संस्कार : "बचपन का आधार " बैतूल जिले में विद्या भारती द्वारा संचालित संस्कार केंद्र

दिंनाक: 10 Oct 2018 16:57:38


भोपाल(विसंके). भारत राष्ट्र के मध्य में स्थित है एक राज्य, मध्य प्रदेश, जिसने भारत की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है. मध्य प्रदेश में एक जिला है, “बैतूल” जिसे 20वीं सदी के प्रारंभ तक ‘बद्नुर’ के नाम से जाना जाता था.  1822 में इस जिले को “बैतूल” नाम दिया गया जो एक छोटे शहर “बैतूल बाज़ार” से लिया गया है. ब्रिटिश राज में “बैतूल बाज़ार”, बद्नुर का मुख्यालय था. बैतूल जिले ने अपनी कहानी खुद गढ़ी है. इस जिलें में कई गाँव है जहाँ सरकार एवं अनेक सामाजिक संस्थाएं सक्रिय है. इन्ही गाँव में एक गाँव है “बाचा”, जिसकी विकास की कहानी रोचक है एवं उल्लेखनीय भी. आज इसकी पहचान एक विकासशील गाँव की है. मुख्य सामाजिक संस्थानों में एक उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय नाम है “विद्या भारती” का यह नाम “पंडित दीनदयाल उपाध्याय” द्वारा दिया गया है.

इस संस्थान ने इस गाँव में अपनी कई सेवाएं दी है एवं इसकी उन्नति में भागीदारी निभाई है. किसी भी राष्ट्र के विकास में उसकी शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है. यह आवश्यक है कि हर तबका एवं तहसील शिक्षित हो तभी ही एक राष्ट्र को विकसित राष्ट्र का दर्जा मिलता है. भारत के विकास में भी सभी गाँव की भागीदारी आवश्यक है. इसी संदर्भ में एक भूमिका अदा कर रहा है “बाचा गाँव” यह गाँव, “खदारा पंचायत” के अंतर्गत आता है. इस गाँव की कुल जनसँख्या है 413, जिसमें 200 पुरुष एवं 213 महिलाएं हैं. इस गाँव के विकास में शिक्षा ने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है...यहाँ कुल 298 लोग साक्षर हैं जिनमे 103 महिला एवं 195 पुरुष हैं. शिक्षा देने की नीति में महत्वपूर्ण भूमिका, “भाऊराव देवरस सेवा न्यास म.प्र. भोपाल” द्वारा संचालित “विद्या भारती वनवासी शिक्षा मध्य भारत सरस्वती संस्कार केंद्र” निभा रहा है. इस संस्कार केंद्र की शुरुआत का मुख्य उद्देश्य, बच्चों में अच्छे संस्कार के बीज बोना है ताकि उनमे जागरूकता आये और वो अपने परिवार को भी जागरूक रख सकें और गाँव को उत्कृष्ट बनाये ताकि राष्ट्र सर्वोपरि बन सके.


“राजकुमार कवरे” नामक एक सज्जन पुरुष ने अपना मकान विद्या भारती को सौंप दिया ताकि संस्कार केंद्र चलाया जा सके...इस संस्कार केंद्र में कुल 25 बच्चे हैं जिनकी आयु 6-10 वर्ष है. यहाँ 1-6 कक्षा अर्थात् प्राथमिक शिक्षा दी जाती है. इस केंद्र का संचालन सुबह 7 से 10 बजे तक होता है. संस्कार केंद्र कि शुरुआत वंदना, प्रार्थना, योग एवं व्यायाम से की जाती है, उसके बाद नियमावली के अनुसार सभी विषयों जैसे गणित, अंग्रेजी, हिंदी, आदि, की शिक्षा दी जाती है. यह शिक्षा खेल-खेल एवं मजेदार तरीके से दी जाती है ताकि बच्चे हँसते-खेलते ज्ञान प्राप्त कर सकें...प्रत्येक बच्चे से 5 रूपये प्रति माह फीस के तौर पर ली जाती है ताकि उनके परिवार को ये ना लगे कि उनके बच्चे को मुफ्त की शिक्षा मिल रही है.


एक पूरा व्यवस्थित पाठ्यक्रम शिक्षकों एवं विद्या भारती के सहयोग से बनाया गया है जिसके अनुसार ही बच्चों को पढाया जाता है. स्थानीय लोग ही शिक्षक की भूमिका अदा करते है. वर्तमान में “देवसु कवरे” शिक्षक हैं जो 2009 से अपनी सेवा दे रहे हैं. इन्होने आर्ट्स से स्नातक किया है और फिलहाल बैतूल के निजी कॉलेज से परास्नातक कर रहे हैं. यहाँ बच्चों को त्योहारों का पारंपरिक महत्व समझाया जाता है साथ ही शस्त्र पूजन की भी शिक्षा दी जाती है...अनेक प्रकार के स्थानीय खेल जैसे जल-थल, धरती-आकाश-पाताल, दौर, आदि खेलें जाते है ताकि इनका शारीरिक विकास हो सके, साथ ही इन्हें कविता-पाठ, संगीत, आदि की भी शिक्षा दी जाती है जिनसे मनोरंजन के साथ उन्हें अनेक विधाएं सिखायी जा सके. यहाँ के बच्चों में सामान्य बच्चों से एक अलग अंतर देखने को मिलता है जो इन्हें इस संस्कार केंद्र से प्राप्त है. इन बच्चों की जीवनशैली सुव्यवस्थित एवं सुगठित है. इस प्रकार एक व्यवस्थित दिनचर्या का निर्माण किया गया है जिसका उद्देश्य बच्चो का संपूर्ण विकास है ताकि वो एक बेहतर राष्ट्र के निर्माण में अपनी पूर्णतः भागीदारी दे सकें.