हरियर छत्तीसगढ़ यहां हर बच्चे का अपना पौधा, सच्चे दोस्त की तरह बांटते हैं सुख-दु:ख

दिंनाक: 01 Aug 2017 19:21:55

भिलाई l समृद्ध धरा, स्वस्थ्य जीवन के लिए कई लोग प्रयास करते हैं, इस प्रयास से प्राकृतिक बदलाव का सकारात्मक प्रभाव नजर भी आता है। एक पौधा लगाकर की गई शुरूआत से जंगल तैयार करने तक की सच्चे वाकया सामने आते हैं। इस बीच कुछ ऐसे भी हैं जिनके प्रयासों से आपको रूबरू कराना जरूरी है। प्रकृति के इन रखवालों की कोशिशों को आप तक पहुंचाने के लिए यह श्रंखला शुरू की गई है।

प्रकृति हमें जिंदगी जीने का तरीका सिखाती है। खासकर पेड़-पौधे हमें जीवन से जोड़ देते हैं। एक पौधा जब पेड़ बनता है तो ना सिर्फ वह लोगों को छाया देता है बल्कि फूल और फल देकर भी परोपकार करता है। पक्षियों का आशियाना भी बन जाता है और इन सबसे ऊपर हमें जिंदगी को जीने के लिए प्राणवायु भी देता है। अंधाधुंध हो रही पेड़ों की कटाई के बाद कुछ लोगों ने इससे सबक भी लिया।

गार्डन में तब्दील हो चुका मुरूम का मैदान 
खासकर सरकारी स्कूलों में बच्चे पर्यावरण को लेकर गंभीर है। थोड़े ही सही पर पेड़-पौधों को सहेजकर स्कूल के बच्चे अपनी आने वाले जिंदगी में पेड़ों के महत्व को समझ चुके हैं। शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल जंजगिरी भी कुछ ऐसा ही है। तीन साल पहले जब यहां नई बिल्डिंग तैयार हुई तो मैदान में सिर्फ मुरूम ही नजर आता था। पर आज यहां एक कोना गार्डन में तब्दील हो चुका है। 

बच्चों से ऊंचे उनके हरियर दोस्त 
स्कूल में बच्चों ने पौधों को अपना दोस्त बनाया और दोस्ती ऐसी निभाई कि वह अब उनसे भी ऊंचे हो गए। स्कूल में गार्डन में अमलतास, नीम, गुलमोहर, गुडहल, कनेर के साथ-साथ गमलों में भी खूबसूरत पौधे मन मोह लेते हैं। प्राचार्य नीता भट्ट बताती हैं कि इन सब पौधों को सहजेने की जिम्मेदारी छात्र दीपेश बखूबी निभाता है। गार्डनिंग के शौकीन दीपेश को उन्होंने पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी दी है। अब दीपेश ने भी अपनी एक टीम बना ली है।
 
ऐसी बदली सोच 
यह टीम ना सिर्फ रिसेस या रविवार को बगीचे को संवारती है बल्कि पौधों की निगरानी भी करती है। प्राचार्य के अनुसार जब से बच्चे गार्डनिंग में जुड़े, उनकी सोच ही बदल गई। कई ऐसे बच्चे है जिन्होंने अपने घरों में भी पौधा लगाया है। खासकर अपने जन्मदिन पर पौधे लगाकर उसका नाम भी रखा है। अब वे उनसे बातें भी करते हैं। स्कूल में कई बार वे अपने टीचर को भी बताते हैं कि उनके पौधे कितने बड़े हुए।