गुजरात: यह हिंदी भाषियों पर नहीं देश के संघीय ढांचे पर हमला है..!-कृष्णमोहन झा

दिंनाक: 13 Oct 2018 15:27:13


गुजरात के साबरकाठा जिलें में स्थित एक कारखाने में कार्य करने वाले बिहारी मजदूर को एक 14 माह की अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इसके बाद राज्य के आठ जिलों में भड़की हिंसा ने यहां कार्यरत उत्तर भारतीयों, जिनमे विशेषकर बिहार एवं उत्तरप्रदेश से आए मजदूरों को इतना भयभीत कर दिया है कि वे हजारों की संख्या में अपने गृह राज्य जाने का मन बना चुके है। गुजरात की रुपाणी सरकार भले ही यह कहे कि ये मजदूर आगामी सप्ताहों में पड़ने वाले त्यौहारों  के कारण अपने घर जा रहे है परन्तु हकीकत कुछ और ही है। गुजरात के स्थायी निवासियों द्वारा उन्हें हिंसा का शिकार बनाए जाने की आशंका ने ही उन्हें राज्य से पलायन करने के लिए विवश किया है। 


अपुष्ट जानकारी के अनुसार गुजरात से पलायन करने वाले इन दोनों राज्यों के मजदूरों की संख्या 50 हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है। और अभी यह सिलसिला थमा नहीं है। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी एवं गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा की इन मजदूरों को पूरी सुरक्षा देने की अपील भी पलायन को रोकने में बेअसर साबित हो रही है। फिलहाल तो इस तरह के सारे आश्वासन निष्फल ही साबित हो रहे है और रोजाना फ़ैल रही अफवाहे भी स्थिति को बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। राज्य में चार दिनों में गैर गुजरातियों पर हमले की लगभग 50 वारदातें हो चुकी है ,वही इस मामले में लगभग 450 लोगो को गिरफ्तार भी किया जा चुका है परन्तु सरकार अभी भी यह दावा करने की स्थिति में नहीं है कि उसने स्थिति पर काबू पा लिया है। 

राज्य से पलायन लगातार जारी है। इसके कारण उन मिल मालिकों की चिंताए बढ़ गई है, जिनके कारखानों में ज्यादातर यूपी बिहार के मजदूर कार्यरत है , जो रोजी रोटी की तलाश में यहां आए हुए है। रोजगार मिलने के बाद तो वे वर्षों से यही रह रहे थे। अगर पलायन करने वाले मजदूर जल्द लौट कर वापस नहीं आए तो अधिकतर कारखानों के उत्पादन पर असर पडना शुरू हो जाएगा। दरअसल ये सभी मजदूर अब कुशल श्रमिक की श्रेणी में आ चुके है और इनके जल्द नहीं लौटने की स्थिति में मिल मालिकों के लिए ऐसे कुशल मजदूर ढूंढ़ना मुश्किल हो जाएगा। मिल मालिकों को यह चिंता भी सता रही है कि यदि बाहरी मजदूरों के मन में यह भय स्थायी रूप से भर गया तो राज्य के बाहर से मजदूरों का आना ही बंद ही हो जाएगा।  यह राज्य की ओधौगिक प्रगति को भी प्रभावित करेगा। 

उत्तर प्रदेश एवं बिहार से रोजगार की तलाश में गुजरात गए मजदूरों पर हमलों की घटनाओं ने दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी चिंतित कर दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी से राज्य में मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। गुजरात के मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन भी दिया है। उन्होंने राज्य के लोगो से अपील की है कि वे बाहरी राज्यों के लोगो के बारे में गलत विचार नहीं रखे। बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार का कहना एकदम है कि अपराधी को सजा अवश्य चाहिए लेकिन इसके लिए सभी बिहारियों के बारे में गलत धारणा रखना ठीक नहीं है। राज्य की पुलिस ने अबोध बालिका से दुष्कर्म के आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया है तो फिर हिंसा का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। यहां यह सवाल भी है कि यदि हिंसा जारी रही और गुजरात के कल कारखानों में हजारों की संख्या में वर्षों से कार्यरत बिहार एवं उत्तर प्रदेश के मजदूर पेशा लोग पलायन करने पर बजबूर हो गए तो इससे गुजरात का अपना ही नुकसान होगा। गुजरात चेंबर ऑफ़ कॉमर्स एन्ड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष जयमीन बसा भी मानते है कि इन घटनाओं से वायव्रेंट गुजरात पर भी असर पड़ सकता है।  

गुजरात में निश्चित रूप से इन बाहरी मजदूरों की सुरक्षा का जिम्मा गुजरात सरकार का है लेकिन बिहार एवं उत्तरप्रदेश की सरकारों को भी यह सोचना होगा कि आखिर उनके राज्यों में 70 सालों बाद भी औद्योगिक विकास क्यों नहीं हो पाया। यदि इन राज्यों में भी इस तरह का विकास हुआ होता तो इन मजदूरों को दूसरे राज्यों में जाकर शोषण का शिकार नहीं होना पड़ता। बेशक इसमें दो राय नहीं हो सकती कि एक संघात्मक गणराज्य में देश के नागरिकों को देश के किसी भी हिस्से में जाकर निवास करने, शिक्षा ग्रहण करने एवं रोजगार करने का अधिकार है ,लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि नागरिकों को यदि स्थानीय स्तर ही रोजगार के अवसर मिलेंगे तो वे बाहर का रुख शायद ही करेंगे। 

निश्चित रूप से रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने की विवशता का सीधा संबंध अशिक्षा ,गरीबी एवं उस राज्य के ढांचागत विकास के होने से है। अब इन बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है ताकि पलायन जैसी घटनाओं की जिम्मेदार परिस्थितियां जन्म ही न ले सके। गुजरात में गैर गुजरातियों पर हमले निश्चित रूप से शर्मनाक है। इस पर जड़ से काबू पाना रुपाणी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मासूम बच्ची के अपराधी को कठोरतम दंड मिलना चाहिए परन्तु इसके लिए सभी बाहरी लोगो को निशाना बनाने का अधिकार समाज के कुछ लोगो को कैसे  दिया जा सकता  है। गुजरात की घटना पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। यह निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे तो इस समस्या का हल खोज पाना मुश्किल ही है।