मुस्लिम बहुल देश की मुद्रा पर हैं ’गणपति’

दिंनाक: 18 Jan 2018 17:22:01


इस मुस्लिम बहुल देश की करेंसी पर शान से अंकित हैं हिंदुओं के पुजनीय ’गणपति’ . यहां के चैराहों पर कृष्ण-अर्जुन संवाद, घटोत्कच, भीम,अर्जुन की प्रतिमाएं मिलती हैं. इंडोनेशिया को हम सभी एक मुस्लिम बहुल राष्ट्र के रूप में जानते हैं  लेकिन इससे जुडे कई ऐसे दिलचस्प पहलु हैं, जिन्हें हम नही जानते हैं. ऐसा ही एक पहलु यह भी है कि मुस्लिम बहुल राष्ट्र होने के बावजूद यहां की करेंसी पर हिन्दुओं के पूजनीय ’गणपति’ अंकित हैं. यहां के चैराहों पर आज भी कृष्ण-अर्जुन संवाद, घटोत्कछ, भीम, अर्जुन की प्रतिमाएं मिलती हैं. यह सुनने में भले ही कुछ अटपटा और पहली नजर में विश्वास न कर पाने वाला तथ्य हो लेकिन यह सत्य है  इंडोनेशिया के कई और ऐसे ही बेहद दिलचस्प पहलू हैं जो आपको हैरान कर देंगे. इंडोनेशिया दक्षिण  पुर्व एशिया और इंडोनेशिया में स्थित एक देश है. करीब 17508 द्वीपों वाले इस देश की जनसंख्या लगभग 23 करोड है. यह दुनिया का चौथा अधिक आबादी और दुनिया में दूसरी सबसे बडी बौद्ध आबादी वाला देश है. इसकी जमीनी सीमा पापुआ न्यु गिनी, पुर्वी तिमोर और मलेशिया के साथ मिलती है. जबकि अन्य पडोसी देशो में सिंगापुर, फिलींपिस, ऑस्ट्रेलिया और भारत का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र शामिल है. सुमात्रा और बाली, इंडोनेशिया के द्वीप है। इस पूरे क्षेत्र में सात शताब्दियों तक (छठी से 13 वीं ईसा) श्री विजय साम्राजय का एक क्षत्र राज्य रहा. उसका प्रभाव आन्ध्र के नागपटटीनम तक था. इंडोनेशिया का मूल नाम ही हिंद-एशिया से निकला है. इतना ही नहीं भारत के पुराणों में भी इसका जिक्र दीपांतर भारत अर्थात सागर पार भारत के रूप में किया गया है. यहां यह नाम आज भी काफी प्रचलित है. यहां की करेंसी पर गणति का चित्र अंकित होने के साथ-साथ आपको यह जानकर भी हैरत होगी की यहां के मुसलमानो के संस्कृत में नाम होते हैं.

इंडोनेशिया के प्रथम राष्ट्रपति सुकर्ण थे. उनकी बेटी का नाम मेघावती सुकर्णपुत्री था और यह नाम ओडिशा के महानायक बीजू पटनायक ने रखा था. यहां पर इन सब प्रतिमाओं का होना कोई अनूठी बात नहीं है. दरअसल, ईसा पुर्व चौथी शताब्दी से ही इंडोनेशिया द्वीप समूह, एक महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र रहा है. बुनी अथवा मुनि सभ्यता इंडोनेशिया की सबसे पुरानी सभ्यता है. चौथी शताब्दी ईसा पुर्व तक वे सभ्यता काफी उन्नति कर चुकी थी. ये हिंदु धर्म मानते थे और ऋषि परम्परा का अनुकरण करते थे. यहां के चैराहों पर आज भी कृष्ण-अर्जुन संवाद घटोत्कच, भीम, और अर्जुन की प्रतिमाएं मिलती है. यहां के राजवंश इस बात की तसदीक करते हैं. जिसमें श्री विजय राजवंश, शैलेन्द्र राजवंश, माताराम राजवंश, कैदिरि राजवंश, सिंह श्री, महापहित साम्राज्य का नाम ष्षामिल है. अगले दो हजार साल तक इंडोनेशिया एक हिन्दू और बौध्द देशो का समूह रहा.

श्री विजय साम्राज्य के दौरान चीन और भारत के साथ व्यापारिक संबंध थे. स्थानीय शासकों ने धीरे-धीरे  भारतीय सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक प्रारूप को अपनाया और कालांतर में हिन्दू और बोद्ध राज्यों का उत्कर्ष हुआ. इंडोनेशिया का इतिहास विदेशियों से प्रभावित रहा है, जो क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों की वजह से खिंचे चले आए और युरोपीय शक्तियां यहाँ के मसाला व्यापार में एकाधिकार को लेकर एक दूसरे से लडीं साढे तीन सौ साल के उपनिवेशवाद के बाद द्वितीय विश्व युध्द के बाद इस देश को स्वतंत्रता हासिल हुई.

साभार:- हिन्दू गर्जना