ढाका विजय दिवस पर विद्यापीठ के छात्रों ने सीखीं सैन्य गतिविधियाँ

दिंनाक: 18 Dec 2017 17:16:25


भोपाल (विसंके). शिवपुरी- विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली द्वारा मार्गदर्शित एवं सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान मध्यप्रदेश भोपाल से सम्बद्ध सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय के भैयाओं ने सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स के प्रतिविद्रोहिता एवं आतंकवाद विरोधी स्कूल शिवपुरी में जाकर सैन्य गतिविधियों एवं प्रशिक्षण को जाना ।

इस अवसर पर छात्रों ने सैन्य प्रशिक्षण की विभिन्न गतिविधियों में रस्सी पर चलना और चढ़ना आतंकवादी हमले में किस प्रकार से युद्ध कर अपने साथियों को बचाते हुए दुश्मनों को पराजित करना आदि सीखा ।

इस अवसर पर प्राचार्य श्री जितेंद्र जी परसाई द्वारा 16 दिसम्बर 1971 की घटना की विजय गाथा से अवगत कराते हुए कहा कि विजय दिवस 93,000 पाक सैनिकों को भारत ने घुटने टेकने पर किया था मजबूर ।

16 दिसम्बर 1971 यानि आज का दिन भारत के लिए विजय दिवस कहलाता है । वर्तमान समय में ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी नहीं होगी, लेकिन आज देश के लिए वो दिन है जिस पर हर भारतीय को गर्व महसूस होता रहेगा। आज के दिन ही वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान 16 दिसंबर को ही भारत ने पाकिस्तान पर विजय हासिल की थी और उसी जीत को पूरा हिन्दुस्तान श्विजय दिवसश् के रूप में मनाता है।

93000 पाकिस्तानियों ने किया था आत्मसमर्पण

वर्ष 1971 में हुए इस भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तानी सेना पराजित हुई थी और 16 दिसंबर 1971 को ढाका में 93000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया था । इस युद्ध के 12 दिनों में अनेक भारतीय जवान शहीद हुए और हजारों घायल हो गए । पाक सेना का नेतृत्व कर रहे लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. नियाजी ने अपने 93 हजार सैनिकों के साथ भारतीय सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण कर हार स्वीकार की थी ।

3,900 भारतीय जवान इस जंग में शहीद हुए थे .

भारत-पाक युद्ध के समय जनरल सैम मानेकशॉ भारतीय सेना के प्रमुख थे । इस जंग के बाद बांग्लादेश के रूप में विश्व मानचित्र पर नये देश का उदय हुआ । जिसमें लगभग 3,900 भारतीय जवान इस जंग में शहीद हुए और 9,851 जवान घायल हुए । एक समय था जब पाकिस्तान पर मिली इस जीत के दिन यानी 16 दिसंबर को देश भर में प्रभातफेरियां निकाली जाती थीं और जश्न का माहौल रहता था, जबकि वर्तमान समय में ऐसा नहीं देखने को नहीं मिलता है । आइए बताते है उनमें से कुछ भारतीय सैनिको के बारे में जिन्होंने इस महासंग्राम में अपूर्व शौर्य और साहस का परिचय दिया था। ।

प्रतिविद्रोहिता एवं आतंकवाद विद्रोही स्कूल के श्री आलेख शुक्ला एवं श्री प्रकाश बडालिया डिप्टी कमांडेंट सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स तथा तेवराज कुरैसी सब इंस्पेक्टर सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स ने पूरे प्रशिक्षण केन्द्र का भ्रमण कराकर सैनिकों को दिए जाने वाले प्रशिक्षण की पद्धति से अवगत कराया । इस अवसर पर विद्याभारती मध्यभारत प्रान्त के शिवपुरी विभाग के विभाग प्रचार-प्रसार प्रमुख श्री दिलीप शर्मा जिला प्रचार-प्रसार प्रमुख श्री अरविंद सविता, खेल प्रमुख श्री अनूप शर्मा, श्री रोशन पाठक, श्री भानू यादव, कृषि विभागाध्यक्ष श्री रमेश रावत सहायक श्री महेंद्र नामदेव, जनसंपर्क अधिकारी श्री दीप सिंह भदौरिया उपस्थित रहे ।

कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ व्याख्याता श्री गोपाल सिंह जी राठौड़ के द्वारा आभार प्रकट किया गया ।