नेहरु वंश ने किया देश की सुरक्षा से खिलवाड़-तरुण विजय

दिंनाक: 18 Aug 2017 11:49:36

जनस्मृति बहुत क्षीण होती है | जो कांग्रेसी आज कह रहें हैं कि देश उनकी वजह से आजाद हुआ , उन्हें बताना चाहिए कि उनकी वजह से देश बंटा | आजाद हुआ तो सुभाष चन्द्र बोस भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के कारण जो कभी कांग्रेस के लिए महत्पूर्ण नहीं रहे | 15 अगस्त, 1947  को खंडित एवं निर्दोष भारतियों के रक्त से सनत भारत अभी संभाला भी न था की सितम्बर में पकिस्तान ने हमला किया और फिर चीन ने अक्साईचिन हड़प लिया | नेहरु के कारण भारत ने 1.25 लाख वर्ग कि.मी. भूमि पाकिस्तान और चीन के हाथों जाने दी | मुझे आश्चर्य होता है कि 70  वर्ष बीत  गए लेकिन कभी नेहरु वंशीय कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर यह सवाल नहीं पूछा गया कि स्वतंत्र भारत की सवा लाख वर्ग कि.मी. जमीन जो चीन और पकिस्तान के हाथों गँवा दी गईउसके बारे में कांग्रेस पार्टी ने कितने प्रस्ताव पारित किये, कितने चुनाव घोषणापत्रों में उस भूमि को वापस लेने का संकल्प व्यक्त किया | यह तो केवल अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व कल में सीमा विवाद को चर्चा के माध्यम से हल करने के लिए आयोग बनाया गया | वरना कांग्रेस इसे तो भुला हुआ विषय’  मान बैठी थी |नेहरु के प्रधानमंत्रित्व काल में भारतीय जनसंघ के प्रथम अध्यक्ष डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का श्रीनगर में रहस्यमय परिस्तिथि में देहांत हुआ | इस पर लोकसभा में चर्चा करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने उसे नेहरु-शेख अब्दुल्ला दुरभिसंधि से हुई हत्याकहा था | नेहरु की चीन के साथ मायावी मित्रता का भारत को बहुत बड़ा खामियाजा भुगताना पड़ा |

1948 में भारत को सुरक्षा परिषद् की सदस्यता मिल रही थी, लेकिन कम्युनिस्ट चीन से मित्रता के लोभ में नेहरु ने न केवल राष्ट्रसंघ की सदस्यता हेतु उसका समर्थन किया, बल्कि सुरक्षा परिषद की सीट दिलवाई | 1962 में और तैयारी ऐसी कि जवानों के पास न तो सर्दी के जूते और न जुराबें, और न ही हथियार | जनरल कौल की अक्षमता और नेहरु की अव्यावहारिक नीति ने नेफा और लद्दाख में चीनी शिकंजे को कसने दिया और नेहरु ने हारे हुए मन से आल इण्डिया रेडियो से असम के तेजपुर, निवासियों, को विदाही दे दी थी | उस युद्ध में भारतीय सेना जीती, मेजर शैतान सिंह का शोर्य, राइफलमेन जसवंत सिंह रावत का पराक्रम रक्त से लिखी गौरव गाथा है | स्वतंत्र भारत का पहला भ्रष्टाचार कांड जीप घोटालानाम से कुख्यात है | पकिस्तान ने कश्मीर पर हमला कर दिया था , सेना के पास जीपें नहीं थीं | तुरंत किसी भी कीमत पर जीपें खरीदने का आदेश दिया गया | तब लन्दन में भारतीय उच्चायुक्त टी.टी. कृष्णमाचारी थे | विली मार्का जीपें खरीदीं गयीं | युद्ध समाप्त होने के 18  माह बाद जीपें आई | संसद उस कांड से हिल उठी थी | यह भी नेहरु के देन है | हिन्दू मन और हिन्दू जीवन पद्धति से इतनी घृणा कि नेहरूवाद वस्तुतः अहिन्दुवाद में  तब्दील हो गया | तत्कालीन मिडिया पर नेहरु का इतना एकाधिकारवादी शिकंजा था की नेहरु समर्थक विचार के अलावा कुछ छपता ही न था | यही कारण रहा कि रा.स्व.संघ. के तत्कालीन सरसंघचालक श्री म..गोलवलकर ने देश की विभिन्न भाषाओ में राष्ट्रीयता के विचारों को महत्व देने वाली पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन को आरम्भ करवाया

कांग्रेस ने कभी राष्ट्र द्वारा सम्मानित एवं जन-मन में लोकप्रिय कांग्रेसी नेताओं को अपनी नक्षत्र- धारा का अंग नहीं बनाया |   नेताजी सुभाष चन्द्र बोस , सरदार पटेल, पुरुषोत्तम दस टंडन , डॉ. सम्पूर्ण नन्द, मा . मुंशी, लाल बहादुर शास्त्री, जैसी अनेक विभूतियां केवल प्रखर राष्ट्रीयता के भाव के कारण जनप्रिय हुईं एवं उन्हें असीम जन-सम्मान मिला परन्तु नेहरु वंशीय कांग्रेसी नेतृतव ने उन्हें नकार दिया | उन्हें कभी भी नेहरु-गाँधी वंश के नेतृत्व  ने न केवल भारत की भूमि शत्रुओं के हाथों गंवाई, बल्कि भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप दिया | जीप घोटाला, मंधुडा घोटला , बीमा घोटाला, नागरवाला  कांड, ललित नारायण मिश्र हत्याकांड , कश्मीर समस्या का जन्म, धरा 370 लगाना , जम्मू-कश्मीर को दुसरे ध्वज की अनुमति, विदेशी धन और मन पर  पल कम्युनिस्टों से दोस्ती और देशभक्त रा.स्व.संघ. पर प्रतिबंध, आपातकाल लगाकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलना और लोकतंत्र के प्रहरियों पर अमानुषिक अत्याचार, बोफोर्स घोटाला , पनडुब्बी घोटाला, 2जी , 3जी, घोटाला .. यह सूची अनंत है | यह सब केवल और केवल नेहरु गाँधी वंशजो के सत्तासुख के लिए देशभर पर किए गए अघात हैं | इस देश की राजनीतिक काया भले ही सेक्युलर राजनीतिक हो, लेकिन भारत का मन शुद्ध, प्रभुद्ध हिन्दू है | कांग्रेस ने इस हिन्दू मन पर अघात किए | हिन्दुबल देश में हिन्दू धर्मावलंबियों के प्रति कांग्रेस के नेहरुवंशीय नेतृतव की वितृष्णा और दुष्ट-दृष्टी सदैव प्रभावी रही | इसी के विरुद्ध जनमानस में जिस राष्ट्रीयता के प्रबल प्रवाह का उद्द्वेग हुआ, उसने नेहरु कांग्रेस, को हाशिए पर ठिठकी पाल-कुश्ती में बदल दिया है | जो जहाँ जाती है वहीँ कांग्रेस का भविष्य सुखाती है | इसी के लिए एक शायर ने लिखा था तेरे लब ये हैं, इराके शामों मिस्त्रों रोमों ची (चीन) लेकिन अपने ही वतन के नाम से वाकिफ नहीं |