वरिष्ठ प्रचारक महावीर जी का हृदयाघात से चंडीगढ़ में निधन

दिंनाक: 26 Oct 2017 20:03:12

राष्ट्रीय स्वयंसेवक के वरिष्ठ प्रचारक एवं अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य महावीर जी का हृदयाघात के कारण 24 अक्तूबर को पीजीआई चंडीगढ़ में निधन हो गया. स्व. महावीर जी का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए संघ कार्यालय चंडीगढ़ में रखा गया, जहाँ हजारों स्वयंसेवकों ने उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धाँजलि अर्पित की.

महावीर जी का जन्म पंजाब के शहर बुढलाड़ा, जिला मानसा में एक सम्पन्न परिवार में 22 नवम्बर 1951 को हुआ था. आपके पिताजी का नाम दीवान चंद और माता जी का नाम कृष्णा देवी था. आपके दो भाई और तीन बहने हैं. महावीर जी बाल्यकाल से संघ के स्वयंसेवक थे. आपका परिवार 1950 में बुढलाडा में आने से पहले पाकिस्तान में रहता था. आपके पिता जी पाकिस्तान में भी शाखा जाते थे और दायित्ववान कार्यकर्ता थे. बुढलाडा आने के पश्चात् भी वे नगर कार्यवाह रहे. महावीर जी का संघ प्रवेश बुढलाडा में ही हुआ था. आप वहां बचपन में प्रतिदिन शाखा जाते थे. आपकी प्रारम्भिक और सीनियर सैकेण्डरी तक की शिक्षा मानसा में हुई. स्नातक बीएससी की पढ़ाई डीएम कॉलेज मोगा से पूरी करने के पश्चात् स्टैटिस्टिक्स में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से पूरी की. आपकी बुद्धि कुशाग्र व स्मृति विलक्षण थी. गणित विषय में प्रथम श्रेणी में स्नातकोत्तर उत्तीर्ण करने पश्चात् सन् 1972 में संघ के विस्तारक बनने का संकल्प लिया, जिसका अनुपालन उन्होंने जीवन पर्यन्त किया. वे परिश्रमी एवं उच्च जीवट के धनी थे. उनका चिंतन था कि व्यक्ति अनुशासित दिनचर्या से समय का उचित प्रबंधन कर समय को बाँध सकता है. वे कहते थे- ‘सुबह उठण दा वाद्दा है, दिन छत्ती घंटे दा हो जाँदा है’. हिमाचल में संघ कार्य को प्रदेश के दूरस्थ स्थानों तक आपने परिश्रम पूर्वक पहुँचाया. आप मंडी व शिमला में जिला प्रचारक, कांगड़ा के विभाग प्रचारक और फिर हिमगिरि प्रान्त (हिमाचल व जम्मू-कश्मीर) के सह-प्रान्त प्रचारक रहे. इसके बाद आपने पंजाब के प्रांत प्रचारक, उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख, अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख के नाते दायित्व निभाया. वर्तमान में आप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकरिणी के सदस्य थे.

कुशल संगठक, मृदुभाषी व हजारों स्वयंसेवकों को गढ़ने वाले महावीर जी अब हमारे मध्य नहीं रहे, उनके निधन से एक अपूरणीय क्षति हुई है. संघ ने एक आदर्श स्वयंसेवक व अनुशासित कार्यकर्ता खो दिया है. उनका जीवन हमेशा का प्रेरणा का एक अखंड स्रोत रहेगा. ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दे.

24 अक्तूबर सुबह दिल्ली से चंडीगढ़ आते समय महावीर जी का स्वास्थ्य खराब हो गया. जिसके पश्चात् उन्हें चंडीगढ़ स्थित पीजीआई ले जाया गया. जहाँ पर 14.15 बजे इनका हृदयाघात के कारण निधन हो गया.