दो घंटे की फिल्म द्वारा भारतीय सस्कृति को विकृत रूप से दर्शाया जा रहा है : डॉ. बाल मुकुंद

दिंनाक: 03 Dec 2017 13:24:16

नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्याल के दौलत राम कॉलेज में ' संस्कृति ' के तत्वावधान में रानी पद्मावती पर 29 नवम्बर को व्याख्यान आयोजित किया गया। व्याख्यान में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के संगठन सचिव डॉ बाल मुकुंद ने कहा कि आजादी के बाद से ही इतिहास कम्युनिस्टों के हवाले कर दिया गया। इतिहास लेखन तर्क और तथ्य से विहीन रहकर कम्युनिस्टों ने लिखा है। बालमुकुंद ने कहा कि दो घंटे की फ़िल्म से हमारी संस्कृति को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की जा रही है। कम्युनिस्ट इतिहासकारों का भारतीय संस्कृति और उसकी गौरव गाथाओं से उनका कोई सरोकार नहीं है। कम्युनिस्टों ने भारत के बजाए इंडिया बनाने की कल्पना की है।

वही सीएसेसडीएस इग्नू के निर्देशक प्रो कपिल कुमार ने कहा कि आजादी के बाद के इतिहासकारों ने देश का इतिहास लेखन अंग्रेजों को समर्पित कर दिया है। इन कम्युनिस्टों ने सिर्फ और सिर्फ इतिहास को  आधार बनाकर भारतीय संस्कृति का शोषण किया है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि आज भी महिलाएं जौहर कर रही हैं लेकिन स्त्री विमर्श के नाटककारों को इससे कोई सरोकार नहीं है। जब बगदादी महिलाओं को खुलेआम बेच रहा था और वो महिलाएं स्वंय आत्मदाह कह रही थी तब कोई निवेदिता मेमन स्त्री के अधिकार और स्वतंत्रा के लिए कुछ बोलती नहीं है। उन्होंने देश में पद्मावती फिल्म के विरोध का समर्थन किया।

कार्यक्रम में यूजीसी के सदस्य इंद्रमोहन कपाड़िया ने कहा कि फिल्म के सहारे हमारे इतिहास से खेला जाता है। ऐसी साजिशें आजादी के बाद से ही की जा रही है। इस अवसर पर में एडीटीएफ के महासचिव वीरेंद्र कुमार नेगी भी मौजूद थे।

कार्यक्रम के संयोजन सनी सिंह ने करते हुए कहा कि कहा कि ये रूटीन मामला है। हम सब इतिहास के छात्र हैं, इसलिए समय समय पर इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

इस अवसर पर श्री शब्दप्रकाश ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को इतिहास के मूल को समझाना है, इसलिये यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में 300 से अधिक विश्वविद्याल के छात्रों ने भाग लिया।