शिवपुरी संघ गाथा

दिंनाक: 30 Oct 2016 11:55:37

पृष्ठभूमि -
आगरा मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित, सुरम्य प्राकृतिक छटा के लिये विख्यात शिवपुरी आज़ादी के पूर्व तत्कालीन ग्वालियर रियासत की ग्रीष्म कालीन राजधानी थी ! नाम के अनुरूप भगवान शंकर के अनेक प्राचीन मंदिरों को अपने अंचल में समेटे शिवपुरी राजा नल की राजधानी नरवर तथा राजा अम्बरीश की राजधानी अमरखोह के सांस्कृतिक वा एतिहासिक अवशेषों के कारण पद्म श्री प्राप्त वाकणकर जी जैसे पुरातत्वविदों के आकर्षण का केंद्र भी रही है ! महाभारत में राजा नल तथा उनकी विदुषी धर्मपत्नी दमयंती का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन है ! इसी प्रकार महाराज अम्बरीश का भी भगवत भक्त शिरोमणि के रूप में वर्णन मिलता है जिन्होंने महाक्रोधी महर्षि दुर्वासा को भी ज्ञान दिया ! नरवर का किला, सुरवाया की गढ़ी, राई के भैरो, सेसई के जैन मंदिर ध्वंसावशेष, सिंधिया राजवंश के पूर्वजों की छतरियां, टाईगर अभयारण्य माधव नॅशनल पार्क तथा पवा जल प्रपात की मनोहारी छटा के कारण शिवपुरी भारत के पर्यटन मानचित्र भी अंकित है ! देशभक्तों को प्रेरणा देने बाले १८५७ स्वातंत्र्य समर के अमर सेनानी तात्याटोपे की बलिदान स्थली भी शिवपुरी है ! उन्हें अंग्रेज हुकूमत द्वारा यहाँ ही फांसी दी गई थी !
वर्तमान में शासकीय दृष्टि से शिवपुरी, पोहरी, कोलारस, बदरवास, पिछोर, खनियाधाना, करेरा, तथा नरवर तहसीलें हैं, किन्तु संघ कार्य की दृष्टि से पिछोर, खनियाधाना, करेरा, नरवर तथा एक रन्नोद नई तहसील बनाकर प्रथक पिछोर जिले की रचना की गई है ! तथा शिवपुरी जिले में  बदरवास, कोलारस, शिवपुरी नगर, शिवपुरी ग्रामीण, पोहरी तथा बैराढ़  तहसीलों की रचना हुई है !
संघ कार्य का प्रारम्भ -
शिवपुरी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रारम्भ सन १९४० से हुआ ! प्रारंभ में यह क्षेत्र ग्वालियर विभाग का हिस्सा था, किन्तु कार्य की वृद्धि तथा आवश्यकतानुसार सन १९८० में प्रथक शिवपुरी विभाग गठित किया गया ! नव गठित विभाग में शिवपुरी, गुना, अशोक नगर, श्योपुर शासकीय जिलों के अतिरिक्त कार्य की सुगमता के लिये पिछोर को भी जिला मान्य किया गया है ! आपातकाल  के दौरान भूमिगत रहकर संघ कार्य वा मीसावंदी परिवारों के सुख दुःख की चिंता करने बाले श्री अपारवल सिंह जी कुशवाह उपाख्य ठाकुर साहब को पहला विभाग प्रचारक नियुक्त किया गया ! श्री बालमुकुन्द जी झा पहले सह विभाग प्रचारक बने !
