़ते हैं। अक्सर सुनते हैं कि हमारा जमाना कितना अच्छा था। यहां तक कि लोग अँग्रजों और राजशाही के जमाने के गुन गाने लगते हैं। आज जो ..

कर्नाटक की राह पर महाराष्ट्र

       सुरेश हिंदुस्थानी      महाराष्ट्र में सरकार बनाने की लम्बी कवायद के बाद आखिरकार शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार का गठन हो चुका है। इस सरकार को राजनीति के ऐसे दो ध्रुवों का जबरदस्ती मिलन कहा ज..

भोपाल गैस त्रासदी के 35 साल : जब लाशों के सामने कब्रिस्तान और श्मशान की जमीं कम पड़ गयी

    - इंद्रभूषण मिश्र     भोपाल गैस त्रासदी के 35 साल पूरे हो गए हैं। इतने सालों बाद भी यहां सैकड़ों परिवारों के जख्म आज भी हरे हैं। आज भी लोग उस काली रात के मंजर को याद कर कांप जाते हैं। मंजर कुछ ऐसा था कि शहर दर्द के मारे चीखना चाहता था, पर हलक से आवाज नहीं निकल रही थी। लोग भागना चाहते थे पर भाग नहीं पा रहे थे। जब तक की लोगों को माजरा समझ आता तब तक तक अस्पताल के अस्पताल लाशों से पट चुके थे। जिधर नजर जाती उधर लाश ही लाश नजर आती थी। भोपाल के कब्रिस्तानों और श्मशानों ने ..

भारतीय पुलिस : गुलामी के अवशेष अब नही रहेंगे

     (डॉ अजय खेमरिया)    गृहमंत्री अमित शाह ने भारत की मौजूदा आईपीसी और सीआरपीसी में आमूल चूल परिवर्तन के मसौदे पर काम करना शुरू कर दिया है।लख़नऊ में आयोजित47वी पुलिस साइंस कांग्रेस के समापन समारोह में उन्होंने इस आशय की घोषणा ..

भारत के 'स्व' से जुड़े अर्थतंत्र के आग्रही श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी

देशभर में प्रख्यात आर्थिक चिंतक स्व. दत्तोपंत ठेंगड़ी के जन्मशती समारोहों का सिलसिला शुरू होने को था कि एक बड़ी खबर ने सबका ध्यान खींचा-भारत ने व्यापक आर्थिक क्षेत्रीय साझेदारी समझौते (आरसेप) में शामिल न होने का फैसला किया। दोनों खबरों का साझा संदर्भ ब..

समान नागरिक आचार संहिता : आज की जरूरत

देश में समान नागरिक आचार संहिता का मुद्दा चर्चा का विषय है। समय—समय पर अनेक टी.वी. चैनलों पर बहस भी होती रहती है। कुछ लोग इसे लागू करने की बात कह रहे हैं तो कुछ विरोध में खड़े हैं। वर्तमान सरकार ने भी हालही में कानून आयोग को इस संहिता को लागू करने ..

सैफ़ुद्दीन सोज़ की किताब के बहाने , कश्मीर समस्या की जड़ की खोज-डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

जून के अंतिम दिनों में सोनिया कांग्रेस के एक बड़े नेता सैफ़ुद्दीन सोज़ की जम्मू कश्मीर को लेकर लिखी गई एक नई किताब Kashmir- Glimpses of History and the story of struggle  की चर्चा अख़बारों और टैलीविजन में शुरु हो गई थी । चर्चा को हवा देने के लिए ..

योद्धा, युद्ध पुकार और देवी

कमलप्रीत सिंह गिल आशुचित्र- देवी का आह्वान करके शूरवीर राजा और साहसी सैनिक भारतीय सभ्यता की रक्षा करते आए हैं और विजयी बनकर उभरे हैं। सृजन की मौलिक शक्ति मानी जाने वाली देवी की पूजा की परंपरा भारतीय उपमहाद्वीप पर तब से है जब से यहाँ सभ्यता की शुरुआ..

राजनीतिक सुचिता की पुरातत्वीय संपदा थे कैलाश जोशी जी

               श्रद्धांजलि/जयराम शुक्ल    आज जब राजनीति में सुचिता रुई के धूहे में सुई ढूंढने जैसा है ऐसे में कैलाश जोशी जी का जाना लोकतंत्र के कलेजे में हूक देने वाला है। मनुष्य उम्रजयी तो नहीं बन..

मुस्लिम लेखकों ने भी लिखा, अयोध्या में मंदिर तोड़ मस्जिद बनाई गई थी

श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का मुस्लिमों सहित सारे देश ने स्वागत किया है, लेकिन स्वयं को मुस्लिमों का प्रतिनिधि कहने वाले आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने घोषणा की है कि वो न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा. दशकों से चल ..

भोपाल: पहले पॉकेट मनी से और अब सैलरी से, हर रविवार पौधे लगाते हैं ये बैंकर, कई बन चुके हैं पेड़!

यदि आप दिल से कुछ करना चाहें तो तमाम कामों के बीच उसके लिए समय निकाल ही लेते हैं। भोपाल के शांतनु परिहार और पूनम मिश्रा इसका सटीक उदाहरण हैं। दोनों पेशे से बैंकर हैं, प्रोफेशनल लाइफ का दबाव इतना ज्यादा रहता है कि कभी-कभी अपने बारे में सोचने का भी वक्त न..

