कैमरे से कलम का काम लेना ही है फोटो पत्रकारिता: 6 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का तृतीय दिवस

दिंनाक: 28 Dec 2017 18:53:47


जबलपुर(विसंके). कैमरे से कलम का काम लेना ही फोटो पत्रकारिता है. किसी भी समाचार पत्र अथवा पत्रिका के लिए फोटो सबसे आवष्यक तत्व है. एक कहावत भी है कि एक फोटो हजार शब्दों के बराबर होती है. इसकी रोजाना झलक हमारे समाचार पत्रों में देखने मिलती है. फोटो किसी भी समाचार को प्रमाणिकता देती है. ये जानकारी विषय विषेषज्ञों ने ‘मीडिया तकनीक एवं कौशल विकास’ विषय पर आयोजित 6 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के तृतीय दिवस के तकनीकी सत्र में दी.

तकनीकी सत्रों का शुभारंभ माननीय कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्र ने किया. इस मौके पर उन्होंने कार्यशाला के सभी प्रतियोगियों के लिए एक फोटोग्राफी प्रतियोगिता की भी घोषणा की, इसमें विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा.

फोटोग्राफी के तकनीकी पहलुओं की मिली जानकारी-

तकनीकी सत्र के प्रथम मुख्य वक्ता एनडीटीवी के वरिष्ठ संवाददाता श्री संजीव चैधरी ने फोटोग्राफी कला का विस्तृत वर्णन करते हुए गुजरे जमाने की फोटो पत्रकारिता और आज की फोटो पत्रकारिता की तकनीक की जानकारी प्रदान की. सागर से आए विषय विशेषज्ञ डॉ. आशीष द्विवेदी ने फोटो पत्रकारिता की बारीकियों व कैमरे के इस्तेमाल की तकनीक की जानकारी प्रदान की. श्री रजनीश सिंह ने फोटाग्राफी में टाईमिंग के महत्व की जानकारी प्रदान की.

मीडिया के विद्यार्थियों के लिए कौशल विकास महत्वपूर्ण-

तकनीकी सत्र के दूसरे चरण में वरिष्ठ पत्रकार एवं दैनिक नवभारत के संपादक श्री दिलीप झा ने बताया कि मीडिया का क्षेत्र चुनौतियों भरा है,  इसमें रोज नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इन चुनौतियों से निपटने का माध्यम कौशल विकास ही है. मीडिया के विद्यार्थियों के लिए कौशल विकास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी के माध्यम से वे इन चुनौतियों को पार पाकर पत्रकारिता के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं.