राष्ट्रीय हित का प्रहरी है पांचजन्य : लोकेन्द्र सिंह

दिंनाक: 21 Mar 2017 23:27:32

बनखेड़ी में 'पांचजन्य पाठक सम्मलेन' का आयोजन

विसंकें (भोपाल ) l पत्रकारिता जगत में प्रारम्भ से ही कम्युनिस्टों का वर्चस्व होने के कारण राष्ट्रीय विचार की अनदेखी की गयी । एक पक्षीय और असंतुलित पत्रकारिता के कारण न केवल राष्ट्रवाद के प्रति घृणा का वातावरण बनाया गया, बल्कि राष्ट्र के मूल स्वाभाव को भी चोट पहुंचाई गयी। जबकि पांचजन्य ने सदैव प्रहरी की भूमिका में रहकर राष्ट्रीय हितों की रक्षा की है और राष्ट्रीय पत्रकारिता की परंपरा को बढ़ाया है। यह विचार लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता लोकेन्द्र सिंह ने 'पांचजन्य पाठक सम्मलेन' में व्यक्त किये। सम्मलेन का आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार विभाग की ओर से बीते रविवार को बनखेड़ी में किया गया । इस अवसर पर पिपरिया जिले के संघ के कार्यवाह जीवन दुबे भी उपस्थित थे । 

बनखेड़ी के पांचजन्य के पाठकों को संबोधित करते हुए लोकेन्द्र सिंह ने कहा कि पांचजन्य वास्तव में राष्ट्रीय विचारों का उद्घोषक है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने यह बात महसूस की थी कि कम्युनिस्टों के षड़यंत्र का मुकाबला करने के लिए एक समाचार पत्र की आवश्यकता है । उन्होंने 14 जनवरी, 1948 को मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर पांचजन्य की शुरुआत की । तब से लेकर आज तक अनेक विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए पांचजन्य राष्ट्रीय विषयों पर जन जागरण का कार्य कर रहा है । पांचजन्य की खींची लकीर पर आज दूसरे समाचार माध्यम भी आगे बढ़ रहे हैं । एक समय में जिस विचार का पक्ष मीडिया में नहीं आता था, आज कई मीडिया संस्थान उसका पक्ष रख रहे हैं । किसी घटना या मुद्दे पर अब एक पक्षीय विमर्श नहीं होता है । इस अवसर पर पांचजन्य के पाठकों ने भी पांचजन्य में प्रकाशित होने वाली सामग्री पर अपने सुझाव दिए । 

कम्युनिस्टों को देश का बोलना अखर रहा है : श्री सिंह ने कहा कि अब तक देश में कम्युनिस्टों का झूठ बिना रोके-टोके चलता था, लेकिन अब देश जाग गया है । समाज अब कम्युनिस्टों के झूठ और कुप्रचार पर सवाल उठाने लगा है । लोगों के सवालों से कम्युनिस्ट घबरा गए हैं । इसलिए वह मिलकर पूरी ताकत से चिल्ला रहे हैं कि देश में असहिष्णुता आ गयी है । देश में अभिव्यक्ति की आजादी को खतरा है। असल में उन्हें आम जन की अभिव्यक्ति पसंद नहीं आ रही । देश का इस तरह खुलकर बोलना कम्युनिस्टों को अखर रहा है । उन्होंने बताया कि उत्तर भारत में मारपीट की घटनाओं पर भी हंगामा खड़ा करने वाला तथाकथित बुद्धिजीवि वर्ग केरल में संघ के स्वयंसेवकों की नृशंस हत्याओं पर चुप्पी साध कर बैठ जाता है। मीडिया में भी इन घटनाओं पर अधिक नहीं दिखाया जाता है। लेकिन, देश अब तथाकथित बौद्धिक जगत के दोगले आचरण और इस तरह की घटनाओं पर आक्रोश व्यक्त कर रहा है ।

डाक कर्मियों का सम्मान : प्रचार विभाग की ओर से इस अवसर पर बनखेड़ी के डाककर्मियों का सम्मान किया गया। गांव-गांव में चिठ्ठी-पत्री पहुंचकर संवाद के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान देने के लिए उनका शाल एवं श्रीफल से सम्मान किया गया।