सिंधिया राजवंश के समर्थन के कारण शिवपुरी हिन्दू महासभा का गढ़ माना जाता था ! आम तौर पर हिंदुत्व का भाव होने के कारण वातावरण हिन्दू संगठन के अनुकूल था ! संघ कार्य विस्तार में इस वातावरण के कारण काफी अनुकूलता रही ! सन १९३९-४० में  नागपुर से पधारे श्री जाधवराव जी ने शिवपुरी में संघ कार्य का प्रारम्भ किया ! सर्व श्री जगदीश स्वरुप निगम, मोहरसिंह यादव, मास्टर किशन सिंह जी, केशवराव गंगाधर राव बझे, भगवती प्रसाद अग्रवाल "भगवती भैया", साहनी, सुशील बहादुर अष्ठाना, बाबूलाल गुप्ता सबसे पहले संपर्क में आने बाले स्वयंसेवक थे ! इसी दौरान  ग्वालियर में संघ कार्य की ज्योति जलाने बाले श्री मनोहर परचुरे का भी मार्गदर्शन मिलता रहा ! इनके बाद आये श्री ज्ञानचंद्र जी शास्त्री, जैन दर्शन वा कर्मकांड के प्रकांड पंडित थे | जैन समाज में वे पूजापाठ वा अनुष्ठान भी करते थे, किन्तु भोजन उसी परिवार में करते थे, जिस परिवार में संघ स्वयंसेवक हो | उनके इस आग्रह के परिणाम स्वरुप अनेक जैन परिवार संघ से जुड़े ! 
शिवपुरी के बाद आसपास के प्रमुख स्थानों कोलारस, मगरोनी, सतनबाडा में शाखाएं लगीं ! कोलारस में बाबूलाल जैन, मगरोनी में बिहारीलाल बांदिल, सतनबाडा में बद्री सिंह बड़े भाई आदि प्राथमिक दौर के स्वयंसेवक रहे ! सन १९५० से १९६० के बीच सिरसौद, झिरी, नरवर, लुकवासा, पोहरी, भटनावर आदि में कार्य विस्तार हुआ ! १९७० तक जिले में १३ शाखाएं हो चुकी थीं ! इसी समय मुरैना की तहसील श्योपुर को संघ कार्य की दृष्टि से शिवपुरी में सम्मिलित किया गया ! जो बाद में जिला घोषित हुआ !

संघ शिक्षा वर्ग -
शिवपुरी से सर्व प्रथम संघ शिक्षा वर्ग करने बाले स्वयंसेवक थे श्री लक्ष्मण जैन वकील ! उन्होंने भरतपुर से संघ शिक्षा वर्ग किया ! उन दिनों ग्वालियर विभाग के स्वयंसेवक उत्तर प्रदेश प्रांत के शिक्षा वर्गों में जाते थे ! इसी कारण सन १९४२ में श्री जगदीश स्वरुप निगम, श्री गोपीचंद सक्सेना एवं श्री मोहर सिंह यादव ने कालीचरण हाईस्कूल परिसर लखनऊ में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग से प्रथम वर्ष किया ! सन १९४३ में श्री जगदीश स्वरुप निगम का द्वतीय वर्ष प्रशिक्षण वाराणसी में हुआ ! 
सन २००० में पहली बार संघ शिक्षा वर्ग का आयोजन शिवपुरी में संपन्न हुआ ! वर्ग में सामाजिक समरसता बढाने के लिये एक अभिनव प्रयोग हुआ ! नगर की सेवा बसती के प्रत्येक परिवार से संपर्क साधा गया ! प्रत्येक परिवार से दो स्वयंसेवकों के भोजन की व्यवस्था के लिये कहा गया ! जिन परिवारों ने स्वेच्छा से इस आग्रह को मान्य किया, केवल उन्हें ही इस योजना में सम्मिलित किया गया ! फिर भी परिवारों की संख्या आवश्यकता से अधिक हो गई ! निर्धारित दिन वा समय पर सेवा बस्तियों के प्रमुख आये तथा स्वयंसेवकों को अपने साथ बस्ती में ले गए ! लेकिन विचित्र स्थिति तब उत्पन्न हुई जब पहले से तय परिवारों के पडौसी परिवार भी उत्साहित हो अपने अपने घर इन लोगों को ले जाने लगे ! हालत यह हो गई कि जो परिवार पहले से तय थे उनके पास जाने को शिक्षार्थी शेष ही नही रहे ! उन लोगों के दुःख को देखकर कई स्वयंसेवकों को दोबारा दोबारा भोजन करना पड़ा !
इस योजना से नगर में समरसता का प्रभावी वातावरण बना ! स्वयंसेवकों पर भी अच्छा असर दिखाई दिया ! उन्हें एक नई दिशा मिली !

