आलेख

वामपंथी दुष्प्रचार के शिकार सावरकर

पुराने वामपंथी स्वातंत्र्यवीर सावरकर का सम्मान किया करते थे , लेकिन आपातकाल के बाद नव वामपंथियों ने उनके बारे में दुष्प्रचार करना शुरू किया और गांधीजी को उनका घोर विरोधी बताया। पर गांधीजी ने अपनी कई रचनाओं में सावरकर की प्रशंसा की है। इति..

पाकिस्तानी सेना बेच रही बलूचों के अंग

    बलूचों पर अत्याचार के लिए कुख्यात पाकिस्तानी सेना अब उनके खून और शरीर के अंगों की तस्करी भी करने लगी है। सेना कफन में लिपटे शव परिजनों को सौंपने के बाद अपने सामने ही दफन कराती है ताकि राज फाश न हो। अब तो फौज के खूनी हाथ पश्तूनों और मुजाहिरों तक पहुंच गए हैं   पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के हाल के अमेरिकी दौरे की दो घटनाएं याद करें। पहला, इमरान जब अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तर्ज पर संबोधित कर रहे थे, तब पाकिस्तान के कब्जे वाले ..

सपनों का एक गांव – रविंद्रनगर (मियांपुर)

यह कहानी है प्रकृति की प्रतिकूलताओं के विरूद्ध मानव के संघर्ष की. वर्ष 1947 में विभाजन की पीड़ा सहकर अपना सबकुछ खोकर शरणार्थी बनकर आए बंगाली परिवारों के पुरूषार्थ की, जिन्होंने अपने परिश्रम से बालू की टीलों को लहलहाते खेतों में तब्दील कर दिया. गुरूदेव र..

देश में आज का ग़रीब-वर्ग कल का मध्यम-वर्ग होगा

15 अगस्त 2019 को देश ने अपना 73वाँ स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। लाल क़िले की प्राचीर से देश के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नाम अपने सम्बोधन में इस बार कई महत्वपूर्ण मुद्दों को छुआ है। ट्रिपल तलाक़, धारा 370 एवं 35ए जैसे..

The Caravan, तुलसी गेबार्ड और संघ

दिल्ली से एक मासिक पत्रिका निकलती है – The Caravan. चंपक, सरिता, मुक्ता, गृहशोभा प्रकाशित करने वाली ‘दिल्ली प्रेस’ की यह पत्रिका सन 1988 में बंद हो गयी थी. लेकिन 2009 में इसे मजबूत फंडिंग के साथ फिर से नए अवतार में लाने का प्रयास हुआ औ..

ये कश्मीर के नवविहान का मंगलाचरण है!

स्वतंत्रता दिवस/जयराम शुक्ल आजादी के बाद कश्मीर का यह पहला पंद्रह अगस्त होगा जब वहां एक विधान और एक निशान की प्राणप्रतिष्ठा होगी। दो प्रधान की बात दशकों पहले से ही अप्रसांगिक है। यह वह सपना था जिसे डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने देखा था। डाक्टर मुखर्ज..

पुण्यतिथि विशेष : स्मृतियों में महारानी अहिल्यादेवी होलकर

  - रामाशीष यादव तत्कालीन मालवा राज्य की महारानी अहिल्यादेवी होलकर की आज पुण्यतिथि है। वह देशवासियों के बीच नहीं हैं। प्रजा के हित में काम करने वाली आदर्श शासक अहिल्यादेवी होलकर 13 अगस्त, 1795 को स्वास्थ्य बिगड़ने की वजह से संसार छोड़कर चली गई..

आजादी के आंदोलन में संघ का बड़ा योगदान था लेकिन संघ को श्रेय लेने की आदत नहीं

  - डॉ. मनमोहन वैद्य      कुछ समय पूर्व एक पत्रकार मिलने आए। बात-बात में उन्होंने पूछा कि स्वतंत्रता आन्दोलन में संघ का सहभाग क्या था? शायद वे भी संघ के खिलाफ चलने वाले असत्य प्रचार के शिकार थे। मैंने उनसे प्रतिप्रश्न किया कि आप ..

वनवासियों की मुश्किलें हमारे अंत की शुरूआत

  एक पत्रकार के नाते जल-जंगल-जमीन और जन पर लिखना-पढ़ना मुझे हमेशा से सुभीता रहा है। वनवासियों पर मेरी समझ किताबों के जरिए नहीं बन पाई, इस समाज को आंखों से जितना देखा और उनके बीच जाकर जो जाना बस उतना ही ज्ञान है, उससे ज्यादा कुछ नहीं। अलबत्ता अल्विन वारियर और वाल्टर जी ग्रिफिथ्स को पढ़ा है।   दोनों ने ही मध्यभारत की जनजातियों पर विषद् और वैज्ञानिक अध्ययन किया है। स्वाभाविक तौर पर इन महापुरूषों के अध्ययन का आधार वैदिक काल की वह अरण्य संस्कृति नहीं रही जिसमें यह समाज पला-बढ़ा और आज यहाँ ..

विश्व आदिवासी दिवस का मूल सत्य

जनजातीय व वनवासी समाज की प्रतिष्ठा, उसके रक्षण व विकास की भारत में प्राचीन परंपरा रही है. प्रकृति पूजन हमें वेदों से प्राप्त हुआ जिसके प्रति  नगरीय समाज की अपेक्षा जनजातीय समाज अधिक आग्रही रहा. जनजातीय समाज रक्षण का पात्र नहीं अपितु शेष समाज का रक्..

सेवा संगीत और समर्पण की प्रतिमूर्तियां सम्मानीत

भारत सरकार द्वारा देष का सर्वोच्च नागरिक सम्मान इस बार सेवा संगीत और समर्पण के  क्षेत्र में उच्च मापदंड स्थापित करने वाली विभूतियों को दिया गया है। समाज के लिए समर्पित नानाजी देषमुख, संगीत के लिए समर्पित भूपेन्द्र हजारिका और देश सेवा के लिए सर्वोच्..

अब जाकर भारत को मिली है पूरी आजादी - तारेक फ़तेह

भारतीय उपमहाद्वीप में सोमवार को एक बड़ी घटना तब हुई जब भारत सरकार ने अपने एकमात्र मुस्लिम बहुल राज्य - जम्मू और कश्मीर राज्य (J & K) को दिया गया विशेष दर्जा हटा दिया। ऐसा करने में, भारत ने मजबूत राजनितिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया, अरब, तुर्किक, फ..

रोज़गार सृजन के लिए बनानी पड़ेगी ५ लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था

देश के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी का सपना है कि देश को वर्ष 2024-25 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जाय। इसका ज़िक्र देश की संसद में श्रीमती निर्मला सीतारमन, वित्त मंत्री, भारत सरकार ने दिनांक 4 जुलाई को आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्त..

कश्मीर अभी इम्तिहान आगे और भी है।

कश्मीर में "कुछ बड़ा होने वाला है" के सस्पेंस से आखिर पर्दा उठ ही गया। राष्ट्रपति के एक हस्ताक्षर ने उस ऐतिहासिक भूल को सुधार दिया जिसके बहाने पाक सालों से वहां आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने में सफल होता रहा  लेकिन यह समझ से परे है कि कश्मी..

वे पन्द्रह दिन… / 07 अगस्त, 1947

गुरुवार, 07 अगस्त. देश भर के अनेक समाचार पत्रों में कल गांधी जी द्वारा भारत के राष्ट्रध्वज के बारे में लाहौर में दिए गए वक्तव्य को अच्छी खासी प्रसिद्धि मिली है. मुम्बई के ‘टाईम्स’ में इस बारे में विशेष समाचार है, जबकि दिल्ली के ‘हिन्दु..

चरितार्थ हुआ मोदी है तो संभव है : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के पहले कार्यकाल में जो कुछ भी हुआ उसका परिणाम यह था कि उन पर देश की जनता ने अपार भरोसा कर दूसरी बार सत्‍ता सौंपी । उस अखण्‍ड जय की कल्‍पना तो स्‍वयं नरेन्‍द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी से लेकर भाजपा के दिग्‍गज नेताओं ने भी नहीं की थी जोकि उनकी एवं उनकी पार्टी की झोली में देश की जनता ने सहसा ही डाल दी थी। किंतु इसके बाद भी यह कहने वालों की कोई कमी नहीं थी कि भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी से लेकर उनकी पूरी टीम देश की जनता को विभिन्न मुद्दों ..

कश्मीर: डर के आगे जीत है.!-जयराम शुक्ल

वाकई ये मोदी की अगस्त क्रांति है। 9 अगस्त को हम हर साल 'अँग्रेजों भारत छोड़ों' के आह्वान का स्मरण करते हैं। अगले साल के 5 अगस्त को 'कश्मीर दिवस' के रूप में मनाने लगेंगे। आजादी के बाद गोवा को लेकर मुक्ति संघर्ष हुआ। लाठी-गोली-शहादत के बाद गोवा पुर्तगालियो..

वे पंद्रह दिन… / 06 अगस्त, 1947

बुधवार… छः अगस्त. हमेशा की तरह गांधी जी तड़के ही उठ गए थे. बाहर अभी अंधेरा था. ‘वाह’ के शरणार्थी शिविर के निकट ही गांधीजी का पड़ाव भी था. वैसे तो ‘वाह’ कोई बड़ा शहर नहीं था, एक छोटा सा गांव ही था. परन्तु अंग्रेजों ने वहां पर ..

वे पन्द्रह दिन… / 01 अगस्त, 1947

शुक्रवार, 01 अगस्त 1947. यह दिन अचानक ही महत्त्वपूर्ण बन गया. इस दिन जम्मू कश्मीर के सम्बन्ध में दो प्रमुख घटनाएं घटीं, जो आगे चलकर बहुत महत्त्वपूर्ण सिद्ध होने वाली थीं. इन दोनों घटनाओं का आपस में वैसे तो कोई सम्बन्ध नहीं था, परन्तु आगे होने वाले रामाय..

अज्ञात स्वतंत्रता सेनानी : डॉक्टर हेडगेवार – 1

    नरेंद्र सहगल एक प्रखर स्वतंत्रता सेनानी डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने जन्मकाल से आज तक नाम, पद, यश, गरिमा, आत्म प्रशंसा और प्रचार से कोसों दूर रहकर राष्ट्र हित में समाजसेवा, धर्मर..

तीन तलाक को समाप्त करने का आधार बना मध्यप्रदेेश

बहुचर्चित तीन तलाक जैसी कुप्रथा पर सख्त कानून बन चुका है ,लेकिन इसके खिलाफ जंग की शुरूआत मध्यप्रदेष से ही हुई थी । मध्यप्रदेष के इंदौर नगर की शाहबानो को उसके पति ने अपनी दूसरी पत्नी के कारण सन् 1978 में तलाक दे दिया था, शाहबानो अपने गुजाराभत्ता के लिए द..

तीन तलाक और राष्ट्र चेतना

मनोविज्ञान के अनुसार समाज एक खास परिस्थिति में लोगों का एक ऐसा समूह है, जिस में एक निजी व्यक्ति का व्यक्तित्व विलीन हो जाता है, और उस के स्थान पर एक सामूहिक मन का निर्माण होता है, जो एक निर्दिष्ट दिशा की ओर संचालित होता है। समूह में व्यक्तियों के सचेतना..

ननूर नरसंहार – वामपंथियों द्वारा किया नरसंहार, जिसके बारे में कोई बात नहीं करता

यदि आपसे पूछा जाए कि दुनिया में तानाशाह कितने हुए तो आपका जवाब सबसे पहले हिटलर होगा, फिर शायद मुसोलिनी, फिर शायद कुछ कहेंगे लेनिन या स्टालिन. लेकिन जैसे ही आप लेनिन, स्टालिन, फिदेल कास्त्रो, माओ ज़ेडोंग जैसे नाम लेंगे कुछ लोगों की भौहें तन जाएंगीं. वे आ..

व्यक्तिगत खुन्नस में राष्ट्र की उपलब्धि का अपमान मानसिक विकलांगता है

  प्रधानमंत्री मोदी के “मैन वर्सेस वाइल्ड” के शो का प्रोमो आने के बाद ट्रोलर्स का गैंग फिर से सक्रिय हो गया है। आरोप वही पुराने हैं और वही पुराने आरोप जो गलत साबित हो चुके हैं दोबारा लगाए जा रहे हैं। क्या यह हिटलर कि वही नीति है जिसके ..

क्या ये सब खुद सहिष्णु हैं-विवेक कुमार पाठक

जैसे पूरे देश को सावन की रिमझिम का इंतजार था वैसे ही भारत को असहिष्णु राष्ट्र घोषित करने में जुटे कुछ लोगों को शब्द हमले का इंतजार था। ताजा सूचना मिली है कि सिने दुनिया के 40 हाईप्रोफाइल व कथित बुद्धिजीवी तबरेज के नाम पर सरकार पर तरबतर होकर हमलावर हो गए..

