भारत में विद्यार्थी केन्द्रित शिक्षा होनी चाहिए- श्री मुकुल कानिटकर

दिंनाक: 03 Nov 2017 18:39:16

नई दिल्ली, 3 नवम्बर। हमारे यहां पढ़ाने की पद्धति और प्रक्रिया उच्चतर शिक्षा में भी वैसे ही है जैसे उसके नीचे की कक्षाओं में है l सवाल यही है फिर उसे उच्चतर शिक्षा क्यों कहा जा रहा है? भारतीय शिक्षण मंडल मानता है शिक्षा का विभाजन नहीं होना चाहिए l देश में शिक्षा को लेकर एक साफ- साफ लक्ष्य होना चाहिए l हमें अपनी शिक्षा को गुरुकुल की तरह विद्यार्थी केन्द्रित करनी होगी तभी विश्व में हमारी पहचान बरकरार रहेगी l उक्त कथन भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने कही l वह भारतीय जन संचार संस्थान में आयोजित युवा विमर्श के तीन दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन लोगों को संबोधित कर रहे थे l वह रिफार्म ऑफ़ हायर एजुकेशन विषय पर बोल रहे थे l  

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा इसरो की पूरी व्यवस्था वैज्ञानिकों के हाथों में है l जिसका परिणाम उनके कार्य में भी दिखता है और सभी कार्य अच्छे से संचालित होते है मंगलयान की सफलता उसका परिणाम है l उन्होंने कहा शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह सरकार तंत्र से मुक्त होनी चाहिए l अध्यापकों द्वारा ही शिक्षण संस्थानों का संचालन होना चाहिए l तभी सुखद परिणाम आएंगे l दो देशों का उदाहरण देते हुए श्री कानिटकर ने कहा साउथ कोरिया और फ़िनलैंड में विद्यार्थी केन्द्रित शिक्षा होती है, शिक्षक नहीं तय करता विद्याथी को क्या पढ़ाना है क्या नहीं l विद्यार्थी खुद तय करते है उन्हें क्या पढ़ना है क्या नहीं l साउथ कोरिया में शिक्षक होना बड़ी बात मानी जाती है, वहां के लोग विदेशों में नौकरी करने की बजाय शिक्षक बनना अपनी प्राथमिकता में रखते है l वहां के शिक्षकों का वेतनमान देश में अन्य कर्मचारियों की तुलना में सर्वाधिक है जो उसके महत्ता को दर्शाता है l यही कारण है की छोटा देश होने के बावजूद उसकी शिक्षा का स्तर बेहद ही अच्छा है l

श्री कानिटकर ने कहा हमें विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए नहीं भविष्य के लिए तैयार करना होगा l सिर्फ नौकरियों के लिए तैयार करना हमारा उद्देश्य नहीं होना चाहिए l हम विश्वगुरु है अपनी शिक्षा के बल पर उसे आगे तक बरकरार रखना होगा l हमारे ज्ञान का नतीजा है 21 जून को विश्व के 192 देश एक साथ योग करते है l सम्पूर्ण विश्व हमारी ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है l हमारे पास देने के लिए विश्व को बहुत कुछ है l  उसके लिए जरूरी है अपनी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और विद्यार्थी केन्द्रित बनाने की ।