सेवा में आनंद प्राप्त करने का भाव जागृत करें तो होंगी समस्याएँ दूर – उमा भारती

दिंनाक: 07 Nov 2017 20:13:52

नई दिल्ली , 5 नवम्बर। राष्ट्रीय सेवा भारती के सहयोग से संत ईश्वर फाउंडेशन द्वारा भारत के विभिन्न क्षेत्रों में सेवारत संस्थाओं व महानुभावों को नई दिल्ली में सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री सुश्री उमा भारती, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री अश्वनी चौबे ने विभिन्न श्रेणियों में संत, महानुभावों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया।

इस अवसर पर सुश्री उमा भारती ने कहा कि संसार से कम से कम लेना और ज्यादा से ज्यादा देना चाहिए। अपनी जिम्मेदारी से पलायन कर जाने वाला मनुष्य मिथ्याचारी होता है। निरंतर दूसरे के उपयोग में आना यही सेवा का मूल मन्त्र है। जो ऐसा नहीं करते हैं या अपनी जिम्मेदारी से पलायन करते हैं वह मिथ्याचारी होते हैं। आज के समय में हमारी जो जिम्मेवारियां हैं सेवाभाव से उनको पूर्ण करना ही सबसे बड़ी तपस्या और साधना है। उन्होंने बताया कि सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग में भगवान भक्तों की बहुत परीक्षाएं लेते थे, ईश्वर की प्राप्ति के लिए अनेक वर्षों तक कड़ी तपस्या करनी पड़ती थी, तब भी भगवान् के दर्शन दुर्लभ होते थे। लेकिन कलियुग में बहुत आसान है, किसी गरीब आदमी के आपने आंसू पोंछ दिए तो समझ लो भगवान आपके पास चल कर आ गए। सेवा में आनंद प्राप्त करने का जो भाव इस संत ईश्वर सम्मान समिति ने स्थापित किया है, आप भी यह तय कर लें तो आप देखना कि इस देश में बहुत सारी समस्याएँ अपने आप ठीक हो जाएँगी। उन्होंने सेवानिर्वित अध्यापकों, डॉक्टरों, वकीलों को लोगों को निशुल्क सेवाएँ प्रदान करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय सेवा भारती के अध्यक्ष श्री सिद्धि नाथ सिंह ने बताया कि सेवाधर्मी सारे देश में जहाँ कहीं भी संलग्न हैं ऐसे लोगों को ढूढ़ करके, एक मंच पर उनको सही दिशा-दशा देना इसके लिए राष्ट्रीय सेवा भारती कार्यरत है। सेवा के सही स्वरुप को समाज के सामने लाने के उद्देश्य से इस सम्मान को आरम्भ किया गया है। आज कई सेवाधर्मी संस्थाएं सेवा के क्षेत्र में आ गयीं हैं लेकिन वास्तव में वह सेवा है या नहीं, यह हमारे विचार करने का विषय है। सेवा के उपक्रम में कहीं न कहीं से कुछ लेना पड़ता है, किन्तु जो हम ले रहे हैं उससे अधिक अगर दे रहे हैं तो वह सेवा है, यदि नहीं दे रहे तो वह शोषण है। इस सेवा और शोषण के अंतर को सामने लाने के लिए संत ईश्वर पुरस्कार की स्थापना की गयी।

इस अवसर पर दिए गए सम्मान निम्नानुसार हैं।

संत ईश्वर विशेष सेवा सम्मान

1 . परमहंस श्री दाती महराज जी- हजारों बच्चों को शिक्षा , कन्या भ्रूण हत्या रोकने , बालिका शिक्षा समेत स्त्री सशक्तिकरण के क्षेत्र में क्रांति।

विशिष्ट सेवा सम्मान (सम्मान राशि 5 लाख)

1 . श्री शयामानंद ब्रम्हचारी महाराज- दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स , मेघालय में कोच और हाजोंग जनजातीय क्षेत्र में परांपरिक- सांस्कृतिक चेतना की पुनः स्थापना में योगदान दिया। 2 . थियागम वुमन ट्रस्ट- मधुरई तमिलनाडू , महिला एवं बाल विकास क्षेत्र , दिव्यांग ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से समर्थ बनाने के विभिन्न कार्यक्रम का संचालन। 3 . श्री विजय कुमार जडधारी- जडधार गावं , उत्तराखण्ड , ग्रामीण क्षेत्र , बीजों की विलुप्त हो चुकी कई किस्मों को खोज निकाला। 4 . डॉ. अशोक कुकडे जी- महाराष्ट्र ,  विशेष योगदान , सूखाग्रस्त लातूर का जल संकट खत्म किया। गरीबों , वंचितों को भी दे रहें हैं उच्चस्तरीय इलाज।

