"हज़ारों विद्यार्थियों ने किया आचार्य वंदन और मातृ-पितृ वंदन "

दिंनाक: 05 Feb 2017 18:04:37


गुरुग्राम l हिंदू अध्यात्मिक एवं सेवा मेले के तीसरे दिन लेजरवैली के मैदान में दो बार ऐसे क्षण आए, जब मेले में उपस्थित हजारों लोग श्रद्धा से झुक गए। सुबह दस बजे हुए आचार्य वंदन में 3000 विद्यार्थियों ने उपस्थित अपने 551 गुरुओं को पूजा के चरण पूजे, जबकि दोपहर बाद आयोजित मातृ पितृ वंदन में एक हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। जिसमें पुत्र-पुत्रियों ने अपने माता-पिता के पैरों को पानी से धोने के बाद उन्हें श्रद्धा स्वरूप नारियल भेंट किया। इन दोनों ही कार्यक्रमों के दौरान उपस्थित हजारों लोगों के सिर भी श्रद्धा से झुक गए। आचार्य वंदन में आर्यसमाज प्रतिनिधि सभा दिल्ली के अध्यक्ष स्वामी राघवानंद जी एवं अन्य ने माता सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

स्वामी राघवानंद ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अध्यात्म पर ही समाज की नींव टिकी है। अध्यात्म से ही प्रेरणा लेकर हमारे पूर्वजों ने समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि संसार का ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जो सुख व शांति नहीं चाहता हो लेकिन सुख व शांति दोनों को प्राप्त करने के साधन अलग-अलग हैं। सुख का साधन श्रम है। श्रम से ही धन की प्राप्ति होती है और धन से ही सुख के साधन प्राप्त किए जाते हैं लेकिन शांति का साधन आध्यात्मिकता है। इसके बिना जीवन में शांति संभव नहीं है। शांति की अनुभूति आत्मा से  होती है और आत्मा से ही सृष्टि का संचालन होता है यानी इस सृश्टि क संचालन अध्यात्म से ही है। 

स्वामी जी ने कहा कि शब्द तो बदलते रहते हैं लेकिन ‘मैं’ कभी नहीं बदलता। इस ‘मैं’ के साथ आत्मा का मिलन करवाना ही अध्यात्म है। आचार्य वंदन जैसे कार्यक्रमों से ही बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण होता है। मनोज जी ने कहा कि समूचा विज्ञान जो अभी तक देश के लिए अज्ञान है, वह समूचा ज्ञान हिंदू धर्म है। क्योंकि हिंदू धर्म सदियों पूराना है और सभी धर्मों का मूल भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारण का मंत्र देते हुए कहा कि जब तक लक्ष्य निर्धारित नहीं होता तब तक जीवन में उत्साह व उमंग नहीं होती। इसके बिना जीवन में शांति नहीं। इसलिए विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारण करना चाहिए। शिक्षा व विद्या के भेद को भेदना ही एक शिक्षक का कर्तव्य  है। 

शिक्षक होता है समाज का निर्माता-बनवीर जी

इस अवसर पर संघ के सहक्षेत्र प्रचारक बनवीर जी ने कहा कि समाज में शिक्षक की अहम भूमिका होती है। अच्छे विद्यार्थियों के निर्माण के बिना अच्छे समाज का निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि हम तो उस संस्कृति से संबंध रखते हैं जहां गुरु को भगवान से भी ऊपर दर्जा दिया गया है। हमारे शास्त्रों में भी लिखा है- गुरु गोविंद दोऊं खड़े काके लागूं पांव, बलिहारी गुरु आपने जिन गोविंद दियो मिलाय। उन्होंने कहा कि बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं और शिक्षक इस कच्ची मिट्टी को आकार देने का काम करता है। यदि शिक्षक चाहे तो इस कच्ची मिट्टी से ही भगवान बना सकता है। 

भारतीय संस्कारों का प्रकटीकरण है मातृ-पितृ वंदन : विश्वेश्वरानंद 

पंचायती निर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर एवं ब्रह्मवेदामृत कुटिया रोहतक के महंत स्वामी विश्वेश्वरानंद जी मातृ-पितृ वंदन कार्यक्रम के मुख्यवक्ता रहे। उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों ने बच्चों को संस्कार नहीं दिए वे बालक के शत्रु तुल्य हैं। उन्होंने बताया कि माता-पिता-पुत्र का संबंध एक जन्म का नहीं, बल्कि जन्म-जनमांतर का है। मातृ-पितृ वंदन का कार्यक्रम ऐतिहासिक है। क्योंकि भारत की भूमि ने संसार को अध्यात्म का जो मार्ग दिया है, उसका प्रत्यक्षीकरण यहां हो रहा है। कार्यक्रम में एक हजार के करीब अभिभावक कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में स्कॉलर्स कत्थक नृत्यशाला की विद्यार्थियों ने कत्थक नृत्य के माध्यम से मातृ-पितृ वंदन की प्रस्तुति दी।  

-एक हजार बच्चों को बांटी गई बाल गीता

आचार्य वंदन के दौरान स्वामी अडगडनंद की ओर से यथार्थ गीता वालों ने वंदन में भागीदार बच्चों को बाल गीता भेंट की गई व सभी आचार्यों को यर्थाथगीता भेंट की गई। उन्होंने कहा कि बच्चों को गीता का ज्ञान व अपने सनात्तन संस्कार देने के लिए बाल गीता का वितरण बच्चों में किया गया है। देश का बच्चा यदि संस्कारित होगा तो हमारे देश का भविष्य भी निश्चततौर पर उज्जवल होगा। 

मेरा प्यारा हिंदुस्तान - सदा आबाद रहेगा......

