आलेख

हिंदू-विरोधी बीबीसी मीडिया के लिए ‘जय श्री राम’ हिंसक घोषणा है

दुनिया के सबसे एजेंडावादी मीडिया संगठन बीबीसी ने एक बार फिर वही किया जिसके लिए वह जाना जाता है। उसने फिर एक बार भारत को बदनाम करने के लिए एक लंबा चौड़ा लेख लिखा जिसमें उसने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए भगवान राम के सहारे भारत को एक मुस्लिम विरोधी रा..

कर्नाटक में कांग्रेस का नाटक

  कर्नाटक में जो चल रहा है वह कतई आश्चर्य का विषय नहीं है. जेडीएस और कांग्रेस के बचे विधायक मंत्री भी कतई न टिकते यदि उनके सामने गत लोकसभा में भाजपा द्वारा  २८ में २५ लोकसभा सीटें जीतने का भयावह आंकड़ा नहीं होता. यदि विस भंग ह..

पुण्य तिथि विशेष: युवाओं के पथ प्रदर्शक थे स्वामी विवेकानंद

युवा नायक स्वामी विवेकानंद ऐसे संन्यासी थे, जो निरंतर समाज के उत्थान के लिए चिंतित रहते थे। दरअसल, स्वामीजी संन्यास की उस भारतीय दृष्टि एवं व्यवस्था के प्रतिनिधि थे, जिसके अनुसार संन्यास आश्रम एकांत में ईश्वर की खोज के लिए नहीं अपितु जो कुछ समाज से प्राप्त किया है, उसमें बढ़ोतरी कर समाज को लौटाने की अवस्था है। उस समय स्वामी विवेकानंद ने देखा कि समाज में शिक्षा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। शिक्षा के अभाव में जीवन के सभी क्षेत्रों में भी अंधकार पसर गया था। इसलिए स्वामीजी ने शिक्षा का उजियारा फैलान ..

आजाद हिन्द फौज की स्थापना

सामान्य धारणा यह है कि आजाद हिन्द फौज और आजाद हिन्द सरकार की स्थापना नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने जापान में की थी; पर इससे पहले प्रथम विश्व युद्ध के बाद अफगानिस्तान में महान क्रान्तिकारी राजा महेन्द्र प्रताप ने आजाद हिन्द सरकार और फौज बनायी थी। इसमें&..

नशे और जिहाद का कॉकटेल, पकड़ी गई नशे की सबसे बड़ी खेप

पाकिस्तान से सटी वाघा बॉर्डर पर 30 जून को 3200 करोड़ रूपए की हेरोइन बरामद हुई. नमक की बोरियों में छिपाई गई 640 किलो हेरोइन की ये बरामदगी, संभवतः अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी है. सड़कों पर आने के बाद हेरोइन की इतनी मात्रा लाखों लोगों के लिए पर्याप्त होती| दशक..

जेपी की हुंंकार ने सिंहासन हिला दिया-जयराम शुक्ल

कांग्रेस के अध्यक्ष देवकांत बरुआ का नारा इंदिरा इज इंडिया गली कूँचों तक गूँजने लगा। इसी बीच मध्यप्रदेश में पीसी सेठी को हटाकर श्यामाचरण शुक्ल को मुख्यमंत्री बनाया गया। अखबारों की हालत यह कि पहले पन्ने से लेकर आखिरी तक इंदिरा गांधी, संजय गाँधी उनके चमचों की खबरों से पटे। हर हफ्ते कहीं न कहीं रैलियाँ, सभाएं। भीड़ जोड़ने का काम स्कूल के प्राचार्यों, हेडमास्टरों को दे दिया गया। शहर में कोई बड़ा नेता आता तो स्कूलों के सामने बसें लगवा दी जातीं और रैली सभाओं में हम बच्चे भीड़ बढ़ाने, नारे लगाने के लिए भेजे ..

जबरिया नसबन्दी ने सारे किए धरे पर पानी फेर दिया..!

  यादों में आपातकाल.. एक - जयराम शुक्ल   पंद्रह अगस्त, छब्बीस जनवरी यदि सरकारी आयोजन न होते तो पब्लिक इन्हें कब का भुला चुकी होती। लेकिन कुछ ऐसी तिथियां हैं जिन्हें राजनीति तब तक भूलने नहीं देगी जब तक कि इस देश का अस्तित्व है। इन तारीखों में सबसे ऊपर है 25 जून 1975। इस दिन देश में आपातकाल घोषित किया गया था।   आपातकाल पर मेरे दो नजरिए हैं, एक- जो मैंने देखा, दूसरा जो मैंने पढ़ा और सुना। चलिए पहले से शुरू करते हैं। वो स्कूली छुट्टी के दिन थे, मैं गाँव की स्कूल से सातवीं पास ..

आपातकाल का संघर्ष की भूमिगत सञ्चालन व्यवस्था

प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गाँधी द्वारा 25 जून 1975 को समूचे देश में थोपा गया आपातकाल एक तरफा सरकारी अत्याचारों  का पर्याय बन गया। इस सत्ता प्रायोजित आतंकवाद को समाप्त करने के लिए संघ के द्वारा संचालित किया गया सफल भूमिगत आन्दोलन इतिहास का एक महत्..

आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ - भाग 2 - सत्ता प्रायोजित आतंकवाद

इलाहबाद हाईकोर्ट द्वारा सजा मिलने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने अपने राजनीतिक अस्तित्व और सत्ता को बचाने के उद्देश्य से जब 25 जून 1975 को रात के 12 बजे आपातकाल की घोषणा की तो देखते देखते पूरा देश पुलिस स्टेट में परिवर्तित हो गया। सरक..

आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 में उस समय एक काला अध्याय जुड़ गया, जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने सभी संवैधानिक व्यवस्थाओं, राजनीतिक शिष्टाचार तथा सामाजिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर मात्र अपना राजनीति..

हिन्दू धर्म को लील रहे मिशनरी – तमिलनाडु में मतांतरण का ‘धंधा’

स्वराज्य पत्रिका ने तमिलनाडु में चल रही ईसाई मिशनरियों की मतांतरण की फैक्ट्री का पर्दाफाश करते हुए एक रिपोर्ट जारी की है. द्रविड़ आंदोलन, ‘आर्य-द्रविड़ विभाजन’ जैसे बोगस मुद्दों के ज़रिए तमिलनाडु में हिन्दुत्व/हिन्दू धर्म की जड़ों को दीमक की तरह..