पूर्वोत्तर भारत के 'शिवाजी' वीर योद्धा लचित बरफूकन

 मुगल आक्रांताओं से पूर्वोत्तर भारत की रक्षा करने वाले वीर योद्धा लचित बरफूकन का जीवन और व्यक्तित्व शौर्य, साहस, स्वाभिमान, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का पर्याय है। इसलिए उन्हें पूर्वोत्तर भारत का 'शिवाजी' कहा जाता है   भारतवर्ष का इतिहास लचित बरफूकन जैसे वीर सपूतों के शौर्य और वीरता का महा आख्यान है। प्रसिद्ध इतिहासकार सूर्यकुमार भुइयां ने उन्हें पूर्वोत्तर भारत का 'शिवाजी' माना है। बरफूकन ने पूर्वोत्तर भारत में वही स्वातंत्र्य-ज्वाला जलाई, जो मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध दक्षिण भारत में ..

16 वर्षों तक सरपंच रहकर गाँव को प्राकृतिक संपदा लौटाने वाले की अनुकरणीय कहानी

विजय मनोहर तिवारी विदिशा जिले में कुल्हार नामक एक गाँव है। यह एक छोटा सा रेलवे स्टेशन है, जिसके आसपास 1,000-1,500 साल पुराने ऐतिहासिक स्मारकों की विरासत है। लेकिन गाँव की आधुनिक विरासत है- हरे-भरे दो घने जंगल और छह बड़े तालाब। 68 साल के वीएम शर..

क्या अब राजनीति की परिभाषा बदल गई ?

    -  डॉ नीलम महेंद्र    यह बात सही है कि राजनीति में अप्रत्याशित और असंभव कुछ नहीं होता, स्थाई दोस्ती या दुश्मनी जैसी कोई चीज़ नहीं होती हाँ लेकिन विचारधारा या फिर पार्टी लाइन जैसी कोई चीज़ जरूर हुआ करती थी।  कुछ समय..

संविधान की सनातन स्वरलहरियों के बीच 70 साल का सफर

  संविधान में संजोए गए 22 चित्रों का क्या महत्व है हमारे लिये?        (26 नबम्बर1949) हम भारतीयों का संविधान बनकर तैयार हुआ था।आज 70 बर्ष बाद हमारा संविधान क्या अपनी उस मौलिक प्रतिबद्धता की ओर उन्मुख हो रहा है जिसे इसके रचन..

जानें क्या है BHU में विरोध का पूरा मामला

     -  श्रीनिवास वैद्य    बनारस हिंदू विश्व विद्यालय के‌ संस्कृत विभाग में‌  सहायक प्राध्यापक पद पर डॉ ‌.फिरोज़ खान नामक प्राध्यापक की नियुक्ती कों‌ लेकर‌ विवाद छ़िडा है। इस नियुक्ती के&zwnj..

ब्यूरोक्रेटिक एक्टिविज्म के विरुद्ध मप्र में डॉक्टरों का सत्याग्रह कितना तार्किक

     सांकेतिक चित्र         (डॉ अजय खेमरिया)     मप्र में सरकारी औऱ गैर सरकारी डॉक्टर्स इन दिनों ब्यूरोक्रेसी के विरुद्ध लामबंद हो रहे है लगभग एक दर्जन चिकित्सकीय संगठनों ने ग्वालियर के गजराराजा ..

 सांप्रदायिक सौहाद्र को चुनौती  - अयोध्या पर पुनर्विचार याचिका  

" हो जाये ग़र शाहे ख़ुरासान का ईशारा सजदा न करूं हिन्द की नापाक ज़मीं पर " अल्लामा इकबाल की ये पंक्तियां और यह समय जबकि मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने तय किया है कि वह जन्मभूमि अयोध्या पर सर्वोच्च निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका लगाएगी; ये दो सर्वाधिक, सट..

भारत की समृद्ध खाद्य संस्कृति

     -  प्रशांत पोळ     समूचे विश्व को मोह लेने वाला ‘डोसा’ अथवा ‘मसाला डोसा’ (दोसा) नामक पदार्थ कितना पुराना है..? इस बारे में निश्चित रूप से कोई नहीं बता सकता. परन्तु लगभग दो हजार वर्ष से अध..

रॉफेल मुद्दे पर फिर बेपरदा हुई कांग्रेस

   - सुरेश हिन्दुस्थानी   पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से मुद्दा बनाए गए रॉफेल मामले पर एक बार फिर से कांग्रेस के नीचे से जमीन निकल गई है। हालांकि पूर्व में इस बारे में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का बयान झूठा सा..

अयोध्या निर्णय :अवसर है एक भारत श्रेष्ठ भारत के उद्घोष का

    गौरी, ग़जनी की जगह कलाम, और हमीद क्यों नही मेरे मुल्क की पहचान!      (डा अजय खेमरिया)     अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय भारत के हिन्दू और मुसलमानों के लिए एक ऐसा अवसर है जहां से वे राम और इम..

