आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 22 Oct 2018 15:18:42


विश्व ऐसी स्थिति में नही है की हमारा कुछ मार्गदर्शन कर सके | वह तो स्वयं चौराहे पर है | ऐसी अवस्था में हम उससे किसी प्रकार का मार्गदर्शन नहीं पा सकते | हमें तो यह सोचना चाहिए की अब तक की विश्व की प्रगति देखते हुए कही ऐसी भी सम्भावना है या नहीं की हम उसकी प्रगति में अपना भी योगदान कर सकें ? विश्व की प्रगति का अध्ययन कर लेने के बाद क्या हम भी उन्हें कुछ दे सकते हैं  ? यह विचार हमें विश्व का अंग बनकर करना चाहिए ||

                                                 - पं. दीनदयाल उपाध्याय