अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी जरूरी-सीताराम गुप्ता

दिंनाक: 19 Aug 2017 21:53:50

हम सब चाहते हैं कि हमारे बच्चे पढ़-लिखकर बहुत आगे निकल जायें | हमसे भी आगे निकल जायें | कुछ हमारी इच्छाओं व प्रेरणा के कारण और शेष अपने परिश्रम के बल पर बच्चे सचमुच अपनी पिछली पीढ़ी से आगे निकल जाते हैं | आगे निकलने का अर्थ है कि उनमे कई परिवर्तन भी आ जाते हैं | काम करने के तरीकों में ही नहीं, दिनचर्या व व्यवहार तक में परिवर्तन दिखलाई पड़ने लगता है | लेकिन कई बार उनका व्यवहार इस तरह बदल जाता है कि उसको सहन करना मुश्किल हो जाता है | बच्चों में अन्य लोगों के प्रति ही नहीं, माता-पिता के प्रति भी बेरुखी अथवा उपेक्षा का भाव आ जाता है | मेहमानों व अन्य आगंतुकों के प्रति तटस्थता का भाव उत्पन्न हो जाता है | कई बार वे पारिवारिक मूल्यों की उपेक्षा ही नहीं, विरोध तक करने लगते हैं | लापरवाही के साथ-साथ मनमानी करने की आदत बढ़ जाती है | जहाँ तक जीवन शैली व खानपान संबंधी पसंद-नापसंद की बात है वह ठीक है लेकिन अहंकार, शिष्टाचार का पालन न करना अथवा हर बात में दूसरों की उपेक्षा करना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं माना जा सकता है | अब इस स्थिति के लिए कौन उत्तरदायी है ? इसके लिए भी प्रायः माता-पिता ही दोषी होते हैं | वह अपने बच्चों की पढाई किए लिए अच्छी से अच्छी व्यवस्था करते हैं लेकिन उनके सामने उच्चादर्श नहीं रखते | आप यदि ये समझते हैं कि आपके पैसा खर्च करने से आपके बच्चों में शिक्षा का समावेश या लच्छेदार भाषणों से नैतिकता का विकास हो जायेगा तो आप बहुत गलत सोच रहे हैं | मेरे एक परिचित हैं | मैं जब भी उनके घर जाता था उनके बच्चे अलग-अलग कोनों में दीवारों की और मुंह किया पढ़ते मिलते थे | उनके लिए घर में किसी का आना या न आना बराबर था | उनके माता-पिता अपने बच्चों को कहीं किसी आयोजन में साथ लेकर नहीं जाते थे | माता-पिता में से भी प्रायः कोई एक ही कहीं जाता था और दूसरा घर पर रहकर बच्चों पर नजर रखता था ताकि वे ठीक से लगातार पढाई करते रहें पर और खेलने या किसी से बात करने न लग जायें l

क्या यह स्तिथि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण नहीं है ? ज्यादातर माता- पिता हर हल में अपने बच्चों को बड़ा आदमी ही बनाना चाहते हैं | वे यही सोचते हैं कि बड़ा होना ही अच्छा होना है जो सरासर गलत है |हाँ अच्छा होने पर हर व्यक्ति बड़ा ही होता है | हम अपने बच्चों को बहुत बड़ा आदमी बनाने के बजाए केवल अच्छा आदमी बनाने का प्रयास करें तो बहुत सारी समस्याओं का हल निकल सकता है |  लेकिन ये तभी संभव है जब हम माता-पिता स्वयं अपने अच्छे आचरण के द्वारा उन्हें अच्छा कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करें | इसका ये अर्थ कदापि नहीं है कि बच्चों को उच्च व्यावसायिक या अन्य प्रकार की शिक्षा देने से वंचित रखें  अपितु इसके साथ साथ उनमे अपने अच्छे आचरण से नैतिक गुणों का विकास कर उनका संतुलित व सर्वांगीण विकास करने में सहायक बनें |