आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 21 Aug 2017 21:12:59

जिस  क्षण  मैंने  यह  जान  लिया  कि  भगवान  हर एक  मानव शरीर  रुपी  मंदिर में  विराजमान  हैं , जिस  क्षण  मैं  हर  व्यक्ति  के  सामने  श्रद्धा  से  खड़ा  हो  गया  और उसके भीतर  भगवान  को  देखने  लगा – उसी  क्षण  मैं  बन्धनों  से  मुक्त   हूँ  , हर  वो  चीज  जो बांधती  है  नष्ट   हो  गयी , और मैं  स्वतंत्र  हूँ।