हिंदुत्व का चोला स्वहितार्थ ढोंग या वास्तविक हृदय परिवर्तन...? - सुरेश राने

दिंनाक: 19 Jan 2018 18:06:49


भोपाल(विसंके). "गर्व से कहो-हम हिंदु हैं"- यह उद्घोष तीन दशक पहले विश्व हिन्दू परिषद ने पुनर्प्रचलित किया. सेक्युलर गेंग को इस से बहुत चिढ़ थी, पर आज यहां स्वयं के असली हिन्दू होने का दावा करने वालों की कतार लग गयी है. इसमें राहुल गांधी के साथ दिग्विजय सिंह, कपिल सिब्बल सिद्धारमैया, ममता बनर्जी जैसे अनेक नेता है जिनके लिए कल तक हिन्दू शब्द ही घोर साम्प्रदायिकता का प्रतीक था.
       अब विचारणीय है कि यह वास्तविक हृदय परिवर्तन है या भेड़िये शिकार की मंशा से भेड़ की खाल ओढ़ रहे हैं ?इनकी करनी पर गौर करें, तो इनकी कथनी से मेल नहीं खाती.
      1. श्री दिग्विजय सिंह का तो इतिहास मुस्लिम चरम पंथियों की ढाल बनने और हिन्दू संगठनों के विरुद्ध आग उगलने का रहा है. उनके इस व्यवहार से अंततः पूरे हिन्दू समाज को झुलसना पड़ता है. उनकी 26/11 के मुम्बई हमले के बाद की गतिविधियों को स्मरण करें. उनकी यह वाणी का वह शूल अभी भी पीड़ा देता है कि 26/11 मुम्बई आतंकी हमले के दिन उनकी ए.टी.एस.प्रमुख श्री हेमन्त करकरे से फोन पर बात हुई थी तब श्री करकरे ने हिन्दू कट्टरपंथियों द्वारा हमले की आशंका व्यक्त की थी. अब उस षड्यंत्र की परतें खुल रही है कि मुस्लिम आतंकवादी घटनाओं से उपज रहे रोष की काट के लिये हिन्दू आतंकवाद का हौआ किस प्रकार खड़ा किया गया था. श्री दिग्विजय सिंह किसी संवैधानिक पद पर नहीं थे, कांग्रेस के महा सचिव थे, ए.टी.एस. चीफ से क्यों उनकी बात होती थी ? 
      2. श्री राहुल गांधी को हिन्दू धर्म का कितना ज्ञान होगा ? उन्हे अन्य धर्मों के सिद्धांत, मान्यताओं की कितनी जानकारी होगी कि वह अमेरिकन राजदूत को कह सके कि हिन्दू संगठनों से अधिक खतरा है, अलकायदा, लश्कर जैसे संगठनों की तुलना में ! राहुल जी तो कब क्या कहेंगे या करेंगे और कब उनके प्रवक्ता उसकी सफाई में क्या कहेंगे, कोई भरोसा नहीं.
     3. कर्नाटक के आगामी चुनाव की विसंगति देखें .सिध्दारमैया “दयालु” हिन्दू बन रहे हैं, हिन्दू संगठनों को हड़का रहे हैं और मुस्लिम चरमपंथियों से चुनावी समझौते की तैयारी कर रहे हैं. 
     4. कपिल सिब्बल कहते हैं मैं भी हिन्दू हूँ, पर सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की सुनवाई लटकाने का प्रयास करते हैं.
     5. ममता बनर्जी बंगाल में ब्राह्मण का सम्मेलन कर गिफ्ट बांट रही हैं, वहीं बांग्लादेशी मुस्लिमों की बाढ़ से हिन्दू पलायन कर रहे हैं, मंदिर उजड़ रहे हैं.
       ये कुछ उदाहरण मात्र हैं. मुगलों के दरबार में भी बहुत तिलकधारी, जनेऊधारी हिन्दू थे, पर स्वाधीन हिन्दू राज्यों को मिटाने में वे आगे रहे. यह सुविधाजीवी हिन्दू हैं, स्वार्थ के लिये समाज को क्षति पहुंचा सकते हैं.
      इस्लाम का स्थाई लक्ष्य है- पूरी दुनिया को इस्लाम के झंडे के नीचे लाना. जाने-अनजाने कुछ अदूरदर्शी हिन्दू भी इसमें औजार बन रहे हैं. इनकी निजी आस्था समाज के काम नहीं आयेगी .