वनवासी संस्कृति में गड़ी है हमारी गर्भनाल!

     विमर्श/जयराम शुक्ल   एक पत्रकार के नाते जल-जंगल-जमीन और जन पर लिखना-पढ़ना मुझे हमेशा से सुभीता रहा है। वनवासियों पर मेरी समझ किताबों के जरिए नहीं बन पाई, इस समाज को आंखों से जितना देखा और उनके बीच जाकर जो जाना बस उतना ही ..

वनवासी संस्कृति में गड़ी है हमारी गर्भनाल!

  विमर्श/जयराम शुक्ल   एक पत्रकार के नाते जल-जंगल-जमीन और जन पर लिखना-पढ़ना मुझे हमेशा से सुभीता रहा है। वनवासियों पर मेरी समझ किताबों के जरिए नहीं बन पाई, इस समाज को आंखों से जितना देखा और उनके बीच जाकर जो जाना बस उतना ही ज्ञान..

 देश के निर्यात को एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य  

वर्ष 2025 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु देश के निर्यात को भी वर्ष 2018 के 50,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर वर्ष 2025 तक 1 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का करने का ल..

गौरी, ग़जनी की जगह कलाम, और हमीद क्यों नही मेरे मुल्क की पहचान!

  अयोध्या निर्णय :अवसर है एक भारत श्रेष्ठ भारत के उद्घोष का   (डा अजय खेमरिया)   अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय भारत के हिन्दू और मुसलमानों के लिए एक ऐसा अवसर है जहां से वे राम और इमामे हिन्द के समेकन और अद्वैत  की उद..

मीडियावी दुनिया में हमारे बच्चों के लिए क्या!

    बालदिवस/जयराम शुक्ल    "माँ-बाप खुश, बेबी माडर्न हो रहा है। हम अखबार वाले ब्रेकिंग की तोप चला रहे हैं। मंचीय कवियों को पाकिस्तान से फुर्सत नहीं या उनके गीत अभी भी हरसिंगार में अटके हैं। आज बालदिवस पर हम सचमुच कितने बड़े अपराधी ह..

साधौ सबद साधना कीजै! - प्रकाश पर्व/जयराम शुक्ल

गुरूनानक कितने महान थे। उन्होंने शब्द को न सिर्फ़ ईश आराधना का आधार बनाया बल्कि उसे ईश्वर का दर्जा दिया। शबद क्या है, यही है उनका ईश्वर। गुरूग्रंथ साहिब श्रेष्ठ, हितकर, सर्वकल्याणकारी शब्दों का संचयन है। शब्द की सत्ता से ही एक पूरा पंथ चल निकला। फर्ज कर..

वनवासियों के सच्चे मित्र भोगीलाल पण्ड्या

राजस्थान के वनवासी क्षेत्र में भोगीलाल पंड्या का नाम जन-जन के लिए एक सच्चे मित्र की भाँति सुपरिचित है। उनका जन्म 13 नवम्बर, 1904 को ग्राम सीमलवाड़ा में श्री पीताम्बर पंड्या के घर में माँ नाथीबाई की कोख से हुआ था। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा अपने गाँव में ही हु..

समाजसेवी क्रांतिकारी सेनापति बापट

सेनापति बापट के नाम से प्रसिद्ध पांडुरंग महादेव बापट का जन्म 12 नवम्बर, 1880 को पारनेर (महाराष्ट्र) में श्री महादेव एवं गंगाबाई बापट के घर में हुआ था। पारनेर तथा पुणे में शिक्षा पाकर उन्होंने कुछ समय मुंबई में पढ़ाया। इसके बाद वे मंगलदास नाथूभाई की छ..

  खाड़ी के देशों से मज़बूत होते भारत के रिश्ते

खाड़ी के देश आज सुरक्षा एवं निवेश की दृष्टि से विकल्प के तौर पर एक अच्छे मित्र की तलाश कर रहे हैं क्योंकि ऐसा आभास हो रहा है कि अमेरिका, उसकी अपनी नीतियों के चलते, अब खाड़ी के देशों, विशेष रूप से सऊदी अरब, के लिए विश्वास करने योग्य एक अच्छा सहयोगी नहीं रह..

काला पानी के नाम से कुख्यात अंडमान की सेल्यूलर जेल का इतिहास - संजय कुमार

          अंडमान -निकोबार या काले पानी का नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह वह स्थान है, जहाँ भारत के उन वीर स्वतन्त्रता सेनानियों को रखा जाता था, जिन्हें अंग्रेज शासन अपने लिए बहुत खतरनाक समझता था। इसी प्रकार अति गम..

अयोध्या मामले में अदालत का निर्णय जैसे ज़िद्दी बच्चों को बुज़ुर्गों का फैसला

  प्रसंग- अयोध्या मामले में अदालत के निर्णय के बाद ज़िद्दी बच्चों के देर से चल रहे झगड़े को जैसे तजुर्बेकार बुज़ुर्ग खाट पर बैठे देखें। बुलाकर उन्हें देर तक सुनें। खुद को सच और दूसरे को झूठ साबित करने पर आमादा बच्चे अपनी बातें कहें। बुज़ुर्ग ..

