25000 औषधीय पौधों का खजाना है भारत में, उपचार के लिए नयी खोज करें

दिंनाक: 23 Sep 2017 22:01:13

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रशासनिक भवन स्थित ब्राउन हाॅल में औषधीय पौधें एवं मानव स्वास्थ्य विषय पर एक स्वास्थ्य प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन आरोग्य भारती अवध प्रांत एवं के0जी0एम0यू0 के संयुक्त तत्वाधान में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डाॅ0 रकेश पण्डित (आरोग्य भारती राष्ट्रीय वन औषधीय प्रचार प्रसार आयाम प्रमुख) द्वारा पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से औषधीय पौधे के गुण, प्रयोग एवं उसके प्रबंधन के बारे मे बताया गया। उन्होने बताया की भारत क्षेत्रफल की दृष्टि से पूरे विश्व का 2.5 प्रतिशत भाग है किन्तु यहां विश्व के कुल फूलो की प्रजातियों में से 8 प्रतिशत प्रजातियां यहा पाई जाती है। भारत में 45000 प्रकार के पौधे पाये जाते हैं जिसमें 25000 पौधे औषधीय गुणों से युक्त है तथा 8000 औषधीय पौधों का विभिन्न प्रकार की दवाओं के उत्पादन में प्रयोग किया जाता है। डाॅ0 पण्डित ने विभिन्न प्रकर के औषधीय पौधें जैसे , अर्जुन, ब्राह्मि, शतवारी, तुलसी, गिलोय जैसे कुछ पौधोें के प्रयोग और उनके पहचान एवं प्रबंधन आदि के बारे मे भी बताया गया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डाॅ0 ए0के0 माथुर, पूर्व मुख्य वैज्ञानिक एवं सलाहकार सीमैप द्वारा अपने प्रबोधन में कहा गया कि आज का आधुनिक विज्ञान प्रकृति से जुड़कर लोगो को स्वस्थ रखने के लिए कार्य करने की ओर अग्रसर है। भारत जैसे देश में पौधों का धार्मीक दृष्टि से भी विशेष महत्व है और यह जरूरी है कि लोगो का विश्वास पौधे के उपर बना रहे और उसे वैज्ञानिक सहयोग भी मिले। आज दवाओं में इस्तेमाल होने वाले 80 प्रतिशत हर्बल कच्चे उत्पाद जंगलो से प्राप्त किया जाता है उनका अभी भी खेती नही की जा रही है। औषधीय पौधों की कृषी के लिए एक राष्ट्रीय योजना बनानी पड़ेगी।

कार्यक्रम के अध्यक्ष्या प्रो0 बी0एन0 सिंह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरोग्य भारती द्वारा आरोग्य भारती का परीचय और स्वस्थ जीवनचर्या के आयामों को बताया गया। कार्यक्रम के संयोजक प्रो0 विनोद जैन ने बताया कि विश्व स्वास्थ संगठन द्वारा भी स्वास्थ का परीभाषा देते हुये कहा गया है कि स्वास्थ्य का तात्पर्य, बौद्धिक, शारीरीक और अध्यात्मिक स्वास्थ्य से है।

कार्यक्र में उपस्थित अतिथियों और वक्ताओं को प्रो0 विभा सिंह द्वारा धन्यावद दिया गया।