गीता को सिलेबस में शामिल करने हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा यूजीसी व मानव संसाधन मंत्रालय से जवाब

दिंनाक: 25 Jan 2018 17:17:45


बिलासपुर (विसंके). छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में श्रीमद्भागवत गीता को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करने और कॉलेज में शोध का विषय बनाने की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन की बेंच में  सुनवाई हुइ्र्र इसके बाद डिवीजन बैंच ने नोटिस जारी किया है. साथ ही यूजीसी, मानव संसाधन और अखिल भारतीय विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर 3 सप्ताह में जवाब मांगा है। यह याचिका अखिल भारतीय मलियाली संघ के अध्यक्ष एसके मेनन, सामाजिक संगठन अक्षर ज्योति की अध्यक्ष किरण ठाकुर व वीर वीरांगना भोपाल की अध्यक्ष चंदप्रभा सिसौदिया ने अधिवक्ता काशीनाथ नंदे व सोमन के मेनन के जरिए लगाई है। याचिका में इस ग्रंथ को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करने के साथ ही कॉलेज में रिसर्च का विषय बनाने की भी मांग उठाई गई है। करीब 73 पेज की जनहित याचिका में भगवत गीता के संदेशों सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में गीता पर प्रकाशित लेखों को भी शामिल किया गया है। सोमवार को हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई करते हुए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय, यूजीसी और अखिल भारतीय विश्वविद्यालय संगठन को भी पक्षकार बनाने के निर्देश दिए। जिसकी आगामी सुनवाई 15 फरवरी को होगी ।


                       दरअसल, 3 अलग-अलग संगठनों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर श्रीमद्भागवत गीता को एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं बल्कि एक पूर्ण जीवन शास्त्र बताया है। उनका कहना है कि इसमें भगवान श्री कृष्ण ने जीवन से जुड़े उपदेश दिए हैं, तो इसमें परमात्मा की शक्ति के बारे में भी बताया गया है। संगठनों का ऐसा मानना है कि गीता को स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं करने से लोग इस ज्ञान से वंचित हो रहे हैं। लिहाजा, याचिका में इस ग्रंथ को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करने के बाद कॉलेज में शोध का विषय बनाने की मांग की गई है. इस केस की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी। इस दौरान यह भी बताया गया है कि अमेरिका के सेट्टो  विश्वविद्यालय ने श्रीमद्भागवत गीता को पाठ्यक्रम में शामिल कर अनिवार्य विषय कर दिया है। साथ ही कहा गया है कि जब विदेश में श्रीमद्भागवत गीता को अनिवार्य किया गया है तो भारत में भी इसे स्कूल और कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए।

                                 गीता में है जीवन का संदेश - याचिका में कहा गया है कि भगवद् गीता धार्मिक ग्रंथ ही नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण जीवन शास्त्र है। वर्तमान में लोग भौतिकता से परिपूर्ण जीवन जी रहे हैं, जिससे समाज में अशांति, अराजकता की स्थिति है। भगवत गीता की शिक्षा से लोग अहं की भावना छोड़कर अपने अंदर छिपे परमात्मा से परिचित हो सकेंगे। गीता में दिए गए उपदेशों और शिक्षा से लोगों का जीवन संवरेगा। वर्तमान में भगवत गीता को स्कूल व कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं करने से लोग बहुत महत्वपूर्ण ज्ञान से वंचित हो रहे हैं। याचिका के साथ भोपाल से प्रकाशित पत्रिकायन और द हिन्दू में भगवत गीता पर प्रकाशित लेखों का भी हवाला दिया गया है।

                                  अभी ये बनाए गए हैं पक्षकार -जनहित याचिका में राज्य शासन, माध्यमिक शिक्षा मंडल, उच्च-शिक्षा विभाग, स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, पं रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी, गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी, पं सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, डॉ सीवी रामन यूनिवर्सिटी, सरगुजा विश्वविद्यालय, ऑल इंडिया ऑफ मेडिकल साइंसेस को पक्षकार बनाया गया है ।