आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 31 Aug 2017 18:58:49

प्रेम  विस्तार  है , स्वार्थ  संकुचन  है।  इसलिए  प्रेम  जीवन  का सिद्धांत  है। वह जो  प्रेम  करता  है  जीता  है , वह  जो  स्वार्थी  है मर  रहा  है।    इसलिए  प्रेम  के  लिए  प्रेम करो , क्योंकि  जीने  का यही  एक  मात्र  सिद्धांत  है , वैसे  ही  जैसे  कि  तुम  जीने  के  लिए सांस  लेते  हो - स्वामी विवेकानंद