समानता का आधार है वेद – डॉ. मोहनराव भागवत

दिंनाक: 06 Oct 2017 15:36:31

नई दिल्ली , 5 अक्टूबर।  भारत एक है और अब वो जाग रहा है। भारत उठेगा और अपना स्थान हासिल करेगा ऐसी आशाएं पल्लवित हो रही है। ज्ञान निधि प्रकट करने का समय आ गया है। हमें अपने आप को पहचानना होगा। वेद हमारी पहचान तो है लेकिन उसे एक बार फिर लोगों के लिए आधुनिक युग के हिसाब से समझाना होगा। परमाणु क्षेत्र में हुए खोज का श्रेय भी वैज्ञानिक वेदों को ही देते रहे है। वेदों में भौतिक ज्ञान भी है। इसलिए समय के साथ इसे समझा जा सकता है सिर्फ जरूरत है हमें हाथ आगे बढ़ाने की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉ। मोहनराव भागवत ने यह बात प्रथम भारतात्मा अशोक सिंघल वैदिक पुरस्कार-2017 के दौरान कही। कार्यक्रम श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर में विश्वत हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल के स्मृति में अयोजित किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. भागवत ने कहा विज्ञान और अध्यात्म एक साथ हो सकते हैं और ये बात बहुत से मानते भी हैं। हमें पूर्व संचित वेदों के ज्ञान को एक फिर से प्राप्त करने की आवश्यकता है और समय की जरूरत भी। वेदों के तथ्य वर्तमान युगानुसार रखें समाज के सामने। वेद सनातन है और ऋषियों का मंथन हैं। समझाने में हो सकता है समय लगे लेकिन हमें प्रयास आज से शुरू करना होगा। जनमानस में वेदों की एक बार फिर स्थापना हो और जनमानस वेदानुसार हो ऐसा प्रयास निरंतर करना होगा।

सिंघल फाउंडेशन के ट्रस्टी सलिल सिंघल ने इस दौरान संबोधित करते हुए बताया वैदिक शिक्षा देने वाले सर्वश्रेष्ठ स्कूल , वेदज्ञान में सर्वश्रेष्ठ छात्र और वेद पढ़ाने वाले सर्वश्रेष्ठ शिक्षक को भारतात्मा अशोक जी सिंघल वैदिक एजुकेशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया इसके लिए सभी वैदिक स्कूलों से प्रविष्टि मंगाई गई। 14 अगस्त तक आने वाली प्रविष्टियों पर विचार करने के लिए तीन कमेटियों का गठन किया गया। इन कमेटियों में प्रविष्टि भेजने वाले सभी स्कूलों का दौरा किया गया । वैदिक पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिये गये। पहली श्रेणी वैदिक शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र , दूसरी उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षक और तीसरी श्रेणी वैदिक स्कूल की बनाई गई। छात्रों और शिक्षकों का साक्षात्कार भी इस दौरान लिया गया। फिर अपनी ओर से तीनों श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ तीन-तीन विजेताओं के नाम की सिफारिश की गई। इन सिफारिशों पर विचार करने का काम पांच वैदिक विशेषज्ञों की जूरी ने किया और अंतत एक-एक विजेताओं का चयन किया गया।

पहले भारतात्मा अशोक जी सिंघल वैदिक पुरस्कार वितरण समारोह के प्रथम पुरस्कार पाने वाले छात्र को तीन लाख रुपये , शिक्षक को पांच लाख रुपये और स्कूल को सात लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। सभी विजेताओं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सम्मानित किया।

पुरस्कार विजेताओं के नाम श्रेणी अनुसार

उत्कृष्ट वैदिक छात्र पुरस्कार- श्री सागर शर्मा , शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिन शाखा विद्यालय , बीड , नागपुर

आदर्श वेदाध्यापक  पुरस्कार- श्री वी। राजगोपाल घनपाठी , चेन्नई

सर्वश्रेष्ठ वेद्विद्यालय- श्री समर्थ वेद्विद्यालय , ढालेगांव