कवि सम्मेलन में कवियों ने देशभक्ति कविताओं से श्रोताओं में भरा जोश

हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला शुक्रवार की शाम अपने पूरे यौवन पर था। पूरा दिनभर चले अध्यात्म और सेवा विचार के बाद सांझ को देशभक्ति की ऐसी बयार चली कि वहां मौजूद हर मन राष्ट्र आराधना के रंग से सराबोर था। मौका था राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का। हास्य, व्यंज्य, गीत, गजल और ओज की स्वर लहरियों से मंत्रमुज्ध सभागार में मौजूद हर श्रोता झूूम रहा था। झूमे भी क्यों ना जब देशभक्ति, सेवाभाव और पाकिस्तान को निपटाने की बात चले तो कोई कैसे अपने को रोक सकता है। हालात यह थे कि कवि जाने को तैयार थे, लेकिन श्रोता वंस मोर वंस मोर की पुकार कर रहे थे।

ओज के कवि विनीत चौहान ने जैसे ही काव्य पाठ में कहा कि ‘जिस दिन सेना ने ठान लिया उस दिन पाकिस्तान नहीं होगा’ तो पूरा सभागार करतल ध्वनि से गूंज उठा। राजस्थान से आए विनीत चौहान ने भंसाली प्रकरण पर बोलते हुए कहा -

‘इतिहास तोडक़र कह डाला संजय लीला भंसाली ने, 

ज्यों सारे फल मसल डाले खुद ही बगिया के माली ने।

जब भी गंदी नजरें डालीं खिलजी ने या अब्दाली ने,

उनका ही शीश काट डाला बनकर रणचंडी काली ने।।’

वहीं विनीत चौहान ने देशभक्ति से ओत-प्रोत अपनी ओजस्वी कविता के माध्यम से श्रोताओं के दिल में देशभक्ति के भाव पैदा कर दिए। विनित चौहान ने पाकिस्तान को घेरते हुए कहा कि ‘पूरी घाटी दहल चुकी थी आतंकी आंगारों से, काश्मीर में आग लगी थी पाकिस्तानी नारों से।’

फरीदाबाद से आए वीर रस के कवि दिनेश रघुवंशी ने सीमा पर तैनात सैनिकों के संकल्प के बारे में कहा-

‘मैं अपने हर तराने में हमेशा गाऊंगा तुझको

वहां सीमा पे अपने साथ लेकर जाऊंगा तुझको, 

है तन में सांस जब तक भी तिरंगे है कसम तेरी

लिपट कर आऊंगा तुझमे या फिर फहराऊंगा तुझको।’ 

शरफ बहराइची ने देशभक्ति गजल से श्रोताओं में जोश भरते हुए कहा कि 

‘ये मेरा दिल ये मेरी जान ये मेरा प्यारा हिंदुस्तान सदा आबाद रहेगा, ये जिंदाबाद रहेगा।’  

रेवाड़ी से आए कवि विपिन सुनेजा ने अपनी कविता से टूटते पारिवारिक रिश्तों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 

‘दिल धडक़ते हैं अभी पर भावनाएं मर गर्ईं

वेदनाएं बढ़ गई, संवेदनाएं मर गई।’

गजल सम्राट लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने प्राचीन परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 

‘सडक़ चलते मुसाफिर को भी, जब पानी पिलाते थे

हमारे गांव वाले साथ में, मीठा खिलाते थे।’

सोनीपत से आए कवि डॉ. अशोक बत्रा ने कहा कि ‘मैं नेता नहीं, जादूगर हूं

एक ही जादू जानता हूं आदमी को वोट नहीं इंसान मानता हूं,

गणतंत्र चलाने की नीयत को अड़ाने से ज्यादा महान मानता हूं।’  

व्यंग्य और हास्य के अंतर्राष्ट्रीय कवि सुदीप भोला ने उत्तरप्रदेश में कांग्रेस व सपा के गठबंधन पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि

‘अखिलेश कहे राहुल से मैं दूर हुआ बाबुल से, 

आजा कर ले ठगबंदी, जीतेंगे फूल कमल से

ये बंधन तो स्वार्थ का ठगबंधन है, मोदी जी का टेंशन है।’

मंच संचालन कर रही वीणा अग्रवाल ने माता-पिता की महता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘माता-पिता के जैसा निर्मल प्यार नहीं हमने देखा,

देखा है संसार बहुत वह प्रेम आपार नहीं देखा

जिनको अपने माता-पिता जीते जी स्वीकार नहीं हैं

मैं कहती हूं उनके बाद उन्हें रोने का अधिकार नहीं है।’