सहकारिता पिछड़े, गरीब, वंचित, बेरोजगार लोगों की आर्थिक स्वावलंबन का सशक्त माध्यम- विजय देवांगन

दिंनाक: 11 Jul 2017 07:42:09

10 जुलाई (वि.सं.के. लखनऊ)  भारत के समग्र विकास का श्रेष्ठतम मार्ग सहकारिता से होकर जायेगा क्योंकि सहकारिता पिछड़े, गरीब, वंचित, बेरोजगार लोगों के आर्थिक उत्थान व स्वावलंबन का सशक्त माध्यम है। भारत के इन वर्गों के विकास के बगैर अन्योदय समृध्द राष्ट्र की कल्पना साकार नही हो सकती। उक्त उद्गार सहकार भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री विजय देवांगन ने विश्व संवाद केंद्र में आयोजित प्रेस वार्ता में व्यक्त किये। उन्होंने समृद्ध भारत से सबल भारत के लिए सहकारिता के युगानुकूल नीति बनाकर वर्तमान परिवेशानुसार प्रक्रिया खड़ी कर जन सामान्य में विश्वास जमाकर सहकारिता को पुनश्च प्रतिष्ठापित करने की बात करते हुए कहा कि वर्तमान में उपभोक्तावादी पूंजीवाद के केंद्रीय प्रक्रिया के स्थान पर विकेन्द्रित व सर्वसमावेशी अर्थव्यवस्था के लिए सहकारिता ही एकमेव मार्ग है। यह भारतीय प्रकृति आधारित अर्थ प्रणाली है इसलिए इसकी विसंगतियों को दूर कर उत्तर प्रदेश के समग्र विकास का श्रेष्ठ साधन बनाने के लिए सहकार भारती युगानुकूल सहकारिता की रचना के लिए कार्य करेगी।             

ज्ञात हो कि सहकार भारती सहकारिता क्षेत्र की एकमेव स्वयंसेवी संस्था है भारत के 430 जिलों तथा 27 प्रदेशों में कार्यकारिणी बनाकर समग्र सहकारिता में गाइड, फिलॉस्फर एवं ट्रेनर की भूमिका के माध्यम से सहकारी आंदोलन में शुचिता व पारदर्शिता स्थापित करने तथा बिना संस्कार नही सहकार व बिना सहकार नही उद्धार के ध्येय वाक्य से कार्य करते हुए अलग- अलग प्रकार की सहकारिता में योग्य, तज्ञ एवं विशेषज्ञों की टीम बनाकर सहकारिता को स्थापित करने में जुटी है।                  

श्री देवांगन ने बताया कि यह वर्ष सहकार भारती के प्रेरणा पुरुष स्व. लक्ष्मणराव ईमानदार जी का जन्म शताब्दी वर्ष है। इस वर्ष सहकारी सभासदों के व्यापक जागरण व सहकारी संस्थाओं के संपर्क अभियान के साथ व्याख्यान माला, सहकार चेतना यात्रा, सहकारिता मेला जैसे अनेक कार्यक्रमों का आयोजन करेगी। उन्होंने इस वर्ष प्रदेश के सहकारिता चुनाव में प्रत्यक्ष पैनल घोषित कर स्वच्छ सहकारी लोगों को चुनाव में हर संभव सहयोग कर शुचिता व पारदर्शितायुक्त सहकारी लोगों के स्थापन के लिए चुनाव में प्रयत्न का संकल्प भी व्यक्त किया।    

इस अवसर पर अनियमितता व अविश्वास से युक्त सहकारिता की रक्षा करने तथा सहकारिता से आर्थिक एवं सामाजिक विकास को रेखांकित करने के लिए उत्तर प्रदेश शासन से निम्नांकित मांगे प्रस्तुत की :-      

 1. सहकारिता को जनसामान्य की आर्थिक उन्नति का  श्रेष्ठ माध्यम बनाने व भारतीय जीवन धारा के संस्कार को पुनश्च स्थापित कर खुशहाल उत्तर प्रदेश एवं समृध्द उत्तर प्रदेश बनाने हेतु 'राज्य सहकार परिषद' का गठन किया जाए।  ( राज्य सहकार परिषद सहकारिता के अलग-अलग आयामों में युगानुकूल नीति बनाकर वर्तमान सहकारिता की विसंगतियों को दूर करने व पारदर्शिता आहरित सहकारी वातावरण बनाने में नीति निर्धारण कर सरकार को सुझाव देगी व योजनाओं के अनुपालन में सहयोगी बनेगी।)      

2. उत्तर प्रदेश कृषि, डेयरी व पशुपालन, बुनकर तथा मत्स्य आधारित प्रदेश है। इन विषयों की सहकारिता संस्थाओं में 0% में ऋण उपलब्ध करवाने की (मध्यप्रदेश, छतीशगढ, राजस्थान जैसी) व्यवस्था बनाई जाए।         

3. प्रदेश में पूर्णकालिक प्रबंधक की नियुक्ति पूर्व की भांति की जाए क्योंकि वर्तमान व्यवस्था में अपर मुख्य सचिव अतिरिक्त कार्यभार के साथ निबंधक हैं जिसके कारण सहकारिता की और पर्याप्त ध्यान नही दे पाते। फलस्वरूप सहकारिता अनेक अनियमितताओं से घिरकर कमजोर हो रही है। पूर्णकालिक निबंधक होने से विभिन्न सहकारिता के आयामों में समन्वय एवं सहकारी लोगों की समस्याओं का समाधान करने में सुविधा होगी।       

 4. 97 संविधान संशोधन को अन्य प्रदेशों की भांति उत्तर प्रदेश में भी मूलतः लागू करना चाहिए साथ ही किए गए संशोधन रद्द किया जाना चाहिए ताकि सहकारिता की स्वायत्तता प्रभावित न हो।    5. सहकारी क्षेत्रों की बैंकों में भी नाबार्ड के अंतर्गत बैंक सेवा में कमी व अनियमितताओं आदि के समाधान के लिए सहकारी बैंकिंग लोकपाल अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों की भांति गठित किया जाए।       6. ठेका सिस्टम में पी. पी. टी. ( Private Public Partnership) व्यवस्था के स्थान पर सहकारी समितियों को (जो संबंधित व्यवसाय करती है) उनको प्राथमिकता दी जाए।  

7.  नवीन सहकारी संस्थाओं के रजिस्ट्रेशन के लंबित प्रस्तावों को पंजीकृत किया जाए।       

8. सहकारी समिति के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए संचालक मंडल को अधिकार प्रदान किया जाए।      

9. पिछले वर्षों में सहकारी क्षेत्र में हुई भर्तियों की समयबद्ध जांच एस. आई. बी. से करायी जाये क्योंकि सामान्य विषयों की जांच विभागीय/प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जा सकती है किंतु कपटपूर्ण/फोरेंसिक व कापियों से हुई छेड़छाड़ की जांच केवल अधिकृत जांच एजेंसी द्वारा की जा सकती है। इस संबंध में सहकार भारती उत्तर प्रदेश द्वारा साक्ष्यों के साथ शिकायत भी की गई है।