आवासीय क्षेत्र की अधूरी पड़ी परियोजनाओं को विशेष राहत

- प्रह्लाद सबनानी     केंद्र सरकार में वित्तमंत्री माननीया श्रीमती निर्मला सीतारमन ने देश में किफायती और मध्यम-आय वर्ग के लिए रुकी पड़ी आवासीय क्षेत्र की परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के उद्देश्य से, प्राथमिकता के आधार पर आर्थिक सहायता द..

अयोध्या निर्णय:सेक्यूलर चश्मे से भी समझने की आवश्यकता

      - (डॉ अजय खेमरिया)      अयोध्या पर भारत की सर्वोच्च अदालत के निर्णय को आज सेक्युलरिज्म के चश्मे से भी देखने की आवश्यकता है।यह वही चश्मा है जिसने इस मुल्क की संसदीय सियासत में 70 साल तक लोगों की आंखों पर जबरिय..

राम के साथ क्यूँ जुडी हैं हिन्दुओं की भावनाएं? - अद्वैत काला

अयोध्या राम जन्मभूमि का फैसला जल्द ही सुनाया जाने वाला है और हिंदू समाज इस लंबे समय से लंबित फैसले का इंतजार कर रहा है। बहुत समय से, यह मुद्दा राजनीतिक लेंस से देखा जा रहा है;  हालाँकि, हिंदू समाज के लिए अयोध्या का विषय हजारों वर्षों से चली आ रही म..

नेतृत्व शून्य शिवपुरी और यहाँ के अचर्चित प्रागैतिहासिक शैलचित्र

    मध्य प्रदेश के रायसेन में मौजूद भीमबेटका गुफा (भीमबैठका) कितनी मशहूर है, यह सब जानते हैं । और क्यों न हो, आखिर भीमबेटका गुफ़ाओं में शैल चित्र 12000 साल पुराने जो माने जाते है। भीमबेटका गुफ़ाओं की विशेषता यह है कि यहाँ की क़रीब 500 गुफ़ाओ..

अयोध्या – झूठ पर झूठ बोलकर हमेशा अड़ंगे लगाते रहे वामपंथी

जो भारत के विरोध में है, वो उसके साथ हैं. वामपंथी बाबर के साथ खड़े हैं. वो काशी विश्वनाथ मंदिर तोड़कर मस्जिद और कृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर तोड़कर ईदगाह बनाने वाले औरंगजेब के साथ खड़े हैं, वो स्वयं को गर्व पूर्वक हिन्दू मंदिरों और देवप्रतिमाओं का विध्वंसक कहने ..

भारतीय किसानों एवं उद्योगों के हित में, आरसीईपी को भारत की ना

     प्रह्लाद सबनानी भारत के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी ने बैंकाक में दिनांक 4 नवम्बर 2019 को आयोजित क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) शिखर सम्मेलन में अंततः यह घोषणा की कि भारत अभी की परिस्थितियों को देखते हुए क्षे..

अयोध्या- भारत के उदार लोकतंत्र का एकमात्र सबूत

भारत के उदार लोकतंत्र का इससे बड़ा कोई प्रमाण नहीं हो सकता कि राम के जन्मस्थान को लेकर एक मुकदमा आज़ाद भारत की तीन पीढ़ियों ने न्यायालय में चलता हुआ देखा और अब यह 133 साल पुराना मुकदमा फैसले की दहलीज पर है। मुकदमे में मुस्लिम पक्ष से एक हिंदू वकील ने राम ..

राम हम सबके हैं- न हमारी विजय, न आपकी पराजय

यह एक ऐसा प्रकरण था, जिसकी कोई ज़रूरत नहीं थी। यह एक ऐसी सुनवाई थी, जो सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि प्रकरण आया। यह एक ऐसा मसला था, जिससे अनावश्यक खेला गया। जिस दिन राम की जन्मभूमि का मामला अदालत में गया, उसी दिन तय हो गया कि फैसला जब भी आए, न्याय तो अब क्या ..

शिक्षा का कोरियाई मॉडल और सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत

   ( डॉ अजय खेमरिया)      मप्र की कमलनाथ सरकार प्रदेश में शालेय शिक्षा को कौशल विकास के साथ जोड़ने के लिये दक्षिण कोरिया का मॉडल अपनाना चाहती है ।इसके लिये मप्र के चुनिंदा 35 अफसरों और शिक्षकों का एक दल इन दिनों दक्षिण कोरिया के दौरे पर गया है जो वहां  "स्टीम एजुकेशन" सिस्टम का अध्ययन करेगा और मप्र में इसे कैसे लागू किया जा सकता है इसे लेकर एक रिपोर्ट सरकार को सौपेगा।स्टीम सिस्टम का आशय "साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, आर्ट्स औऱ मैथ्स "बेस्ड शिक्षा प्रणाली से है इसका ..

महाराजा को राजी करने सरदार पटेल के आग्रह पर श्री गुरुजी जम्मू-कश्मीर गए थे

  स्वतंत्र भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की यह इच्छा थी कि कश्मीर भारत का ही अभिन्न अंग बना रहे। किन्तु नेहरू की शेख अब्दुल्ला के प्रति नीति को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में वे काफी सतर्क थे। कश्मीर में पाकिस्तान की कुटिल कार्रवाइ..