ट्रिपल तलाक आस्था नही, अधिकारों की लड़ाई है ।

ट्रिपल तलाक पर रोक लगाने का बिल लोकसभा से तीसरी बार पारित होने के बाद  एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में ही इसे असंवैधानिक करार दे दिया था लेकिन इसे एक कानून का रूप लेने के लिए अभी और कितना इंतज़ार क..

लिओनार्दो उनके राष्ट्रीय गौरव, हमारे…?

इस बार यूरोप प्रवास में इटली में अच्छा खासा घूमना हुआ. इटली तो इसके पहले भी तीन - चार बार गया था. लेकिन तब अपना काम कर के जल्द लौट आना, यही दिनचर्या होती थी. पर्यटक इस नाते इटली देखना रह गया था, जो इस बार संभव हो सका. लेकिन इस बार मिलान, वेनिस, रोम आदि..

ज्ञान और विज्ञान का अनूठा मेल थे अब्दुल कलाम

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की चर्चा आते ही आंखें चमक उठती हैं. वे मात्र उत्कृष्ट वैज्ञानिक ही नहीं, अपितु एक उत्तम व्यक्तित्व भी थे जो सभी मत-पंथों को समान रूप से सम्मान देते थे. वे भारतीय संस्कृति और परंपरा में ढले ऋषि, मानवतावादी, प्रकृति, संगीत प्रेमी एवं..

सरल विवेकहीन अज्ञानी साधारण हिंदू

यदि कोई हमारे उपमहाद्वीप के प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास को तर्कसंगत तरीके से देखता है, तो उसे यह निष्कर्ष प्राप्त होगा कि विश्व का सबसे पुराना धर्म, हिंदू धर्म, क्षेत्र और अनुयायियों की क्षति के मामले में सबसे अधिक नुकसान उठाने वाला धर्म प्रतीत होता है।..

देशभक्त बटुकेश्वर दत्त: शहीद भगत सिंह के साथ आज़ादी की लड़ाई लड़ी, फिर भी इन्हें भुला दिया गया

8 अप्रैल 1929, तत्कालीन इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउन्सिल के निचले सदन, यानि सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली सदस्यों और दर्शकों से भरा हुआ था। उस दिन दो अहम बिल – पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट बिल पर चर्चा होनी थी। हालांकि, ये चर्चा तो महज औ..

ललितादित्य मुक्तपीड – जिन्होंने तुर्की और अरबी आक्रांताओं को उनके राज्य में घुसकर मारा!

भारत में इस्लाम का आगमन हुआ 712 AD में, जब अविभाजित भारतवर्ष के तत्कालीन मुल्तान पर मुहम्मद बिन क़ासिम ने आक्रमण किया था। इसके पश्चात हमें अवगत कराया गया है की कैसे 1020-1025 तक गज़नवी के सुल्तान महमूद के निरंतर आक्रमणों से भारत की अजेय छवि को गहरा आघात प..

मेरठ में मकान बेचने को मजबूर हो रहे हैं हिन्दू

  प्रह्लादनगर से हिन्दू पलायन पर जितनी खबरें सामने आई हैं उनमें इस बात को सही माना गया है कि इस कॉलोनी से पिछले कुछ साल में बड़ी संख्या में हिन्दू परिवार अपने मकान बेचकर कहीं और बस गए हैं। बगल की मुस्लिम बस्ती के असामाजिक तत्वों ने हिन्दुओं का ज..

बलूचों के प्रेरक हैं चंद्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह

कल एबटाबाद था। आज बालाकोट है। कल बहावलपुर होगा। न तो पाकिस्तान दहशतगर्द तंजीमों को मदद देने और उनके सियासी इस्तेमाल से बाज आएगा, न ही उनके खिलाफ कभी-कभार होने वाला एक्शन रुकेगा। इसकी पुख्ता वजह है। पाकिस्तान दहशतगर्दी को सियासी असलहे के तौर पर इस्तेमाल करता है। इनसानी हुकूक उसके लिए कोई चीज नहीं है। पाकिस्तान और उसके हुक्मरानों को बलूचों से बेहतर कौन समझ सकता है ? बलूच तो हमेशा सेकहते रहे हैं कि बलूचिस्तान में उनके साथ जो हो रहा है, उसे रोकना सिर्फ बलूचों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए जरूरी ..

माओवादी ताकतों का मकसद है संविधान और लोकतंत्र को जड़ से उखाड़ना

भीमा कोरेगांव की घटना के विरोध में 03 जनवरी 2018 को मुंबई में भी प्रदर्शन किया गया था, रैलियां निकाली गईं थीं, बंद का आह्वान किया गया था. इस घटना को एक वर्ष पूर्ण हो गया है. अब केंद्र तथा राज्य में एक मजबूत सरकार होने और माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे कड़..

आतंकवाद के गढ़ में हर-हर महादेव

  जिस तरह वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण और महाभारत इत्यादि संस्कृत ग्रंथ भारत के गौरवशाली अतीत को संजोये हुए हैं उसी तरह हमारे तीर्थ स्थल, मेले, पर्व, त्यौहार और धार्मिक यात्राएं हिमालय से कन्याकुमार तक फैले हमारे विशाल ..

नेहरू-गांधी परिवार की राजनैतिक व कूटनीतिक विफलताएं

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जीवन की दो बड़ी विफलताएं – भारत-पाकिस्तान युद्ध (1947) और भारत-चीन युद्ध (1962) हैं. दोनों बार प्रधानमंत्री नेहरू की कमजोर दूरदर्शिता और विफल कूटनीति की साफ झलक दिखाई देती है. इन युद्धों के बाद बनी परिस्थितियों ने भार..

करोड़ों हिन्दुओं का आस्था-स्थल : अमरनाथ धाम

भारत के प्राचीन ग्रंथों और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री अमरनाथ धाम की पवित्र गुफा सम्पूर्ण सृष्टि के आद्य और आराध्य देव भगवान शिव शंकर का निवास है। इस पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग के रूप में स्वयं भगवान शंकर विराजमान..

गुरु पूर्णिमा और संघ

अपने राष्ट्र और समाज जीवन में गुरुपूर्णिमा-आषाढ़ पूर्णिमा अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है. व्यास महर्षि आदिगुरु हैं. उन्होंने मानव जीवन को गुणों पर निर्धारित करते हुए उन महान आदर्शों को व्यवस्थित रूप में समाज के सामने रखा. विचार तथा आचार का समन्वय करते हुए, ..

