फिल्म इंदु सरकार पर कांग्रेस की असहिष्णुता अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला -मौन मार्च निकालकर किया विरोध प्रदर्शन

दिंनाक: 19 Jul 2017 22:48:05

भोपाल। इंदु सरकार फिल्म निर्देशक के समर्थन में आज अभिव्यक्ति की आजादी मंच के बैनर तले शहर के साहित्यकार, वकील, स्वयंसेवी संगठन, छात्र छात्राओं, कला प्रेमी एवं खिलाड़ियों ने मिलकर डीबी माॅल के समक्ष एप्रिन पहनकर हाथ में तख्तियां लेकर मौन मार्च निकालकर कांग्रेस के दमनकारी रवैये का विरोध किया। 

                साहित्यकार एवं प्रबुद्ध वर्ग ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि निदेशक एवं राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त श्री मधुर भंडारकर की फिल्म इंदु सरकार को रिलीज न होने देने को लेकर देश भर में कांग्रेस के नेता उग्र आंदोलन की धमकी दे रहे है, प्रदर्शन कर रहे है। यहां तक की निर्देशक को पत्रकार वार्ता भी नहीं करने दे रहे है। यह अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। कांग्रेस का व्यवहार आज भी असहिष्णु है जो समय समय पर साबित भी होता है।

                वरिष्ठ साहित्यकार एवं लेखक श्री रामेश्वर मिश्र पंकज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि आपातकाल को अनुशासन पर्व मानने वाली कांग्रेस फिल्म इंदु सरकार के रिलीज होने से क्यों तिलमिला रही है ? जबकि श्री भंडारकर यह भी कह चुके है कि यह बायोपिक फिल्म नहीं एक बैक ड्राप है, 1975-77 काल की पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म है। उन्होंने कहा कि दरअसल कांग्रेस स्वभाव से तानाशाही प्रवृत्ति की रही है। उसने न केवल देश पर आपातकाल थोपा बल्कि नेहरू गांधी परिवार के बारे में किसी भी प्रकार का कोई विश्लेषण, साहित्य अथवा राजनीतिक विचार को स्वीकार ही नहीं कर पाती।

                वरिष्ठ पत्रकार श्री सुरेश शर्मा ने कहा कि एक परिवार की वंदना और अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने का कांग्रेस का इतिहास पुराना है। संजय गांधी को एक रैली में गाने से इंकार करने पर किशोर कुमार के गानों को रेडिया और दूरदर्शन प्रसारण पर 1975 में प्रतिबंध लगाया था। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी और सहिष्णुता बनाम असहिष्णुता की दुहाई देने वाली कांग्रेस की कलई जनता के बीच में खुल चुकी है।

                मीसाबंदी श्री सुरेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि फिल्म इंदु सरकार आपातकाल की सच्चाई को उजागर करती है। असहिष्णुता, अभिव्यक्ति की आजादी का दमन, राजनीतिक विरोधियों पर अत्याचार, प्रताड़ना, प्रेस की आजादी पर हमला, सेंसरशिप से जैसे तमाम मुद्दों पर एक स्पष्ट और इतिहास की सच्चाई है आपातकाल। इस सच्चाई के बारे में वर्तमान पीढी और लोकतंत्र की भावी पीढ़ी को जानकारी मिलने से किसी भी कीमत पर नहीं रोका जाना चाहिए।

                मौन मार्च में मराठी अकादमी के निदेशक श्री अश्विनी खरे, वरिष्ठ साहित्यकार श्री पुरूषोत्तम सप्रे, मराठी साहित्य अकादमी के सचिव श्री सुधाकर भाले, श्री शिवकुमार नामदेव, श्री राजनारायण अग्निहोत्री, रंगकर्मी श्री स्मित मेहता, श्री सरफराज हुसैन, वरिष्ठ अधिवक्तागण श्री प्रमोद सक्सेना, श्री ओमशंकर श्रीवास्तव, श्री रवि गोयल, श्री अमित मजूमदार, श्रीमती सविता गिरी, श्री आनंद शर्मा, श्री तुलाराम, श्री आनंद तिवारी सहित बडी संख्या में महाविद्यालयीन छात्र छात्रा, कलाजगत से जुडे लोग, साहित्यकार, खिलाड़ी, स्वयंसेवी संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए।