जनजाति विकास मंच की प्रान्तीय गोष्ठी भारत-भारती में सम्पन्न

दिंनाक: 27 Aug 2017 21:16:47

बैतूल- जनजाति समाज की मूलभूत समस्याओं पर चर्चा करने के लिए जनजाति विकास मंच मध्यभारत द्वारा भारत भारती में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया । जिसमें समाज के प्रबुद्धजनों ने जनजाति समाज की शिक्षा, रोजगार, वनाधिकार , भाषा, संस्कृति, साहित्य आदि विषयों पर विचार विमर्श किया । कार्यक्रम के प्रारम्भ अतिथि श्री हेमराज बारस्कर, बुधपाल सिंह, दुर्गादास उइके, श्याम धुर्वे ने भारत माता, श्री राम व महारानी दुर्गावती के चित्र पर पूजन व माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया ।

प्रथम सत्र में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री दुर्गादास उइके ने कहा कि जनजाति समाज को अपने गौरवपूर्ण इतिहास का स्मरण करना होगा । मुगलों और अंग्रेजों ने हमारे साम्राज्य और संस्कृति को नष्ट-भ्रष्ट किया । हमे अपने सही इतिहास को नई पीढ़ी को बताना होगा । आज अलगाववादी संगठन जनजाति समाज को शिक्षा और विकास से दूर कर उन्हें राष्ट्र की मुख्यधारा से काटने का षड्यंत्र कर रहे है । 

जनजाति विकास मंच के श्री श्याम धुर्वे ने कहा अगर किसी जाति का भाषा साहित्य इतिहास नहीं है तो वह समाज लुप्त हो जाएगा । जनजाति समाज को आगे बढ़ाने के लिए हमें उसे शिक्षित बनाना होगा । उन्होंने कहा जनजाति समाज अलगाववादी नहीं सामंजस्यवादी है । अंग्रेजों ने 1853 में रेलवे की पटरी बिछाने के लिए जंगल काटा एवं जनजाति समाज का कत्लेआम किया । जनजाति समाज ने ही जंगल और प्रकृति की रक्षा की है । वन अधिकार अधिनियम पंचायत अधिनियम आदि अधिकारों को लेकर समाज में वैचारिक क्रांति लानी होगी ।

 श्री बुधपाल सिंह विकास मंच के क्षेत्रीय कार्यकारणी सदस्य ने कहा कि अंग्रेजों से सबसे ज्यादा संघर्ष जनजातियों ने किया । अंग्रेज जनजाति समाज से मुकाबला नहीं कर पाया इसलिए उन्होंने मिशनरी के माध्यम से उनको मतांतरित कर हिंदू समाज से अलग करने का षड्यंत्र किया । श्री बुधपाल सिंह ने कहा कि बैतूल सतपुड़ा में स्वतंत्रता की अलख जगाने के लिए जनजाति क्रांतिकारियों का सबसे ज्यादा योगदान रहा । सरदार विष्णु सिंह, क्रांतिकारी गंजन सिंह कोरकू, कोवा गोंड़,  बिरसा गोंड़, रमको बाई, जंगू सिंह उइकेे आदि क्रांतिकारियों ने भारत छोड़ो आंदोलन एवं जंगल सत्याग्रह के माध्यम से अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा । फलस्वरुप आज हमें आज़ादी तो मिल गई लेकिन संविधान में प्रदत्त मूल अधिकारों को प्राप्त करने केलिए संगठित होकर संघर्ष करना होगा साथ ही हमें अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों का ही पालन करना होगा । श्री हेमराज बसरस्कर ने कहा समाज का हर व्यक्ति अपने बच्चों को शिक्षित करें । उन्होंने कहा कि जनजाति समाज ने भगवान श्रीराम से लेकर शिवाजी महाराणा प्रताप तथा स्वतंत्रता संग्राम में देश की रक्षा के लिए अपना योगदान दिया । श्री बारस्कर ने कहा कि अलगाववादी तत्व आज सोशल  मीडिया के माध्यम से जनजाति युवा पीढ़ी को भ्रमित कर रहे हैं । हमें हिंदू समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आर्थिक उन्नति करनी होगी तथा राष्ट्र की मुख्यधारा में सम्मिलित होना होगा । जनजाति शिक्षा के क्षेत्र प्रमुख श्री मोहन नागर ने अपने वक्तव्य  में कहा कि अंग्रेजों तथा साम्यवादी इतिहासकारों ने जनजाति समाज के शौर्य पूर्ण पहचान को भारतीय इतिहास विलोपित कर दिया । आज जनजाति समाज को हिंदू समाज से अलग करने के लिए मिशनरी व माओवादी षड्यंत्र कारी गतिविधियां दिन रात लगी हुई है । जनजाति समाज को आज झारखंड पैटर्न पर (आदिवासी का कोई धर्म नहीं होता) सारे देश में एक षड़यंत्र के तहत चलाया जा रहा है । 

विचार गोष्ठी में जनजाति विकास मंच की जिला कार्यकारणी एवं जिला अध्ययन टोली का गठन किया गया । विचार गोष्ठी में प्रमुख रूप से सर्व श्री हेमराज बारस्कर,  श्याम धुर्वे, नागोराव सिरसाम,  पूरन लाल परते, राजेश वरटी, अनिल उइके, श्याम ढाकरे, कपिल खंडेलवार,  संजीव कवड़े आदि गणमान्य व्यक्ति ने अपने विचार व्यक्त किये । 

कार्यक्रम का संचालन श्री पूरन लाल परते एवं आभार प्रदर्शन श्री नागोराव सिरसाम ने किया ।