‘हर घर गाय’ की योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी मोदी सरकार

भारत दुनिया की सबसे तेज गति से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भविष्य में विकास दर को और ज़्यादा बढ़ाने के लिए ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना अति-आवश्यक है। केंद्र सरकार भी इस दिशा में लगातार काम कर रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था ..

हिंदू-विरोधी बीबीसी मीडिया के लिए ‘जय श्री राम’ हिंसक घोषणा है

दुनिया के सबसे एजेंडावादी मीडिया संगठन बीबीसी ने एक बार फिर वही किया जिसके लिए वह जाना जाता है। उसने फिर एक बार भारत को बदनाम करने के लिए एक लंबा चौड़ा लेख लिखा जिसमें उसने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए भगवान राम के सहारे भारत को एक मुस्लिम विरोधी रा..

कर्नाटक में कांग्रेस का नाटक

  कर्नाटक में जो चल रहा है वह कतई आश्चर्य का विषय नहीं है. जेडीएस और कांग्रेस के बचे विधायक मंत्री भी कतई न टिकते यदि उनके सामने गत लोकसभा में भाजपा द्वारा  २८ में २५ लोकसभा सीटें जीतने का भयावह आंकड़ा नहीं होता. यदि विस भंग ह..

पुण्य तिथि विशेष: युवाओं के पथ प्रदर्शक थे स्वामी विवेकानंद

युवा नायक स्वामी विवेकानंद ऐसे संन्यासी थे, जो निरंतर समाज के उत्थान के लिए चिंतित रहते थे। दरअसल, स्वामीजी संन्यास की उस भारतीय दृष्टि एवं व्यवस्था के प्रतिनिधि थे, जिसके अनुसार संन्यास आश्रम एकांत में ईश्वर की खोज के लिए नहीं अपितु जो कुछ समाज से प्राप्त किया है, उसमें बढ़ोतरी कर समाज को लौटाने की अवस्था है। उस समय स्वामी विवेकानंद ने देखा कि समाज में शिक्षा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। शिक्षा के अभाव में जीवन के सभी क्षेत्रों में भी अंधकार पसर गया था। इसलिए स्वामीजी ने शिक्षा का उजियारा फैलान ..

आजाद हिन्द फौज की स्थापना

सामान्य धारणा यह है कि आजाद हिन्द फौज और आजाद हिन्द सरकार की स्थापना नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने जापान में की थी; पर इससे पहले प्रथम विश्व युद्ध के बाद अफगानिस्तान में महान क्रान्तिकारी राजा महेन्द्र प्रताप ने आजाद हिन्द सरकार और फौज बनायी थी। इसमें&..

नशे और जिहाद का कॉकटेल, पकड़ी गई नशे की सबसे बड़ी खेप

पाकिस्तान से सटी वाघा बॉर्डर पर 30 जून को 3200 करोड़ रूपए की हेरोइन बरामद हुई. नमक की बोरियों में छिपाई गई 640 किलो हेरोइन की ये बरामदगी, संभवतः अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी है. सड़कों पर आने के बाद हेरोइन की इतनी मात्रा लाखों लोगों के लिए पर्याप्त होती| दशक..

जेपी की हुंंकार ने सिंहासन हिला दिया-जयराम शुक्ल

कांग्रेस के अध्यक्ष देवकांत बरुआ का नारा इंदिरा इज इंडिया गली कूँचों तक गूँजने लगा। इसी बीच मध्यप्रदेश में पीसी सेठी को हटाकर श्यामाचरण शुक्ल को मुख्यमंत्री बनाया गया। अखबारों की हालत यह कि पहले पन्ने से लेकर आखिरी तक इंदिरा गांधी, संजय गाँधी उनके चमचों की खबरों से पटे। हर हफ्ते कहीं न कहीं रैलियाँ, सभाएं। भीड़ जोड़ने का काम स्कूल के प्राचार्यों, हेडमास्टरों को दे दिया गया। शहर में कोई बड़ा नेता आता तो स्कूलों के सामने बसें लगवा दी जातीं और रैली सभाओं में हम बच्चे भीड़ बढ़ाने, नारे लगाने के लिए भेजे ..

जबरिया नसबन्दी ने सारे किए धरे पर पानी फेर दिया..!

  यादों में आपातकाल.. एक - जयराम शुक्ल   पंद्रह अगस्त, छब्बीस जनवरी यदि सरकारी आयोजन न होते तो पब्लिक इन्हें कब का भुला चुकी होती। लेकिन कुछ ऐसी तिथियां हैं जिन्हें राजनीति तब तक भूलने नहीं देगी जब तक कि इस देश का अस्तित्व है। इन तारीखों में सबसे ऊपर है 25 जून 1975। इस दिन देश में आपातकाल घोषित किया गया था।   आपातकाल पर मेरे दो नजरिए हैं, एक- जो मैंने देखा, दूसरा जो मैंने पढ़ा और सुना। चलिए पहले से शुरू करते हैं। वो स्कूली छुट्टी के दिन थे, मैं गाँव की स्कूल से सातवीं पास ..

आपातकाल का संघर्ष की भूमिगत सञ्चालन व्यवस्था

प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गाँधी द्वारा 25 जून 1975 को समूचे देश में थोपा गया आपातकाल एक तरफा सरकारी अत्याचारों  का पर्याय बन गया। इस सत्ता प्रायोजित आतंकवाद को समाप्त करने के लिए संघ के द्वारा संचालित किया गया सफल भूमिगत आन्दोलन इतिहास का एक महत्..

आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ - भाग 2 - सत्ता प्रायोजित आतंकवाद

इलाहबाद हाईकोर्ट द्वारा सजा मिलने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने अपने राजनीतिक अस्तित्व और सत्ता को बचाने के उद्देश्य से जब 25 जून 1975 को रात के 12 बजे आपातकाल की घोषणा की तो देखते देखते पूरा देश पुलिस स्टेट में परिवर्तित हो गया। सरक..

आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 में उस समय एक काला अध्याय जुड़ गया, जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने सभी संवैधानिक व्यवस्थाओं, राजनीतिक शिष्टाचार तथा सामाजिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर मात्र अपना राजनीति..

हिन्दू धर्म को लील रहे मिशनरी – तमिलनाडु में मतांतरण का ‘धंधा’

स्वराज्य पत्रिका ने तमिलनाडु में चल रही ईसाई मिशनरियों की मतांतरण की फैक्ट्री का पर्दाफाश करते हुए एक रिपोर्ट जारी की है. द्रविड़ आंदोलन, ‘आर्य-द्रविड़ विभाजन’ जैसे बोगस मुद्दों के ज़रिए तमिलनाडु में हिन्दुत्व/हिन्दू धर्म की जड़ों को दीमक की तरह..

