केरल में वामपंथियों द्वारा राष्ट्रभक्त कार्यकर्ताओं की हत्या व खूनी हिंसा के विरूद्ध देशभर में प्रचंड आक्रोश

दिंनाक: 01 Mar 2017 23:17:53


इन्दौर l विगत 50 वर्षों में केरल राज्य में संघ के स्वयंसेवकों पर हिंसा, आगजनी और हमलों का एक दौर चल रहा है । इन अमानवीय घटनाओं को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा अंजाम दिया जा रहा है । माकपा के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार द्वारा अपराधियों का संरक्षण किया जा रहा है । इन हत्याओं का दौर सन 1969 से प्रारंभ हुआ और 2016 तक सैकड़ों स्वयंसेवक एवं कार्यकर्ताओं की हत्याएँ की गईं । केरल में मई 2016 से नवनिर्वाचित सीपीएम नेतृत्व की राज्य सरकार आने के पश्चात् हत्या, हिंसा और आगजनी की घटनाओं में तेजी से बढ़ौतरी हुई है । मई 2016 से अब तक 20 से अधिक स्वयंसेवकों की हत्याएँ माकपा के गुण्डों द्वारा की गई हैं । केरल राज्य के कन्नूर जिले में तो स्थितियाँ और भी भयावह है । राज्य के मुख्यमंत्री पी. विजयन सहित माकपा पोलितब्युरो के अधिकतम सदस्य कन्नूर जिले से ही आते हैं ।

कन्नूर जिले में माकपा द्वारा ‘‘पार्टी ग्रामम’’ अर्थात् ‘‘गाँवों का एक भी व्यक्ति मार्क्सवादी विचारधारा का विरोधी नहीं हो सकता’’, और इन गाँवों में जब कोई नागरिक माकपा को छोड़कर अन्य किसी राजनीतिक दल या संगठनों से जुड़ने का प्रयत्न करता है, तो माकपा के गुण्डों द्वारा उसकी हत्या कर दी जाती है । ये हत्याएँ वास्तव में देश के लोकतंत्र की हत्या है ।

भारत का संविधान हमें अपनी रूचि के अनुसार विचारधारा का चयन करने एवं उसमें सक्रिय सहभाग करने का मूलभूत अधिकार प्रदान करता है । ऐसी परिस्थितियों में जब सरकार द्वारा संरक्षित माकपाई गुण्डे राष्ट्रभक्त नागरिकों की हत्याएँ कर रहे हैं, उनके मानवाधिकारों का हनन कर रहे हैं । सम्पूर्ण देश के देशभक्त नागरिक इन घटनाओं से न केवल आहत हैं, अपितु उनके मनों में एक प्रचण्ड आक्रोश जन्म ले रहा है ।  यह धरना उस आक्रोश की साकार अभिव्यक्ति है । हम देश के महामहिम राष्ट्रपति महोदय से निवेदन करते हैं कि वे संविधान प्रदत्त विशेषाधिकारों का प्रयोग कर केरल में कानून व्यवस्था लागू कर शांति और सद्भाव स्थापित करें । यह बात धरने को सम्बोधित करते हुए जनाधिकार समिति इन्दौर के संयोजक श्री मोहन गिरि ने कही ।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता श्री उमेश शर्मा ने कहा कि वामपंथियों का इतिहास ही रक्तरंजित रहा है । ये जहाँ-जहाँ शक्तिशाली हुए इन्होंने वर्ग-संघर्ष करवाकर खून-खराबे और आतंक की घटनाओं को अंजाम दिया है । वरिष्ठ अधिवक्ता श्री पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि ‘‘वामपंथी राष्ट्रद्रोहियों  का  विरोध  करना  यदि  अतिवाद है, तो हाँ हम अतिवादी हैं ।’’  वरिष्ठ अधिवक्ता श्री विनय श्राफ ने कहा कि आतंकियों के मानवाधिकार का ढोल पीटने वाले वामपंथियों ने स्वयं के शासनकाल में मानवाधिकार उल्लंघन की सारी सीमाएँ लाँध दी हैं ।  शिक्षाविद् श्री एस.एल.गर्ग ने कहा, वामपंथियों ने देशद्रौही नारे लगाकर महाविद्यालय व विश्वविद्यालय परिसरों का वातावरण विषैला कर दिया है ।

देशभर के जिला केन्द्रों की ही तरह इन्दौर में भी विशाल धरना आन्दोलन प्रातः 9 से 10ः30 बजे तक उच्च न्यायालय तिराहा, यशवंत निवास रोड से लेन्टर्न चौराहे के मध्य आयोजित किया गया । इसमें हजारों की संख्या में महिलाएँ, सामाजिक, राजनैतिक, व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी एवं विभिन्न राष्ट्रावादी संगठनों के पदाधिकारीयों सहित संत समाज जिनमें प्रमुख रूप से महामण्डलेश्वर लक्ष्मणदासजी, महामण्डलेश्वर रामगोपालदासजी, डॉ. चैतन्यस्वरूपजी, महंत राजानंदजी, जैनाचार्य अरविंदमुनिजी मंच पर उपस्थित थे । कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारीगण, जिनमें प्रमुख रूप से विभाग संघचालक श्री लक्ष्मणराव नवाथे, श्रीमती कल्पना झोकरकर, वाल्मिकी समाज की खलिफा प्रेमचंद्र सारवान, सुमित सुरी, डॉ. संजय लोंडे, विजयसिंह परिहार, मंजीतसिंह भाटिया, केरल समाज के मुरलीधरजी, अयप्पा सोसायटी के राजू शाहजी आदि उपस्थित रहे ।

धरने के पश्चात् पूज्य संत अमृतरामजी महाराज ने राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं को देशहित में कार्य करने का संकल्प कराया। पूज्य संतो के नेतृत्व में अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी को महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया । कार्यक्रम का संचालन श्रीमती माला ठाकुर ने किया ।