पहाड़ारानी के दर्शन करने उमड़ा भक्तों का सैलाब

दिंनाक: 22 Sep 2017 20:52:49

चित्रकूट दि. 22 सितम्बर 2017 l जहां मोक्ष है वहां भोग नहीं और जहां भोग है वहां मोक्ष नहीं है किन्तुु पराम्बा की साधना से मानव को भोग एवं मोक्ष दोनों की शक्ति प्राप्त होती है। कुछ ऐसा ही भक्ति भाव दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के उद्यमिता विद्यापीठ परिसर की ग्रामोदय पहाड़ी पर विराजमान मां दुर्गा की प्रतिमा के दर्शन करने आये सैकड़ो बच्चों में नजर आया। दीनदयाल नवदुर्गा उत्सव के दूसरे दिन आरती में मध्यप्रदेश शासन के उर्जा मंत्री पारस जैन एवं दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के संगठन सचिव अनिल मिश्र आरती में सम्मिलित होकर मां की पूजन-अर्चन किये। लगभग 100 फीट की ऊंचाई पर विराजी मां दुर्गा के प्रतिदिन के बदलते स्वरूप के दर्शन करने चित्रकूट क्षेत्र से लगे आसपास के गांवों के लोगों के अलावा सीतापुर, रामघाट, कर्वी, कामतन, पीलीकोठी एवं स्थानीय विद्यालयों के बच्चे सैकडों की तादात में पहाड़ारानी के दर्शन करने उमड़ रहे है। उद्यमिता विद्यापीठ परिसर के पिछले भाग में बनी पहाड़ी पर दुर्गा उत्सव का आयोजन दीनदयाल नवदुर्गा समिति के लोगों द्वारा कई वर्षों से किया जा रहा है। जिसमें आयोजकों द्वारा पहाड़ी पर बनी पक्की पांडाल में मां दुर्गा की भव्य सजावट पूरे परिसर में रंगीली लाइटों की चादर सड़क तक बने भव्य मुख्य द्वारा तक बिछाई गयी है। रात्रि होने पर यहां का नजारा ऐतिहासिक दृश्य बनकर उभरने लगता है। देवी पांडाल से लेकर लगभग 200 मीटर तक गैलरी बनाकर भव्य सजावट की गई है। शाम होते ही ग्रामोदय पहाड़ी बिजली की रंगीन रोशनी से जगमगा उठती है प्रतिदिन आरती में चित्रकूट के गणमान्य लोगों के साथ प्रमुख संत-महंतों की सादर उपस्थिति दुर्गा उत्सव की रौनक को बढ़ा रही है।

इस उत्सव में सभी लोग ऊंच-नीच का भेद भुलाकर समरस भाव से इस आयोजन को चार चांद लगाने में लगे हुये है। उत्सव को पूरे विधि-विधान से करने के लिये कथा व्यास पं. रामविशाल शुक्ल सुबह-शाम पूजन-अर्चन करा रहे है। उन्होंने कहा कि कोई भी नवीन कार्य करने के लिये नवरात्रि को शुभ माना जाता है, जैसे ग्रह निर्माण, गृह प्रवेश, व्यापार, आदि करने के लिये शुभ योग माना जाता है। उन्होंने बताया कि जो भी माताएं, बहनें मैया जी की सच्चे मन से वृत रखती है तथा जो नित्य प्रतिदिन पूजा करता है, दुर्गा सप्तसती का पाठ करता है, मां दुर्गा चालीसा का पाठ करता है माता प्रसन्न होकर उसके सभी कार्य पूर्ण करती है।