नर्मदापुर संघ गाथा

दिंनाक: 30 Oct 2016 10:42:18

पृष्ठभूमि

सतपुडा की तराई में नर्मदा नदी के दक्षिण तट पर बसा हुआ है होशंगावाद जिला ! देश को आजादी मिलने व् राज्यों के पुनर्गठन होने के बाद यह नवनिर्मित मध्य प्रदेश का अंग बना ! परम पावन नर्मदा के तट पर स्थित होने के कारण इसका धार्मिक महत्व भी है ! नर्मदा परिक्रमा करने बालों के मार्ग का यह प्रमुख पडाव है तथा तीर्थों की श्रेणी में गिना जाता है ! इसके अतिरिक्त यहाँ नोट छापने के काम में आने बाले कागज़ व रक्षा आयुध बनाने का कारखाना होने के कारण इसका सामरिक महत्व भी है ! यह भी इस नगर के विख्यात होने का एक कारण है ! मध्य रेलवे का प्रमुख जंक्शन इटारसी इसी जिले में है !

इटारसी से २० कि.मी. दूरी पर तिलक सेंदूर नामक स्थान है जहां एक पुरातन शिव मंदिर है ! यहाँ शिवरात्री तथा श्रावण मास में भरने बाले मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं ! बाबई के पास स्थित सूरज कुंड नामक स्थान पर नर्मदा का प्रवाह उत्तर मुखी से दक्षिण मुखी हुआ है, अतः उस कुण्ड में स्नान  का विशेष महत्व माना जाता है ! बान्दराभान पर नर्मदा तथा तवा नदियों का संगम है ! माघी पूर्णिमा पर यहाँ विशाल मेला लगता है !

जिले की शासकीय रचना में होशंगावाद, पिपरिया, वनखेड़ी, बावई, सोहागपुर, इटारसी तथा सिवनी मालवा सात तहसीलें हैं किन्तु संघ रचना में सिवनी मालवा तहसील को हरदा जिले में रखा गया है ! शेष तहसीलों को भी नर्मदापुर तथा पिपरिया जिलों में बांटा गया है ! संघ कार्य की द्रष्टि से नर्मदापुर जिले में ८ तहसीलें हैं ! होशंगावाद नगर, होशंगावाद ग्रामीण, इटारसी नगर, केसला (इटारसी ग्रामीण), बुधनी, रेंहटी, बावई और डोलरिया !

संघ कार्य शुरू होने के बाद से होशंगावाद संघ के महाकौशल प्रांत का एक संभाग रहा ! सन १९६२ में इसे मध्यभारत में शामिल किया गया ! तब इसके खंडवा जिले को तो इंदौर विभाग में मिला दिया गया और होशंगावाद तथा बैतूल जिलों को भोपाल विभाग में ! १५ जून १९८४ को उज्जैन शिक्षा वर्ग के पश्चात संपन्न हुई प्रांतीय बैठक में हरदा को खंडवा से प्रथक कर जिला बनाया गया ! इसी बैठक में भोपाल विभाग के होशंगावाद तथा बैतूल जिलों और नवनिर्मित हरदा जिले को मिलाकर प्रथक होशंगावाद विभाग की रचना की गई ! इसके बहुत समय बाद सन १९९८ में मध्य प्रदेश शासन ने भी हरदा को जिला बना दिया ! २०१० में मध्यप्रदेश शासन ने भी तदनुरूप नर्मदापुर संभाग घोषित कर दिया ! २००९ में संघ ने अपनी रचना में पिपरिया को प्रथक जिला मान्य किया है !

अतः अब शासकीय द्रष्टि से होशंगावाद, बैतूल तथा हरदा जिलों को मिलाकर बना नर्मदापुर संभाग, संघ द्रष्टि से नर्मदापुर, पिपरिया, बैतूल तथा हरदा जिलों का नर्मदापुर विभाग है ! होशंगावाद जिले को संघ रचना में नर्मदापुर जिला कहा गया है ! इस नए बनाए गए विभाग के प्रथम विभाग प्रचारक श्री विनायक राव मोढे तब तक उज्जैन विभाग प्रचारक थे !

संघ कार्य का प्रारम्भ और विस्तार –

होशंगावाद को यह सौभाग्य प्राप्त है कि यहाँ संघ कार्य का बीजारोपण करने प.पू. डाक्टर साहब सन १९३७ में स्वयं पधारे थे ! उस समय वे बाबा साहब आप्टे तथा श्री त्रम्ब्यक शिलेदार के साथ आकर स्थानीय दंडवते वकील के घर ठहरे थे ! वकील साहब के मकान पर ही नगर के प्रमुख लोगों से चर्चाकर नारायण प्रसाद दुबे अधिवक्ता को होशंगावाद संघ चालक नियुक्त कर संघ कार्य का श्री गणेश किया था ! अपने साथ आये श्री त्रम्ब्यक शिलेदार को कार्य विस्तार हेतु वे बहीं छोड़ गए थे ! कसेरा मोहल्ले में संघ की पहली शाखा लगना शुरू हुई ! इस शाखा के मुख्य शिक्षक थे श्रीराम लोहिया ! होशंगावाद की पहली टोली के स्वयंसेवकों में वामन पंड्या, विजय काबरे, कम्पाउन्डर अन्ना बडकस और श्रीराम लोहिया आदि थे ! शीघ्र ही यहाँ काम जड पकडने लगा और जब कुछ समय बाद डाक्टर साहब दोबारा होशंगावाद आये तब तक यहाँ शाखा की उपस्थिति ६० रहने लगी थी ! इस बात का उल्लेख स्वयं डाक्टर साहब ने १९ अगस्त १९३७ को लिखे अपने एक पत्र में किया है कि जब मैं होशंगावाद संघ स्थान पर पहुंचा तो बहां ६० स्वयंसेवक दंड लेकर उपस्थित थे ! डाक्टर साहब बनारस, दिल्ली, जबलपुर का प्रवास करते हुए होशंगावाद आये थे तथा यहाँ से वे बैतूल भी गए थे ! अपने इन प्रवास कार्यक्रमों का उल्लेख उन्होंने बाबा साहब आप्टे तथा अन्य कार्यकर्ताओं को लिखे ३,१५,१९ व २५ अगस्त १९३७ के पत्रों में किया था !