संघ के संघर्षों और बलिदानों की अमिट गाथा है गोवा मुक्ति आन्दोलन

पुर्तगाली वास्को-डि-गामा हो या स्पेनिश कोलम्बस, इन सबको इतनी दूर भारत आने के लिए जिस एक चीज ने विवश किया वो थे भारतीय मसाले, यह मसाले जिस जगह पैदा होते थे वो पश्चिमी घाट का तटवर्ती इलाका था,  उसमें भी मालाबार और गोमान्तक इस व्यापार क..

भारतीय सेना ने फिर की सर्जिकल स्ट्राइक

नागालैंड में दशकों से उत्पात मचा रहे ईसाई आतंकी संगठन एनएससीएन के खिलाफ भारतीय सेना की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक. पड़ोसी देश बर्मा के घने जंगलों में छिपकर कार्रवाई करने वाला ये संगठन बर्मा के लिए भी ख़तरा. चीन की खुफिया एजेंसियों से हथियार और गोलाबारूद लेकर निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों पर करता है हमले. एनएससीएन नागालैंड को भारत से तोड़कर एक स्वतंत्र समाजवादी-ईसाई राज्य बनाना चाहता है.   भारत की सेना ने म्यांमार के सीमावर्ती जंगलों में छिपे आतंकियों पर बड़ी कार्यवाई की है. म्यांमार की सेना ने ..

500 सालों के पुर्तगाली शासन के खिलाफ क्रांती

हमारे घर की रसोई में एक तीखी खाद्य वस्तु पाई जाती है, जिसे हमारे घर की अन्नपूर्णा महिलाएं खाना बनाते समय उपयोग में लाती है, यह वाक्यांश पढ़ते ही हमारे दिमाग में मिर्च की इमेज बनकर सामने आ जाती है, लेकिन यह लाल मिर्च भारत में जिस देश से आई उस देश ने भारत..

राजनीति से परे कुछ सवाल उठाती डॉक्टरों की हड़ताल

  विरोध करने और अपने हक के लिए लड़ने के और भी तरीके हो सकते हैं जैसे काली पट्टी बांध कर आना या सफेद की जगह काला एप्रन पहनना या फिर कोई अन्य तरीका लेकिन उन्हें इतना तो सुनिश्चित करना ही चाहिए कि उनके कारण देश में अराजकता का माहौल पैदा ना हो क्योंक..

साँच कहै ता मारन धावै झूठे जग पतियाना

    कबीर जयंती/जयराम शुक्ल दो साल पहले 10 नवंबर को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में जब बड़े धूमधाम के साथ कबीर पर चर्चित और बहुखर्चित सरकारी समारोह आयोजित किया गया तब मित्र ने आपत्ति दर्ज कराई थी - कबीर तो जेष्ठ में उमस के बीच आग बरसते दिनों मे..

चर्च और यौनाचार: सलीब तले, सिसकती नन

भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों से प्राप्त आंकड़ों पर गौर करें तो एक बात स्पष्ट हो है कि चर्च अब प्रार्थनास्थल नहीं रहे, बल्कि यौनशोषण के अड्डे बन गए हैं। एसोसिएटिड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और एशिया से ननों के यौन श..

सिख दंगों पर कांग्रेस का दोहरा चरित्र

      इटली के चिंतक,विचारक व राजनीति विज्ञानी मकियावेली ने जो कहा है कांग्रेस उसके बहुत ही समीप है– “ज्ञानियों ने कहा है कि जिसका भविष्य देखना हो उसका भूतकाल देख लो”।इसके बाद कांग्रेस के सिख दंगों से जुड़ाव को लेकर अमेरिकी कवि, चित्रकार व विचारक इमर्सन की कही एक बात करना यहां जरूरी है। “उचित रूप से देखें तो इतिहास कुछ भी नहीं है सब कुछ मात्र आत्मकथा है”। सिख दंगों के समूचे संदर्भों में ये दो बातें कांग्रेस पर शत प्रतिशत चरितार्थ होती है।   1984 ..

जब हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री के खिलाफ सुनाया था निर्णय

  सारी परिस्थितियों के बीच 23 मई 1975 को सुनवाई पूरी होने पर जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने फैसला सुरक्षित रख लिया. आखिरकार फैसले का दिन (12 जून 1975) आया. जस्टिस सिन्हा ने इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उनका चुनाव रद्द कर दिया और 06 साल तक..

अब एक ही रास्ता, पानी को गिरफ्तार करो - जयराम शुक्ल

इजराइल की गैलीना मनुस्किन मेरी सोशल मीडिया मित्र हैं। वे पूरी दुनिया घूमती हैं पर भारत से उनका खास लगाव है। वे यह इतिहास जानती हैं कि यहूदियों को जब दुनिया भर से खदेड़ा जा रहा था तब भारत में ही शरण मिली थी। कभी कभार मैं उनसे इजराइल का अपडेट लेता रहता हूँ..

करना होगा ऐसे दरिंदों का सामाजिक बहिष्कार

  हर आँख नम है हर शख्स शर्मिंदा है क्योंकि आज मानवता शर्मसार है इंसानियत लहूलुहान है।  एक वो दौर था जब नर में नारायण का वास था लेकिन आज उस नर पर पिशाच हावी है। एक वो दौर था जब आदर्शों नैतिक मूल्यों संवेदनाओं से युक्त चरित्र किसी स..

राम नाम के बहाने

आज की राजनीति में राम नाम की महिमा के सार्वकालिक महत्व की बात को कोई नहीं झुठला सकता. यह देश राम राज्य की आदर्श कल्पना से लेकर गांधी के राम तक के प्रयोग का साक्षी रहा है. पिछले सप्ताह जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का काफिला बैरकपुर लोक..

कारगिल युद्ध के महानायक कैप्टन हनीफुद्दीन

पुण्य स्मरण 06 जून को कारगिल युद्ध के महानायक कैप्टन हनीफुद्दीन की 20वीं पुण्यतिथि है. कारगिल युद्ध के शुरूआती दिनों में जिन शूरवीरों ने सबसे अदम्य साहस का परिचय दिया, उसमें कैप्टन हनीफुद्दीन का नाम सबसे ऊपर है.  ऑपरेशन थंडरबोल्ट कारगिल युद्ध के..