शिवपुरी संघ कार्यालय -
शिवपुरी का पहला कार्यालय हनुमान मंदिर के ऊपर बारादरी में बनाया गया ! यहाँ केवल चारों ओर से खुली एक छपरी ही थी, उसमें ही कार्यालय था ! छपरी के सामने खुली हुई बड़ी छत होने के कारण उसका बैठक आदि में भरपूर उपयोग होता था ! इसके बाद श्री बाबूलाल जी गुप्ता के आढ़त कार्य में प्रयुक्त होने बाले हनुमान गली स्थित बाड़े के ऊपर बने एक कमरे में सन १९७७ तक कार्यालय रहा ! यहाँ कोई शौचालय ना होने के कारण ठंडी सड़क स्थित नगर पालिका के गंदे तथा बिना दरवाजों के सार्वजनिक शौचालयों में ही प्रचारकों को जाना पड़ता था ! इसके बाद क्रमशः आदर्श नगर स्थित डा.नरहरी जी के मकान गीता भवन में, श्री गोपाल कृष्ण डंडौतिया के मकान में, कैलाश मुन्ढेरी बालों के मकान में, न्यू ब्लोक स्थित डा.द्वारका प्रसाद जी के मोदी भवन में कार्यालय रहा ! इसके बाद आगरा मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित राघवेन्द्र नगर में संघ का स्वयं का कार्यालय निर्मित हुआ ! तब कही जाकर स्थाई व्यवस्था हुई !

प्रथम प्रतिवंध -
१९४८ में महात्मा गांधी की नृशंश ह्त्या हुई वा संघ पर झूठा आरोप लगाकर देश भर में स्वयंसेवकों पर अत्याचारों का दौर प्रारम्भ हुआ ! संघ पर प्रतिवंध लगाया गया, जिसके विरुद्ध प्रभावी सत्याग्रह हुआ ! संघ प्रचारक श्री शास्त्री जी के साथ सर्व श्री बाबूलाल शर्मा, भगवती प्रसाद अग्रवाल, केशव राव वझे, वसंत बक्षी, किशन सिंह मास्टर जी; जगदीश निगम, बाबूलाल गुप्ता, सुशील बहादुर अष्ठाना, मोतीलाल अग्रवाल, बद्रीसिंह बड़े भाई, मोहर सिंह यादव के अतिरिक्त हिन्दू महासभा के श्री लक्ष्मीनारायण गुप्ता, श्री नारायण प्रसाद गर्ग, श्री राज बिहारी लाल वकील, श्री बुद्ध शरण जी, श्री राम सिंह जी इस दौरान गिरफ्तार हुए ! मगरौनी में शिक्षक श्री राखे तथा करैरा के शिक्षक श्री अनन्त माधव निगुडीकर अपनी शासकीय नौकरी से निकाल दिए गए ! लम्बे संघर्ष के बाद श्री निगुडीकर बाद में गुना में शिक्षक पद पर बहाल हुए
प्रतिवंध के बाद -
वर्ष १९४९ में श्री प्यारेलाल जी खंडेलवाल संघ प्रचारक के रूप में आये ! १९५६ तक के उनके कार्यकाल में सभी तहसील केन्द्रों तक संघ कार्य का विस्तार हुआ | संसाधनों के अभाव के चलते साईकिल से ही प्रवास करते, अपने हंसमुख वा मिलनसार स्वभाव के कारण प्यारेलाल जी ने कार्य का प्रभावी विस्तार किया ! उनके कार्यकाल में ही काश्मीर सत्याग्रह हुआ ! काश्मीर में उस समय शेख अब्दुल्ला  सत्तासीन थे ! स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात जहां गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की कुशलता वा सूझबूझ के कारण ५२६ देसी रियासतों का भारतीय गणतंत्र में निर्विघ्न विलय हो गया, बही प्रधान मंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू की अदूरदर्शिता वा हठधर्मिता के चलते १९५१ में जम्मू कश्मीर रियासत का प्रथक संविधान बना ! अलग झंडा बनाया गया ! इतना ही नही तो हिन्दुओं को वलात बहां से खदेड़ने का कुचक्र चलने लगा ! 
