29 दिसम्बर बलिदान दिवस – धौलाना के अमर बलिदानी

दिंनाक: 29 Dec 2016 20:37:09

क्रांतिकारी धन सिंह गुर्जर   भारत के स्वाधीनता संग्राम में मेरठ की 10 मई, 1857 की घटना का बड़ा महत्व हैl इस दिन गाय और सूअर की चर्बी लगे कारतूसों को मुंह से खोलने से मना करने वाले भारतीय सैनिकों को हथकड़ी-बेड़ियों में कसकर जेल में बंद कर दिया गयाl जहां-जहां यह समाचार पहुंचा, वहां की देशभक्त जनता तथा भारतीय सैनिकों में आक्रोश फैल गयाl मेरठ पुलिस कोतवाली में उन दिनों धनसिंह गुर्जर कोतवाल थेl वे परम देशभक्त तथा गौभक्त थेl अपने संपर्क के गांवों में उन्होंने यह समाचार भेज दियाl उनकी योजनानुसार हजारों लोगों ने मेरठ आकर जेल पर धावा बोलकर उन सैनिकों को छुड़ा लियाlइसके बाद सबने दूसरी जेल पर हमला कर वहां के भी सब 804 बंदी छुड़ा लियेl इससे देशभक्तों का उत्साह बढ़ गयाl

इसके बाद सबने अधिकारियों के घरों पर धावा बोलकर लगभग 25 अंग्रेजों को मार डालाl इनमें लेफ्टिनेंट रिचर्ड बेलेसली चेम्बर्स की पत्नी शारलैंट चेम्बर्स भी थीl रात तक पूरे मेरठ पर देशभक्तों का कब्जा हो गयाl अगले दिन यह समाचार मेरठ के दूरस्थ गांवों तक पहुंच गयाl हर स्थान पर देशभक्तों ने सड़कों पर आकर अंग्रेजों का विरोध किया, पर ग्राम धौलाना (जिला हापुड़, उत्तर प्रदेश) में यह चिंगारी ज्वाला बन गयीl क्षेत्र में मेवाड़ से आकर बसे राजपूतों का बाहुल्य हैl महाराणा प्रताप के वंशज होने के नाते वे सब विदेशी व विधर्मी अंग्रेजों के विरुद्ध थे. मेरठ का समाचार सुनते ही उनके धैर्य का बांध टूट गयाl उन्होंने धौलाना के थाने में आग लगा दीl थानेदार मुबारक अली वहां से भाग गयाl उसने रात जंगल में छिपकर बिताई तथा अगले दिन मेरठ जाकर अधिकारियों को सारा समाचार दियाl

मेरठ तब तक पुनः अंग्रेजों के कब्जे में आ चुका थाlजिलाधिकारी ने सेना की एक बड़ी टुकड़ी यह कहकर धौलाना भेजी कि अधिकतम लोगों को फांसी देकर आतंक फैला दिया जाए, जिससे भविष्य में कोई राजद्रोह का साहस न करेl वह इन क्रांतिवीरों को मजा चखाना चाहता थाlथाने में आग लगाने वालों में अग्रणी रहे लोगों की सूची बनाई गईl यह सूची थी – सुमेरसिंह, किड्ढा सिंह, साहब सिंह, वजीर सिंह, दौलत सिंह, दुर्गासिंह, महाराज सिंह, दलेल सिंह, जीरा सिंह, चंदन सिंह, मक्खन सिंह, जिया सिंह, मसाइब सिंह तथा लाला झनकूमल सिंहलl

अंग्रेज अधिकारी ने देखा कि इनमें एक व्यक्ति वैश्य समाज का भी हैl उसने झनकूमल को कहा कि अंग्रेज तो व्यापारियों का बहुत सम्मान करते हैं, तुम इस चक्कर में कैसे आ गये ? इस पर झनकूमल ने गर्वपूर्वक कहा कि यह देश मेरा है और मैं इसे विदेशी व विधर्मियों से मुक्त देखना चाहता हूंl अंग्रेज अधिकारी ने बौखलाकर सभी क्रांतिवीरों को 29 दिसम्बर, 1857 को पीपल के पेड़ पर फांसी लगवा दीl इसके बाद गांव के 14 कुत्तों को मारकर हर शव के साथ एक कुत्ते को दफना दियाl यह इस बात का संकेत था कि भविष्य में राजद्रोह करने वाले की यही गति होगीl

इतिहास इस बात का साक्षी है कि ऐसी धमकियों से बलिदान की यह अग्नि बुझने की बजाय और भड़क उठी और अंततः अंग्रेजों को अपना बोरिया बिस्तर समेटना पड़ाl वर्ष 1857 की क्रांति के शताब्दी वर्ष में 11 मई, 1957 को धौलाना में शहीद स्मारक का उद्घाटन भगतसिंह के सहयोगी पत्रकार रणवीर सिंह द्वारा किया गयाl प्रतिवर्ष 29 दिसम्बर को हजारों लोग वहां एकत्र होकर उन क्रांतिवीरों को श्रद्धांजलि देते हैंl