सेवा सम्मान (सम्मान राशि 1 लाख)

श्री रामेशवर  नाईक- जलगांव , महाराष्ट्र , जनजातीय क्षेत्र , अब तक 12 लाख से अधिक निर्धन - साधनविहीन लोगों तक चिकित्सीय सुविधा पहुचाई।

श्री चाउबा कमसोन- इम्फाल , मणिुपर , जनजातीय क्षेत्र , स्थानीय परपरा , मान्यता और संस्कार संबंधी जागरूकता अभियान , धार्मिक- सांस्कृतिक आचार- विचार में एकरूपता लाने के साथ इन्हें लिखित स्वरूप प्रदान किया।   श्री रामचंद्र खरादी- डूंगरपुर , राजस्थान , जनजातीय क्षेत्र , वनवासी समाज में शिक्षा ,  नशामुक्ति  जैसे सामाजिक सुधार कियाकलापों में योगदान। श्री नृसिंह गौसेवा समिति- कठुआ , जम्मू कश्मीर , ग्रामीण क्षेत्र , तेजी से लुप्त हो रही देसी गायों का संरक्षण , बंजर भूमि पर वृक्षारोण , , समाज में शाराब का चलन कम किया। सेवा फाउंडेशन- धंकिकोते , ओडिसा , ग्रामीण क्षेत्र , वनवासी और वंचित सुमुदायों के 5 लाख से भी अधिक लोगों की सेवा का श्रेय। श्री तोडुपरम्पिल वर्गीस-  थिस्सुर , केरल , ग्रामीण क्षेत्र , कई अवसरों पर सरकार को नीति बदलकर किसान हित की मांगे मानने को विवस किया। समाज सेवा समिति- बंगलोर , कर्णाटक , महिला एवं बाल विकास , हजारों जरूरतमंद ग्रामीण महिलाओं को अर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया। साधन विहीन बच्चों को शिक्षण , प्रशिक्षण सुनिशिचत कर समर्थ बनाने का अभियान , बुजुर्गो और दिव्यांग लोगों के कल्याण से जुडी गतिविधियां। समतोल फाउंडेशन- दादर , मुम्बई , महिला एवं बाल विकास , घर छोडकर भागे आठ हजार से अधिक बच्चों को परिवार से मिलाया। श्री जगत कल्याण शिक्षण संस्थान- जोधपुर , राजस्थान , महिला एवं बाल विकास , बेसहारा और साधन विहीन महिलाओं और बच्चों का पुनर्वास। ‘ स्व ’- रूपवर्धिने- पुणे , महाराष्ट्र ,  विशेष योगदान , झुगगी - झोपडियों के हजारों बच्चों को शिक्षा दी। हजारों छात्रों को प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कराई। सुश्री तसिले एन। जेलियांग-पेरेन , नागालैंड , विशेष योगदान , महिला सशक्तिकरण का पर्याय , समाज के विभिनन क्षेत्रों में सकारात्मक योगदान। रामभाउ म्हालगी प्रोबोधिनी- भायंदर , महाराष्ट्र , विशेष योगदान , घूले के पिछडे क्षेत्रों के 1103 विद्यालयों में डिजिटल पाठशाला लगाई।

गौरतलब है कि विगत अनेक वर्षों से भारत वर्ष के व्यापक क्षेत्रों में सेवारत संत ईश्वर फाउण्डेशन एवं अखिल भारतीय स्तर पर अपने सेवा संकल्पों से यशस्वी राष्ट्रीय सेवा भारती ने अपने संयुक्त प्रयासों से सुदूर क्षेत्रों तक अपने सेवा अभियानों को पहुंचाने का प्रयास किया है। इसी विचार से प्रेरित होकर संत ईश्वर फाउण्डेशन की स्थापना सन् 2013 में की गयी।