त्रम्ब्यक शिलेदार के बाद १९३९ में सोनईकर और सन १९४२ में देशपांडे होशंगावाद के प्रचारक बनकर आये थे ! संतोष जी त्रिवेदी ने होशंगावाद के कार्य विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ! वे आपातकाल लगने तक इस जिले के प्रचारक रहे !

विभाग के विभिन्न दायित्व संभालने बाले कार्यकर्ताओं के नाम निम्नांकित हैं –

विभाग संघ चालक –

मा. वैद्य परमात्मा प्रसाद वाजपेयी, मा. डा.राधामोहन सेठा, मा. विष्णु प्रसाद तंवर, मा. गोविन्द सिंह राजपूत

विभाग कार्यवाह –

श्री प्रभाकर यावलकर, श्री सतीश पिम्पलीकर, श्री गोविन्दसिंह राजपूत, श्री धन्नालाल दोगने

विभाग प्रचारक –

श्री विनायक राव मोढे, श्री डा. राजकुमार जैन, श्री निरंजन शर्मा, श्री वैभव सुरंगे, श्री वृजकिशोर भार्गव, श्री ओमप्रकाश सिसौदिया, श्री सुरेश चन्द्र जैन

जिले का केन्द्र भले ही होशंगावाद हो किन्तु रेलवे का महत्वपूर्ण जंक्शन होने के कारण इटारसी अधिक तीव्रता से विकसित हुआ है ! उसकी जनसंख्या होशंगावाद से दुगनी से भी अधिक होने के कारण तथा आवागमन व संपर्क की दृष्टि से अधिक सुविधाजनक होने के कारण संघ ने विभाग वा जिला कार्यालय इटारसी में ही बनाया है !

इटारसी –

इटारसी की शाखा भी होशंगावाद व बैतूल के साथ ही सन १९३७ में प्रारम्भ हुई थी ! तब यहाँ का काम श्री लाम्बे को सोंपा गया था ! डाक्टर जी के पत्रों में इटारसी की शाखा का भी उल्लेख है ! उन्होंने लिखा था कि इटारसी रेलवे स्टेशन पर श्री लाम्बे उनसे भेंट करने पहुंचे तथा बताया कि वे इटारसी में थोड़ा बहुत काम कर पा रहे हैं ! उस समय तो कार्य अधिक गति नहीं पकड़ सका किन्तु सन १९४० में बाबा साहब आप्टे ने इटारसी प्रवास कर कार्य को गति दी ! उसी समय श्री कर्वे यहाँ प्रचारक नियुक्त हुए ! यहाँ के प्रारंभिक स्वयंसेवकों में सर्व श्री लीलाधर, मातादीन, गंगा भैया और शंकर लाल आर्य आदि रहे ! श्री शंकर लाल आर्य को इटारसी का प्रथम नगर कार्यवाह होने का गौरव प्राप्त हुआ ! इस काल में ना केवल इटारसी की शाखा को स्थायित्व मिला वरन आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी काम बढ़ने लगा ! सन १९४६ आते आते इटारसी तहसील में २४ शाखाएं लगने लगी थीं ! मूलतः खंडवा के स्वयंसेवक तथा बहीं से प्रचारक निकले श्री राधेश्याम द्रोणकर ने इटारसी में प्रचारक के रूप में संघ कार्य को गति देने तथा प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया ! वे अनेक वर्षों तक इटारसी में प्रचारक रहे !

कार्यालय –

होशंगावाद का पहला कार्यालय सराफा चौक में श्री त्रिपाठी के मकान में था ! यह भवन कार्यालय हेतु निशुल्क प्राप्त हुआ था ! इस भवन में सन १९४६ तक कार्यालय रहा ! इसके बाद कार्यालय को श्री नर्मदा प्रसाद शुक्ला वकील के बजरिया स्थित मकान में स्थानांतरित किया गया ! सन १९४८ के प्रतिवंध तक कार्यालय वहाँ रहा ! प्रतिवंध लगने पर पुलिस ने गणवेश व घोष सहित कार्यालय का सम्पूर्ण सामान जब्त कर लिया था ! प्रतिवंध के पश्चात क्रमशः अन्नासाहब हरणे तथा डाक्टर राधामोहन सेठा के मकानों में संघ कार्यालय रहा !

इटारसी में भी प्रारम्भ से कार्यालय की व्यवस्था रही ! सन १९४६ से १९५६ तक पुरानी इटारसी में मूलचंद जी के मकान, सूरज गंज में चित्रेश चंद्रवंशी के मकान, पहली लाईन में पंजाबी बेटरी बाले के मकान, द्वारकाधीश मंदिर के सामने शिब्बू अग्रवाल के मकान में कार्यालय रहा !

जिला केन्द्र इटारसी हो जाने के बाद जिला कार्यालय भी होशंगावाद से इटारसी कर दिया गया ! रेलवे का प्रमुख जंक्शन होने के कारण प्रवास रत केन्द्रीय अधिकारियों को रेल बदलने अदि के लिए इटारसी आना या रुकना पडता है ! इसे ध्यान में रखते हुए सन १९९० में स्वयं का भवन बनबाया गया, जो वर्तमान में संघ का विभाग तथा जिला कार्यालय है !