गौ संवर्धन का बड़ा केंद्र : भारत भारती

दिंनाक: 01 Oct 2018 15:57:40


भोपाल(विसंके). बैतूल स्थित विद्या भारती का प्रकल्प केवल भारतीय पद्धति से शिक्षा का अनुकरणीय आदर्श (मॉडल) ही नहीं है, बल्कि वह गौ-संवर्धन का भी बड़ा केंद्र बन गया है। गाय मनुष्य का पोषण करने वाली है, इसलिए उसे ‘माँ’ के समान प्रतिष्ठा दी गयी है। भारतीय संस्कृति में गाय की महिमा वर्णित ही है, गाय के शरीर में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास बताया गया है। ‘गावो विश्वस्य मातरः’ अर्थात् ‘गाय अखिल विश्व की माता है।’

“श्रृड्ग मूले स्थितो ब्रह्मा, श्रृड्गमध्येतु केशवः।

सर्व देवाः स्थिता देहं, सर्व देवमयी हि गौः।।”

हम जानते हैं कि लम्बे समय से भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है और कृषि पूरी तरह ‘गाय’ पर केन्द्रित है। आज खेती में मशीनों के अधिक उपयोग के कारण भले ही गौवंश की अनदेखी की जा रही है, लेकिन आज भी खेती, किसान और गाँव ही नहीं बल्कि नगरीय समाज जीवन भी गाय पर आश्रित है। गाय की उपयोगिता को देखते हुए ही 2008 में भारत-भारती में ‘श्री गोपाल पाटीदार’ द्वारा गौशाला का शुभारम्भ किया गया। गौशाला की शुरुआत 22 गायों से हुई थी, आज यहाँ 155 से भी ज्यादा गाय और नंदी हैं। इस गौशाला में कई नस्ल की गाय और नंदी हैं जैसे काटीयावाडी, गिर, साहिवाल आदि। यह गाय 14-16 लीटर दूध प्रतिदिन देती हैं। यहाँ का दूध आवासीय विद्यालय में जाता है और छात्रों के सम्पूर्ण विकास में सहायक सिद्ध होता है। छात्र गौमाता की सेवा करते हैं। गौशाला में गौवंश की देखरेख बहुत ही उत्तम तरीके से की जाती है। चिकित्सक एवं सारी सुविधाएं यहाँ मौजूद हैं। गायों के नस्ल सुधार के लिए नंदी भी इस गौशाला में हैं।

स्थानीय लोगों को भी दिया जाता है गौपालन का प्रशिक्षण :

भारत-भारती की गौशाला गौ-पालन, गौ-संवर्धन और इसके प्रशिक्षण का भी केंद्र है। यहाँ आसपास के लोगों को गायों की देखरेख हेतु प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वह भी गौ-पालन के लिए प्रोत्साहित हों और दुग्ध उत्पादन कर अपनी आजीविका भी चला सकें।