संघ के संघर्षों और बलिदानों की अमिट गाथा है गोवा मुक्ति आन्दोलन

पुर्तगाली वास्को-डि-गामा हो या स्पेनिश कोलम्बस, इन सबको इतनी दूर भारत आने के लिए जिस एक चीज ने विवश किया वो थे भारतीय मसाले, यह मसाले जिस जगह पैदा होते थे वो पश्चिमी घाट का तटवर्ती इलाका था,  उसमें भी मालाबार और गोमान्तक इस व्यापार क..

भारतीय सेना ने फिर की सर्जिकल स्ट्राइक

नागालैंड में दशकों से उत्पात मचा रहे ईसाई आतंकी संगठन एनएससीएन के खिलाफ भारतीय सेना की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक. पड़ोसी देश बर्मा के घने जंगलों में छिपकर कार्रवाई करने वाला ये संगठन बर्मा के लिए भी ख़तरा. चीन की खुफिया एजेंसियों से हथियार और गोलाबारूद लेकर निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों पर करता है हमले. एनएससीएन नागालैंड को भारत से तोड़कर एक स्वतंत्र समाजवादी-ईसाई राज्य बनाना चाहता है.   भारत की सेना ने म्यांमार के सीमावर्ती जंगलों में छिपे आतंकियों पर बड़ी कार्यवाई की है. म्यांमार की सेना ने ..

500 सालों के पुर्तगाली शासन के खिलाफ क्रांती

हमारे घर की रसोई में एक तीखी खाद्य वस्तु पाई जाती है, जिसे हमारे घर की अन्नपूर्णा महिलाएं खाना बनाते समय उपयोग में लाती है, यह वाक्यांश पढ़ते ही हमारे दिमाग में मिर्च की इमेज बनकर सामने आ जाती है, लेकिन यह लाल मिर्च भारत में जिस देश से आई उस देश ने भारत..

राजनीति से परे कुछ सवाल उठाती डॉक्टरों की हड़ताल

  विरोध करने और अपने हक के लिए लड़ने के और भी तरीके हो सकते हैं जैसे काली पट्टी बांध कर आना या सफेद की जगह काला एप्रन पहनना या फिर कोई अन्य तरीका लेकिन उन्हें इतना तो सुनिश्चित करना ही चाहिए कि उनके कारण देश में अराजकता का माहौल पैदा ना हो क्योंक..

साँच कहै ता मारन धावै झूठे जग पतियाना

    कबीर जयंती/जयराम शुक्ल दो साल पहले 10 नवंबर को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में जब बड़े धूमधाम के साथ कबीर पर चर्चित और बहुखर्चित सरकारी समारोह आयोजित किया गया तब मित्र ने आपत्ति दर्ज कराई थी - कबीर तो जेष्ठ में उमस के बीच आग बरसते दिनों मे..

चर्च और यौनाचार: सलीब तले, सिसकती नन

भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों से प्राप्त आंकड़ों पर गौर करें तो एक बात स्पष्ट हो है कि चर्च अब प्रार्थनास्थल नहीं रहे, बल्कि यौनशोषण के अड्डे बन गए हैं। एसोसिएटिड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और एशिया से ननों के यौन श..

सिख दंगों पर कांग्रेस का दोहरा चरित्र

      इटली के चिंतक,विचारक व राजनीति विज्ञानी मकियावेली ने जो कहा है कांग्रेस उसके बहुत ही समीप है– “ज्ञानियों ने कहा है कि जिसका भविष्य देखना हो उसका भूतकाल देख लो”।इसके बाद कांग्रेस के सिख दंगों से जुड़ाव को लेकर अमेरिकी कवि, चित्रकार व विचारक इमर्सन की कही एक बात करना यहां जरूरी है। “उचित रूप से देखें तो इतिहास कुछ भी नहीं है सब कुछ मात्र आत्मकथा है”। सिख दंगों के समूचे संदर्भों में ये दो बातें कांग्रेस पर शत प्रतिशत चरितार्थ होती है।   1984 ..

जब हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री के खिलाफ सुनाया था निर्णय

  सारी परिस्थितियों के बीच 23 मई 1975 को सुनवाई पूरी होने पर जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने फैसला सुरक्षित रख लिया. आखिरकार फैसले का दिन (12 जून 1975) आया. जस्टिस सिन्हा ने इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उनका चुनाव रद्द कर दिया और 06 साल तक..

अब एक ही रास्ता, पानी को गिरफ्तार करो - जयराम शुक्ल

इजराइल की गैलीना मनुस्किन मेरी सोशल मीडिया मित्र हैं। वे पूरी दुनिया घूमती हैं पर भारत से उनका खास लगाव है। वे यह इतिहास जानती हैं कि यहूदियों को जब दुनिया भर से खदेड़ा जा रहा था तब भारत में ही शरण मिली थी। कभी कभार मैं उनसे इजराइल का अपडेट लेता रहता हूँ..

करना होगा ऐसे दरिंदों का सामाजिक बहिष्कार

  हर आँख नम है हर शख्स शर्मिंदा है क्योंकि आज मानवता शर्मसार है इंसानियत लहूलुहान है।  एक वो दौर था जब नर में नारायण का वास था लेकिन आज उस नर पर पिशाच हावी है। एक वो दौर था जब आदर्शों नैतिक मूल्यों संवेदनाओं से युक्त चरित्र किसी स..

राम नाम के बहाने

आज की राजनीति में राम नाम की महिमा के सार्वकालिक महत्व की बात को कोई नहीं झुठला सकता. यह देश राम राज्य की आदर्श कल्पना से लेकर गांधी के राम तक के प्रयोग का साक्षी रहा है. पिछले सप्ताह जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का काफिला बैरकपुर लोक..

कारगिल युद्ध के महानायक कैप्टन हनीफुद्दीन

पुण्य स्मरण 06 जून को कारगिल युद्ध के महानायक कैप्टन हनीफुद्दीन की 20वीं पुण्यतिथि है. कारगिल युद्ध के शुरूआती दिनों में जिन शूरवीरों ने सबसे अदम्य साहस का परिचय दिया, उसमें कैप्टन हनीफुद्दीन का नाम सबसे ऊपर है.  ऑपरेशन थंडरबोल्ट कारगिल युद्ध के..