इसके विरोध में ६ मार्च १९५३ को कश्मीर में प्रजा परिषद् के अध्यक्ष प.प्रेमनाथ डोंगरा के नेतृत्व में एक जन आन्दोलन प्रारम्भ हुआ ! पूरे देश के समान शिवपुरी से भी सत्याग्रही जत्थे रवाना हुए ! प्रथम जत्थे में श्री बाबूलाल जी शर्मा, श्री हरिहर स्वरुप निगम, श्री राज कुमार जैन आदि थे ! इन लोगों ने दिल्ली के कनाट प्लेस में सत्याग्रह कर गिरफ्तारी दी ! एक दिन तिहाड़ जेल में रखकर इन्हें हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित योल केम्प जेल में भेजा गया | दूसरे जत्थे में श्री बाबूलाल गुप्ता वा श्री शीतल चन्द्र मिश्रा गए ! इन्हें भी योल केम्प ही भेजा गया !
तीसरा जत्था श्री भगवान लाल गुरू, शंकरिया कोली, रामलाल कोली, चतुर्भुज कोली, मनीराम कोली तथा घस्सी खटीक का था ! इन लोगों ने दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में सत्याग्रह कर गिरफ्तारी दी ! इस जत्थे को पुलिसिया बर्बरता का सामना करना पडा ! इनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई ! इतना ही नहीं तो भगवान लाल गुरू के हाथ को गर्म लोहे की छड से दागा भी गया ! ! १५ दिन तिहाड़ में रखने के बाद इन्हें बरेली जेल भेजा गया, जहां ये ढाई महीने रहे ! शेष सत्याग्रहियों को भी दो माह से लेकर ६ माह तक जेल यातना सहना पडी !
१९५४ में गोआ मुक्ति आन्दोलन में शहीद हुए उजैन के स्वयंसेवक श्री राजाभाऊ महाकाल का अस्थिकलश १५ अगस्त १९५५ को शिवपुरी पहुंचा ! स्थानीय बस स्टेंड पर सेंकडों स्वयंसेवकों ने उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजली दी !
श्री खंडेलवाल जी के भिंड जाने के बाद श्री अन्ना जी साटोंड़े प्रचारक के रूप में शिवपुरी आये, उनके बाद श्री सूयकांत केलकर वा उदय जी काकिर्ड़े ने संघ कार्य विस्तार में महती भूमिका निभाई ! इनके समय में नवयुवकों का एक बहुत बड़ा वर्ग संघ से जुडा, जिन्होंने आगे चलकर आपातकाल में जेल यातना सहकर इंदिरा गांधी की तानाशाही का जमकर प्रतिकार किया !
आपातकाल -
१९७४ में श्री जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में प्रारम्भ हुआ छात्रों का नव निर्माण आन्दोलन गुजरात वा उसके बाद बिहार से होता हुआ पूरे देश में फ़ैल गया ! भ्रष्टाचार, कोटा परमिट राज, लाल फीताशाही के विरुद्ध पूरा देश उठ खड़ा हुआ ! विद्यार्थी परिषद् ने भी इस आन्दोलन में अग्रणी भूमिका निर्वाह की ! तभी इलाहावाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश से श्रीमती इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध घोषित कर दिया ! अपनी कुर्सी खतरे में देखकर श्रीमती गांधी ने २५ जून १९७५ को अर्ध रात्री में देश पर आपातकाल थोप दिया ! विरोधी दलों के नेता ही नही वल्कि कांग्रेस में भी श्रीमती गांधी से मतभेद रखने बाले मोरार जी देसाई, चन्द्र शेखर, मोहन धारिया, राम धन, कृष्ण कान्त जैसे नेता भी मीसा के अंतर्गत जेलों में ठूंस दिए गए ! देश भर में लाखों देशभक्त राष्ट्र वादी नेता इंदिरा जी की कुर्सी परस्ती की खातिर जेल में पहुँच गए ! शिवपुरी में भी सर्व श्री सुशील बहादुर अष्ठाना, घनश्याम भसीन, जगदीश वर्मा, हरदास गुप्ता, भगवान लाल पाराशर, बाबूलाल गुप्ता, दामोदर शर्मा, कृष्ण कान्त रावत, बैजनाथ छिरोलिया, रामजी दास बंसल, चन्द्र भान पटेल, उत्तम चन्द्र जैन, बाबूलाल जी शर्मा, मुन्नालाल गुप्ता, गोपाल सिंघल प्रारम्भिक दौर में ही गिरफ्तार कर लिये गए ! ये तो वे लोग हैं जिन्हें गिरफ्तार कर मीसा में भेजा गया ! उन लोगों की संख्या तो २०० से ज्यादा थी जिन्हें १५१ में गिरफ्तार कर माफीनामा लिखवाकर जमानत पर रिहा किया गया !
