महागठबंधन हुआ तार तार मोदी हुए और दमदार-प्रवीण दुबे

दिंनाक: 27 Jul 2017 19:51:36

2019 के लोकसभा चुनावों में गठबंधन के सहारे नरेंद्र मोदी को चुनोती देने का ख्वाब पाले बैठे राजनीतिक खेमों के लिए शायद आज से ज्यादा मनहूस दिन दूसरा न होगा। बिहार का महागठबंधन क्या टूटा वह हसीन सपना भी टूट गया। बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम ने लालू, ममता, माया, सोनिया जैसे नेताओं और देशतोड़क वामपंथी विचारधारा को जैसे 440 वोल्ट का झटका दे दिया है। यदि नीतीश पूर्व की तरह NDA के सहयोगी बनते हैं जैसा कि लगभग तय है तो मोदी के लिए 2019 का रास्ता और साफ हो जाएगा दूसरे शब्दों में कहा जाए तो अब मोदी और अधिक दमदार हो गए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2019 को अगर लक्ष्य माना जाए तो विपक्षी एकता का क्या होगा? जिस महागठबंधन को लेकर विपक्ष सबसे ज्यादा आशान्वित था, जिस महागठबंधन को लेकर मोदी को उलाहना दिया जाता रहा है वह महागठबंधन न केवल टूट चुका है बल्कि उस महागठबंधन का सबसे बड़ा और बेदाग़ चेहरा नीतीश के रूप में उससे अलग होकर मोदी की गोद में जाकर बैठ गया  हैं । ऐसी स्थिति मैं अब महागठबंधन के शेष स्वरूप की परिकल्पना पहले तो सम्भव नहीं लगती है और यदि जैसा कि कांग्रेस प्रयास करती दिख रही है वह शेष बचे कुनबे को जोड़ने में सक्रिय है,इसमें कामयाब भी हो जाती है तो NDA के सामने इस विपक्षी गठबंधन का चेहरा बेहद कमजोर, दागदार और डरावना सा नजर आएगा । इसके सहारे 2019 में मोदी को चुनोती देना कतई सम्भव नहीं होगा।

वैसे भी बिहार के ताजा राजनीतिक घटनाक्रम को इतर रखकर देश की राजनीतिक दशा और दिशा का आंकलन किया जाए तो सत्ताधारी दल में सर्वमान्य होने के साथ साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में एक ऐसा नेता सामने है जो देश की जनता के बीच भी न केवल पसंद किया जा रहा है बल्कि देश के बाहर भी उसने भारत का मान बढ़ाकर विश्व राजनीति में भी गहरी छाप छोड़ी है।इस वजह से भी वह देश की 125 करोड़ जनता का चहेता बन चुका है। मोदी सरकार के तमाम निर्णयों नोटबन्दी से लेकर तमाम कल्याणकारी योजनओं को लागू करने तक को फिर चाहे उसमें जनता को कुछ परेशानियों का सामना भी क्यों न करना पड़ा हो ,देशवासियों ने खूब सराहा है। इसका प्रमाण इस बात से मिल जाता है कि देश में हुए तमामं विधानसभा, नगरीय निकाय और लोकसभा उपचुनाव में लगातार भाजपा रिकार्ड मतों से जीतती रही है। यह मोदी की सबसे बड़ी सफलता ही कही जाएगी कि जो उत्तरप्रदेश जातिगत आधार पर चुनाव के लिए पहचाना जाता था वहां की जनता ने माया, मुलायम जैसे नेताओं को दरकिनार कर मोदी के विकास के नारे को स्वीकार करते हुए उन्हें रिकार्ड जीत प्रदान करी।

यह सारी बातें और बिहार का ताजा घटनाक्रम अब विपक्ष के लिए बेहद चिंता का विषय बन गया है। जो लालू महागठबंधन की डींगें हाँक कर विपक्ष को एक करने में प्रयासरत थे वे न केवल ओंधे मुंह धराशायी है बल्कि उनके अपने ही दल के तमाम नेता उनपर सार्वजनिक रूप से पुत्रमोह के कारण महागठबंधन को तोड़ने के लिए उन्हें उत्तरदायी ठहरा रहे है। अतः लालू के सामने उनके ही दल के टूटने उसमे बगावत होने का खतरा पैदा हो गया है। 

इस घटनाक्रम ने देश के राजनीतिक विशलेषको को यह सोचने के लिए भी मजबूर कर दिया है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में मज़बूत राष्ट्रीय राजनीतिक प्रतिद्वंदता का युग समाप्ति की ओर है। क्या आने वाले लोकसभा चुनाव तक सत्ताधारी भाजपा के अलावा देश में उसका मुकाबला करने के लिए कोई भी मजबूत राष्ट्रीय राजनीतिक दल नहीं रह जायेगा । जैसा की हम सब देख रहे हैं देश के सबसे पुराने और सबसे विस्तारित राजनीतिक दल कांग्रेस की हालत बेहद कमजोर हो चली है। वर्तमान  लोकसभा में उसके केवल 40 सांसद ही हैं ,भाजपा तो कांग्रेस मुक्त भारत का नारा भी बुलंद करती रही है, विभिन्न प्रदेशों में जिस प्रकार कांग्रेस का सूपड़ा साफ हुआ है उसे देखकर तो यही लगता है कि कांग्रेस अब अस्ताचल की ओर है,देश में दूसरा कोई राजनीतिक दल ऐसा नहीं जो भाजपा को सीधी चुनोती दे सके,थोड़ी बहुत आश बिहार में महागठबंधन को मिली सफलता से जगी थी वह भी ताजा घटनाक्रम के बाद टूट गई है। अब तो देश में सिर्फ मोदी मोदी औऱ मोदी ही का बोलबाला है।