भारतीय सेना ने मानवीयता और बहादुरी की मिशाल है कारगिल युद्ध

    आज ही के दिन भारत के प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने कारगिल युद्ध पर पहिली बार सरकार का सार्वजनिक तथा अधिकृत बयान दिया था, इस के बाद हुए कारगिल युद्ध में भारतीय सरकार की कूटनीति जीत के साथ भारतीय सेना ने मानवीयता और बहादुरी की मिशाल पेश की   भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 7 जून, 1999 को राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। विषय भारतीय सीमा के अन्दर कारगिल में पाकिस्तान सेना की घुसपैठ का था। उन्होंने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए कहा, “कोई भी देश इस तरह के आक्रमण ..

इतिहास से छेड़छाड़: कांग्रेसियों के लिए न महाराणा प्रताप महान और न ही सावरकर वीर

वीर सावरकर, जिन्हें दोहरे आजीवन कारावास की सजा हुई, पर कांग्रेस उन्हें वीर नहीं मानती. राजस्थान की कांग्रेस सरकार के अनुसार न स्वातंत्र्यवीर सावरकर ‘वीर’ थे और न महाराणा प्रताप ‘महान’। इसलिए उसने पाठ्य पुस्तकों में इन दोनों विभ..

कांग्रेस को अपनी हार नहीं, बीजेपी की जीत की समीक्षा करनी चाहिए

  2019 के लोकसभा नतीजे कांग्रेस के लिए बहुत बुरी खबर लेकर आए। और जैसा कि अपेक्षित था, देश की सबसे पुरानी पार्टी में भूचाल आ गया। एक बार फिर हार की समीक्षा के लिए कमेटी का गठन हो चुका है। पार्टी में इस्तीफों की बाढ़ आ गई है। खबर है कि खुद ..

औवेसी की जहरीली जुबान और एतिहासिक तथ्‍य

    ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी जिस तरह से अपनी जहरीली जुबान का प्रयोग करते हैं, उससे जरूर अनेक बार लगता है कि पता नहीं कब भारत की सर्वधर्म सद्भाव की फिजा खराब हो जाए और जिसके पूर्ण दोषी नि‍श्‍चित तौर पर सांसद औवेसी ही होंगे। वस्‍तुत: हाल ही जिस तरह से मक्का मस्जिद में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निशाना साधा है और कहा कि हम यहां पर बराबर के शहरी हैं, किराएदार नहीं हैं हिस्सेदार रहेंगे। अगर कोई यह ..

भद्र बंगाल के पुनर्निर्माण में जुटा यौद्धा – कैलाश विजयवर्गीय

एक बंगाली कहावत है “सोरसे मोद्हे भूत , तहाले भूत केमोन भाग्बे”यानि सरसों की जड़ में सरसों का भूत है , तो भूत भागेगा कैसे ? यानि जब समस्या के मूल में ही समस्या है तो समस्या जायेगी कैसे? इसे हम इस प्रकार ..

राष्ट्रवाद के नव प्रणेता -मोदी

चुनाव २०१९ में नब्बे  करोड़ मतदाताओं में से साठ करोड़ मतदाताओं का मतदान मोदी द्वारा प्राप्त करने के बाद, ख़याल आया कि - वामपंथ ने कैसे कैसे वैश्विक भ्रमजालों का निर्माण किया है. लियो टालस्टाय का एक उपन्यास हुआ है “वार एंड पीस” फ्रांसीसी वि..

अछूत कांग्रेस 'जी हुजूरी' के शोरगुल में फिर चूक गई!

  वंशवाद के खिलाफ आम चुनाव की घोषणा होते ही नरेंद्र मोदी ने पहला प्रहार कर बयान दिया और राजनीतिक इच्छाशक्ति बताई, तब लोगों ने इसे 'चुनावी शिगूफा' और जनता का दिल बहलाने वाला एक स्टंट माना! लेकिन, जब उन्होंने अपनी पार्टी में वंशव..

जी हाँ! वीर ही थे वीर सावरकर

मार्क्सवादी और कांग्रेसी विचारधारा के नशे में झूमते हुए जिन इतिहासकारों ने पिछले लगभग 6 दशकों तक भारतीय इतिहास के लेखन और पठन-पाठन पर अपने वर्चस्व के द्वारा जिन ऐतिहासिक तथ्यों को निरंतर दबाया वह इतिहास आज उठ कर बोल रहा है ओर बहुत ताकत से बोल रहा है। इत..

सामाजिक क्रांतिकारी : स्वातंत्र्यवीर विनायक दा. सावरकर

28 मई सावरकर जयंती विशेष एक ऐसा क्रांतिकारी जो हिन्दू समाज में फैली अस्पृश्यता और कुरीतियों के खिलाफ न केवल मुखर था बल्कि संगठित हिन्दू समर्थ भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए अनेकों का प्रेरणा स्त्रोत भी बना । आज जब हम लोकतंत्र की विजय का पर्..

जातिवाद से आजाद होता देश का लोकतंत्र

2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम कई मायनों में ऐतिहासिक रहे।  इस बार के चुनावों की खास बात यह थी कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनाव परिणामों पर देश ही नहीं दुनिया भर की नज़रें टिकी थीं। और इन चुनावों के  परिणामों ने विश्व में..

संघ व गोड्से के सम्बन्ध की अंतर्कथा

  गांधी जी की हत्या के पश्चात के प्रत्येक दशक में दस पांच बार गोएबल्स थियरी के ठेकेदारों ने ये प्रयास सतत किये हैं कि गांधीजी की हत्या को संघ के मत्थे मढ़ दिया जाए जिसमें वे हर बार असफल रहें हैं। अब देश भर में गांधी व गोड़से को लेकर नया विमर्श प्रार..

आखिर साध्वी जी से परहेज़ क्यों है ?- डॉ. नीलम महेंद्र

साध्वी का विरोध करने वाले इस तथ्य को भी नजरअंदाज नहीं कर  सकते कि अगर साध्वी प्रज्ञा को अदालत ने आरोप मुक्त नहीं किया है तो इन 8 सालों में वो दोषी भी नहीं सिद्ध हुई। बल्कि ऐसे कोई सुबूत ही नहीं पाए गए जिससे उन पर मकोका लगे जिसके अंतर्गत उनक..

हां, मैं भी बाबरी भंजक हूं और प्रज्ञा के साथ हूँ - प्रवीण गुगनानी

एक प्रश्न बड़ा प्रासंगिक है इन दिनों कि साध्वी प्रज्ञा को गुस्सा क्यों आ रहा है और इस गुस्से में वे हेमंत करकरे को क्यों कोस रहीं हैं व बाबरी विध्वंस में स्वयं की भागीदारी क्यों जगजाहिर कर रहीं हैं?!! इस गुस्से के विषय में प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात के शिष..

संघ और गांधीजी

चुनाव का शंख बज चुका है. सभी दल अपनी-अपनी संस्कृति और परम्परा के अनुसार चुनावी भाषण भी दे रहे हैं. एक दल के नेता ने कहा कि इस चुनाव में आपको गांधी या गोडसे के बीच चुनाव करना है. एक बात मैंने देखी है. जो गांधी जी के असली अनुयायी हैं, वे अपने आचरण पर अधिक ध..

झूठ कहते हैं वह की राम मंदिर का ताला राजीव गाँधी ने खुलवाया

कांग्रेसी झूठ बोलते हैं राम जन्मभूमि का ताला राजीव गांधी ने खुलवाय . यह महज एक संयोग था जब राम जन्मभूमि का ताला खोलने का आदेश फैजाबाद के जिला न्यायाधीश केएम पांडे ने दिtया उस समय राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे. राजीव गांधी ने उस समय इलाहाबाद हाई कोर..

जनता की अदालत में फैसला अभी बाकी है

कुछ समय पहले अमेरिका के एक शिखर के बेस बॉल खिलाड़ी जो कि वहाँ के लोगों के दिल में सितारा हैसियत रखते थे, उन पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप लगा। लेकिन परिस्थिति जन्य साक्ष्य के आभाव में वो अदालत से बरी कर दिए गए जबकि जज पूरी तरह आश्वस्त थे कि..

देश-द्रोहियों के मताधिकार?

चुनाव नजदीक आते ही विविध राजनैतिक दलों व नेताओं में वाकयुद्ध प्रारम्भ हो जाता है। एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए अनेक बार, शब्दों की सीमाएं, न सिर्फ संसदीय मर्यादाएं बल्कि, सामान्य आचार संहिता का भी उल्लंघन कर जाती हैं। राजनैतिक दलों के सिद्धांतों,..

जिस दिन वो जाति धर्म से ऊपर उठकर सोचेगा ,निजस्वार्थ से पहले देशहित की सोचेगा - डॉ. नीलम महेंद्र

देश में एक बार फिर चुनाव होने जा रहे हैं और लगभग हर राजनैतिक दल मतदाताओं को "जागरूक" करने में लगा है। लेकिन इस चुनाव में खास बात यह है कि इस बार ना तो कोई लहर है और ना ही कोई ठोस मुद्दे यानी  ना सत्ताविरोधी लहर ना विपक्ष के पक्ष में हवा। बल्कि अगर यह..

राहुल गांधी आरएसएस से नफ़रत कर सकते हैं, लेकिन संघ अपने विरोधियों से भी घृणा नहीं करता - अरुण आनंद

06 अप्रैल 2019 को अंग्रेजी वेव साईट फर्स्ट पोस्ट में प्रकाशित विश्व संवाद केंद्र के मुख्य कार्यकारी निदेशक श्री अरुण आनंद का एक विचार प्रधान आलेख -   यह सर्वविदित है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ..

'कर्मवीर' संपादक माखनलाल चतुर्वेदी .

आज की पत्रकारिता के समक्ष जैसे ही गोकशी का प्रश्न आता है, वह हिंदुत्व और सेकुलरिज्म की बहस में उलझ जाता है। इस बहस में मीडिया का बड़ा हिस्सा गाय के विरुद्ध ही खड़ा दिखाई देता है। सेकुलरिज्म की आधी-अधूरी परिभाषाओं ने उसे इतना भ्रमित कर दिया है कि वह..

यह सुधार समझौतों वाली, मुझको भाती नहीं ठिठोली ।

पं.माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में एक ऐसा नाम हैं, जिसे छोड़कर हम पूरे नहीं हो सकते। उनकी संपूर्ण जीवनयात्रा, आत्मसमर्पण के खिलाफ लड़ने वाले की यात्रा है। रचना और संघर्ष की भावभूमि पर समृद्ध हुयी उनकी लेखनी मे..

‘कर्नल’ निज़ामुद्दीन: वह वीर, जिसने खुद गोली खाकर बचायी थी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जान!

भारत को आज़ादी मिले 70 साल से भी ज़्यादा वक़्त बीत चूका है और इस बीतते वक़्त के साथ बहुत से स्वतंत्रता सेनानियों की यादें धुंधली- सी हो गयी हैं। ऐसे कई नाम हैं हमारे आज़ादी के इतिहास में, जिन्होंने देश के लिए खुद को समर्पित कर दिया; पर आज लोगों को उनके नाम त..

कमलनाथ जी - सरकारे आएँगी और जायेंगी पर हम आपको न भूल पायेंगे.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को जितना मैंने समझा है वह भारत वर्ष की सभ्यता, संस्कृति और सीमाओं को मजबूत करने और उसकी रक्षा करने हेतु बना एक मजबूत संगठन है. संघ के स्वयंसेवक अपने घर से देश को कुछ देने निकले हैं, लेने नहीं निकले कमलनाथ जी ! और जब संघ का स्वयंस..

जिस विश्वविद्यालय को बख्तियार खिलजी ने जलाया आज वहां बताया जा रहा है इस्लाम शांतिप्रिय महजब है।

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरोद्धार के बाद इसे अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की मान्यता प्रदान की गई है। इसके लिए 2013 में आठवें पूर्वी एशिया सम्मेलन में विभिन्न देशों की सरकारों के साथ एक करार किया गया था। इस करार में अभी तक विएतनाम, लाओस, थाईलैंड, श्रीलंका, चीन, इंडोनेशिया, पुर्तगाल, न्यूजीलैंड, म्यांमार, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, आस्ट्रेलिया आदि कुल 13 देश शामिल हो चुके हैं। वर्तमान में यहां स्नातकोत्तर और उससे ऊपर के अनेक पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इनके संचालन के लिए सात विद्यालयों की ..

टुकड़े - टुकड़े पाकिस्तान : ‘पाकिस्तान’ की किस्मत का तारा – खैबर पख्तूनख्वा (भाग-२)

पाकिस्तान का, अफगानिस्तान से सटा हुआ राज्य, जिसे आज ‘खैबर पख्तूनख्वा’ कहा जाता हैं, पाकिस्तान की झोली में आया, नेहरु के कारण. यह राज्य, पाकिस्तान की किस्मत का तारा हैं, जिसके कारण अमरीका ने अफगानिस्तान के रुसी सैनिकों से लोहा लेने के लिए, पाकि..

चपरासी से राष्ट्रपति तक सब चौकीदार ही चौकीदार - नरेन्द्र सहगल

एक ऊंचे विशालकाय पेड़ पर शहद से लबालब भरा हुआ मधुमक्खियों का एक बहुत बड़ा छत्ता लटक रहा था। एक अनाड़ी और अधकचरे दिमाग वाले बच्चे के मुंह में शहद की लार टपकने लगी। उसने अपनी औकात देखे बिना ही मधुमक्खियों की चौकीदारी में सुरक्षित शहद के उस छत्ते पर एक पत्थर दे..

कल तक वो रीना थी लेकिन आज "रेहाना" है – डॉ. नीलम महेंद्र

  दिन की शुरुआत अखबार में छपी खबरों से करना आज लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा है। लेकिन कुछ खबरें सोचने के लिए मजबूर कर जाती हैं कि क्या आज के इस तथाकथित सभ्य समाज में भी मनुष्य इतना बेबस हो सकता है? क्या हमने कभी खबर के पार जाकर यह..

महादेवी वर्मा : एक विरल व्यक्तित्व

 छायावाद के प्रतिनिधि कवियों में महादेवी का नाम आदर के साथ लिया जाता है ।उनका स्मरण करते ही एक विशिष्ट छवि आँखो के सामने उभरने लगती है ।सफेद रंग की सूती साड़ी जिस पर हल्के रंगो की बार्डर और सीधे पल्ले की साड़ी से सिर ढके हुए चेहरे पर शांत भाव और सादग..

भारत में तो अवतरित होते हैं चौकीदार - नरेन्द्र सहगल

मैं भी चौकीदार हूं - (भाग-2) इस सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता कि एक जन्म लेने वाले दुधमुंहें बच्चे से लेकर जीवन की अंतिम श्वास लेने वाले वृद्ध तक सभी जीवन भर चौकीदारी करते हैं। बच्चा जब अपनी माँ का स्तनपान करता है तो अपने पास किसी दूसरे बच्चे को फटकने भी ..

मंदिरों में घंटियां बजा रहे हैं वंशवादी चोर - नरेन्द्र सहगल

मैं भी चौकीदार हूं - (भाग-1)  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार हूं’ के चुनावी अभियान की हुंकार भर के वंशवादी चोरों, भ्रष्टाचारियों, घोटालेबाजों और गबन के आरोपों में जमानत पर छूटे नेताओं की नींद हराम कर दी..

संघ की प्रतिनिधि सभा, भाग- 4 : संघ साधना का शंखनाद- राष्ट्रहित सर्वोपरि - नरेन्द्र सहगल

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव मात्र खानापूर्ति की श्रेणी में नहीं आते। एक क्रमबद्ध प्रक्रिया और गहरे विचारमंथन के पश्चात पारित किए जाने वाले इन प्रस्तावों में जनसत्ता और राजसत्ता दोनों के लिए दिशानिर्देश निहित होता है। ये प्रस्ताव..

संघ की प्रतिनिधि सभा भाग- 3 : विश्व की एक अतुलनीय, ‘देवदुर्लभ संसद’ – नरेन्द्र सहगल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनधि सभा की वार्षिक बैठक एक ऐसी अद्भुत चिंतनशाला है जिसमें संगठन से सम्बंधित विषयों के साथ राष्ट्रहित के महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा होती है । अर्थात संघ केवल संघ के बारे में ही नहीं सोचता । यहाँ देश की सु..

संघ की प्रतिनिधि सभा भाग- 2 : संगठित राष्ट्र-जीवन का लघु कुम्भ - नरेन्द्र सहगल

‘परम वैभवशाली राष्ट्र’ इस उद्देश्य के साथ भारत के प्रत्येक क्षेत्र में सक्रिय राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ सत्ता की राजनीति से अलिप्त रहते हुए एक अपराजेय जनसत्ता अर्थात राष्ट्रशक्ति के निर्माण में जुटा हुआ है । प्रत्यक्ष शाखा कार्य और अपने लगभग 40 ..

आज का भारत गांधी का अहिंसा वादी भारत नहीं बल्कि यह न्यू इंडिया है – डॉ. नीलम महेंद्र

ये वो भारत है जो अपने गुनहगारों का पीछा करते हुए खुद को सीमाओं में नहीं बंधता। वो सीमाओं के पार जाकर साज़िश के असली गुनहगारों को उनके अंजाम तक पहुंचाता है। हम शांति चाहते हैं और शांति के लिए हम युद्ध करने के लिए तैयार हैं।  वैश्विक राज..

अब आर नहीं पार करो...ऐसे बाज नहीं आएगा पाकिस्तान – नरेन्द्र सहगल

  नापाक पाकिस्तान के जन्मकाल से लेकर आजतक के इतिहास से तो यही जगजाहिर हुआ है कि बार बार मार खाने के बाद भी पाकिस्तान बाज आने वाला नहीं है. इस दहशतगर्द मुल्क के खून में ही भारत और भारतीयता के प्रति नफरत के कीड़े मौजूद हैं. मजहबी कट्टरपन के इन कीड़ों ..

नरेन्द्र मोदी आगे बढ़ो, देश तुम्हारे साथ है - नरेन्द्र सहगल

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की योजना और इशारे पर हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद जिस तरह से भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी कूटनीतिक ‘चाणक्य नीति’ का परिचय सारे संसार को दिया है उससे उत्साहित होकर समस्त भारतवासी एकजुट होकर सरकार क..

समय है देश विरोधियो के चेहरे से नकाब उतारने का – डॉ. नीलम महेंद्र

पुलवामा की आतंकवादी घटना के बाद से जिस प्रकार के कदम हमारी सरकार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा रही है उससे ना सिर्फ देश में एक सकारात्मक माहौल उत्पन्न हुआ है बल्कि इन ठोस कदमों ने  हमारे सुरक्षा बलों के मनोबल को भी ऊंचा किया है। लेकिन यह खे..

एक धक्का और दो, नापाक मुल्क को तोड़ दो - नरेन्द्र सहगल

अब आर नहीं, पार करो (भाग-5) पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के लिए भारत की सरकार ने अनेक ठोस/सख्त कदम उठाए हैं। पाकिस्तान को दिए गए ‘सर्वाधिक तरजीही देश’ का दर्जा वापस लेना, सेना को सैन्य कार्यवाही के लिए खुली छूट,&n..

अब ‘सुदर्शन-चक्र’ उठा लो योगेश्वर - नरेन्द्र सहगल

देश के प्रत्येक कोने से एक ही आवज सुनाई दे रही है : पाकिस्तान को सबक सिखाओ-मुहतोड़ जवाब दो-जवानों की शहादत का बदला लो-सख्त सैनिक कार्यवाही करके पाकिस्तान के टुकड़े कर दो। पड़ोसी देश शिशुपाल ने भारत की धरती पर निरंतर भारी खून खराबा करके सौ से ज्यादा गालियां द..

देशभक्ति लौ में जलता भारत – डॉ. नीलम महेंद्र

यह नए भारत की ताकत ही है कि कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को मिलने वाली सुरक्षा और सुविधाओं के छीने जाने पर फारूख अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ्ती जैसे घाटी के नेता शांत हैं। और नए भारत की यह ताकत सिर्फ देश में ही नहीं दुनिया में भी दिखाई दी नए भारत का आगाज़..

ये पाकिस्तान पर चढ़ाई का सही समय है सरकार...आगे बढिये न...! - कृष्णमोहन झा

लगभग चार वर्ष पूर्व कश्मीर के उरी इलाकें में स्थित आर्मी हेडक्वाटर्स में आतंकी हमले में हमारी सेना के 18 जवानों की शहादत हुई थी। इस हमले के बाद पड़ौसी देश पाकिस्तान को सबक सिखाने की मंशा से भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुश्कर जो सर्जिकल स्ट्राइक की..

चोर बनाम चौकीदार- नरेन्द्र सहगल

सिद्धस्त चोरों की जमात - वर्तमान कांग्रेस (आई) देश के तथाकथित स्वयंभू सम्भावित प्रधानमंत्री और कांग्रेस के अध्यक्ष श्री राहुल गांधी ने राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक शिष्टाचार को तिलांजलि देकर बेशर्मी की सभी हदें पार कर दी हैं। देश के वर्तमा..

बाजारवाद के इस दौर में प्रेम भी तोहफों का मोहताज़ हो गया – डॉ. नीलम महेंद्र

वैलेंटाइन डे, एक ऐसा दिन जिसके बारे में कुछ सालों पहले तक हमारे देश में बहुत ही कम लोग जानते थे, आज उस दिन का इंतजार करने वाला एक अच्छा खासा वर्ग उपलब्ध है। अगर आप सोच रहे हैं कि केवल इसे चाहने वाला युवा वर्ग ही इस दिन का इंतजार विशेष रूप स..

राहुल की लड़ाई भ्रष्टाचार से है या मोदी से ? – डॉ. नीलम महेंद्र

क्या राहुल रॉफेल डील से सचमुच असंतुष्ट हैं? अगर हाँ, तो जैसा कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, उन्हें ठोस सबूत पेश करने चाहिए। अगर वो कहते हैं और मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनिल अंबानी को 30 हज़ार करोड़ रुपए ..

राम मंदिर आंदोलन स्थगित हुआ है, समाप्त नहीं हुआ - नरेन्द्र सहगल

संतों के मार्गदर्शन में चल रहे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के आंदोलन को फिलहाल स्थगित करके विश्व हिन्दू परिषद ने एक अति महत्वपूर्ण तथा दूरदर्शितापूर्ण कदम उठाया है। यह फैसला सवा सौ करोड़ भारतीयों की एकता को बनाए रखने एवं संसार की सबसे बड़ी भारतीय लोकतंत्..

हिन्दू परंपरा पर शोर मचाने वाले इस्लाम के नाम पर क्यों चुप हो जाते हैं।

जब बात हिन्दू परंपराओं की आती है तो तथाकथित नारीवादी बड़े जोर शोर से मुहिम शुरू कर देते हैं, लेकिन इस्लाम के मामलों में चुप्पी साध लेते हैं, कोई मुहिम नहीं चलाते भले ही उस परंपरा से किसी का जीवन बर्बाद हो रहा हो. 01 फरवरी को पूरे विश्व में ‘वर..

अन्यथा फिर बन जाएगा अयोध्या में बाबरी ढांचा।

  श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के संवेदनशील मुद्दे पर हिन्दू समाज को टुकड़ों में बांटने के लिए चल रहे राष्ट्रघातक षड्यंत्र से समस्त भारतीयों विशेषतया हिन्दुओं को सावधान रहने की आवश्यकता है। यदि यह षड्यंत्र सफल हो गया तो करोड़ों हिन्दुओं के आस्था-स्थल श्री..

स्वामी स्वरूपानन्द जी का कांग्रेसी स्वरूप

द्वारकापीठ के शंकराचार्य श्रद्धेय स्वामी स्वरूपानन्द जी सरस्वती ने अपने कुछ मुट्ठीभर संतों की एक परमधर्म संसद में घोषणा कर दी है कि वे 21 फरवरी को अयोध्या में जाकर 4 ईंटों की पूजा करके श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण प्रारम्भ कर..

हमारी सनातन परंपरा में शामिल है महिलाओं का सम्मान

कुंभ और अर्द्धकुंभ में अखाड़ों की पेशवाई और शाही स्नान का एक अलग ही आकर्षण रहा है. वर्तमान में शैव, वैष्णव और उदासीन पंथ के संन्यासियों के मान्यता प्राप्त 13 अखाड़े हैं – इनमें से सात शैव अखाड़े हैं – जूना, निरंजनी, महानिर्वाणी, अटल, आह्वान, आन..

सामाजिक न्याय की तरफ एक ठोस कदम - डॉ. नीलम महेंद्र

भारत की राजनीति का वो दुर्लभ दिन जब विपक्ष अपनी विपक्ष की भूमिका चाहते हुए भी नहीं नहीं निभा पाया और न चाहते हुए भी वह सरकार का समर्थन करने के लिए मजबूर हो गया, इसे क्या कहा जाए? कांग्रेस यह कह कर क्रेडिट लेने की असफल कोशिश कर रही है कि बिना उसके समर..

ग्राम विकास व राष्ट्र-धर्म के अग्रदूत भारत रत्न नानाजी देशमुख – विनोद बंसल

    यूं तो हमारा देश पुरातन काल से ही ॠषियों, मुनियों, मनीषियों, समाज सुधारकों व महापुरुषों का जनक रहा है जिन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व का मार्गदर्शन कर जगत कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। किंतु आधुनिक युग की बदलती ..

ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ का सच और झूठ!

  लोकसभा चुनावों की आहट के चलते विपक्षी दलों ने एक बार फिर ईवीएम मशीनों में छेड़छाड़ को मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है. हालांकि कुछ समय पूर्व संपन्न राज्यों के विस चुनावों के दौरान यह मुद्दा नहीं बना क्योंकि चुनावों में कांग्रेस को जीत नजर आ रह..

भारत में स्वाधीनता की चेतना के नायक हैं महाराणा प्रताप – डॉ. बालमुकुन्‍द

गोरखपुर (विसंकें). मध्यकालीन भारत में महाराणा प्रताप स्वाधीन चेतना के वैसे ही नायक हैं जैसे बीसवीं शताब्दी में भगत सिंह, आजाद, बिस्मिल जैसे क्रान्तिकारी थे. महाराणा प्रताप हमारे वास्तविक नायक हैं, जिनका जीवन शौर्य, संप्रभुता, स्वतंत्रता, जातीय स्वाभिमान..

शिक्षा के माध्यम से भारत को खड़ा करना होगा – डॉ. कृष्ण गोपाल

लखनऊ (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से फिर से भारत को खड़ा करना होगा. आने वाली पीढ़ी शिक्षा के साथ-साथ संस्कारवान बने, इसके लिए भी प्रयास करने की आवश्यकता है. सह सरकार्यवाह शनिवार को अर्..

कन्हैया कुमार के खिलाफ चार्जशीट दायर करने में क्यों लगे 3 साल ।

सांकेतिक चित्र   विसंके - जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में आतंकवादी अफज़ल गुरु की पुण्यतिथि के मौके पर कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अन्य के खिलाफ दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने आरोप पत्र दायर किया। चार्जशीट में शेहला राशिद और सीपीआई नेता डी र..

एक युवा सन्यासी का आध्यात्मिक एजेंडा – दरिद्र देवो भवः (भाग – 2)

12 जनवरी / जन्मदिवस, स्वामी विवेकानन्द अनैतिक सामाजिक व्यवस्थाओं और धार्मिक संस्थाओं के कुप्रबंधन के कारण समाज द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे दरिद्र और साधनहीन लोगों के प्रति हमदर्दी स्वामी जी में अकस्मात ही जागृत नहीं हुई थी. बचपन से ही उनका स्वभाव दयालू था..

शिक्षा नीति में दिखे विवेकानन्द का चिंतन

युवा नायक स्वामी विवेकानन्द को याद करते ही बुद्धि, हृदय और शरीर में ऊर्जा का संचार होने लगता है। स्वामी विवेकानन्द सबके प्रेरणा स्रोत हैं। लेकिन, युवाओं के तो वे हृदय सम्राट हैं। यही कारण है कि उनकी जयंती (१२ जनवरी) युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। दे..

एक युवा सन्यासी का आध्यात्मिक एजेंडा – दरिद्र देवो भवः (भाग – 1)

12 जनवरी / जन्मदिवस, स्वामी विवेकानन्द स्वामी विवेकानन्द के गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस ने अपने सभी शिष्यों की एक लघु सभा में घोषणा की थी – ‘नरेन्द्र धर्म की ध्वजा लेकर विश्व में सर्वत्र जाएगा और मानवों को जागृत करते हुए ज्ञान को सर्वत्र प्रस..

भारतीय सेना और मोदी सरकार : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

किसी भी देश पर शासन करनेवाली तत्‍कालीन राजनीतिक पार्टी की सरकार का उस पर किस तरह से सरकारात्‍मक और नकारात्‍मक प्रभाव होता है, दुनियाभर में इसके कई उदाहरण सहज ही देखे जा सकते हैं । भारत पर पिछली कांग्रेस-मनमोहन सरकार और वर्तमान भाजपा-मोदी सरकार..

सबरीमाला में महिला प्रवेश : आस्था या स्वतंत्रता का अहंकार

क्या अयप्पा दरबार में प्रवेश ही समानता का पर्याय केरल के सबरीमाला मंदिर में दो महिलाएं आखिरकार भगवान अयप्पा के दरबार में पहुंच ही गईं। महिला समानता के पैरोकार इसे बहुत बड़ी जीत बता रहे हैं। राज्य की सत्तारुढ़ माकपा सरकार अपनी पीठ ठोक रही है कि आखिरकार उस..

1000 साल पुराना राजा भोज का नगर नियोजन आज भी झलकता है भोपाल में - विजय मनोहर तिवारी

1000 साल पुराने नक्शे पर देश के शायद ही किसी और शहर की बसाहट इतनी स्पष्ट हो, जितना मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की है। यह बात तो सब जानते हैं कि परमार वंश के महान् राजा भोज ने भोपाल शहर को बसाया था। भोपाल नाम की उत्पत्ति भी भोज से ही है। भोपाल का बड़ा ताला..

समय है ज्ञान को किताबों से बाहर निकालने का - डॉ. नीलम महेंद्र

पढ़ाई वो ही नहीं हो जो  टीचर ने बताया और बच्चों ने उसे याद कर लिया बल्कि वो हो जो गुरु ने समझाया और बच्चों ने उसे महसूस किया। रोचक कहानियों के माध्यम से कूटनीति, राजनीति, मनोविज्ञान और व्यवहारिक ज्ञान बालकों को  देने का पंचतंत्र एक सर्व..

जेहादियों की मार से अब तो धर्मनिरपेक्षतावादी भी असुरक्षित - राजेश पाठक

रोहिंग्या मुसलमानों की देश के अंदर घुसपेठ के दौरान जब देश के अंदर एक वर्ग उनके प्रति सहानुभूति दिखाने में लगा हुआ था, तभी अमेंस्टी इंटरनेशनल के हवाले से  खबर आयी थी की यही रोहिंग्या कभी मयन्मार में जेहादियों की रहनुमायी में  हिन्दुओं के कत्..

क़र्ज़ माफ़ी सत्ता की चाबी – डॉ. नीलम महेंद्र

तीन राज्यों में विधानसभा चुनावों के नतीजों के परिणामस्वरूप कांग्रेस की सरकार क्या बनी, न सिर्फ एक मृतप्राय अवस्था में पहुंच चुकी पार्टी को संजीवनी मिल गई, बल्कि भविष्य की जीत का मंत्र भी मिल गया। जी हाँ, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने इरादे स्पष्ट..

गीता जयंती विशेष : समग्रता का उपदेश देता गीता का दर्शन – राजेश पाठक

‘क्रोध से सम्मोहन होता है, सम्मोहन से स्मृति लोप. स्मृति के लोप हो जाने से बुद्धि का नाश, और बुद्धि के नाश होने से व्यक्ति का नाश हो जाता है.’-[गीता:२-६६]. जीवन के नाश से बचने के लिए क्यों व्यक्ति को क्रोधादि अपने मानसिक आवेगों पर संयम रखना चा..

त्रेतायुग के राम और कलयुग की अयोध्या – विजय मनोहर तिवारी

भारत के ज़ख्मों से भरे इतिहास की एक धूलधूसरित कड़ी है अयोध्या। अंधेरे अतीत में एक रोशन मशाल जैसी, जो अपने बीते हुए कल की एक शानदार झलक दिखाती है। अयोध्या की स्मृतियों में क्या-क्या दर्ज होगा? दशरथ के महलों में राम की पहली किलकारी अयोध्या को याद होगी। कौशल्..

वीर शिवाजी गाथा : आने वाली अमावस - सोनाली मिश्र

पैदल न चल पाने के कारण उन्होंने एक बार पुन: कहारों को इशारा किया और पालकी में बैठ गए.  जैसे जैसे मिर्जा राजे का शिविर और शिवाजी के मध्य दूरी कम हो रही थी, शिवाजी की स्वयं से दूरी बढ़ती जा रही थी. नहीं नहीं, यह तो उनका लक्ष्य नहीं था! उनके कानों में म..

वीर शिवाजी गाथा : अफज़ल का जाल - सोनाली मिश्र (लेखमाला : भाग -2)

भोपाल(विसंके). जून के महीने में एक अजीब सी घुटन शिवाजी के जीवन में छा रही थी, हवाएं स्थिर थीं और उस जून के महीने में शिवाजी अजीब पसीना हो रहे थे। जैसे-जैसे उनका कदम आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे कोई शक्ति उनसे संवाद कर रही थी। बार-बार वह उन्हें धिक्कार रही थी, ..

मानवाधिकार दिवस समय है आत्ममंथन करने का - डॉ नीलम महेंद्र

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान सम्पूर्ण विश्व में मानव समाज एक बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहा था। यह वो समय था जब मानव सभ्यता और मानवता दोनों ही शर्मसार हो रही थीं। क्योंकि युद्ध समाप्त होने के बाद भी गरीब और असहायों पर अत्याचार, जुल्म, हिं..

कोर्ट के कटघरे में हिन्दुओं की आस्था हिन्दुओं के कटघरे में कोर्ट की आस्था - नरेन्द्र सहगल

भारत के सम्पूर्ण राष्ट्र जीवन को झकझोर देने वाले, करोड़ों हिन्दुओं की आस्था के साथ जुड़े हुए, गत 490 वर्षों से निरंतर संघर्ष करते चले आ रहे हिन्दू समाज की अस्मिता श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर के पुर्ननिर्माण का ज्वलंत एवं भावुक विषय सर्वोच्..

भारत के गौरव का प्रतीक है राम मंदिर

आधुनिक भारत के कई राष्ट्र निर्माताओं ने ‘भारत की सामूहिक अंतश्चेतना’ को अपनी वाणी और आचरण से अभिव्यक्त किया है. इस‘सामूहिक अंतश्चेतना’ की इच्छा, आकांक्षा और संकल्प है अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाकर भारत के गौर..

राष्ट्र की अस्मिता : ‘शौर्य दिवस’ : अयोध्या आंदोलन- नरेंद्र सहगल (भाग – 13)

06 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बने एक जर्जर ढांचे को भारत के राष्ट्रीय स्वाभिमान पर एक विदेशी आक्रांता द्वारा लगाया गया कलंक का टीका मानकर लाखों कारसेवकों की भीड़ ने इस कलंक को मिटा दिया. यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है कि श्रीर..

वीर शिवाजी गाथा - सोनाली मिश्र (लेखमाला : भाग -1)

भोपाल(विसंके). वर्ष 1665 का समय था। 1659 में अफजल खान का वध करने के उपरान्त पूरे भारत में शिवाजी के पराक्रम की चर्चाएं जोरो पर थीं। दक्‍क्‍न का भगवा उत्‍तर में मुगलिया सल्‍तनत के माथे पर रोज ही बल पैदा कर रहा था। विरासत में मिले इस साम्राज..

राम मंदिर नहीं तो फिर कैसी अयोध्या - सुरेश हिन्दुस्थानी

वर्तमान में संतों के नेतृत्व में हिन्दू समाज पूरे मनोयोग से यही चाह रहा है कि भारत की संस्कृति और स्वाभिमान के प्रतीक भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर अयोध्या में बने। इसके लिए हिन्दू समाज ने लम्बे समय तक संघर्ष किया है। लेकिन अब सहन करने की सीमा भी समाप्त हो ..

प्राणोत्सर्ग करने का दृढ़ संकल्प : अयोध्या आंदोलन - नरेन्द्र सहगल(भाग- 12)

मंदिर पर लगे सरकारी ताले के खुलने के बाद सभी हिन्दू संगठनों ने इस स्थान पर एक भव्य मंदिर बनाने के लिए प्रयास शुरु कर दिए। इस कालखंड में निरंतर6 वर्षों के इंतजार के बाद सरकार भी टालमटोल करती रही और न्यायालय भी इस मुद्दे को लटकाता रहा। निरंतर 6-7&..

आध्यात्मिक इतिहास की एक दुलर्भ घटना : अयोध्या आंदोलन - नरेंद्र सहगल (भाग – 11)

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के बनते बिगड़ते स्वरूप और बलिदानों की अविरल श्रृंखला के बीच भी हिन्दुओं के द्वारा आरती वंदन और अखंड रामायण पाठ एक क्षण के लिए भी बंद नहीं हुआ. अयोध्या क्षेत्र में संत महात्मा तथा समस्त हिन्दू समाज अपने श्रीराम की प्रतिमा को जन्मभूमि ..

राष्ट्रवादी मुस्लिम सरदार और धूर्त अंग्रेज : अयोध्या आंदोलन – नरेन्द्र सहगल (भाग – 10)

औरंगजेब के पश्चात् कुछ समय तो शांति से कटा, परन्तु धर्मान्ध मुस्लिम नवाबों के अहम के कारण यह विवाद सुलझने के स्थान पर उलझता चला गया. हिन्दुओं ने एक दिन भी मंदिर पर अपने अधिकार को नहीं छोड़ा. एक कालखंड ऐसा भी आया जब हिन्दू मुस्लिम सद्भाव का वातावरण बना. सन्..