"विद्याभारती"- यह नाम देश ही नहीं, दुनिया में प्रसिद्धि प्राप्त कर रहा है-भालचन्द्र रावले

दिंनाक: 26 May 2017 22:54:19

शिवपुरी, विद्याभारती मध्यभारत प्रांत योजना बैठक स्थानीय सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय शिवपुरी में सम्पन्न।

योजना बैठक के उद्घाटन भाषण में विद्याभारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री भालचन्द्र रावले ने कहा - विद्याभारती यह नाम देश ही नहीं, दुनिया में प्रसिद्धि प्राप्त कर रहा है, राष्ट्रीय कार्यालय में आकर दुनिया के अनेक लोग, शिक्षाविद विद्याभारती की कार्य पद्धति निकट से समझने में लगे हैं। हमारा कार्य नगर, ग्राम, वनवासी एवं सेवा क्षेत्र सभी में है, हम विविध आयामों को लेकर समाज निर्माण का कार्य कर रहे हैं। हम कहाँ जा रहे हैं, यह सोचने की आवश्यकता है, कहीं हमारी दिशा गलत तो नहीं हो गई है। प्रारम्भिक शिक्षा के प्राचीन केन्द्र तो अधिकतम गांवो में थे, अंग्रेजों ने सर्वेक्षण में पाया कि भारत में जितने शिक्षा केन्द्र थे, उतने तो सम्पूर्ण यूरोप में भी नहीं थे।

श्री भालचन्द्र रावले ने कहा कि देश में उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु गुरूकुल एवं विश्वविद्यालय होते थे। शिक्षा आनन्ददायी होनी चाहिए इस हेतु से हमारे ऋषि मुनि देश भर में प्रवास करते थे। अंग्रेजों ने प्राथमिक शिक्षा के तंत्र को नष्ट किया, यह बिना विचार का तंत्र आज भी चल रहा है, जो चिंता का विषय है। इससे शिक्षित व्यक्ति बेरोजगार हो गया, कुशल नागरिक निर्माण की प्रक्रिया समाप्त हो गई। शिक्षा विकास के लिए प्रतिबद्ध एवं संस्कृति के लिए समर्पित होनी चाहिए यह भाव लेकर विद्याभारती कार्य कर रही है। हम श्रेष्ठ दिशा में हैं, हमें सफलता जरूर मिलेगी।

इस अवसर पर प्रांत सह संघचालक श्री अशोक जी पाण्डेय ने सम्बोधित करते हुए कहा कि भारतीय लोग अपनी भारतीय संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। जिसके कारण लोग भावना शून्य होते जा रहे हैं। लोगों केे मन में भावना संजोये रखने के लिए उसे अपनी संस्कृति से जुड़ना अति आवश्यक है।

राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्री रामजी आरावकर ने प्राचार्यो को संदेश दिया कि हम प्रबंधक हों बल्कि, शैक्षणिक कार्यकर्ता बने। कार्यकर्ता के गुणों की व्याख्या करते हुए कहा कि कार्यकर्ता अहंकार रहित, सात्विक वृत्ति का हो हर समय उत्साह के साथ कार्य करने वाला हो। सभी को साथ लेकर समन्वय के साथ कार्य करने वाला ही सात्विक कार्यकर्ता कहलाता है।

श्री अरावकर ने कहा कि कार्यकर्ता को कार्य करते समय मार्गच्युत नहीं होना चाहिए। प्रयत्न समुचित दिशा में करना, हताश निराश नहीं होना, व्यवस्थापक निर्जीव वस्तु का प्रबंधन बहुत अच्छा कर सकता है, परन्तु मनुष्य निर्माण हेतु स्वयं का श्रेष्ठ आचरण चाहिए, विषय का ज्ञान चाहिए। प्रधानाचार्य को नियमित रूप से विषय पढ़ाना आना चाहिए। देव द्विज,गुरू एवं राजा इनका पूजन हमेशा स्वच्छता पवित्रता, अहिंसा एवं सत्य बोलकर करना चाहिए, स्वाध्याय, अभ्यास, मौन, भाव शुद्धि एवं आत्मनिग्रह का मानस बनायें। 

योजना बैठक का समापन करते हुए प्रांतीय संगठन मंत्री श्री हितानन्द शर्मा ने कहा  हम किसी भी लक्ष्य तक पहुचने से पहले उसकी वास्तविक परिस्थितियों से परिचित हो एवं गुणवत्तापूर्ण वातावरण तैयार करें।

श्री शर्मा ने कार्य के विकास एवं विस्तार एवं शैक्षिक उन्नयन, समाजिक सरोकार आदि की आगामी वर्षों की योजना की विस्तृत जानकारी सभी के बीच रखी। बैठक में मध्य भारत प्रांत के 16 जिलों के प्राचार्य, प्रधानाचार्य एवं पूर्णकालिक समन्वयक तथा प्रांतीय दायित्वान कार्यकर्ता सम्मिलित हुये।

योजना बैठक की शुरूआत दीप प्रज्ज्वलन कर प्रार्थना वंदना से हुई।

बैठक में विद्याभारती द्वारा संचालित नगरीय, ग्रामीण सरस्वती शिशु मंदिर, संस्कार केन्द्र, एकल विद्यालय, आवासीय विद्यालय, जनजाति प्रकल्प, शिशु वाटिका, खेलकूद, विज्ञान, बालिका शिक्षा, शारदा प्रकाशन, देवपुत्र एवं प्रशिक्षण विभाग का वृत्त एवं आगामी सत्र की योजना से सम्बन्धित वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किए गये।

योजना बैठक में श्री राधेश्याम गुप्ता प्रांतीय अध्यक्ष नगरीय शिक्षा, श्री वालाराम जी साहू प्रांतीय अध्यक्ष ग्रामीण शिक्षा विशेष रूप से उपस्थित थे।