२५ जुलाई १९७५ को श्री गोपाल कृष्ण डंडोतिया वा श्री दिनेश गौतम ने सत्याग्रह कर गिरफ्तारी दी ! शहर की सडकों पर जब ये दोनों सत्याग्रही सर पर काला कपड़ा बांधकर " इंदिरा तेरी तानाशाही नहीं चलेगी" का उद्घोष गुंजाते निकले, तब इनके पीछे सेकड़ों युवाओं का हुजूम साथ हो गया ! अनेक प्रत्यक्षदर्शी अपनी आँखों में आंसू लिये इन्हें मन ही मन सराह रहे थे ! एसे समय में जब यह पता नहीं हो कि गिरफ्तारी के बाद कब छूटेंगे, छूटेंगे भी या नहीं, तब सत्याग्रह कर स्वयं को गिरफ्तारी के लिये प्रस्तुत करना सच में बड़े ही जीवट का काम था ! 
भय वा आतंक के एसे समय में जब सामान्य व्यक्ति मीसावंदियों के परिवार से दूर रहने में ही अपनी भलाई समझ रहा था, तब मीसावंदी परिवारों के सुख दुःख की चिंता करने, उन्हें दिलासा देने का काम संभाला सर्व श्री रमेश जी गुप्ता, प्रोफ़ेसर राम गोपाल जी त्रिवेदी, जगदीश गुप्ता, ओम खेमरिया, पुरुषोत्तम गुप्ता आदि स्वयं सेवकों ने ! 
जेल जीवन से घवराये अनेक नेताओं ने येन केन प्रकारेण, माफी मांगकर मुक्त होने में ही भलाई समझी, तब भी संघ के आदर्श स्वयं सेवकों ने हिम्मत नहीं हारी ! इतना ही नहीं तो १४ नवम्बर १९७५ से देश व्यापी सत्याग्रह की योजना बनी ! व्यूह रचना हेतु शिवपुरी में संघ के विभाग प्रचारक श्री लक्ष्मण राव तरानेकर जी, जनसंघ के संगठन मंत्री श्री बसंत राव निगुडीकर, संघ प्रचारक अपारवल सिंह जी कुशवाह आदि लोगो का आना जाना शुरू हुआ ! प्रत्यक्ष में तो विद्यार्थी परिषद् के तत्कालीन जिला संगठन मंत्री श्री हरिहर शर्मा को इस भूमिगत सत्याग्रह आन्दोलन का संयोजक वा श्री विमलेश गोयल को सह संयोजक बनाया गया, किन्तु मार्ग दर्शक की भूमिका में परदे के पीछे से वरिष्ठ प्रचारक श्री अपारबल सिंह कुशवाह, महाविद्यालय में व्याख्याता श्री डा. राम गोपाल जी त्रिवेदी वा भारतीय खाद्य निगम कर्मचारी श्री रमेश जी गुप्ता रहे ! मूलतः भिंड निवासी अपारबल सिंह जी उन दिनों अलग अलग घरों में रहा करते थे ! वे किसी परिवार में बच्चों के मामा तो कहीं ताऊ तो कहीं भाई बनकर रहे ! एक डुप्लीकेटिंग मशीन पिपरसमा गाँव में श्री दिनेश गौतम के खलिहान में छुपाकर रखी गई ! जहाँ से हस्त लिखित पेम्पलेट छापकर रात के समय घरों में और दुकानों में डाल दिए जाते थे ! इन पर्चों ने जन जागरण में बड़ा योगदान दिया !
