प्रेरक प्रसंग - दो रोटियां

दिंनाक: 14 Oct 2017 09:43:18

बच्चे के पढाई के कमरे में जब अकस्मात् उसकी माँ पहुंची तब देखा कि अलमारी में पढने-लिखने वाली कापी-किताबों की और चींटियों की लाइन चली जा रही थी | कारण था कि उन कापी किताबों के पीछे दो रोटियां रखी थीं | जब बालक विद्यालय में पढ़कर आया तब उसकी माँ ने उन रोटियों के बारे में पूछा कि, “ये रोटियां कहाँ से आयीं और यहाँ क्यों रखी गयी हैं ?”

तब उस लड़के ने शरमाकर बताया कि, “मैं अपने खाने से रोज दो रोटियां निकाल कर घर के सामने वाली भिखारिन बुढिया को खाने के लिए देता था | कल वह बुढिया आई नहीं थी इसलिए इन रोटियों को यहाँ रख दिया था ताकि उस बुढिया के आने पर उसे खाने के लिए ये रोटी दे सकूं |” बच्चे के उम्मीद थी कि शायद अब उसकी पिटाई होगी लेकिन उसकी माँ ने बच्चे का उत्तर सुनकर उसे गोद में उठा लिया | यह बच्चा कोई और नहीं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस था, जो आगे चलकर महान क्रांतिकारी बना और आजाद हिन्द सेना की स्थापना की |

साभार: पथिक सन्देश