सम्भव है प्लास्टिक का त्याग - कुछ आदतें विकसित करें

     - प्रह्लाद सबनानी    2 अक्टोबर 2019 से देश में प्लास्टिक छोड़ो अभियान की शुरुआत हो चुकी है। अतः अब सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को तो “ना” ही कहा जाना चाहिए। सिंगल यूज़ प्लास्टिक यानी एक ही बार इस्तेमाल के ला..

कांग्रेस की महाराष्ट्र में पराजय का एक कोण सावरकर भी है

  - डॉ अजय खेमरिया      कांग्रेस महाराष्ट्र में चुनाव हार गई। वह  राष्ट्रवादी कांग्रेस से भी पीछे चौथे नम्बर  की पार्टी हो गई ।असल में यह होना ही था सभी पूर्वानुमान इसकी मुनादी कर रहे थे ।यूं तो 2014 से शुरू हुआ कांग्रेस का चुनावी राजनीति में पराजय का सिलसिला अब कतई   आश्चर्य  महसूस नही कराता है लेकिन महाराष्ट्र से लगातार दूसरी हार औऱ चौथा नम्बर  विस्मयकारी है इसके निहितार्थ कांग्रेस आलाकमान के स्तर पर तलाशे जाने ही चाहिये।क्योंकि महाराष्ट्र देश ..

समाज महिलाओं की प्रतिभा को उचित सम्मान दे

समय निरंतर बदलता रहता है, उसके साथ समाज भी बदलता है और सभ्यता भी विकसित होती है।लेकिन समय की इस यात्रा में अगर उस समाज की सोच नहीं बदलती तो वक्त ठहर सा जाता है।  1901 में जब नोबल पुरस्कारों की शुरुआत होती है और 118 सा..

कुपोषण के ख़िलाफ़ जंग

  - प्रह्लाद सबनानी     केंद्र सरकार द्वारा एक योजना तैयार की जा रही है जिसके अंतर्गत इस बात पर विचार किया जा रहा है कि देश के किस भाग में खाद्य पोषक तत्वों का उत्पादन कितनी मात्रा में किया जाय। ताकि, देश के सभी भागों में खाद्य पोषक..

भारतीय बाजार से लुप्त हो जाएंगे अखबार ?

  डिजिटल माध्यमों से मिल रही हैं प्रिंट मीडिया को गंभीर चुनौतियां     -प्रो. संजय द्विवेदी         दुनिया के तमाम प्रगतिशील देशों से सूचनाएं मिल रही हैं कि प्रिंट मीडिया पर संकट के बादल हैं। यहां तक क..

भारत एवं चीन मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बना सकते हैं दबदबा

  - प्रह्लाद सबनानी    2000 साल पहिले तक भारत और चीन विश्व व्यापार के मुख्य केंद्र थे और विश्व व्यापार में दोनों देशों का अहम योगदान था। आज स्थिति कुछ भिन्न है। विकसित देशों यथा अमेरिका, यूरोप के कई देश एवं जापान आज विश्व व्यापार के केंद..

महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर

      - नरेन्द्र सहगल      महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को ‘भारत रत्न’ की उपाधी से सम्मानित करने की घोषणा करके अब तक की जा रही ऐतिहासिक भूल को स..

ग्रामीण महिलाएँ गढ़ रही हैं देश का भविष्य

अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस विकासशील देशों में लगभग 45 प्रतिशत महिलायें कृषि श्रमिक के रूप में काम करती हैं और कृषि, खाद्य एवं ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ी रहती हैं। ग्रामीण महिलाओं की इस महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्..

हंगर इंडेक्स में और नीचे खिसकने के लिये जमीन बनाती व्यवस्था का दंश

   - डॉ अजय खेमरिया   मप्र में कुपोषण और भूख से निबटने की सभी योजनाओं का मूल्यांकन सहरिया जनजाति के आलोक में ग्लोबल हंगर इंडेक्स के कुल 117 मुल्कों में से हमारा नम्बर 102 रहा है इस बार। पाकिस्तान हमसे उपर है।यह दो ऐसे तथ्य है जिन ..

सांस्कृतिक संवेदनहीनता के समय में लोकजीवन और मीडिया

    -प्रो. संजय द्विवेदी    ‘मोबाइल समय’ के दौर में जब हर व्यक्ति कम्युनिकेटर, कैमरामैन और फिल्ममेकर होने की संभावना से युक्त हो, तब असल खबरें गायब क्यों हैं? सोशल मीडिया के आगमन के बाद से मीडिया और संचार की दुनिया..

प्रकृति ही देगी प्लास्टिक का हल

  "आदमी भी क्या अनोखा जीव है, उलझनें अपनी बनाकर आप ही फंसता है, फिर बेचैन हो जगता है और ना ही सोता है।"  आज जब पूरे विश्व में प्लास्टिक के प्रबंधन को लेकर मंथन चरम पर है तो रामधारी सिंह दिनकर जी की ये पंक्तियाँ बरबस ही याद आ जा..

