बांग्लादेश में कैसे बचेंगे हिन्दु ?? - तसलीमा नसरीन

दिंनाक: 18 Jan 2018 15:42:43


भोपाल(विसंके). फेसबुक पर एक रोती हुई वृद्ध महिला और आग में जलते उसके घर की फोटो देखकर लगा कि यह किसी रोहिंग्या के घर फुंकने का दृश्य है और असहाय रोहिंग्या के वृद्धा संपत्ति नष्ट हो जाने की वजह से रो रही है. जब फोटो के नीचे लिखे शब्दों पर निगाह गई तो वहां लिखा था, यह बांग्लादेश के रंगपुर की घटना है. करीब दस हजार मुसलमानों ने हिंदुओं पर हमला किया और लूटपाट करने के बाद उनके घरों में आग लगा दी. बताया गया कि टीटू राय नामक एक व्यक्ति ने फेसबुक पर इस्लाम का अपमान किया था, लेकिन क्या दस हजार मुसलमानों को एकत्र करना आसान काम है ? दुर्भाग्य से आजकल यह करना बहुत सरल है. सिर्फ अफवाह फैलाने की आवश्यकता होती है कि अमुक मोहल्ले या इलाके के हिंदू ने फेसबुक पर इस्लाम को लेकर गलत बातें लिखी हैं. बस फिर क्या है, उन्मादी मुसलमान हाथें में धारदार हथियार, लाठी, रॉड लेकर हिंदुओं पर टूट पडते हैं और उनके घरों को फूंक देते हैं. कोई भी यह जानना नहीं चाहतां कि इस्लाम का अपमान कैसे किया गया और जिस पर अपमान करने का आरोप लगा है उसकी फेसबुक आईडी असली है या नकली? बांग्लादेश के हिंदू जान-बुझकर यह जोखिम उठाने का साहस नहीं करेंगे. कहीं किसी मुसलमान ने ही तो हिन्दू के नाम से आइडी बनाकर इस्लाम का अपमान नहीं किया ?  रंगपुर गाँव में जिस तरह हमला किया गया उससे पता चलता है कि मुसलमानों की भीड ने पहले से ही हमले की योजना बना रखी थी. ऐसा ही कुछ समय पहले नासिर नगर में भी हुआ था. वहां रसराज नामक एक हिन्दू लडके की कथित फेसबुक पोस्ट को लेकर हिंदुओं के घरों का जला दिया गया था. कुछ दिनों बाद उसकी सच्चाई सामने आई. रसराज फेसबुक के बारे में जानता ही नहीं था. उसके नाम से फेसबुक आईडी किसी मुसलमान ने ही तैयार की थी. इतना ही नहीं हिंदुओं के घर कैसे लूटे-जलाएं और उन्हें आतंकित कर किस तरह बांग्लादेश से भगाया जाए, इसके लिए एक गिरोह बनाया गया था. ठीक इसी तरह रंगपुर में भी किया गया. टीटू राय सात वर्ष पहले गांव में रहता था, वह कर्ज के बोझ से परेशान हो कर गांव छोडकर दूर  किसी शहर में कपडे का धंधा कर जीवन काट रहा है. कथित फेसबुक एकाउंट पर टीटू राय ने अपना स्टेट्स भी नहीं दिया था. उसमें खुलना के मौलाना असदुल्लाह हमीदी का स्टेट्स था. असल में मौलाना हमीदी का उद्धेश्य सिलेट के एक हिन्दू युवक राकेश मंडल को फंसाना था. मौलाना हमीदी के स्टेट्स को एमडी टीटू नामक एक सख्श ने शेयर किया था. उस एमडी टीटू को ही रंगपुर के पगलापी इलाके का टीटू राय समझ कर उसके और साथ ही पडोसियों के घरों को फूंक दिया गया. नासिर नमर के रसराज के नाम पर भी इसी तरह से एक मुसलमान ने फेसबुक आइडी तैयार की थी. और फिर हिंदुओं के घरों  में लूट के