भारतीय सेना ने मानवीयता और बहादुरी की मिशाल है कारगिल युद्ध

    आज ही के दिन भारत के प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने कारगिल युद्ध पर पहिली बार सरकार का सार्वजनिक तथा अधिकृत बयान दिया था, इस के बाद हुए कारगिल युद्ध में भारतीय सरकार की कूटनीति जीत के साथ भारतीय सेना ने मानवीयता और बहादुरी की मिशाल पेश की   भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 7 जून, 1999 को राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। विषय भारतीय सीमा के अन्दर कारगिल में पाकिस्तान सेना की घुसपैठ का था। उन्होंने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए कहा, “कोई भी देश इस तरह के आक्रमण ..

इतिहास से छेड़छाड़: कांग्रेसियों के लिए न महाराणा प्रताप महान और न ही सावरकर वीर

वीर सावरकर, जिन्हें दोहरे आजीवन कारावास की सजा हुई, पर कांग्रेस उन्हें वीर नहीं मानती. राजस्थान की कांग्रेस सरकार के अनुसार न स्वातंत्र्यवीर सावरकर ‘वीर’ थे और न महाराणा प्रताप ‘महान’। इसलिए उसने पाठ्य पुस्तकों में इन दोनों विभ..

कांग्रेस को अपनी हार नहीं, बीजेपी की जीत की समीक्षा करनी चाहिए

  2019 के लोकसभा नतीजे कांग्रेस के लिए बहुत बुरी खबर लेकर आए। और जैसा कि अपेक्षित था, देश की सबसे पुरानी पार्टी में भूचाल आ गया। एक बार फिर हार की समीक्षा के लिए कमेटी का गठन हो चुका है। पार्टी में इस्तीफों की बाढ़ आ गई है। खबर है कि खुद ..

औवेसी की जहरीली जुबान और एतिहासिक तथ्‍य

    ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी जिस तरह से अपनी जहरीली जुबान का प्रयोग करते हैं, उससे जरूर अनेक बार लगता है कि पता नहीं कब भारत की सर्वधर्म सद्भाव की फिजा खराब हो जाए और जिसके पूर्ण दोषी नि‍श्‍चित तौर पर सांसद औवेसी ही होंगे। वस्‍तुत: हाल ही जिस तरह से मक्का मस्जिद में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निशाना साधा है और कहा कि हम यहां पर बराबर के शहरी हैं, किराएदार नहीं हैं हिस्सेदार रहेंगे। अगर कोई यह ..

भद्र बंगाल के पुनर्निर्माण में जुटा यौद्धा – कैलाश विजयवर्गीय

एक बंगाली कहावत है “सोरसे मोद्हे भूत , तहाले भूत केमोन भाग्बे”यानि सरसों की जड़ में सरसों का भूत है , तो भूत भागेगा कैसे ? यानि जब समस्या के मूल में ही समस्या है तो समस्या जायेगी कैसे? इसे हम इस प्रकार ..

राष्ट्रवाद के नव प्रणेता -मोदी

चुनाव २०१९ में नब्बे  करोड़ मतदाताओं में से साठ करोड़ मतदाताओं का मतदान मोदी द्वारा प्राप्त करने के बाद, ख़याल आया कि - वामपंथ ने कैसे कैसे वैश्विक भ्रमजालों का निर्माण किया है. लियो टालस्टाय का एक उपन्यास हुआ है “वार एंड पीस” फ्रांसीसी वि..

अछूत कांग्रेस 'जी हुजूरी' के शोरगुल में फिर चूक गई!

  वंशवाद के खिलाफ आम चुनाव की घोषणा होते ही नरेंद्र मोदी ने पहला प्रहार कर बयान दिया और राजनीतिक इच्छाशक्ति बताई, तब लोगों ने इसे 'चुनावी शिगूफा' और जनता का दिल बहलाने वाला एक स्टंट माना! लेकिन, जब उन्होंने अपनी पार्टी में वंशव..

जी हाँ! वीर ही थे वीर सावरकर

मार्क्सवादी और कांग्रेसी विचारधारा के नशे में झूमते हुए जिन इतिहासकारों ने पिछले लगभग 6 दशकों तक भारतीय इतिहास के लेखन और पठन-पाठन पर अपने वर्चस्व के द्वारा जिन ऐतिहासिक तथ्यों को निरंतर दबाया वह इतिहास आज उठ कर बोल रहा है ओर बहुत ताकत से बोल रहा है। इत..

सामाजिक क्रांतिकारी : स्वातंत्र्यवीर विनायक दा. सावरकर

28 मई सावरकर जयंती विशेष एक ऐसा क्रांतिकारी जो हिन्दू समाज में फैली अस्पृश्यता और कुरीतियों के खिलाफ न केवल मुखर था बल्कि संगठित हिन्दू समर्थ भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए अनेकों का प्रेरणा स्त्रोत भी बना । आज जब हम लोकतंत्र की विजय का पर्..

जातिवाद से आजाद होता देश का लोकतंत्र

2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम कई मायनों में ऐतिहासिक रहे।  इस बार के चुनावों की खास बात यह थी कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनाव परिणामों पर देश ही नहीं दुनिया भर की नज़रें टिकी थीं। और इन चुनावों के  परिणामों ने विश्व में..

संघ व गोड्से के सम्बन्ध की अंतर्कथा

  गांधी जी की हत्या के पश्चात के प्रत्येक दशक में दस पांच बार गोएबल्स थियरी के ठेकेदारों ने ये प्रयास सतत किये हैं कि गांधीजी की हत्या को संघ के मत्थे मढ़ दिया जाए जिसमें वे हर बार असफल रहें हैं। अब देश भर में गांधी व गोड़से को लेकर नया विमर्श प्रार..

आखिर साध्वी जी से परहेज़ क्यों है ?- डॉ. नीलम महेंद्र

साध्वी का विरोध करने वाले इस तथ्य को भी नजरअंदाज नहीं कर  सकते कि अगर साध्वी प्रज्ञा को अदालत ने आरोप मुक्त नहीं किया है तो इन 8 सालों में वो दोषी भी नहीं सिद्ध हुई। बल्कि ऐसे कोई सुबूत ही नहीं पाए गए जिससे उन पर मकोका लगे जिसके अंतर्गत उनक..

हां, मैं भी बाबरी भंजक हूं और प्रज्ञा के साथ हूँ - प्रवीण गुगनानी

एक प्रश्न बड़ा प्रासंगिक है इन दिनों कि साध्वी प्रज्ञा को गुस्सा क्यों आ रहा है और इस गुस्से में वे हेमंत करकरे को क्यों कोस रहीं हैं व बाबरी विध्वंस में स्वयं की भागीदारी क्यों जगजाहिर कर रहीं हैं?!! इस गुस्से के विषय में प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात के शिष..

संघ और गांधीजी

चुनाव का शंख बज चुका है. सभी दल अपनी-अपनी संस्कृति और परम्परा के अनुसार चुनावी भाषण भी दे रहे हैं. एक दल के नेता ने कहा कि इस चुनाव में आपको गांधी या गोडसे के बीच चुनाव करना है. एक बात मैंने देखी है. जो गांधी जी के असली अनुयायी हैं, वे अपने आचरण पर अधिक ध..

झूठ कहते हैं वह की राम मंदिर का ताला राजीव गाँधी ने खुलवाया

कांग्रेसी झूठ बोलते हैं राम जन्मभूमि का ताला राजीव गांधी ने खुलवाय . यह महज एक संयोग था जब राम जन्मभूमि का ताला खोलने का आदेश फैजाबाद के जिला न्यायाधीश केएम पांडे ने दिtया उस समय राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे. राजीव गांधी ने उस समय इलाहाबाद हाई कोर..

जनता की अदालत में फैसला अभी बाकी है

कुछ समय पहले अमेरिका के एक शिखर के बेस बॉल खिलाड़ी जो कि वहाँ के लोगों के दिल में सितारा हैसियत रखते थे, उन पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप लगा। लेकिन परिस्थिति जन्य साक्ष्य के आभाव में वो अदालत से बरी कर दिए गए जबकि जज पूरी तरह आश्वस्त थे कि..

देश-द्रोहियों के मताधिकार?

चुनाव नजदीक आते ही विविध राजनैतिक दलों व नेताओं में वाकयुद्ध प्रारम्भ हो जाता है। एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए अनेक बार, शब्दों की सीमाएं, न सिर्फ संसदीय मर्यादाएं बल्कि, सामान्य आचार संहिता का भी उल्लंघन कर जाती हैं। राजनैतिक दलों के सिद्धांतों,..

जिस दिन वो जाति धर्म से ऊपर उठकर सोचेगा ,निजस्वार्थ से पहले देशहित की सोचेगा - डॉ. नीलम महेंद्र

देश में एक बार फिर चुनाव होने जा रहे हैं और लगभग हर राजनैतिक दल मतदाताओं को "जागरूक" करने में लगा है। लेकिन इस चुनाव में खास बात यह है कि इस बार ना तो कोई लहर है और ना ही कोई ठोस मुद्दे यानी  ना सत्ताविरोधी लहर ना विपक्ष के पक्ष में हवा। बल्कि अगर यह..

राहुल गांधी आरएसएस से नफ़रत कर सकते हैं, लेकिन संघ अपने विरोधियों से भी घृणा नहीं करता - अरुण आनंद

06 अप्रैल 2019 को अंग्रेजी वेव साईट फर्स्ट पोस्ट में प्रकाशित विश्व संवाद केंद्र के मुख्य कार्यकारी निदेशक श्री अरुण आनंद का एक विचार प्रधान आलेख -   यह सर्वविदित है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ..

'कर्मवीर' संपादक माखनलाल चतुर्वेदी .

आज की पत्रकारिता के समक्ष जैसे ही गोकशी का प्रश्न आता है, वह हिंदुत्व और सेकुलरिज्म की बहस में उलझ जाता है। इस बहस में मीडिया का बड़ा हिस्सा गाय के विरुद्ध ही खड़ा दिखाई देता है। सेकुलरिज्म की आधी-अधूरी परिभाषाओं ने उसे इतना भ्रमित कर दिया है कि वह..

यह सुधार समझौतों वाली, मुझको भाती नहीं ठिठोली ।

पं.माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में एक ऐसा नाम हैं, जिसे छोड़कर हम पूरे नहीं हो सकते। उनकी संपूर्ण जीवनयात्रा, आत्मसमर्पण के खिलाफ लड़ने वाले की यात्रा है। रचना और संघर्ष की भावभूमि पर समृद्ध हुयी उनकी लेखनी मे..

‘कर्नल’ निज़ामुद्दीन: वह वीर, जिसने खुद गोली खाकर बचायी थी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जान!

भारत को आज़ादी मिले 70 साल से भी ज़्यादा वक़्त बीत चूका है और इस बीतते वक़्त के साथ बहुत से स्वतंत्रता सेनानियों की यादें धुंधली- सी हो गयी हैं। ऐसे कई नाम हैं हमारे आज़ादी के इतिहास में, जिन्होंने देश के लिए खुद को समर्पित कर दिया; पर आज लोगों को उनके नाम त..

कमलनाथ जी - सरकारे आएँगी और जायेंगी पर हम आपको न भूल पायेंगे.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को जितना मैंने समझा है वह भारत वर्ष की सभ्यता, संस्कृति और सीमाओं को मजबूत करने और उसकी रक्षा करने हेतु बना एक मजबूत संगठन है. संघ के स्वयंसेवक अपने घर से देश को कुछ देने निकले हैं, लेने नहीं निकले कमलनाथ जी ! और जब संघ का स्वयंस..

जिस विश्वविद्यालय को बख्तियार खिलजी ने जलाया आज वहां बताया जा रहा है इस्लाम शांतिप्रिय महजब है।

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरोद्धार के बाद इसे अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की मान्यता प्रदान की गई है। इसके लिए 2013 में आठवें पूर्वी एशिया सम्मेलन में विभिन्न देशों की सरकारों के साथ एक करार किया गया था। इस करार में अभी तक विएतनाम, लाओस, थाईलैंड, श्रीलंका, चीन, इंडोनेशिया, पुर्तगाल, न्यूजीलैंड, म्यांमार, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, आस्ट्रेलिया आदि कुल 13 देश शामिल हो चुके हैं। वर्तमान में यहां स्नातकोत्तर और उससे ऊपर के अनेक पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इनके संचालन के लिए सात विद्यालयों की ..

टुकड़े - टुकड़े पाकिस्तान : ‘पाकिस्तान’ की किस्मत का तारा – खैबर पख्तूनख्वा (भाग-२)

पाकिस्तान का, अफगानिस्तान से सटा हुआ राज्य, जिसे आज ‘खैबर पख्तूनख्वा’ कहा जाता हैं, पाकिस्तान की झोली में आया, नेहरु के कारण. यह राज्य, पाकिस्तान की किस्मत का तारा हैं, जिसके कारण अमरीका ने अफगानिस्तान के रुसी सैनिकों से लोहा लेने के लिए, पाकि..