राजनीति से ऊपर उठकर वीरों के सम्मान का खुलकर स्वागत करने की आवश्यकता

   इंद्रभूषण कुमार, युवा पत्रकार      महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए जारी घोषणापत्र में बीजेपी ने वीर सावरकर को भारत रत्न दिलाने का वादा किया है। इस घोषणा के बाद ही देश में सावरकर को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। एक पक्ष इसका स्वागत कर रहा है तो दूसरा पक्ष इसका विरोध कर रहा है। सावरकर को लेकर राजनीतिक दृष्टि से अपने - अपने अलग मत हो सकते हैं, अलग धारणाएं हो सकती हैं। लेकिन सिर्फ वैचारिक मतभेद या राजनीतिक लाभ - हानि के आधार पर सावरकर की देशभक्ति, समर्पण, त्याग और असाधारण ..

 देश में तेज़ी से बढ़ रहा है ऑनलाइन व्यापार

      - प्रह्लाद सबनानी    हाल ही में ऑनलाइन बिक्री के जो आँकड़े आए हैं उन्हें काफ़ी अहमियत दी जा रही है। हमारे देश में सामानयतः त्योहारी मौसम में बाज़ार में रौनक़ बढ़ जाती है। देश में दो मुख्य ई-कामर्स कम्पनियों ने नवरात्री ..

वारिसों की नाफरमानी के बाद भी जेपी की वैचारिकी खारिज नही हुई है

    (डॉ अजय खेमरिया)      देश ने अपनी  आजादी के स्वर्णिम आंदोलन के  बाद जिस महान नेता को लोकनायक के रूप में स्वीकार किया उस जयप्रकाश नारायण यानी जेपी के बिना आजाद भारत का कोई भी राजनीतिक विमर्श आज पूर्ण नही होता है।समकालीन राजनीति में नेतृत्व करने वाली पूरी पीढ़ी वस्तुतः जेपी की छतरी से निकलकर ही स्थापित हुई है ,जो आज पक्ष विपक्ष की भूमिकाओं में है।जेपी के महान व्यक्तित्व को लोग कैसे स्मरण में रखना चाहेंगे यह निर्धारित करने की जबाबदेही असल मे उनके राजनीतिक चेलों ..

जेपी और नानाजीः दूसरी आजादी के योद्धा-जयराम शुक्ल

अक्टूबर का महीना बड़े महत्व का है। पावन,मनभावन और आराधन का। भगवान मुहूर्त देखकर ही विभूतियों को धरती पर भेजता है। 2 अक्टूबर को गांधीजी, शास्त्रीजी की जयंती थी। 11अक्टूबर को जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख की जयंती है, अगले दिन ही डा.राममनोहर लोहिया का ज..

भारत का विश्व को संदेश

  दिनांक 27 सितम्बर 2019 को अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी के सम्बोधन पर आधारित।    - प्रह्लाद सबनानी     यह सत्र इसलिए भी विशेष है कि पूरा विश्व महात्मा गांध..

विदेशी निवेशकों के लिए बहुत कुछ है भारत में

    दिनांक 25 सितम्बर 2019 को न्यूयॉर्क में ब्लूम्बर्ग वैश्विक व्यापार फ़ोरम 2019 में भारत के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण पर आधारित।   - प्रह्लाद सबनानी     माननीय प्रधान मंत्री महोदय ने अपन..

संघ में छिपे हुए गांधी को समझे बिना मोदी से कैसे लड़ेगा विपक्ष?

    - डॉ अजय खेमरिया        हकीकत यह है कि  आलोचक कभी संघ और गांधी के अंतर्संबंधों को समझ ही नही पाए है महात्मा गांधी 150 वी जयंती पर आरएसएस के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने बकायदा लेख लिखकर गांधी के प्रति अपनी वैचारिक और कार्यशील प्रतिबद्धता को सार्वजनिक किया।इस बीच हैश टेग गोडसे भी जमकर  ट्रेंड हुआ।देश के बड़े बुद्धिजीवी वर्ग ने ट्विटर पर गोड्से के ट्रेंड को आरएसएस के साथ जोड़ने की कोशिशें की।कांग्रेस के बड़े नेता अक्सर गांधी की हत्या से संघ को जोड़ने का प्रयास ..

सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने विजयादशमी पर किया स्वयंसेवकों को संबोधित

  नागपुर। विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पथ सञ्चलन के पश्चात स्वयंसेवकों को संबोधित किया। स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि इस विजयादशमी के पहले बीता हुआ वर्ष भर का कालखंड श्री गुरु नानक ..

नवीकरण ऊर्जा के क्षेत्र में भारत बन सकता है एक मॉडल

  - प्रह्लाद सबनानी    दिनांक 25 सितम्बर 2019 को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में भारत के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा कि भारत की जीवन पद्धति दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण है। भारती..

राष्ट्रजीवन के आदर्श ‘मामाजी’- श्री माणिक चंद वाजपेयी

  विरले ही होते हैं जो अपने जीवनकाल में एक उदाहरण बन जाते हैं, एक किंवदन्ती बन जाते हैं। उनके जीवन का क्षण-क्षण अनुकरणीय होता है, प्रेरणादायी होता है। ऐसे ही हैं मामा जी। मामा जी यानी श्री माणिक चंद वाजपेयी। जिनका पूरा जीवन ही राष्ट्रीय विचार के ल..

