जन-जाति वर्ग के छात्रों का शिक्षा मंदिर : प्रधुम्न धोटे स्मृति सदन

दिंनाक: 27 Oct 2018 18:05:24


भोपाल(विसंके). भारत का ह्रदय प्रदेश है मध्यप्रदेश। प्रदेश के जिले बैतूल में सतपुड़ा के ऊँचे-नीचे पहाड़ों के बीच से बहती मेघा नदी के किनारे बसा है एक छोटा-सा गाँव “धाबा”। यह गाँव जितना खूबसूरत है, उतने ही अच्छे हैं यहाँ रहने वाले लोग। इस गाँव में धोटे परिवार रहता है। परिवार के मुखिया और रसियन भाषा के जानकार डॉ. रमेश धोटे हैदराबाद में उच्च प्रशासनिक पद पर कार्यरत थे, लेकिन जैसे ही सेवानिवृत हुए तो गाँव के प्रेम ने उनको बुला लिया। एक दिन डॉ. धोटे शाम को टहलने निकले थे, उस दिन उन्होंने देखा कि कुछ बच्चे तेजी से दौड़ते हुए जा रहे हैं। उन्होंने बच्चों से भागने का कारण पूछा तब उन्हें पता चला कि ये बच्चे पास के गाँव से पढने के लिए धाबा आते हैं। अँधेरा होने से पहले गाँव वापस पहुंचना है, इसलिए भाग रहे हैं। यहीं से डॉ. धोटे को प्रेरणा मिली कि बच्चों की शिक्षा के लिए कुछ प्रबंध किया जाना चाहिए।



डॉ. धोटे ने धाबा गाँव में बच्चों के रुकने के लिए एक भवन का निर्माण कराया, लेकिन उतने से उनका उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा था। क्योंकि छात्रावास संचालन के लिए एक संचालक और अन्य व्यवस्थाएं भी लगती हैं, जिनके अभाव में यह भवन कुछ समय तक सूना ही पड़ा रहा। तब डॉ. धोटे की मुलाकात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता से हुई। उस मुलाकात में डॉ. धोटे अपनी योजना और समस्या उनके सामने रखी। उसके बाद डॉ. धोटे ने उस भवन को विद्या भारती को सौंप दिया। विद्या भारती ने 4 अप्रैल, 2011 में “प्रधुम्न धोटे स्मृति सदन” के नाम से जन-जाति छात्रावास की शुरुआत की। तब से वनवासी समाज के प्रतिभाव छात्रों के शैक्षिक और व्यक्तित्व विकास में यह छात्रावास अपना योगदान दे रहा है।


वर्तमान में छात्रावास का कार्यभार रामनरेश धोहरे संभाल रहे हैं। यहाँ कक्षा 6 से 12वीं तक के 42 छात्र रह रहे हैं। सूर्योदय से पहले से ही इन छात्रों की दिनचर्या प्रारम्भ हो जाती है। दिनचर्या में वंदना, प्रार्थना, स्कूल, खेलकूद और स्वाध्याय सम्मलित है। अधीक्षक रामनरेश धोहरे सुबह-शाम एक-एक घंटे इन छात्रों को कोचिंग देते हैं। श्री धोहरे बताते हैं कि शिक्षा के साथ-साथ छात्र कई प्रकार के खेल खेलते हैं, जैसे क्रिकेट, फुटबॉल, वॉलीबॉल, कब्बडी, खो-खो आदि जिससे इनका शारीरिक विकास होता है। यहाँ के छात्र खेती में भी काफी कुशल है, उन्होंने छात्रावास की जमीन पर सब्जी जैसे टमाटर, आलू, गोबी, भिन्डी की उपज की है। उनका कहना है कि इस छात्रावास के शुरू होने से इस क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जाग्रति आई है।