संगठित और सक्रिय होकर संकट का सामना करना होगा : मोहनजी भागवत

दिंनाक: 30 Sep 2017 22:53:50

नागपूर, 30 सितंबर 2017 l देश में भाषा, प्रान्त, पंथ-संप्रदाय, समूहों की स्थानीय तथा समूहगत महत्वाकांशाओं को हवा देकर समाज में राष्ट्रविरोधी शक्तियाँ अराजकता निर्माण करने का प्रयास कर रही है, समाज को संगठित और सक्रिय होकर इस संकट का सामना करना होगा तब ही इस समस्या से सफलतापूर्वक निपटा जा सकेगा, ऐसा मत संरसंघचालक मोहनजी भागवत ने रा. स्व. संघ के विजयादशमी उत्सव के भाषण में व्यक्त किया। 

रेशीमबाग मैदान में हुए इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री गुरु रविदास साधुसंत सोसायटी जालंधर के प्रधान बाबा निर्मलदास का स्वास्थ बिगडने के कारण डॉक्टर ने उन्हें यात्रा करने की अनुमति नहीं दी इसलिए वे दिल्ली में ही रुक गये।  उन्होंने कार्यक्रम के लिये अपना संदेश भेजा। 

डॉ. भागवत ने आगे कहा कि, पिछले कुछ दिनों से बंगाल और केरल में वहाँ का प्रशासन इस स्तिथि से निर्माण हुए गंभीर राष्ट्रीय संकट के प्रति न केवल उदासीन है, अपने संकुचित राजनीतिक स्वार्थ के लिए अराजकता निर्माण करने वाली राष्ट्रविरोधी शक्तियों की सहायता कर रहा है। 

देश में पहले ही बांगलादेशी घुसपैठियों के कारण समस्या निर्माण हुई है. अब म्यांमार से खदेडे गये राहिंगिया भी आये है और हजारों आने की तैयारी  में है. ये रोहिंगियों की म्यांमार में अलगाववादी, हिंसक और अपराधी गतिविधियों में लिप्त गुटों से साँठगाँठ थी; इस कारण उन्हें वहाँ से खदेडा गया है। वे यहाँ आकर देश की सुरक्षा और एकता पर संकट बनेंगे यह ध्यान में रखकर ही उनके बारे में निर्णय लेना चाहिए, ऐसा उन्होंने कहा। 

देश की आर्थिक स्थिति के बारे में विचार व्यक्त करते हुए डॉ. मोहनजी ने कहा कि, जनधन योजना, मुद्रा, गॅस सबसिडी, कृषि बीमा यह लोककल्याणकारी और साहसी योजनाएँ है। लेकिन अभी भी एकात्म व समग्र दृष्टि से देश की विविधताओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर उद्योग, व्यापार, कृषि, पर्यावरण के अनुकूल तथा देश के बडे-मध्यम-छोटे उद्योगों, खुदरा व्यापारियों, कृषकों और खेतिहर मजदूरों - इन सबके हितों को ध्यान में रखनेवाली समन्वित नीति की आवश्यकता है। साथ ही स्वदेशी पर भी बल देना होगा। 

हमारी अर्थव्यवस्था में लधु, मध्यम, कुटीर उद्योग, खुदरा व्यापार, सहकार, कृषि और कृषिआधारित उद्योगों का भी बहुत महत्व है। विश्‍व व्यापार में होनेवाले उतार-चढाव तथा आर्थिक गिरावट के समय इन उद्योगों ने हमारी अर्थव्यवस्था टिकाए रखने में बडी भूमिका निभाई है; महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है, ऐसा मत उन्होंने व्यक्त किया।

नोटबंदी के निर्णय का सीधे उल्लेख किये बिना उन्होंने कहा कि, अर्थव्यवस्था के सुधार और स्वच्छता के उपायों में सर्वत्र थोडी-बहुत उथलपुथल, अस्थिरता तो अपेक्षित है लेकिन इसके परिणाम न्यूनतम् हो और दीर्घकाल में इससे आर्थिक व्यवस्था को बल मिले, इस बात का ध्यान रखना होगा। 

कृषि के संदर्भ में मोहनजी ने कहा कि, हमारे देश में कृषि का क्षेत्र बहुत बडा है। लेकिन आज किसान दु:खी है। बाढ, अकाल, आयात-निर्यात नीति, फसल अच्छी हुई तो भाव गिरना और कर्ज से वह परेशान है; निराश होने लगा है। किसानों की कर्जमाफी जैसे कदम शासन की संवेदना और सद्भावना के परिचायक है किंतु इस समस्या का स्थायी उपाय नहीं। किसानों को उनके उत्पादन का लाभप्रद मूल्य मिलने के लिए समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पादन खरीदने की व्यवस्था करनी होगी। अन्न, जल, जमीन को विषाक्त बनानेवाली, किसानों का खर्च बढानेवाली रासायनिक खेती धीरे-धीरे बंद करनी होगी। 

गौरक्षा और इससे संबंधित हिंसा पर मचे बवाल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि, ऐसे बहुचर्चित हिंसा और अत्याचार के मामलों में पाया गया हे की आरोपित कार्यकर्ता निर्दोष थे। पिछले कुछ दिनों में तो अहिंसक रिति से गौरक्षा करनेवाले गौरक्षकों की ही हत्या हुई है! लेकिन इसकी न कोई चर्चा हुई और न इसपर कोई कारवाई। वस्तुस्थिति न जानते हुए या उसकी अनदेखी कर गौरक्षा और गौरक्षकों को हिंसक घटनाओं के साथ जोडना तथा सांप्रदायिक दृष्टि से इसपर प्रश्‍नचिन्ह लगाना उचित नहीं है। अनेक मुस्लिम भी गौरक्षा, गौपालन और गौशालाओं का बहुत अच्छा संचालन करते है यह भी ध्यान में रखना होगा। गौरक्षा के विरोध में होने वाला कुत्सित प्रचार अकारण ही विभिन्न समुदायों में तनाव निर्माण करता है। 

शिक्षा के संदर्भ में मोहनजी ने कहा कि, विदेशी शासकों द्वारा शिक्षा व्यवस्था की रचना, पाठ्यक्रम और संचालन में लाए गए अनिष्ठकारी परिवर्तन बदलने होगे। नई शिक्षा नीति देश के सुदूर वनों, ग्रामों में बसने वाले बालकों और युवकों को भी शिक्षा का अवसर प्रदान करने वाली सस्ती और सुलभ होनी चाहिए।     

बाबा निर्मलदास 

बाबाजी का संदेश सरसंघचालक श्रीधर गाडगे ने पढ़ा। 

संदेश में उन्होंने लिखा है की देश में सब लोग मिलजुलकर रहे सब को रोटी, कपड़ा, मकान और आरोग्य की मूलभूत सुविधाये उपलब्ध हो यह आदर्श राज्य की कल्पना है।  भारत में यह स्थिति यथाशीघ्र निर्माण हो यह अपेक्षा।  देश उस दिशा मे प्रगति कर रहा है यह संतोष की बात है। 

 कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

१. मा. लालकृष्ण जी अडवाणी, भूतपूर्व उपप्रधानमंत्री २. मा. प्रतिभा अडवाणी, ३. मा. सेतुमाधावन जी, ४. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री मा. देवेंद्र फडणवीस,  १७. केंद्रीय मंत्री मा. नितीनजी गडकरी, १८. मा. चंद्रशेखर बावनकुळे, पालकमंत्री नागपुर १९. मा. बनवारीलाल पुरोहित, राज्यपाल तामिलनाडु २०. मा. महापौर नंदाताई जिचकार, नागपुर २१. मा. जिल्हा परिषद अध्यक्षा निशाताई सावरकर, २३. मा. अजय संचेती, राज्यसभा सांसद २४. मा. विकास महात्मे, राज्यसभा सदस्य २५. मा. शांताक्का जी, प्रमुख संचालिका, रा.से.समिति २६. मा. प्रमिलाताई मेढे, पूर्व प्रमुख संचालिका, रा.से.समिति २७. मा. स्वामिनी ब्रम्हप्रकाशानंद, आर्श्विदया गुरूकुलम २८. मा. आ. विकास कुंभारे, २९. मा. आ. कृष्णाजी खोपडे, ३०. मा. आ. सुधाकरराव देशमुख, ३१. मा. आ. सुधाकरराव कोहळे, ३२. मा. मनमोहनजी वैद्य, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख रा.स्व.संघ, ३३. मा. नरेंद्रजी ठाकुर, अ. भा. सह. प्रचार प्रमुख, रा.स्व.संघ l