बाद आग के हवाले कर दिया गया था. बांग्लादेश के मुसलमानों का एक वर्ग दिन-प्रतिदिन कट्ठर हिन्दू विरोधी होता जा रहा है. दरअसल वे गैर मुस्लिमों का भगाकर बांग्लादेश को एक मुस्लिम देश बनाने की कोशिश में है. बांग्लादेश में इसी वर्ष मार्च में हिंदुओं को फंसाने के लिए दाऊदकांदी के कुछ मुसलमान इतने उन्मादी हो गए थे कि उन्होंने एक मदरसे में जाकर कुरान पर गंदगी छींट दी थी. यह अच्छा हुआ कि हिंदुओं के घरों को आग लगाने से पहले ही यह खुलासा हो गया कि यह हरकत हबीबुर्र रहमान और उसके साथियों ने की थी. मुझे नहीं पता कि हबीबुर्र रहमान या अन्य को किसी तरह की सजा मिली या नहीं ? मैं हैरान हूँ कि ऐसे गुंडों के खिलाफ धार्मिक मुसलमानों ने गुस्से का कोई इजहार क्यों नहीं किया? जैसे बांग्लादेश में हिन्दू विरोधी मुसलमानों की संख्या बढ रही है. वैसे ही भारत में मुस्लिम विरोधी हिंदुओं की संख्या बढ रही है. वे भी मानते हैं वे भी मानते हैं कि मुसलमानों को भारत में रहने का अधिकार नहीं है. अंधकार और अशिक्षा ने इन लोगों को अंधा बना रखा है इसके बावजूद यह कहना होगा कि भारत और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के बीच काफी अंतर है. बांग्लादेष में हिंदुओं की संख्या में कमी आई है. भारत में अल्पसंख्यकों की संख्या बढी है. भारतीय कानून हिन्दू हो या फिर मुसलमान, सभी को समान आंखो से देखता है, परंतु बांग्लादेश में जब कट्टर मुसलमानो द्वारा हिंदुओं पर अत्याचार होता है तो सरकारी मदद और सरकारी सहानुभूति कुछ भी नहीं मिलती. वहां हिंदुओं की संख्या इतनी कम हो चुकी है कि उन्हें वोट बैंक के रूप में नहीं देखा जाता इस्लाम परस्त पार्टियों के लोग वोट डालने गए हिंदुओं को डरा-धमका कर रखते हैं बांग्लादेश में हिन्दू सिर्फ दूसरे दर्जे के नागरिक ही नहीं, बल्कि विलुप्त  होती बंगाली जाति हैं. कभी-कभी सोचती हूँ कि क्या बांग्लादेश सऊदी अरब जैसा हो जाएगा? एक ओर बांग्लादेश के मुसलमान म्यांमार सेना के हाथों सताए गए असहाय रोहिंग्या की मदद के लिए हाथ बढाते हैं और दूसरी ओर वे अपने ही देश में हिंदुओं के साथ म्यांमार सेना की तरह बर्ताव करते हैं. आखिर म्यामार की बर्बर सेना और बांग्लादेश के मुसलमानों में फर्क क्या रहा ? मुझे तो कोई फर्क नहीं दिख रहा. जो भी कट्टरवादी हिंदु, बौध्द, ईसाई, मुसलमान हैं वे सब एक हैं. वे समाज को पीछे धकेलना चाहते हैं. हिंसा और घृणा ऐसे लोगों का सहारा है. कट्टरवाद के खिलाफ सभी को खडा होना होगा. नहीं तो इतने वर्षों में तैयार किए हुए आजाद ख्याल गणतंत्र हिंसा और घृणा से हार जाएंगे. जिस किसी देश से जितनी बार बहुसंख्यकों के अत्याचार से डरकर अल्पसंख्यक भागते हैं उतनी बार उस देश का नुकसान होता है. हम बांग्लादेश को और कितनी बार नष्ट करेंगे ??

साभार:- म्हारा देश म्हारी माटी