आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 13 Oct 2018 15:13:11


जाति अवसर को सीमित करती है. सीमित अवसर क्षमता को संकुचित करता है. संकुचित क्षमता अवसर को और भी सीमित कर देती है. जहाँ जाति का प्रचलन है, वहां अवसर और क्षमता हमेशा से सिकुड़ रहे कुछ लोगों के दायरे तक सीमित है.


  • डॉ. राम मनोहर लोहिया