व्यापक दृष्टि के साथ भारत को वैभवशाली, शक्तिशाली और समृद्धशाली बनाना है – दीपक विस्पुते जी

दिंनाक: 02 Oct 2018 19:27:23


भोपाल(विसंके). वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवंतु सुखिन: केवल कहने के लिए नहीं है। देश को खड़ा करना है तो हमें देश व समाज हित में काम करने के लिए बाहर निकलना पड़ेगा। जब लाखों लोग काम करने के लिए खड़े होंगे, तब दुनिया का नेतृत्व करने वाला भारत खड़ा होगा। यह बात  राष्ट्रोत्थान न्यास के तत्वावधान में राष्ट्रोत्थान न्यास भवन के तराणेकर सभागृह में आयोजित तीन दिवसीय ज्ञान प्रबोधनी व्याख्यानमाला के पहले दिन 'राष्ट्र-पुनर्निर्माण और हमें  विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मध्य क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक दीपक विस्पुते ने अपने उद्बोधन में कही। कार्यक्रम में मध्य भारत प्रांत के प्रांत संघचालक सतीश पिंपलीकर एवं राष्ट्रोत्थान न्यास के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र बांदिल विशेष रूप से उपस्थित थे।
श्री विस्पुते ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलम्बन सहित भारत को हर क्षेत्र में ठीक करने और लोगों का भाग्य बदलने का अवसर हमारे पास है। हमारे महापुरुषों के सपने को साकार करने का दयित्व भी हमारे कंधों पर है। हमें व्यापक दृष्टि से अपनी-अपनी रुचि के अनुसार अपना काम करके वैभवशाली, शक्तिशाली और समृद्धशाली भारत बनाना है। दुनिया का नेतृत्व करने वाले भारत का निर्माण हम सभी की सक्रिय भागीदारी से ही हो सकता है। श्री विस्पुते ने कहा कि हमारा भारत हमेशा से चिरंतन राष्ट्र रहा है। भारत राज्य आधारित कभी नहीं रहा। राष्ट्र को जोडऩे का सूत्र हमारे ऋषियों, मुनियों और पूर्वजों ने लोगों के बीच स्थापित किया। राष्ट्र के प्रति हमारा हमेशा से माता और पुत्र का भाव रहा है। हजारों हजार वर्षों से धरती के प्रति हमारा भाव यही रहा है कि ये हमारी माता है। स्वाभाविक रूप से अपनेपन का रिश्ता देश व धरती के साथ चिरंतन रूप से खड़ा रहा। हमारा भारत सांस्कृतिक भाव को लेकर चला, विचारों को आत्मसात किया, पूरे विश्व को अपना कुटुम्ब माना और मनुष्य जीवन के आदर्श मूल्य स्थापित किए। उन्होंने कहा कि भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में नए कीर्तिमान गढ़े हैं तो पर्यावरण के क्षेत्र में भी बहुत काम हुआ है। खाद्यान्न के क्षेत्र में भारत आज दुनिया को देने की स्थिति में खड़ा है। उन्होंने कहा कि आने वाले 20-22 वर्षों में भारत ही दुनिया का तरुण देश रहने वाला है, लेकिन आज भी शिक्षा, संस्कार, साक्षरता, स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में बहुत काम करने की जरूरत है।  

प्रारंभ में अतिथियों ने भारत माता के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राष्ट्रोत्थान न्यास के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र बांदिल ने शॉल व श्रीफल से अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. बांदिल ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी और न्यास की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अंत में न्यास के न्यासी बसंत कुंटे ने सभी का आभार व्यक्त किया और बताया कि व्याख्यानमाला के द्वितीय दिवस मंगलवार दो अक्टूबर को 'राष्ट्र विघातक शक्तियांÓ विषय पर प्रख्यात चिंतक जे. नंदकुमार, राष्ट्रीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह का व्याख्यान होगा। तृतीय व अंतिम दिवस बुधवार तीन अक्टूबर को 'परिवार संवद्र्धनÓ विषय पर विदुषी वक्ता साध्वी प्रज्ञा भारती, प्रतिष्ठित प्रवचनकार अपना व्याख्यान देंगी। कार्यक्रम का समापन वंदेमातरम गायन के साथ हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।