स्वर गोविन्दम् 2017 – ऐतिहासिक लोक वाद्य यन्त्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन

दिंनाक: 04 Nov 2017 20:14:08

जयपुर : 3 नवम्बर 2017 l राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के घोष शिविर में ऐतिहासिक और परम्परागत लोक वाद्य-यन्त्रों की प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर आपने उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह शारीरिक प्रमुख जगदीश प्रसाद जी ने कहा कि संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में हुई थी। इसके एक साल बाद ही संघ में घोष को शामिल कर लिया गया था। समाज के मन में अपने देश के प्रति समर्पण का भाव जगना चाहिए, ऐसे उद्देश्यों को लेकर संघ ने एक घंटे की शाखा का तंत्र चुना।


शाखा में रोज स्वयंसेवक आते हैं, भिन्न भिन्न प्रकार के शारीरिक और बौद्धिक कार्यक्रमों से शाखा में आने वाले स्वयंसेवकों को संस्कारित किया जाता है। उन्हीं संस्कारों से स्वयंसेवकों के मन में देशभक्ति का भाव जन्म लेता है। स्वयंसेवकों को एक दिशा में चलने की आदत आती है और स्वयंसेवकों का एक स्वर से कदम से कदम मिलाकर चलने का भाव आता है। उन्होंने कहा कि घोष शिविर संघ की विशेष विधा का एक शिविर है। संघ की शाखा में अनुशासन निर्माण करने के लिए सबका मन मिले, इसके लिए कदम से कदम मिलाकर चलने का और स्वर से स्वर मिलाकर गाने और बजाने का अभ्यास प्रतिदिन कराया जाता है। हमारा मानना है कि अगर कदम से कदम मिला और स्वर से स्वर मिला तो निश्चित रुप से मन मिलेगा, और मन मिलेगा तो संगठन का भाव मन में जरूर आएगा। इसलिए दैनिक शाखा में प्रतिदिन करने वाले कार्यक्रमों में घोष (बैण्ड) का उपयोग करते हैं। इससे शाखा में आने वाले स्वयंसेवकों के मन में वीरता भाव का निर्माण और विजय की भावना पैदा होती है।

सेना में भी बजती संघ की धुनें

उन्होंने कहा कि हम उस चरण पर पहुंचे गए हैं कि अब संघ द्वारा बनाई गई धुनों को भारतीय सेना बजाती है। दिल्ली में 1982 में हुए एशियाड खेल के उद्घाटन समारोह में संघ के स्वयंसेवक द्वारा बनाई गई धुन जो शिवराजे नाम से प्रसिद्ध हुई, वह छत्रपति शिवाजी महाराज का स्तुति गान था। भारत के नौसेना दल ने वो धुन बजाई और उसके बाद संघ की ऐसी 40 से ज्यादा धुनों को को भारतीय नौसेना दल में शामिल किया गया। राजस्थान के संघ कार्य के विकास में यह शिविर मील का पत्थर साबित होगा। दो साल बाद जोधपुर में भी ऐसा एक बड़ा कार्यक्रम होगा।

इससे पूर्व केशव विद्या पीठ जामडोली में राजस्थानी रंग में रंगे घोष गांव के ठिकाणा गोविन्द देव में सजी 108 प्रकार के लोक वाद्यों की प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य आतिथि राजस्थान विश्वविद्यालय ललित कला संकाय की अधिष्ठाता प्रोफेसर मधु भट्ट तैलंग जी, विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध लोक कला विद्वान विनोद जोशी जी, विरासत फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य एवं संघ के अखिल भारतीय सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख जगदीश प्रसाद जी ने किया।


आकर्षक वाद्यों का प्रदर्शन

‘‘घोष गांव’’ में लोक वाद्यों की प्रदर्शनी में कामायचा, सिंधी-सारंगी, रण-सिंगा, नर-सिंगा, सुरिंदा, डेरू, रबाब, चिकारा, सांरगी, खरताल, मंजीरे, ढोलक, चंग, मोरपंख, शहनाई, इकतारा, नंगाडा, खंजरी शंख, आदि अनेक प्रकार के वाद्यों को जनता के अवलोकन के लिए रखा गया है। इनमें लुप्त हो चुके राजस्थानी रबाब का भी प्रदर्शन किया गया है।प्रदर्शनी 4 नवम्बर तक रहेगी।