छात्र को उसके अस्तित्व का बोध करा दे, वही वास्तविक शिक्षक - डॉ. कृष्णगोपाल

दिंनाक: 25 Aug 2017 20:08:46

आगरा । शिक्षक वह है जो छात्र के जीवन को दृष्टि देता है और उसके भविष्य को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करता है। एक समय जब महान वैज्ञानिक सीवी रमन को भारत रत्न मिलने जा रहा था। उस समय जो तिथि निर्धारित थी , उस तिथि पर सीवी रमन ने भारत रत्न सम्मान लेने से मना कर दिया। क्योंकि उस दिन उनके छात्र की पीएचडी की मौखिक परीक्षा थी। अपने छात्र के भविष्य के लिए सीवी रमन ने भारत रत्न जैसे सम्मान का त्याग कर दिया। ऐसी विलक्षण गुरू परंपरा में हमारा जन्म हुआ है। शिक्षक और छात्र के आत्मीयत सम्बंधों पर गर्व का अनुभव कराते यह भावपूर्ण उदाहरण हमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल के ओजस्वी उद्बोधन से प्राप्त हुए। डॉ. कृष्णगोपाल ने कहा कि शिक्षक वही है जो छात्र को उसके अस्तित्व का बोध करा दे।  

बीते रविवार को आगरा कॉलेज के गंगाधर सभागार में भारतीय शिक्षण मंडल , ब्रजप्रांत द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता ‘ गुरू के गुरूत्व ’ विषय पर दिए अपने संबोधन में डॉ. कृष्णगोपाल ने कहा कि समय परिवर्तन के साथ युवाओं में नैतिकता का पतन होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से वैभव तो मिल रहा है लेकिन , शांति नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ने हमें समर्थ तो बनाया है लेकिन , इसमें कहीं न कहीं अनिवार्य चूक हो गई है।

डॉ. कृष्णगोपाल ने कहा कि एक बालक पर सबसे अधिक गुरूत्व उसकी मां का होता है और उसके बाद मात्र शिक्षक का। उन्होंने कहा कि आज बेटे बूढ़े मां-बाप की सेवा नहीं कर रहे और भौतिक स्पर्धा के लिए अपने संस्कारों को विस्मृत करने में लगे हैं। हालांकि किसी भी स्पर्धा में हम दुनिया में पीछे नहीं हैं। उन्होंने बताया कि आज जो शिक्षा मिल रही है , उससे जीवन सफल हो रहा है लेकिन सार्थक नहीं। आज भारत विश्व को नई दिशा दे रहा है। अंत में उन्होंने कहा कि हम सरकार और अपनी नौकरी, पेशे के लिए ही जवाबदेह नहीं हैं , बल्कि अपने कर्तव्य के प्रति भी जवाब देह हैं।

गुरू की प्रतिष्ठा को पुर्नस्थापित करेगा शिक्षण मंडल - मुकुल कानिटकर

अपने संबोधन में भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मुकुल जी कानिटकर ने कहा कि आज जो शिक्षा मिल रही है , वह मस्तिष्क आधारित है , हमें इसे ह्रदय आधारित बनाने के लिए निकले हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में सर्वाधिक शोध नींद की बीमारी पर किया जाता है। लेकिन भारत में लोग चैन की नींद सोते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के जगद्गुरू बनने का मार्ग प्रशस्त हो चला है और इसके लिए भारत माता नवनिर्माण के लिए निकल पड़ी है। मुकुल जी ने कहा कि जब भी युग परिवर्तन होता है तब और अधिक बलिदान भारत माता मांगती है। इसलिए यह समय घरों में बैठने का नहीं बल्कि गुरू-शिष्य परंपरा और भारतीय शिक्षण पद्धिति को बल प्रदान करने का है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उप्र के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा कि भारत की पंरपरा गुरूकुल की रही है , जिनमें राजा और रंक के बच्चे साथ-साथ समानभाव से पढ़ते थे। माता-पिता और गुरूजनों का सम्मान सर्वोच्च माना जाता था। उन्होंने कहा कि हमारी पंरपरा विषधर नाग को भी दूध पिलाने की रही है। सरकार छात्रों व शिक्षकों के लिए तनावमुक्त वातावरण का निर्माण कर रही है।

कार्यक्रम में शिक्षण मंडल की वार्षिक पत्रिका का विमोचन मंचासीन डॉ. कृष्णगोपाल , मुकुल कानिटकर , क्षेत्र संघचालक दर्शनलाल , राममनोहर लोहिया विवि के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित , शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अंगद सिंह , डॉ. एमपीएस ग्रुप के चेयरपर्सन एके सिंह , संगोष्ठी समन्वयक कर्नल विजय तोमर ने किया। संचालन शिक्षण मंडल के प्रांतीय मंत्री अमित रावत ने किया। कार्यक्रम में संघ के ब्रजप्रांत कार्यवाह राजपाल , विभाग कार्यवाह केशवदेव शर्मा , विशेष संपर्क प्रमुख सीए प्रमोद चौहान , हरीशंकर , एसएसीएसटी आयोग के अध्यक्ष प्रो. रामशंकर कठेरिया , सांसद चौ. बाबूलाल , उप्र सरकार के मंत्री एसपी सिंह बघेल , विधायक योगेंद्र उपाध्याय , जगनप्रसाद गर्ग , डॉ. धर्मेश , चौ. उदयभान सिंह , पक्षालिका सिंह , रामप्रताप सिंह , शिक्षण मंडल के अतुल पाराशर , पुष्कर दीक्षित , अभिषेक दीक्षित , वीरेंद्र सिंह , सोमेश शांडिल्य , मिताली चतुर्वेदी , जयगोविंद लवानिया , आदि उपस्थित रहे।