शरद ऋतु में कैसा हो खान पान

दिंनाक: 24 Oct 2018 16:52:32


खीर का सेवन – शरद ऋतु में सूर्य का ताप बहुत अधिक होता है. ताप के कारण पित्त दोष पैदा होता है. ऐसे में पित्त से पैदा होने वाले रोग पैदा होते है. पित्त की विकृति में चावल तथा दूध से बनी खीर का सेवन किया जाता है. शरद पूर्णिमा पर इसलिए खीर का विशेष सेवन किया जाता है.


पित्त को शांत करने वाले खाद्य पदार्थो का सेवन – शरद ऋतु में पित्त शांत करने वाले पदार्थो का सेवन अति आवश्यक होता है.  शरद ऋतु में लाल चावल, नये चावल तथा गेहूं का सेवन करना चाहिए. कडवे द्रव्यों से सिद्ध किये गये घी के सेवन से लाभ मिलता है. प्रसिद्ध महर्षि चरक और महर्षि सुश्रुत ने कहा है की शरद ऋतु में मधुर, कडवे तथा कैसले पदार्थो का सेवन करना चिहिए. दूध, गन्ने के रस से बने खाद्य, शहद, चावल तथा मूंग आदि का सेवन लाभदायक होता है. कुछ विशेष जंगली जानवरों का मास भी गुणकारी होता है.

नम्बू तथा शहद के जल का सेवन – शरद ऋतु में चंद्रमा की किरणों में रखे गये भोजन को उत्तम माना गया है. सुबह के समय हल्के गर्म पानी में एक निम्बू का रस तथा शहद मिलाकर पीने से पित्त दोष का नाश होता है. शरद ऋतु में भोजन के बाद 1-2 केले खा सकते है. केला शरीर को पोषक तत्व तो देता ही है. साथ में पित्त दोष का दमन भी करता है. केला खाकर जल नहीं पीना चाहिए.

खुली छत पर ना सोयें – शरद ऋतु में दिन में तो गर्मी रहती है पर रात को ठण्ड होती है. ऐसे में रात को खुली छत पर नहीं सोना चाहिए. ओस पड़ने से सर्दी, जुकाम तथा खांसी हो सकती है.

क्या खाएं : शीत ऋतु में पाचन शक्ति प्रबल होती है, खाना आसानी से पच जाता
है। इस मौसम में सीज़नल चीज़ें खूब खाएं। गर्म दूध, घी, गुड़, मिश्री, चीनी, खीर, आंवला, नींबू, अनार, नारियल, मुनक्का, गोभी तथा शक्ति प्रदान करने वाले पदार्थों का सेवन करें।