'70' के जश्न में समस्याओं पर पर्दा डालते जिनपिंग

    हाल ही हमने टेलीविजन, अखबारों व सोशल मीडिया पर चीन में आयोजित भव्य समारोह को देखा। अपने देश मे कम्युनिस्ट शासन के 70 वर्ष पूर्ण होने का जश्न मनाते चीनियों ने दुनिया के सामने शक्ति प्रदर्शन किया। चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की सत्ता की शुरू..

प्‍लास्‍ट‍िक को ना लेकिन ठोस विकल्‍प भी दीजिए प्रधानमंत्री जी : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

   - डॉ मयंक चतुर्वेदी     हम क्‍यों प्‍लास्‍ट‍िक के इतने आदि हो गए, क्‍या हमारे पास तत्‍काल में कोई विकल्‍प है, इससे पूरी तरह से मुक्‍ति के, यदि तुरंत हम अपने जीवन से प्‍लास्‍ट‍िक को..

अन्तर्राष्ट्रीय मानकों में भारत लगातार बढ़ रहा है आगे

    - प्रह्लाद सबनानी    कई अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा समय समय पर  विश्व के समस्त देशों की रैंकिंग कई मानकों पर तय की जाती है। हाल ही के समय में कई अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों ने अपने नतीजों की घोषणा की है, उन लगभग सभी नती..

महात्मा गांधी की जीवनदृष्टि का अनुसरण करें

      - मोहन भागवत      भारत देश के आधुनिक इतिहास तथा स्वतंत्र भारत के उत्थान की गाथा में जिन विभूतियों के नाम सदा के लिये अंकित हो गये हैं, जो सनातन काल से चलती आयी भारत की इतिहास गाथा के एक पर्व बन जायेंगे, पूज्य महात..

गांधी की आत्मकथा के मायने (भाग एक)

  प्रो. उमेश कुमार सिंह     गांधी की मानसिक विकास यात्रा उनके पूर्वजों से होते हुए माता-पिता के माध्यम से उनके जीवन में आती है और सामाजिक अनुभव से पूर्ण होती है। मैंने एक मित्र की कुछ दिन पहले फेसबुक में जिज्ञासा पढ़ी कि ‘पता नह..

जलवायु परिवर्तन एक गम्भीर समस्या

  जलवायु परिवर्तन पर हुए पेरिस समझौते के अन्तर्गत, संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी सदस्य देश, इस बात पर राज़ी हुए थे कि इस सदी के दौरान वातावरण में तापमान में वृद्धि की दर को केवल 2 डिग्री सेल्सियस तक अथवा यदि सम्भव हो तो इससे भी कम अर्थात 1.5 डिग्री स..

गांधी और लिपि (भाग 2)

  - डॉ उमेश कुमार सिंह      ‘हिन्द स्वराज्य’ में (गांधी के शब्द), ‘‘सारे हिंदुस्तान के लिए जो भाषा चाहिए, वह तो हिन्दी ही होनी चाहिए। उसे उर्दू या नागरी लिपि में लिखने की छूट होनी चाहिए। हिंदू-मुसलमानों ..

क्‍या वाम में 'सत्‍य' को पहचानने व अपनाने की ताकत है?

  वाम पड़ताल भाग १ - वाम पूछ रहा है, क्‍या खुद की बेधड़क पड़ताल का वक्‍त आ गया है?   वाम पड़ताल भाग २ - याद रखें- बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी वाम पड़ताल भाग ३ - लोगों ने कामू के बजाय तुलसी को ज्‍यादा निकट प..

क्‍या विरासत के उन पन्‍नों को जला देने पर भी रजामंदी है?

वाम पड़ताल भाग १ - वाम पूछ रहा है, क्‍या खुद की बेधड़क पड़ताल का वक्‍त आ गया है?   वाम पड़ताल भाग २ - याद रखें- बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी वाम पड़ताल भाग ३ - लोगों ने कामू के बजाय तुलसी को ज्‍यादा निकट पाया ..

पंडित दीनदयाल उपाध्याय: एक युगदृष्टा

आत्मविश्वास,कर्मठता, दृढ़निश्चय, लगन , निष्ठा, त्याग, समाज कल्याण और राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता जैसे शब्द जहाँ बहुतायत श्रेष्ठ व्यक्तित्व के लोगों का मान बढ़ाते हैं, वहीं पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के जीवन से जुड़कर इन शब्दों की महत्ता और भी बढ़ जाती है। पंड..

केवल जन आन्दोलन से प्लास्टिक मुक्ति अधूरी कोशिश होगी

  वैसे तो विज्ञान के सहारे मनुष्य ने पाषाण युग से लेकर आज तक मानव जीवन सरल और सुगम करने के लिए एक बहुत लंबा सफर तय किया है। इस दौरान उसने एक से एक वो उपलब्धियाँ हासिल कीं जो अस्तित्व में आने से पहले केवल कल्पना लगती थीं फिर चाहे वो बिजली..

क्‍या वाम, सर्वहारा की मूल चेतना का परिष्‍कार कर सका?

  वाम पड़ताल भाग १ - वाम पूछ रहा है, क्‍या खुद की बेधड़क पड़ताल का वक्‍त आ गया है?   वाम पड़ताल भाग २ - याद रखें- बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी वाम पड़ताल भाग ३ - लोगों ने कामू के बजाय तुलसी को ज्‍यादा निकट प..

अर्थव्यवस्था को अब लगेंगे पंख

       - प्रह्लाद सबनानी    20 सितम्बर 2019 को केंद्र सरकार ने कोरपोरेट इंडिया को एक बहुत बड़ा तोहफ़ा दिया। माननीय वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन ने कारपोरेट करों में कटौती की घोषणा की, जो 1 एप्रिल 2019 से लागू..

इजराइल के निर्माण में भारतीय योद्धाओं के शौर्य को स्मरण करने का दिन

    हाइफा दिवस   पराजय  का इतिहास लिखने वाले इतिहासकारों ने बड़ी सफाई से भारतीय योद्धाओं की अकल्पनीय विजयों को इतिहास के पन्नों पर दर्ज नहीं होने दिया। शारीरिक तौर पर मरने के बाद जी उठने वाले देश इजरायल की आजादी के संघर्ष क..

भारतीय समाज की आवाज राष्ट्रकवि दिनकर

  कोई भी साहित्य या सिनेमा अपने समय के समाज का वक्ता होता है,जो आने वाली पीढ़ियों को अतीत से रूबरू कराता है.किसी भी मानव समाज के एक खास समय का गुणधर्म उस समय के साहित्य में दर्ज होता है. ऐसे में उन साहित्यकारों की भूमिका अहम हो जाती है,अतः उनके बार..

मौत की आँख में झांककर भी क्रांति के गीत गाने वाला वीर

  - सौरभ ममगाईं     यदि बात क्रांतिकारियों की आए तो भारत में अनेक क्रांतिवीरों की गाथाएं प्रचलित हैं, जो प्रेरणा के तौर पर हमेशा याद किए जाएंगे। एक ही परिवार में पिता-पुत्र शंकर शाह-रघुनाथ शाह की वीर और देशभक्त जोड़ी जिन्होंने अंग्र..

गाँधी और भाषा। (भाग एक )

    - डॉ उमेश कुमार सिंह     नवजागरण काल के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर किन्तु अंग्रेजी से प्रभावित राजा राम मोहनराय ने हिंदी की स्वीकार्यता सम्पर्क भाषा के रूप में तो मानी किन्तु उसे ज्ञान-विज्ञान की भाषा नहीं माना। जिसका फायदा उठाक..

देश की अर्थव्यवस्था समेकन की प्रक्रिया के दौर से गुज़र रही है

     प्रह्लाद सबनानी      पिछले पाँच वर्षों के दौरान केंद्र में श्री नरेंद्र मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के उद्देश्य से कई साहसिक क़दम उठाए हैं। जैसे, जीएसटी कर प्रणाली को लागू करना, औपचारिक अर्थव्यवस्था..

लोगों ने कामू के बजाय तुलसी को ज्‍यादा निकट पाया

      वाम पड़ताल-3     गिरीश उपाध्‍याय        दरअसल भारत में विचार की स्थिति नदी की तरह रही है। कभी वह सूख जाती है तो कभी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगती है। कभी आप उसके पानी का आचमन कर सकते हैं,..

आदमी को पहाड़ खाते देखा है -जयराम शुक्ल

भोपाल से इंदौर जाते हुए जब देवास बायपास से गुजरता हूँ तो कलेजा हाथ में आ जाता है। बायपास शुरू होते ही बाँए हाथ में हनुमानजी की विराट प्रतिमा है, उसके पीछे खड़े पहाड़ का जो दृश्य है,बेहद दर्दनाक है। उसे देखकर कई भाव उभरते हैं। कि जैसे चमगादड़ ने अमरूद का आधा ..

हठ छोड़ संविधान और गांधी की मंशा ‘राष्ट्रभाषा हिन्दी’ को आत्मसात करें

    - डॉ उमेश कुमार सिंह       केन्द्र की पहल पर नुक्ताचीनी करने वाले अपने को गाँधी के साथ दक्षिण के संतों के आयने में देखें तो उन्हें ध्यान में आ जायेगा कि भारत की भाषा के लिए पूर्वजों का क्या सपना था? आज देश 70 साल में ..

वाम पूछ रहा है, क्‍या खुद की बेधड़क पड़ताल का वक्‍त आ गया है?

    - गिरीश उपाध्‍याय      डिस्‍क्‍लेमर- आज का कॉलम एक मीडिया रिपोर्ट के कंटेट पर आधारित है। चूंकि मैं स्‍वयं उस कार्यक्रम में उपस्थित नहीं था, इसलिए इस कंटेट की प्रामाणिकता और तथ्‍यात्‍मकता की पुष्ट..

देश में पनप रहे मरुस्थलीकरण को रोकना ही होगा

  - प्रह्लाद सबनानी      संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि प्रतिवर्ष विश्व में 1.20 करोड़ हेक्टेयर कृषि उपजाऊ भूमि ग़ैर-उपजाऊ भूमि में परिवर्तित हो जाती है।  दुनियाँ में 400 करोड़ हेक्टेयर ज़मीन डिग्रेड हो चुकी है। एशिया एवं..