चपरासी से राष्ट्रपति तक सब चौकीदार ही चौकीदार - नरेन्द्र सहगल

एक ऊंचे विशालकाय पेड़ पर शहद से लबालब भरा हुआ मधुमक्खियों का एक बहुत बड़ा छत्ता लटक रहा था। एक अनाड़ी और अधकचरे दिमाग वाले बच्चे के मुंह में शहद की लार टपकने लगी। उसने अपनी औकात देखे बिना ही मधुमक्खियों की चौकीदारी में सुरक्षित शहद के उस छत्ते पर एक पत्थर दे..

कल तक वो रीना थी लेकिन आज "रेहाना" है – डॉ. नीलम महेंद्र

  दिन की शुरुआत अखबार में छपी खबरों से करना आज लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा है। लेकिन कुछ खबरें सोचने के लिए मजबूर कर जाती हैं कि क्या आज के इस तथाकथित सभ्य समाज में भी मनुष्य इतना बेबस हो सकता है? क्या हमने कभी खबर के पार जाकर यह..

महादेवी वर्मा : एक विरल व्यक्तित्व

 छायावाद के प्रतिनिधि कवियों में महादेवी का नाम आदर के साथ लिया जाता है ।उनका स्मरण करते ही एक विशिष्ट छवि आँखो के सामने उभरने लगती है ।सफेद रंग की सूती साड़ी जिस पर हल्के रंगो की बार्डर और सीधे पल्ले की साड़ी से सिर ढके हुए चेहरे पर शांत भाव और सादग..

भारत में तो अवतरित होते हैं चौकीदार - नरेन्द्र सहगल

मैं भी चौकीदार हूं - (भाग-2) इस सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता कि एक जन्म लेने वाले दुधमुंहें बच्चे से लेकर जीवन की अंतिम श्वास लेने वाले वृद्ध तक सभी जीवन भर चौकीदारी करते हैं। बच्चा जब अपनी माँ का स्तनपान करता है तो अपने पास किसी दूसरे बच्चे को फटकने भी ..

मंदिरों में घंटियां बजा रहे हैं वंशवादी चोर - नरेन्द्र सहगल

मैं भी चौकीदार हूं - (भाग-1)  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार हूं’ के चुनावी अभियान की हुंकार भर के वंशवादी चोरों, भ्रष्टाचारियों, घोटालेबाजों और गबन के आरोपों में जमानत पर छूटे नेताओं की नींद हराम कर दी..

संघ की प्रतिनिधि सभा, भाग- 4 : संघ साधना का शंखनाद- राष्ट्रहित सर्वोपरि - नरेन्द्र सहगल

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव मात्र खानापूर्ति की श्रेणी में नहीं आते। एक क्रमबद्ध प्रक्रिया और गहरे विचारमंथन के पश्चात पारित किए जाने वाले इन प्रस्तावों में जनसत्ता और राजसत्ता दोनों के लिए दिशानिर्देश निहित होता है। ये प्रस्ताव..

संघ की प्रतिनिधि सभा भाग- 3 : विश्व की एक अतुलनीय, ‘देवदुर्लभ संसद’ – नरेन्द्र सहगल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनधि सभा की वार्षिक बैठक एक ऐसी अद्भुत चिंतनशाला है जिसमें संगठन से सम्बंधित विषयों के साथ राष्ट्रहित के महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा होती है । अर्थात संघ केवल संघ के बारे में ही नहीं सोचता । यहाँ देश की सु..

संघ की प्रतिनिधि सभा भाग- 2 : संगठित राष्ट्र-जीवन का लघु कुम्भ - नरेन्द्र सहगल

‘परम वैभवशाली राष्ट्र’ इस उद्देश्य के साथ भारत के प्रत्येक क्षेत्र में सक्रिय राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ सत्ता की राजनीति से अलिप्त रहते हुए एक अपराजेय जनसत्ता अर्थात राष्ट्रशक्ति के निर्माण में जुटा हुआ है । प्रत्यक्ष शाखा कार्य और अपने लगभग 40 ..

आज का भारत गांधी का अहिंसा वादी भारत नहीं बल्कि यह न्यू इंडिया है – डॉ. नीलम महेंद्र

ये वो भारत है जो अपने गुनहगारों का पीछा करते हुए खुद को सीमाओं में नहीं बंधता। वो सीमाओं के पार जाकर साज़िश के असली गुनहगारों को उनके अंजाम तक पहुंचाता है। हम शांति चाहते हैं और शांति के लिए हम युद्ध करने के लिए तैयार हैं।  वैश्विक राज..

अब आर नहीं पार करो...ऐसे बाज नहीं आएगा पाकिस्तान – नरेन्द्र सहगल

  नापाक पाकिस्तान के जन्मकाल से लेकर आजतक के इतिहास से तो यही जगजाहिर हुआ है कि बार बार मार खाने के बाद भी पाकिस्तान बाज आने वाला नहीं है. इस दहशतगर्द मुल्क के खून में ही भारत और भारतीयता के प्रति नफरत के कीड़े मौजूद हैं. मजहबी कट्टरपन के इन कीड़ों ..

नरेन्द्र मोदी आगे बढ़ो, देश तुम्हारे साथ है - नरेन्द्र सहगल

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की योजना और इशारे पर हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद जिस तरह से भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी कूटनीतिक ‘चाणक्य नीति’ का परिचय सारे संसार को दिया है उससे उत्साहित होकर समस्त भारतवासी एकजुट होकर सरकार क..

समय है देश विरोधियो के चेहरे से नकाब उतारने का – डॉ. नीलम महेंद्र

पुलवामा की आतंकवादी घटना के बाद से जिस प्रकार के कदम हमारी सरकार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा रही है उससे ना सिर्फ देश में एक सकारात्मक माहौल उत्पन्न हुआ है बल्कि इन ठोस कदमों ने  हमारे सुरक्षा बलों के मनोबल को भी ऊंचा किया है। लेकिन यह खे..

एक धक्का और दो, नापाक मुल्क को तोड़ दो - नरेन्द्र सहगल

अब आर नहीं, पार करो (भाग-5) पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के लिए भारत की सरकार ने अनेक ठोस/सख्त कदम उठाए हैं। पाकिस्तान को दिए गए ‘सर्वाधिक तरजीही देश’ का दर्जा वापस लेना, सेना को सैन्य कार्यवाही के लिए खुली छूट,&n..