संघ शिक्षा वर्ग—प्रथम का समापन, 30 जिलों के 285 स्वयंसेवकों ने भाग लिया

दिंनाक: 11 Jun 2017 13:06:24

नई दिल्ली , 10 जून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ , दिल्ली प्रान्त द्वारा सेवा धाम विद्यालय मंडोली में संघ शिक्षा वर्ग- प्रथम वर्ष ( प्रशिक्षण शिविर ) का आज 10 जून को समापन हुआ । बीस  दिनों तक चलने वाले संघ शिक्षा वर्ग के वर्गाधिकारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यमुना विहार विभाग के संघचालक श्री सुशील गुप्ता थे ।  

संघ शिक्षा वर्ग के समापन अवसर पर स्वयंसेवको व उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संगठन महामंत्री श्री दिनेश चंद्र ने कहा  हमारा देश 1200 वर्षो तक गुलाम रहा क्योंकि हिंदू समाज बंटा हुआ था।  आज दुनिया भर में पुन: ऐसे जेहादी ताकतें सर उठा रही हैं जो भारत को खंडित करना चाहती हैं।

हिन्दू युवाओं को इन आतंकी ताकतों के खिलाफ आवाज उठानी होगी और अपने शौर्य बल से इन ताकतों को जड़ से कुचलना होगा।  

उन्होंने कहा कि आतंकवाद  का कोई  पंथ यां जाति नहीं होती है।  हम सबको यह सुनिश्चित करना होगा कि जाति , वर्ग , संप्रदाय से ऊपर उठकर सम्पूर्ण भारतीय समाज को जाग्रत करें तभी भारतवर्ष में फिर से रामराज्य स्थापित होगा ।  

संघ शिक्षा वर्ग कार्यक्रम की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ( जेएनयू ) के वरिष्ठ प्रोफेसर श्री दरवेश गोपाल ने की। उन्होंने कहा कहा कि विश्व के सबसे बड़ा राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक देश के लिए पूर्णतया समर्पित हैं। वे अपना घर — बार छोड़ कर देश के लिए निस्वास्र्थ भाव से सब कुछ समर्पित कर देते हैं।   देश को उन्नति के मार्ग पर ले जाने में संघ की महत्वपूर्ण भमिका है।  

श्री दरवेश गोपाल ने जेएनयू में राष्ट्र विरोधी नारे लगने की घटना को शर्मनाक बताते हुए कहा कि संघ ने इस घटना के खिलाफ उचित कदम उठाते हुए पूरे देश को इस बारे में जागरूक किया। जिस प्रकार इस घटना के विरोध में पूरा देश एकजुट हुआ उससे स्पष्ट होता है कि संघ देश निर्माण में कितनी महत्वपूर्ण भमिका निभा रहा है।

संघ शिक्षा वर्ग - प्रथम वर्ष में दिल्ली प्रान्त के 30 जिलो के 285 स्वयंसेवको ने हिस्सा लिया । इस अवसर पर स्वयंसेवको द्वारा शारीरिक , घोष , सांघिक गीत व कविता — पाठ का प्रदर्शन किया गया। संघ शिक्षा वर्ग — प्रथम वर्ष का आयोजन प्रांत के स्तर पर किया जाता है। बीस दिनों के इस शिविर में कार्यकताओं के शारीरिक , बौद्धिक व आध्यात्मिक विकास पर बल दिया जाता है ताकि वे समाज में और बेहतर ढंग से काम कर सकें।