आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष में कविता का महत्वपूर्ण योगदान

दिंनाक: 25 Dec 2017 15:25:00


भोपाल(विसंके). कविता संकट के दौर से गुजर रही है, क्योंकि आज कविता बाजार को ध्यान में रखकर लिखी जा रही है। आज कवि अपने विचारों को बेचना चाहता है या फिर बेचने पर मजबूर है। जबकि कविता समाज को जागृत करने का माध्यम है। स्वतंत्रता संग्राम एवं आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष में कविता का उल्लेखनीय योगदान रहा है। यह विचार लखनऊ विश्वविद्यालय के मीडिया विभाग के संस्थापक प्रो. रमेशचंद्र त्रिपाठी ने व्यक्त किए। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित वरिष्ठ साहित्यकार नवल जायसवाल के काव्य संग्रह 'दूसरी आजादी' के विमोचन समारोह में वह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.

  प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि नवल जायसवाल ने कविताओं में प्रतीकों के माध्यम से अपनी बात कही गई है। समीक्षक निश्चित ही उनकी कविताओं की सराहना करेंगे। इस अवसर पर रांची केंद्रीय विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त प्रो. संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि १९७५ में आपातकाल ने प्रेस की आजादी पर बड़ा हमला किया था। भले ही आपातकाल हट गया है, किंतु अब भी हमें प्रेस की आजादी के लिए लड़ाई जारी रखनी है। यह निरंतर चलने वाली लड़ाई है। 'दूसरी आजादी' में इसी ओर संकेत किया गया है।

कविताओं से समझा जा सकता है आपातकाल का दर्द : कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि आपातकाल की पीड़ा को पूरा तो नहीं समझा जा सकता, किंतु नवल जायसवाल की कविताओं के माध्यम से उसको कुछ हद तक अनुभूत किया जा सकता है। आपातकाल के दौर में तत्कालीन सरकार ने राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं पत्रकारों को रातों-रात जेल में डाल दिया था। ऐसे अनेक लोग हैंं, जो आपातकाल की रात जेल भेजे गए और आपातकाल हटने के बाद सुबह जेल से बाहर आ सके। उन्होंने बताया कि आपातकाल में बड़े से बड़े मीडिया संस्थान भी झुक गए थे। यहाँ तक कि कई समाचार पत्र आपातकाल के समर्थन में लिख रहे थे। वहीं, छोटे और मझले समाचार पत्र आपातकाल के विरुद्ध लिखने का साहस दिखा रहे थे। प्रो. कुठियाला ने बताया कि ९० के दशक में व्यापार में लाभ की जगह लोभ ने ले ली। यह पत्रकारिता के व्यवसाय में भी दिखाई दिया। जबकि पत्रकारिता समाज जागरण का माध्यम है। इस अवसर पर कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा ने भी नवल जायसवाल के काव्य संग्रह पर अपने विचार प्रस्तुत किए और आपातकाल की स्थितियों का वर्णन किया।

जो देखा-सुना, उसे लिखा : काव्य संग्रह 'दूसरी आजादी' के रचनाकार नवल जायसवाल ने कहा कि उन्होंने आपातकाल में जो देखा-अनुभव किया, उसे उन्होंने कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि 42 साल में आज वह अवसर आया है जब हम आपातकाल पर बात कर सकते हैं।