आज की अभव्यक्ति

दिंनाक: 19 Sep 2017 23:14:35


कामनाएं समुद्र की भांति अतृप्त है, पूर्ति का प्रयास करने पर उनका कोलाहल और बढ़ता है- स्वामी विवेकानंद