कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रेमचंद गुड्डू ने आरएसएस को बदनाम करने फेसबुक पर साझा किया फर्जी चित्र, कल्पना परूलेकर को मिली सजा से नहीं लिया सबक

दिंनाक: 06 Oct 2017 15:30:42

आरएसएस के स्वयंसेवकों ने पुलिस में की शिकायतमामला मध्यप्रदेश के इंदौर शहर का

भोपाल/इंदौर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अपनी गलतियों से सबक लेने को तैयार नहीं हैं। पिछले दिनों ही कांग्रेस की पूर्व विधायक कल्पना परुलेकर को फर्जी फोटो के मामले में न्यायालय ने सजा सुनाई है। इस प्रकरण से सबक न लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बदनाम करने के लिए फर्जी फोटो का सहारा लिया है। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया को सलामी देते हुए स्वयंसेवकों का फोटो साझा किया है। यह दो फोटो को मर्ज करके बनाया गया फर्जी फोटो हो, जो एबीपी न्यूज चैनल के वायरल सच कार्यक्रम में भी झूठा साबित हो चुका है। संघ के इंदौर विभाग के प्रचार प्रमुख सागर चौकसे ने इस मामले में प्रेमचंद गुड्डू और अन्य के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। 

संघ के कार्यकर्ता सागर चौकसे ने बताया कि कांग्रेस नेता प्रेमचंद गुड्डू ने अपने अधिकृत फेसबुक पेज पर फोटो और उसके साथ आपत्तिजनक संदेश जारी किया। फोटो में ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया को सलामी देते हुए स्वयंसेवकों को दिखाया गया है। इस फोटो के साथ कांग्रेस नेता ने संदेश लिखा है कि देश की आजादी में संघी गिरोह के योगदान की एक छोटी-सी झलक। चौकसे ने बताया कि यह फोटो संघ को बदनाम करने के लिए तैयार किया गया है। जबकि वास्तविक फोटो में सिर्फ स्वयंसेवक दिख रहे हैं। संघ को बदनाम करने के लिए विक्टोरिया का फोटो स्वयंसेवकों के फोटो के साथ शरारतपूर्ण ढंग से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि इसी तरह की एक पोस्ट का खंडन एबीवी न्यूज चैनल अपने चर्चित कार्यक्रम वायरल सच में कर चुका है। इसके बाद भी कांग्रेस नेता प्रेमचंद गुड्डू और उनके साथियों ने दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक संगठन आरएसएस की प्रतिष्ठा को धूमिल करने एवं पार्टी में अपनी साख बढ़ाने के लिए यह पोस्ट जारी की। उन्होंने इस पोस्ट का प्रचार-प्रसार व्हाट्सअप के माध्यम से भी किया है।

इंदौर विभाग के प्रचार प्रमुख सागर चौकसे ने अन्य स्वयंसेवकों के साथ हीरा नगर थाने (इंदौर) में पहुंच कर शिकायत दर्ज कराई है। इसके साथ ही इंदौर संभाग के पुलिस महानिरीक्षक और इंदौर के पुलिस अधीक्षक को त्वरित कार्रवाई के लिए ज्ञापन दिया है। उल्लेखनीय है पुलिस में शिकायत के बाद कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू ने फर्जी फोटो और आपत्तिजनक संदेश अपने फेसबुक पेज से हटा दिया है।

पहले भी ऐसा कर चुके हैं कांग्रेस के नेता : संघ को बदनाम करने के लिए झूठे तथ्य और फोटो का सहारा कांग्रेस के नेताओं ने पहली बार नहीं लिया है, बल्कि वह ऐसा पहले भी कई बार कर चुके हैं। हालाँकि प्रत्येक मौके पर उनका झूठ उजागर हुआ है। उज्जैन के महीदपुर से कांग्रेस की पूर्व विधायक कल्पना परुलेकर को तो फर्जी फोटो के मामले में पिछले दिनों ही न्यायालय ने दो साल की कैद और 12 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। नवंबर-2011 में फर्जी तस्वीर का उपयोग कर कल्पना परूलेकर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और तत्कालीन लोकायुक्त (संवैधानिक पद) पीपी नावलेकर को बदनाम करने के लिए किया था। उन्होंने विधानसभा सत्र के दौरान आरोप लगाया था कि लोकायुक्त पीपी नावलेकर का आरएसएस के साथ संबंध है। प्रमाण के तौर पर उन्होंने पत्रकार वार्ता में एक तस्वीर लहराई थी। उन्होंने जो तस्वीर दिखाई थी, वह संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की थी, जिसमें छेड़छाड़ कर डॉ. भागवत के चेहरे की जगह नावलेकर का चेहरा लगा दिया गया था।

इसी तरह कांग्रेस ने सितंबर-2015 में हुए पेटलावद हादसे के समय आरएसएस को जबरन बदनाम करने का प्रयास किया था। कांग्रेस के पेटलावद हादसे के मुख्य आरोपी राजेंद्र कांसवा को संघ का स्वयंसेवक बताने के लिए पथसंचलन का फोटो जारी किया था, जिसमें एक स्वयंसेवक पर गोल घेरा लगाकर उसे कांसवा बताया गया था। जबकि वह फोटो मध्यप्रदेश का ही नहीं था। फोटो था पंजाब के फरीदकोट के पथ संचलन का और फोटो में कांग्रेस ने जिसे कांसवा बताया था, वह फरीदकोट का स्वयंसेवक श्यामलाल था। इस मामले में भी पेटलावद पुलिस ने धारा 469, 500 (34) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव, रतलाम-झाबुआ सांसद कांतिलाल भूरिया, प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा एवं प्रेस विज्ञप्ति जारी करने वाले संजीव श्रीवास्तव को नोटिस जारी किया था। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी संघ पर झूठा आरोप लगाने के मामले में न्यायालय में कार्यवाही का सामना कर रहे हैं।

फर्जी छायाचित्र

असली छायाचित्र

ABP न्यूज़ के वायरल सच में बताया गया था की कैसे गलत तरीके से दो अलग-अलग छायाचित्रों को मर्ज कर फर्जी छायाचित्र (फोटो) बनाया गया था