02 जनवरी / पुण्यतिथि - लाहौर के प्रथम प्रचारक-राजाभाऊ पातुरकर

दिंनाक: 02 Jan 2018 13:28:32


भोपाल(विसंके). संघ के प्रथम पीढ़ी के प्रचारकों में से एक श्री राजाभाऊ पातुरकर का जन्म 1915 में नागपुर में हुआ था. खेलों में अत्यधिक रूचि के कारण वे अपने साथी छात्रों में बहुत लोकप्रिय थे. उनका परिचय संघ शाखा और डॉ. हेडगेवार से होने के पश्चात डॉ. हेडगेवार जी ने उन्हें मेट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पढने तथा शाखा खोलने के लिए पंजाब की राजधानी लाहौर भेज दिया. वहां शाखा कार्य में अभी सफलता नहीं मिल रही थी. एक बार राजाभाऊ जी ने विद्यालय के हिन्दू छात्रों से कुछ मुस्लिम गुंडों की छेड़खानी के लिए अकेले ही उनकी खूब पिटाई की. परिणाम यह हुआ कि जिस शाखा पर वे अकेले खड़े रहते थे, उस पर संख्या बढ़ने लगी. संघ कार्य के लिए राजाभाऊ ने पंजाब में खूब प्रवास किया. वे पंजाबी भाषा भी अच्छी बोलने लगे. सैकड़ों परिवारों से उन्होंने घरेलु सम्बन्ध बना लिए. लाहौर में काम की नींव मजबूत करने के बाद श्री गुरूजी ने उन्हें नागपुर बुला लिया. 1948 में संघ पर प्रतिबन्ध के समय भूमिगत रह वहां सत्याग्रह का संचालन किया. प्रतिबंध समाप्ति के बाद 1952 से 57 तक वे मध्यभारत के प्रांत प्रचारक रहे. इसके बाद श्री बाला साहब देवरस की प्रेरणा से उन्होंने ‘भारती मंगल’ नामक संस्था बनाकर युवकों को देश के महापुरुषों के जीवन से परिचित कराने का काम प्रारंभ किया. सबसे पहले उन्होंने सिख गुरुओं की चित्र प्रदर्शनी बनायीं. प्रदर्शनी के साथ अपने प्रभावी भाषण से पंजाब के इतिहास और गुरुओं के बलिदान को वे सजीव कर देते थे. इस प्रदर्शनी की सर्वाधिक मांग गुरुद्वारों में ही होती थी. इसके बाद राजस्थान के गौरवपूर्ण इतिहास तथा छत्रपति शिवाजी के राष्ट्र जागरण कार्य को प्रदर्शंयों के माध्यम से देश के सम्मुख रखा प्रदर्शनी देखकर लोग उत्साहित हो जाते थे. 2 जनवरी 1988 को राजाभाऊ पातुरकर का नागपुर में ही देहांत हुआ.