राष्ट्रीयता व मूल्यों के आधार पर हो पत्रकारिता-रामदत्त चक्रधर

दिंनाक: 15 May 2017 10:31:42

पत्रकारिता राष्ट्रीयता व मूल्यों के आधार पर होनी चाहिए। पत्रकारों की भूमिका सार्थक दिशा में हो। चुनौतियां बहुत हैं, पर उन्हीं चुनौतियों में से रास्ते भी निकलते हैं। समाज को दिशा देने के लिए लिखना और गति देना होगा। वर्तमान पत्रकार देवर्षि नारद की परंपरा को आगे बढ़ाएं। ये बातें मुख्य वक्ता व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (उत्तर-पूर्व) के क्षेत्र प्रचारक रामदत्त चक्रधर ने कहीं। वह शनिवार को आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयंती सह पत्रकार सम्मान समारोह-2017 के दौरान बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन विश्व संवाद केंद्र झारखंड की ओर से पलाश चिडिय़ाघर प्राधिकरण सभागार में किया गया था।मौके पर मेदिनीनगर के वरिष्ठ पत्रकार वासुदेव तिवारी को देवर्षि नारद पत्रकारिता सम्मान से नवाजा गया। उन्हें श्रीफल, 11 हजार रुपये, स्मृति चिह्न, मोमेंटो और शॉल देकर सम्मानित किया गया। रामदत्त चक्रधर ने कहा कि वर्तमान में पत्रकारिता सनसनी पैदा करनेवाला उपकरण बन गया है। पत्रकारिता का राजनीतिकरण हुआ है। घटना, दुष्कर्म आदि को प्रमुखता दी जाती है। पत्रकारिता नकारात्मक छवि प्रस्तुत करती दिखती है। यह उचित नहीं है। सनसनी पैदा करने से समाज व देश का लाभ नहीं होता है। इससे उबरना होगा और विचार कर अध्यात्म, संस्कृति व मिट्टी का स्थान कैसे बढ़े, इस पर सोचकर लिखना होगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता एक प्रकार का धर्म है। पत्रकारों को पत्रकर्मी से पत्रधर्मी की ओर बढऩा होगा। अच्छा पत्रकार वही होता है, जो मूल्यों के आधार पर चलता है। पत्रकारिता समाज के प्रबोधन का बड़ा माध्यम बन गया है। समाज के प्रबोधन की जिम्मेदारी पत्रकारों पर है। लोग अखबार पढ़कर चीजों को समझते हैं। सामाजिक सरोकारों के प्रयासों को सामने लाना चाहिए। नकारात्मक छवि को प्रस्तुत नहीं कर सामाजिक बातों को सामने लाना होगा। विश्व संवाद केंद्र ने देवर्षि नारद को सामने लाने की कोशिश की है। नारद राष्ट्र के प्रतीक हैं और पहले से प्रतिमान स्थापित किया है। वे पत्रकारिता के क्षेत्र में एक मानदंड हैं। वे लोक मंगल के देवता हैं। उन्होंने कहा कि देवर्षि नारद में समाज हित, राष्ट्रहित व लोकमंगल दिखता है। वर्तमान पत्रकार चिंतन-मनन करेंगे तो नारद में आदर्श दिखाई देगी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि शास्त्र और धर्म ग्रंथों में जिस सूचना तकनीक को दिखाया गया है, वह देवर्षि नारद की देन है। वर्तमान में वह पूर्व की सारी सूचना तकनीक फेल है। नारद की भूमिका को रचनात्मक दृष्टि से देखने और समझने की जरूरत है। पत्रकारिता बाजार का नहीं, बल्कि समाज का प्रोडक्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूचना तकनीक में प्रत्येक राष्ट्र में तुलना होती है। ट्रांसमीशन के माध्यम से संवाद हो रहे हैं। जिनके पास सूचनाएं हैं, वहीं ताकतवर है। प्रत्येक राष्ट्र में प्रतिस्पद्र्धा हो रही है। प्रत्येक दिन नई चीज निकल रही है। शास्त्रों में पूरे ब्रह्मïांड की बातें समाहित दिखती हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में जिस सूचना तकनीक को दिखाया गया है, वर्तमान समय में वह सभी फेल है।

कार्यकर्म के विशिष्ट अतिथि और वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री  बलवीर दत्त ने कहा कि आजादी के समय 1300 पत्र-पत्रिकाएं छपते थे। वर्तमान में इनकी संख्या बढ़कर एक लाख से अधिक हो गई है। पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा खंभा से पहला खंभा बन गया है। उन्होंने कहा कि देवर्षि नारद को पता रहता था कि समाज में क्या हो रहा है। मीडिया के प्रति जागृति बढ़ाने की आवश्यकता है।विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष रामअवतार नारसरिया ने कहा कि केंद्र सामाजिक जागरण व उत्थान का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति समाचार का संकलन, संपादन व प्रेषण करता है, वह पत्रकार है। देवर्षि नारद भी एक पत्रकार थे। वह सनातन धर्म की आन, बान व शान हैं। वर्तमान पीढ़ी देवर्षि नारद के आयामों और उद्देश्यों को देखकर पत्रकारिता करे तो पत्रकारिता पर छाया संकट समाप्त हो सकता है।

-कास्टिज्म, प्रोफेशनलिज्म से इंसानियत को खतरा : वासुदेव तिवारी  देवर्षि नारद सम्मान से नवाजे गए वरिष्ठ पत्रकार वासुदेव तिवारी ने कहा कि मानवता व इंसानियत को वाद से खतरा है। वाद कभी सुसंवाद नहीं पैदा करता। कास्टिज्म और प्रोफेशनलिज्म से इंसानियत को खतरा है। भारत व इंसानियत को वाद नहीं सुसंवाद चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जीवन से संरचना व ढांचा तैयार हो रहा है। पत्रकार अपने को कसौटी पर कसे। उन्होंने कहा कि भारत की प्रकृति व संस्कृति के खिलाफ जो कुछ हो रहा है, उसे कलम के माध्यम से उठाने की आवश्यकता है। पत्रकारों को अनुकूल कार्यों का संवद्र्धन करना चाहिए। 70 वर्षीय वासुदेव तिवारी मेदिनीनगर (डालटनगंज) के निवासी हैं। उन्होंने वर्ष 1974 से पत्रकारिता की शुरुआत थी। इस दौरान उन्होंने कई समाचार पत्रों में कार्य किया। उन्होंने पत्रकारिता के सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करते हुए कलम को मजबूत रखा।

संचालन शालिनी सचदेव व धन्यवाद ज्ञापन विश्व संवाद केंद्र के सह सचिव अरुण वर्णवाल ने किया। मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक ज्ञान प्रकाश जालान, क्षेत्र संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर, जैक अध्यक्ष अरविंद सिंह, हिन्दू  जागरण मंच के सुमन कुमार, आरएसएस के प्रांत सह प्रचार प्रमुख संजय कुमार आजाद, योगदा महाविद्यालय के डॉ. मनोज शेखर, पलामू जिला प्रचारक अजय कुमार, विश्व संवाद केंद्र की उपाध्यक्ष सुषमा सिन्हा, खाद्य सुरक्षा आयोग की सदस्य कुमारी रंजना चौधरी, मयूर मिश्रा सहित संघ परिवार, भाजपा व शहर के अन्य बुद्धिजीवी मौजूद थे।