अफ्रीका में हजारों वर्ष पहले कैसे पहुंच गया शिवलिंग

दिंनाक: 30 Jan 2018 15:23:04


भोपाल(विसंके). भगवान शिव यानी देवों के देव महादेव को कई नामों से जाना जाता है. लेकिन पौराणिक कथाओं के अनुसार शिव के जन्म का कोई बड़ा प्रमाण नहीं है, वह स्वयंभू हैं तथा सारे संसार के रचयिता हैं. अफ्रीका या कालद्वीप एशिया के बाद विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप है. दक्षिण अफ्रीका के दक्षिणी छोर पर स्थित एक गणराज्य है. आधुनिक मानव की बसाहट दक्षिण अफ्रीका मे एक लाख साल पुरानी है. यूरोपीय लोगों के आगमन के दौरान क्षेत्र में रहने वाले बहुसंख्यक स्थानीय लोग आदिवासी थे. जो अफ्रीका के विभिन्न क्षेत्रों से हजार साल पहले आए थें. वैसे तो शिवजी के मंदिर विश्वभर में हैं,  चाहे अमेंरिका हो, ऑस्ट्रेलिया हो या फिर अफ्रीका. लेकिन हम आपको बता दें कि अफ्रीका में 6 हजार वर्ष पूर्व प्रचलित था हिन्दू धर्म. दक्षिण अफ्रीका में भी शिव की मूर्ति का पाया जाना इस बात का सबूत है कि शिव की महिमा और प्रताप पूरे विश्व भर में है.


एक गुफा में पुरातत्वविदों को महादेव का 6 हजार वर्ष पुराना शिवलिंग मिला, जिसे कठोर ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है. इस शिवलिंग को खोजने वाले पुरातत्वेत्ता हैरान हैं कि ये शिवलिंग यहां अभी तक सुरक्षित कैसे रह पाया है. हाल में ही दुनिया की सबसे ऊँची शिवशक्ति की प्रतिमा का अनावरण भी दक्षिण अफ्रीका में किया गया. बेनोनी शहर के एकटोनविले में यह प्रतिमा स्थापित की गई है. इसके अनावरण के बाद शिव की महिमा चारों और फैल गई है. दस कलाकारों ने 10 महीने की कड़ी मेहनत के बाद हस प्रतिमा को तैयार किया है. कलाकार भारत से गए थे. इस 20 मीटर ऊँची प्रतिमा को बनाने में 90 टन के करीब स्टील का इस्तेमाल हुआ है.

साभार:- शाश्वत हिन्दू गर्जना