१४ नवम्बर को पहला सत्याग्रही जत्था श्री महावीर प्रसाद जैन के नेतृत्व में निकला ! इसमें सर्व श्री लक्ष्मीनारायण गुप्ता, रमेश उदैया, प्रदीप भार्गव वा अशोक शर्मा शामिल थे ! अशोक शर्मा की आयु तो महज १६ वर्ष ही थी बही लक्ष्मीनारायण गुप्ता की अगले ही दिन सगाई होने बाली थी ! जत्थे में शामिल महावीर प्रसाद जैन, लक्ष्मीनारायण गुप्ता, अशोक शर्मा को मीसावंदी के रूप में शिवपुरी जेल भेज दिया गया !
श्री गुलाब चन्द्र शर्मा के नेतृत्व में दूसरा जत्था शहर की सडकों पर "नरक से नेहरू करे पुकार, मत कर बेटी अत्याचार" का नारा गुंजाते निकला ! इस जत्थे में शामिल गुलाब चन्द्र शर्मा, लक्ष्मण व्यास, महेश गौतम वा ओमप्रकाश शर्मा'गुरू' को भी मीसा के अंतर्गत गिरफ्तार कर शिवपुरी जेल भेज दिया गया ! २० दिसंबर को अंतिम सत्याग्रही जत्था श्री कामता प्रसाद बेमटे, श्री मोहन जोशी वा श्री सीताराम राठोर का निकला ! पुलिस ने कामता जी के साथ बेरहमी से मारपीट भी की !
२५ जुलाई को विमलेश गोयल पुलिस की पकड़ में आगये ! अकेले रह गए हरिहर शर्मा ने पेम्पलेट छापने वा वितरित करने भर तक स्वयं को सीमित कर लिया ! कालेज में दिन दहाड़े खुले आम पेम्पलेट वितरण करने पर उनके खिलाफ डी आई आर में मुक़दमा कायम कर दिया गया ! ६ जनवरी १९७६ को वे भी पुलिस की गिरफ्त में आ गए वा मीसावंदी के रूप में ग्वालियर केन्द्रीय काराग्रह भेज दिए गए ! मीसा वा डी आई आर दोनों में निरुद्ध होने का यह विचित्र प्रकरण था !
काराग्रह में मीसावंदियों को अत्यंत ही कठिनाईयों में रहना पड़ रहा था ! एसे में विधिवेत्ता श्री बाबूलाल जी शर्मा कि विद्वत्ता तथा चतुरता ने पूरे देश के मीसावंदियों को सुविधा प्रदान कराने में महती भूमिका निर्वाह की ! उस समय तक मीसावंदियों को लिखने पढ़ने की कोई सुविधा नहीं थी ! बाबूलाल जी ने समाचार पत्रों के अलिखित खाली भाग की कतरनों पर एक रिट पिटीशन जनहित याचिका लिखी ! इस याचिका में मीसावंदियों की दारुण कथा का कारुणिक वर्णन था ! इस याचिका को भूमिगत रहकर कार्य कर रहे तत्कालीन प्रचारक श्री लक्ष्मण राव जी तराणेकर ने देल्ही सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत कराने की व्यवस्था की ! सर्वोच्च न्यायालय ने कतरनों पर लिखी इस जन हित याचिका को ना केवल स्वीकार किया वरन उस पर एतिहासिक फैसला भी दिया, जिसके कारण पूरे देश में मीसावंदियों के मौलिक अधिकार बहाल हुए, जेल में उन्हें खाने इत्यादि की सुविधाएं मिलने लगीं, लिखने पढ़ने की भी सुविधा प्राप्त हुई !
संघ प्रेरित सत्याग्रह रंग लाया और अंततः अप्रेल १९७७ में आपातकाल समाप्त हुआ, मीसावंदी मुक्त हुए, जनता ने पलक पांवड़े बिछाकर उनका स्वागत किया ! आम चुनाव में इंदिरा जी की पराजय लोकतंत्र की विजय के रूप में परिभाषित की गई !
आपातकाल की समाप्ति के पश्चात अपारवल जी ने संघ प्रचारक के रूप में बिखरे सूत्रों को जोड़कर पुनः संघ कार्य को गतिमान बनाया ! इन्ही के समय संघ कार्य की दृष्टि से शिवपुरी को विभाग बनाया गया, और अपारवल सिंह जी उपाख्य ठाकुर साहब को प्रथम विभाग प्रचारक ! 
इसी दौरान श्री सुरेश जी सोनी शिवपुरी जिला प्रचारक तथा उसके बाद शिवपुरी विभाग प्रचारक भी रहे ! श्री सोनी जी वर्तमान में संघ के अखिल भारतीय सह सर कार्यवाह का दायित्व निर्वहन कर रहे हैं !

शिवपुरी विभाग में विभिन्न उत्तरदायित्व ग्रहण कर कार्य विस्तार करने बाले स्वयं सेवक निम्नानुसार हैं -
विभाग संघ चालक -
(१) मा. मुन्नालाल गुप्ता (२) मा. पुरुषोत्तम गौतम (३) मा. सरदार बख्तावर सिंह 
विभाग कार्यवाह -
(१) श्री दीवान सिंह रघुवंशी (२) श्री गणपतराव दहीफले (३) श्री अशोक अग्रवाल (४) श्री शिरोमणी दुबे (५) श्री देवेन्द्र सिंह कुशवाह
विभाग प्रचारक -
(१) श्री अपरवल सिंह कुशवाह (२) श्री सुरेश जी सोनी (३) श्री गोरेलाल बारचे (४) श्री श्रीराम अरावकर (५) श्री दिनकर सबनीस (६) श्री अनिल दागा (७) श्री हितानंद शर्मा (८) श्री चेतन शर्मा 
जिला संघचालक -
(१) श्री बाबूलाल शर्मा "वकील साहब" (२) श्री मुन्नालाल गुप्ता एडवोकेट (३) श्री बाबूलाल जैन, कोलारस (४) श्री रामनाथ नीखरा पिछोर (५) श्री मैथलीशरण मिश्रा (६) श्री रमेश गुप्ता (७) श्री बुन्देलसिंह यादव !
जिला कार्यवाह -
(१) श्री बाबूलाल शर्मा (२) श्री भगवती प्रसाद गुप्ता "भगवती भैया" (३) श्री डा. रामगोपाल त्रिवेदी (४) श्री रमेश गुप्ता (५) श्री गोपाल कृष्ण सिंघल (६) श्री राजेश भार्गेव (७) श्री भगवती प्रसाद गुप्ता, गाजीगढ़ (८) श्री सतीश अग्रवाल (९) श्री डा. नरेश चौधरी !
जिला  प्रचारक -
(१) श्री मनोहर परचुरे (२) श्री ज्ञानचन्द्र शास्त्री (३) श्री प्यारेलाल खंडेलवाल (४) श्री अन्नाजी साटवणे (५) श्री सूर्यकांत केलकर (६) श्री उदय जी काकिर्ड़े (७) श्री अपरवल सिंह कुशवाह (८) श्री विजय शर्मा (९) श्री महेश शर्मा (१०) श्री सुरेश जी सोनी (११) श्री उल्हास कुलकर्णी (१२) विवेक जोशी (१३) श्री महेश चौधरी (१४) श्री प्रवीण गुप्त (१५) श्री मनीष उपाध्याय !
शिवपुरी से निकले प्रचारक गण -
डा.राजकुमार जैन १९७८ से सतत, श्री राघवेन्द्र गौतम, श्री सतीश अग्रवाल, श्री गणेश मिश्रा, श्री राघवेन्द्र शर्मा, श्री ओमप्रकाश गुप्ता,
विस्तारक गण -
श्री सुरेन्द्र त्रिवेदी, श्री जयबहादुर वर्मा, श्री ज्ञानचन्द्र त्रिपाठी, श्री नरोत्तम गौतम, श्री ब्रिजेन्द्र त्रिवेदी, श्री कृष्णगोपाल भार्गव !