‘‘गुरूकुल में राम‘‘- श्री राजेश्वरानन्द सरस्वती जी

दिंनाक: 29 Dec 2017 16:55:46


शिवपुरी - सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय में गुरुकुल में श्री राम प्रसंग पर आधारित श्री राम कथा पर व्याख्यान राष्ट्रीय संत परम पूज्य श्री राजेश्वरानन्द सरस्वती जी द्वारा दिया गया.

श्री राजेश्वरानन्द जी ने अपने व्याख्यान माला में श्री राम के चरित्र के विभिन्न पुष्पों को पिरोते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति संस्कारों की संस्कृति है हमारे भारत के आदर्श पुरूष ही आज के आचरण स्त्रोत हैं,  समय की महिमा केवल भारत में ही है भारत भूमि पवित्र और महान है. गुरू के पास जाकर विद्या प्राप्त करने का उदारहण प्रस्तुत करते हुए श्री राजेश्वरानन्द जी ने कहा कि प्रभू श्री राम जी अपने गुरुजी के आश्रम में विद्या प्राप्त करने के लिए गए और अल्प समय में ही सभी विद्याएँ सीख ली क्योंकि भागवान राम को अपने गुरू के प्रति श्रृद्धा थी और जिसको अपने गुरू के प्रति श्रृद्धा होती है. वह अल्प समय में सभी विद्याओ प्राप्त कर सकता है.
छात्रों को अपने गुरू के प्रति श्रद्धा होना अतिआवश्यक है. विनोदात्मक शैली का प्रयोग करते हुए गुरू के प्रति श्रद्धा के अनेक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि जब हम गुरुजी के पास जाकर विद्या प्राप्त करते है तो शिक्षा के साथ स्वतः ही संस्कार और सदगुण आ जाते है तथा यदि गुरु व्यक्ति के पास पहुंचे तो उन संस्कार और सदगुण का उनमें ह्रास होता है इसलिए श्रद्धावान व्यक्ति ही ज्ञान प्राप्त करता है तदोपरांत वह उनका प्रसार  करता है. हम जो समझे वही कहे और वही करें जो हम करें.